घर का चिराग: भाग 1- क्या बेटे और बेटी का फर्क समझ पाई नीता

केशव बाबू सठिया गए हैं. क्या सचमुच…वे तो अभी पचास के भी नहीं हुए, फिर भी उन की बीवी ऐसा क्यों कहती है कि वे सठिया गए हैं. उन्होंने तो ऐसा कोई कार्य नहीं किया. बस, बीवी की बात का हलका सा विरोध किया था. सच तो यह है कि वे जीवनभर अपनी पत्नी का विरोध नहीं कर पाए. उस के खिलाफ कभी कुछ कह नहीं पाए और बीवी अपनी मनमानी करती रही. दरअसल, उन की बीवी नीता उन पत्नियों में से थी जो धार्मिक होती हैं. रातदिन पूजापाठ में व्यस्त रहती हैं, पति को सबकुछ मानती हैं, परंतु पति का कहना कभी नहीं मानतीं. ऐसी पत्नियां मनमाने ढंग से अपने पतियों से हर काम करवा लेती हैं.

केशव बाबू उन व्यक्तियों में से थे जो हर बात को सरल और सहज तरीके से लेते हैं. किसी बात का पुरजोर तरीके से विरोध नहीं कर पाते. कई बार वे दूसरों के जोर देने पर गलत बात को भी सही मान लेते हैं. वे बावजह और बेवजह दोनों परिस्थितियों में झगड़ों से बचते रहते हैं. उन की इसी कमजोरी का फायदा उठा कर नीता हमेशा उन के ऊपर हावी रहती है. आज भी कोई बहुत बड़ी बात नहीं हुई थी. बेटे विप्लव की पढ़ाई और भविष्य को ले कर पतिपत्नी के बीच चर्चा हो रही थी. उन का बेटा एमसीए कर के घर में बैठा हुआ था. 3 साल हो गए थे. अभी तक उस का कहीं प्लेसमैंट नहीं हुआ था. दरअसल, केशव बाबू उस के एमसीए करने के पक्ष में नहीं थे. वह पढ़ाई में बहुत साधारण था. बीसीए के लिए भी कई लाख रुपए दे कर मैनेजमैंट कोटे से उस का ऐडमिशन करवाया था. इस के पक्ष में भी वे नहीं थे क्योंकि वे जानते थे कि बीसीए करने के बाद भी वह अच्छी पोजीशन नहीं ला पाएगा. इस स्थिति में उस का कैंपस सेलैक्शन असंभव था और हुआ भी यही, बीसीए में उस के बहुत कम मार्क्स आए थे. फिर भी जिद कर के उस ने एमसीए में ऐडमिशन ले लिया था. इस पूरे मामले में मांबेटे एकसाथ थे और केशव बाबू अकेले.

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केशव बाबू ने केवल इतना कहा था, ‘‘इतनी कम मैरिट में किसी अच्छी कंपनी में तुम्हारे लिए नौकरी मिलना असंभव है. क्यों न तुम कंपीटिशन की तैयारी करो और छोटीमोटी नौकरी कर लो.’’इसी बात पर नीता भड़क गई थी. तीखे स्वर में बोली थी, ‘‘आप तो सठिया गए हैं. कैसी बेतुकी बात कर रहे हैं. एमसीए करने के बाद बेटा क्या छोटीमोटी सरकारी नौकरी करेगा? आप की अभी 10 साल की नौकरी बाकी है. बेटा कोई बूढ़ा नहीं हुआ जा रहा है और न हम भूखों मर रहे हैं. न हो तो बेटे को कोई और कोर्स करवा देते हैं. ज्यादा डिगरियां होंगी तो नौकरी मिलने में आसानी होगी.’’

केशव बाबू ने एक लाचार नजर नीता पर डाली और फिर बेटे की तरफ देखा. वह एक कोने में चुपचाप खड़ा इस तरह उन दोनों की बातें सुन रहा था, जैसे उस से संबंधित कोई बात नहीं हो रही थी. परंतु जब उन्होंने ध्यान से देखा तो बेटे के चेहरे पर एक कुटिल मुसकान विराजमान थी, जैसे कह रहा था, ‘आप लोग मेरे लिए लड़ते रहिए. पैसा बरबाद करते रहिए, परंतु करूंगा मैं वही जो मेरा मन करेगा.’ केशव बाबू को अपने बेटे की इस कुटिलता पर बड़ा गुस्सा आया. परंतु वे अच्छी तरह जानते थे कि उन के गुस्से की आग पर नीता के तर्कहीन पानी के छींटे पड़ते ही वे बर्फ की तरह ठंडे पड़ जाएंगे. तब उन्हें प्यार की गरमी देने वाला कोई नहीं होगा. वे रातभर इस तरह करवटें बदलते रहेंगे जैसे किसी ने उन के बिस्तर पर तपती रेत के साथसाथ कांटे भी बिछा दिए हों.हारे हुए जुआरी की तरह अंतिम चाल चलते हुए केशव बाबू ने कहा, ‘‘नौकरी बुद्धि से मिलती है, बहुत सी डिगरियों से नहीं और उस के लिए एक ही डिगरी काफी होती है. सोच लो, हमारी एक बेटी भी है. वह इस से ज्यादा बुद्धिमान और पढ़ने में तेज है. अपने जीवन की सारी कमाई बुढ़ापे तक इस की पढ़ाई पर खर्च करते रहेंगे, तो बेटी के लिए क्या बचेगा? उस की शादी के लिए भी बचत करनी है.’’

केशव बाबू की इतनी सरल और सत्य बात भी नीता को नागवार गुजरी और वह फिर से भड़क उठी, ‘‘आप को समझाने से कोई फायदा नहीं. आप सचमुच सठिया गए हैं. बेटी की शादी में बहुत सारा दहेज दे कर क्या करेंगे? सादी सी शादी कर देंगे.’’

‘‘परंतु क्या उस की पढ़ाई पर खर्चा नहीं होगा?’’

नीता की बुद्धि बहुत ओछी थी, ‘‘उस को बहुत ज्यादा पढ़ालिखा कर अपना पैसा क्यों बरबाद करें. वह कौन सा हमारे घर में बैठी रहेगी और हमारे बुढ़ापे का सहारा बनेगी? लड़का हमारा वंश आगे बढ़ा कर हमारा नाम रोशन करेगा.’’ अपनी पत्नी की ओछी सोच पर केशव बाबू फिर तरस खा कर रह गए. इस के सिवा और कर भी क्या सकते थे. उन के सीधे स्वभाव का फायदा उठा कर नीता हमेशा उन पर हावी होती रही थी. अगर वे कभी अपनी आवाज ऊंची करते, तो उस की आवाज उन से भी ऊंची हो जाती. वह चीखनाचिल्लाना शुरू कर देती. इसी बात से वे डरते थे कि महल्ले वाले कहीं यह न समझ लें कि वे पत्नी के साथ मारपीट जैसा घटिया कृत्य करते हैं. सो, वे चुप हो जाते, फिर भी नीता का बड़बड़ाना जारी रहता. तब वे उठ कर बाहर चले जाते, सड़क पर टहलते या पार्क में जा कर बैठ जाते.केशव बाबू को बेटी की तरफ से कोई चिंता नहीं थी. वह पढ़ने में तेज थी. चिंता थी तो बस बेटे को ले कर, वह पढ़ने में न तो जहीन था, न बहुत ज्यादा अंक ही परीक्षा में ला पाता था. लेदे कर केवल डिगरी ही उस के हाथ में आती थी, परंतु केवल डिगरी से ही अच्छी नौकरी नहीं मिल सकती थी. पता नहीं, आगे चल कर क्या करेगा?

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इस बार भी नीता के आगे केशव बाबू की नहीं चली और बेटे ने एमबीए में ऐडमिशन ले लिया. इस के लिए भी उन्हें कई लाख रुपए खर्च करने पड़े. अब कई साल तक बेटा निश्ंिचत हो कर बाप के पैसे को लुटाता हुआ ऐश कर सकता था. न उसे पढ़ाई की चिंता करनी थी, न नौकरी की. बटी ने इंटर कर लिया तो एक बार फिर घर में हंगामा हुआ. वह 90 प्रतिशत अंक ले कर उत्तीर्ण हुई थी और बीटैक करना चाहती थी. केशव बाबू उस के पक्ष में थे, परंतु नीता नहीं चाहती थी. बोली, ‘‘जरा दिमाग से काम लो. एक साल बाद बेटी 18 की हो जाएगी. फिर उस की शादी कर देंगे. बीटैक कराने में हम पैसा क्यों बरबाद करें. ज्यादा पढ़ेगी तो विवाह भी ज्यादा पढ़ेलिखे लड़के के साथ करना पड़ेगा. उसी हिसाब से विवाह में भी पैसा ज्यादा खर्च होगा. हम क्यों अपना पैसा बरबाद करें. उस का पति चाहेगा तो उसे आगे पढ़ाएगा, वरना घर में बैठेगी.’’ केशव बाबू हैरत से नीता की ओर देखते हुए बोले, ‘‘तुम खुद पढ़ीलिखी हो और बेटी के बारे में इस तरह की बातें कर रही हो. आज नारी के लिए शिक्षा का महत्त्व कितना बढ़ चुका है, यह तुम नहीं जानती?’’

