इमेज बिगाड़ सकती है इमोजी

हम व्हाट्सऐप पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए कई इमोजी का इस्तेमाल करते हैं. सुबह से ले कर रात तक हर वक्त हम व्हाट्सऐप से जुड़े रहते हैं. इस दौरान कई बार हम कुछ लिख कर भेजने के बदले उस से जुड़ी इमोजी सैंड कर देते हैं और लगता है हम ने अपनी बात कह दी. लेकिन कहीं आप अनजाने में गलत इमोजी तो नहीं भेज रहे हैं? भले ही आप की मानसिकता गलत न हो, पर आप कुछ ऐसे इमोजी सैंड कर देते हैं जिन का मतलब बेहद गंदा हो सकता है. ऐसे ही कुछ इमोजी के बारे में जानते हैं, जिन का मतलब गलत हो सकता है, पर हमें इस बारे में पता नहीं होता.

आई रोलिंग: इस इमोजी का मतलब हो सकता है घृणा या ऊब व्यक्त करना.

नमस्ते: इस इमोजी का ज्यादातर इस्तेमाल हम थैंकयू या प्रणाम करने के लिए करते हैं, लेकिन इस का सही मतलब हाईफाई इव होता है.

डोनट: भले ही लोग इसे स्वीट के तौर पर इस्तेमाल करते हैं, लेकिन गंदे शब्द में इसे वैजाइना का सिंबल माना जाता है.

लव होटल: यह इमोजी वेश्यालय को दर्शाती है.

गर्ल्स विद बन्नी इयर्स: इस इमोजी का अर्थ लोग अलगअलग भावों को दर्शाने के लिए करते हैं, लेकिन कई लोग इसे वेश्यावृत्ति के लिए भी इस्तेमाल करते हैं. जापान में यह सैक्स डौल की सिंबल है.

साइलैंट फेस: इस इमोजी का मतलब होता है अपना मुंह बंद रखो.

स्प्लैश: इस इमोजी का इस्तेमाल और्गेज्म (संभोग की चरम सीमा) के लिए किया जाता है.

चेरीज: यह इमोजी स्तन (बूब्स) को दर्शाती है.

आइज: यह इमोजी लोग तब भेजते हैं जब वे किसी की सैक्सी सैल्फी मांग रहे होते हैं.

मैक्रोफोन: यह मेल और्गन को दर्शाती है.

लड़की का अपने सिर पर हाथ रखना:  यह इमोजी फीमेल और्गेज्म को दिखाती है.

पीच: इस का मतलब होता है बम.

मेल बौक्स: इस का मतलब है भेजने वाला आप से सैक्स इच्छा जाहिर कर रहा है.

फायर: अगर कोई आप को यह इमोजी भेजता है तो इस का मतलब है कि आप सैक्सी दिख रहे हैं. ऐसी और कई इमोजी हैं जिन के अर्थ बेहद गंदे हो सकते हैं और हमें इस का पता नहीं होता है.

पहली जौब में रखें इन 7 बातों का ध्यान

आपकी भी अगर पहली जौब है तो आपको कुछ बातों का खास ध्यान रखना होगा क्योंकि अक्सर ऐसा होता कि लोगों की जब पहली जौब लगती है तो उन्हें पता ही नहीं होता कि क्या गलत है और क्या सही. ऐसे में वो कुछ लापरवाही बरतने लग जाते हैं जो उनको बाद में महंगी पड़ जाती है और जौब  से भी हांथ धोना पड़ जाता हैं क्योंकि प्राइवेट जौब  में आपकी जौब  जाते ज्यादा देर नहीं लगती है इसलिए जरूरी है कि आपको हर बात पता होनी चाहिए और कुछ सावधानी भी आपको बरतनी चाहिए जो आपके करियर और जौब दोनों के लिए अच्छा होगा साथ ही आपके फ्यूचर के लिए भी अच्छा रहेगा.

1. ड्रेसिंग सेन्स पर दें ध्यान

सबसे पहले तो आपका ड्रेसिंग सेन्स अच्छा होना चाहिए ताकि आपका इंप्रेशन आपके बॉस पर अच्छा पड़े.ये नहीं कि आप कुछ भी पहन कर औफिस में चले जाएं और कोशिश करें कि अगर आप फार्मल ज्यादा पहने तो ये बहुत अच्छा रहेगा आपके लिए और आपका आपके बौस पर इंप्रेशन भी अच्छा पड़ेगा. कोशिश करें लाइट कपड़े ही ज्यादा पहने ये भी एक प्लस प्वाइंट होता है.

2. चुगली करने की आदत छोड़ें

औफिस में कभी भी किसी की चुगली किसी से ना करें. वहां पर कब आपकी बातें आपके बौस तक पहुंच जाएं आपको पता भी नहीं चलेगा और ये आपके लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होगा. गुट बनाकर कभी भी बातें न करें ऐसे आप अपने बौस की नजरों में आ सकते हैं. इधर-उधर की बातों से ज्यादा आप अपने काम पर फोकस करें और कंपनी के लिए नए-नए आइडियाज दें.

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3. चापलूसी से बचें

अपने बौस की बातों को माने लेकिन उनकी चापलूसी न करें ऐसे में आप औफिस के लोगों को खटकने लगते हैं और लोग फिर आपको बौस की नजरों में गिराने का सोचने लगते हैं. आपके खिलाफ साजिश भी हो सकती है. ताकि आपको कंपनी के बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए.

