‘तारक मेहता’ को लगा एक और झटका, ‘अंजलि भाभी’ के बाद ‘जेठालाल’ के इस दोस्त ने भी छोड़ा शो

कोरोनावायरस के बढ़ते कहर के बीच सीरियल्स की शूटिंग शुरू हो गई है, जिसके चलते टीवी पर लेटेस्ट एपिसोड दिखाए जा रहे हैं. सब टीवी के हिट शो तारक मेहता का उल्टा चश्मा के नए एपिसोड्स आने शुरू हो गए हैं, जिसे फैंस हमेशा की तरह पसंद कर रहे हैं. वहीं फैंस के कुछ मनपसंद किरदार शो में नजर न आने से सवाल खड़े हो गए हैं. कहा जा रहा है कि सीरियल्स के कुछ किरदारों ने शो छोड़ने का फैसला कर लिया है, जिनमें अंजली भाभी उर्फ नेहा मेहता के अलावा और भी किरदार शामिल है. आइए आपको बताते हैं कौन से किरदार छोड़ेगे शो….

रोशन सिंह सोढ़ी ने शो छोड़ने का फैसला

काफी समय से ये खबरें चर्चा में हैं कि शो में रोशन सिंह सोढ़ी का किरदार निभा रहे गुरुचरण सिंह शो छोड़ रहे हैं. हालांकि, पहले शो के मेकर्स ने इस तरह की खबरों को सिरे से नकार दिया था. लेकिन खबरों की माने तो,  गुरुचरण सिंह के शो छोड़ने की खबरें जोरों पर हैं. उन्होंने लॉकडाउन के बाद दोबारा शूटिंग शुरू भी नहीं की. वो अभी तक शो में नजर नहीं आए हैं. इसी बीच ये भी खबरें हैं कि शाहरुख खान के को-स्टार रहे एक्टर बलविंदर सिंह सूरी को इस रोल के लिए अप्रोच किया गया है. फिल्म दिल तो पागल है में नजर आ चुके बलविंदर सिंह सूरी शाहरुख के दोस्त बने नजर आए थे. हालांकि, अभी तक कुछ भी आधिकारिक तौर पर नहीं है.

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अंजली भाभी ने भी कहा शो को अलविदा

सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में नजर आने वाली अंजली भाभी यानी नेहा मेहता ने भी इस शो को अलविदा कहने का फैसला कर लिया है. दरअसल, नेहा मेहता अब सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ में नहीं नजर आएंगी. खबरों की मानें तो शूटिंग के शुरु होने के बाद से ही नेहा मेहता सेट पर नजर नहीं आई हैं. अब तक इस बात का खुलासा नहीं हो पाया है कि नेहा मेहता ने अचानक सीरियल ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ का साथ क्यों छोड़ा है. लेकिन उनके शो छोड़ने से फैंस को बेहद झटका लगने वाला है.

 

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बता दें, इससे पहले दयाबेन यानी दिशा वकानी ने भी शो को अलविदा कहा है, जिसके बाद फैंस उन्हें दोबारा लाने की मांग कर रहे हैं. लेकिन अब इन किरदारों के शो छोड़ने के बाद फैंस का क्या रिएक्शन होगा ये देखना दिलचस्प होगा.

Yippee Noodles: बारिश में लीजिए नूडल्स कटलेट का मजा

अगर आप स्नैक्स के लिए कुछ टेस्टी बनाना चाहती हैं तो आज हम आपको घर पर नूडल्स कटलेट की रेसिपी बताएंगे. नूडल्स कटलेट बनाना आसान है, इसे आप बनाकर अपनी फैमिली और बच्चों के शाम के नाश्ते में परोस सकती हैं.

सामग्री

– 1 पैकेट यिप्पी नूडल्स

– 1 कप गोभी कसी

– 1/2 कप चीज

– 1 प्याज कटा

– 1-2 हरीमिर्चें

– 3 बड़े चम्मच कौर्नफ्लोर

– तलने के लिए तेल

– नमक स्वादानुसार.

विधि

-1 पैकेट यिप्पी नूडल्स बिना मसाले के उबाल लें.

-इस में गोभी, चीज, प्याज, नमक व हरीमिर्च डाल कर अच्छी तरह मिला लें.

-आटा तैयार कर बराबर भागों में बांट लें और मनपसंद आकार दें.

-फिर कौर्नफ्लोर से डस्ट कर गरम तेल में शैलो फ्राई करें.

-चटनी के साथ गर्मा गर्म सर्व करें.

जलन क्यों नहीं जाती मन से

जलन एक सामान्य भावना है. सब का अपने जीवन में इस भावना से सामना होता ही है, चाहे कोई इसे स्वीकार करे या न करे, पर यह भावना एक स्वस्थ भाव से अस्वस्थ और हानिकारक भाव में बदल जाए, तब चिंता की बात है.

जलन के भी अनेक रूप होते हैं. यह केवल दूसरों की उपलब्धियों को सहन कर पाने की अक्षमता के रूप में हो सकती है या इस में यह इच्छा भी शामिल हो सकती है कि वे उपलब्धियां हमें हासिल हों. हम यह चाहें कि हमारे पास वह हो जो दूसरों के पास हो और हम यह भी चाह सकते हैं कि उस के पास वह चीज न रहे.

जलन अकसर ही क्रोध, आक्रोश, अपर्याप्तता, लाचारी और नफरत के रूप में भावनाओं का एक संयोजन होता है. यह एक मानसिक कैंसर है.

‘जलन तू न गई मेरे मन से…‘ रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित एक निबंध है. इस में लेखक ने जलन होने के कारण और उस से होने वाले नुकसानों का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया है. जलनलु व्यक्ति असंतोषी प्रवृत्ति के होते हैं.

लेखक रामधारी सिंह दिनकर ने जलन की बड़ी बेटी का नाम निंदा बताया है. जलन के कारण ही व्यक्ति दूसरों की निंदा करता है. जो व्यक्ति सादा व सरल होता है, वह यह सोच कर परेशान होता है कि दूसरा व्यक्ति मुझ से क्यों जलन करता है.

ईश्वर चंद्र विद्या सागर ने भी एक बार कहा था कि, ‘‘तुम्हारी निंदा वही करता है, जिस की तुम ने भलाई की है.‘‘

और जब महान लेखक नीत्से इस से हो कर गुजरे, तो इसे उन्होंने बाजार में भिनभिनाने वाली मक्खी बताया, जो सामने व्यक्ति की तारीफ और पीठ पीछे उसी की बुराई करती है. वे कहते हैं, ‘‘ये मक्खियां हमारे अंदर व्याप्त गुणों के लिए सजा देती हैं और बुराइयों को माफ कर देती हैं.’’

नीत्से ने कहा है, आदमी के गुणों के कारण लोग उन से जलते हैं.

जलन जब किसी अजनबी के कारण आप तक पहुंचे तो भी तकलीफ देती है. तो जरा सोचिए, जब जलन किसी प्यार भरे रिश्ते में अपने पैर पसार ले तो कितने दुख की बात होगी.

जब पति को ही अपनी पत्नी से किसी बात पर जलन होने लगेगी तो जलन की यह भावना आप के विवाह में कितनी अशांति ला सकती है. थोड़ीबहुत जलन की भावना सभी के अंदर हो सकती है, पर जब यह बढ़ जाए तो खतरनाक चीजों की शुरुआत कर सकती है, जैसे स्टाकिंग, हिंसा या मानसिक प्रताड़ना.

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मुंबई निवासी संजना देशमुख बताती हैं, ‘‘मेरे पति और मैं एक ही बिजनैस में थे और हम दोनों को ही बहुत टैलेंटेड समझा जाता था, वे शुरू के दिन थे और हम ने बहुत अच्छा काम किया. हम हर चीज शेयर करते थे. मुझे एक अवार्ड भी मिला और मेरी खूब तारीफ हुई.

