वैज पोहा बौल्स

वैसे तो हममे से अधिकतम लोग पोहा नाश्ते में खाते हैं पर अगर हम पोहा को नया रूप देकर वैज पोहा बौल्स बनाएं तो ये खाने में हेल्दी के साथ-साथ टेस्टी भी रहेगा. ये बनाने में आसान होता है. साथ ही हेल्दी भी होता है.

हमें चाहिए-

–  1 कप पोहा

–  1-1 बड़ा चम्मच लाल, पीली, व हरीमिर्च बारीक कटी

–  1 छोटा प्याज बारीक कटा

–  2 छोटी गाजर कसी

–  2 बड़े चम्मच कच्चा नारियल कसा

–  हरीमिर्च बारीक कटी

–  1 बड़ा चम्मच तेल

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–  1 बड़ा चम्मच गाढ़ा दही

–  1/2 चम्मच सरसों

–  करीपत्ता

–  हरीमिर्च कटी

–  नमक स्वादानुसार.

बनाने का तरीका

पोहे को पानी से धो कर छलनी में पानी निकालने के लिए रखें. फिर इस में सभी शिमलामिर्च, प्याज, हरीमिर्च, कच्चा नारियल, गाजर, दही व नमक मिलाएं. अच्छी तरह मिला कर इस की छोटीछोटी बौल्स बनाएं.

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फिर स्टीमर में 10-12 मिनट स्टीम करें. कड़ाही में तेल गरम कर सरसों डालें. भुनने पर करीपत्ता और हरीमिर्च डाल कर पोहे की बौल्स डाल अच्छी तरह मिलाएं और फिर एक प्लेट में सजा कर चटनी के साथ परोसें.

Valentine’s Special: Teddy Day को मनाएं ऐसे

प्यार का महीना यानी की feb का महीना. प्यार के पूरे सप्ताह की अपनी ही खासियत होती है. 7 february से valentine week की शुरुआत हो जाती है. Rose day, Propose day, Chocolate day, ये सारे day सेलिब्रेट करने के बाद आता है Teddy day. यह वेलेंटाइन वीक के चौथे दिन आता है और हर साल 10 फरवरी को मनाया जाता है. इस दिन, लोग अपने प्यार और रोमांस की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए अपने साथी  को एक teddy day देते हैं. यह न केवल एक रोमांटिक विकल्प है, बल्कि ये आपके साथी को स्पेशल भी महसूस कराता है.

ये वो day है जो लड़कियों का ‘all time favourite ‘ है क्योंकि आप जब  अपने साथी को teddy  गिफ्ट करते हैं तो उन्हें उनके बचपन की सारी यादें ताज़ा हो जाती .आपका टेडी bear आपके दिल की बात को चुपके से उन तक पंहुचा देता है.

आप सोच रहे होंगे की भला किसी को टेडी गिफ्ट करने से प्यार का इज़हार कैसे होता होगा. दरअसल आपका दिया हुआ teddy bear आपके साथी से आपकी ढेर सारी भावनाओं को बयान कर देता है. वास्तव में, लोग अपने साथी  की अनुपस्थिति में उन teddy bear को अपने साथी का विकल्प मानने लगते हैं. जब भी वे अपने साथी को याद करते हैं तो वे उनके दिए हुए teddy bear  से बात करते हैं और उन्हें गले लगाते हैं.

वैसे तो बाज़ार में कई रंगों के ,कई साइज़ के cuteness वाले अलग-अलग टेडी है जो आपके साथी के चेहरे पर मुस्कान लाने  में काफी मददगार साबित होते है.पर क्या आप जानते है की अलग-अलग रंगों के teddy bear का अलग -अलग मतलब होता है?

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1-blue रंग के teddy का मतलब है की ‘आपका प्यार बहुत गहरा है ‘.

2-green रंग के teddy का मतलब होता है की ‘आप उनका इंतज़ार कर रहे हैं’.

3-red रंग के teddy का मतलब है की ‘आप अपने उनसे  प्यार का इज़हार कर रहे हैं’.

teddy day कैसे celebrate करें –

आज, 10 फरवरी को टेडी डे है और लोग अपने साथी के लिए इस दिन को खास बनाने के तरीके सोचने में व्यस्त हैं. अगर आप अपने साथी के लिए इस दिन को खास बनाना चाहते हैं, तो हम यहां कुछ अनोखे आइडिया लेकर आए हैं-

1. अपने साथी को एक teddy की प्यारी सी जोड़ी दे – क्या आप अपने साथी के बिना नहीं रह सकते है ?अगर हाँ तो आपको teddy की प्यारी सी जोड़ी देकर अपने साथी को ये जताना होगा की आप उसके बगैर नहीं रह सकते और आपके लिए पूरी दुनिया का मतलब ‘वो ‘ है.

2. teddy के शेप का pendent गिफ्ट करें –teddy day पर teddy देना बहुत ही सामान्य बात है, लेकिन अगर आप कुछ अलग करना चाहते हैं, तो आपको एक अलग दिशा में सोचने की जरूरत है. आप अपने साथी को एक प्यारा सा teddy के शेप वाला pendent गिफ्ट कर सकते हैं .ये बहुत ही अलग गिफ्ट होगा .जब भी वह उसे पहनेंगी तो वह  उसे आपकी याद दिलाएगा.

3. एक teddy cushion गिफ्ट करें- आप अपने साथी को एक teddy cushion  गिफ्ट  कर सकते हैं, जिसमे ‘i love you ‘या ‘my heart with you’ लिखा हो . हर बार जब आपका साथी अपना सिर उस cushion  पर टिकाएगा, तो वह आपको अपने दिल के बहुत करीब पाएगा .

4. एक teddy डेट – इस teddy डे, एक स्टाइल स्टेटमेंट बनाकर चीजों को एक पायदान ऊपर ले जाने की कोशिश करें. आप आज एक teddy  थीम वाली टी-शर्ट पहन सकते हैं और अपने साथी को डेट पर ले जा सकते हैं. अगर यह थोड़ा अजीब  लगता है तो ‘let it be .यही तो प्यार है, है न?

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टेडी day पर आपका ऑउटफिट कैसा हो-

आज के दिन आपको अपने साथी को अपनी cuteness दिखानी है और एक टेडी की तरह ही क्यूट लगना है.आप इस क्यूट से टेडी day को और क्यूट बनाने के लिए ,एक मिनी डेनिम स्कर्ट के साथ white रंग का georgette  टॉप carry कर सकती हैं. आप चाहे तो एक white रंग का knee गाउन भी पहन सकती हैं और साथ ही साथ एक  छोटे से स्लिंग बैग और कम्फर्ट फ्लैट्स के साथ रेडी  हो सकती है.

