सदियों में ताजा मेथी बाजार में आराम से मिलती है. मेथी की सुगंध और स्वाद भारतीय भोजन का विशेष अंग है. मेथी के पत्तों को कच्चा खाने की परंपरा नहीं है. आलू के साथ महीन महीन काट कर सूखी सब्ज़ी या मेथी के पराठे आम तौर पर हर घर में खाए जाते हैं. लेकिन गाढ़े सागों के मिश्रण में इसका प्रयोग लाजवाब सुगंध देता है, उदाहरण के लिए सरसों के साग, मक्का मलाई या पालक पनीर के पालक में.
हमारे व्यजनो का स्वाद बढ़ाने के साथ साथ ही यह हमारे सेहत के लिए फायदेमंद भी होता है. मेथी में लौह तत्व भरपूर होते हैं, इसलिये रक्त अभाव होने पर यह बहुत लाभकारी होती है. प्रति 100 ग्राम मेथी दाना में आर्द्रता – 13.70 ग्राम, प्रोटीन – 26.20 ग्राम ,वसा – 5.80 ग्राम ,मिनरल्स – 3.0 ग्राम ,फाइबर – 7.20 ग्राम ,कार्बोहाइड्रेट – 44.1 ग्राम ,एनर्जी – 333.0 किलो कैलरी ,कैल्शियम – 160.0 मिग्रा. फास्फोरस – 370.0 मिग्रा. ,आयरन – 6.50 मिग्रा. होता है. इसके बीजों में फॉस्फेट, लेसिथिन और न्यूक्लिओ-अलब्यूमिन होने से ये कॉड लिवर ऑयल जैसे पोषक और बल प्रदान करने वाले होते हैं. इसमें फोलिक एसिड, मैग्नीशियम, सोडियम,जिंक, कॉपर, नियासिन, थियामिन, कैरोटीन आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं.
इसके पत्तों को निचोड़कर रस निकालकर उसमें बराबर मात्रा में शहद मिलाकर सेवन करने से यकृत, पीलिया एवं पित्ताशय के रोगों में लाभ होता है. इसके रस में मधुमेह की प्रारंभिक अवस्था में ही रोग का नाश करने की क्षमता होती है.
– चोट लगने पर मेथी के पत्तों की पोटली बांधने या लेप लगाने से चोट की सूजन मिटती है.
– शरीर के जले हुए स्थान पर इसके पत्तों को पीसकर लगाने से जलन मिटती है तथा शरीर का दाह शांत होता है.
– घी के साथ मेथी के भूने हुए पत्ते खाने से अतिसार अर्थात् पतले दस्त दूर होते हैं.
– मेथी प्राकृतिक शैम्पू के रूप में भी बहुत गुणकारी है. स्ान से पहले मेथी की पत्तियों को पीसकर सिर के बालों में लगाते रहने से बालों की रूसी दूर होती है तथा बाल काले व मुलायम हो जाते हैं.
– मेथी की पिसी हुई पत्तियों का लेप लगाने से चेहरे के मुंहासे व कालापन तथा चेहरे की झाईयां दूर हो जाती है.
– नेत्र विकारों खासकर आंखों की जलन, प्रदाह तथा आंखों से अत्यधिक पानी आने पर मेथी की पत्तियों का रस आंखों में डालने से अत्यन्त लाभ होता है.
हम सबमें परफेक्ट ब्यूटी की चाह इस कदर घर कर गई है कि इसने एक पागलपन का रूप ले लिया है.इसके कारण लोग जैसे दिखते हैं,उसे वे या तो बदसूरत समझ लेते हैं या उसमें बहुत सुधार करने की कोशिश करने लगते हैं.वास्तव में यह सोच हमारे आत्मसम्मान को कम कर देती है. यदि यह भावना हद से ज्यादा बढ़ जाये तो किसी के भी दिल और दिमाग पर इसका बुरा असर दिखने लगता है.अब अगर आप 40 बरस की हो गयी हैं तो दुनिया की कोई ऐसी ताकत नहीं है जो आपको ऐसा बना दे कि आप 21 साल की दिखने लगें. लेकिन हम हैं कि मानते ही नहीं हैं.अपने चेहरे पर उम्र के साथ आने वाली झुर्रियों को कम करने के लिए हम बेतहाशा एंटीरिंकल क्रीमों का इस्तेमाल करने लगती हैं.लेकिन इस सबसे हमें कुछ ख़ास हासिल नहीं होता. क्योंकि उम्र के साथ बुढ़ापा बहुत स्वभाविक है.इसे न स्वीकार करके हम अपनी सेहत से ही खिलवाड़ करने लगते हैं.