4. जरूरत से ज्यादा छुट्टी न लें

कभी भी जरूरत से ज्यादा छुट्टी न लें.कोशिश करें कि आप सिर्फ अपना औफ लें और जरूरत पड़ने पर ही एक्स्ट्रा औफ लें क्योंकि अगर आप जरुरत से ज्यादा छुट्टियां लेने लगते हैं लोगों को यही लगता है कि यार ये तो हमेशा छुट्टियां लेता हैं. काम को लेकर कर्मठ नहीं है और आपके बौस पर भी इंप्रेशन अच्छा नहीं जाएगा इसलिए कोशिश करें की कम छुट्टी लें.

5. काम में रहें बेहतर

बेहतर से और बेहतर काम करने की पूरी कोशिश करें ताकि ये आपके आगे के करियर में आपके लिए अच्छा साबित होगा.जितना अच्छा काम होगा आपका प्रमोशन भी उतना ही अच्छा होगा क्योंकि वहीं पर आपके काम की अहमियत होती है.

6. औफिस के लोगों से बनाएं अच्छा रिलेशन

कोशिश करें कि औफिस में किसी से भी पंगे ना हों.सभी से आपका रिश्ता अच्छा बना रहे साथ ही चपरासी से लेकर कलिग तक सभी की राय आपके बारे में अच्छी हो तभी आप उस औफिस में अपनी एक अच्छी छवि बना पाएंगे.

7. पर्सनल और प्रौफेशनल लुक को रखें अलग

सबसे अहम बात अक्सर कई लोगों को औफिस में किसी से प्यार हो जाता है और दो लोगों रिलेशन में आ जाते हैं और इसमें कोई बुराई नहीं है लेकिन ध्यान रहे कि वो रिश्ता कभी भी आपके काम के बीच ना आए और आपकी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ दोनों अलग-अलग हों. ये सभी बातें आपके पहले जौब  और आपके करियर में आपको सक्सेज दिलाएंगी. इसलिए हमेशा ये बातें याद रखें.भूल से भी कभी कोई गलत काम ना करें.

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आखिर क्यों ट्रोल हुईं काम्या पंजाबी, ट्रोलर्स ने बेटी के लिए कही ये बात

‘बिग बौस’ का के पिछले सीजन का हिस्सा रह चुकीं एक्ट्रेस काम्या पंजाबी आए दिन सुर्खियों में हैं. काम्या के सुर्खियों में रहने का कारण उनका कोई सीरियल नही है, बल्कि उनकी पर्सनल लाइफ है. हाल ही में खबर है कि अपनी एक फोटो के चलते काम्या सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का शिकार हो रही हैं. आइए आपको बताते हैं क्या है काम्या पंजाबी के ट्रोल होने की वजह…

मंगेतर की फोटो पर ट्रोल हो रही हैं काम्या

हाल में भी काम्या पंजाबी के मंगेतर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर एक रोमांटिक फोटो शेयर की, जिसमें वो काम्या के साथ नजर आ रहे थे. इस फोटो को शेयर करते हुए काम्या पंजाबी के मंगेतर ने लिखा, ‘मैं आपसे वादा करता हूं कि आपके चेहरे की मुस्कान हमेशा यूं ही बनी रहेगी.’

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ट्रोलर ने कही ये बात

सोशल मीडिया ट्रोलर ने करारा जवाब देते हुए लिखा, ‘तुम इस बेकार 2 रुपये की औरत काम्या पंजाबी के साथ क्यों हो? इसने रिएलिटी शो में अपने साथ की महिलाओं के साथ गलत व्यवहार किया है. ये अपने मजे के लिए अपनी बेटी को भी बेच सकती है.’

काम्या के मंगेतर को दिया करारा जवाब

काम्या पंजाबी के बारे में ये कमेंट सुनकर मंगेतर ने लिखा, ‘अब आप मेरी बात ध्यान से सुनिए… अगर आपमें दम है तो अपनी असली तस्वीर लगातर बात करिए. आपको यह अधिकार किसने दिया है कि आप किसी महिला और उसकी बेटी के बारे में ये बात कह सकें? आपको मेडिकल हेल्प की जरूरत है.’ वहीं काम्या भी चुप नही रही और उन्होंने जवाब देते हुए लिखा, ‘इस इंसान के लिए कोई शब्द है आपके पास ? लगता है कि इनकी मां ने इन्हें बेच दिया है और ये इसी की फ्रस्टेशन यहां निकाल रहे हैं.’

बता दें, टीवी एक्ट्रेस काम्या पंजाबी अक्सर अपनी बेबाकी से जवाब देने की आदत के चलते ट्रोलिंग का शिकार हो जाती हैं, लेकिन वह ट्रोलर्स को कईं बार जवाब भी दे चुकी हैं.

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सर्दियों के लिए वजन को ऐसे करें कंट्रोल

सर्दियों के मौसम में शरीर को चुस्त दुरुस्त रखना किसी चुनौती से कम नहीं है. इस मौसम में सर्द हवाओं की वजह से शरीर में आलस रहता है, जिस कारण से ज्यादातर लोग अपनी फिटनेस पर ध्यान नहीं दे पाते हैं और उनकी ये लापरवाही आगे चलकर उनके मोटापे का कारण बनती है. लेकिन ये भी सच है कि अगर आपको सेहत बनानी है, तो सर्दियों से अच्छा और कोई मौसम नहीं है, क्योंकि इस मौसम में ढेर सारे फल और सब्जियां उपलब्ध होते हैं. इन फल और सब्जियों का सेवन कर और थोड़ा व्यायाम कर आप स्वस्थ रहने के साथ ही साथ फिट भी रह सकती हैं. सर्दियों में वजन बढ़ने के डर से अगर आप भी परेशान हैं, तो फिक्र छोड़िये. खाने-पीने के रूटीन में थोड़े से फेर बदल से ही आप खुद को इस मौसम में भी फिट रख सकती हैं. ये है सर्दियों के लिए खास स्वास्थ्य टिप्स.