‘‘जानती हूं, बीए कर के मुझे क्या मिला? कौनसी नौकरी कर रही हूं. बीटैक कर के बेटी भी क्या कर लेगी. शादी कर के बच्चे पैदा करेगी, उन्हें पालपोस कर बड़ा करेगी, घर संभालेगी और बैठीबैठी मोटी होगी, बस. इस के अलावा लड़कियां क्या करती हैं, बताओ?’’ ‘‘जो लड़कियां नौकरी कर रही हैं और ऊंचेऊंचे पदों पर बैठी हैं, वे भी किसी की बेटियां, पत्नियां और मां होंगी. उन के घर वाले अगर इसी तरह सोचते, तो आज कोई भी नारी घर के बाहर जा कर नौकरी नहीं कर रही होती. वे नौकरियां कर रही हैं और देश, समाज व परिवार के विकास में योगदान दे रही हैं,’’ केशव बाबू जोर दे कर बोले.

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मां का दिल महान: भाग 1- क्या हुआ था कामिनी के साथ

‘‘मां कहां हैं?’’ शायक ने अपनी पत्नी शुचि से प्रश्न किया.

‘‘क्या पता? मैं जब आई तब भी मां घर में नहीं थीं. एक घंटे से प्रतीक्षा कर रही हूं कि वे आ जाएं तो मैं भी चाय पी लूं,’’ शुचि ने उत्तर दिया.

‘‘तुम्हें अपनी चाय की चिंता है, मां की नहीं. वैसे भी तुम्हें चाय पीने से किस ने रोका है. चाय पी कर मां को बुला लातीं. इसी अपार्टमैंट के कौंप्लैक्स में होंगी. इस बिल्डिंग से बाहर तो वे जाती ही नहीं,’’ शायक क्रोधित हो उठा था.

‘‘तुम्हारी मां हैं, तुम्हीं बुला लाओ. मुझे तो तुम मांबेटे से बहुत डर लगता है. क्या पता किस बात पर भड़क जाओ. पहले हाथमुंह धो लो, मैं तुम्हारे लिए जूस ले आती हूं. अपने लिए चाय बना लूं क्या?’’ शुचि मुसकराई

‘‘तुम और तुम्हारी चाय. पिओ न, किस ने मना किया है? मैं पहले ही परेशान और थका हुआ हूं,’’ शायक अपना लैपटौप एक ओर पटकते हुए बोला.

‘‘क्यों गुस्सा हो रहे हो, संभाल कर रखो. लैपटौप टूट जाएगा. कंपनी का दिया हुआ है. इतनी लापरवाही ठीक नहीं है,’’ शुचि रसोई की ओर जाते हुए हंसी.

‘‘तुम्हें हर समय मजाक सूझता है,’’ शायक झुंझला गया.

‘‘तो मैं कहां मजाक कर रही हूं? वैसे मैं एक सुझाव दूं. तुम लंबी छुट्टी क्यों नहीं ले लेते? मां भी प्रसन्न हो जाएंगी कि उन का बेटा श्रवण कुमार उन के लिए कितना त्याग कर रहा है,’’ शुचि चाय की चुस्कियों का आनंद लेते हुए बोली.

‘‘मुझे व्यर्थ का क्रोध मत दिलाओ. तुम क्यों नहीं छोड़ देतीं अपनी नौकरी?’’

‘‘मैं तो तैयार हूं. तुम ने इधर आज्ञा दी और उधर मेरा त्यागपत्र मेरे बौस की मेज पर. तुम ही कहते हो, महंगाई बहुत बढ़ गई है. एक के वेतन से काम नहीं चलता. सच पूछो तो मैं अपने बच्चों को छात्रावास से घर लाना चाहती हूं. मन में बहुत अपराधबोध होता है. बच्चे पलक झपकते ही बड़े हो जाएंगे और हम तरसते रह जाएंगे,’’ शुचि एकाएक गंभीर हो उठी.

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‘‘अरे हां, यह बात तो मेरे दिमाग में आई ही नहीं. अब तो मां भी यहां हैं, उन्हें भी कंपनी मिल जाएगी. बच्चों को उन का मार्गदर्शन मिल जाएगा,’’ शायक ने कुछ सोच कर कहा.

‘‘मैं ने सोचा था, पर मुझे लगा कि कहीं मांजी को बुरा न लगे कि उन के आते ही बच्चों की जिम्मेदारी उन के कंधों पर डाल दी.’’

पतिपत्नी में अभी वार्त्तालाप चल ही रहा था कि कामिनी ने घर में प्रवेश किया.

‘‘मां, कहां चली गई थीं आप? मुझे कितनी चिंता हो जाती है,’’ उन्हें देखते ही शायक ने शिकायत की.

‘‘लो, इस में भला चिंता की क्या बात है. मैं क्या छोटी बच्ची हूं जो कहीं गुम हो जाऊंगी? घर से निकल कर जरा पासपड़ोस में घूम आती हूं तो मेरा भी मन बहल जाता है, उन की भी सहायता हो जाती है. सच कहूं, बड़ा संतोष होता है कि यह जीवन किसी के काम आ रहा है,’’ कामिनी बड़े संतोष से बोलीं.

‘‘पर मां, सुजाताजी तो अब ठीक हो गई हैं. और कितने दिनों तक उन की तीमारदारी में लगी रहोगी?’’

‘‘आज मैं उन के यहां थोड़े ही गई थी. आज तो मुझे तीसरे माले वाली रम्या बुला ले गई थी. परसों उस के बेटे का जन्मदिन है. मुझ से अनुनय करने लगी कि मैं उस की सहायता कर दूं.’’

‘‘और आप का कोमल दिल पिघल गया. आप तुरंत उन की सहायता करने को तैयार हो गईं,’’ शायक व्यंग्यपूर्ण स्वर में बोला.

‘‘हां, मेरा तो मन पसीज गया. आजकल की इन लड़कियों को घर का कामकाज तो कोई सिखाता नहीं है,’’ कामिनी शायक की बात पर ध्यान दिए बिना बोलीं.

‘‘तो आज से ही कल की तैयारी प्रारंभ हो गई? क्याक्या पकाया आज?’’ शायक ने प्रश्न किया.

‘‘बूंदी के लड्डू बनाए आज. वह तो बालूशाही भी बनाने के लिए कह रही थी पर मैं ने कह दिया कि बाकी काम कल करेंगे. अभी मेरा बेटा घर आ गया होगा और मेरे बारे में पूछ रहा होगा. बूंदी के लड्डू इतने अच्छे बने हैं जैसे हलवाई की दुकान से लाए गए हों,’’ कामिनी ने मानो राज की बात बताई.

‘‘आप ने बनाए हैं तो अच्छे ही बने होंगे. पाककला में तो आप की बराबरी बड़ेबड़े हलवाई भी नहीं कर सकते. थक गई होंगी आप. लीजिए, चाय पी लीजिए,’’ तभी शुचि चाय ले आई.

‘‘तेरी बात भी ठीक है, बेटी. चाय पीने का तो बहुत मन हो रहा था,’’ कामिनी ने चाय पीते हुए कहा.

‘‘लो, आप की रम्या बेटी ने चाय भी नहीं पिलाई क्या?’’ शायक ने फिर प्रश्न किया.

‘‘मां से उपहास करता है रे. उस बेचारी ने तो कई बार पूछा पर मैं ने ही मना कर दिया,’’ वे हंसीं.

‘‘अच्छा किया, मां. बहुत खराब चाय बनाती हैं वे. हम ने तो इसी डर से उन के यहां जाना ही छोड़ दिया,’’ शायक हंस दिया.

‘‘अच्छा, सच कह रहा है तू? कैसा जमाना आ गया है. 2 बच्चों की मां को चाय तक बनानी नहीं आती? घर में खाना कैसे बनाती होगी?’’

‘‘मैं आप से झूठ क्यों कहूंगा? खाना तो उन की नौकरानी बनाती है. जो कच्चापक्का बनाती है, खाना पड़ता है. पर वैसे वे बहुत होशियार हैं,’’ शायक नाटकीय स्वर में बोला.