हम ऐसा इसलिए करते हैं क्योंकि ब्यूटी प्रोडक्ट्स और क्रीम हमें सिर्फ इन उत्पादों की खूबियां बताते हैं.इनसे होने वाले बुरे असर को नहीं.वास्तव में हमें अपने आपसे प्यार करना खुद ही सीखना होगा.खुद की तुलना खुद से करने के लिए निर्णय करने का अधिकार भी खुद को ही देना होगा.हम उन लोगों से ईर्ष्या करते हैं, जो मोटे दिखने के बावजूद खुश रहते हैं. हमें यह देखकर बड़ी हैरानी होती है कि एक मोटी लड़की आखिर ऐसा टॉप कैसे पहन सकती है जिसमें उसकी बड़ी टमी दिखायी देती है ? यकीन मानिए यह वह लड़की है जो अपने आपको खुद की नजरों में बेहद ऊंचा समझती है.
वास्तव में हमारे भीतर की भावना ही हमें अपने आपके प्रति प्यार करना सिखाती है.यही हमें एक जीवन दृष्टि देती है.यदि हम अपने आपसे प्यार करना नहीं सीख पाते हैं तो हमारे भीतर का आत्मविश्वास चूर चूर हो जाता है. हिम्मत टूट जाती है.हम जीवन की चुनौतियों का सामना कर पाने में खुद को अक्षम पाते हैं.खुद को पसंद न कर पाने की यह भावना हमारे भीतर से ही आती है. धीरे धीरे यह हमारे व्यक्तित्व को छोटा साबित करती है.इस तरह धीरे धीरे हम खुद ही अपना विनाश करने लगते हैं.इसके विपरीत जब हम अपने आपसे प्यार करना सीख लेते हैं तो हम बेहद रचनात्मक और पॉजिटिव सोच रखने लगते हैं.सवाल है हम इस तरह के कंफर्ट जोन को आखिर कैसे हासिल करें?
खुद को स्वीकार करना सीखें
खुद से बार बार कहें मैं जैसी हूं.खुद को स्वीकार करती हूं. एक बार अगर आप इस बात को स्वीकार कर लेती हैं तो आपके भीतर एक नया आत्मविश्वास जागृत होता है जिससे आप एक नयी ताकत महसूस करती हैं.
दूसरों में भला ऐसी कौन सी योग्यता है कि वह आपका आकलन करें ? आप उन्हें ऐसा करने की छूट ही क्यों देते हैं ? खुद का आकलन करने के लिए अपना पैमाना, खुद ही निर्धारित करें.कल्पना कीजिये कि आप किसी प्रतियोगिता में हिस्सा ले रही हैं,जिसमें आपकी भूमिका निर्णायक की है. इस काल्पनिक प्रतियोगिता में अपना आकलन बिना किसी भेदभाव के करें. साथ ही अपने लिए इस तरह का पैमाना निर्धारित करें जिसमें आप सौ प्रतिशत खरे उतरें.
अपनी मंजिल खुद तय करें
अपने भीतर छिपी प्रतिभा, योग्यता, पैशन को पहचानें. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपके इर्दगिर्द कितने नेगेटिव सोच के लोग हैं.आप अपना रास्ता खुद बनायें.खुद से प्यार करना जिंदगी का वह जज्बा है जिसके बिना आप ताउम्र खुद को प्यार ही नहीं कर पाते.
कोई ‘सी’ हो या ‘ही’ अपने गुस्से को काबू में रखना सबको आना चाहिए.क्योंकि जिस तरह अपवाद के लिए ही सही,दुनिया में अब तक एक भी ऐसा इंसान नहीं हुआ,जो कभी मरा न हो. ठीक उसी तरह से धरती में आज तक कोई एक भी महिला या पुरुष ऐसा नहीं हुआ,जिसे जीवन में कभी गुस्सा न आता हो.जी हां,दुर्गुण होते हुए भी गुस्से का यह गुण सबमें होता है.फिर भी मनोविदों से लेकर डॉक्टरों तक की राय यही है कि इससे हर हाल में बचना चाहिए क्योंकि –
-गुस्सा हमारी परफोर्मेंस को 70%तक घटा देता है.
-हार्वर्ड बिजनेस स्कूल के एक शोध अध्ययन के मुताबिक़ गुस्सैल स्वभाव के चलते प्रमोशन की 50% संभावनाएं कम हो जाती हैं.
-गुस्सा हमारी शब्दावली को बेहद जहरीली बना देता है.यह हमारी तमाम खूबियों और उपलब्धियों को बेमानी बना देता है.
-गुस्सा किसी अच्छेखासे समझदार शख्स की इमेज को भी मिनटों में ध्वस्त कर देता है.