1. डाइट के अनुसार ही खाएं

मौसम कोई भी हो, लेकिन अगर आपको फिट रहना है तो डाइट चार्ट के अनुसार ही खाना- पीना चाहिए. अगर आप अपने दिन भर की जरूरत के अनुसार कैलोरी लेंगी, तो आपका वजन कंट्रोल में रहेगा और आप दिन भर एनर्जी से भरी रहेंगी.

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2. हेल्दी ब्रेकफास्ट जरूरी है

सुबह का नाश्ता हमें दिनभर ऊर्जावान बनाए रखता है. इसलिए जरूरी है कि आप सुबह का नाश्ता किये बगैर घर से न निकलें. ध्यान रखें कि सुबह के नाश्ते में आप प्रोटीन और विटामिन से भरपूर चीजें ही खाएं. इसके लिए आप नाश्ते में इडली, डोसा, उपमा, अंडा, ब्राउन ब्रेड, फ्रूट कस्टर्ड और दूध आदि ले सकती हैं. इसके अलावा अपने नाश्ते और खाने में फल और सलाद को भी जरूर शामिल करें. ध्यान रखें अगर आपको वजन घटाना है तो मलाई निकालकर ही दूध पीएं.

3. दोपहर के खाने में शामिल करें हरी सब्जियां

अगर आप औफिस जाती हैं या ज्यादा समय तक बैठकर काम करती हैं तो दोपहर में भूख से थोड़ा कम ही खाएं. दोबारा भूख लगने पर आप जूस या ग्रीन टी ले सकती हैं. दोपहर के खाने में दाल, हरी सब्जी, रोटी, दही या छाछ लेंना आपके स्वास्थ्य के लिए बेहतर रहेगा.

4. हल्का-फुल्का डिनर पाचन के लिए है बेहतर

रात के खाने में आप दलिया, खिचड़ी आदि हल्के और सुपाच्य भोजन ले सकती हैं. रात के खाने में मांस, मछली, पनीर जैसे भारी खानों से परहेज करें क्योंकि रात के वक्त आपका शरीर ज्यादातर आराम की अवस्था में होता है. ऐसे में शरीर ज्यादा भारी भोजन को नहीं पचा पाते और चर्बी बढ़ाते हैं.

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5. सोने से तुरंत पहले न लें भोजन

रात का खाना सोने से कम से कम 2 घंटे पहले लेना चाहिए और भोजन के बाद 15 मिनट तक अवश्य टहलना चाहिए. सोने से पहले गुनगुना दूध, हल्दी डालकर या अदरक के रस के साथ लेना अच्छा होगा.

फ्लौप फिल्मों को लेकर बोले सिद्धार्थ मल्होत्रा, पढ़ें खबर

फिल्म मरजांवा से फैंस का दिल जीत रहे बौलीवुड एक्टर सिद्धार्थ मल्होत्रा इन दिनों काफी बिजी चल रहे हैं. चाहे वह फिल्म की शूटिंग हो या उनकी हाल ही में रिलीज हुई फिल्म मरजांवा हो. आजकल फिल्म की तारीफ हर कोई कर रहा है, लेकिन इससे पहले रिलीज हुई फिल्म की असफलता का कारण कुछ अलग ही है. आइए आपको बताते हैं क्या फिल्म न चलने के पीछे क्या कारण मानते हैं सिद्धार्थ

सिद्धार्थ की असफल फिल्मों की संख्या है ज्यादा

2012 में करण जौहर की फिल्म ‘स्टूडैंट औफ द ईयर’ से कैरियर की शुरुआत करने वाले सिद्धार्थ मल्होत्रा का कैरियर हिचकोले लेते हुए आगे बढ़ रहा है. उन की सफल फिल्मों के मुकाबले असफल फिल्मों की संख्या ज्यादा है. इन दिनों वे फिल्म ‘मरजावां’ को ले कर चर्चा में हैं. उन का मानना है कि उन्होंने अपनी हर असफल फिल्म से सीखा. मगर असफल फिल्मों के लिए वे खुद को दोषी मानने के बजाय फिल्म की पूरी टीम को दोषी मानते हैं.

 

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Thank you?? Extremely glad to receive so much love and support from the audiences!

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फ्लौप फिल्में होने के बावजूद मिल रही हैं फिल्में

सिद्धार्थ मल्होत्रा कहते हैं, ‘‘मेरे कैरियर की दूसरी ही फिल्म ‘हंसी तो फंसी’ असफल थी. मगर इसे देख कर कई फिल्मकारों को एहसास हुआ कि यह लड़का नौनग्लैमरस किरदार निभा सकता है. तो उस के बाद मेरे पास कई फिल्मों के औफर आए. यदि लोग आप को काम दे रहे हैं तो इस का मतलब यह है कि उन्हें आप का काम पसंद आ रहा है.

फिल्म की सफलता मेरे हाथ में नही- सिद्धार्थ’

‘‘फिल्म की सफलता या असफलता मेरे हाथ में नहीं है. मैं सिर्फ अपने काम पर ध्यान दे सकता हूं. फिल्म के निर्माण में एक लंबी टीम होती है, कितने सारे लोग काम करते हैं. ऐसे में जब तक मैं खुद निर्माता न बनूं तब तक मैं फिल्म के निर्माण पर कंट्रोल नहीं रख सकता. मेरी जितनी भी फिल्में सफल हुई हैं, उस का श्रेय मैं पूरी टीम को देता हूं और जो फिल्म नहीं चली, उस के लिए मानता हूं कि टीम की हैसियत से हम कुछ नहीं ला पाए.’’

