सांस लेने में तकलीफ हो जाएं अलर्ट

सांस की समस्या बुजुर्गों के साथ कम उम्र के युवाओं में भी देखने को मिल रही है. ऐसे में यह जानना बहुत आप के लिए जरूरी है आखिर ऐसा हो क्यों रहा है?

आमतौर पर अधिक समय तक एक्सरसाइज करने से सांसे तेज हो जाती हैं, कई लोगों को सीढ़ियां चढ़ने वक्त सांस में दिक्कत की समस्या का सामना करना पड़ता है कई बार ज्यादा तनाव में रहने कारण भी ऐसी दिक्कत हो जाती है. यह देखा गया है कि सऐसी स्थितियों में जल्दी ही सब नॉर्मल भी हो जाता है. अगर आप को भी सांस लेने में परेशानी हो रही है और उपर्युक्त परेशानी हो रही है तो ध्यान देना बहुत जरूरी है. आइए, जानते हैं फिजीशियन डौक्टर अनीता पौल से आखिर क्यों होती सांस लेने में दिक्कत-

1.  कहीं हृदय रोग तो नहीं

दिल की बीमारियों के चलते भी सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. दिल के रोग मसलन, एन्जाइना, हार्ट अटैक, हार्ट फेल्योर, जन्मजात दिल में परेशानी या एरीथीमिया आदि में सांस लेने में दिक्कत होने लगती है. दिल की मांसपेशियां कमजोर होने पर वे सामान्य गति से पंप नहीं कर पातीं, जिससे फेफड़ों पर दबाव बढ़ जाता है और व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है. इसमें पैरों में भी सूजन और रात सोते वक्त बार-बार खांसी भी आती है.

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2. जब वजन हो ज्यादा

मोटे लोगों को सांस फूलने की बहुत ही ज्यादा समस्या रहती है. वजन बढ़ जाने के कारण सांस के लिए मस्तिष्क से आने वाले निर्देश का पैटर्न बदल जाता है. सीढ़ियां चढ़ते-उतरते वक्त, अक्सर इन की सांसें फूलने लगती हैं. यह सब मोटापे के कारण होता है. जिसका वजन जितना ज्यादा होता है, उसे सांस लेने में उतनी ही दिक्कत होती है.

3. एलर्जी भी हो सकता है कारण

कई लोगों का इम्युनिटी सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) सेंसिटिव होता है, जिससे उन्हें प्रदूषण, धूल, मिट्टी, और जानवरों के बाल आदि से एलर्जी रहने लगती है. ऐसे लोगों को मौसम में बदलाव आने पर एलर्जी का अटैक पड़ने लगता है. सांस लेने में परेशानी होती है. सीने में जकड़न आने लगती है. सांस फूलने लगता है. कभी-कभी यह समस्या गंभीर रूप भी ले लेती है. ऐसे में मरीज को तुरंत डाक्टर से संपर्क करना चाहिए.

4. जिन्हें अस्थमा हैं

अस्थमा एक गंभीर बीमारी है. इस में सांस की नली में सूजन आ जाती हैं जिससे सीने में जकड़न, खांसी और सांस लेने में दिक्कत जैसी समस्या शुरू हो जाती है. प्रदूषण और खान-पान में मिलावट के कारण अस्थमा के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. यह बीमारी किसी को भी हो सकती है. बच्चे-बूढ़े सभी इसके चपेट में आते जा रहे हैं.

अस्थमा होने के कई कारण हो सकते हैं घर में या उसके आसपास धूल का होना, घर में पालतू जानवर का होना, वायु प्रदूषण, तनाव या भय के कारण, सर्दी के मौसम में अधिक ठंड होने के कारण, अधिक मात्रा में जंक फूड खाने के कारण, ज्यादा नमक खाने के कारण इत्यादि.