-कुछ देर भर के गुस्से से सालों पुराने मजबूत समझे जाने वाले संबंध भी टूट जाते हैं.
-ज़रा जरा सी बात पर गुस्सा आ जाना हमारी सबसे बड़ी कमज़ोरी होती है.क्योंकि इससे हम अपना प्रभावी व्यक्तित्व खो देते हैं.
-तमाम वार स्टडी बताती हैं कि गुस्सा हमारे मनोबल को ही नहीं निर्णय लेने की क्षमता को भी कम करता है.
-गुस्सा किसी की भी नजरों में हमारे सम्मान को कम कर देता है.
गुस्से को काबू में कैसे करें ?
जब लगे कि न चाहते हुए भी गुस्से के चक्रव्यूह में फंसते जा रहे हैं तो खूब पानी पीएं.संभव हो तो एक लंबी वाक पर चले जाएं. अगर कर सकते हों तो कोई भी समय हो कसरत करना शुरू कर दें .बिना मन लगे भी सकारात्मक और क्रिएटिव काम करने लगें.कुछ देर तो बहुत बेचैनी होगी लेकिन फिर धीरे धीरे आप कूल डाउन होने लगते हैं. अगर आपको कोई म्यूजिकल इंस्ट्रुमेंट बजाना आता है तो बिना कुछ सोचे बजाने लगें,भले मन न लगे पर जल्द ही आपका गुस्सा कम होना शुरू हो जाएगा.छात्र हैं या अकेले रहते हैं तो अपना कमरा साफ करने लगें.दफ्तर में हों तो अपनी डेस्क साफ करने की कोशिश करें.पिक्चर देखने जाएं.किसी दोस्त को फोन घुमा दें.कोई पसंदीदा चैनल देखने लगें.मजाक और चुटकुले भी तनाव दूर करने के तरीके हैं.योगा,मेडिटेशन और कांगनेटिव तकनीक भी तनाव और गुस्से को दूर करने में कारगर होती हैं,इन्हें भी आजमाएं.
अब अदालतों को भी सम झ आ रहा है कि पशुओं पर क्रूरता से राष्ट्र का क्या अहित होता है और उसी के अनुसार निर्णय देने शुरू किए हैं. पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश राजीव शर्मा ने पशु क्रूरता पर सब से उत्तम निर्णय दिए हैं. प्रकृति और पर्यावरण पर तुरंत और प्र्रभावशाली निर्णय देने में वे सदैव अग्रणी रहे हैं. उन्होंने ही गंगा जैसी नदियों और पशुजगत को न्यायायिक व्यक्ति मानने के महत्त्वपूर्ण निर्णय दिए है.
यही नहीं उन्होंने पुलिस प्र्राथमिकियों से जाति के नाम निकालने, किसानों की आत्महत्याओं, मृत्युदंड प्राप्त कैदियों को सौलिटैरी कौन्फाइंमैंट में रखने की कुप्रथा पर निर्णय दिए हैं.
अभी हाल ही में न्यायाधीश संजय करोल और अरिंदम लोध ने त्रिपुरा में मंदिरों में पशुबलि पर निर्णय दिए हैं. इन्होंने पुजारियों के लालच और मुफ्त के खाने और दान की ललक को सम झते हुए इस बीभत्स, अमानवीय बलि को संस्कृति के नाम पर स्वीकार करवाने की जिद को असंवैधानिक करार दिया है और तब जा कर 525 वर्ष बाद अगरतला के दुर्गाबाड़ी मंदिर में बलि प्रथा समाप्त हुई है.
घरेलू हिंसा के लिए भी जिम्मेदार
दुनियाभर में, जहां भी सरकारें निकम्मी या आलसी हैं, अदालतें ही पशुओं को अनावश्यक क्रूरता से बचा रही हैं. 19 अगस्त, 2019 को राष्ट्रीय बाल व पारिवारिक अदालत परिषद ने एक प्रस्ताव पारित किया कि पशु क्रूरता का सीधा संबंध मनुष्यों में आपसी पारिवारिक हिंसा से जुड़ा है.
जिन घरों में पशुओं के साथ क्रूरता भरा व्यवहार होता है, वहां घरेलू हिंसा भी ज्यादा होती है. एक शोध के अनुसार 43% वे अमेरिकी जिन्होंने 1988 से 2012 में स्कूलों में निर्दोष बच्चों को गोलियों का शिकार बनाया पशुओं के प्रति क्रूरता के मामलों में भी अभियुक्त रहे हैं.