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सुष्मिता को ऐसे दिया बौयफ्रेंड रोहमन ने सरप्राइज, ये था रिएक्शन

बौलीवुड एक्ट्रेस सुष्मिता सेन ने बीते दिन 19 नवंबर को अपना 44वां बर्थडे सेलिब्रेड किया, जिसकी खास बात ये है कि सुष्मिता के बौयफ्रेंड रोहमन शौल ने उनके लिए खास बर्थडे सरप्राइज रखा. वहीं सुष्मिता के इस बर्थडे की फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. आइए आपको दिखाते हैं सुष्मिता सेन के बर्थडे की कुछ खास तस्वीरें…

ऐसे दिया सुष्मिता को सरप्राइज

बौयफ्रेंड रोहमन शौल ने सुष्मिता के लिए एक सरप्राइज पार्टी दी. रोहमन ने पूरे छत को सजाया, जो काफी शानदार लग रहा था. सुष्मिता सेन को यह सब बेहद पसंद आया और उन्होंने रोहमन को शुक्रिया भी बोलते हुए अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर फोटो शेयर की. वहीं इसी के साथ सुष्मिता ने अपने बर्थडे सेलिब्रेशन की वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर की.

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वीडियो के साथ लिए इमोशनल पोस्ट

वीडियो को शेयर करते हुए सुष्मिता सेन ने एक इमोशनल पोस्ट लिखा. उन्होंने लिखा, ‘ मैंने जो कुछ भी मांगा, मुझे सब मिला. इस प्यारे सरप्राइज के लिए थैंक्यू जान…आई लव यू… सबने शानदार एक्टिंग की. मुझे इस बारे में कुछ भी पता नहीं था. एक मैजिक छत जिसमें लाइट, गुब्बारे, टेंट, यमी कैक और भावुक नोट थे.’

बौयफ्रेंड ने ऐसे विश

बौयफ्रैंड रोहमन शौल ने सुष्मिता को बर्थडे विश करते हुए एक नोट भी शेयर किया था, जिसमें उन्होंने एक मैसेज के साथ सुष्मिता की फोटो शेयर की थी. रोहन ने इस पोस्ट में लिखा, ‘अब इससे ज्यादा खुदा से और क्या मांगू, उसने तो पूरी कायनात से मुझे नवाज़ा है.’

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बता दें, एक्ट्रेस सुष्मिता सेन अपने से 15 साल छोटे बौयफ्रेंड रोहमन शौल के साथ रिलेशनशिप में हैं. वहीं इसी के साथ कई बार इनके ब्रेकअप की खबरें भी आ चुकी हैं.

इन 5 बातों से आपका अच्छा होगा रिलेशन

जिंदगी का एक मोड़ ऐसा आता है जब आपका कोई साथी बनता है कोई हमसफर बनता है. आपका पार्टनर होता है.कुछ लोगों का रिश्ता तो चलता है लेकिन कुछ लोगों के रिश्ते लेकिन लंबे नहीं चलते हैं और वो एक दूसरे से दूर हो जाते हैं. लेकिन कुछ ऐसी बातें होती हैं जिन्हें अगर आप ध्यान रखेंगे तो यकीन मानीए की आपका रिश्ता बना रहेगा और आपके रिलेशनशिप में कोई दिक्कत भी नहीं होगी.

1. एक-दूसरे को समझें

अगर आप दोनों ही वर्क करने वाले इंसान हैं तो याद रहे कि आप दोनों की टाइमिंग अलग-अलग हो सकती है ऐसे में आप दोनों को एक-दूसरे को समझना होगा ये समझना होगा की सामने वाला इंसान काम में व्यस्त होगा.अगर उसकी वजह से आप एक-दूसरे को ज्यादा समय नहीं दे पा रहे हैं तो इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि आपका रिश्ता खराब हो गया बल्कि आपका रिश्ता औऱ मजबूत होना ऊपर डिपेन्ड करता है.

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2. लड़ाई को सुलझाना है जरूरी

अक्सर छोटी-मोटी लड़ाईयां हो जाती हैं लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं कि आपके रिश्ते में बिल्कुल भी प्यार नहीं है.उस लड़ाई को सुलझाकर आप एक-दूसरे को प्यार दीजिए और फिर देखिए की आपकी लड़ाई औऱ गुस्सा दोनों एक पल में गायब.क्योंकि आप दोनों ही काम की वजह से अगर एक दूसरे को वक्त नहीं दे पाते हैं तो जितना भी वक्त मिलता है उसे बिना लड़ाई के प्यार से बिता कर देखें शिकायतों के लिए तो जिंदगी पड़ी है और ये भी हो सकता है कि जिंदगी ना पड़ी हो आप इसे अन्यथा ना ले क्योंकि फ्यूचर किसी ने नहीं देखा है इसलिए जो भी वक्त मिले उसे प्यार से बिता लें.

3. दिखावे से बचें

प्यार का मतलब सिर्फ दिखावा नहीं होता है इसलिए दिल में एक-दूसरे के लिए सच्ची इज्ज़त होनी चाहिए क्योंकि गिफ्ट देने से ही अगर प्यार होता है तो वो प्यार नहीं है क्योंकि कुछ लोग यही सोचते हैं कि देखों तो वो उसको कितने गिफ्ट देता है वो उससे कितना प्यार करता है.लेकिन वो सच्चा प्यार नहीं है एक-दूसरे की इज्जत करना और एक-दूसरे का खयाल रखना ही सच्चा प्यार होता है.