5. क्रौनिक औब्सट्रक्टिव पलमोनरी डिजीज (सीओपीडी)

इस स्थिति में सांस नली बलगम या सूजन की वजह से पतली हो जाती है. जिससे सांस लेने में परेशानी होने लगती है. सिगरेट पीने वालों, फैक्टरी में रसायनों के बीच काम करने वालों और प्रदूषण में रहने वाले लोगों को यह खासतौर पर होती है.

इन बातों का रखें ध्यान

  • घर में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें खास ध्यान. कार्पेट, तकिए और गद्दों पर धूप लगाएं. परदों की साफ-सफाई करें. रसोई और बाथरूम में एग्जॉस्ट फैन लगाएं. एसी का इस्तेमाल कम करें.
  • धूम्रपान न करें, सिगरेट पीने वालों से दूरी बनाएं.
  • हरी सब्जियों का सेवन अधिक करें. ब्रोकली, गोभी, पत्ता गोभी, पालक और चौलाई को खाने में शामिल करें.

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  • प्रदूषण से दूरी बना कर रखें. धूल मिट्टी वाली जगह पर न जाएं. बाहर का काम शाम के समय करें.
  • सुबह वॉक पर जरूर जाएं.
  • वजन कम करने पर ध्यान दें.
  • यदि अस्थमा है तो इनहेलर साथ रखें.
  • कम दूरी वाले कामों के लिए वाहन का इस्तेमाल न करें. अचानक सांस लेने में परेशानी होने पर व्यक्ति को तुरंत खाने या पीने की कोई चीज न दें
  • सिर के नीचे तकिया न रखें, इससे सांस नली पर असर पड़ता है. व्यक्ति को हवादार खुले जगह में ले जाएं.
  • कपड़े अगर टाइट है तो ढीला कर दें.
  • छती या गले पर कोई खुली चोट है तो उसे तुरंत ढक दें.

इनरवियर से जुड़ी इन बातों को जानना है जरूरी

कई महिलाएं व लड़कियां कोई भी साधारण ब्रा हर कपड़े के साथ पहन लेती हैं. लेकिन कुछ कपड़ो के लिए स्पेशली ब्रा डिज़ाइन किए जाते है. अगर आप उन परिधानों के साथ सही ब्रा पहनेंगी तो आप ज्यादा बेहतर और पर्फेक्ट दिखेंगी.  आइए, जानते हैं किन परिधानों के साथ पहनें कौन सी ब्रा-

1. पुशअप ब्रा

पुशअप ब्रा अधिकतर वह लड़कियां व महिलाएं पहनना पसंद करती हैं जिनका ब्रैस्ट साइज कम होता है. कई बार जब हम टाइट कपड़े पहनते हैं तो ब्रा लाइन पता चलने लगती है. लेकिन पुशअप ब्रा में ऐसा नहीं होता. पुशअप ब्रा का एक फायदा है कि इसे किसी भी कपड़े के साथ पहना जा सकता है.

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2. स्पोटर्स ब्रा

जो लड़कियां जिम जाती है या खेलखूद में ज्यादा आगे रहती है उनको उस वक्त स्पोर्ट्स ब्रा का इस्तेमाल करना चाहिए. यह ब्रैस्ट को पूरा कवर करता है. कई लड़कियां डांस करते वक्त या जिम करते वक्त नॉर्मल ब्रा का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन जब वो एक्सरसाइज या जंप करती है तो बहुत अजीब लगता है. इसलिए स्पोटर्स एक्टिविटी के समय लड़कियों को स्पोटर्स ब्रा का इस्तेमाल करना चाहिए.

 3. स्टिक औन ब्रा

स्टिक ऑन ब्रा शरीर से आसानी से चिपक जाता है. यह 2 कप के साथ आती है. इसमें स्ट्रेप नहीं होता. यदि आप बैकलेस या स्ट्रेपलेस ड्रेसेस पहन रही हैं तो यह ब्रा आपके लिए पर्फेक्ट है.