1 जनवरी, 2019 से अमेरिका की गुप्तचर एजेंसी एफबीआई (फैडरल ब्यूरो औफ इनवैस्टिगेशन) ने अपराधियों के चोरी, मारपीट के मामलों के साथ पशु क्रूरता के मामलों को भी अपने डेटा बेस में रखना शुरू कर दिया है.
स्वभाव में ही क्रूरता
अमेरिका में शैरिफों की संस्था ने भी यह चेतावनी दी है कि पशुओं के प्रति जो लोग कू्रर होते हैं उन के बाद में गंभीर अपराध करने के चांस बढ़ जाते हैं. अत: पशुओं के प्रति कू्रर लोगों पर नजर रखना जरूरी है.
पशुओं के प्रति क्रूर लोग अपने ही बच्चों, पत्नी व मातापिता तक के प्रति कू्रर भावना रखते हैं. लोगों को यह भ्रम छोड़ना होगा कि पशुओं के प्रति क्रूरता केवल पशुओं के लिए हानिकारक है. अपने बैल के नाजुक अंगों में डंडा मारने वाला गाड़ीवान या भैंस को पीट कर दूध निकालने वाला दूधिया अपने घर में भी क्रूर हो तो कोई बड़ी बात नहीं है.
से लेना चाहिए, क्योंकि अधिकतर देशों का कानून अदालतों को इस तरह के अधिकार देता है कि वे उन क्षेत्रों में कानून बना दें जहां सरकार ने कोई कानून न बनाया हो.
कलर्स के शो शुभारंभ में राजा और रानी की शादी का दिन आखिरकार आ गया है. वहीं राजा की माँ, आशा ने भी कीर्तिदा की योजना पर पानी फेरने की पूरी तैयारी कर ली है, लेकिन कीर्तिदा भी हार मानने वाली नहीं है. आइए आपको बताते हैं कीर्तिदा को रोकने के लिए क्या करने वाली है आशा…
शादी रोकने की योजना बनाने में व्यस्त है कीर्तिदा
पिछले एपिसोड में आपने देखा कि राजा-रानी जहाँ अपनी शादी से पहले के खुशियों के पलों में खुश होते हैं तो वहीं कीर्तिदा शादी रोकने के लिए चाल चलने की योजना बनाने में व्यस्त होती है.
कीर्तिदा के शादी को रोकने की योजना को नाकाम करने के लिए आशा एक कदम उठाती है और वह कीर्तिदा को स्टोर रूम में बंद कर देती है, लेकिन राजा कीर्तिदा के बिना शादी की रस्मों को निभाने से मना कर देता है. वहीं आशा पूरे परिवार को ये यकीन दिलाती है कि राजा-रानी की शादी बिना रूकावट के हो जाए, इसलिए कीर्तिदा ने शादी से दूर रहने का खुद ही प्रण लिया है.
शादी की रस्में निभाएंगे राजा-रानी
आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि राजा अपनी माँ की बात मानकर शादी की रस्में निभाने के लिए मान जाएगा, जिसके बाद राजा और रानी शादी की रस्मों को निभाते हुए नजर आएंगे. वहीं आशा इस बात से परेशान रहेगी कि कीर्तिदा कहीं कमरे से बाहर न निकल जाए.
अब देखना ये है कि क्या कीर्तिदा स्टोर रूम से निकलकर राजा और रानी की शादी रोकने में कामयाब हो पाएगी? जानने के लिए देखते रहिए शुभारंभ,सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे,सिर्फ कलर्स पर.
फिल्म ‘फूल और कांटे’ से अपने अभिनय कैरियर की शुरुआत करने वाले अजय देवगन निर्माता, निर्देशक भी है. उन्होंने एक्शन फिल्मों के अलावा हर तरीके की फिल्मों में नाम कमाया. बहुत शांत और कम बोलने वाले अजय देवगन हर फिल्म को चुनौती समझते है और दिन रात मेहनत करते है. उन्हें हर नया विषय आकर्षित करता है, यही वजह है कि उन्होंने फिल्म ‘तानाजी- द अनसंग हीरो’ में तानाजी की भूमिका निभाई और वे इसके निर्माता भी है. ये पहली ऐतिहासिक एक्शन फिल्म है, जिसे थ्री डी में फिल्माया गया है. उन्होंने इस फिल्म की थ्री डी को फिल्माने में भारतीय एक्सपर्ट को लिया है,जिससे उन्हें इस फिल्म को करने में समय लगा. ये फिल्म हिंदी और मराठी में रिलीज होने वाली है. वे अपनी फिल्म को लेकर बहुत खुश है पेश है कुछ अंश.
सवाल-साल 2020 की ये एक बड़ी फिल्म आप लोगों तक थ्री डी में पहुंचा रहे है, इसका ख्याल कैसे आया?