‘‘मुझे महसूस हुआ कि मेरे पति को कुछ जलन हुई, पर मैं इस खयाल को झटक फिर खूब काम करती रही, फिर हम ने बच्चों के बारे में सोचा और मैं ने करीब 20 साल तक काम नहीं किया, घरगृहस्थी में व्यस्त रही.

‘‘यह मैं ने अपनी मरजी से किया था. मेरे पति बहुत खुश थे और मुझे सपोर्ट करते. फिर मैं ने दोबारा कैरियर शुरू किया और फिर मुझे अच्छे रिव्यूज मिले और नई सफलता मिलने लगी.

‘‘अब मेरे पति को इन सब से परेशानी होने लगी. वे मेरी सफलता को ले कर कमैंट्स करने लगे और हर समय मुझे नीचा दिखाने की कोशिश करने लगे. इस से हमारे रिश्ते पर बहुत असर हुआ. मैं अब खुद को उन से जुड़ा हुआ नहीं पाती. ऐसा लगता है कि मुझे अपने रिश्ते या कैरियर में से किसी एक को चुनना पड़ेगा.‘’

कभीकभी पति में यह भाव इस कदर हावी हो जाता है कि वे अपनी पत्नी की हर बात कंट्रोल करना शुरू कर देते हैं और अपनी यह जलन की भावना छुपाने के लिए उसे आर्थिक रूप से परेशान भी करते हैं या हाथ भी उठाने लगते हैं और बुराभला भी कहते रहते हैं.

कारण क्या हो सकते हैं

अकसर जलनलु पतियों में डर, क्रोध, दुख, चिंता, शक की भावना होती है. उन में असफलता का डर भी छुपा हो सकता है. जलन कई कारणों से हो सकती है, कुछ कारण हैं –

– असुरक्षित महसूस करना या अपने अंदर हीनता की भावना होना.

– किसी धोखे का डर.

– बहुत ज्यादा पजेसिव होना या कंट्रोल करने की इच्छा.

– विवाह में कुछ ज्यादा ही आशाएं रखना.

– अतीत का कोई बुरा अनुभव.

– किसी महत्वपूर्ण व्यक्ति को खो देने की चिंता

यह जलन रिश्ते को नुकसान पहुंचाती है. यह भावना जलनलु व्यक्ति को शारीरिक रूप से भी परेशान करती है. वह डिप्रेशन या नींद न आने का शिकार हो सकता है. यह रिश्ता हाथ से निकले, इस से पहले इस के बारे में कुछ कदम उठाने चाहिए. जलन से कैसे निबटें, आइए जानते हैं :

– कई लोग या कई स्थितियां कभीकभी ऐसी होती हैं, जब विवाह की सिक्योरिटी पर सवाल उठाती हैं, चाहे वो कोई कलीग हो या टूर पर जाने वाला जौब. इस में थोड़ीबहुत जलन नौर्मल है.

यहां यह महत्वपूर्ण है कि आप अपने पार्टनर से इस बारे में बात करती रहें और कुछ बाउंड्रीज सेट हो, जो आप के विवाह और आप के दिलों को जोड़े रखे.

जैसे आप दोनों इस बात से सहमत हों कि फ्लर्ट कलीग से एक दूरी रखनी है और टूर पर होने पर रोज बेडटाइम पर बात करनी है और कोई समस्या होने पर शांति से उसे सुलझाना है.

– जब पति को बारबार किसी बात पर जलन हो रही हो तो कारण का पता लगाना बहुत जरूरी है. जैसे अगर आप उन के साथ ज्यादा टाइम नहीं बिता पा रही हैं, तो क्या वे इनसिक्योर हो रहे हैं? या विवाह में अनैतिकता के कारण ट्रस्ट इश्यूज हैं, बात करें, कारण जानें, विश्वास का माहौल बना कर रखें. साथ ही साथ ज्यादा टाइम बिताएं.

– विवाह का मतलब साथ रहना या बेड शेयर करना ही नहीं होता. पर, अगर जलन का कोई कारण ही नहीं है तो खतरे को समझें, फिर यह स्वभाव ही है, जिस में बारबार जलन रखने की आदत है.

40 वर्षीया सोमा बताती हैं, ‘‘मैं और मेरे पति दोनों ही मैथ्स के टीचर हैं. मेरे पास ट्यूशन्स के ज्यादा बच्चे आते गए. वे अच्छा पढ़ाते हैं, पर मेरे पास ज्यादा स्टूडेंट्स हैं. अकसर ही वे मुझ पर बिना बात के गुस्सा करने लगे, बातबेबात नाराज हो जाते. मुझे कारण समझ आ रहा था. मैं खुद ही ट्यूशन्स कम लेने लगी, जबकि मैं बच्चों को पढ़ाना बहुत ऐंजौय करती हूं.‘‘

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कभीकभी यह इनसिक्युरिटी बढ़ जाती है, जब पार्टनर आप की लोकप्रियता, कौन्फिडेंस और लुक्स के मामले में अपने को कम समझने लगा हो.

मनोवैज्ञानिक डाक्टर कुलकर्णी कहते हैं, ‘‘रोज 1-2 कपल ऐसे आते हैं, जिन के रिश्ते में झगडे़, कम बातचीत और प्यार खोता जा रहा है. ऐसे मामलों में अकसर जलन देखने को मिल रही है. पार्टनर की प्रोग्रेस सहन नहीं होती है, विशेष रूप से जब पत्नी ज्यादा सफल होती जा रही हो, क्योंकि पुरुष को तो यही सिखाया जाता है कि सबकुछ उस के कंट्रोल में होना चाहिए. जब पत्नी की प्रोफेशनल रैंक और सैलरी पति से ज्यादा हो जाए, तो पति को कंट्रोल खोने का डर सताने लगता है.

जलन एक ऐसा शब्द है जो औरों के जीवन में भी परेशानियां ले आता है और खुद को भी बहुत नुकसान पहुंचाता है. यदि आप किसी को खुशी नहीं दे सकते तो कम से कम दूसरों की खुशी देख कर जलिए मत. खुद को जलन की आग में न जलाएं. पति को ही अपनी पत्नी से जलन नहीं हो सकती, बल्कि आप के साथ काम करने वाले कलीग्स, जिन्हें आप अपना दोस्त समझने लगते हैं, उन के अंदर तो जलन की भावना बहुत ही आम है. लगभग हर इनसान को अपने जीवन में किसी न किसी जलनलु कलीग का सामना करना ही पड़ जाता है. कोई आगे बढ़ रहा है, किसी की उन्नति हो रही है, नाम हो रहा है, तो अधिकांश लोग ऐसे देखने को मिल जाएंगे, जो पहले यह सोचेंगे, कैसे बढ़ते हुए लोगों की राह का रोड़ा बना जाए, उन्हें कैसे नीचे दिखाया जाए, कैसे समाज में उन का मजाक बने, कैसे उन्हें दुखी किया जाए. जो कलीग्स आप से जलते हैं, उन की पहचान करना जरूरी है, कौन आप से जलता है, कौन नहीं, इन लक्षणों से पहचानिए:

– जलनलु व्यक्ति हमेशा आप के मुंह पर आप की तारीफ करेगा, चाहे यह आप की ड्रेसिंग सेंस हो या काम से संबंधित आप की अचीवमेंट्स. वह आप को बड़े उत्साह से खूब बधाई देगा. वह आप को खुश करने का कोई मौका नहीं छोड़ेगा. आप के लिए यह पता लगाना मुश्किल होगा कि वह आप से जलता है या नहीं.

