19 दिन 19 टिप्स: खूबसूरत स्किन के लिए सोने से पहले करें ये 11 काम

आप दिनभर रोजमर्रा के कामों में उलझी रहती हैं. दिनभर की थकान के बाद रात में आप आराम करना चाहती हैं. लेकिन क्या आप जानती हैं कि दिनभर का यह संघर्ष आप की स्किन को नुकसान पहुंचा सकता है और समय से पहले उम्र बढ़ने के लक्षण पैदा कर सकता है? इस से बचने के लिए आप को रात में अपनी स्किन की खास देखभाल करनी चाहिए.

रात के समय स्किन की देखभाल

रात के समय स्किन पर न मेकअप होता है न धूलमिट्टी और न ही प्रदूषण, जो स्किन के छिद्रों को बंद कर दे. रात को आप की स्किन खुद अपनी मरम्मत करती है. ऐसे में इस समय कुछ अच्छे प्रोडक्ट्स और तरीकों से आप अपनी स्किन को स्वस्थ एवं जवां बनाए रख सकती हैं. दिन के समय स्किन की सुरक्षा पर तथा रात के समय उस की मरम्मत पर ध्यान देना चाहिए. कुछ सुझावों पर गौर कर आप रात में अपनी स्किन की अच्छी तरह देखभाल कर सकती हैं :

1. होंठों की देखभाल:  रात तक अकसर होंठ सूख ही जाते हैं. कभीकभी तो ड्राई हो कर फटने भी लगते हैं. खासतौर पर तब जब आप नियमित रूप से लिप बाम का इस्तेमाल नहीं करती हैं. होंठों को कुनकुने पानी से धो कर मुलायम कपड़े से साफ करें. इस से डैड स्किन निकल जाएगी. इस के बाद लिप बाम लगाएं.

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2. मेकअप हटा दें: रात को मेकअप उतार कर ही सोएं. इस के लिए अच्छा मेकअप रिमूवर इस्तेमाल करें.

3. स्किन को अच्छी तरह साफ करें:  मेकअप उतारने के बाद चेहरे को अच्छे क्लींजर से साफ कर पानी से धो लें.

4. एक्सफोलिएट करें:  हालांकि ऐक्सफोलिएशन स्किन को अच्छी तरह साफ करता है, लेकिन इस का इस्तेमाल सप्ताह में 2-3 बार ही करना चाहिए. यह स्किन के डैड सैल्स को निकाल कर उसे कोमल और मुलायम बनाता है. गालों पर मौजूद छिद्रों और नाक के ब्लैकहैड्स पर अच्छी तरह स्क्रब करें. मगर ध्यान रहे कि स्क्रब का इस्तेमाल जरूरत से ज्यादा न करें.

5. टोन करें:  ऐक्सफोलिएट करने के बाद अलकोहल बेस्ड स्किन टोनर इस्तेमाल करें. यह स्किन का पीएच संतुलन बनाए रखता है. कौटन को टोनर से गीला कर चेहरे और गरदन पर लगाएं.

6. मौइस्चराइजर: स्किन की क्लींजिंग के बाद उसे मौइस्चराज करना बहुत जरूरी है. जब आप चेहरा धोती हैं, तो धूलमिट्टी, मेकअप के साथ जरूरी तेल भी निकल जाता है. इसलिए स्किन को पोषण देने के लिए मौइस्चराइजर जरूरी है. अगर स्किन औयली है, तो वाटर बेस्ड मौइस्चराइजर चुनें. कुहनियों, घुटनों, एडि़यों, हाथों और पैरों पर भी मौइस्चराइजर जरूर लगाएं, क्योंकि रात के समय शरीर के ये हिस्से ज्यादा ड्राई हो जाते हैं.

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7. आई क्रीम: आंखों के पास औयल ग्लैंड्स  यानी तेल की ग्रंथियां नहीं होती, इसलिए चेहरे के इस हिस्से पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत होती है. अच्छी आई क्रीम आंखों के आसपास की स्किन को मौइस्चराइज करती है और डार्क सर्कल्स, पफीनैस से बचाती है. क्रीम को हलके हाथों से लगाएं ताकि वह स्किन में समा जाए.

8. सिल्क अपनाएं:  दिनभर की थकान के बाद अकसर हम रात में करवटें बदलते रहते हैं. ऐसे में आप का तकिया और बिस्तर मुलायम होने चाहिए ताकि करवटें बदलने के दौरान स्किन पर खिंचाव न आए और उसे आराम मिल सके.

9. खूब पानी पीएं:  खूब पानी पीने से शरीर हाइड्रेटेड रहता है, लेकिन अकसर हम ऐसा नहीं कर पाते. पानी न केवल खाना पचाने और पोषक तत्त्वों को शरीर के सभी हिस्सों तक पहुंचाने में मदद करता है, बल्कि यह स्किन को स्वस्थ और जवां भी बनाए रखता है. खूब पानी पीने से स्किन सेहतमंद और चमकदार बनी रही है.

10. सेहतमंद आहार लें: स्किन को स्वस्थ बनाए रखने के लिए पोषक तत्त्वों से भरा भोजन जरूरी है. इसलिए संतुलित आहार लें. आप का आहार न केवल आप के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि स्किन को भी सेहतमंद बनाता है. स्किन के लिए विटामिन ए और ई खासतौर पर जरूरी हैं. फल, हरी सब्जियां, मेवा, ऐवोकाडो, सालमन फिश जैसे खाद्यपदार्थों का सेवन करें. ऐसा करने से न केवल आप का शरीर स्वस्थ रहेगा, बल्कि चेहरे पर भी चमक आएगी.

11. बालों को ब्रश करें:  अगर आप रात को बाल बांध कर सोती हैं, तो वे ज्यादा टूटते हैं. रात को बालों में ब्रश कर हेयर कंडीशनर लगाएं. पोनीटेल बना कर न सोएं, क्योंकि इस से बाल टूटने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है. रात के समय आराम करना स्किन के लिए सब से ज्यादा फायदेमंद है. अत: पूरी नींद लें और सोने से पहले कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन न करें. नींद पूरी न होने से एजिंग की प्रक्रिया जल्दी होती है. इसलिए स्वस्थ और चमकदार स्किन के लिए रात को आराम करना बहुत जरूरी है.

-डा. आर के जोशी

सीनियर कंसल्टैंट डर्मैटोलौजी, इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली

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19 दिन 19 टिप्स: खूबसूरत दिखेंगी जब ब्रा होगी स्टाइलिश

त्योहारों के दिनों में सजनेसंवरने के मौके आते ही रहते हैं. ऐसे में सब से बड़ी दिक्कत होती है यह सोचना कि अब अगले मौके पर क्या पहनना है. हर बार सब से बढ़िया फैशन लुक पाना हर लड़की और हर स्त्री की चाहत होती है. त्योहारों में स्टाइलिश फैशन आउटफिट्स की तैयारी में और आप के फैशन कोशंट को बढ़ाने में सही ब्रा की भूमिका से भी इंकार नहींकिया जा सकता. आइये इस सन्दर्भ में जिवामे की किरूबा देवी द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी ;

1. ऑर्नेट ग्लिट्ज़ ब्रा

बहुत ही सुंदर, शानदार, हाई ग्लैम ब्रा जिन्हें बहुत ही छोटे और सुंदर स्पार्कल्स से सजाया जाता है. किसी भी लहंगे या साड़ी के साथ ये ब्रा खूब जंचते हैं. रिच वाइन और बेज कलर के इस कलेक्शन में ब्लाउज ब्रा भी होते हैं जो स्टाइलिश होने के साथ बेहतर फिटिंग वाले होते हैं. एक बार आप इसे पहन ले तो ब्लाउज पहनने की (और उस के अंदर ब्रा) भी कोई जरुरत नहीं.