Valentine’s Special: फेस पर लाएं चौकलेटी निखार

इस समय वैलेंटाइन्स वीक चल रहा है. वैलेंटाइन्स वीक का मतलब की यह पूरा हफ्ता प्यार के रंगो से सराबोर रहने वाला है. तो क्यों ना इस वीक का जश्न थोड़ा सज सवर कर मनाया जाए? 14 फरवरी आने में कुछ ही दिन शेष रह गए हैं. पूरे साल लव बर्ड्स को इस वीक का बेसब्री से इंतजार रहता है और ऐसे मौके पर भला कौन लड़की सजने-संवरने का मौका छोड़ना चाहेगी.

वैसे भी आज प्यार में मिठास घोलने का दिन यानी चौकलेट डे है. आज हम आपको कुछ ऐसे टिप्स देंगे जिन्हें अपनाकर आप चौकलेट डे पर चौकलेटी लुक पाकर अपने पार्टनर के लिए कर सकती हैं कुछ खास…

1. चौकलेटी ग्लो

चौकलेटी ग्लो पाने के लिए आप चौकलेट फेशियल करवा सकती हैं. चौकलेट एक शक्तिशाली एंटीआकिसडेंट है जिसे ब्यूटी प्रोडक्ट के रूप में लंबे समय से प्रयोग किया जाता रहा है. चौकलेट के अंदर मौजूद फ्लेवोनाइड स्किन को सनबर्न और धूल-मिट्टी से बचाता है. ये फ्लेवोनाइड और एंटी औक्सीडेंट्स स्किन को टाइट रखने में मदद करता है साथ ही यह हमारे चेहरे को चौकलेटी द्लो भी प्रदान करता है.

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2. चौकलेट जैसी स्मूद स्किन

चौकलेट जैसी स्मूद स्किन पाने के लिए आप चौकलेट वैक्स का इस्तेमाल कर सकती हैं. यह आपकी स्किन पर चौकलेट जैसी स्मूथनेस देगा. चौकलेट वैक्स के अंदर शामिल बादाम का तेल व अन्य पोषक तत्वों से स्किन को पोषण मिलता है. यह आपकी स्किन से डेड सिकन को हटाकर स्किन में नई जान ला देता है. इसके अलावा इसमें मौजूद कोको स्किन को नमी देता है जिससे स्किन मुलायम हो जाती है.

3. महक भी हो चौकलेटी

सिर्फ स्किन ही नहीं अपने शरीर को भी चौकलेटी महक दें. ऐसा करने के लिए आप चौकलेट बटर का इस्तेमाल कीजिए. चौकलेट के अंदर स्किन सूदिंग तत्व पाए जाते हैं जो शरीर को आराम पहुंचाते हैं. इसके साथ ही इसका अरोमा बहुत ही आकर्षक होता है जो आपको विशेष आनंद की अनुभूति करवाता है. इसलिए आप चाहे तो चौकलेट बौडी स्पा भी करा सकती हैं. यह आपकी बौडी को चौकलेटी महक देने के साथ ही साथ सुन्दर व आकर्षक बनाता है.

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न सिर्फ सपने देखें बल्कि उन्हें साकार करने का पूरी कोशिश करें- सादिया नसीम

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव में जन्मी और पलीबढ़ी सादिया आज एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुकी हैं. उन्होंने भारत का पहले ब्रांडेड बजट सलून की चेन, ग्लैम स्टूडियो की शुरुआत की. उन्होंने 2007 में martjack.com की शुरुआती टीम में शामिल हो कर अपनी इंटरनेट यात्रा शुरू की थी. इस के बाद एमजीएच में लीडरशिप सदस्य के रूप में छह साल बिताये और कंपनी को अपने डोमेन में सर्वश्रेष्ठ स्टार्टअप के रूप में शामिल कराने में कामयाब रहीं. बाद में दिसंबर 2014 में सादिया भारत की सब से बड़ी ब्रांडेड श्रृंखला oyorooms.com से जुड़ीं. 2016 में उन के द्वारा शुरू किये गए ग्लैम स्टूडियोज के साथ आज भारत में 160 से ज्यादा सलून जुड़े हुए हैं.

सवाल- आप खुद को दुसरो से अलग कैसे मानती हैं ?

मेरा मानना है कि मैं एक इंटरप्रेन्योर हूं और यही चीज़  मुझ को दूसरों अलग बनाती है. एंटरप्रेन्योरशिप अपने आप में एक कम्युनिटी है और और इस का पैशन उसे लोगों से अलग करता है l जब कोई इंटरप्रेन्योरशिप के रास्ते पे निकलता है तो लाख परेशानियां आए, पीछे पलटने का कोई मतलब नहीं बनता और उन का यह ज़ज़्बा सिर्फ उन्हें लोगो से अलग ही नहीं करता बल्कि लोगो को इंस्पायर भी करता है.

सवाल- बेटी के साथ कितना क्वालिटी टाइम बिता पाती हैं?

मेरी एक 9 साल की बेटी है और यह बात सच है कि काम के कारण मैं अपनी बेटी को ज़्यादा वक़्त नहीं दे पाती. मगर मैं कोशिश करती हूं कि उस के साथ जो समय गुजारूं वह क्वालिटी टाइम हो.

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सवाल- आप ने जिंदगी में किस तरह के संघर्षों का सामना किया?

चाहे आप महिला हो या पुरुष अगर आप को एक इंटरप्रेन्योर बनना है और ज़िंदगी में कुछ अलग करना है तो चुनौतियों के लिए तो तैयार रहना ही होगा. मेरी पढाई एटा के एक छोटे से सरकारी स्कूल से हुई है जहां अंग्रेजी भी हिंदी में पढाई जाती थी. अच्छी अंग्रेजी बोलना भी मेरे लिए एक चुनौती से कम  नहीं था. लेकिन में इस में भी मै नें एक अवसर देखा. जब मैं ऐ ऍम यू  से अपना ग्रेजुएशन कर रही थी तब मैं ने श्योर सक्सेस क्लब नाम की एक कोचिंग संस्था शुरू की जहां मैं लड़कियों को मुफ्त में अंग्रेजी पढ़ाया करती थी. करीब एक साल में 10 हजार लड़कियों ने इस के अंतर्गत ट्रेनिंग ली.