ऐसे व्यक्ति से कैसे निबटें

– जब आप महसूस करें कि नकली बधाइयां दी जा रही हैं, तनाव में न आएं. उन के फ्लैटरिंग कमैंट्स को इग्नोर करें, सीधेसीधे बात करें और कह दें कि फेक कंप्लीमेंट्स न दें.

– जब आप की औफिस में तारीफ हो रही होगी, जलनलु लोग हमेशा आप की मेहनत के बजाय किस्मत को क्रेडिट देंगे और अपनी किस्मत को कोसेंगे. उन के लिए आप की सफलता सिर्फ लक बाय चांस ही है.

– जब कभी ऐसा हो, तो अपनी सफलता के कारण ऐसे लोगों को न बताएं. वे जल्दी ही आप के बारे में बात करना बंद कर देंगे.

– अगर आप किसी वजह से परफौर्म नहीं कर पाए, तो इन्हें बड़ा संतोष मिलता है. वे आप की हार पर खुश होंगे. वे आप की असफलता का जश्न मना कर खुश होते हैं. ये जेलस कलीग्स आप की पर्सनल लाइफ में भी रुचि रखते हैं और हर बात में आप की नकल करने की भी कोशिश करते हैं.

– ऐसे लोगों को इग्नोर करें और उन की बातों में कोई रुचि न लें.

– ऐसे लोग आप की पीठ पीछे बुराई करते हैं. जब आप अपने बारे में ही कोई अफवाह सुनें तो ऐसे दोस्तों से अलर्ट हो जाएं, जिन के डबल स्टैंडर्ड हैं. उन की जलन बहुत हद तक खतरनाक हो सकती है, इतनी कि वे अपनी सारी ऐनर्जी आप की इमेज खराब करने में लगा सकते हैं.

उन की ऐसी हरकतों से आप तनाव में आ कर दुखी हो कर एक कोने में न बैठें, उन्हें कंफ्रंट करें, उन्हें अपनी हरकतें बंद करने के लिए कहें. आप शालीनता से अपने मैनेजर से भी इस बारे में बात कर सकती हैं.

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– जीवन में किसी न किसी जलनलु व्यक्ति से सामना होता ही रहेगा. इस भावना से खुद को प्रभावित न होने दें. मुश्किल है, असंभव नहीं.

– आप अपना काम मेहनत से करते रहें, खुद को जलन के नेगेटिव टच से दूर रखने की कोशिश करें, इग्नोर करना सब से अच्छा है.

मशरूम खाएं इम्यूनिटी बढ़ाएं

 इम्यूनिटी को हिंदी में प्रतिरोधक क्षमता या प्रतिरक्षा कहा जाता है. यह किसी भी तरह के सूक्ष्म जीवों जैसे रोग पैदा करने वाले जीवाणुओं, विषाणुओं आदि से शरीर को लड़ने की क्षमता देती है.

शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में खाद्य पदार्थ अहम भूमिका निभाते हैं. मशरूम एक तरह की फफूंदी हैं, जो हमारे आहार का अंग बन गई है.

यह एक शाकाहारी आहार है. इस से विभिन्न व्यंजन जैसे सब्जी, सूप, अचार, पकोड़े, मुरब्बा, बिरयानी, बिसकुट, नूडल्स बनाए जाते हैं.

मशरूम में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, खाद्य रेशा, वसा, खनिज लवण, विटामिन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं. यह एक कम ऊर्जा वाला आहार है. इस में कोलेस्ट्रौल नहीं पाया जाता है, जबकि आर्गेस्टेराल प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो खाने के बाद मानव शरीर में विटामिन डी में बदल जाता है.

कई रिसर्च से पता चला है कि विटामिन डी वायरल संक्रमण व स्वास्थ्य संबंधी संक्रमण को रोकने में लाभदायक साबित होता है, इसलिए कई बीमारियों में मशरूम का इस्तेमाल दवा के रूप में किया जाता है.

मशरूम में कई खास खनिज और विटामिन पाए जाते हैं. इन में विटामिन बी, डी, पोटैशियम, कौपर, आयरन, सैलेनियम की पर्याप्त मात्रा होती है. मशरूम में कोलीन नाम का एक खास पोषक तत्त्व पाया जाता है, जो मांसपेशियों की सक्रियता और याददाश्त बरकरार रखने में बेहद फायदेमंद रहता है.

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मशरूम के फायदे

* मशरूम में एंटीऔक्सीडैंट भरपूर मात्रा होते हैं. इन में से खास है अरगोजियोनीन, जो बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने और वजन घटाने में सहायक होता है. एंटीऔक्सीडैंट सूजन रोकने, फ्रीरैडिकल के कारण शरीर में होने वाले नुकसान और संक्रमण से बचाते हैं व शरीर में रोगों से लड़ने वाली कोशिकाओं को भी बढ़ाते हैं.

* मशरूम में मौजूद तत्त्व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हैं. इस से सर्दीजुकाम जैसी बीमारियां जल्दीजल्दी नहीं होती हैं. मशरूम में मौजूद सैलेनियम इम्यून सिस्टम के रिस्पौंस को बेहतर बनाता है.

* मशरूम विटामिन डी का भी अच्छा स्रोत है. विटामिन डी हड्डियों को मजबूत बनाता है.

* इस में बहुत कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होता है, जिस से वजन और शुगर का लैवल नहीं बढ़ता है.

* मशरूम में वसा बहुत कम होती है व कोलेस्ट्रौल नहीं होता है. इस के अलावा मशरूम त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद है.

ताजा मशरूम में 80 से 90 फीसदी पानी पाया जाता है. मशरूम के शुष्क भार का 46 से 82 फीसदी कार्बोहाइड्रेट, 12 से 35 फीसदी प्रोटीन, 8 से 10 फीसदी फाइबर, एक से 4 फीसदी वसा और विटामिन व खनिजलवण होता है.

मशरूम में इम्यूनिटी

मशरूम की कोशिका भित्ति पोलीसैकेराइड (बीटा ग्लूकांस) की बनी होती है जो प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है. इस के अलावा मशरूम में मिलने वाले गैनोडरमीक एसिड, एरगोथियोनीन व कार्डीसेवीन भी प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ाते हैं.

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मशरूम में कैंसर रोधी क्षमता

बटन मशरूम और ओयस्टर मशरूम में प्रोस्टेट व ब्रैस्ट कैंसर रोधी क्षमता पाई जाती है. 5 अल्फा रिडक्टेज और एरोमाटेज एंजाइम, जो कैंसरकारी ट्यूमर वृद्धि के लिए उत्तरदायी है, इसे रोकने के गुण ताजा मशरूम में पाए जाते हैं. कैंसर के उपचार में प्रयोग होने वाली प्रमुख दवा पौलिसैकेराइड-के (क्रेसीन) मशरूम से ही बनाई जाती है.

Raksha Bandhan 2020: बरसते सावन में भी निखरता मेकअप

बचपन में एक बुढ़िया की कहानी सुनी थी जिस में उस गरीब औरत को अंधियारी बरसती रात में अपनी झोंपड़ी के बाहर बैठे शेर से ज्यादा बारिश के उस टपके का डर था जो उस की झोंपड़ी को भारी नुकसान पहुंचा सकता था.

आज के समय में घर पक्के हो गए हैं और जंगल सिमट गए हैं तो टपके और शेर का डर अब ज्यादा रहा नहीं, पर नए तरह के डर महिलाओं में घर कर गए हैं. मेकअप को ही ले लो. हाल यह है कि महिलाओं को किसी पार्टी में देर से पहुंचने का कोई गम नहीं होता है, पर अगर उन का मेकअप जरा सा बिगड़ जाए तो आफत आ जाती है. बारिश के रिमझिम मौसम में तो उन के मेकअप पर खराब होने की तलवार हमेशा लटकती रहती है.