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2. स्वीट कैरोलाइन ब्रा

फूलों के प्रिंट्स से सजाया गया टी-शर्ट ब्रालेट दिन में आउटिंग के समय पहनने के लिए बिलकुल सही है. हाई ग्लैम लुक्स से थोड़ा ब्रेक लेना चाहती हैं तो इस फ्लोरल ब्रालेट पर कोई भी श्रग, हाई वेस्टेड पैन्ट्स और स्नीकर्स पहन लीजिए और अपने दोस्तों के साथ किसी कॉफी शॉप में चिल टाइम के लिए तैयार हो जाइये. इतना ही नहीं इस डे लूक को आप बड़ी आसानी से नाईट लुक में भी बदल सकती हैं. जीन्स की  जगह कोई भी फ्लोरल स्कर्ट पहन लीजिए. उस पर मैचिंग ज्वेलरी और दुपट्टा के साथ पूरा हो जाता है आप का चिक लुक.

3. विंटेज लेस ब्रा

पुराने दिनों की हमारी बॉलीवुड अभिनेत्रियों ने क्लासिक साड़ियों, ‘नो मेक-अप’ मेकअप लूक्स और बेजोड़ अदाकारी से विंटेज ज़माने को यादगार बनाया है. त्योहारों के दिनों में विंटेज लेस ब्रा को पहन कर आप भी वही खूबसूरती, वही रोमांस अपने फैशन के जरिए दिखा सकती हैं. इस शानदार ब्रा के साथ पफ्ड स्लीव ब्लाउज और अपनी दादी या नानी की सब से प्यारी साड़ी पहनिए. आप की खूबसूरती को चार चांद लग जाएंगे.

4. ट्वाईलाईट ब्लूम ब्रा

पुराने स्टाइल के ब्लाउज से ऊब चुकी हैं तो इस ब्रा के साथ परफेक्ट फिट होने वाला वाइट क्रॉप टॉप पहनिए. साथ में फ्लेअर्ड पैन्ट्स, चंकी सिल्वर ज्वेलरी और कूल फ्लैट्स के साथ पूरे आत्मविश्वास से बाहर निकलिए. दोपहर में किसी त्यौहार में जाना हो या पंडाल में दोस्तों के साथ समय बिताना हो तो यह लूक सब से अच्छा है.

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एक कप कौफी: भाग-2

गौतमी अब भी शांत थी. उस के चेहरे पर शिकन का नामोनिशान नहीं था. उस ने अनुप्रिया की ओर देख कर पूछा, ‘‘अगर तुम्हें एतराज न हो तो क्या मैं तुम से एक सवाल पूछ सकती हूं?’’ अनुप्रिया के स्वीकृति देने पर उस ने प्रश्न किया, ‘‘तुम तलाकशुदा हो न?’’

‘‘मेरी निजी जिंदगी से जुड़े सवाल पूछने का तुम्हें कोई हक नहीं है गौतमी,’’ अनुप्रिया ने गुस्से में कहा. ‘‘मुझे पूरा हक है अनुप्रिया. तुम ने मेरी निजी जिंदगी में दखल दे कर मेरे पति को मुझ से छीनने की ठान रखी है. फिर मैं तो सिर्फ सवाल ही पूछ रही हूं.’’

अनुप्रिया के पास गौतमी के इस तर्क की कोई काट नहीं थी. उस ने मन मार कर उत्तर दिया, ‘‘हां.’’ ‘‘तुम्हारा तलाक क्यों हुआ?’’

‘‘इस बात का मेरे और पराग के रिश्ते से कोई संबंध नहीं है.’’ ‘‘प्लीज अनुप्रिया…कुछ देर के लिए कड़वाहट भुला कर मेरे प्रश्नों के उत्तर दो. संबंध का पता तुम्हें खुद ही चल जाएगा. बदले में तुम जो चाहो मुझ से पूछ सकती हो.’’

अनुप्रिया गौतमी के सवालों के जवाब नहीं देना चाहती थी. उसे महसूस हो रहा था कि उस ने यहां आ कर गलती कर दी. पर अब यहां आ ही गई थी तो करती भी क्या? अगर वह चाहती तो यहां से उठ कर जा सकती थी, पर ऐसा कर के वह गौतमी के सामने खुद को कमजोर नहीं दिखाना चाहती थी. इसलिए उस ने अपनी पिछली जिंदगी के बारे में बताना शुरू किया, ‘‘मेरे पति तरुण का किसी निदा नाम की लड़की के साथ अफेयर था. जब मुझे पता चला तो मैं ने उन से तलाक लेने का फैसला कर लिया.’’ ‘‘उफ, तुम्हारी शादी कितने समय तक चली थी?’’ ‘‘लगभग डेढ़ साल. 2 साल पहले तलाक के बाद मैं दिल्ली आ गई थी.’’

‘‘दिल्ली आने के बाद तुम पराग से मिलीं और तुम दोनों का अफेयर शुरू हो गया,’’ गौतमी बोली.

‘‘हां…’’ ‘‘क्या तुम्हें शुरू से पता था कि पराग शादीशुदा हैं और उन का 1 बेटा भी है?’’

‘‘हां, मैं ने उन के दफ्तर में आप तीनों की तसवीर देखी थी.’’ गौतमी कुछ क्षण चुप रही. फिर अनुप्रिया की ओर गंभीरता से देख कर पूछा, ‘‘क्या तुम ने कभी तरुण को वापस पाने की कोशिश

नहीं की? उसे इतनी आसानी से तलाक क्यों दे दिया?’’ अनुप्रिया समझ रही थी कि गौतमी उसे अपनी बातों के जाल में फंसाना चाह रही है, पर उस ने यह सवाल पूछ कर अनुप्रिया को अपनी बात ऊपर रखने का बहुत अच्छा मौका दे दिया. उस ने बिना वक्त गंवाए उत्तर दिया, ‘‘नहीं, क्योंकि ऐसे आदमी के साथ रहने का कोई फायदा नहीं है जो किसी और से प्यार करता हो. इसलिए मैं ने उसे तलाक दे दिया. तुम्हें भी पराग को तलाक दे कर आजाद कर देना चाहिए.’’

‘‘स्मार्ट मूव,’’ गौतमी ने हंसते हुए कहा, ‘‘पर तुम में और मुझ में बहुत फर्क है. मैं पीठ दिखा या मैदान छोड़ भागने वालों में से नहीं हूं.’’ ‘इस औरत पर तो किसी बात का कोई असर ही नहीं हो रहा है. पता नहीं किस मिट्टी की बनी है,’ सोच कर अनुप्रिया मन ही मन खीज उठी. फिर तलखीभरे स्वर में कहा, ‘‘मैं ने तुम्हारे सवालों के जवाब दे दिए. अब सवाल पूछने की बारी मेरी है.’’

‘‘ठीक है, पूछो.’’ अनुप्रिया ने गौतमी की आंखों में आंखें डाल कर पूछा, ‘‘तुम्हारा पति मेरे साथ रिलेशनशिप में है, यह जानते हुए भी तुम यहां बैठ कर मेरे साथ कौफी पी रही हो. ऐसा क्यों?’’

‘‘तुम्हारे इस सवाल का जवाब तो मैं ने यहां आते ही दे दिया था. मैं तुम्हें यह बताने आई हूं कि पराग तुम से शादी नहीं करेगा.’’ ‘‘और मैं भी तुम्हें बता चुकी हूं कि पराग तुम से नहीं मुझ से प्यार करता है. वह बहुत जल्दी मुझ से शादी करेगा.’’

‘‘अगला सवाल,’’ गौतमी ने कौफी का घूंट भरते हुए पूछा.’’ ‘‘क्या तुम्हें मुझ से डर नहीं लगता है?’’ अनुप्रिया को लगा कि अब मुसकराने की बारी उस की है.

‘‘बिलकुल नहीं. डरता वह है जो गलत होता है. तुम अपने पति से धोखा खा कर तलाक ले चुकी हो और अब खुद दूसरी औरत बन कर पराग की जिंदगी में पड़ी हो. अब तुम्हें दूसरी बार भी धोखा ही मिलने वाला है, डरना तो तुम्हें चाहिए अनुप्रिया.’’ अनुप्रिया के चेहरे से मुसकान के साथ रंग भी उड़ गया. वह दांत पीसते हुए बोली, ‘‘हाऊ डेयर यू?’’