फिर जब मैं ने ग्लैम स्टूडियोज शुरू किआ तब भी बहुत सारी चुनौतियां मेरे सामने थीं क्यों कि हम एक बिलकुल नया कांसेप्ट ले कर आ रहे थे और वह भी एक ऐसी इंडस्ट्री में जिस के तीनो पार्टनर्स में से किसी को भी अनुभव नहीं था. इस के अलावा मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने की वजह से फंड्स अर्रेंज करना भी किसी चुनौती से कम नहीं था.

सवाल- क्या कोई पल ऐसा आया जब आपने परिवार के लिए काम छोड़ देने का फैसला किया?

कभी नहीं, मेरा परिवार ही मेरी सब से बड़ी ताकत है. मेरी कामयाबी का सब से ज्यादा श्रेय मेरे पति को जाता है जिन्होंने मेरे लिए अपनी अच्छेखासे चलते हुए करियर को त्याग कर मेरी बेटी की देखभाल की और मेरे कामों में मेरा साथ दिया.

सवाल- ज़िंदगी में आप सब से ज़्यादा किस पर विश्वास करती हैं?

ज़िंदगी में मैं ने सब से ज़्यादा खुद पर विश्वास किया है और करती रहूंगी. अगर आप खुद पर विश्वास रखते हो तो जो आप को चाहिए उसे हर हाल में पा लोगे चाहे कितनी ही परेशानियों का सामना करना पड़े.

सवाल- अपनी सफलता का श्रेय आप किस को देना चाहेंगी

मुझे लगता है जिस दिन आप खुद को सफल मान लेते हैं वह आप की असफलता का पहला दिन होता है. इसलिए मैं यह बिलकुल भी नहीं कहूंगी कि मैं अभी सफल हुई हूं मगर हाँ जो कुछ भी मैं हूं उस का श्रेय मैं अपने दोस्त दरक्शां और फ़ीरोज़ (बिज़नेस पार्टनर्स) और मेरे परिवार को दूंगी.

सवाल- ज़िन्दगी का वह पल जब आप की ज़िंदगी ने अपना रुख बदला था?

मेरी ज़िंदगी ने एक नया मोड़ लिए जब मैं ने पहली बार अपनी बेटी को हाथों में लिया.  वो ऐसी ख़ुशी का पल था जब मेरी आँखों में मेरे खुद के स्टार्टअप का सपना था और गोद में मेरी बेटी को अच्छी परवरिश देने की ज़िम्मेदारी भी. उस को देख कर एक अजीब सा कॉन्फिडेंस मेरे अंदर आया था कि मैं अब जीवन में कुछ भी कर सकती हूं.

सवाल- अपनी कंपनी के बारे में कुछ बताईये. इस की यू इस पी क्या है ?

मेरी कंपनी का नाम ग्लैम स्टूडियोज है. यह इंडिया की सब से तेज़ी से बढ़ती हुई सैलून चेन है. ग्लैम स्टूडियोज इंडिया का सब से पहला सैलून ब्रांड हे जो खासकर बजट एंड क्वालिटी कॉन्सियस कस्टमर्स के लिए बना है.  हम ने ये कंपनी 2016 में शुरू की थी जिस की अब 150 से ज़्यादा फ्रेंचाइजी लगभग 20 शहरों में हैं. हमारी यू इस पी  है अफ्फोर्डबिलिटी. कस्टमर को काफी कम दामों में एक ब्रांड का एक्सपीरियंस मिलता हैं, उस के साथ ही इन्वेस्टर्स को काफी  कम निवेश में एक नए बिज़नेस की शुरुवात करने का मौका भी मिलता  है.

सवाल- आप इस काम में नई टेक्नोलॉजी का प्रयोग कैसे कर रही हैं

हमारे पास हमारा खुद का सॉफ्टवेयर है जिसे ग्लैमोस कहते हैं.इस की मदद से सारे सैलून ओनर्स अपना बिज़नेस मैनेज करते हैं और ग्लैमोस को हम ने अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप से कनेक्ट किया हुआ है जिस पर आ कर सारे कस्टमर्स सैलून में अपॉइंटमेंट्स बुक कर सकते हैं. यह सब हम और हमारे सैलून ओनर्स रन टाइम पर देख सकते हैं. इस के अलावा बहुत जल्द हम वर्चुअल रियलिटी एंड आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के साथ कुछ प्रोजेक्ट्स लांच करने वाले  हैं.

सवाल- एक औसत इंडियन वुमन को आप की क्या सलाह है ?

हर हिंदुस्तानी औरत को मेरी यह सलाह है कि वह समाज के और परिवार के डर से सपने देखने न छोड़े. न सिर्फ सपने देखे बल्कि उन्हें साकार करने का पूरा प्रयास भी करे. अगर उसे खुद पर पूरा विश्वास है तो उस के सपनो को साकार होने से कोई नहीं रोक सकता.

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सवाल- कंपनी की शुरुआत कैसे हुई और इस मुकाम तक पहुँचने के क्रम में किस तरह की परेशानिओ का सामना करना पड़ा ?

इंडिया में ब्यूटी इंडस्ट्री काफी अनऑर्गनाइज़्ड है जहाँ लगभग 3 लाख सलोन्स हैं जिस मे से कुछ 3 हजार ही ब्रांडेड सलोन्स हैं. इस के साथ ही  यूथ की परचेजिंग पावर बढ़ रही है, उन के अंदर अच्छा दिखने की इच्छा भी पनप रही है लेकिन मुश्किल ये थी कि इंडिया में कोई भी सैलून ब्रांड मिडिल क्लास सेगमेंट को कवर नहीं कर रहा था.

हम ने उसे एक ओपरचुनिटी की तरह देखा और ये रियलाइज किया कि इस इंडस्ट्री को एक प्लेटफॉर्म पर लाना बहुत ज़रूरी है. इसी कांसेप्ट पर ग्लैम स्टूडियोज की शुरुआत हुई.

पेट दर्द का कारण कहीं गर्भाशय में सूजन तो नहीं..?

अक्सर ही कई लोगों को पेट में दर्द की समस्या होती है. कई बार ये दर्द जीवनशैली, मौसम में बदलाव और गलत-खान-पान के चलते होता है, तो कई बार इस दर्द के पीछे गंभीर रोग भी छिपा होता है. लेकिन जानकारी के अभाव में हम उस रोग को पहचान नहीं पाते. महिलाओं में कई बार पेट में दर्द का कारण बच्चेदानी में सूजन (Uterus Swelling) हो सकता है. ऐसे में महिलाओं को असहनीय पेट दर्द, बुखार, सिरदर्द और कमर दर्द का सामना करना पड़ता है. समय रहते इस समस्या का इलाज न करने पर यह कैंसर जैसी बड़ी बीमारी का कारण भी बन सकती है. जिसे गर्भाशय फाइब्राएड कहते हैं. आज हम आपको गर्भाशय की सूजन को कम करने के लिए कुछ नुस्खे बताएंगे, लेकिन उससे पहले जानते हैं कि क्या है गर्भाशय फाइब्राएड.