इसे थ्री डी में करना जरुरी था, क्योंकि आपने ऐसी फिल्म देखी नहीं है. जो तकनीक मैंने इसमें प्रयोग की है, वह आज तक हमारे देश में देखी नहीं गयी है. ये सारे कमाल हमारे देश के लोगों ने किया है. मैं हमेशा ऐसी कोशिश करता हूं कि मैं कुछ नयी चीजों की शुरुआत फिल्मों में करूँ और मैंने पहले किया भी है. इस फिल्म को करने में 4 साल का समय लगा.
सवाल- तानाजी के लिए कितनी रिसर्च करनी पड़ी? ऐसी फिल्में बनाना कितना मुश्किल होता है?
ये सोलहवीं सदी की इतिहास है और उनके बारें में अधिक कुछ लिखा हुआ नहीं है, ऐसे रिसर्च के बाद एक कहानी बनानी पड़ी, जो दर्शकों को अच्छा लगे. इसके अलावा लेखक ने कई इतिहासकारों और परिवार वालों से मिले और जानकारी हासिल की.
ऐसी फिल्में बनाना बहुत मुश्किल होता है हर चीज क्रिएट करनी पड़ती है. कहानी को ठीक करना पड़ता है. इसके बावजूद भी देश इतना बंटा हुआ है कि कंट्रोवर्सी आ ही जाती है. इस फिल्म को बनाने का उद्देश्य यह भी है कि हमें आज़ादी मुश्किल से मिली है. इसलिए उसका ख्याल आज के यूथ को रखने की जरुरत है. इसके अलावा एक्शन सीन्स, तकनीक आदि कठिन थे.
सवाल- तकनीक का ज्ञान आपमें सालों से है, इसकी जानकारी आपने कैसे प्राप्त की?
मैंने अपने पिता से काफी जानकारी हासिल की है. 10 साल की उम्र से मैंने इसमें कदम रखा था और उनके साथ उस समय फिल्मों के बनने की पूरी प्रोसेस को मैं देखता और करता भी था. इसी से मेरी रूचि इसमें सालों से है. तब काम करना बहुत मुश्किल था अब तो बटन दबाते ही सब काम हो जाता है. तकनीक की वजह से आज काम करना आसान हो गया है.
सवाल- काजोल के साथ सालों बाद फिर से काम करने का अनुभव कैसा रहा?
पहले जैसा ही था. मैंने ही उसे इस फिल्म को करने के लिए कहा था, क्योंकि तानाजी ने जीवन में बहुत त्याग किये है, लेकिन उनके परिवार का त्याग सबसे अधिक रहा , क्योंकि किसी भी मुश्किल घडी में पत्नी चेहरे पर मुस्कान लिए पति को टिका लगाकर विदा करती थी, जबकि वह जानती थी कि इसके बाद वे युद्ध से लौटकर आ सकते है या नहीं भी, पर इसका शिकन वे अपने पति को ज़ाहिर नहीं करती थी और ऐसी भूमिका काजोल के अलावा कोई नहीं कर सकता था, क्योंकि इसमें पत्नी के भाव को दिखाना कठिन था. कहानी सुनने के बाद उसने भी हां कर दी.
सवाल- क्या आप मानते है कि महिलाओं का त्याग आज भी कायम है?
ये मैं मानता हूं कि महिलाओं ने हमेशा से त्याग हर जगह हर देश में किया है. कोई भी इंसान महिला के सहयोग के बिना आगे नहीं बढ़ सकता, फिर चाहे वह माँ, पत्नी, बहन या बेटी क्यों न हो. सबसे पहले वह एक महिला के बिना तो पैदा ही नहीं हो सकता, न पल सकता है और न बड़ा हो सकता है.
सवाल- आप दोनों की 20 साल की शादीशुदा जिंदगी का राज क्या है?
हम दोनों ने कभी एक दूसरे की जिंदगी में दखल नहीं दिया. स्पेस दिया, दोनों को अपने काम करने की आजादी मिली. इससे आप जो करना चाहे कर पाते है और एक दूसरे को रेस्पेक्ट भी मिलता है. वह एक पत्नी और कलाकार के रूप में भी परफेक्ट है.
सवाल-आप अभिनेता, निर्माता, निर्देशक सब कुछ किया है, मुश्किल किसमें होती है? आपको दर्शकों का प्यार खूब मिलता है, इसकी वजह क्या मानते है?
मैं जो भी काम करता हूं उसी में मुश्किल अनुभव करता हूं. हर काम की अपनी समस्याएं है. मुझे दर्शकों का प्यार हमेशा मिला है, इसकी वजह है सही फिल्म का करना, जिसकी कोशिश मैं लगातार करता हूं. अगर आप कुछ गलत काम न करे, तो दर्शक हमेशा आपको देखना पसंद करते है.