गौतमी ने सीधे बैठते हुए कहा, ‘‘बस इतनी बात पर तुम्हें गुस्सा आ गया? मैं तुम पर कटाक्ष नहीं कर रही हूं, बल्कि तुम्हें सच का आईना दिखा रही हूं और सच तो सब को मीठा नहीं लगता है न?’’ ‘‘तुम्हें क्या लगता है मैं तुम्हारी बातों से डर जाऊंगी?’’ अनुप्रिया ने आंखें तरेरी.

गौतमी ने हौले हंस कर कहा, ‘‘तुम्हें डराने का मेरा कोई इरादा भी नहीं है. यह तुम भी जानती हो कि तुम ने मेरे साथ बहुत गलत किया है पर क्या मैं ने अभी तक तुम से बदला लेने के लिए कुछ भी किया है? तुम पर चीखीचिल्लाई या इलजाम लगाए? अगर मैं ऐसा कुछ भी करूं तो तुम्हें भी पता है कि कितने लोग तुम्हें गलत कहेंगे और कितने मुझे सही कहेंगे.’’ अनुप्रिया चुप हो गई तो गौतमी ने आगे कहना शुरू किया, ‘‘मैं जब से यहां आई हूं तुम ने बस एक ही रट लगा रखी है कि पराग तुम से शादी करेगा पर कब करेगा क्या तुम बस मुझे इतना बता सकती हो?’’

‘‘जल्द ही…’’ ‘‘जल्द ही कब अनुप्रिया? अगर पराग मुझे तलाक ही नहीं देगा तो तुम से शादी कैसे करेगा? कभी तुम ने यह सोचा है?’’

अनुप्रिया कुछ कहती उस से पहले ही गौतमी फिर बोल पड़ी, ‘‘पराग ने तुम से यही कहा होगा न कि वह मेरे साथ खुश नहीं है. मैं ने उस की जिंदगी नर्क बना रखी है और वह बस अपने बेटे की खातिर मुझे बरदाश्त कर रहा है?’’ ‘‘आप को यह सब कैसे पता है?’’ अनुप्रिया ने हैरानी प्रकट की.

‘‘तुम दिखने में तो समझदार लगती हो. जिंदगी में इतना कुछ देख चुकी हो. फिर इतना भी नहीं जानतीं कि पराग जैसे आदमी इसी तरह की बातों से पहले तुम जैसी लड़कियों की हमदर्दी और फिर प्यार हासिल करते हैं.

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एक कप कौफी: भाग-1

मेजपर रखी कौफी ठंडी हो रही थी. अनुप्रिया ने कौफी मंगा तो ली थी पर उठा कर पीने की हिम्मत नहीं हो रही थी. दिल इतनी तेजी से धड़क रहा था मानो बाहर ही आ जाएगा. कई बार कलाई पर बंधी घड़ी में समय देख चुकी थी. 5 बजने में अभी 10 मिनट बाकी थे. यानी पराग की पत्नी के वहां आने में ज्यादा समय बाकी नहीं था. पराग की पत्नी के बारे में सोच कर अनुप्रिया फीकी सी हंसी हंस दी. उसे पराग की पत्नी का नाम तक मालूम नहीं था और वह उस का एक फोन आने पर उस से यहां मिलने के लिए तैयार हो गई थी. 5 बजे मिलने का समय तय कर के 4 बजे से यहां बैठ कर उस का इंतजार कर रही थी. कभी कैफे के दरवाजे को तो कभी कौफी मग पर बने स्माइली को निहार रही थी.

तभी कैफे का दरवाजा खुला और एक सुंदर महिला ने अंदर प्रवेश किया. कुछ क्षणों तक इधरउधर देखने के बाद वह महिला अनुप्रिया की ओर आने लगी. मेज के पास आ कर रुक गई और फिर पूछा, ‘‘आप अनुप्रिया हैं?’’ अनुप्रिया कुरसी से उठ खड़ी हुई, ‘‘जी हां और आप?’’

‘‘हैलो, मैं गौतमी. पराग की वाइफ.’’ ‘‘हैलो, प्लीज बैठिए,’’ कह कर अनुप्रिया ने सामने रखी कुरसी की ओर इशारा किया.

‘‘थैंक्स,’’ गौतमी ने कुरसी पर बैठ अपना पर्स मेज पर रख दिया और अनुप्रिया की ओर देख कर मुसकराई, ‘‘मुझ से यहां मिलने के लिए आप का शुक्रिया.’’ अनुप्रिया ने उस की बात को अनसुना कर पूछा, ‘‘आप क्या लेंगी?’’

‘‘कौफी और्डर करने के बाद कुछ पलों तक दोनों खामोश बैठी रहीं.

अनुप्रिया तिरछी नजरों से गौतमी की ओर देख रही थी. उस ने जैसा सोचा था गौतमी उस से बिलकुल उलट थी. वह अच्छीखासी स्मार्ट थी और बड़े ही शांत भाव से उस के सामने बैठी थी. लेकिन वह कैफे में इतने सारे लोगों के सामने और करती भी क्या. उस पर चिल्लाती, इलजाम लगाती कि उस ने उस के पति को अपने प्रेमजाल में क्यों फंसा रखा है या फिर उस के आगे रोती, गिड़गिड़ाती कि वह उस के पति की जिंदगी से हमेशा के लिए दूर चली जाए?’’ अनुप्रिया से गौतमी की चुप्पी बरदाश्त नहीं हो रही थी. वह चाहती थी कि उसे जो भी कहना हो कहे और यहां से चली जाए. तभी कौफी आ गई. अनुप्रिया ने हिम्मत कर पूछ ही लिया, ‘‘आप मुझ से क्यों मिलना चाहती थीं?’’

गौतमी ने मुसकरा कर कप हाथ में उठा लिया, ‘‘चलिए, आप ने मुझ से यह सवाल तो पूछा. मैं तो इंतजार कर रही थी कि आप मेरा निरीक्षण कर चुकी हों तो आप से बातें करना शुरू करूं.’’ अनुप्रिया सकपका गई. गौतमी के भीतर तेज दिमाग के साथ आत्मविश्वास भी कूटकूट कर भरा था. उस ने खुद को संभालते हुए कहा, ‘‘देखिए, मेरे पास अधिक समय नहीं है. आप मुद्दे की बात कीजिए. आप ने मुझे यहां क्यों बुलाया है?’’

‘‘आप ने औफिस से छुट्टी ली हुई है और पराग 3 दिनों के लिए शहर से बाहर गए हैं. जहां तक मेरी जानकारी है आजकल वे आप से मिलना तो दूर आप का फोन तक नहीं उठा रहे हैं. फिर आज आप के पास वक्त की कमी तो नहीं होनी चाहिए. खैर छोडि़ए, मैं सीधे मुद्दे पर ही आ जाती हूं. मैं आप को यह बताने आई हूं कि आप पराग के साथ सिर्फ अपना वक्त बरबाद कर रही हैं. वह मुझे छोड़ कर आप से शादी नहीं करेगा.’’ अनुप्रिया इसी बात की उम्मीद कर रही थी. उसे पता था कि गौतमी कुछ ऐसा ही कहेगी, इसलिए वह भी पूरी तैयारी के साथ आई थी. वह कम से कम इस औरत से तो हार नहीं मानने वाली थी. अत: उस ने चेहरे पर आत्मविश्वास लाते हुए कहा, ‘‘अच्छा…तो फिर वह आप के साथ शादीशुदा होते हुए भी मेरे साथ रिलेशनशिप में क्यों है?’’

‘‘क्योंकि वह एक कमजोर व बेवकूफ व्यक्ति है जो फिलहाल रास्ता भटक गया है, पर लौट कर अपने ही घर आएगा.’’ ‘‘आप का वह बेवकूफ आदमी दिन में 10 बार मुझे आई लव यू कहता है.’’ ‘‘तो क्या हुआ? पराग चौबीस घंटों में 48 बार मुझे व अपने बेटे सिद्धार्थ को आई लव यू कहता है.’’ ‘‘उस ने मुझ से वादा किया है कि वह जल्दी तुम्हें तलाक दे कर मुझ से शादी करेगा.’’