4. अंदरवायर ब्रा

अंदरवायर ब्रा में एक स्ट्रिप या वायर होता है जो ब्रा के अंदर होता है. इस ब्रा को पहनने के बाद यह ब्रैस्ट के नीचे सेट हो जाता है. ब्लाउज और टॉप के साथ इस ब्रा को पहन सकती हैं.

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 5. मोल्डेड कप बड़ा

मोल्डेड कप ब्रा एक गोल और सीमलेस शेप तैयार करता है. इसे पहनने के बाद कोई भी लाइंस नहीं दिखती. यह ब्रा हाइनेक और टी-शर्ट के साथ पहनने के लिए बेहतरीन है.

अंधेरा उनके दिलों में भी न रहे

त्योहार मनाने की शुरुआत घर की साफसफाई से तो कर ली, मगर दिल को साफ करने के बारे में भी सोचा क्या? घरबाहर की दीवारों के रंग तो बदल दिए, मगर किसी और के जीवन में रंग भरने का खयाल भी दिल में आया क्या? ये सवाल त्योहार के बाद फुरसत के लमहों में खुद से पूछें जरूर.

त्योहारों को खुद तक सीमित रख कर उन की खुशी का आनंद छोटा करने के बजाय कभी उन लोगों के साथ भी उत्सव का लुत्फ उठाएं जिन की जिंदगी में किसी वजह से अंधेरा पैर पसार चुका है. किसी अकेली दंपति का सूनापन दूर करें, किसी उदास चेहरे पर मुसकान ले आएं या किसी रूठे को गले लगा कर पुरानी मिठास रिश्ते में वापस ले आएं.

ये सब करने में खर्च सिर्फ अपनापन होता है, मगर बदले में जो सुकून और प्यार मिलता है उस की कोई कीमत नहीं लगा सकता. आप की एक छोटी सी पहल किसी की जिंदगी बदल सकती है. आइए, आगे बढ़ कर आने वाले सभी त्योहार कुछ यों बनाएं यादगार:

गिलेशिकवे करें दूर

रिश्ते जिंदगी के लिए बहुत जरूरी होते हैं. लेकिन अकसर हम छोटीछोटी बातों को अपने दिल में घर कर लेने देते हैं कि वे रिश्ते जो एक वक्त पर हमारी जिंदगी होते हैं उन्हें ही हम खुद से दूर कर देते हैं. समय रहते रूठों को मनाना जरूरी है. त्योहारों पर उन रिश्तों में भी रंग भरना न भूलें जो किसी समय हमारे बहुत करीब थे लेकिन वक्त की भागदौड़ में ये रिश्ते कहीं पीछे रह गए.

त्योहार के बाद भी सरप्राइज देने के लिए यों अचानक अपनों के घर पहुंचिए और प्यार से सभी को गले लगा लीजिए. अपने प्यार का तोहफा उन के हाथों में रख दिल से मुस्कराइए. एक पल में उन के साथसाथ आप की जिंदगी भी रोशन हो उठेगी.

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सकारात्मक विचारों का उजाला

कुछ लोगों की यह मानसिकता होती है कि वे हर चीज में बुराई ढूंढ़ते हैं. अपनी जिंदगी हो या दूसरों की, गलतियों पर ही उन की नजर होती है. अच्छाइयों को इग्नोर कर बुराईयों या कमियों का बखान करते हैं. यदि आप के अंदर भी नकारात्मकता का ऐसा अंधेरा है तो अब आप को अपने दिलोदिमाग में सकारात्मक के दीप जलाने होंगे, हर चीज का उजला पक्ष देखना शुरू करना होगा और हर छोटीबड़ी खुशियों को सैलिब्रेट करना सीखना होगा.