4. दोस्ती का रिश्ता होना है जरूरी

सबसे मुख्य बात तो ये है कि प्यार से पहले आपका रिश्ता दोस्ती का होना चाहिए और कभी भी आप दोनों एक-दूसरे से कुछ भी ना छुपाए.शक तो कभी भी ना करें क्योंकि अगर आप हर वक्त एक-दूसरे पर शक करेंगे कि वो कहीं किसी औऱ से तो बात नहीं करता तो आपका रिश्ता नहीं चल पाएगा क्योंकि शक का कोई इलाज नहीं होता औऱ अगर आपके मन में कोई बात है तो आप एक-दूसरे से खुल कर पूछ लें.वो कहते हैं ना कि खामोशी से अच्छा होता है कि आप खुलकर बात कर लें शांति से.खामोश रहकर आप अंदर ही अंदर खुटेंगे.

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5. यादों को सजोएं

प्यार में दो लोग अलग भी हो जाते हैं उनकी कुछ मजबूरियां हो जाती हैं लेकिन यकीन मानिए की जब ऐसा होता है तो उनके साथ बिताए हुए पल और उनकी यादें ही आपके साथ होती हैं और अच्छा होगा कि वो यादें अच्छी हों. हालांकि आप अगर इन बातों का ध्यान रखेंगे तो रिलेशनशिप अच्छा ही बनेगा आपका.

बुढ़ापे से पहले ही जाग जाएं

अमेरिका का एक मजेदार पर चौंकाने वाला आंकड़ा है. अमेरिका में लगभग 4 करोड़ से ऊपर की आयु के वयस्क अपना काम छोड़ कर अपने वृद्ध मातापिता की देखभाल कर रहे हैं. अनुमान है कि ये वयस्क लगभग लाख डौलर का नुकसान प्रति वयस्क कर रहे हैं. भारत की स्थिति भी इस से कुछ अलग नहीं होगी बस यहां लोग नौकरियां नहीं छोड़ रहे, क्योंकि घरों में आमतौर पर पत्नियां हैं, जिन्होंने कभी काम नहीं किया, पर उन औरतों की गिनती धीरेधीरे बढ़ रही है, जिन्होंने मांपिता या सासससुर की देखभाल के लिए अच्छीखासी नौकरियां छोड़ दीं.

चूंकि अब वृद्ध अकसर 75-80 की आयु में ही होते हैं तब तक बच्चे खुद 45-50 के हो चुके होते हैं. यदि घर में 2 कमाने वाले हों तो 1 को नौकरी छोड़ देनी होती है. पिछली पीढ़ी में यह सुविधा थी कि वे 2-3 बच्चों के मांबाप थे और कोई न कोई उन की देखभाल के लिए आ ही जाता था पर अब जो 40-50 आयु के हैं उन्हें चिंता सता रही है कि उन की देखभाल कौन करेगा.

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आज कम बच्चे, देर से शादी, अकेले रहने का सुख, घर के कामों के प्रति अरुचि, महंगे होते अस्पताल एक चुनौती बन रहे हैं. 40-45 वालों को प्रलोभन दे कर ओल्डऐज होम, इंश्योरैंस पौलिसियां, जमा खाते में धन की योजनाएं परोसी जा रही हैं. पर जिस तरह की बेईमानियां प्राइवेट और सरकारी कंपनियों व बैंकों में हो रही हैं, कोई भरोसा नहीं कि आज का जमा कराया पैसा 30 साल बाद मिले ही नहीं, क्योंकि कंपनी या बैंक बंद हो चुका हो.

वृद्धों की सुरक्षा के लिए बच्चे सब से बड़ी गारंटी रहे हैं पर अब लगता है कि जवानी को पूरी तरह ऐंजौय करने के लिए या कैरियर बनाने की धुन में युवा अपने लिए बुढ़ापे में एक गड्ढा खुद ही खोद रहे हैं, जिस में उन का जीवन दफन हो जाएगा.

इस का एक सरल सा उपाय है सैल्फ गवर्न्ड होम्स फौर ऐज्ड यानी खुद के चलाए जाने वाले ऐसे घर जिन में बूढ़े अपनी देखभाल खुद कर सकें. यह भी इतना आसान नहीं है. इस में वृद्धों और प्रौढ़ों को समय रहते आसपास के वृद्धों को जमा करना होगा. अपने आर्थिक स्तर के अनुसार 5-7 कमरों के घर का इंतजाम कर सकें जिस में 5-7 जोड़े ही रहें.

वे अपना खर्चा कैसे चलाएंगे? कोई फैजदिल हो कोई कंजूस उस से कैसे निबटेंगे यह फैसला करना होगा. 40-45 की आयु में फैसला करना आसान है जब बच्चे बड़े न हुए हों. एक बार बच्चे बड़े हुए नहीं कि वे संपत्ति के लालच में मातापिता को कुछ नहीं करने देंगे. आपसी छोटेबड़े विवादों को सुलटाने का हिसाब करना होगा.

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वृद्धों की मानसिक सुरक्षा आर्थिक सुरक्षा से ज्यादा चाहिए होती है पर उन की देखभाल करने वाले केअरगिवर यह सम झ नहीं पाते. बहुतों की नजरें तो मिलने वाली संपत्ति पर होती हैं. जहां बच्चे या नजदीकी रिश्तेदार नौकर केअरगिवर रख देते हैं वहां केअरगिवर चोरी करने, आलस्य, मारपीट करने तक से बाज नहीं आते और हत्या तक कर देते हैं. कम बच्चों का एक फौलआउट वृद्धों की बेचारगी है. औरतों को ज्यादा सावधान रहना होगा, क्योंकि उन्हें तो तकनीक भी देर से सम झ आती है.