‘‘अच्छा, मैं भी तो सुनूं उन की होशियारी के किस्से.’’

‘‘लो, अब भी आप को प्रमाण चाहिए. मेरी प्यारी मां. आजकल के स्वार्थी समाज में जहां कोई किसी को बेमतलब एक गिलास पानी को भी नहीं पूछता, वहां वे आप से जन्मदिन पार्टी के लिए सारे पकवान कितनी होशियारी से बनवा रही हैं, यह कम होशियारी है क्या?’’ न चाहते हुए भी शायक के स्वर में क्रोध झलक गया.

‘‘क्या कह रहा है, बेटे? ऐसी बात तेरे मन में आई भी कैसे. मैं क्या छोटी बच्ची हूं जो कोई बरगला ले? पड़ोसी एकदूसरे के काम आते ही हैं. तू तो मेरी आदत जानता है. महल्ले में किसी को भी कोई आवश्यकता पड़ती थी तो मैं अपना काम छोड़ कर उस की सहायता को दौड़ जाती थी. बदले में मुझे उन सब का जो सहयोग मिला उसे भी तुम भली प्रकार जानते हो,’’ कामिनी ने अपना पक्ष रखा.

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‘‘सौरी मां, मैं यह सब कह कर आप को दुखी नहीं करना चाहता था पर यहां के लोगों की मानसिकता अलग सी है. दूसरों को नीचा दिखाने में ही वे अपनी शान समझते हैं. हर चीज को लाभहानि के तराजू पर तौलते हैं ये लोग. सुजाताजी बीमार थीं, आप उन की मदद करना चाहती थीं, मैं ने कुछ नहीं कहा. पर रम्या का व्यवहार मुझे जंचा नहीं,’’ शायक बोलता रहा और कामिनी उसे अपलक निहारती रहीं.

‘‘क्या बात है, शायक? तुझे पासपड़ोस में मेरा मेलजोल बढ़ाना शायद अच्छा नहीं लगा?’’ वे पूछ बैठीं.

‘‘नहीं मां, बस डरता हूं कि कहीं कुछ अशोभनीय न घट जाए. शायद अकेलापन खल रहा है आप को. मैं आप का पक्ष भी समझता हूं. बस, आप को सावधान कर देना चाहता हूं.’’

‘‘ठीक है, तुझे बुरा लगता है तो आगे से खयाल रखूंगी. अब यह भी बता दे कि कल रम्या के यहां जाऊं या नहीं? क्या पता मेरे जाने से तुम लोगों की नाक नीची हो जाए,’’ कामिनी का गला भर्रा गया.

‘‘आप को बुरा लगा है तो माफ कर दो, मां. पर सच कहूं, जब कोई मेरी मां का अनुचित लाभ उठाता है तो मेरा खून खौल जाता है,’’ शायक स्वयं पर संयम नहीं रख सका.

‘‘क्यों, जरा सी बात पर घर सिर पर उठा रखा है. मां थक गई होंगी. उन्हें तरोताजा हो जाने दो,’’ शुचि ने बीचबचाव किया. फिर जरा सा एकांत पाते ही बोली, ‘‘क्यों व्यर्थ में बात का बतंगड़ बनाते हो. मां को अच्छा लगता है दूसरों की मदद करना तो हम कौन होते हैं उन्हें रोकने वाले.’’

‘‘मां नहीं जानतीं पर तुम तो रम्या को भली प्रकार जानती हो. लोगों को शीशे में उतार कर अपना काम निकलवाने में तो उन की बराबरी कोई कर ही नहीं सकता. पर वह मेरी मां को निशाना बनाए, यह मैं सहन नहीं करूंगा.’’

आगे पढ़ें- बहस से कामिनी भी आहत हुई थीं…

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Anupama करेगी नए घर में एंट्री तो वनराज की बहन तोड़ेगी बा से रिश्ता

स्टार प्लस का सीरियल अनुपमा (Anupama) एक बार फिर टीआरपी चार्ट्स पर पहले नंबर पर बना हुआ है. जहां फैंस को वनराज (Sudhanshu Panday) और बा की हरकतों पर गुस्सा आ रहा है तो वहीं अनुपमा (Rupali Ganguly) की नई जिंदगी में अनुज (Gaurav Khanna) का साथ दर्शकों का दिल जीत रहा है. लेकिन अपकमिंग एपिसोड में अनुपमा की जिंदगी जहां खुशियों से भरने वाली है तो वहीं वनराज और बा के रिश्ते उनसे दूर होने वाले हैं. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

काव्या की चालें हुई कामयाब

 

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अब तक आपने देखा कि बा को उनके पड़ोसी ताना देते नजर आत हैं वहीं इसका गुस्सा बा, अनुपमा पर निकालती नजर आती है, जिसके चलते वह बहू को बेटी होने का ताना मारती नजर आती है.  इस दौरान काव्या आकर अनु से प्रौपर्टी बा के नाम करने के लिए कहती है, जिसमें बा उसका साथ देती नजर आती है. दूसरी तरफ काव्या, अनुपमा से उसके सारे हक और रिश्ते छीनने की बात कहती नजर आती है, जिसमें वनराज उसका साथ देता है.

 

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बापूजी को पता चलेगी प्रौपर्टी की बात

 

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अपकमिंग एपिसोड में आप देखें कि अनुज, अनु के साथ ऑटो में घर की तलाश करने निकलेगा. ताकि अनुपमा को सस्ता घर मिल सके. वहीं दोनों को एक घर मिल भी जाएगा, जो तलाकशुदा अनुपमा को घर देने के लिए राजी होगी. अनुपमा इस बात से बेहद खुश नजर आएगी और बापूजी और समर को ये बात बताएगी. दूसरी तरफ बापूजी, बा से पूछेंगे कि आखिर उसने अनु की अनुमति के बिना उसका अधिकार क्यों छीन लिया, वह पहले भी निर्दयी थी और अब अपनी सारी हदें पार कर गई. वहीं बापूजी इसका अंजाम भुगतने की बात भी कहते नजर आएंगे. लेकिन बा का साथ वनराज देता नजर आएगा.

 

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बा पर बरसेगी डौली

इसी के साथ आप देखेंगे कि अनुज, अनुपमा को नए घर के लिए उसके नाम की चाबी का गुच्छा गिफ्ट करेगा. तो वहीं बापूजी को अनु के नए घर के लिए गिफ्ट देने की तैयारी करेंगे, जिसे देखकर बा को जलन होगी और वह कहेंगी कि वह अपना घर टूटने से पहले अनु के सारे रिश्ते तोड़ देंगी. हालांकि इस बात को वनराज की बहन डॉली सुन लेगी और बा से सवाल करेगी कि बेटे की आशिकी को स्वीकार कर लिया, लेकिन बेटी की दोस्ती को गलत माना जा रहा है और कहेगी कि वह बा को अपनी मां कहने में भी शर्म महसूस कर रही है, जिस पर वनराज चिल्लाते हुए कहेगा कि 40 साल से उस पर किए गए खर्च को चुकाने के लिए वह प्रौपर्टी के पेपर पर साइन करने के लिए कहता है, जिसे सुनकर डौली हैरान हो जाएगी.

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सुनीता आहूजा और Govinda की मीठी लवस्टोरी, जिसे जानकर आप हो जाएंगे हैरान

अभिनेता गोविंदा यानि गोविन्द अरुण आहूजा आज भी कॉमेडी के किंग के अलावा एक शानदार डांसर, एक अभिनेता, जो अपने अभिनय की बारीकियों से कभी हँसा, तो कभी रुला देते है. पूरा देश उन्हें एक लिजेंड्री एक्टर मानता है, लेकिन उनकी पत्नी सुनीता अहुजा के लिए वे एक लविंग हस्बैंड है. गोविंदा का निक नेम ची-ची है. गोविंदा और सुनीता ने टिन एज में प्यार किया और उसे ही शादी के रूप में अंजाम दिया. कैरियर की वजह से उन दोनों नेकई सालों तक अपनी शादी को छुपाकर रखा था और शादी की 25वीं वर्षगाठ पर दोनों ने गोविंदा की माँ निर्मला देवी के कहने पर पूरी रीति-रिवाज से विवाहिता सुनीता से शादी की.