दूसरों के जीवन को रोशन करें

वैसे एक और तरीका है जिस से आप लोगों के दिलों में खुशियां भर सकते हैं और वह है किसी जरूरतमंद के चेहरे पर मुस्कराहट सजाना. हमारे समाज में ऐसे बहुत से लोग हैं जो त्योहार के समय और उस के बाद भी इस कार्य को अंजाम देते हैं. अपने साथ दूसरों का घर भी रोशन करते हैं. आइए, जानते हैं ऐसे ही कुछ लोगों के बारे में:

संजना रेड्डी: 31 साल की युवा फिल्म निर्देशिका संजना रेड्डी जो 2 हिट तेलुगु मूवीज दे चुकी हैं, बताती हैं कि उन के परिवार का यह रिवाज रहा है कि वे अपनी कमाई का 40% जरूरतमंदों को देते हैं. उन की प्राथमिकता बच्चों की मदद करनी होती है. दीवाली से पहले वे और उन के कुछ दोस्त स्ट्रीट और अनाथालय के बच्चों से मिलते हैं और उन से पूछते हैं कि उन्हें किन चीजों की जरूरत है. फिर एक लिस्ट तैयार कर वे सारी चीजें खरीद लेते हैं. साथ ही अपने पुराने कपड़े धो कर पैक कर लेते हैं. कुछ स्वीट्स और खानेपीने की चीजें खरीदते हैं. इन चीजों के साथ कुछ पैसे रख कर बच्चों में बांटते हैं. उन के साथ बैठ कर खाना खाते हैं. बच्चों के चेहरे पर आई खुशी की चमक उन्हें नए उत्साह से भर देती है.

डा. गीतांजलि: ‘विशेज ऐंड ब्लैसिंग्स’ नामक एनजीओ की फाउंडर डा. गीतांजलि फैस्टिव सीजन के समय ‘ईच वन लाइट वन’ नाम से कैंपेन चलाती हैं. इस कैंपेन का मकसद है कि हर इंसान यदि किसी एक की जिंदगी में भी अंतर ले आए तो काफी लोगों की जिंदगी में खुशियों के रंग भरे जा सकते हैं.

गीतांजलि कहती हैं कि दीवाली के समय हर साल वे एक पहल करती हैं और सोशल मीडिया और एनजीओ के जरीए लोगों को

रूपए 100 डोनेट करने को प्रोत्साहित करती हैं. इस तरह काफी फंड इकट्ठा हो जाता है. फिर वे उस रकम का प्रयोग गरीब बच्चों की जरूरतें पूरी करने में करती हैं. इस तरह 600 से भी ज्यादा बच्चों को वे इस मौके पर लोगों के सहयोग से मनचाही चीजें और कपड़े इत्यादि दिलवाती हैं.

अनुजा कपूर: ‘निर्भया एक शक्ति’ नामक एनजीओ की फाउंडर और सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता अनुजा कपूर कहती हैं कि दीवाली की शुरुआत वे अपने घर से ही करती हैं. अपने घर में काम करने वाले लोगों को वे मिठाई, आवश्यकता की दूसरी चीजें और साथ में बोनस भी देती हैं. यही नहीं दीवाली के महीने में अपनी गाड़ी में हमेशा कुछ चीजें भर कर रखती हैं. इन में चौकलेट्स, बिस्कुट्स, किताबें और पैंसिल्स हैं. आतेजाते वे ये सब चीजें जरूरतमंद बच्चों को बांटती चलती हैं.

देखा जाए. तो वे पूरे महीने दीवाली मनाती हैं. उन के घर के पास एक बहुत बड़ा स्लम एरिया है. त्योहारों पर वे स्वीट्स और कपड़ों के अलावा जो भी उन की जरूरत की चीजें हैं सब वहां के लोगों में बांटती हैं. कई बार वहां रहने वाले लोग और बच्चे उन्हें खुद ही बता देते हैं कि दीदी इस बार यह सामान दे देना या इस चीज की कमी है.