‘‘तुम्हारी और पराग की रिलेशनशिप को कितना वक्त हुआ है?’’ ‘‘करीब 2 साल.’’

‘‘तो फिर उस ने अब तक अपने खोखले वादे पूरे करने की दिशा में कदम क्यों नहीं बढ़ाया? मैं आज भी उस की पत्नी क्यों हूं?’’ ‘‘मैं जानती हूं कि तुम क्या कर रही हो…तुम मेरे और पराग के रिश्ते में दरार डालना चाहती हो. तुम चाहती हो कि पराग मुझे छोड़ कर वापस तुम्हारे पास आ जाए,’’ अनुप्रिया ने गौतमी को घूरते हुए कहा.

‘‘पराग मुझे छोड़ कर तुम्हारे पास गया ही कब था जो मुझे उसे वापस बुलाना पड़े. वह तो आज भी मेरे साथ, मेरे पास ही है.’’ ‘‘तो मैं इस मुलाकात का क्या मतलब समझूं कि मेरे सामने एक बेबस पत्नी बैठी है, जो मुझ से अपने पति को वापस पाने की मिन्नतें कर रही है?’’

‘‘और मेरे सामने जिंदगी से हारी हुई औरत बैठी है जो इतनी हताश हो चुकी है कि किसी और के पति को उस से छीन कर दूसरी औरत कहलाने के लिए भी तैयार है.’’ अनुप्रिया भड़क उठी, ‘‘तुम आखिर चाहती क्या हो? तुम ने मुझे यहां मेरी बेइज्जती करने के लिए बुलाया है?’’

‘‘तुम बताओ, तुम मेरे बुलाने पर यहां क्यों आई हो? क्या तुम मेरे हाथों बेइज्जत होना चाहती हो?’’ गौतमी ने मुसकराते हुए कहा. अनुप्रिया खौल उठी. फिर भी उस ने अपने गुस्से पर काबू करते हुए कहा, ‘‘मैं यहां तुम से यह पूछने आई हूं कि तुम पराग को तलाक देने के लिए तैयार हो या नहीं?’’

‘‘पराग ने मुझ से तलाक मांगा ही कब?’’ ‘‘नहीं मांगा तो अब मांग लेगा. हम दोनों जल्दी शादी करने वाले हैं.’’

‘‘सपने देखना बहुत अच्छी बात है अनुप्रिया. पर इतना याद रखना कि सपनों के टूटने पर कई बार तकलीफ भी बहुत होती है.’’ ‘‘किस के सपने टूटेंगे यह तो वक्त बताएगा,’’ अनुप्रिया ने गौतमी को घमंडभरी नजरों से देखते हुए कहा.

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एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा: भाग-4

रीतिका और कनिष्क की दोस्ती हर बीतते दिन के साथ गहरी होती जा रही थी. कनिष्क डिबेट कंपीटिशंस में जाता रहता था जिस के लिए उसे रिसर्च से हट कर भी सामग्री की जरूरत होती थी. रीतिका क्रिएटिव राइटिंग करती थी, इसलिए वह कनिष्क के हर कंपीटिशन या क्लास रिप्रैजेंटेशन से पहले उस के साथ बैठ उस की मदद किया करती थी. कभी देररात तो कभी अपनी क्लास छोड़ कर उस के लिए लिखा करती थी. एक बार कनिष्क ने उस से कहा भी था, ‘‘तू न होती तो क्या होता मेरा,’’ जिस पर रीतिका ने जवाब दिया, ‘‘तेरा सिर थोड़ा कम दर्द होता.’’

दोनों एकदूसरे के जीवन में अपनीअपनी जगह बना चुके थे. रीतिका कनिष्क के मैसेज का इंतजार किया करती तो कनिष्क उस से बात किए बिना खुद को अधूरा समझने लगता. रीतिका और कनिष्क एकदूसरे के आदी होते जा रहे थे और इस बीच, न उन्हें किसी साथी की जरूरत महसूस होती न किसी के साथ रिलेशनशिप में आने की. दोनों ही कभी सीरियस रिलेशनशिप में नहीं रहे थे. एकदूसरे के बारे में कुछ महसूस करते भी थे तो अब कहने का मन नहीं था, मन में डर था कि कहीं यह दोस्ती खराब न हो जाए.

दोनों लड़ते भी बहुत थे लेकिन जब दोनों में से कोई एक मनाने आता तो दूसरा बचकाने अंदाज में शिकायत करने लगता और दोनों, लड़ाई का मसला क्या था वह ही भूल जाते. एक बार कनिष्क ने मजाक में रीतिका को बिजी होने के चलते मैसेज नहीं किया और रीतिका ने भी मैसेज करने के बजाय उस के पहले मैसेज करने का इंतजार किया. इस के चलते 2 दिनों बाद कनिष्क ने रीतिका को यह कह दिया कि वह घमंडी है. और यह सुन कर रीतिका ने उसे मतलबी कह दिया. दोनों ने एकदूसरे से पूरा हफ्ता बात नहीं की.

होली आ चुकी थी. होली के दिन कनिष्क ने रीतिका को मैसेज किया, ‘हैप्पी होली, अब तू तो कहेगी नहीं, तो मैं ने सोचा मैं ही गुस्सा थोड़ा किनारे कर मैसेज कर दूं.’

‘फालतू में गुस्सा करेगा तो गुस्सा किनारे भी तो खुद ही को करना पड़ेगा न,’ रीतिका ने रिप्लाई किया.

‘तुझ से तो प्यार करता हूं मैं, गुस्सा नहीं कर सकता क्या?’

‘हां तो, मैं गुस्सा नहीं कर सकती तुझ पर?’ रीतिका ने लिखा.

‘क्यों? तुझे भी मुझ से प्यार है क्या?’

‘और क्या.’

‘कितना?’

‘तुझ से तो ज्यादा ही.’

‘रहने दे, तुझे मेरी याद नहीं आई.’

‘थोड़ी सी तो आई थी,’ रीतिका ने लिखा और हंसने वाली ईमोजी भेज दी. रिप्लाई में कनिष्क ने भी हंसने वाली ईमोजी भेज दी.

बात प्यार शब्द तक आई जरूर थी पर वह दोस्ती के लिए थी या उस से ज्यादा के लिए, यह एकदूसरे से पूछना मुश्किल था दोनों के लिए.

दोनों के थर्डईयर के आखिरी 3 महीने बचे थे. एंट्रैंस की तैयारियां और कालेज के प्रोजैक्ट्स में ही दोनों का वक्त बीत रहा था. कनिष्क के कालेज से ट्रिप जा रही थी शिमला. कनिष्क हर साल ट्रिप पर जाता ही था. पहले जब भी गया था तो आ कर सारी फोटो रीतिका को दिखाई थीं. रीतिका के कालेज से भी ट्रिप जाने वाली थी लेकिन उदयपुर. कनिष्क ने रीतिका से पूछा क्या वह उस के साथ ट्रिप पर चलेगी. कनिष्क की अपने डिपार्टमैंट में इतनी तो चलती ही थी कि वह एकदो लोगों को साथ ला सके. उस ने सुमित को बताया कि वह रीतिका को भी साथ लाना चाहता है तो सुमित खुश हुआ लेकिन वह इस बात को ले कर चिंतित था कि कोई कहीं रीतिका का चेहरा देख उसे कुछ कह न दे. इस पर कनिष्क ने कहा, ‘‘अगर किसी ने रीतिका से कुछ कहा तो उसे जवाब देना आता है. वैसे भी वह जितनी बार भी कालेज आई है किसी ने उसे अटपटा महसूस नहीं कराया, तो अब क्यों कराएगा. चिल्ल कर.’’