गोविंदा और सुनीता के वैवाहिक जीवन में कई उतर-चढ़ाव आये,उनकी एक बेटी केवल 4 महीने रहकर गुजर गयी थी, क्योंकि वह प्रीमच्योर बेबी थी. इसके अलावा दोनों ने हमेशा अपनी रिलेशनशिप को बनाये रखने की कोशिश की. जब गोविंदा कामयाबी की शिखर पर थे, तब उनका नाम कई हीरोइनों के साथ जोड़ा गया, जो उस समय की सुर्खिया थी, लेकिन इन दोनों ने इसकी परवाह किये बिना अपने रिश्ते को अधिक मजबूती दी. आज गोविंदा फिल्मों में कम दिखने की वजह स्क्रिप्ट का पसंद न होना है. दोनों एक अच्छी मैरिड लाइफ बीता रहे है और दोनों बच्चो टीना और यशवर्धन के साथ खुश है. गोविंदा, सुनीता और बच्चे हर साल दीपावली को साथ मिलकर मनाने की कोशिश करते है. इस साल भी वैसे ही मनाने वाले है. इसके अलावा घर पर बनी मिठाइयोंका स्वाद और दीपक से पूरे घर को सजाने वाले है. खूबसूरत और हंसमुख सुनीता ने खास गृहशोभा के लिए बात की,आइये जानते है, उनकी रोमांटिक और स्वीट लव स्टोरी.

सवाल- आप दोनों की लव स्टोरी में कितनी चुनौती रही, सुनीता?

जवाब – हम दोनों ने कम उम्र में प्यार किया था, मैं उस समय 15 साल की थी. मेरी शादी 18 वर्ष में हो गयी और 19 वर्ष में टीना पैदा हो गयी. प्यार जब होता है, तो किसी प्रकार की चुनौती दिखाई नहीं पड़ती. बचपन का प्यार अंधा होता है(हंसती हुई).

सवाल – सुनीता, प्यार हुआ कैसे ? किसने पहले प्रपोज किया?

जवाब – मेरे बहन की शादी गोविंदा के मामा निर्देशक आनंद सिंह से हुई थी. स्ट्रगलिंग टाइम में गोविंदा, जीजा यानि मेरे दीदी के पास 3 साल तक रुके थे. पहली फिल्म ‘तन-बदन’ के लिए मेरे जीजाजी ने साईन करवाया था. पिक्चर की मुहूरत पर मैं, मेरी बहन , भाई और गोविंदा गाड़ी में आ रहे थे. गोविंदा ने मेरे पीठ के पीछे अपना हाथ रखे थे, मैंने उनके हाथ को पकड लिया और आज तक नहीं छोड़ा. 3 साल तक हमने डेटिंग की उसके बाद शादी की.

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(हंसती हुई) असल में मेरी एक लव लैटर को मेरे जीजाजी ने देखलियाऔर हमारे लव के बारें में उनको पता चला, उन्होंने मेरा कान पकड कर पूछा, क्या ये सच है? मैंने हाँ कह दी. इसके बाद गोविंदा ने ही मुझे 2 से 3 साल सेटल्ड होने के लिए समय माँगा था,मैं राजी हो गयी. पहले सान्ताक्रुज़ में केवल वन रूम और किचन था, जब जुहू में उन्होंने वन बेडरूम, हॉल और किचन लिया, तब मेरी सास ने बेटे को शादी करने के लिए कहा, फिर शादी हुई.शादी के बाद मैं प्रेग्नेंट हो गयी, लेकिन गोविंदा ने शादी को डिसक्लोज नहीं किया था, क्योंकि उस समय शादी हो जाने पर एक्टर की फैन फोलोइंग लड़कियों की कम हो जाती थी. तब मैंने एक साल एक रूम में गुजारी थी, क्योंकि घर में प्रेस के लोग आते रहते थे, लेकिन किसी को पता नहीं चला कि गोविंदा की शादी हो गयी है. टीना की पहली सालगिरह पर गोविंदा की शादी की बात सबको पता लगा था.

सवाल – एक कामयाब हीरो की पत्नी होना कितना कठिन रहा?

जवाब–एक एक्टर की पत्नी होना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि हमेशा कुछ न कुछ अखबारों और मैगज़ीन में छपते रहते थे. असल में मैं बिंदास स्वभाव की हूँ, कोई कुछ बोले मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. लोग कई बार कहते थे कि गोविंदा कभी किसी के साथ तो कभी किसी के साथ उन्होंने देखा है. मैं उस व्यक्ति को डांटती और कहती थी कि हीरो है, उसे करने दो, क्योंकि काम नहीं करेंगे तो इंसान पैसा कैसे कमाएगा. अगर मैं गोविंदा से इधर-या उधर जाने से मना करूँ, तो ये कैसे काम करेंगे. मुझे तो पहले से ही पता था कि ये हीरो है. इसके अलावा मेरी और गोविंदा के बीच एक मधुर रिश्ता और विश्वास था, जिसकी वजह से हमारा प्यार हमेशा कायम रहा.

सवाल – वैवाहिक जीवन के 3 दशक बीत जाने के बाद भी आपदोनों के रिश्ते में कभी कडवाहट नहीं आई, इसकी वजह क्या रही, सुनीता?

जवाब– यंग एज को हम दोनों ने कभी स्वाभाविक रूप से नहीं बिताया, क्योंकि गोविंदा बहुत बिजी रहते थे, कही घूमने जाना, रेस्तरां में खाना, थिएटर हॉल में पिक्चर देखना आदि साधारण लोगों की तरह मैं कभी कर नहीं पाई. कही अगर जाएँ भी तो लोग उनके साथ पिक्चर्स या औटोग्राफ लेना शुरू कर देते थे, ये अच्छी बात है कि उनकी पॉपुलैरिटी इन्हीं सब से होता है, लेकिन प्राइवेसी कभी नहीं मिली, ऐसी कई चीजो को मुझे समझना पड़ा.

सवाल– क्या परदे पर सबको हंसाने वाले गोविंदा का घर पर भी वैसा ही स्वभाव रहता है?

जवाब–घर पर भी वैसे ही हँसते रहते है, वे मेरे बिना कभी आउटडोर नहीं जाते थे, क्योंकि घर में मैं ही हंसने खेलने वाली हूँ. अभी भी गोविंदा मुझमें बचपना ही देखते है और कहते है कि मैंने तुम्हे शादी नहीं गोद लिया हुआ है, क्योंकि तुम बड़ी नहीं होती. अभी मैंने 50 साल पूरा किया है और आगे 100 साल तक ऐसी ही रहूंगी. उम्र होगया है, पर मैं अपने स्वभाव को नहीं बदल सकती. शादी के इतने दिन हो गए है, लेकिन अभी भी नोक-झोंक चलती रहती है. गोविंदा बहुत शांत प्रकृति के है, लेकिन मुझे गुस्सा बहुत तेज़ आता है.

सवाल– ऐसा सुनने में आता है कि गोविंदा एक दिन में कई फिल्मों की शूटिंग करते थे, ऐसे में उनसे कुछ बात कहनी हो, तो कैसे कह लेती थी?

जवाब–किसी बात को उन्हें कहना कभी भी मुश्किल नहीं रही, वे एक शांत और हंसमुख व्यक्तित्व के इन्सान है, व्यस्तता के बीच में उन्होंने परिवार का ध्यान हमेशा रखा है. इसके अलावा शादी के बाद टीना पैदा हुई और मैं उसमें व्यस्त हो गयी, ऐसे में बच्चों को सही पालन-पोषण देना ही मेरा मुख्य उद्देश्य रहा, अब बच्चों के बड़े हो जाने पर मैं उनका सब काम सम्हालती हूँ और उनके साथ ट्रेवल भी करती हूँ.

सवाल– आपसी मनमुटाव होने पर कौन किसे पहले मनाता है?

जवाब– गोविंदा ही मनाते है और खुश करने के लिए ज्वेलरी दिला देते है या फिर शोपिंग पर जाने के लिए कहते है. मैं बहुत हठी हूँ और जल्दी मानती नहीं.

सवाल – गोविंदा का नाम अभिनेत्री नीलम कोठारी के साथ बहुत बार उछाला जाता रहा है,उन दोनों की जोड़ी को दर्शक पसंद करते थे, इसलिए दोनों ने साथ-साथ बहुत सारी हिट फिल्में दी, ऐसे में आपके रिएक्शन क्या थे? पति और पिता के रूप में गोविंदा कैसे है?

जवाब – मैं प्रेस वालों की बात तब तक विश्वास नहीं करती, जब तक मैं अपनी आँखों से देख न लूँ. गोविंदा कहीं भी चले जाए, घूम फिरकर पत्नी के पास ही उन्हें आना है. (ठहाके लगाकर हंसती हुई) बाहर का खाना कब तक किसी को हजम होता है, घर का खाना ही सबको हजम होता है.