सवाल- छात्र जीवन में आपको किस विषय से प्यार था?
मुझे इतिहास हमेशा से पसंदीदा विषय रहा है, अंकगणित मुझे समझ में कम आती थी. इतिहास आज भी मुझे पसंद है.
सवाल- क्या इस तरह की कई और फिल्में बनाने की इच्छा है?
अभी हम आगे किसी और योद्धा को लेने की कोशिश करेंगे, क्योंकि इसमें केवल इतिहास से ही नहीं, आज भी कई ऐसे पुरुष और महिलाएं है, जो काम कर रहे है, पर उन्हें कोई जानता नहीं है. मैं ऐसे सभी पर फिल्म बनाने की इच्छा रखता हूं, ताकि पूरी दुनिया और देश उनके बारें में जान सकें.
सवाल-समय के साथ इंडस्ट्री कितनी बदली है? फिटनेस के लिए क्या करते है?
आज इंडस्ट्री प्रोफेशनल तरीके से काम करती है, दोस्ती यारी अब कम हो चुकी है, सभी काम में लगे है. ये स्ट्रेसफुल है. काम के लिए अच्छा है, पर हेल्थ के लिए ठीक नहीं, पर मेरी कोशिश रहती है कि 9 टू 6 काम करूँ. मैं हमेशा से ही अनुशाषित जीवन बिताना पसंद करता हूं. फिटनेस के लिए व्यायाम और डाइट करता हूं.
कलर्स के शो ‘बिग बौस’ से पौपुलर हो चुकीं एक्ट्रेस नेहा पेंडसे शादी के बंधन में बंध गई है. हाल ही नेहा की सगाई की फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हुई थीं, जिसके बाद अब उनकी शादी की फोटोज वायरल हो चुकी हैं. आइए आपको दिखाते हैं नेहा के वेडिंग की खास फोटोज…
मराठी लुक में नजर आईं नेहा
नेहा पेंडसे ने 5 जनवरी को पुणे में बौयफ्रेंड शार्दुल सिंह के साथ मराठी रीति-रिवाजों से सात फेरे लिए है. मराठी दुल्हन के जोड़े में सजीं नेहा पेंडसे पति के साथ बेहद खूबसूरत लग रही थीं.
टीवी की ये खूबसूरत एक्ट्रेस शादी के दौरान पेस्टल पिंक कलर की नऊवारी साड़ी में दिखाई दी. इसी के साथ नेहा का महाराष्ट्रियन ट्रेडिशनल लुक के साथ महाराष्ट्रियन ज्वैलरी उनके लुक पर चार चांद लगा रही थी. तो वहीं पति शार्दुल भी एक्ट्रेस से मैचिंग कुर्ता-पायजामा पहने हुए नजर आए.
इससे पहले नेहा पेंडसे की पंडित जी पूजा की तैयारियां करते हुए फोटोज भी वायरल हो चुकीं हैं. जिसमें उनके पास ढ़ेर सारा पूजा का सामान रखा था. पूजा के दौरान नेहा पेंडसे काफी खुश नजर आईं. अब खुश होना तो बनता ही है नेहा पेंडसे को अपने सपनों का राजकुमार जो मिल गया है. पूजा में भी नेहा ट्रेडिशनल मराठी अंदाज में नजर आईं थी. उन्होंने खूबसूरत साड़ी के साथ शानदान नोजपिन कैरी की थी.
सर्दियों में धनिया हर किसी का पसंदीदा हो जाता है, सर्दियों में बाजार में धनिया की ताजी पत्तियां मिलती हैं, जिसका उपयोग हर तरह की सूखी और रसेदार सब्ज़ी में परोसते समय मिलाने और सजावट करने के लिए किया जाता है , साथ ही धनिये की चटनी पूरे भारत में प्रसिद्ध है. आलू की चाट और दूसरी चटपटी चीज़ों में इसको टमाटर या नीबू के साथ मिलाया जा सकता है. सूप और दाल में बहुत महीन काट कर मिलाने पर रंगत और स्वाद की ताज़गी़ अनुभव की जा सकती है. हर तरह के कोफ्ते और कवाब में भी यह खूब जमता है. इसकी पत्तियों को पका कर या सुखा कर नहीं खाया जाता क्यों कि ऐसा करने पर वे अपना स्वाद और सुगंध खो देती हैं.