फिलहाल दुनिया कोरोना वायरस से जूझ रही है, पर धीरेधीरे जब हर जगह आवाजाही बढ़ने लगी है तो महिलाओं की मित्र मंडलियां भी जुड़ने लगी हैं. पर बारिश के मौसम में उन के सामने मेकअप के जल्दी खराब की समस्या आती है.

पर जब कोई समस्या आती है तो उस का हल भी निकल आता है. दिल्ली की नेहा सागर, जो प्रोफैशन से डाइटीशियन और मेकअप आर्टिस्ट हैं, ने बताया, “बारिश के मौसम में हमें वाटरप्रूफ मेकअप ही इस्तेमाल करना चाहिए. मेकअप करने से पहले और मेकअप हटाने के बाद स्किन को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए.”

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प्राइमर

नेहा सागर ने बताया, “मेकअप में फाउंडेशन का बड़ा खास रोल होता है और फाउंडेशन के लिए प्राइमर एक बहुत ही अहम प्रोडक्ट होता है जो फाउंडेशन से पहले लगाया जाता है. ये प्राइमर स्किनटोन के अनुरूप बाजार में मिलते हैं, लेकिन बरसात के दिनों में जैल बेस्ड प्राइमर को ही इस्तेमाल करें.”

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फाउंडेशन

“फाउंडेशन की बात की जाए तो बारिश के मौसम में कोशिश की जानी चाहिए कि वाटर बेस्ड फाउंडेशन की जगह वाटरप्रूफ या सिलिकौन बेस्ड फाउंडेशन ही यूज करें. ये हर तरह की स्किन के लिए सही रहते हैं.”

कौम्पैक्ट

“फिर नंबर आता है कौम्पैक्ट का. ड्राई स्किन पर कौम्पैक्ट अवौइड करना चाहिए. इस से आप की स्किन और ज्यादा ड्राई और फ्लैकी दिखेगी. पर औयली और कौम्बिनेशन स्किन पर फाउंडेशन सैट करने के लिए इसे जरूर यूज करें.”

ब्लशर

“ब्लशर के बिना मेकअप अधूरा होता है. ड्राई स्किन और कौम्बिनेशन स्किन पर क्रीमी या लिक्विड बेस्ड ब्लशर यूज कर सकते हैं लेकिन औयली स्किन के लिए सिर्फ पाउडर ब्लशर ही इस्तेमाल करें.”

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हाइलाइटर

नेहा सागर ने बताया, “दिन के समय हाइलाइटर को अवौयड करना चाहिए और रात को पाउडर हाइलाइटर का ही इस्तेमाल करना चाहिए.”

आईलाइनर

“मानसून में लिक्विड लाइनर का यूज न करें. जैल लाइनर ही सब से अच्छा औप्शन है. इसे काजल की जगह भी आंखों में नीचे लगाया जा सकता है. याद रखें कि बारिश के मौसम में सिर्फ वाटरप्रूफ मस्कारा ही यूज करें.”

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लिपस्टिक

लिपस्टिक के बारे में नेहा सागर ने बताया, “मानसून में मैट लिपस्टिक ही सही रहती है. लेकिन जिन के लिप्स बहुत ज्यादा ड्राई होते हैं वे सैमी मैट या क्रीमी मैट लिपस्टिक यूज कर सकती हैं.”

क्या HHA क्रीम से काले घेरे और दागधब्बे दूर हो सकते हैं?

सवाल…

क्या एएचए क्रीम से काले घेरे और दागधब्बे दूर हो सकते हैं? क्या इस के नियमित इस्तेमाल से त्वचा चमकदार बन सकती है?

जवाब…

एएचए यानी अल्फा हाइड्रौक्सी ऐसिड क्रीम जिस में फलों से निकाले गए फायदेमंद ऐसिड होते हैं और जो त्वचा में कोलोजन का लेवल तेजी से बढ़ा कर उस पर झुर्रियां पड़ने से बचाते हैं, यह आंखों के नीचे का कालापन दूर करने में भी मददगार है. इस क्रीम के इस्तेमाल से ऐक्सफौलिएशन और नए सैल्स बनने की प्रक्रिया तेज होती है, जिस से त्वचा में नवीनीकरण दिखाई देता है. रोज रात को चेहरा साफ करने के बाद अपनी रिंग फिंगर में थोड़ी सी एएचए क्रीम ले कर आंखों के चारों तरफ गोलाई में मसाज करें. इस क्रीम के रोजाना इस्तेमाल से दागधब्बे कम होंगे और साथ ही त्वचा भी निखरीनिखरी नजर आएगी. बस, ध्यान रखें कि क्रीम आंखों में न जाए.

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सौफ्ट और ब्यूटीफुल स्किन हर किसी को आकर्षित करती है और सभी इसे पाना चाहते हैं. लेकिन हमारा चेहरा मौसम, प्रदूषण, धूल-मिट्टी, थकान सभी कुछ  झेलता है और इस का प्रभाव सब से ज्यादा चेहरे की स्किन पर नजर आता है. थकी, ग्लो के बिना स्किन,  झांइयां और आंखों के नीचे डार्क सर्कल फेस की शाइन कम कर देते हैं. ऐसे में फेस स्क्रबिंग करना एक ऐसा जादुई तरीका है, जो मिनटों में आप की स्किन को नरम, मुलायम और चमकदार बना सकता है. स्क्रबिंग से स्किन दोबारा चमकदार व जवान लगने लगती है. इसे एक्सफोलिएशन भी कहा जाता है व इसे अपने नियमित स्किन केयर रूटीन में शामिल करना चाहिए. फेस स्क्रब से आप मेकअप के उन छिपे कणों को भी हटा सकती हैं, जो पोर्स में घुस जाते हैं और सामान्य तौर पर क्लींजर या पानी से साफ करने से नहीं हटते. कुछ फेस स्क्रब्स में मास्चराइजर भी होता है, जिस से स्किन को पोषण भी मिलता है.

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जुल्फों को उड़ने दो: दकियानूसी सोच पर हावी आजादी हमारी

लम्बे, काले, लहराते बाल महिलाओं और लड़कियों की खूबसूरती बढ़ाने में खास भूमिका निभाते हैं. ऑफिस हो या फंक्शन हर स्त्री चाहती है की लोग उस के रेशमी बालों की तारीफ करें. खुले बालों में स्त्रियां खूबसूरत भी लगती हैं और उन का आत्मविश्वास भी निखर कर सामने आता है.

एक मल्टीनेशनल कम्पनी में कार्यरत 40 वर्षीय विभा जायसवाल बताती हैं,” जब मैं छोटी थी तब अगर गलती से कभी अपने लंबे बालों को खुला छोड़ दिया तो तुरंत दादी कहा करती थीं कि यह क्या चुड़ैल की तरह बाल खोल कर घूम रही हो. जाओ तेल लगा कर चोटी बांधो. पापा भी मुझे बाल बंधवा कर ही कहीं ले जाते थे. कहते थे कि खुले बालों में भूतनी पकड़ लेगी. आज जब उन बातों को सोचती हूँ तो बहुत हंसी आती है. मेरे पति और सासससुर आधुनिक सोच के इंसान हैं और उन्हें मैं खुले बालों में अच्छी लगती हूँ. ”

आज अमूमन हर लड़की बाल खोल कर रखती है. अब इसे फैशन कहें या फिर पसंद इस में कोई बुराई किसी को दिखती भी नहीं. लड़कों को तो लड़कियों के खुले बाल ही पसंद आते हैं.