पति के रूप में वे अच्छे है, लेकिन मैं अगले जनम में उन्हें बेटे के रूप में पाना चाहती हूँ, क्योंकि मैंने जैसा पति चाहा, वैसे गोविंदा नहीं है. मुझे घूमना, फिरना, बाहर खाना आदि पसंद है, लेकिन गोविंदा को काम करना और अपने भाई, बहन के साथ रहना ही सबसे अधिक पसंद है.

पिता के रूप में गोविंदा अपने बच्चों के साथ बहुत ही फ्रेंडली है, लेकिन बच्चों को डर माँ से लगता है.

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सवाल– गोविंदा के जीवन में आये उतार-चढ़ाव को आपने कैसे लिया?

जवाब– मैं हमेशा उनके साथ खड़ी रही. मैं उन्हें समझाती थी कि 80 और 90 की दशक में जब आप काम कर रहे थे, तो बाकी कलाकार के पास काम कम था. पूरी जिंदगी किसी की भी समस्या में नहीं गुजरती, सकारात्मक सोच रखने पर एक समय के बाद सब सही हो जाता है. मुझे ख़ुशी है कि गोविंदा ने 170 फिल्में की थी. वे खुद में एक स्कूल है और बच्चों को बाहर जाकर एक्टिंग सीखने की जरुरत नहीं. मैं अपने बच्चों को पिता से एक्टिंग की सारी बारीकियों को सीखने के लिए कहती हूँ.

मुझे याद आता है संघर्ष के दिनों में जब गोविंदा विरार से आते थे, उनका जूता फटा हुआ रहता था, वे बस से कही आते-जाते थे. साथ में VCR और कैसेट लेकर हर प्रोडक्शन हाउस में जाकर अपनी परफोर्मेंस को दिखाते थे, लेकिन सब रिजेक्ट करते थे, क्योंकि इंडस्ट्री में तब भी गॉडफादर न होने पर कोई काम नहीं देते थे. गोविंदा ने इस नियम को तोड़ा और बिना गॉडफादर के कामयाब हुए. उन्होंने बहुत अधिक संघर्ष किया है. मैंने हमेशा सपोर्ट किया है. जब हमारा अफेयर हुआ, गोविंदा बी,कॉम फाइनल कर रहे थे और मैं उस समय 10वीं में पढ़ रही थी.

सवाल- अभिनय को छोड़ गोविंदा राजनीति में गए, उसका अनुभव आपके लिए कैसा था?

जवाब– मुझे तो राजनीति पसंद नहीं थी, क्योंकि बहुत सारी रोक-टोक और सुरक्षा के अनुसार कुछ भी करना पड़ता था. बच्चों की आज़ादी छीन गयी थी, उनके लिए सुरक्षा का इंतजाम करना पड़ा और मुझे दो इंसान का मेरे साथ बंदूक लेकर चलना ज़रा भी पसंद नहीं था. मैंने कभी सिक्यूरिटी नहीं ली, क्योंकि मेरी सुरक्षा मैं खुद कर सकती थी. गोविंदा को भी ये बात समझ में आई और कुछ दिनों बाद राजनीति से हट गये.

सवाल– क्या आपने कभी किसी फिल्म के लिए गोविंदा को सलाह दिया है?

जवाब–साउथ के निर्देशक मणिरत्नम मुझे बहुत पसंद थे, मैंने ‘रावण’ फिल्म में अभिषेक बच्चन के साथ और आदित्य चोपड़ा की फिल्म ‘किलबिल’ में एक्टिंग करने की सलाह दी थी.

सवाल– कोई मेसेज जो आप सभी कलाकारों को देना चाहती है?

जवाब–गृहशोभा के ज़रिये मैं सभी कलाकारों, लेखको और निर्देशकों को अच्छी और हंसने खेलने की पिक्चर बनाने की सलाह देती हूँ.आज की दुनिया बहुत ही तनाव पूर्ण है, ऐसे में मारधाड़ और हिंसा पर बनी फिल्में दर्शको को अधिक स्ट्रेस और डिप्रेशन में ले जा रही है.

गोविंदा से जुडी कुछ अनसुनी बातें,

  • गोविंदा की कमजोरी और स्ट्रेंथ – माँ निर्मला देवी,
  • सुनीता के हाथ की बनी पसंदीदा व्यंजन – तुअर दाल, मटन, फ्रूट सलाद,
  • गोविंदा की पसंदीदा फिल्म – स्वर्ग,
  • गोविंदा का कम काम की वजह – मनपसंद स्क्रिप्ट न मिलना और किसी फ़िल्मी ग्रुप में शामिल न होना.

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जादुई झप्पी के 11 फायदे

जादू की मीठी झप्पी सचमुच कितनी जादुई है, इस को वही महसूस कर सकता है, जो अपने प्यार को एक नर्म, सुंदर स्पर्श से अभिव्यक्त करना जानता है. चिकित्सक भी मानते हैं कि कुछ सैकंड के झप्पी या आलिंगन दवा सा प्रभाव दिखाता है.

यों पूरी दुनिया में गले लगा कर झप्पी देनेलेने के तरीके सिखाने वाले क्लब तक बने हुए हैं और आलिंगन से जुड़े अनेक उत्सव पूरी दुनिया में मनाए जा रहे हैं, फिर भी अचानक या किसी बधाई के रूप में एकदूजे को दिया जाने वाला आलिंगन तो अपनेआप में अनूठा है ही.

सार्वजनिक रूप से शुरुआत

सब से पहले सार्वजनिक रूप से आलिंगन को अमेरिका में विधिवत रूप से किया जाना शुरू किया गया था. हालांकि कुछ स्रोतों का कहना है कि जब से दुनिया शुरू हुई प्रेमीप्रेमिका या मित्र आलिंगन करते हैं.

हां, यह बात जरूर है कि सीने से लगाने की यह भावना चोरीछिपे पूरी की जाती होगी और मारे शर्म से कोई इस का लाभ ही नहीं ले पाता होगा, तब किसी जागरूक व्यक्ति ने इस को खूब फैलाया होगा.

फिर भी यह माना जाता है कि लगभग 50 साल पहले यह प्रथा कुछ यूरोपीय छात्रों द्वारा आविष्कृत की गई थी. उस समय बोझिल लैक्चरों से उकता कर कुछ छात्रों द्वारा यह तरीका खोजा गया था.

यूरोप के छात्रों को तकनीकी विषयों ने लगातार सुस्त और निराश कर दिया तो यह उपाय खोजा गया. उन्होंने पठनपाठन के दौरान उदास करने वाले और ऊब पैदा करने वाले सत्र के अवसाद के बाद जम्हाई लेते सहपाठियों को प्यार से हग कर के सत्र खत्म होने का जश्न मनाने का फैसला किया. इस के परिणाम बेहद शानदार रहे थे. हौलेहौले ही सही, यह हग किसी स्वार्थ और विशेष कारण के बिना भी गले लगाने का एक बहाना बनता चला गया.

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पूरे संसार का समर्थन

अब आलिंगन की संस्कृति को पूरे संसार में समर्थन मिल गया है और आज अगर कोई अपने विपरीतलिंगी को भी सब के सामने गले लगा ले तो यह गलत या अनैतिक नहीं माना जाता.

हग करना स्नेह की गरमाहट और प्रेम का आदानप्रदान है. चिकित्सकों और वैज्ञानिकों ने प्रेमी के लिए न केवल गले लगाने के रोमांच, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी पर्याप्त शोध किया है. तो फिर आइए, जानते हैं आलिंगन के लाभ :

मजबूत होता है आत्मविश्वास :

जादू की यह झप्पी सच्चे साथी के रूप में पूर्ण सुरक्षा की भावना अंकुरित करती है. युगल साफ कहते हैं कि जब प्रेमी ने स्नेह से गले लगाया, तो कोई और डर या परेशानी नहीं थी. आलिंगन से आत्मविश्वास मजबूत होता है और आपसी जुड़ाव में भी तीव्र बढ़ोत्तरी होती है.

गले लगाते हुए प्रेमी सुकून और आराम महसूस करते हैं. कई अध्ययनों से पता चला है कि अकसर गले लगाना मानसिक और रचनात्मक विकास को आगे ले जाता है.

थकावट को दूर भगाता है :

अगर आप बहुत ज्यादा थके हुए हैं, तो आप के लिए भी आलिंगन बहुत जरूरी है. आलिंगन में यह माद्दा है कि यह चुटकी में थकान को दूर भगाता है. आलिंगन से दिमाग शांत होता है. आप का ध्यान उस चीज से हटता है जिसे ले कर आप परेशान हैं.