रीतिका ने ट्रिप के बारे में सुना तो खुश हो गई. उस ने घर से परमिशन ले ली, ट्रिप के पैसे जमा करा दिए, अपनी सहेली निशा को भी साथ चलने के लिए मना लिया. ट्रिप सुबह 6 बजे कालेज से निकलने वाली थी और अगले 4 दिनों तक सभी को साथ रहना था. बस में रीतिका और निशा एक सीट पर बैठी थीं और कनिष्क उन की बगल वाली सीट पर सुमित के साथ. कनिष्क की नजरें न चाहते हुए भी बारबार रीतिका की तरफ जा रही थीं जिसे सुमित ने नोटिस कर लिया था.

‘‘तू ने उसे बताया या नहीं?’’ सुमित ने पूछा.

‘‘क्या बताया या नहीं, किस को?’’ कनिष्क ने झिझकते हुए पूछा.

‘‘तू पसंद करता है न उसे, बता क्यों नहीं देता.’’

‘‘यार, उस ने मना कर दिया तो? मतलब मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या कहूं, कैसे कहूं. वह अच्छी लड़की है, समझदार है, तेजतर्रार है, इतनी खूबियां हैं उस में. फिर भी मैं ने उस के साथ इतना बुरा बिहेव किया था शुरू में, याद है न तुझे? अगर हमारी दोस्ती खराब हो गई तो? बहुत मुश्किल है कुछ कह पाना,’’ कनिष्क धीमी आवाज में सुमित से कहने लगा.

‘‘तू अब तक उस बात को ले कर बैठा है? देख, अगर तू उसे उस नजर से देखता है तो बता दे अपने दिल की बात, वह क्या कहती है वह तो उस की मरजी है न.’’

‘‘ठीक है, देखता हूं.’’

शिमला ट्रिप के पहले 3 दिन किसी एडवैंचर से कम नहीं थे. दिन कभी माल रोड पर तसवीरें खींचते बीतता तो कभी कहीं और घूमते. रात में बोनफायर और एक लड़की को ऐसा लगा… तो कभी शाम भी कोई जैसे है नदी बहबहबहबह रही है… जैसे गाने गाते. सब मिल कर नाचे भी तो कितना थे. ट्रिप पर गए प्रोफैसरों से छिपतेछिपाते सब ने बीयर भी तो पी थी. एक दिन तो ग्रुप की एक लड़की तान्या रिज रोड पर इतना तेज गिरी कि उस के दाएं पैर में मोच आ गई. रीतिका उस पूरा दिन उस के पास ही रही उसे सहारा देते हुए. सब जब यहां से वहां घूम रहे थे तो रीतिका तान्या के साथ बैंच पर बैठ उसे हंसाने की कोशिश में लगी हुई थी. कनिष्क उसे देखता तो उस की नादानियों पर तो कभी उस के निस्वार्थ भाव को देख कर मुसकरा देता.

ट्रिप के आखिरी दिन यानी चौथे दिन की रात सभी नाचनेगाने में मग्न थे. होटल की छत पर बड़े स्पीकर्स लगे हुए थे. सभी ने ड्रैसेस पहनी हुई थीं. रीतिका ने ब्लैक पैंसिल ड्रैस पहनी थी जो उस पर बहुत सुंदर लग रही थी. जब स्लो सौंग बजा और सभी कपल डांस करने लगे तो कनिष्क ने रीतिका का हाथ पकड़ उसे अपने पास खींच लिया. उस का एक हाथ रीतिका के हाथों में था तो दूसरा उस की कमर पर. उन दोनों की आंखें एकदूसरे की आंखों में समाई हुई थीं.

कनिष्क और रीतिका छत के कोने में थे. कनिष्क ने कहा, ‘‘यह सब कितना अलग है न, शहर व भीड़ से दूर.’’

‘‘हां, अच्छा महसूस हो रहा है, काश कि वक्त यहीं थम जाए और हम वापस न जाएं.’’

‘‘रीतिका…’’ कनिष्क ने गहरी आवाज में कहा, गाने के मद्धम शोर के बावजूद वे एकदूसरे को अच्छी तरह सुन पा रहे थे.

‘‘हां?’’ रीतिका ने कहा.

‘‘आई लव यू, बस… कब हुआ, कैसे हुआ पता नहीं, लेकिन तुम से प्यार हो गया है मुझे. तुम्हारे साथ अपनी जिंदगी बिताना चाहता हूं मैं, हमेशा तुम्हारे साथ रहना चाहता हूं. लड़नाझगड़ना चाहता हूं तुम से, मनाना चाहता हूं तुम्हें. क्या तुम्हें मंजूर है मेरा प्यार?’’ कनिष्क अपने प्यार का इजहार कर चुका था.

‘‘कनिष्क…’’ रीतिका ने हैरान होते हुए कहा.

‘‘कहो…’’ कनिष्क की आंखों में सवाल थे.

‘‘मैं भी तुम्हारे लिए यही सब महसूस करती हूं और यकीन मानो, मैं खुश भी हूं, लेकिन मैं अभी तैयार नहीं हूं,’’ रीतिका ने कुछ सोचते हुए कहा.

‘‘मतलब?’’

‘‘मैं ग्रैजुएशन के बाद दिल्ली से बाहर जा रही हूं पढ़ने. या शायद देश से ही बाहर. वक्त बहुतकुछ बदल देता है कनिष्क. अभी तुम मेरे लिए प्यार महसूस कर रहे हो, कल जब मैं तुम्हारे साथ नहीं रहूंगी तो तुम अकेले पड़ जाओगे या हमारे बीच जो कुछ है उसे रिश्ते का नाम दे कर खराब क्यों करना. हम एकदूसरे के जितने करीब हैं उतने हमेशा रहेंगे. मैं, बस, समय मांग रही हूं तुम से. बताओ, करोगे मेरा इंतजार?’’

‘‘हमेशा.’’

अटूट बंधन: भाग-3

 विशू ने निर्णय ले लिया और निर्णय के बाद अपने को जहां पाया उस से उस के होश उड़ गए. उस का अपना कुछ है ही नहीं. यह कंपनी का लग्जरी फर्निश्ड फ्लैट नहीं गुड़गांवदिल्ली सीमा पर बागबगीचों से सजी सुंदर कोठी है.

गांव की मिट्टी में पले विशू को 9 मंजिल पर टंगे रहना अच्छा नहीं लगता था. तब इतनी आबादी भी नहीं थी. इधर तो सस्ते में जमीन मिल गई फिर मनपसंद नक्शे से घर बनवा लिया. कुशल माली के साथ खड़े हो पेड़पौधे लगवाए जो अब बड़े हो गए हैं. लौन में आगरा से मंगवा कर कारपेट घास लगवाई पर यह कुछ भी उस का अपना नहीं है. पूरा का पूरा घर रीमा के नाम है. उस ने सारे बैंक खाते, निवेश के कागज देखे. सब कुछ रीमा के नाम है. कहीं भी कुछ भी उस अकेले के नाम नहीं. हां, एक खाता उस अकेले के नाम अवश्य है, जहां उस का वेतन जमा होता है. उसे खोल देखा तो उस में मात्र 55 हजार रुपए पड़े हैं. चलो, भागते भूत की लंगोटी संकटकालीन समय को पार कर देगी. 5 हजार पर्स में हैं. और हां, आज 17 तारीख है, कल रविवार गया है. 15 तारीख शनिवार को त्यागपत्र दिया है शाम को 4 बजे, मतलब उस दिन तक का वेतन तो मिलेगा ही.

पर वह जानता है कि हफ्ते दो हफ्ते से ज्यादा बेरोजगार नहीं रहने वाला. बस, यह बीच का समय काटने के लिए एक सुरक्षित और शांतिपूर्ण जगह चाहिए.

वह अटैची में जरूरी कागजपत्तर रख रहा था तभी ध्यान आया, एक पौलिसी और है जिस में रीमा का नहीं एक ट्रस्ट का नाम है. 20 लाख की पौलिसी है. विशू ने वह पौलिसी निकाली, 5 दिन बाद वह मैच्योर हो रही है. चैन की सांस ली कि चलो 20 लाख रुपए हाथ में रहेंगे.