मगर क्या आप जानते हैं कि आज भी कुछ लोग हैं जो खुले बालों में घूमती स्त्रियों को गलत और नकारात्मक ऊर्जा का वाहक मानते हैं. कट्टरपंथियों की एक जमात है जिन के मुताबिक़ खुले बाल शोक, अशुद्धि और वशीकरण का जरिया है. आजकल फैशन की होड़ में भले ही महिलाएं बालों को खुला रखने लगी हैं मगर यह सरासर गलत है. संस्कारशील और मर्यादित जीवन जीने वाली कुलीन स्त्रियों को हमेशा अपने बाल बाँध कर रखने चाहिए. ये कट्टरपंथी अपनी इस सोच का सत्यापन धर्मशास्त्रों में लिखे कुछ उदाहरणों से करते हैं;

बंधे बाल सौभाग्य और मर्यादा की निशानी

सलीके से बंधे हुए बालों को संस्कार और अच्छे चरित्र की निशानी माना जाता रहा है. रामायण में बताया गया है कि जब सीता का राम से विवाह होने वाला था उस समय उन की माता सुनयना ने सीता के बाल बांधते हुए कहा था,” बेटी, विवाह के बाद सदा अपने केश बांध कर रखना. बंधे हुए लंबे बाल आभूषण और श्रृंगार होने के साथसाथ संस्कार व मर्यादा में रहना सिखाते हैं. बंधे हुए बाल रिश्तों को भी एक डोरी में बाँध कर रखते हैं. ये सौभाग्य की निशानी है. एकांत में केवल अपने पति के लिए इन्हें खोलना.”

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बल प्राप्ति के लिए

कट्टरपंथियों का मानना है कि हजारोंलाखों साल पहले हमारे ऋषिमुनियो ने शोध कर यह अनुभव किया कि सिर के काले बालों को पिरामिडनुमा बना कर सिर के उपरी ओर रखने से वह सूर्य से निकली किरणों को अवशोषित कर के शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैैं. जिस से चेहरे की आभा चमकदार, शरीर सुडौल व बलवान होता है.

यही कारण है कि ऋषिमुनियों ने हमेशा बाल बांध कर यानी जटा बना कर ही रखा. आज भी किसी लंबे अनुष्ठान, नवरात्रि , सावन या श्राद्ध के समय बालों को न काट कर बल प्राप्त किया जाता है. सिखों में भी स्त्रियों के साथसाथ पुरुषों को भी लम्बे बाल रखने की सीख दी गई है जिन्हे वे हमेशा बाँध कर रखते हैं.

खुले बाल शोक की निशानी

महिलाओं के लिए बाल सवांरना अत्यंत आवश्यक माना जाता है. उलझे एवं बिखरे हुए बाल अमंगलकारी कहे गए हैैं. कैकेई का कोप भवन में बिखरे बालों में रोने से अयोध्या का अमंगल हुआ. यही वजह है कि पुराने समय की औरतें बाल उस समय खुले रखती थीं जब उन के घर में किसी की मृत्यु या किसी चीज़ का शोक चलता था. पति वियोग तथा शोक में डूबी सीता ने अशोक वाटिका में बाल खुले रखे थे.

रात को बाल खोल कर सोना

यह मान्यता भी है कि रात को बाल खुले कर के सोने से लक्ष्मी नाराज़ हो जाती हैं और आप के घर में हमेशा दरिद्रता का निवास रहता है.

खुले बाल विनाश की वजह

इन शास्त्रों में लिखा गया है कि किसी भी इंसान को भूल से भी लड़कियों के बाल नहीं पकड़ने चाहिए. ऐसा करने से उस घर के वंश का नाश हो सकता है. जब रावण सीता का हरण करता है तो उन्हें केशों से पकड़ कर अपने पुष्पक विमान में ले जाता है. इसी वजह से उस का और उस के वंश का नाश हो गया. महाभारत युद्ध से पहले कौरवों ने द्रौपदी के बालों पर हाथ डाला था. नतीजा, उन का समूल नाश हो गया. कंस ने देवकी की आठवीं संतान को जब बालों से पटक कर मारना चाहा तो वह उस के हाथों से निकल कर महामाया के रूप में प्रगट हुई. कंस ने भी अबला के बालों पर हाथ डाला तो उस के भी संपूर्ण राज-कुल का नाश हो गया.

काम का वास

गरुड़ पुराण के अनुसार बालों में काम का वास रहता है. खुले बालों में औरतों में सेक्स करने की तीव्र इच्छा जागृत होती है. खुले बालों की वजह से महिलाएं ज्यादा इमोशनल भी हो जाती हैं जिस से वे ऐसे काम करने पर मजबूर हो जाती हैं जो सामान्य रूप से नहीं करना चाहतीं.

अशुद्ध होते हैं बाल

बालों का बारबार स्पर्श करना दोष कारक बताया गया है. क्योकि बालों को अशुध्द माना गया है. दैनिक दिनचर्या में भी नहाने के बाद बालों में तेल लगा कर उसी हाथ से शरीर के किसी भी अंग में तेल लगाने से मना किया जाता है और हाथों को धोने को कहा जाता है. भोजन आदि में बाल आ जाय तो उस भोजन को ही हटा दिया जाता है.
मुण्डन या बाल कटाने के बाद शुद्ध स्नान आवश्यक बताया गया है. बडे यज्ञ अनुष्ठान तथा हर शुद्धिकर्म में बालों के मुण्डन का विधान है.

वशीकरण का जरिया

बालों के द्वारा बहुत सी तन्त्र क्रियाऐं जैसे वशीकरण वगैरह संपन्न कराया जाता है. कहा जाता है कि यदि कोई स्त्री खुले बालों में निर्जन स्थान या ऐसे स्थान, जहाँ पर किसी की अकाल मृत्यु हुई है, से गुजरती है तो अवश्य ही प्रेत बाधा का योग बन जायेगा.

खुले बाल यानी स्वछंद आचरण

हमारे सभी पौराणिक कथाओं में महिलाओं को बाल बंधे हुए और जुड़े में ही दिखाया जाता था. यहां तक की सभी देवियों के बाल बंधे होते थे. कट्टरपंथियों का मानना है कि वर्तमान समय में पश्चिमी सभ्यता के प्रभाव से महिलाएं खुले बाल कर के रहना चाहती हैं और जब बाल खुले होगें तो जाहिर है कि आचरण भी स्वछंद ही होगा. यही वजह है कि आज महिलाएं संस्कार और परम्पराओं की धज्जियां उड़ा कर लिव इन में रह रही हैं, तलाक ले रही हैं, पराए मर्द के चक्कर में फंस रही हैं या फिर देह का सौदा कर रही है.

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कई वैज्ञानिकों जैसे इंग्लैंड के डॉ स्टैनले हैल, अमेरिका के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ गिलार्ड थॉमस आदि ने पश्चिमी देश की महिलाओं का बडी संख्या में निरीक्षण के आधार पर लिखा कि केवल 4 प्रतिशत महिलाएं ही शारीरिक रूप से पत्नी व माँ बनने के योग्य हैं. शेष 96 प्रतिशत स्त्रियां, बाल कटाने के कारण पुरुष भाव ग्रहण कर चुकी हैं और वे इस वजह से माँ बनने के लिये अयोग्य हैं.

नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा

खुले बाल नकारात्मकता का प्रतीक हैं . जिस घर की महिलाएं बाल खुले रखती हैं उस घर में हमेशा क्लेश का माहौल बना रहता है. शास्त्रों के अनुसार जो महिलाएं रात को अपने बाल खुले रख कर सोती हैं, उन पर बुरी शक्तियाँ अधिक प्रभावी होती हैं. ऐसे में उन शक्तियों से दूर रहने के लिए महिलाओं को बाल बाँध कर ही सोना चाहिए. खुले बाल वाली औरतों पर चुड़ैल का साया होता है.