क्या है गर्भाशय फाइब्राएड

फाइब्राएड एक नौन-कैंसर ट्यूमर हैं, जो गर्भाशय की मांसपेशी की परतों पर बढ़ते हैं. फाइब्राएड का आकार सेम के बीज से लेकर तरबूज जितना हो सकता है. लगभग 20 प्रतिशत महिलाओं को पूरे जीवन में फाइब्राएड कभी न कभी जरूर प्रभावित करता है. 30 से 50 के बीच आयु वर्ग की महिलाओं को फाइब्राएड विकसित होने की आशंका सबसे अधिक होती है. सामान्य वजन वाली महिलाओं की तुलना में अधिक वजन और मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में इसके विकासित होने का उच्च जोखिम होता है.

सामान्य अवस्था में गर्भाशय में सूजन के कई लक्षण हो सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है.

सामान्य लक्षण

इसके लक्षण आमतौर पर बाहर से देखने में पता नहीं चल पाते हैं. लेकिन कई स्थितियों में गर्भाशय में सूजन के दौरान पेट का आकार बढ़ता जाता है और बाहर से देखने में ये किसी फुटबौल जैसा या प्रेगनेंसी जैसा लगने लगता है. ज्यादातर महिलाओं में यह समस्या होने पर हल्का बुखार, मिचली, सिर दर्द, पेट दर्द गैस, कब्ज और कमर दर्द आदि लक्षण सामने आते हैं. इसके अलावा पेट की मांसपेशियों में कमजोरी, प्राइवेट पार्ट में खुजली या जलन, महामारी के दौरान असहनीय दर्द, यौन संबंध के दौरान दर्द होने जैसे लक्षण भी नजर आते हैं. इन सभी लक्षणों को इग्नोर करना आपके लिए खतरनाक हो सकता है.

गर्भाशय यानी यूटेरस में सूजन के कई कारण हैं-

भूख से अधिक भोजन के कारण

भूख से अधिक भोजन करने से कई बार महिलाओं के गर्भाशय में सूजन आ जाती है. कई बार महिलाओं को बहुत बाद में गर्भाशय में सूजन का पता चलता है जिसके कारण उन्हें सिर दर्द, बुखार और कमर दर्द का लगातार सामना करना पड़ता है और वो इसे सामान्य दर्द समझकर उसी की दवा खाती हैं. ये कई बार आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है.

कब्ज या गैस के कारण

पेट में कब्ज या गैस बन जाने के कारण भी कई बार यूटेरस में सूजन आ जाती है. इसमें महिलाओं को लगातार पेट दर्द की शिकायत होती है. ऐसी स्थिति से बचने के लिए महिलाओं को मिर्च, मसाले वाले और तले-भुने खानों से परहेज करना चाहिए. इसके अलावा ज्यादा मिठाई का सेवन भी ऐसी स्थिति पैदा कर सकता है.

ज्यादा टाइट कपड़े पहनने के कारण

बहुत टाइट कपड़ों और खासकर पेट के पास से टाइट कपड़े पहनने के कारण पेट और यूटेरस पर लगातार दबाव बना रहता है, जिसकी वजह से इसमें सूजन आ जाती है. इसलिए महिलाओं को बहुत ज्यादा टाइट कपड़े पहनने से बचना चाहिए.

शारीरिक मेहनत की कमी के कारण

शरीर की फिटनेस के लिए व्यायाम करना बहुत जरूरी है. बिना व्यायाम के पेट की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और इनमें सूजन आ जाती है. इसका खतरा सबसे ज्यादा उन महिलाओं को होता है जो साड़ी पहनती हैं और दिनभर कुर्सी पर या एक जगह बैठी रहती हैं. दिनभर कुर्सी पर बैठने से साड़ी गर्भाशय पर दबाव बनाती है और इससे गर्भाशय में सूजन आ जाती है जबकि कुछ महिलाओं को ये मोटापा लगता है. असल में मोटापा के दौरान शरीर या पेट के आसपास की चर्बी बढ़ती है जबकि गर्भाशय में सूजन के दौरान पेट कड़ा लगने लगता है और पेट का आकार फुटबौल जैसा लगने लगता है.

बच्चेदानी की सूजन को दूर करने के उपाय

सोंठ और नीम के पत्ते को उबालकर काढ़ा पीने से ये रोग सही होता है. इसके अलावा इसे रोजाना प्राईवेट पार्ट में लगाने से भी बच्चेदानी से सूजन दूर होती है.

अच्छी डाइट लगभग सभी बीमारियों का काल है. हरी पत्तेदार और फ्रेश सब्जियां व फलों के सेवन से भी बच्चेदानी की सूजन से राहत मिलती है

बच्चेदानी की सूजन को दूर करने के लिए हल्दी भी बहुत असरकार है. दूध में हल्दी मिलाकर पीने से बच्चेदानी की सूजन दूर होती है.

बच्चेदानी की सूजन को दूर करने में बादाम बहुत असरकार है. रात में बादाम को दूध के साथ भिगो दें. सुबह उठकर बादाम समेत दूध पी लें. ऐसा करने से सूजन से छुटकारा मिलता है.