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अब उसे कोई चिंता नहीं. उस ने पौलिसी अटैची में संभाल कर रख ली. इस के बाद कपड़ेलत्ते बैग में डाले. बैग को नौकर से गाड़ी में रखवा दिया. नौकर ने नाश्ता लगा दिया. नहातेनहाते ही उस ने फैसला कर लिया था कि भरपेट नाश्ता कर के ही निकलेगा. अभी तक तो रीमा के घर में रोटी उसी की कमाई की है. नाश्ता कर लैपटौप उठा चलतेचलते एक पल रुका, एक कसक यहां छोड़ कर जा रहा है, दोनों बच्चे. पलकें गीली हो उठीं पर जाना तो पड़ेगा ही.

आज उस ने सब से पहले अपने निजी खाते से 9 हजार निकाल पर्स में रखे फिर गाड़ी से नगरनिगम सीमा पार की. अपने गांव की सड़क पर गाड़ी जब उतारी तब अचानक याद आया, 13 वर्ष हो गए घर आए. एक युग बीत गया, जाने कितना परिवर्तन हो चुका होगा. एक परिवर्तन तो अभी देख रहा है विशू. पहले गांव जाने की सड़क चौड़ी तो इतनी ही थी पर कच्ची थी. बारहों महीना धूल उड़ाती, बरसात में कीचड़ भरी.

अब काले कोलतार की साफसुथरी सड़क. चमचमाती नागिन सी पड़ी है. उस पर टैंपो भी चल रहे हैं. उस की गाड़ी फिसलती चली जा रही है. गांव की सीमा में एक चाय की दुकान. दुकान क्या, जरा सी आड़ बना रखी थी. वहां एक तख्त पर 2 युवतियां. सामने एक मेज पर स्टोव, केतली, दूध का भगौना, कांच के जार में सस्ते बिस्कुट, नमकीन और ब्रैड्स. ग्राहक शून्य दुकान थी. उस ने गति धीमी की, उतर पड़ा. एक युवती सलवारसूट में थी, दूसरी साड़ी में. उस के उतरते ही सलवार वाली युवती चहक उठी, ‘‘बड़े भैया.’’

साड़ी वाली युवती ने जल्दी से पल्ला खींच सिरमुंह ढक लिया. यह सहज संकोच, सम्मान प्रदर्शन आज शिक्षित, शहरी समाज में जड़ से उखड़ एकदम समाप्त हो गया है, उस का मन जुड़ा गया. युवती की ओर देखा, ‘‘तू? तू मुन्नी है क्या?’’

‘‘जी, बड़े भैया.’’

साड़ी वाली युवती ने तब तक आ कर उसे प्रणाम किया. विशू का समाज बदल गया है. वह हाय, हैलो तो जानता है पर आशीर्वाद में क्या कहे, नहीं जानता. इसलिए चुप ही रहा. मुन्नी ने कहा, ‘‘भाभी, बड़े भैया के साथ मैं घर जा रही हूं. तुम दुकान बढ़ा कर जल्दी से घर आ जाओ.’’

वक्त क्याक्या दिखाएगा मुझे. इन के मुंह का निवाला छीन कर उस ने अपने ऊपर चढ़ने की सीढ़ी बनवाई थी. वह तो ऊपर की चोटी पर चढ़ कर आराम से बैठ गया पर उस का मूल्य चुकाना कितना भारी पड़ा इस निर्धन परिवार को. पंडित केशवदास तिवारी, जिन को जिलाधिकारी तक सम्मान की दृष्टि से देखते थे, उन की बहूबेटी दो रोटी जुटाने के लिए चाय की दुकान खोले बैठी हैं. पर दीनू तो था, वह कहां गया? क्या कमाता नहीं है, आवारा हो गया है…या…इतना अमंगल नहीं हुआ होगा, बहू के हाथों में सुहाग की प्रतीक लाल कांच की चूडि़यां हैं.

घर एकदम खंडहर हो चुका है. मिट्टी का ही घर था पर एकदम मजबूत, लिपापुता, सूई भी गिरे तो उठा लो. छत इतनी मजबूत थी कि वह दोस्तों के साथ दिनभर छत पर पतंग उड़ाया करता था. और घर भले ही कच्चा हो जमीन काफी थी. पंडितजी ने बांस का बेड़ा बना रखा था पूरी सीमा को घेर, जिसे बाउंडरी वौल कहते हैं. अब तक बांस के टुकड़ों का भी नामोनिशान नहीं, सब बराबर हो गया है.

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उसी के कोने में चाय की दुकान है. आंगन में आते ही मुग्ध हो गया. एक छोटा सा लंगड़ा आम का पौधा लगाया था उस ने आंगन के बीचोंबीच. अब वह महावृक्ष बन गया है, मजबूत शाखाएं फैलाए खड़ा है. मुन्नी ने उस के पैर रुकते देख हंस कर कहा, ‘‘बड़े भैया, यह तुम्हारा लगाया पेड़ है. अम्मा कहती हैं, देखो कितना बड़ा हो गया है. छवड़ा भरभर मीठे आम उतरते हैं. सावनभर पूरे महल्ले की औरतें इस पर झूला झूलने आती हैं.’’

यह सच है कि निर्मला ने अपना सारा स्नेह, प्यार उस पर पहले ही दिन से न्यौछावर किया पर विशू ने कभी उस को मां नहीं समझा, उस के साथ उस का व्यवहार सदा ही औपचारिक रहा. लड़ाई या अपमान भी नहीं किया कभी. पर आज उस ने मन से जा कर उस के धूल भरे, गंदे पैरों को छू कर प्रणाम किया. निर्मला ने अपने दुर्बल हाथों में उसे छाती पर खींच लिया, माथे को चूमा, ‘‘मेरा विशू, मेरा बेटा, कितने दिनों में आया रे तू?’’

दंग रह गया वह, एक अनपढ़, निर्धन महिला जो सौतेली मां है, अपने स्वार्थ के लिए इन की मुंह की रोटी तक छीन कर ले उड़ा, आज तक पलट कर देखा भी नहीं. अपनी पत्नी जिस के ऊपर अपना सर्वस्व लुटाता रहा, उस से करारा थप्पड़ न खाता तो आज भी इधर की दिशा नहीं लेता. उस निर्मला की आंसूभरी आंखों में कोई क्रोध, कोई विराग नहीं, कोई शिकायत नहीं. है तो बस स्नेह, ममता की अमृतधारा.

‘‘अम्मा, कैसी हो तुम?’’

‘‘बस ठीक हूं, तू खुश है, बड़ा आदमी बन गया है, यह क्या कम सुख है.’’

आंचल से तख्त पोंछा, ‘‘बैठ बेटा, मुन्नी, भैया के लिए पानी ला.’’

आगे पढ़ें- विशू ने देखा, छत पर अनगिनत…

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विद्या बालन ने की पीपीई किट डोनेट करने की गुजारिश, देखें Video

एक्ट्रेस विद्या बालन (Vidya Balan) समय समय पर जागरूकता ला रही है, वे गरीब लोंगो की सहायता के लिए सभी से अपील करते हुए भी नजर आरही है. हाल ही में विद्या ने कुछ वीडियो अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर साझा किया था इस वीडियो में विद्या (Vidya Balan) एक महिला सफाई कर्मचारी को बड़े ही प्यार से शुक्रिया कह रही थी है तो वैसे ही एक वीडियो में वे मेडिकल में काम कर रहे सारे स्टाफ को भी धन्यवाद दे रही थी।

हाल ही में मास्क इंडिया के तहत उन्होंने एक और वीडियो साझा किया था जिसमे वे बहुत ही सरल तरीके से घर पर ही मास्क बनाकर दिखाया था. विद्या (Vidya Balan) जानती है कि इस समय मे सभी का हौसला बढ़ाने की जरूरत है और वे बखूब ही वे लोगों का हौसला बांधते हुए नजर आरही है और लोगों को सतर्क कर रही है.