अब जरा इन धार्मिक मान्यताओं और कट्टरपंथियों की सोच को सत्य और विवेक के तराजू पर रखें;

देह हमारा मर्जी हमारी

पहली बात तो यह कि प्रकृति ने हर इंसान को एक शरीर दिया है. इस शरीर पर किसी और का नहीं बल्कि उस का अपना अधिकार है. वह इस शरीर को जैसे चाहे वैसा रख सकता है. कोई दूसरा शख्स या धर्म हमें यह नहीं बता सकता कि शरीर के किस अंग को कैसे रखना है.

सिर के बाल शरीर का हिस्सा हैं. स्त्री की अपनी देह है. वह अपने बालों को खुला रखे या बांध कर, आभूषणों से सजाए या फूलों से, ढक कर रखें या खोल कर, इस में किसी और को बोलने का हक किस ने दिया?

पुरुषों के बालों पर चर्चा क्यों नहीं

यदि खुले बाल वाकई नकारात्मक उर्जा, शोक और वशीकरण का जरिया है और उन पर प्रतिबंध लगाने ही हैं तो फिर केवल स्त्री क्यों? प्रकृति ने पुरुषों को भी बाल दिए हैं. उन के बालों पर चर्चा क्यों नहीं होती है? पुरुष अपने बाल छोटे क्यों रखते हैं? स्त्रियों के लिए बालों को लंबा रखना आवश्यक क्यों है? ऐसे तमाम प्रश्न हैं जिन का जवाब कभी नहीं मिलता.

दबाने की साज़िश

सच तो यह है कि ऐसी मान्यताओं और सीखों की आड़ में कट्टरपंथियों द्वारा स्त्रियों को दबा कर और झुका कर रखने के दांव खेले जाते हैं. उन्हें बंधा हुआ महसूस कराया जाता है. बालों को बांधने का गूढ़ तात्पर्य स्त्रियों की स्वतंत्रता, उन की सोच और उन के बढ़ते कदमों को बांधना है. उन के वजूद को बांध कर रखना है ताकि वे किसी वस्तु की तरह सिमट कर एक कोने में पड़ा रहना सीख जाएं. खुले बालों के साथ वे खुद भी उड़ान भरने की बात न सोचें.

खुले बालों से स्त्रियां खूबसूरत लगती हैं. लोग उन की तारीफ करते हैं. उन्हें आगे बढ़ते देखना चाहते हैं. इस से महिलाओं के अंदर आत्मविश्वास का संचार होता है और यही आत्मविश्वास कट्टरपंथियों की आंखों में खटकने लगता है. वे लाख बहाने बनाते हैं. धर्मशास्त्रों का उदाहरण देते हैं. पर क्या कोई भूल सकता है कि इन धर्मशास्त्रों में लिखी कहानियां भी पुरुष वर्चस्ववादी समाज की देन है.

उस वक्त भी औरतें गुलाम थीं और आज भी उन्हें गुलाम बनाए रखने के प्रपंच रचे जाते हैं. मगर कब तक? ऐसा कब तक चल सकता है?

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आज की पढ़ीलिखी महिलाएं ऐसी तर्कहीन बातों को जेहन में आने भी नहीं देतीं. उन की उड़ान उन्हें आगे बुला रही है और वे भी अपने लहराते, उड़ते बालों की तरह कट्टरपंथी सोच के खिलाफ अपनी जंग जीतने और खुद को साबित करने को बेताब हैं.

और ‘तोड़’ टूट गई

मैं 3 महीने से उस आफिस का चक्कर लगा रहा था. इस बार इत्तेफाक से मेरे पेपर्स वाली फाइल मेज पर ही रखी दिख गई थी. मेरी आंखों में अजीब किस्म की चमक सी आ गई और मुन्नालालजी की आंखों में भी.

‘‘मान्यवर, मेरे ये ‘बिल’ तो सब तैयार रखे हैं. अब तो सिर्फ ‘चेक’ ही बनना है. कृपया आज बनवा दीजिए. मैं पूरे दिन रुकने के लिए तैयार हूं,’’ मैं ने बड़ी ही विनम्रता से निवेदन किया.

उन्होंने मंदमंद मुसकान के साथ पहले फाइल की तरफ देखा, फिर सिर पर नाच रहे पंखे की ओर और फिर मेरी ओर देख कर बोले, ‘‘आप खाली बिल तो देख रहे हैं पर यह नहीं देख रहे हैं कि पेपर्स उड़े जा रहे हैं. इन पर कुछ ‘वेट’ तो रखिए, नहीं तो ये उड़ कर मालूम नहीं कहां चले जाएं.’’

मैं ‘फोबोफोबिया’ का क्रौनिक पेशेंट ठहरा, इसलिए पास में रखे ‘पेपरवेट’ को उठा कर उन पेपर्स पर रख दिया. इस पर मुन्नालालजी के साथ वहां बैठे अन्य सभी 5 लोग ठहाका लगा कर हंस पड़े. मैं ने अपनी बेचारगी का साथ नहीं छोड़ा.

मुन्नालालजी एकाएक गंभीर हो कर बोले, ‘‘एक बार 3 बजे आ कर देख लीजिएगा. चेक तो मैं अभी बना दूंगा पर इन पर दस्तखत तो तभी हो पाएंगे जब बी.एम. साहब डिवीजन से लौट कर आएंगे.’’

मैं ने उसी आफिस में ढाई घंटे इधरउधर बैठ कर बिता डाले. मुन्नालालजी की सीट के पास से भी कई बार गुजरा पर, न ही मैं ने टोका और न ही उन्होंने कोई प्रतिक्रिया जाहिर की. ठीक 3 बजे मेरा धैर्य जवाब दे गया, ‘‘बी.एम. साहब आ गए क्या?’’

‘‘नहीं और आज आ भी नहीं पाएंगे. आप ऐसा करें, कल सुबह साढ़े 11 बजे आ कर देख लें,’’ उन्होंने दोटूक शब्दों में जवाब दिया.

वैसे तो मैं काफी झल्ला चुका था पर मरता क्या न करता, फिर खून का घूंट पी कर रह गया.

मैं ने वहां से चलते समय बड़े अदब से कहा, ‘‘अच्छा, मुन्नालालजी, सौरी फौर द ट्रबल, एंड थैंक यू.’’ पर मेरा मूड काफी अपसेट हो चुका था इसलिए एक और चाय पीने की गरज से फिर कैंटीन में जा पहुंचा. संयोग ही था कि उस समय कैंटीन में बिलकुल सन्नाटा था. उस का मालिक पैसे गिन रहा था. जैसे ही मैं ने चाय के लिए कहा, वह नौकर को एक चाय के लिए कह कर फिर पैसे गिनने लगा.

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मैं ने सुबह से 3 बार का पढ़ा हुआ अखबार फिर से उठा लिया. अभी इधरउधर पलट ही रहा था कि वह पैसों को गल्ले के हवाले करते हुए मेरे पास आ बैठा, ‘‘माफ कीजिएगा, मुझे आप से यह पूछना तो नहीं चाहिए, पर देख रहा हूं कि आप यहां काफी दिनों से चक्कर लगा रहे हैं, क्या मैं आप के किसी काम आ सकता हूं?’’ कहते हुए उस ने मेरी प्रतिक्रिया जाननी चाही.

‘‘भैया, यहां के एकाउंट सैक्शन से एक चेक बनना है. मुन्नालालजी 3 महीने से चक्कर लगा रहे हैं,’’ मैं ने कहा.

‘‘आप ने कुछ तोड़ नहीं की?’’ उस ने मेरी आंखों में झांका.

‘‘मैं बात समझा नहीं,’’ मैं ने कहा.

‘‘बसबस, मैं समझ गया कि क्या मामला है,’’ उस ने अनायास ही कह डाला.

‘‘क्या समझ गए? मुझे भी तो समझाइए न,’’ मैं ने सरलता से कहा.