लकीरें-शिखा का नजरिया

मैंशिखा एक 29 वर्षीय महिला हूं. जिंदगी को खुल कर जीना चाहती हूं. लोग कहते हैं मैं दिखने में आकर्षक हूं. पर क्या यह सच है? क्या सुमित का हद से ज्यादा महत्त्वाकांक्षी होना मेरा दम घोंट रहा है.

सुमित नाश्ता कर रहा था कि अचानक फोन की घंटी बजी. पता नहीं फोन किस का था पर सुमित के चेहरे पर बहुत ही प्यारी सी मुसकान नजर आ रही थी, वही मुसकान जिस के लिए मैं यानी शिखा पिछले कुछ सालों से तरस गई हूं.

मैं ने सुमित से पूछा किस का फोन था, तो वह बेपरवाही से बोला, ‘‘यार, किसी पुराने दोस्त का, पर तुम इतनी उत्सुक क्यों हो रही हो?’’

मैं ने बात को आगे बढ़ाए बिना खाने की मेज समेट ली. मैं और सुमित पिछले साल ही रोहतक से फरीदाबाद शिफ्ट हुए. अन्वी के होने के बाद मेरे और उस के बीच की दूरियां बढ़ती जा रही थीं. कुछ उस का बिजनैस में नुकसान तो कुछ हमारे ऊपर बढ़ती हुई जिम्मेदारियों ने जहां मेरी जीभ को कैंची की तरह धारदार कर दिया था, वहीं उसे बहुत ही रूखा कर दिया था.

वह जब भी मेरे करीब आने की कोशिश करता मेरी जबान न चाहते हुए भी बिना रुके चलने लगती. धीरेधीरे हमारे बीच के संबंध साप्ताहिक न हो कर मासिक हो गए. मुझे समझ नहीं आ रहा था जो सुमित मेरा 2 दिनों के लिए मायके जाना बरदाश्त नहीं कर पाता था वह अब कैसे कई दिनों तक मेरे बगैर रह लेता है?

मेरी जेठानी उषा को जब इस बारे में पता चला तो उन्होंने ही पहल कर के हमें रोहतक से फरीदाबाद भेज दिया था. फरीदाबाद में हम एकदूसरे से और भी ज्यादा दूर हो गए. घर के साथसाथ अन्वी की जिम्मेदारी भी अब मेरी थी. उसे स्कूल पहुंचाना और फिर वापस लाना व घर का सारा काम. थक कर चूर हो जाती थी. न तो नए शहर की हवा में अपनापन था और न ही शहर के लोगों में.

अभी ये सब सोच ही रही थी कि सुमित वापस आ गए. मैं ने न चाहते हुए भी उलाहना दी, ‘‘कभी अन्वी और मुझे भी ले जाया करो. घर से निकलते हुए तो चेहरा गुलाब की तरह खिला हुआ था और अब वापस आने के बाद चेहरे पर बारह बज रहे हैं.’’

सुमित भी कहां चुप रहने वाले थे. झट से बोले, ‘‘बोया पेड़ बबूल का तो आम कहां से होए.’’

पूरी रात मेरे और सुमित के बीच अबोला ही रहा. पर जहां मैं इस बात से परेशान थी

वहीं सुमित के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी, ऐसा लग रहा था कि मैं उस की जिंदगी में हो कर भी नहीं हूं.

सवेरे चाय का कप पकड़ाते हुए मैं ने सौरी बोल दिया पर वह बिना ध्यान दिए अखबार में खोया रहा. एकाएक मेरी आंखों में आंसू आ गए जो दर्द से अधिक अपमान के थे.

दोपहर को मैं ने अपनी जेठानी को फोन मिलाया और अपने दिल का हाल बयां कर दिया. वे बोलीं, ‘‘शिखा थोड़ा सब्र से काम लो, प्यार से तो पत्थर भी पिघल जाते हैं.’’

आज रात मैं ने अच्छे से मेकअप किया, सुमित की पसंद का खाना बनाया और उस का इंतजार करने लगी. अन्वी भी पापा की राह देखतेदेखते सो गई. घड़ी में 11 बजे तो मेरा पारा भी चढ़ गया. मैं ने भी गुस्से में खाना उठा कर रख दिया और भूखी ही सो गई. न जाने रात के किस पहर वह आए, मुझे पता ही नहीं चला.

फिर एक सुबह हुई और अब ऐसी ही सुबहें हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गईं. सुमित के चारों ओर एक लकीर थी, ऐसी लकीर जिसे मैं चाह कर भी पार नहीं कर पा रही थी.

बस मुझे यह मालूम था कि यहां भी सुमित को बिजनैस में कुछ खास फायदा नहीं हो रहा था. मैं ऐडजस्ट करने की कोशिश कर रही थी पर आखिर इंसान ही हूं. फेसबुक पर रिश्तेदारों की वैभव्य दिखाती फोटो देख कर कभीकभी सुमित को बोल देती, ‘‘ऐसे बिजनैस से अच्छा तो कोई नौकरी कर लो, कम से कम एक बंधी आमदनी तो रहेगी.’’

सुमित हर बार कहता, ‘‘बस एक चांस मिल जाए फिर तुम देखना मेरा सितारा जरूर चमकेगा.’’