ज्ञान चंद्र मिश्रा: एनसीआर में रहने वाले सीए ज्ञान चंद्र मिश्रा कहते हैं कि वे दीवाली के समय गरीब बच्चों के लिए बहुत सी चीजें ले कर जाते हैं. वैशाली के आसपास ऐसे बहुत से स्लम एरिया है जहां 100-200 से ज्यादा परिवार रहते हैं. ये काफी गरीब हैं और झुग्गीझोंपडि़यों में रहते हैं. वे दीवाली से  2-3 दिन पहले बहुत सारे गरम कपड़े, खानेपीने के सामान आदि ले कर जाते हैं और उन बच्चों के हाथों में रखते हैं जो बहुत बेसब्री से हर साल उन का इंतजार करते हैं.

खुद के लिए तो हम हमेशा ही चीजें खरीदते हैं मगर कभीकभी दूसरों के लिए कुछ कर के और उन की आंखों में खुशियों के दीप जला कर मन में जिस संतुष्टि का एहसास होता है उस की तुलना किसी से नहीं की जा सकती,  कुछ ऐसा ही मानना है ज्ञान चंद्र मिश्रा का.

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रितु ग्रोवर: टीजीएच लाइफस्टाइल सर्विसेज लिमिटेड की फाउंडर रितु ग्रोवर बताती हैं कि उन की कंपनी में सीएसआर ऐक्टिविटीज के तहत साल में 4 बार समाज के पिछड़े और लाचार लोगों के बीच जा कर उन के लिए कुछ करने की परंपरा रही है. दीवाली के समय खासतौर पर वे और कंपनी से जुड़े दूसरे लोग मिल कर स्ट्रीट चिल्ड्रैंस के लिए गिफ्ट्स, रिफ्रैशमैंट्स आदि ले कर जाते हैं. बच्चों से पूछते हैं कि उन्हें किन चीजों की जरूरत है फिर उस विश लिस्ट के हिसाब से सारी चीजें खरीद कर उन के पास पहुंचते हैं और उन की इच्छाएं पूरी करते हैं. उन के साथ पूरा दिन बिताते हैं.

रितु गोयल: सेवा भारती नाम की एनजीओ से जुड़ी गुरुग्राम की रितु गोयल बताती हैं कि दीवाली के समय वे स्लम एरिया के गरीब बच्चों को रोजगार दे कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करती हैं. उन्हें डिजाइनर दीए बनाना सिखाती हैं. इस के साथ ही पुरानी ऊन से बंदनवार बनाना, स्ट्रा से बंदनवार और झूमर बनाना, कागज की कटिंग से कानों के झुमके बनाना, लेस और कुंदन आदि से थाली डैकोरेट करना, उसे कलर करना आदि सिखाती हैं. इन से बच्चों की काफी आमदनी हो जाती है और दीवाली के दिन वे भी अपने घर को रोशन करने का आनंद ले पाते हैं.

क्या खूब कहा है किसी ने कि खुशियां बांटने से बढ़ती हैं और दुख बांटने से कम हो जाता है. कितना अच्छा हो यदि समाज खोखली रीतियों से जकड़े त्योहारों को आजाद कर एक नया रिवाज शुरू करे जहां मिलजुल कर अपनों और अपने आसपास के लोगों की जिंदगी में खुशियां लाना ही त्योहारों का असली मकसद रह जाए.

तो नहीं सताएगा उन से दूरी का एहसास

रिया और वंश इंटरनैट के जरीए एकदूसरे से मिले और दोनों के बीच प्यार हो गया. फिर दोनों ने शादी करने का फैसला किया. लेकिन इन की शादी के बीच आ रही थी इन की नौकरी. दरअसल, दोनों अलगअलग शहर में नौकरी करते थे और नौकरी चेंज करना दोनों के लिए मुश्किल था. फिर भी दोनों ने आपसी सहमति से शादी कर ली और अलगअलग शहर में रहने लगे.

रिया और वंश की तरह और भी न जाने कितने जोड़े नौकरी, बुजुर्ग मातापिता की देखरेख, पढ़ाई आदि कारणों से लौंग डिस्टैंस रिलेशनशिप में रहते हैं. इन शादियों को कंप्यूटर मैरिज कहा जाता है यानी ऐसी शादियां जिन में पतिपत्नी अस्थायी रूप से अलग रहते हैं और कंप्यूटर के माध्यम से एकदूसरे से जुड़े रहते हैं.