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Valentine’s Day Special: मेरा तुझसे मिलना कोई इत्तेफाक तो नहीं लगता

मेरा तुझसे मिलना कोई इत्तेफाक तो नहीं लगता,

मेरा तुझसे प्यार करना कोई जाल तो नहीं लगता,

भले ही तुमने मुझसे मोहब्बत नहीं की,

फिर भी मेरा तुझसे मोहब्बत करना कोई कमाल तो नहीं लगता,

प्यार तो सब करते हैं मगर निभाने वाला कोई नहीं लगता,

रिश्ते तो सब बनाते हैं मगर उन रिश्तो को कायम रखने वाला कोई नहीं लगता,

सपने दिखाने वाले बहुत होते हैं लेकिन तेरे छोटो-छोटे सपने पूरे करने वाला कोई नहीं लगता,

कहते हैं मोहब्बत में बहुत ताकत होती है मगर फिर क्यूं तेरे लिए कोई दुनिया से लड़ने वाला नहीं लगता,

मैं कैसे छोड़ दूं तुझे इस दुनिया की भीड़ में,

हर कोई तुझसे मेरी तरह लाड़ करने वाला नहीं लगता,

चलो मान लिया मिल जाएंगे मुझ जैसे बहुत तुझे,

मगर पता नहीं क्यूं मुझ जैसी तेरी कोई परवाह करने वाला नहीं लगता…

कैसे रह लूं मैं खुश तेरे बिना,

मेरे अलावा तेरी खुशियों की देखभाल करने वाला कोई नहीं लगता…

मैं तो खुशी खुशी अपनी ज़िंदगी तुझे दे दूं,

मगर कोई तेरे लिए अपनी ज़िंदगी कुरबान करने वाला नहीं लगता…

तेरे कानों को चूमने वाले बहुत होंगे,

लेकिन उन्हीं कानों में झुमके पहनाने वाला कोई नहीं लगता…

तुझे दिल देने वाले तो बहुत मिलेंगे ज़माने में,

मगर मेरी तरह तुझसे कोई वफा करने वाला नहीं लगता…

तेरे साथ सोने की चाहत रखने वाले काफी मिलेंगे,

लेकिन कोई तुझे अपने घरवालों से मिलवाने वाला नहीं लगता…

सिर्फ जिस्म निहारने वालों की कमी नहीं है यहां,

पर मुझ जैसी तेरी कोई इज्जत करने वाला नहीं लगता…

तुझे ही देख कर मुस्कुराने वाले लोग भी होंगे,

लेकिन तेरे लबों पर मुस्कान लाने वाला कोई नहीं लगता.

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मां जल्दी आना: भाग-2

इसे पता भी है कि कितने बलिदानों के बाद हम ने इसे पाया है. क्याक्या सपने संजोए थे बहू को ले कर, इस ने एक बार भी नहीं सोचा हमारे बारे में. बाबूजी शायद मामले की गंभीरता को भांप नहीं पाए थे या अपने बेटे पर अतिविश्वास को सो वे मां को दिलासा देते हुए बोले, ‘‘मैं समझाऊंगा उसे, बच्चा है, समझ जाएगा. सब ठीक हो जाएगा. यह सब क्षणिक आवेश है. मेरा बेटा है अपने पिता की बात अवश्य मानेगा.’’

मां को भी बाबूजी की बातों पर और उस से भी ज्यादा अपने बेटे पर भरोसा था. सो बोलीं, ‘‘हां तुम सही कह रहे हो मुझे लगता है मजाक कर रहा होगा. ऐसा नहीं कर सकता वह. हमारे अरमानों पर पानी नहीं फेरेगा हमारा बेटा.’’

चूंकि अगले दिन अनंत वापस दिल्ली चला गया था सो बात आईगई हो गई पर अगली बार जब अनंत आया तो बाबूजी ने एक लड़की वाले को भी आने का समय दे दिया. अनंत ने उन के सामने बड़ा ही रूखा और तटस्थ व्यवहार किया और लड़की वालों के जाते ही मांबाबूजी पर बिफर पड़ा.

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‘‘ये क्या तमाशा लगा रखा है आप लोगों ने, जब मैं ने आप को बता दिया कि मैं एक लड़की से प्यार करता हूं और शादी भी उसी से करूंगा फिर इन लोगों को क्यों बुलाया. वह मेरे साथ मेरे ही औफिस में काम करती है. और यह रही उस की फोटो,’’ कहते हुए अनंत ने एक पोस्टकार्ड साइज की फोटो टेबल पर पटक दी.

अपने बेटे की बातों को किंकर्त्तव्यविमूढ़ सी सुन रहीं मां ने लपक कर टेबल से फोटो उठा ली. सामान्य से नैननक्श और सांवले रंग की लड़की को देख कर उन की त्यौरियां चढ़ गईं और बोलीं, ‘‘बेटा ये तो हमारे घर में पैबंद जैसी लगेगी. तुझे इस में क्या दिखा जो लट्टू हो गया.’’

‘‘मां मेरे लिए नैननक्श और रंग नहीं बल्कि गुण और योग्यता मायने रखते हैं और यामिनी बहुत योग्य है. हां एक बात और बता दूं कि यामिनी हमारी जाति की नहीं है,’’ अनंत ने कुछ सहमते हुए कहा.

‘‘अपनी जाति की नहीं है मतलब???’’ बाबूजी गरजते स्वर में बोले.

‘‘मतलब वह जाति से वर्मा हैं’’ अनंत ने दबे से स्वर में कहा.

‘‘वर्मा!!! मतलब!! सुनार!!! यही दिन और देखने को रह गया था. ब्राह्मण परिवार में एक सुनार की बेटी बहू बन कर आएगी… वाहवाह इसी दिन के लिए तो पैदा किया था तुझे. यह सब देखने से पहले मैं मर क्यों न गया. मुझे यह शादी कतई मंजूर नहीं,’’ बाबूजी आवेश और क्रोध से कांपने लगे थे. किसी तरह मां ने उन्हें संभाला.

‘‘तो ठीक है यह नहीं तो कोई नहीं. मैं आप लोगों की खुशी के लिए आजीवन कुंआरा रहूंगा.’’ अनंत अपना फैसला सुना कर घर से बाहर चला गया था. उस दिन न घर में खाना बना और न ही किसी ने कुछ खाया. प्रतिपल हंसीखुशी से गुंजायमान रहने वाले हमारे घर में ऐसी मनहूसियत छाई कि सब के जीवन से उल्लास और खुशी ने मानो अपना मुंह ही फेर लिया हो. विवाहित होने के बावजूद हम बहनों को भी इस घटना ने कुछ कम प्रभावित नहीं किया. मांबाबूजी का दुख हम से देखा नहीं जाता था और भाई अपने पर अटल था पर शायद समय सब से बड़ा मरहम होता है. कुछ ही माह में पुत्रमोह में डूबे मांबाबूजी को समझ आ गया था कि अब उन के पास बेटे की बात मानने के अलावा कोई चारा नहीं है. जिस घर की बेटियों को उन की मर्जी पूछे बगैर ससुराल के लिए विदा कर दिया गया था उस घर में बेटे की इच्छा का मान रखते हुए अंतर्जातीय विवाह के लिए भी जोरशोर से तैयारियां की गईं.