‘‘माफ कीजिएगा, या तो आप जरूरत से ज्यादा सीधे हैं या फिर…’’ वह कुछ कहतेकहते रुक गया.

‘‘मैं आप का मतलब नहीं समझा,’’ मैं ने कहा.

‘‘अरे, ऐसे कामों में कुछ खर्चापानी लगता है जिस को कुछ लोग हक कहते हैं, कुछ लोग सुविधाशुल्क कहते हैं और कुछ लोग ‘डील’ करना कहते हैं. यहां दफ्तर की भाषा में उसे ‘तोड़’ कहा जाता है.’’

‘‘तो इन लोगों को यह बताना तो चाहिए था,’’ मैं ने उलझन भरे स्वर में कहा.

‘‘यह कहा नहीं जाता है, समझा जाता है,’’ उस ने रहस्यात्मक ढंग से बताया.

‘‘ओह, याद आया. आज मुन्नालालजी ने मुझ से पेपर्स पर ‘वेट’ रखने के लिए कहा था. शायद उन का मतलब उसी से रहा होगा,’’ मैं ने उन को बताया.

‘‘देखिए, किसी भी भौतिक वस्तु में जो महत्त्व ‘वेट’ यानी भार का है वही महत्त्व भार में गुरुत्वाकर्षण शक्ति का है. आप गुरुत्वाकर्षण का मतलब समझते हैं?’’ उस ने पूछा.

‘‘हां, बिलकुल, मैं ने बी.एससी. तक फिजिक्स पढ़ी है,’’ मैं ने कहा.

‘‘तो यह रिश्वत यानी वेट यानी डील यानी सुविधाशुल्क उसी गुरुत्वाकर्षण शक्ति के जैसा काम करता है. बिना इस के वेट नहीं और बिना वेट के पेपर्स उड़ेंगे ही. वैसे आप का कितने का बिल है?’’ वह गुरुत्वाकर्षण का नियम समझाते हुए पूछ बैठा.

‘‘60,400 रुपए का,’ मैं ने झट से बता दिया.

‘‘तो 6 हजार रुपए दे दीजिए, चेक हाथोंहाथ मिल जाएगा,’’ वह बोला.

‘‘पर यह दिए कैसे जाएं और किसे?’’

‘‘मुन्नालालजी को यहां चाय के बहाने लाएं. उन के हाथ में 6 हजार रुपए पकड़ाते हुए कहिए, ‘यह खर्चापानी है.’ फिर देखिए कि चेक 5 मिनट के अंदर मिल जाता है कि नहीं,’’ कहते हुए वह उठ खड़ा हुआ.

मैं ने उसी बिल्ंिडग में स्थित ए.टी.एम. से जा कर 7 हजार रुपए निकाले. उस में से 1 हजार अपने अंदर वाले पर्स में रखे और बाकी बाईं जेब में रख कर मुन्नालालजी के पास जा पहुंचा तथा जैसे मुझे चाय वाले ने बताया था मैं ने वैसा ही किया. मैं चेक भी पा गया था पर लौटते समय मैं ने उस कैंटीन वाले को शुक्रिया कहना चाहा.

उस ने मुझे देखते ही पूछा, ‘‘चेक मिला कि नहीं?’’

‘‘साले ने 6 हजार रुपए लिए थे. चेक कैसे न देता?’’ मेरे मुंह से निकल गया.

मैं वहां से बाहर आ कर गाड़ी स्टार्ट करने वाला ही था कि एक चपरासी ने आ कर कहा, ‘‘मांगेरामजी, आप को मुन्नालालजी बुला रहे हैं.’’

पहले मैं ने सोचा कि गाड़ी स्टार्ट कर के अब भाग ही चलूं, पर जब उस ने कहा कि चेक में कुछ कमी रह गई है तो मैं ने अपना फैसला बदल लिया.

जैसे ही मैं मुन्नालालजी के पास पहुंचा वे बोले, ‘‘अभी आप को फिर से चक्कर लगाना पड़ता. उस चेक में एक कमी रह गई है.’’

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मैं ने खुशीखुशी चेक निकाल कर उन को दिया. उन्होंने उसे फिर से दबोच लिया. फिर मेरे दिए हुए 6 हजार निकाल कर मेरी ओर बढ़ा कर बोले, ‘‘ये आप के पैसे आप के पास पहुंच गए और यह मेरा चेक मेरे पास आ गया. अब आप जहां और जिस के पास जाना चाहें जाएं, कोर्ट, कचहरी, विधानसभा, पार्लियामैंट, अखबारों के दफ्तर या अपने क्षेत्र के दादा के पास. तमाम जगहें हैं.’’

हाथ में आई मोटी रकम यों फिसल जाएगी यह सोच कर मैं ने मायूसी व लाचारगी से मुन्नालाल को देखा पर कुछ बोला नहीं. मेरे मन में तोड़ की टूटी कड़ी को फिर से जोड़ने की जुगत चल रही थी.

Raksha Bandhan 2020: कोरोना कहर रिश्तों की डोर पर नहीं भारी, आइए जानें क्या कहते है टीवी स्टार्स

रक्षा बंधन का त्यौहार हर साल खुशियों के साथ आता है पूरा साल बहने भाई की कलाई में राखी बाँधने का इंतजार करती है, लेकिन इस साल कोरोना संक्रमण की वजह से भाई-बहनों के इस त्यौहार को बहुत ही साधारण तरीके से मनाया जाएगा, क्योंकि जरुरत के बिना कही भी ट्रेवल करना मना है. भाई-बहन भले ही कितनी दूर हो, पर उनका प्यार हमेशा एक दूसरे के साथ बना रहेगा. उनकी जिंदगी एक दूसरे के बिना हमेशा अधूरी ही रहेगी. इसकी मिठास हमेशा किसी न किसी रूप में रहती है.

बचपन के वे पल जिनमें उनकी नोंक-झोंक, खट्टी-मीठी बातें, जिन्हें याद कर आज भी वे खुश हो जाते है. टीवी के सितारें, जिनके हिसाब से समय कितना भी बदल जाय, महामारी भी आ जाय, पर रक्षाबंधन का त्यौहार आज भी उतनी ही खुशियाँ लेकर उनके जीवन में आएगी, जैसा हर साल रहा है. कैसा रहेगा रक्षाबंधन का त्यौहार उनके लिए इस साल ? आइये जाने उन्ही से, 

अभिनेता शशांक व्यास कहते है कि मेरी बहन शादीशुदा है और जोधपुर में रहती है. पिछले 11 सालों से वह राखी भेजती है. वह बहुत ही साधारण महिला है. मुझे याद आता है, जब बचपन में हम दोनों आपस में खूब लड़ते थे. आज वह एक माँ, बहू और पत्नी की भूमिका निभा रही है, जिसका मुझे गर्व है.

अभिनेता वीरेन्द्र कुमारिया की फर्स्ट कजिन बचपन से राखी बांधती आ रही है. पिछले 10 सालों से वह शादी के बाद दुबई चली गई है. वह वहां से राखी हर साल भेजती है. इस साल भी शायद ऐसा ही होने वाला होगा. असल में कोरोना संक्रमण इस साल इस त्यौहार को मनाने में बाधक है, लेकिन मुझे बचपन की वे छोटी-छोटी शरारतें आज भी याद है, जिसे मैं मन ही मन एन्जॉय करता हूं. 