लौंग डिस्टैंस रिलेशन निभाना काफी मुश्किल है. छोटीछोटी बातें भी रिश्ते में दूरी लाती हैं.

शादी के कुछ महीने बाद से ही लौंग डिस्टैंस में रहने वाली दिल्ली की 26 वर्षीय अमृता कहती हैं, ‘‘हमारी शादी को 10 महीने हो चुके हैं. मैं दिल्ली में रहती हूं और मेरे पति की पोस्टिंग चंडीगढ़ में है. शादी के बाद दूरदूर रहना काफी मुश्किल होता है. एकदूसरे की बहुत कमी खलती है. अकेलापन महसूस होता है. लेकिन फिर यह सोच कर खुद को संभाल लेती हूं कि यह कदम हम ने अपने अच्छे भविष्य के लिए उठाया है. कभीकभी तो छोटीछोटी बातों को ले कर हमारे बीच इतना बड़ा झगड़ा हो जाता है कि हम 2-2, 3-3 दिन तक बातचीत नहीं करते. कई बार तो ऐसा भी होता है कि मैं कुछ पूछती हूं तो उन्हें लगता है कि मैं उन की जासूसी कर रही हूं.’’

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दरअसल, ऐसा होने की मुख्य वजह है कि हम लौंग डिस्टैंस रिलेशन में अपनी भावनाओं को जाहिर करने में विफल रहते हैं. पास रहने पर भावनाओं को आसानी से जाहिर कर लेते हैं.

इस बारे में दिल्ली के रोहिणी स्थित परफैक्ट हैल्थ इंस्टिट्यूट के मनोवैज्ञानिक डा. आर. पाराशर का कहना है, ‘‘पतिपत्नी के रिश्ते में दूरी का बहुत असर होता है, क्योंकि यह रिश्ता बेहद नाजुक और अन्य रिश्तों से अलग होता है. हम भाईबहनों, मातापिता से बड़ी आसानी से दूर रह सकते हैं, लेकिन पतिपत्नी न केवल भावनात्मक बल्कि शारीरिक रूप से भी एकदृसरे से जुड़े होते हैं और दूर रहने पर इस से वंचित रहते हैं. जिस की वजह से शरीर में पौजिटिव हारमोंस नहीं बन पाते. पौजिटिव हारमोंस की कमी होने की वजह से वे स्वभाव से चिड़चिड़े हो जाते हैं. उन की क्रिएटिविटी खत्म होने लगती है. वे डिप्रैशन में जाने लगते हैं.’’

कुछ कपल तो ऐसे भी होते हैं, जो इस दूरी की वजह से इतना अकेलापन महसूस करते हैं कि अगर कोई भी उन्हें जरा सा प्यार देता है तो वे उस के प्रति आकर्षित हो जाते हैं.

एक केस को याद करते हुए डा. पारासर आगे कहते हैं, ‘‘मेरे पास एक केस आया था, जिस में पतिपत्नी एकदूसरे से दूर रहते थे. पत्नी शारीरिक सुख न मिलने की वजह से खुद को इतना अकेला महसूस करती थी कि उस ने इस अकेलेपन को दूर करने के लिए अपने औफिस के ही एक साथी के साथ संबंध बना लिए.’’

इस तरह के कई केसेज हैं, जिन में पतिपत्नी का साथ न रहने पर पार्टनर ने किसी और के साथ संबंध बना लिए. कुछ कपल्स ऐसे भी होते हैं, जो अपनी इस दूरी का गम मनाते रहते हैं और जिंदगी को जीना भूल जाते हैं. यह ठीक है कि दूर होने पर रिश्ते में गरमाहट बनाए रखना थोड़ा मुश्किल होता है. लेकिन आज फोन, ईमेल, इंटरनैट आदि माध्यमों से जुड़ कर लौंग डिस्टैंस रिलेशनशिप में प्यार को बढ़ाया जा सकता है.