 

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Namaste, it is critical that we provide PPE (Personal Protective Equipment) kits to our healthcare workers for their protection in this #WarAgainstCovid19. I am donating 1000 PPE kits for our medical staff and have partnered with Tring to raise donation for another 1000 PPE kits which are in immediate need across India for our doctors and medical staff. For your contribution, I will send you a personal thank you video message recognising your generosity. This video will be in permanent memory with you. Log onto www.tring.co.in and go to my profile to donate or you can click this link: www.tring.co.in/Vidya-Balan Let’s all join the #WarAgainstCovid19 and #UniteForHumanity #StaySafe #StayHome #JustTringIt #IndiaFightsCorona

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विद्या (Vidya Balan) ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है और उसे कैप्शन दिया है “नमस्ते, आइए इस नाजुक घड़ी में हम पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट) प्रदान करे अपने हेल्थ केअर वर्कर्स के लिए उनकी सुरक्षा के लिए, विद्या आगे लिखती है” में मेडिकल स्टाफ को1000 पीपीई कीट्स डोनेट कर रही हूं और ट्रिंग के साथ भागीदारी में और 1000 किट्स डोनेट करने के लिए डोनेशन की राशि इक्कठा कर रहे है, जिस से यह किट्स जल्द से जल्द भारत में डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ तक पहुंचाए जाएंगे. आप भी इसमें सहयोग करते है तो मैं आपको व्यक्तिगत वीडियो के जरिये धन्यवाद कहूंगी, जो कि आप के पास हमेशा रहेगा.

 

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Lets put a #LockDownOnDomesticViolence !! #Dial100 @CMOMaharashtra @DGPMaharashtra @AUThackeray @aksharacentre

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विद्या ने इस वीडियो के जरिये बहुत कुछ ऐसी जानकारी दी जिसके बहुत से लोग इस मे शामिल हो सकते है और अपने और से भी पीपीई डोनेट कर राष्ट्र की भलाई में हिस्सा ले सकते है.

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#lockdown: 25 April से सभी दुकानों को खोलने की मिली छूट, जानें क्या है शर्तें और नियम

भारत में 3 मई को लॉकडाउन खत्म होने में कुछ ही दिन बाकी है, जिसके चलते सरकार मे आम जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कवायद शुरू कर दी है. केंद्र सरकार ने लॉकडाउन के बीच छोटे व्यापारियों को राहत देने का आदेश जारी कर दिया है, जिसके तहत शनिवार से सभी छोटी दुकानें खुलेंगी. लेकिन इसके साथ दुकानों के मालिकों को कुछ शर्तों का पालन भी करना होगा, जिसका पालन ना करने पर कार्रवाई होगी. आइए आपको बताते हैं क्या हैं शर्तें और कौन-कौन सी दुकाने खुलेंगी….

सोशल मीडिया के जरिए दी जानकारी

केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रवक्ता द्वारा ट्वीट किया गया, जिसके अनुसार नगर निगम के दुकानों को छोड़कर देश के सभी तरहों की दुकान खोली जा सकती है, लेकिन दुकान खोलने के लिए मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस का पालन भी करना होगा और अगर इनका पालन नहीं करने वाले व्यापारियों को कड़ी कार्रवाई का सामना करना होगा.

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ये दुकानें खोली जाएंगी…

  1. वे सभी दुकानें जो या तो केन्द्र सरकार या राज्य सरकार के शॉप एंड इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत रजिस्टर हैं वह दुकानें खोली जाएंगी.
  2. नगर पालिका और नगर निगम के अधिकार क्षेत्र को छोड़कर सभी दुकानें शनिवार से खोली जाएंगी. इसके अलावा शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की बाहरी दुकानें भी खुल सकती हैं.
  3. 3. गृह मंत्रालय के जारी आदेश के अनुसार देश के 170 हॉटस्पॉट एरिया को छोड़कर बाकी जगहों पर शनिवार से सैलून और ब्यूटी पार्लर भी खोले जा सकेंगे. यहां भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना और मास्क लगाना जरूरी होगा.
  4. ग्रामीण इलाके के सभी दुकानें भी शनिवार से खोली जा सकती हैं, जिसके साथ दुकानों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य होगा.
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क्या है केंद्र सरकार की शर्त

लॉकडाउन के बीच केंद्र सरकार ने गाइडलाइन्स में कुछ शर्ते भी रखी है, जिसमें सभी दुकानदार अपने यहां पर सिर्फ 50 प्रतिशत कर्मचारी से ही काम करा सकते हैं. इसके अलावा, दुकानदारों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अनिवार्य किया गया है. कर्मचारियों को दुकान में काम करते समय मास्क और ग्लव्स पहनना अनिवार्य होगा. मास्क और ग्लव्स नहीं होने की स्थिति में वैकल्पिक मास्क पहना जा सकता है.

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बता दे, देश में 24,506 संक्रमित के पाए गए है, जिसमें 775 लोगों की मौत हो चुकी हैं. वहीं 5,063 लोग इस वायरस से ठीक हो चुके हैं. साथ देश ने इस वायरस से निपटने के लिए प्लाजमा थैरेपी का भी इलाज शुरू कर दिया है, जिसका अच्छा रिस्पौंस मिल रहा है.

#lockdown: मैंगो पैनकेक के साथ चिली मैंगो ड्रौप

अगर आप भी घर पर कुछ अच्छा और टेस्टी बनाना चाहती हैं, तो मैंगो पैनकेक की ये रेसिपी आपके लिए परफेक्ट है. साथ ही चिली मैंगो ड्रौप का कौम्बिनेशन आपके फैमिली और फ्रेंडस के लिए एकदम परफेक्ट रहेगा. इसे अगर आप ब्रेकफास्ट में बनाएं तो इसका टेस्ट दोगुना बढ़ जाएगा.

हमें चाहिए

बटर 65 ग्राम

अंडा 1

दूध 250 ML

मैदा 315 ग्राम

बेकिंग पाउडर 6 ग्राम

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इलाइची पाउडर 2 ग्राम

चीनी 15 ग्राम

मैंगो प्यूरी 125 ग्राम

चिल्ली मैंगो ड्रौप बनाने के लिए

कटा हुआ आम 177 ग्राम

सिरका 1 बड़ा चम्मच

लेमन जूस 1

थाई चिली पाउडर 5 ग्राम

अदरक 1 टुकड़ा

चिली फ्लेक्स पेस्ट 5 ग्राम

कटा हुआ धनिया 15 ग्राम

बनाने का तरीका

– ऊपर लिखी सामग्री का इस्तेमाल करके एक बैटर तैयार करें और पैन केक बनाएं. वहीं बाकी चिल्ली मैंगो ड्रौप बनाने के लिए एक ठंडे आम की चटनी तैयार करें.

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– परोसने के लिए: एक प्लेट में गरम पैन केक रखें, ऊपर से ठंडा मसालेदार आम की चटनी डालें.

– कटे हुए आम के टुकड़े और थोड़ा शहद मिलाकर फैमिली को परोसें.

Edited by Rosy

उजली परछाइयां:  भाग-3

कहानी- महिमा दीक्षित

‘‘तुम यहां क्या कर रही हो?’’ किट्टू गुस्से में घूरते हुए कहा.

‘‘जरूरी बात करनी है, तुम्हारे पापा से रिलेटेड है,’’ धरा ने शांत स्वर में कहा. 2 दिनों बाद तुम्हारे पापा का बर्थडे है, मैं चाहती हूं कि तुम उस दिन उन के पास रहो…’’

‘‘और मैं तुम्हारी बात क्यों सुनूं?’’ उस की बात पूरी होने से पहले ही किट्टू ने चिढ़ कर जवाब दिया.

‘‘क्योंकि वे भी इतने सालों से तुम्हें उतना ही मिस कर रहे हैं जितना कि तुम करते हो. यह उन की लाइफ का बैस्ट गिफ्ट होगा क्योंकि तुम उन के लिए सब से बढ़ कर हो,’’ धरा ने किट्टू से कहा, ‘‘क्या तुम मेरे साथ कल देहरादून चलोगे?’’