ऐनर्जी बूस्ट करता है :

अगर आप अकेलेपन और आलस्य के शिकार हैं, तो आलिंगन आप के लिए फायदेमंद हो सकता है. खून में बढ़ी औक्सीटोसिन की मात्रा मोरल बूस्टअप करती है. इसलिए आलिंगन के बाद लोग तरोताजा महसूस करने लगते हैं और अकेलेपन का एहसास भी दूर हो जाता है.

स्ट्रेस बूस्टर भी है :

जब कोई अपने बहुत करीबी साथी को गले लगाता है, तो उस के अंदर का सारा तनाव पलक झपकते दूर हो जाता है. यह खून में बढ़ते औक्सीटोसिन का कमाल है. इसलिए कई विशेषज्ञ तनावग्रस्त लोगों को अपने प्रियतम से आलिंगन की सलाह देते हैं.

दिल के लिए लाभप्रद :

अपने किसी खास का नियमित रूप से आलिंगन से दिल की धड़कन नियंत्रित रहती है, जो औक्सीटोसिन और मेटाबौलिज्म का निर्माण करता है. दिल के मरीजों को अपने जीवनसाथी या प्रेमीप्रेमिका को नियमित रूप से हग करना चाहिए.

अनिद्रा का दुश्मन :

आलिंगन को अनिद्रा का दुश्मन माना जाता है. जिन्हें रात में नींद न आती हो या कम नींद आती हो उन्हें अपने प्रिय से प्यार की झप्पी लेनी चाहिए. इस से उन्हें खूब नींद आएगी. विशेषज्ञ कहते हैं कि आलिंगन के बाद बहुत अच्छी नींद आती है और जो लोग खूब हग करते हैं, वे जम कर सोते हैं.

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बढ़ती है मैमोरी पावर :

रिसर्च में यह भी पता चला है कि नियमित रूप से आलिंगन सुख लेने वाले स्त्रीपुरुष की स्मरणशक्ति बहुत लंबे समय तक दुरुस्त रहती है. विशेषज्ञ कहते हैं कि आलिंगन न करने वालों की तुमना में नियमित आलिंगन करने वाले स्त्रीपुरुष की स्मरण शक्ति भी बेहतर होती है.

लंबी उम्र में फायदेमंद :

औक्सीटोसिन के रिसाव से शारीरिक दमखम बढ़ता है. इसलिए नियमित रूप से आलिंगन करना एक औषधि साबित होता है. इस से दिल की धड़कनें नियंत्रित रहती हैं, जिस से औक्सीटोसिन के साथसाथ मेटाबौलिज्म भी बेहतर होता है.

आलिंगन के बाद बहुत अच्छी नींद आती है. वैज्ञानिक दावा करते हैं कि नियमित आलिंगन से उम्र बढ़ती है. इतना ही नहीं, आलिंगन मानसिक स्वास्थ्य भी सही रखता है. अगर कोई उदास है और उस का कोई साथी आ कर उसे हग कर ले तो अच्छा लगता है और उदासी दूर हो जाती है.

सकारात्मक सोच :

आलिंगन से हर किसी की सोच सकारात्मक हो जाती है, क्योंकि इस से दिमाग में सकारात्मक प्रतिक्रिया होती है. इस आधार पर कह सकते हैं कि आलिंगन इंसान की जिंदगी को सकारात्मकता से भर देती है और नियमित आलिंगन करने वाले के स्वभाव से नकारात्मकता दूर हो जाती है.

बेचैनी होती है दूर :

खून में औक्सीटोसिन नाम के हारमोन का जितना ज्यादा रिसाव होगा, कोई भी व्यक्ति उतना ही ज्यादा हैल्दी होगा. यह हारमोन इंसान की बेचैनी को भी खत्म करता है यानी आप अगर बेचैनी महसूस कर रहे हैं तो अपने प्रिय को गले लगा लीजिए, आप की बेचैनी खत्म हो जाएगी.

मेहनती बनाता है :

इटली की एक लोककथा में बताया गया है कि एक कमजोर शरीर वाले युवक को उस की प्रेमिका सीने से लगा कर ऊर्जा देती थी और वह मजदूरी करता था. हौलेहौले उस युवक का शरीर मजबूत हो गया और वह खूब मन लगा कर मेहनत करने लगा. उस के बाद उस युवक ने यह रहस्य अपने दोस्तों से साझा किया और उन्होंने भी अपनी प्रेमिका को हर रोज सीने से लगाने का संकल्प लिया.

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DIWALI 2021: फेस्टिवल में बनाएं टेस्टी गाजर का हलवा

अगर आप फेस्टिवल में कुछ टेस्टी और हेल्दी ट्राय करना चाहती हैं तो आज हम आपके गाजर का हलवा की टेस्टी रेसिपी बताएंगे. गाजर का हलवे की इस रेसिपी को आप अपनी फैमिली के लिए बनाकर तारीफें बटोर सकती हैं. आइए आपको बताते हैं गाजर का हलवे की खास रेसिपी…

हमें चाहिए

8-10 मीडियम गाजर, कद्दू सा हुआ

3 टेबल स्पून देशी घी

2 कप बिना मलाई वाला दूध

¼ टेबलस्पूनहरी इलायची पाउडर

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10-15 सुल्ताना

⅓ कपशुगरफ्री नेचुरा

¼ कप कद्दू स हुआ खोया

10-12 पिस्ते

बनाने का तरीका:

देसी घी को नौन स्टिक कढ़ाई में गर्म करें. कद्दू की हुई गाजर को डालें और लगभग पांच मिनट तक हल्का तलें. बिना मलाई का दूध डालें और पकायें.

हरी इलायची पाउडर, सुल्ताना, शुगरफ्री नेचुरा एक साथ मिलायें. लगभग दस से पंद्रह मिनट तक पकायें. खोवा डालकर मिलायें. मिश्रण को लगभग सूखने तक पकायें. पिस्ता से सजायें फिर गर्म या ठंडा परोसें.

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लोन लेने से पहले जान लें ये 8 बातें

हर जरूरत को पूरा करने के लिए आपके पास पर्याप्त पैसे होते तो क्या बात होती! पर ऐसा दुनिया में कुछ ही लोगों के पास है. असल जिन्दगी में हममें से कई लोगों को अपनी कुछ खास जरूरतें पूरी करने के लिए कर्ज लेना पड़ता है. बैंक आपको सस्ते लोन के ऐड, फोन कॉल्स से लुभाते हैं.

बैंक के प्रतिनिधि तर‍ह-तरह के आकर्षक ऑफर का लालच देकर आपको लोन लेने के लिए आकर्षित करते हैं. लोन मिलना जितना आसान है, उसे चुकाना उतना ही महंगा पड़ जाता है. हर चीज की तरह लोन लेने के भी कुछ फायदे हैं और कुछ नुकसान.

इसलिए कर्ज लेने से पहले आपको कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए, ताकि लोन चुकाते वक्त आपको कम से कम परेशानियां हो.

1. जितना चुका से लें उतना ही लोन

तैते पांव पसारिए जैते लांबी सौर, जितनी लंबी चादर हो उतने ही पांव पसारने चाहिए. विशेषज्ञों का कहना है कि लोन चुकाने के लिए आपकी मासिक किश्त आपकी आय के 50% से अधिक नहीं होनी चाहिए. लोन लेना आसान है केवल इसलिए लोन न लें.

2. लोन चुकाने की मियाद कम रखें

लोन चुकाने की मियाद कम रखने में ही समझदारी है. जितना लंबी मियाद, ईएमआई उतनी ही कम. इससे आप 25-30 साल के लिए लोन लेने के बारे में सोच सकती हैं. हालांकि लोन की मियाद जितनी कम होगी, आपके लिए उतना ही अच्छा है. उधार की किश्त ज्यादा होगी, पर उधार जल्दी चुक जाएगा.

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3. नियमित किश्त चुकाने की आदत डालें

जितना जल्दी आप कर्ज चुका देंगी उतना अच्छा है. चाहे क्रेडिट कार्ड बिल जैसा शॉर्ट टर्म कर्ज हो या होम लोन जैसा लॉन्ग टर्म कर्ज, पेमेंट नियमित तौर पर करना चाहिए. ईएमआई चुकाने में चूक या पेमेंट में देरी से आपकी क्रेडिट प्रोफाइल पर निगेटिव असर पड़ सकता है.

4. खर्च करने के लिए न लें लोन

यह इनवेस्टमेंट का बेसिक रूल है. कभी भी पैसा उधार लेकर इनवेस्ट नहीं करनी चाहिए. फिक्स्ड डिपॉजिट और बॉन्ड्स जैसे बेहतर सुरक्षित इनवेस्टमेंट से उतना रिटर्न नहीं मिलता, जितना आपको लोन की किश्त होती है. डिस्क्रिशनरी एक्सपेंडिचर के लिए भी लोन नहीं लेना चाहिए.