निम्न टिप्स को फौलो करें, फिर देखें दूरी कैसे प्यार बढ़ाने का काम करती है:

1. सरप्राइज दें

सरप्राइज हर किसी को पसंद आता है. खासतौर पर तब जब इसे देने वाला आप से कोसों दूर हो. चौकलेट, फ्लौवर, ड्रैस, ई कार्ड्स या फिर साथी की पसंद का गिफ्ट भेज कर आप उसे सरप्राइज दे सकते हैं. गिफ्ट के साथ एक खास नोट भी लिख कर भेजें कि आप उन के लिए कितने स्पैशल हैं. कभी खुद उन्हें बिना बताए मिलने पहुंच जाएं, इस से रिश्ते की नीरसता खत्म होगी और ऊर्जा का संचार होगा.

रोचक पलों को शेयर करें

तकनीक ने आजकल कई चीजों को आसान बना दिया है, इसलिए कोशिश करें कि आप दिन के रोचकरोमांचक पलों को फोटो और वीडियो के जरीए कैप्चर करें, जो साथी के चेहरे पर खुशी ला सकें. यकीन मानिए यह छोटी सी चीज साथी के चेहरे पर लंबी मुसकान लाएगी.

बातचीत करते रहें

मोबाइल, इंटरनैट के जरीए एकदूसरे से जुड़े रहें. थोड़ेथोड़े समय के अंतराल पर मैसेज या फोन के द्वारा साथी की खबर पूछते रहें. स्काइप पर बातें करें. वीडियो चैट करें. वीडियो चैट करते समय कभीकभी वर्बल फोरप्ले भी करें. इस से रिश्ते में मिठास बनी रहती है.

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फीलिंग्स ऐक्सप्रैस करें

जब भी आप का पार्टनर आप से दूर हो तो उसे बीचबीच में ‘आई लव यू’ कहते रहें. ये 3 शब्द आप के रिश्ते को मधुर बनाए रखेंगे. रात में सोने से पहले एक रोमांटिक मैसेज करें. जब भी वीडियो चैट करें तो अच्छी तरह तैयार हो कर करें. इसे हमेशा एक डेट के रूप में लें. आप को खुश देख कर पाटर्नर को भी अच्छा लगेगा.

ईमानदार रहें

ईमानदारी दूरी निभाने की पहली नीति है. इस का मतलब यह है कि न सिर्फ साथी, बल्कि स्वयं के प्रति भी ईमानदार रहें. अन्यत्र अफेयर्स के बजाय अपने वास्तविक प्यार के बारे में सोचें.

साथ छुट्टी लें

साथ छुट्टी ले कर कहीं घूमने जाएं. एकदूसरे को पूरा समय दें. इस से रोमांस बना रहता है. बर्थडे, मैरिज ऐनिवर्सरी जैसे खास पलों को यादगार बनाने के लिए कुछ स्पैशल प्लान करें.

क्या न करें

बात करें बहस नहीं

कपल हमेशा बात करतेकरते बहस करने लगते हैं और जब दूर होते हैं तो छोटीछोटी बातों का भी बुरामान जाते हैं. तुम ने मुझे फोन नहीं किया, तुम्हारे पास मेरे लिए टाइम नहीं है, मैं तुम्हारे पास होती या होता तो तुम ऐसा नहीं करते जैसी छोटीछोटी बातों पर वे झगड़ पड़ते हैं और एकदूसरे से बात नहीं करते. ऐसा बिलकुल न करें. ऐसा करने से प्यार नहीं, बल्कि दूरी ही बढ़ती है. जब भी बात करें तो उन पलों को खास बनाएं.