अनंत मांबाबूजी की कमजोर नस थी सो उन के पास और कोई चारा भी तो नहीं था. खैर गाजेबाजे के साथ हम सब यामिनी को हमारे घर की बहू बना कर ले आए थे. सांवली रंगत और बेहद साधारण नैननक्श वाली यामिनी गोरेचिट्टे, लंबे कदकाठी और बेहद सुंदर व्यक्तित्व के स्वामी अनंत के आसपास जरा भी नहीं ठहरती थी पर कहते हैं न कि ‘‘दिल आया गधी पे तो परी क्या चीज है?’’

एक तो बड़ा जैनरेशन गैप दूसरे प्रेम विवाह तीसरे मांबाबूजी की बहू से आवश्यकता

से अधिक अपेक्षा, इन सब के कारण परिवार के समीकरण धीरेधीरे गड़बड़ाने लगे थे. बहू के आते ही जब मांबाबूजी ने ही अपनी जिंदगी से अपनी ही पेटजायी बेटियों को दूध की मक्खी की तरह निकाल फेंका था तो बेटेबहू के लिए तो वे स्वत: ही महत्वहीन हो गई थी. कुछ ही समय में बहू ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे.

अनंत और उस की पत्नी यामिनी को परिवार के किसी भी सदस्य से कोई मतलब नहीं था. कुछ समय पूर्व ही यामिनी की डिलीवरी होने वाली थी तब मांबाबूजी गए थे अनंत के पास. नवजात पोते के मोह में बड़ी मुश्किल से एक माह तक रहे थे दोनों तभी अनंत ने मुझ से उन्हें वापस भोपाल आने का उपाय पूछा था. मैं ने भी येनकेन प्रकारेण उन्हें दिल्ली से भोपाल वापस आने के लिए राजी कर लिया था.

अभी उन्हें आए कुछ माह ही हुए थे कि अचानक एक दिन बाबूजी को दिल का दौरा पड़ा और वे इस दुनिया से ही कूच कर गए पीछे रह गई मां अकेली. लोकलाज निभाते हुए अनंत मां को अपने साथ ले तो गया परंतु वहां के दमघोंटू वातावरण और यामिनी के कटु व्यवहार के कारण वे वापस भोपाल आ गईं और अब तो पुन: दिल्ली जाने से साफ इंकार कर दिया. सोने पे सुहागा यह कि अनंत और यामिनी ने भी मां को अपने साथ ले जाने में कोई रुचि नहीं दिखाई. मनुष्य का जीवन ही ऐसा होता है कि एक समस्या का अंत होता है तो दूसरी उठ खड़ी होती है.

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अचानक एक दिन मां बाथरूम में गिर गईं और अपना हाथ तोड़ बैठीं. अनंत ने इतनी छोटी सी बात के लिए भोपाल आना उचित नहीं समझा बस फोन पर ही हालचाल पूछ कर अपने कर्त्तव्य की इतिश्री कर ली. दोनों बड़ी बहनें तो विदेश में होने के कारण यूं भी सारी जिम्मेदारियों से मुक्त थीं. बची मैं सो अनंत का रुख देख कर मेरे अंदर बेटी का कर्त्तव्य भाव जाग उठा. फ्रैक्चर के बाद जब मां को देखने गई तो उन्हें अकेला एक नौकरानी के भरोसे छोड़ कर आने की मेरी अंतआर्त्मा ने गवाही नहीं दी और मैं मां को अपने साथ मुंबई ले कर आ गई. मैं कुछ और आगे की यादों में विचरण कर पाती तभी मेरे कानों में अमन का स्वर गूंजा.

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डियर हबी…

सुना तो कई बार था लेकिन यकीन कभी नहीं था… क्योंकि पहली नजर में आप किसी से प्यार कैसे कर सकते हैं… लेकिन ये सोच तब बदली जब आपसे मुलाकात हुई… प्यार तो नहीं हुआ, लेकिन एक कनेक्शन जरूर हो गया… जिससे हम बार-बार मिले और कुछ ही मुलाकातों में मैंने ये फैसला कर लिया कि आप ही वहीं इंसान हो… जिसके साथ मैं अपनी पूरी जिंदगी गुजार सकती हूं…

आप मेरे सीनियर  थे… फिर दोस्त बने लेकिन कब सब  कुछ बन गए ये तब पता चला जब हमने अलग होने का फैसला किया… क्योंकि इस प्यार की कोई मंजिल नहीं थी… लेकिन शायद हमारी जोड़ी रब ने बनाई थी, तभी तो बार-बार दूर जाने के बाद भी हम हर बार वापस एक हो गए…

हालांकि, हमें एक कराने में कई लोगों का हाथ हैं लेकिन सबसे ज्यादा मदद की आपके प्यार ने, जिसनें मुझे कभी कमजोर नहीं पड़ने  दिया… और मैं हर मुश्किल से लड़ने के लिए तैयार थी… आखिरकार हमारा इंतजार रंग लाया और हमने अपने परिवारवालों को इस रिश्तें के लिए राजी ही कर ही लिया…

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जैसी हूं वैसे अपनाया, कभी बदलने की कोशिश नहीं की…

आपने कभी मुझमें कोई चेंज नहीं करना चाहा, मैं जैसी हूं वैसी ही मुझे अपनाया… शायद इसलिए मैं आपसे इतना प्यार करती हूं… हालांकि, एक शिकायत भी है कि क्यों इतना भरोसा करते हो, कभी कोई  रोक-टोक नहीं करते दूसरे लड़कों की तरह… कितना भी कोशिश करूं आपको जलन ही नहीं होती… शायद ये हमारे सच्चे प्यार और दोस्ती का ही सबूत है कि आप मुझ पर इतना विश्वास करते हो…

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सिर्फ एक साल में ही बन गए लाइफ पार्टनर…

बहुत से लोगों को ये बात अजीब लगती है कि सिर्फ 1 साल में आप किसी को लाइफ पार्टनर बनाने का फैसला कर सकते हैं… लेकिन उन सबको मैं बस यहीं कहना चाहूंगी कि कभी-कभी तो पूरी जिंदगी लग हैं और कभी सिर्फ कुछ मुलाकातें ही काफी होती है… क्योंकि प्यार वक्त देखकर नहीं होता… बल्कि जब प्यार होता है तभी सही वक्त होता है… बस फैसला आपको लेना होता है अपने दिल की सुनो या फिर दुनिया की… और मैंने अपने दिल की सुनी…

योर लविंग वाइफ

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प्यार की ये कहानी सुनो…

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आखिरी तारीख- 13 फरवरी    

फिल्म रिव्यू : कश्मीर पंडितों के दर्द को दिखाती ‘शिकारा’