मैं मुसकरा देती और सुमित फोन पर बिजी हो जाता. इस बार भी जब ऐसा ही हुआ तो सुमित के फोन पर बिजी होने के बाद मैं बैडरूम में आ गई पर मुझे उस का व्यवहार बहुत ही अजीब लग रहा था. हालांकि मुझे सुमित पर भरोसा था पर फिर भी मेरे अंदर की औरत जानती थी कि मेरा आकर्षण अब खत्म हो गया है. सुमित की जिंदगी में जरूर कोई और है पर वह कौन है बस यह पता लगाना था.

आज सुमित का जन्मदिन है और यह तय था कि आज हम बाहर डिनर करेंगे. मैं और अन्वी तैयार बैठे थे. सुमित भी आ गए और तैयार हो गए. जैसे ही हम जाने लगे कि फिर से फोन बजा और सुमित के चेहरे पर एक मुसकान आई. पर उस ने फोन काट दिया और चल पड़े. पूरे रास्ते मैं उस फोन के बारे में सोचती रही. मुझे ज्यादा दिनों तक सोचना नहीं पड़ा, क्योंकि एक दिन मैं ने देख ही लिया कि यह भावना का फोन है जो सुमित के चेहरे पर मुसकान लाता है. भावना के लिए ही सुमित बेचैन रहता है.

भावना से मैं एक विवाह में रोहतक में ही मिली थी. दोनों को तब भी मैं ने बहुत घुलमिल कर बातें करते हुए देखा था पर भावना का खुशहाल परिवार देख कर मुझे लगा यह मेरी गलतफहमी है पर अब क्या करूं? मन कर रहा था भावना को फोन कर के जवाबतलब करूं पर फिर सोचा कि जब अपना ही सिक्का खोटा हो तो फिर कोई क्या करे?

मैं बहुत दिनों तक खुद पर काबू न रख पाई. एक दिन ऐसे ही बेजारी से सुमित मेरे साथ खाना खा रहे थे कि फोन की टोन सुनते ही सुमित का चेहरा खिल गया पर न जाने किस रौ में बह कर मैं ने उस के हाथ से मोबाइल छीन लिया, ‘‘क्या कर रहे हो, आज एक बार भी बात नहीं हो पाई सुमि?’’

मैं ने चिल्ला कर बोला, ‘‘सुमि नहीं उस की पत्नी बोली रही हूं.’’

भावना बेशर्मी से बोली, ‘‘हाय शिखा, कैसी हो?’’

मैं ने गुस्से में फोन पटक दिया. सुमित ने भी आव देखा न ताव और मुझे धक्का दे दिया. हम दोनों वहशियों की तरह लड़ते रहे इस बात से अनजान कि हमारी अन्वी सहमी सी एक तरफ बैठी है.

सुमित बोला, ‘‘क्या मुकाबला करोगी तुम भावना से, वह तुम्हारी तरह परजीवी नहीं है, खुद के पैरों पर खड़ी है, मुझे मानसिक संबल देती है जो तुम आज तक नहीं दे पाईं. तुम तो मेरे साथ बस स्वार्थ के कारण जुड़ी हुई हो,’’ कह कर सुमित तीर की तरह कमरे से निकल गया.

उस ने आज मुझे मेरी जगह दिखा दी थी, अब मुझे भी किसी तरह से अपने पैरों पर खड़ा होना है और उसे छोड़ कर चले जाना है.

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क्या आप जानते हैं गाय के दूध के ये फायदे

गाय का दूध अपनेआप में संपूर्ण भोजन है. यह दुनियाभर में उपलब्ध है और प्राचीनकाल से ही दुनिया के हर हिस्से में इस का इस्तेमाल किया जाता है. 1 गिलास दूध अच्छे स्वास्थ्य के लिए बहुत जरूरी है. जिस के बराबर पोषण दुनिया की कोई और चीज नहीं दे सकती.

दूध में मौजूद पोषक तत्त्व

कैल्सियम: गाय का दूध कैल्सियम का सब से अच्छा स्रोत है. कैल्सियम शरीर में कई तरह से फायदेमंद है. खासतौर पर यह दांतों और हड्डियों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी है. कैल्सियम खून का थक्का जमाने और घाव भरने, ब्लड प्रैशर पर नियंत्रण रखने, पेशियों की गतिविधियों और दिल की धड़कनों को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है.

पोटैशियम: इस का सही मात्रा में सेवन स्ट्रोक, दिल की बीमारियों, उच्च रक्तचाप से बचाता है. हड्डियों का घनत्व सामान्य बनाए रखता है और किडनी में पथरी बनने से रोकता है.

कोलाइन: दूध कोलाइन का भी अच्छा स्रोत है. यह एक जरूरी पोषक तत्त्व है जो नींद, पेशियों की गतिविधियों, याददाश्त और सीखने की क्षमता को सामान्य बनाए रखता है. कोलाइन कोशिका झिल्ली यानी सैल मैंब्रेन का रखरखाव करता है, तंत्रिका आवेग के संचरण में मदद करता है, वसा के अवशोषण में सहायक है और क्रोनिक/पुरानी सूजन को कम करने में कारगर है.

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विटामिन डी: विटामिन डी गाय के दूध में प्राकृतिक रूप से उपस्थित नहीं होता, लेकिन यह गाय के दूध को फोर्टीफाई कर इस में शामिल किया जा सकता है. विटामिन डी हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. यह हड्डियों में टूटफूट की मरम्मत के लिए जरूरी है. यह कैल्सियम के अवशोषण तथा प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. इस की कमी औस्टियोपोरोसिस, डीप्रैशन, थकान, पेशियों में दर्द, उच्च रक्तचाप, स्तन एवं कोलोन कैंसर का कारण बन सकती है.