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धारावाहिक ‘कवच’ एक्ट्रेस प्रनिता पंडित कहती है कि मैं इस साल अपने भाई को राखी पर एक्स्पेक्ट कर रही थी, क्योंकि मैं प्रेग्नेंट हूं और खूब मनाना चाहती थी, पर कोरोना काल की वजह से वीडियो काल के सहारे ही सेलिब्रेट करुँगी.मेरी बहन जो दिल्ली में रहती है वह मेरे नाम की राखी भाई को बांधेगी. मेरा भाई हमेशा मुझे अच्छी सलाह देता है. वह हर बात का आकलन सच्चाई के साथ करता है. कभी भी अनरियलिस्टिक एक्सपेक्टेशन्स लाइफ या किसी रिलेशनशिप के बारें में नहीं देता. मैं अपने जीवन में रियलिटी चेक करने के लिए उसके पास ही जाना पसंद करती हूं. 

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अभिनेत्री खुश्बू कमल का कहना है कि काम के शुरू हो जाने से मैं मुंबई से कानपूर हर साल नहीं जा पाती. इसलिए मैं हमेशा राखी भेज देती हूं और मेरी बहन उसे बांध देती है. पिछले 5 सालों से ऐसा ही चल रहा है और मैं उस दिन को बहुत मिस करती हूं. मुंबई में भी मेरा राखी भाई लेखक विशाल कुमार  और चाइल्ड आर्टिस्ट मोहम्मद सौद मंसूरी है, जिन्हें मैं हर साल राखी बांधती हूं. 

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 ठाकुर गर्ल्स फेम मीरा देओस्थले कहती है कि मेरा भाई कनाडा में पिछले 3 साल से रह रहा है. इसलिए हर साल हम एक दूसरे को गिफ्ट भेजते है. मैं यहाँ से राखी और मिठाइयाँ भेजती हूं और वह मुझे खूब सारे गिफ्ट भेजता है. वह मुझसे छोटा है और मेरा व्यवहार अधिकतर माँ की तरह ही होता है. बचपन में हम दोनों एक दूसरे से खूब लड़ते थे, पर अब मुंबई आ जाने के बाद से हम दोनों ही अब मैच्योर हो गए है. अभी हम एक दूसरे के काम और कैरियर को लेकर बातचीत करते है. एक बार उसने मेरे लिए बहुत बढ़िया मैगी बनायीं थी. इस साल भी वह भारत आने वाला था, पर पेंडेमिक की वजह से नहीं आ पाया. मुझे अभी एक साल और उसके आने का इंतजार करना होगा. 

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अभिनेता शर्मन जैन का कहना है कि इस बार मेरे लिए वर्चुअल रक्षाबंधन होने वाला है. पंजाबी होने के नाते राखी मेरे लिए हमेशा स्पेशल रहा है. मुझे नहीं लगता कि मैं दूर रहकर भी कुछ मिस कर रहा हूं, क्योंकि मैं वीडियो कॉल कर सबसे बात कर लेता हूं. इंडस्ट्री में सरगुन मेहता और सनाया ईरानी मुझे राखी बांधती है. इस साल दोनों ही यहां नहीं है, इसलिए मैं दोनों की राखी को मिस करूँगा. इस साल मैं अकेला हूं और बहनों को रियली मिस करूंगा. 

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आशना किशोर के लिए रक्षाबंधन एक स्पेशल दिन है,क्योंकि उसका ट्विन ब्रदर अभिषेक है, जो एक बड़े भाई की तरह उसका ख्याल रखता है. वह कहती है कि मैं इस साल बहुत खुश हूं, क्योंकि इस बार महामारी की वजह से वह मेरे साथ है और मैं उसके साथ रक्षाबंधन मना सकती हूं. पहले यह संभव नहीं था, क्योंकि वह दिल्ली में रहता है. यहाँ भी मेरा एक राखी भाई रमेश बुंदेला है, जिससे मैं मेरी दुर्गा शो के सेट पर मिली थी, जिसमें उसने मेरे भाई की भूमिका निभाई थी. स्क्रीन भाई से अब वह ऑफ स्क्रीन भाई बन चुका है. इस बार मैं उसे राखी नहीं बाँध सकती, क्योंकि वह अपने घर गया हुआ है.

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मनमोहिनी धारावाहिक के अंकित सिवाच कहते है कि इस साल बहुत सारे बदलाव कोरोना की वजह से हुआ है. इसलिए राखी का त्यौहार भी अलग तरीके से मनाना पड़ेगा. मुझे याद है जब मैं अपने कजिन सिस्टर्स के साथ हर साल राखी सेलिब्रेट करता था. गिफ्ट मिलते थे और बहुत सारी खुशियाँ मुझे मिलती थी. इस साल कुछ भी कही भेजना मुश्किल हो चुका है, पर प्यार बाँटने में कोई कमी न हो इसका ख्याल हर भाई-बहन को रखने की जरुरत है. 

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 अभिनेता अमल सेहरावत की इस साल की राखी ज़ूम कॉल पर होने वाली है, लेकिन उन दोनों का रिश्ता अटूट है, जिसे कोई अलग नहीं कर सकता. ये वही रिश्ता है जो हर नकारात्मक चीजों से उन्हें बचाती है.

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अंकिता लोखंडे ने तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘मान ही नहीं सकती कि डिप्रेशन में थे सुशांत’

सुशांत सिंह राजपूत की एक्स गर्लफ्रेंड और टीवी एक्ट्रेस अंकिता लोखंडे ने आखिरकार इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़ दी है. एक्टर के निधन के करीब डेढ़ महीने बाद हाल ही में एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में अंकिता ने सुशांत को लेकर कई अहम खुलासे किए हैं और ये कहा है कि वो ये मान ही नहीं सकती कि सुशांत डिप्रेशन में थे.

कोई भी नहीं जानता सुशांत कौन था…

अंकिता ने कहा- किसी को पता नहीं था कि सुशांत कौन और क्या था. हर कोई अपने हिसाब से उसके बारें में कुछ भी लिख रहा है. यह सब पढ़कर दुख होता है.

बकौल अंकिता जो इंसान छोटी- छोटी चीजों में भी खुशियां ढूढ़ने की कोशिश करता था वो डिप्रेस कैसे हो सकता है. सुशांत सिंह राजपूत के डिप्रेशन में जाने की बात बिल्कुल गलत है. वे ऐसे इंसान नहीं थे,जो सुसाइड कर ले. जब मैं उनके साथ थी तो हमने इससे भी बुरा समय देखा था. वे बहुत ही खुशमिजाज लड़का था. मैं उसे जितना जानती थी, वह डिप्रेशन में नहीं था.

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डायरी में लिखे थे 5 साल के सपने और प्लानिंग

इस इंटरव्यू में अंकिता ने सुशांत पर्सनालिटी, उनके सपनों, आकांक्षाओं और कई चीजों के बारे में बात की. वह आगे कहती हैं कि सुशांत को डायरी लिखने का काफी शौक था और उन्होंने इस डायरी में अपने पांच साल के करियर के प्लान के बारे में भी बताया था. अभिनेत्री ने यह भी खुलासा किया कि सुशांत ने वास्तव में वह सब कुछ जीत लिया जो वह 5 साल बाद चाहता था.

 

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खेती करना चाहते थे सुशांत

अंकिता के मुताबिक- सुशांत ने साफ कहा था कि अगर बॉलीवुड में उनका कुछ नहीं हुआ तो वो खेती करेंगे और शॉर्ट फिल्में बनाएंगे. अभिनेत्री आगे कहती है कि एक टैलेंटेड एक्टर के लिए ‘डिप्रेशन’ और ‘बाइपोलर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना बहुत गलत है.

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मैं चाहती हूं सुशांत को ऐसे याद करें फैंस

अंकिता चाहती हैं कि लोग दिवंगत अभिनेता के बारे में जानें जो एक छोटे शहर से आया था और फिल्मी दुनिया में सुशांत ने एक बड़ा मुकाम बनाया था. मैं चाहती हूं फैंस उसे ऐसे इंसान के तौर पर याद न करें जो डिप्रेस था. वह हीरो थे और एक प्रेरणा थे.”

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