रेटिंगः ढाई स्टार

निर्माताः विनोद चोपड़ा फिल्मस

निर्देशकः विधु विनोद चोपडा

कलाकारः आदिल खान,सादिया,प्रियांशु चटर्जी व अन्य

अवधिः दो घंटे

19 जनवरी 1990 के दिन चार लाख कश्मीरी पंडितों को अपनी मातृभूमि कश्मीर छोड़कर भगाना पड़ा था और तब से यह लोग अपने ही देश में रिफ्यूजी बनकर जम्मू व दिल्ली के रिफ्यूजी कैंप में रह रहे हैं. 1990 में कश्मीर छोड़ने के लिए मजबूर होने वालों में फिल्मकार विधु विनोद चोपडा की मां शांति भी थी. फिल्मकार विधु विनोद चोपड़ा अपनी मां को समर्पित फिल्म ‘‘शिकारा’’ लेकर आए हैंं, जिसमें कश्मीर से निकाले गए कश्मीरी पंडितों की कथा है.

कहानीः

यह कहानी शुरू होती है. वर्तमान मेंं जम्मू के मुठ्ठी रिफ्यूजी कैंप से, जहां शिव (आदिल खान) की पत्नी शांति (सादिया) को पता चलता है कि अमरीका के राष्ट्पति ने शिव व उसे मिलने के लिए आगरा के ताजमहल में बुलाया है. राष्ट्पति ने इनके लिए ताज होटल में प्रेसींडेंशियल शूट बुक कर दिया है और हवाई जहाज की टिकट भी भेजी है. दोनो ताज होटल पहुंचने के बाद अपने शूट में आराम करते हैं. तब शिव अपनी पत्नी शांति को वीडियो पर एक फिल्म दिखाता है.

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यह फिल्म शुरू होती है 1989 के कश्मीर की. श्रीनगर में डल झील के पास एक फिल्म की शूटिंग के दौरान नाटकीय ढंग से शिव व शांति की मुलाकात होती है. इस पहली मुलाकात में ही शिव,शांति को अपना दिल दे बैठता है. फिर शिव अपने सबसे अच्छे दोस्त, क्रिकेटर व मुस्लिम युवक लतीफ (साइमन) की मदद से शांति तक अपना प्रेम संदेश भिजवाते हैं और शांति कह देती है कि शिव उसके पिता से आकर बात करे. लतीफ भारतीय टीम के लिए क्रिकेट खेलना चाहता है. शिव व शांति की शादी हो जाती है. इस शादी में हिंदू व मुस्लिम सभी शामिल होते हैं. शिव व शांति शिकारा पर अपना हनीमून मनाते हैंं.

उस वक्त शांति इच्छा व्यक्त करती हैं कि हो सके तो कभी ताज महल दिखाने उन्हे ले जाएं. लतीफ के पिता को शिव अब्बा कहते हैं. लतीफ के पिता अपने मकान को बनाने की बजाय सारा पत्थर शिव के मकान को बनाने में लगा देते हैंं. शांति की सहेली आरती से लतीफ शादी करना चाहता है. पर कुछ माह में ही हालात बदल जाते हैं. लतीफ के पिता की हत्या हो जाती है और लतीफ आतंकवादी बन जाता है. उसका पाकिस्तान से आना जाना शुरू हो जाता है. तमाम हिंदुओं के साथ आरती की भी हत्या लतीफ करता है.

एक दिन लतीफ अपने दोस्त शिव को बुलाकर समझाता है कि वह अपने पिता को बचाने के लिए माता पिता व पत्नी शांति के साथ कश्मीर छोड़कर ‘इंडिया’ चला जाए. शिव मना कर देता है. मगर दो दिन बाद ही कश्मीर के हालात इस कदर बिगड़ते हैं कि शिव व शांति के सााथ ही चार लाख कश्मीरी पंडितों को कश्मीर छोड़कर भागना पड़ता है. इन्हे जम्मू के रिफ्यूजी कैंप में शरण मिलती है. कई उतार चढ़ाव के साथ तीस साल बीत गए. पर वह आज भी रिफ्यूजी कैंप में रहने को विवश हैं.

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इस बीच शिव अमरीका के राष्ट्पति को लगातार पत्र लिखते रहते हैं. पर कभी जवाब नहीं आया. कश्मीर में शिव के मकान पर हाजी ने कब्जा कर लिया है और वह खरीदना चाहते हैं, पर शिव मकान नहीं बेचना चाहते. क्योंकि वह अपनी पत्नी शांति के साथ वापस कश्मीर के अपने मकान में आना चाहते हैं. एक दिन शांति बीमार हो जाती है. शिव उनके इलाज के लिए कमर कस लेते हैं. वीडियो वाली फिल्म खत्म हो जाती है. शादी की तीसवीं सालगिरह का केक आ जाता है. तब शिव को बताना पड़ता है कि अब तक मकान न बेचने की जिद पर अड़े रहे शिव ने उसके इलाज व उसे ताज महल घुमाने के लिए मकान बेच दिया है. होटल आदि का खर्च भी अमरीका के राष्ट्पति ने नहीं भेजा है. नाव से ताजमहल की तरफ जाते समय रास्ते में ही शांति प्राण त्याग देती है. फिर शिव अपनी पत्नी शांति की अस्थियां लेकर कश्मीर के अपने गांव के मकान में रख देते हैं और वहीं रहकर बच्चो को पढ़ाने लगते हैं.

लेखन व निर्देशनः

फिल्मकार विधु विनोद चोपड़ा का एक विशाल मकसद के साथ इस फिल्म को बनाया है, मगर उनका प्रयास विफल रहा. पूरी फिल्म में कश्मीरी पंडितों के प्रति कोई संवेदना नही उपजती. कश्मीारी पंडितों की पीड़ा को मुखर अभिव्यक्ति नही मिलती. फिल्म में इमोशंस का घोर अभाव है. फिल्म इस बात को भी सही ढंग से रेखांकित नही करती कि 1990 में कश्मीरी पंडितों के कश्मीर से भागने से पहले किस तरह के हालात बने. इस तरह के हालात अचानक कैसे बन गए. जब कश्मीर में हिंदू और मुस्लिम एक दूसरे की सभ्यता व संस्कुति का अटूट हिस्सा थे, तो फिर अचानक इनके बीच यह नफरत कैसे पैदा हो गई और इसके लिए दोषी कौन है?