बच्चों के लिए गाय के दूध के फायदे

विकास: प्रोटीन शरीर के विकास के लिए जरूरी है, लेकिन ये कई प्रकार के होते हैं. गाय के दूध में सभी जरूरी प्रोटीन होते हैं. इसलिए यह दूध न केवल शरीर में ऊर्जा पैदा करता है, बल्कि विकास में भी सहायक होता है. बच्चों के लिए रोजाना दूध पीना बहुत जरूरी है ताकि उन के शरीर और दिमाग का विकास ठीक से हो सके.

पेशियों का निर्माण: शरीर में मैटाबोलिज्म को सामान्य बनाए रखने के लिए पेशियों का विकास भी जरूरी है. इस के अलावा वजन भी सामान्य बना रहना चाहिए. पेशियों के विकास के लिए पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन का सेवन करना चाहिए. डेयरी प्रोटीन पेशियों के विकास और टूटफूट की मरम्मत के लिए बेहद फायदेमंद होता है.

प्रतिरक्षा क्षमता बढ़ाता है: दूध में ऐंटीऔक्सीडैंट जैसे विटामिन ई, सैलेनियम और जिंक होते हैं. ये शरीर से हानिकारक फ्री रैडिकल्स को निकालते हैं और शरीर को बीमारियों से बचाते हैं.

अच्छी नींद के लिए जरूरी: दूध में सभी जरूरी प्रोटीन होते हैं, जो अच्छी नींद के लिए जरूरी हैं. अगर बच्चे को सोने से पहले 1 गिलास दूध पिलाएं तो उसे अच्छी नींद आएगी.

हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है:  दूध में कैल्सियम और ऐसे कई जरूरी पोषक तत्त्व होते हैं जो हड्डियों और दांतों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी हैं. उम्र बढ़ने के साथसाथ हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है. अत: दूध पीने से इन समस्याओं से बचा जा सकता है.

दिल का स्वास्थ्य: ओमेगा 3 फैटी ऐसिड को अच्छा कोलैस्ट्रौल माना जाता है, जो दिल को बीमारियों से बचाता है तथा हार्ट अटैक एवं स्ट्रोक से सुरक्षित रखता है.

दिमाग के लिए जरूरी: गाय के दूध में विटामिन बी पर्याप्त मात्रा में होता है जो दिमाग, तंत्रिकातंत्र को सामान्य बनाए रखने के लिए जरूरी है. इस से सोनेजागने का चक्र भी नियंत्रित होता है.

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मां के लिए फायदे

दूध और औस्टियोआर्थ्राइटिस: गाय का दूध कैल्सियम और मिनरल्स का अच्छा स्रोत है, जो हड्डियों और दांतों को सेहतमंद रखने के लिए जरूरी है. घुटनों का औस्टियोआर्थ्राइटिस आजकल आम हो गया है, लेकिन रोजाना 1 गिलास दूध पी कर महिलाएं अपनेआप को इस बीमारी से बचा सकती हैं.

कैंसर से लड़ने में मददगार: विटामिन डी कैंसर से बचाता है और कोशिकाओं का विकास सामान्य बनाए रखता है. दूध में विटामिन डी होता है. ज्यादा मात्रा में डेयरी उत्पादों के सेवन से कैल्सियम और लैक्टोज की पर्याप्त मात्रा शरीर में जाती है और महिलाएं अपनेआप को ओवेरियन कैंसर से सुरक्षित रख सकती हैं.

मधुमेह से बचाता है: गाय के दूध में विटामिन बी और मिनरल्स पर्याप्त मात्रा में होते हैं, जो मैटाबोलिज्म को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं. शरीर में ग्लूकोज और इंसुलिन का स्तर सामान्य बनाए रखते हैं. इस से मधुमेह पर नियंत्रण बना रहता है.

डिप्रैशन से बचाता है: दूध में मौजूद विटामिन डी सैरेटोनिन के निर्माण में मददगार है. यह एक ऐसा हारमोन है, जो अच्छी नींद, भूख के लिए जरूरी है. मूड को भी ठीक रखता है. विटामिन डी की कमी के कारण व्यक्ति डिप्रैशन और थकान से पीडि़त हो सकता है. गाय के दूध में विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में होता है.

वजन में कमी: दूध में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह भूख शांत करता है. इस से मैटाबोलिज्म भी सामान्य बना रहता है. यह शरीर की ऊर्जा बनाए रखता है और गतिहीन जीवनशैली से दूर रखता है. व्यक्ति को सक्रिय बनाता है, जिस से वजन कम होता है.

त्वचा को चमकदार बनाता है: दूध से त्वचा चमकदार और मुलायम बनती है. उस की रंगत में सुधार आता है. दूध में मौजूद पोषक तत्त्व त्वचा को झुर्रियों से बचाते हैं.

शरीर को स्वस्थ बनाए रखता है: दूध शरीर के लिए बेहद फायदेमंद है. यह पेशियों और हड्डियों को मजबूत बनाता है, तनाव कम करता है, आंखों को सेहतमंद बनाता है, कैंसर की संभावना को कम करता है, कोलैस्ट्रौल एवं रक्तचाप कम करता है. कुल मिला कर सेहत के लिए वरदान है.

लेखिका: श्रुति शर्मा

बैरिएट्रिक काउंसलर व न्यूट्रिशनिस्ट, जेपी हौस्पिटल, नोएडा

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