आयुर्वेद शास्त्र में महर्षि चरक एवं महर्षि सुश्रुत ने धनिये के अनेक औषधीय प्रयोगों का वर्णन किया है. आयुर्वेद के प्रसिध्द ग्रंथ ‘भाव प्रकाश’ में भी धनिये के अनेक प्रयोग बताये गये हैं. धनिये का प्रयोग खाना बनाने में मसाले के रूप में किया जाता है. धनिया सिर्फ मसाले के योग्य नहीं होता बल्कि इसका प्रयोग अनेक बीमारियों में औषधि के रूप में भी किया जाता है. आयुर्वेदज्ञों के अनुसार धनिया त्रिदोषहर, शोधहर, कफध्न, ज्वरध्न, मूत्रजनक एवं मस्तिष्क को बल प्रदान करने वाला होता है.
आयुर्वेद की औषधि के रूप में मुख्ययोग तुम्बर्वादि चूर्ण, धान्य-पंचक, धान्यचतुष्क, धान्यकादिहिम आदि प्राप्त होते हैं. हरी महक वाली पत्ती तथा सूखे धनियों के बीच का औषधीय प्रयोग परम्परागत रूप में निम्नानुसार किया जाता है-
1. धनिया विटामिन “ए” का भंडार होता है. इसमें कई प्रकार के रोगों को दूर करने की क्षमता होती है. हरा धनिया थकान मिटाता है. स्फूर्ति लाने में सहायक होता है.
2. हरे धनिए की पत्तियों को पीसकर सिर में लेप करने से सिर दर्द दूर होता है. शरीर के किसी अंग में सूजन आने पर इसका लेप करने से भी लाभ होता है.
3. बुखार आने पर शरीर की जलन दूर करने में भी धनिया काफी लाभकारी होता है. सूखे धनिए को पीसकर रात भर भिगोकर रखें. सुबह कपडे से छानकर मिश्री मिलाकर रोगी को पिला दें. इससे आराम मिलेगा. शरीर की जलन भी कम होगी.
4. धनिया अम्ल रोधी औषधि है. इसके लिए एक चम्मच साबुत धनिया एक कप पानी में उबालें और ढंककर रख दें. ठंडा होने पर मिश्री मिलाकर पी लें. इससे शरीर में अम्ल की मात्रा नियंत्रित होती है.
5. अधिक प्यास की बीमारी दूर करने में भी धनिया काफी लाभकारी सिद्ध होता है. साबुत धनिए को 1-2 घंटे तक पानी में भिगोकर रखें. इसके बाद उस पानी में शहद और मिश्री मिलाकर थोडी-थोडी देर में पिलाने से अधिक प्यास की बीमारी से छुटकारा मिलता है.
6. धनिये की हरी पत्तियों को लहसुन, प्याज, गुड़, इमली, अमचूर, आंवला, नींबू, पुदीना आदि के साथ बारीक पीसकर चटनी के रूप में खाते रहने से पाचन क्रिया दुरुस्त बनी रहती है तथा भूख खूब लगती है.
7. शरीर के भीतर किसी भी अंग में मीठी खुजली (सबसबाहट) चल रही हो तो ताजे हरे धनिया को पीसकर उस अंग में लगाने से खुजली दूर होती जाती है.
8. गर्मी के कारण कोई भी उपद्रव होने पर सुबह-शाम पिसी धनिये की फक्की एक-एक चम्मच लेते रहना चाहिए.
9. बच्चा अगर बहुत ज्यादा तुतलाता हो तो 30 ग्राम धनिये का पाउडर तथा दस ग्राम अमलतास का गूदा लेकर दोनों का काढ़ा बना लें. इस काढ़ा से दो माह तक लगातार सुबह-शाम कुल्ला (गरारा) कराइये. निश्चित ही तुललाना कम होगा.
10. पित्त बढ़ जाने से जी मिचलाना रहता हो तो हरा धनिया पीसकर उसका ताजा रस दो चम्मच की मात्रा में पिलाने से लाभ होता है. भोजन में हरे धनिये की ताजी पिसी चटनी का प्रयोग करते रहने से भी जी मिचलाना कम होता है.
11. सामान्य त्वचा रोगों तथा मौसम के बदलाव पर यदि खुजली होती हो तो उस स्थान पर हरे धनिया को पीसकर लगाने से खुजली दूर हो जाती है.
12. कमजोरी या अन्य कारणों से चक्कर आने पर धनिया पाउडर दस ग्राम तथा आंवले का पाउडर दस ग्राम लेकर एक गिलास पानी में भिगोकर रख दें. सुबह अच्छी तरह मिलाकर पी लें. इससे चक्कर आने बंद हो जाते हैं.
13. पित्त बढ़ जाने पर हरी-पीली उल्टियां आनी शुरू हो जाती हैं. इस अवस्था में हरे धनिया का रस निकालकर उसमें गुलाब जल मिलाक पिलाने से लाभ होता है.