किट्टू का कोल्डड्रिंक जैसा ठंडा स्वर उभरा, ‘‘इतना ही कीमती हूं तो मुझे वे छोड़ कर क्यों गए थे? मैं उन से नहीं मिलना चाहता. वे कभी मेरे बर्थडे पर नहीं आए…या…या फिर तुम्हारी वजह से नहीं आए. मुझे तुम से बात ही नहीं करनी. तुम गंदी औरत हो.’’ अपना बैग उठाते हुए लगभग सुबकने वाला था किट्टू.

‘‘तुम जाना चाहते हो तो चले जाना लेकिन, बस, एक बार ये देख लो,’’ कह कर धरा ने सारे पुराने मैसेज और चैट के प्रिंट किट्टू के सामने रख दिए जिन में घूमफिर कर एक ही तरह के शब्द थे अंबर के कि ‘किट्टू से बात करा दो,’ या ‘मैं मिलने आना चाहता हूं’ या ‘डाइवोर्स मत दो.’ और रोशनी के भी शब्द थे, ‘मैं तुम्हारे परिवार के साथ नहीं रह सकती,’ या ‘शादी जल्दबाजी में कर ली लेकिन तुम्हारे साथ और नहीं रहना चाहती,’ ‘किट्टू से तुम्हें नहीं मिलने दूंगी…’ ऐसा ही और भी बहुतकुछ था.

किट्टू की तरफ देखते हुए धरा ने कहा, ‘‘मेरे पास कौल रिकौर्डिंग्स भी हैं. अगर तुम सुनना चाहो तो. तुम्हारे पापा कभी नहीं चाहते कि तुम अपनी मां के बारे में थोड़ा सा भी बुरा सोचो या सच जान कर तुम्हारा दिल दुखे. इसलिए आज तक उन्होंने तुम्हें सच नहीं बताया. लेकिन मैं उन्हें इस तरह और घुटता हुआ नहीं देख सकती. और हां, हम एकदूसरे से प्यार करते हैं, लेकिन हम ने कभी शादी नहीं की. जानते हो क्यों? क्योंकि तुम्हारे पापा को लगता था कि शादी करने पर तुम उन्हें और भी गलत समझोगे.  क्या अब भी तुम मेरे साथ कल देहरादून नहीं चलोगे?’’ यह कह कर धरा ने हौले से किट्टू के सिर पर हाथ फेरा.

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‘‘चलो, चल कर मम्मी को बोलते हैं कि पैकिंग कर दें,’’ किट्टू को जैसे अपनी ही आवाज अजनबी लगी.

जब धरा के साथ किट्टू घर पहुंचा तो सभी की आंखें फैल गईं. नानी की तरफ देखते हुए किट्टू ने अपनी मां से कहा, ‘‘मैं पापा के बर्थडे पर धरा के साथ 2-3 दिनों के लिए देहरादून जा रहा हूं, मेरी पैकिंग कर दो.’’

रोशनी और बाकी सब समझ गए थे कि किट्टू अभी किसी की नहीं सुनेगा. सुबह उसे लेने आने का बोल धरा होटल के लिए निकल गई. पूरे रास्ते धरा सोचती रही कि आगे न जाने क्या होगा, किट्टू न जाने कैसे रिऐक्ट करेगा. वह अंबर से कैसे मिलेगा और अब क्या सबकुछ ठीक होगा? सुबह दोनों देहरादून की फ्लाइट में थे. किट्टू ने धरा से कोई बात नहीं की.

अगली सुबह का सूरज अंबर के लिए दुनियाजहान की खुशियां ले कर आया. किट्टू को सामने देख एकबारगी तो किसी को यकीन ही नहीं हुआ और अगले ही पल अंबर ने अपने बेटे को गोद में उठा कर कुछ घुमाया. जैसे वह अभी भी 14 साल का नहीं, बल्कि उस का 4 साल का छोटा सा किट्टू हो. पूरे 9 साल बाद आज वह अपने बच्चे को अपने पास पा कर निहाल था और घर में सभी नम आंखों से बापबेटे के इस मिलन को देख रहे थे.

अंबर का इतने सालों का इंतजार आज पूरा हुआ था, अंबर के साथ आज धरा को भी अपना अधूरापन पूरा लग रहा था. शाम में किट्टू ने बर्थडे केक अपने हाथ से कटवाया था और सब से पहला टुकड़ा अंबर ने किट्टू के मुंह में रखा, तो एक बार फिर अंबर और किट्टू दोनों की आंखें नम हो गईं. तभी किट्टू ने अंबर की बगल में खड़ी धरा को अजीब नजरों से देखा तो वह वहां से जाने लगी. अचानक उसे किट्टू की आवाज सुनाई दी, ‘‘पापा, केक नहीं खिलाओगे धरा आंटी को?’’ और धरा भाग कर उन दोनों से लिपट गई.

अगली सुबह धरा जल्दी ही निकल गई थी. उस ने बताया था कि कोई जरूरी काम है बस जाते हुए 2 मिनट को किट्टू से मिलने आई थी. दोपहर में अंबर को धरा का मैसेज मिला, ‘तुम्हें तुम्हारा किट्टू मिल गया. मैं कल आखिरी बार तुम से उस जगह मिलना चाहती हूं जहां हम ने चांदनी रात में साथ जाने का सपना देखा था.’

अंबर जानता था धरा ने उसे जबलपुर में धुआंधार प्रपात के पास बुलाया है. उस ने पढ़ा था कि शरद पूर्णिमा की रात चांद की रोशनी में प्रकृति धुआंधार में अपना अलौकिक रूप दिखाती है. तब से उस का सपना था कि चांदनी रात में नर्मदा की सफेद दूधिया चट्टानों के बीच तारों की छांव में वह अंबर के साथ वहां हो. अगली शाम में जब अंबर भेड़ाघाट पहुंचा तो किट्टू भी साथ था. वहां उन्हें एक लोकल गाइड इंतजार करता मिला जिस ने बताया कि वह उन लोगों को धुआंधार तक छोड़ने के लिए आया है.

करीब 9 बजे जब अंबर वहां पहुंचा तो धरा दूर खड़ी दिखाई दी. चांद अपने पूरे रूप में खिल आया था और संगमरमर की चट्टानों के बीच धरा, यह प्रकृति,? सब उसे अद्भुत और सुरमई लग रहे थे. वह धरा के पास पहुंचा और उस का हाथ पकड़ कर बेचैनी से बोला, ‘‘मुझे छोड़ कर मत जाओ, धरा. मैं नहीं रह सकता तुम्हरे बिना. अब तो सब ठीक हो चुका है. देखो, किट्टू भी तुम से मिलने आया है.’’

धरा ने धीरे से अपना हाथ अंबर के हाथ से छुड़ाया, तो अंबर के चेहरे पर हताशा फैल गई. किट्टू ने धरा की तरफ देखा और दोनों शरारत से मुसकराए. दूर क्षितिज में आसमान के तारे और शहर की लाइट्स एकसाथ झिलमिला रही थीं. तभी धरा ने एक गुलाब निकाला और घुटने पर बैठ कर कहा, ‘‘मुझे भी अपने परिवार का हिस्सा बना लो, अम्बर. क्या अब से रोज सुबह मेरे हाथ की चाय पीना चाहोगे?’’

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खुशी और आंसुओं के बीच अंबर ने धरा को जोर से गले लगा लिया था और किट्टू अपने कैमरे से उन की फोटो खींच रहा था.

उन का इतने सालों का इंतजार आज खत्म हुआ था. अंबर के साथसाथ धरा का अधूरापन भी हमेशा के लिए पूरा हो गया था. आज उसे उस का वह क्षितिज मिल गया था जहां अतीत की गहरी परछाइयां वर्तमान का उजाला बन कर जगमगा रही थीं, वह क्षितिज जहां 10 साल के लंबे इंतजार के बाद अंबरधरा भी एक हो गए थे.

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