5. जब लोन हो बड़ा, इंश्योरेंस है जरूरी

अगर आप बड़ा होम या कार लोन ले रही हैं तो इसके लिए इंश्योरेंस कवर लेना न भूलें. लोन की रकम के बराबर रकम का टर्म प्लैन लीजिए ताकि अगर आपको कुछ हो जाए तो परिवार पर इसका बोझ न पड़े.

6. जब लिए हों एक साथ कई लोन

अगर आपने कई लोन एक साथ ले रखें हैं तो उन सबको एक सस्ते लोन में बदलना चाहिए. जो सबसे महंगा लोन है उसे सबसे पहले चुकायें. इसके बाद सस्ते लोन भी धीरे-धीरे चुकायें.

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7. अलग रखें रिटायरमेंट फंड  

हम सब की कुछ फाइनेंशियल प्रायोरिटी होती हैं. जहां बात बच्चों की आए हम कोई समझौता नहीं करते, जो कि सही है. पर बचेचों के भविष्य के साथ साथ आपको अपने भविष्य के बारे में भी सोचना चाहिए. अपने बच्चों के भविष्य के लिए रिटायरमेंट फंड से समझौता करना समझदारी नहीं है. कोई भी फाइनेंशियल डिसीजन भावनाओं में बह कर न लें.

8. घर के लोगों को हो लोन की जानकारी

लोन लेने से पहले इस बारे में अपने पति और परिवारवालों से राय लें. आपके किसी भी निर्णय से आपके परिवार वालों के फाइनेंशियल पोजिशन पर असर पड़ता है. अगर आप अपने पति से फाइनेंशियल मैटर्स छुपायेंगी तो इसका असर आपके रिलेशन पर भी पड़ सकता है.

डेंगू से बचाएंगी आपके किचन में मौजूद ये 7 चीजें

डेंगू और चिकनगुनिया इस समय सबसे तेजी से फैल रही बीमारी में से हैं. डेंगू के दौरान रोगी के जोड़ों में तेज दर्द के साथ ही सिर में भी दर्द होता है. यह बीमारी बड़ों के मुकाबले बच्चों में ज्यादा तेजी से फैलती है.डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स का स्तर बहुत तेजी से नीचे गिरता है जिसके कारण शरीर में कमजोरी हो जाती है और जोड़ों में दर्द कई महीनों तक बना रहता है.

डेंगू बुखार के लिए एक और बुहत प्रभावशाली दवा है बकरी का दूध जो बहुत कम हो चुकी प्लेटलेट्स को भी तुरंत बढ़ाने की क्षमता रखता है. लेकिन अगर बकरी का दूध आसानी से न मिले तो आपके घर या बगीचे में मौजूद कुछ हर्ब्स के जरिए भी इस बीमारी से निजात पाई जा सकती है.

1. तुलसी के पत्ते

तुलसी के पत्तों को गरम पानी में उबालकर छानकर, रोगी को पीने को दें. तुलसी की यह चाय डेंगू रोगी को बहुत आराम पहुंचाती है. यह चाय दिनभर में तीन से चार बार पी जा सकती है. तुलसी के पत्तों को उबालकर शहद के साथ पिएं, इससे भी इम्‍यून सिस्‍टम बेहतर बनता है.

2. पपीते की पत्तियां

पपीते की पत्तियां, डेंगू के बुखार के लिए सबसे असरकारी दवा मानी जाती हैं. पपीते की पत्तियों में मौजूद पपेन एंजाइम शरीर की पाचन शक्ति को ठीक करता है. डेंगू के उपचार के लिए पपीते की पत्तियों का जूस निकाल कर रोगी को पिलाने से प्लेटलेट्स की मात्रा तेजी से बढ़ती है.

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3. नारियल पानी है असरदार

अगर आपको या फिर घर में किसी को भी डेंगू का बुखार है तो ऐसे में नारियल पानी पीना बहुत फायदेमंद रहता है. इसमें एलेक्‍ट्रोलाइट्स, मिनरल और अन्‍य जरुरी पोषक तत्‍व होते हैं जो शरीर को मजबूत बनाते हैं.

4. मेथी के पत्ते

डेंगू के बुखार में मेथी के पत्तों को पानी में उबालकर हर्बल चाय के रूप में इसका पयोग किया जा सकता है. मेथी से शरीर के विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं जिससे डेंगू के वायरस भी खत्म हो जाते हैं.

5. एंटीबॉयोटिक है हल्दी

खाने में हल्दी का अधिकाधिक प्रयोग करें. इसे सुबह आधा चम्मच पानी के साथ या रात को दूध के साथ लिया जा सकता है. अगर बुखार से पीड़ित रोगी को जुकाम हो तो दूध का प्रयोग न करें.

6. गिलोय है असरदार दवा

गिलोय का आयुर्वेद में बहुत महत्व है. यह मेटाबॉलिक रेट बढ़ाने के साथ ही प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखने और बॉडी को इंफेक्शन से बचाने में मदद करती है. इसके तनों को उबालकर हर्बल ड्रिंक की तरह सर्व किया जा सकता है. इसमें तुलसी के पत्ते भी डाले जा सकते हैं.

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7. काली मिर्च करे कमाल

तुलसी के पत्तों और दो ग्राम काली मिर्च को पानी में उबालकर पीना सेहत के लिए अच्छा रहता है. यह ड्रिंक आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाती है और एंटी-बैक्टीरियल के रूप में काम करती है.

Anik Ghee के साथ बनाएं चोको पंपकीन बरफी

सीताफल यानी पंपकीन से बनी सब्जी अक्सर लोगों ने खाई है. लेकिन क्या आपने कभी पंपकीन से बनी बरफी ट्राय की है. आज हम आपको Anik Ghee से बनीं चोको पंपकीन बरफी की रेसिपी बताएंगे, जिसे आप आसानी से बनाकर दीवाली में अपनी फैमिली को खिला सकते हैं.

सामग्री

500 किलोग्राम कद्दू

6 छोटे चम्मच चीनी

1/4 कप खोया

1 1/2 छोटे चम्मच अनिक घी

1/2  छोटा चम्मच कोको पाउडर,

1 1/2 छोटा चम्मच क्रीम

गार्निशिंग के लिए थोड़े से बादाम

1-2 बूंदे

1-2 बूंद वैनिला एसेंस

बनाने का तरीका

कद्दू को धो कर छिल्का व बीज अलग करें. फिर भारी तले की कड़ाही में अनिक घी गरम कर कद्दू के छोटे टुकड़े काट कर डालें. ढ़क कर धीमी आंच पर पकाएं, 10-15 मिनट पकाने के बाद चीनी डाल कर फिर तब तक पकाएं जब तक कि सारा पानी सूख न जाए. अब ग्रेट कर खोया डालें व 4-5 मिनट तक पकाएं, एक ग्रीस की हुई थाली में निकाल कर जमा दें. एक कड़ाही में कोको पाउडर, चीनी और खोया डालें. अब इस में क्रीम मिला कर चीनी के पिघलने तक पकाएं. फिर इसमें वैनिला एसेंस डाले व जमी हुई बरफी पर परत लगाएं और बादाम से सजाएं.

सुजाता: भाग 3- क्यों अतुल ने पत्नी से मांगा तलाक?

देखतेदेखते 5 साल गुजर गए थे. उस ने अपनी थीसिस सबमिट कर दी थी जिस में सौरमंडल के ग्रहों के बारे में अतिरिक्त दुर्लभ जानकारियां थीं. उस की थीसिस को अमेरिका के अतिरिक्त अन्य कई देशों की साइंस मैगजींस में प्रकाशित किया गया था. सब ने इस थीसिस की सराहना की थी.

सुजाता एस्ट्रोफिजिक्स में पीएचडी डिग्री प्राप्त कर अब डा. सुजाता थी. स्टैनफोर्ड में भी उस ने अपना वर्चस्व कायम कर रखा था. पढ़ाई के अतिरिक्त वह सांस्कृतिक कार्यक्रमों और भारतीय व अमेरिकी उत्सवों में भाग लेती थी. दीक्षांत समारोह के अवसर पर सुजाता ने अपने पिता को भी अमेरिका बुलाया था. वे भी अपनी बिटिया की संघर्षमय सफलता पर प्रसन्न थे.

इस दौरान एक भारतीय विधुर ने सुजाता को प्रोपोज किया था. उस ने अपने पिता से पूछा भी था. रेणु से भी चर्चा की थी. दोनों को कोई आपत्ति न थी. पिता को तो खुशी होती अगर सुजाता का घर फिर बस जाता.