14. सूखा धनिया पाउडर एक ग्राम, हरे धनिया का रस एक चम्मच, धनिया पत्ती का रस एक चम्मच तथा शहद एक चम्मच मिलाकर पीते रहने से पुरुष की स्तम्भन शक्ति बढ़ती है तथा वीर्य गाढ़ा होता है.
मौसम में बदलाव का असर सबसे पहले स्किन पर दिखता है. सर्दियों में चलने वाली शुष्क हवाएं स्किन की नमी छीन लेती हैं, जिससे वह रूखी और बेजान सी नजर आने लगती है. चेहरे का निखार कहीं खोने लगता है, होंठ फटे-फटे नजर आते हैं. स्किन के निखार के साथ-साथ हमारा कॉन्फिडैंस भी खो जाता है. ऐसे में सर्दियों में स्किन की खास देखभाल बहुत जरूरी है.
स्किन को मॉइस्चर देने के साथ-साथ उसे ग्लोइंग बनाए रखने के लिए सर्दियों में बेहतर बौडी लोशन का इस्तेमाल बेहद जरूरी है. ऐसे में हिमालया कोको बटर बॉडी लोशन आपकी स्किन को सिर्फ मॉइस्चराइज नहीं करता.
1. कोको बटर के फायदे
कोको बटर नैचुरल फैट होता है, जो कोको बींस से बनता है. यह स्किन को नमी देने के साथ-साथ स्किन में भीतर से कसाव लाने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद ऐंटीऑक्सीडैंट स्किन को हैल्दी रखता है. कोको बटर में विटामिन ए की मात्रा अधिक होती है, जो सूर्य की हानिकारक किरणों से स्किन को बचाता है. कोको बटर युक्त लोशन के इस्तेमाल से स्किन मुलायम और खिली-खिली नजर आती है.
हिमालया कोको बटर में व्हीट जर्म ऑयल और विटामिन ई की अच्छी मात्रा होती है. व्हीट जर्म ऑयल स्किन के लिए बहुत लाभकारी है. यह स्किन को पोषण और नमी प्रदान करता है. इसके इस्तेमाल से स्किन का रूखापन गायब हो जाता है और वह सॉफ्ट नजर आती है. इस में मौजूद विटामिन ई स्किन को हाइड्रेट रखता है, साथ ही डैमेज स्किन को जल्द से जल्द ठीक करने में भी मदद करता है. इसके इस्तेमाल से स्किन चिकनी और कोमल रहती है.
3. कैसे करें इस्तेमाल
– नहाने के तुरंत बाद बॉडी लोशन लगाएं.
– यदि आपकी स्किन ज्यादा ड्राई रहती है तो रात को भी बॉडी लोशन का इस्तेमाल कर सकती हैं.
शो ‘छोटी सरदारनी’ में धीरे-धीरे मेहर की जिंदगी में परेशानियां कम हो रही है. और आज के एपिसोड में दिखेगा लीप. मेहर, सरब और परम की जिंदगी में आने वाला ये लीप शो में नया मोड़ लाने वाला है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…
मेहर पहुंची अस्पताल
अब तक आपने देखा कि सरब मेहर को ढूंढता है, लेकिन वह उसे नहीं मिलती. दूसरी तरफ मेहर अबौर्शन के लिए अस्पताल पहुंच जाती है. जहां डौक्टर अबौर्शन की तैयारी करते हुए मेहर को बेहोशी का इंजेक्शन लगा देते हैं.
मेहर के औपरेशन शुरू होने से पहले ही हरलीन आकर डौक्टर को रोक देती है. वहीं सरब भी पहुंच जाता है और मेहर और उसका बच्चा बिल्कुल सही सलामत रहते हैं.
लीप के बाद दिखेगा ये नया ट्विस्ट
मेहर और सरब का परिवार परम के दस्तरबंदी का फंक्शन मनाते हुए नजर आएंगे. दस्तरबंदी सेलिब्रेशन के लिए सरब पूरे घर को डेकोरेट करेगा. वहीं मेहर और परम सेलिब्रेशन के लिए तैयार होते हुए नजर आएंगे. दस्तरबंदी सेलिब्रेशन के वक्त भी मेहर और हरलीन के बीच कड़वाहट देखने को मिलेगी.
अब देखना ये है कि लीप के बाद कहीं गिल फैमिली की खुशियों को किसी की नजर तो नही लग जाएगी? जानने के लिए देखते रहिए ‘छोटी सरदारनी’, सोमवार से शनिवार, रात 7:30 बजे, सिर्फ कलर्स पर.