फिल्म पुलिस, सेना, राजनीतिक दलों सहित किसी के भी भूमिका पर कुछ नहीं कहती. पिता की हत्या होते ही एक उभरता हुआ बेहतरीन क्रिकेटर कब कैसे आतंकवादी बनकर हिंदुओं की हत्याएं करने लगा. फिल्म के एक संवाद में अमरीका द्वारा हथियार बेचने की प्रवृत्ति को कश्मीर के लिए दोषी ठहराकर शिव से अमरीकी राष्ट्पति को लगातार पत्र लिखवाकर ही अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ ली.

वास्तव में फिल्मकार ने एक संकीर्ण सोच के साथ अनाड़ी की तरह पटकथा लिखी है. विधु विनोद चोपड़ा ने इस फिल्म को शिव व शांति की प्रेम कहानी के ही रूप में पेश करने पर ज्यादा जोर दिया, मगर त्रासदियों के बीच इनका प्रेम भी ठीक से पल्लवित नहीं होता. अतीत में कश्मीरी पंडितों के साथ हुआ अन्याय मुखर नहीं हो पाया और न ही उसका कश्मीर पर कोई असर नजर आया.

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अभिनयः

आदिल खान व सादिया की यह पहली फिल्म है, पर दोनों ने काफी परिपक्व अभिनय किया है. फिल्म में इनके बीच की केमिस्ट्री कमाल की है, जिससे इनके बीच के रिश्ते की विश्वसनीयता को बल मिलता है. निर्वासित कश्मीरी की पीड़ा को आदिल ने अपने अभिनय से बाखूबी उकेरा है. शिव के ममेरे भाई नवीन के छोटे किरदार में प्रियांशु चटर्जी ने ठीक ठाक अभिनय किया है.

दलजीत कौर: एक्टिंग की वजह से बच्चे को समय न दे पाने का दुख होता है

मिस पुणे का खिताब जीतने के बाद दलजीत कौर ने 2004 में जीटीवी के शो ‘मंशा’ के साथ अपना टीवी डेब्यू किया था. तब से अब तक वे 20 से भी ज्यादा शोज में काम कर चुकी हैं. रियलिटी शोज जैसे ‘बिग बौस 13’, ‘नच बलिए’ आदि में भी उन्होंने हिस्सा लिया. दलजीत जीटीवी के पौपुलर शोज ‘काला टीका,’ ‘हैवान: द मोंस्टर’ का भी हिस्सा रहीं. फिलहाल ‘गुड्डन तुम से न हो पाएगा’ में मुख्य खलनायिका अंतरा की भूमिका निभा रही हैं. दलजीत ने सभी मुश्किलों से पार पाने के साथसाथ सिंगल मदर के तौर पर अपने बच्चे जेडन का भी खयाल रखा. दलजीत कौर से हुई मुलाकात रोचक रही:

सवाल- एक महिला के तौर पर इस मुकाम पर पहुंचने में किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

बहुत कठिन होता है, क्योंकि हमारी फील्ड में छुट्टियां बहुत कम मिलती हैं. सप्ताह में सातों दिन काम करना पड़ता है. 12 घंटे की शिफ्ट होती है. मेरा बेटा जेडन करीब 6 साल का है. जाहिर है बच्चे को टाइम देना बहुत बड़ा चैलेंज है. जब जेडन की छुट्टी होती है तो उसे सैट पर ले जाती हूं. जैसे ही सैट से फ्री होती हूं तुरंत घर भाग जाती हूं.

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 सवाल- क्या कोई पल ऐसा आया जब परिवार के लिए आप ने काम छोड़ देने का फैसला लिया?

हां, मैं ने उसी दिन काम करना छोड़ दिया था जब मुझे पता चला कि मेरी फैमिली बढ़ रही है और ऐसा मैंने बहुत खुशीखुशी किया था, क्योंकि मैं फैमिली बढ़ाना चाहती थी. लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि मुझे काम पर वापस आना पड़ा. जब दोबारा इंडस्ट्री जौइन की तो मेरा बेटा एक-डेढ़ साल का था. उस वक्त मैं उसे अपने साथ ही सैट पर ले जाती थी. वह एक तरह से सैट पर ही बड़ा हुआ है.

 

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The beauty of nature is when u post the same background twice … and it still feels so fresh !!! ????

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 सवाल- सब से ज्यादा किस पर विश्वास करती हैं?

मुझे अपने ऊपर सब से ज्यादा भरोसा है. यदि इंसान किसी भी मोड़ पर कुछ करना चाहता है तो उसका सैल्फ कौन्फिडैंट और सैल्फ मोटिवेटेड होना बहुत जरूरी है.

 सवाल- अपनी सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगी?

अपने मम्मीपापा को. जब मैं अकेली हुई यानी पति से तलाक हुआ तो उन्होंने मुझे बहुत प्यार से संभाला.

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 सवाल- वे पल जब आप की जिंदगी ने अपना रुख बदला था?

मेरी जिंदगी ने अपना रुख तब बदला था जब मेरा तलाक हो रहा था. वह मेरे लिए बहुत मुश्किल भरा समय था, क्योंकि मेरा बच्चा बहुत छोटा था और पता न था कि मेरा कैरियर फिर से पटरी पर आएगा या नहीं. यह भी मेरे लिए एक चैलेंज था.

 सवाल- किस चीज से डर लगता है?

मुझे इस बात से डर लगता है कि  कहीं मेरा आत्मविश्वास कम न हो जाए. मैं इतनी सक्षम रहूं कि अपने घर और बच्चे को पाल सकूं.

 सवाल- एक्ट्रैस बनने के लिए व्यक्तित्व में क्या खूबियां होनी जरूरी हैं?

एक्ट्रैस बनने के लिए बहुत ज्यादा डैडीकेशन और हार्ड वर्क चाहिए. धैर्य भी बहुत जरूरी है. खुद को मैंटेन करने की हिम्मत होनी चाहिए.

सवाल-  काम बहुत होने के कारण अपने बच्चे को पूरा समय नहीं दे पातीं कभी इस बात का दुख होता है?

बच्चे को समय न दे पाने का दुख तो रोज होता है, क्योंकि डेली सोप की ऐक्ट्रैसेज के पास समय की बहुत कमी होती है.

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 सवाल- क्टिंग में हाथ आजमाने की इच्छुक लड़कियों से क्या कहना चाहेंगी?

यह बिलकुल न सोचें कि यहां सफलता पाने के लिए आप का बहुत सुंदर, गोरी और लंबी होना जरूरी है. ऐसा नहीं है. आप के पास इमोशन, पेशंस, हार्ड वर्क और टेलैंट का मिश्रण होना चाहिए.

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