वह एक बार उस विधुर के साथ डेट्स पर भी गई थी, परंतु यह एक औपचारिकताभर थी उस व्यक्ति का स्वभाव और विचार परखने के लिए. सुजाता को यह प्रपोजल स्वीकार नहीं था. उस को लगा कि यह व्यक्ति रेणु का सौतेला पिता बनने के योग्य नहीं था. इस के बाद उस के पास फिर कभी शादी की बात सोचने की फुरसत भी नहीं थी.

पीएचडी करने के दौरान ही सुजाता को नासा से एस्ट्रोफिजिसिस्ट साइंटिस्ट का औफर मिल चुका था. उसे मोफेट कील्ड, कैलिफोर्निया में स्थित नासा के रिसर्च सैंटर में पोस्ट किया गया था. सुजाता को उस की विशिष्ट उपलब्धियों के आधार पर ग्रीन कार्ड आसानी से मिल गया था. अब वह अमेरिका की स्थाई निवासी थी.

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इस बीच, उस के पूर्व पति अतुल को भी अपनी पूर्र्व पत्नी की उपलब्धियों की जानकारी मिल चुकी थी. अमेरिकन लड़की से शादी के बाद उसे भी ग्रीन कार्ड मिल गया था. एक दिन उस ने सुजाता को फोन किया था. परंतु सुजाता ने उस को कोई तवज्जुह नहीं दी थी. उस ने मात्र इतना ही कहा, ‘‘हम मांबेटी दोनों बहुत खुश हैं, अब आगे हमारी जिंदगी में दखल न देना.’’ और फोन काट दिया था.

इधर अतुल की अपनी नई अमेरिकन बीवी के साथ निभ नहीं रही थी. उस की बीवी ने ही तलाक की अर्जी कोर्ट में दे रखी थी जो 6 मास होतेहोते मंजूर भी हो गई थी. अतुल को आधी संपत्ति उस अमेरिकन को देनी पड़ी थी.

सुजाता की बेटी रेणु करीब 15 साल की हो चली थी. वह भी कैलिफोर्निया की जूनियर चैस चैंपियन थी. एक बार फिर अतुल ने सुजाता से फोन कर मिलने की इच्छा व्यक्त की थी. पहले तो वह नहीं मान रही थी, पर उस के बारबार के आग्रह पर रविवार को सुबह मिलने को कहा. सुजाता ने रेणु को भी सारी सचाई बता दी थी, हालांकि, अतीत की कुछ बातें रेणु को अभी भी याद थीं.

डा. सुजाता ने सैन होजे में बड़ा घर खरीद लिया था. अतुल रविवार को सुजाता से मिलने पहुंचा था. रेणु ने स्नैक्स और जूस ला कर सामने टेबल पर रखा था.

रेणु को सामने देख कर अतुल बहुत खुश हुआ और बोला, ‘‘इधर आओ बेटी, मैं तुम्हारा पिता हूं.’’

सुजाता ने उस की बात काटते हुए कहा, ‘‘गलत. बिलकुल गलत. तुम उस के पिता थे. अब नहीं रहे.’’

अतुल बोला, ‘‘सौरी. पर क्या हम फिर से एक नहीं हो सकते? जब जागो तभी सवेरा.’’

सुजाता बोली, ‘‘याद करो, परदेश में तुम ने मुझे बेसहारा समझ सड़क पर ला कर खड़ा कर दिया था. मैं तो कभी सोई ही नहीं. हमेशा जगी और सचेत थी. हां, तुम जाग कर भी सोए हुए थे. जगे हुए को जगाया नहीं जाता है.’’

अतुल बोला, ‘‘मुझे तुम से तलाक लेने का अफसोस है. पर क्या फिर हम मिल नहीं सकते?’’

सुजाता ने कहा, ‘‘तुम अभी तक 2 बीवियों से तो निभा नहीं सके हो. तुम पर कोई मूर्ख लड़की भी भरोसा नहीं करेगी, मेरा तो सवाल ही नहीं उठता.’’

अतुल बोला, ‘‘एक बार फिर से सोच लो. आखिर, रेणु को भी पिता का संरक्षण मिल जाएगा.’’

सुजाता बोली, ‘‘अब तुम इतने दिनों

से अमेरिका में रह कर भी

बेवकूफी वाली बात कर रहे हो. यहां लड़कियां और औरतें बहुत सुरक्षित हैं. तुम तो कंप्यूटर इंजीनियर हो. तुम्हें पता होना चाहिए कि मैं जहां भी रहूं, सैलफोन में ऐप्स के द्वारा रेणु और घर पर बराबर नजर रख सकती हूं. वैसे, हम दोनों अपने बल पर अपनी रक्षा कर सकते हैं. तुम्हारे जैसे कमजोर मर्द क्या सुरक्षा देंगे? तुम अपनी फिक्र करो. हो सकता है, तुम्हें किसी औरत का संरक्षण चाहिए.’’

अतुल बोला, ‘‘एक बार रेणु से भी पूछ लो, उसे पिता नहीं चाहिए?’’

सुजाता ने रेणु से पूछा, ‘‘क्यों बेटे, मिस्टर अतुल को क्या जवाब दूं?’’

रेणु बोली, ‘‘मेरी मम्मीपापा दोनों आप हो मौम. हम दोनों में इतनी

शक्ति और क्षमता है कि किसी तीसरे की कोई गुंजाइश नहीं है हमारे बीच. मिस्टर अतुल से कह दो, कृपया चले जाएं.’’

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सुजाता अतुल की तरफ देख कर बोली, ‘‘तुम्हें जवाब चाहिए था, मिल गया न. नाऊ, यू कैन गो. और कभी नारी को अबला समझने की भूल भविष्य में न करना.’’

अतुल बिना कुछ बोले सुजाता के घर से निकल पड़ा था.  द्य

ऐसा भी

होता है

बात पुरानी है. हमें हिमाचल प्रदेश के किसी गांव में किसी शादी में जाना था और वह गांव मुख्य सड़क से काफी अंदर जा कर था.  बस से हम शाम ढले उस जगह पहुंचे जहां से हमें मुख्य सड़क से गांव की ओर पैदल जाना था लेकिन जब बस से उतरे तब बाहर बहुत तेज वर्षा हो रही थी.

अब गांव जाएं तो कैसे जाएं, यही सोचतेसोचते हम परिवार समेत सड़क किनारे स्थित एक छप्परनुमा दुकान की छत के नीचे खड़े हो गए.

दुकान में बैठे एक बुजुर्ग शायद हमारी समस्या को भांप गए थे. उन्होंने हमें बड़ी विनम्रता से छप्पर के अंदर आने को कहा सो हम अंदर चले गए और वहां पर बने एक चबूतरेनुमा बैंच पर बैठ गए.

उन दिनों मोबाइल भी नहीं होते थे इसलिए गांव में सूचना देना भी संभव नहीं था. उधर वर्षा रुकने का नाम नहीं ले रही थी.

बातों ही बातों में रात हो गई और सब भूख से बेहाल होने लगे. हमारी स्थिति भांप कर वही बुजुर्ग बोले, ‘‘मैं तुम्हारे सब के लिए खाना बना देता हूं, खाना खा कर तुम सब इसी छप्पर के नीचे सो जाना क्योंकि बारिश तो बहुत तेज हो रही है. थमने का नाम नहीं ले रही. लगता है  सुबह तक होती रहेगी. ऐसे में तुम्हारा निकलना संभव नहीं. उन्होंने शायद हमारे मन की बात कह दी थी सो सब ने यह सोच कर चुपचाप उन की बात मान ली कि सुबह चलते समय हम उन को खाने का और ठहरने का दाम दे देंगे. इतना कुछ हमारे लिए कर रहे हैं तो हमारा फर्ज बनता है कि उन की पैसे से मदद करें.

हम ने भरपेट खाना खाया और थकावट के कारण हमें झट से नींद आ गई. सुबह सो कर उठे तो देखा बारिश भी रुक गई थी तो हम ने सामान उठाया और उन बुजुर्ग को पूरी व्यवस्था के दाम पूछे.

पलट कर बुजुर्ग बोले, ‘‘बेटा यह सब व्यवस्था मैं ने पैसे के लिए नहीं की थी बल्कि इंसानियत के नाते की थी. इस दाने पर तुम्हारा नाम था सो तुम ने खाया.’’

यह सुनते ही मैं ने बुजुर्ग के चरण पकड़ लिए. मैं ने उन्हें कुछ तो पैसे लेने को कहा लेकिन उन्होंने एक पैसा नहीं लिया और यह सोचता चला आया कि दुनिया में इंसानियत अभी जिंदा है,

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