शक न करें

पतिपत्नी हमेशा शक करते हैं कि कहीं पार्टनर किसी और के क्लोज तो नहीं है. वह झूठ तो नहीं बोल रहा, सचाई तो नहीं छिपा रहा. इस तरह का बरताव बिलकुल न करें. ये बातें एकदूसरे को पास नहीं लातीं, बल्कि एकदूसरे से दूर ही करती हैं.

कम्यूनिकेशन गैप न आने दें

जब लौंग डिस्टैंस में रह रहे हों तो बात कर के ही आप एकदूसरे से जुड़े रह सकते हैं. इसलिए झगड़ा कर के बात करना बंद न करें. इस से कम्यूनिकेशन गैप आता है. वक्त निकाल कर दिन में 4-5 बार एकदूसरे से बात जरूर करें. लेकिन ध्यान रखें कि यह सिर्फ औपचारिकता न हो, बल्कि बातों में प्यार और रोमांस का तड़का हो.

पार्टनर पर गुस्सा न उतारें

जब आप दूरदूर हों तो किसी भी बात का गुस्सा अपने पार्टनर पर न उतारें. किसी एक के साथ कुछ गलत होता है तो वह अपना सारा गुस्सा दूसरे पर उतारता है.

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जासूस न बनें

बातबात पर जासूसी न करें. बारबार फोन कर के यह पता लगाने की कोशिश न करें कि साथी कहां है. किस केसाथ है और क्या कर रहा है. आपसी विश्वास बनाए रखें.

बातें न छिपाएं

कोई भी बात पार्टनर से न छिपाएं, क्योंकि बाते छिपाने पर पार्टनर के मन में तरहतरह के विचार आने लगते हैं और फिर दूरी बढ़ने लगती है.

जिद न करें

अपनी बातें मनवाने की जिद न करें. अगर आप का पार्टनर व्यस्त है और आप का फोन नहीं उठा रहा है, तो उसे बारबार फोन न करें और उस के फोन उठाते ही चिल्लाने न लगें और आप बेहतर रोमांटिक लाइफ जीना चाहते हैं, तो रिश्ते में औफिस की टैंशन कभी न लाएं.

वीकेंड पर परोसें कश्मीरी पुलाव

अगर आप भी वीकेंड पर कुछ टेस्टी और हेल्दी बनाना चाहते हैं तो आज हम आपको कश्मीरी पुलाव की टेस्टी रेसिपी बताएंगे. कश्मीरी पुलाव की इस रेसिपी को आप किसी भी समय अपनी फैमिली और फ्रेंड्स को परोस सकती हैं.

हमें चाहिए

– 500 ग्राम चावल

– थोड़ा सा प्याज कटा

– 25 ग्राम ड्राईफ्रूट्स

– 1 ऐप्पल कटा हुआ

– 10 ग्राम अनारदाना

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– थोड़ी सी हरी मिर्च कटी

– थोड़ा सा अदरकलहसुन का पेस्ट

– 2 तेजपत्ते

– 3-4 हरी इलायची

– 3 लौंग

– 5-6 कालीमिर्च

– 1 दालचीनी का टुकड़ा

– 1 छोटा चम्मच लालमिर्च पाउडर

– 2 बड़े चम्मच गरममसाला

– 1 बड़ा चम्मच जीरा

– 15 एमएल तेल

– 10 एमएल घी

– कुछ बूंदें केवड़ा वाटर की

– दूध में भीगा केसर

– थोड़ी सी किशमिश.

बनाने का तरीका

– चावल को 11/2 घंटा भीगने दें.

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– एक पैन में तेल गरम कर उस में प्याज को सुनहरा होने तक भून कर एक तरफ रख दें.

– अब घी गरम कर ड्राईफ्रूट्स भूनें. अब बचे तेल में जीरा और सभी साबूत मसाले डाल कर फ्राई करें.

– इस में अदरक लहसुन का पेस्ट और हरीमिर्च डाल कर चलाएं, फिर इस में लालमिर्च पाउडर, गरममसाला और नमक डालें. ऊपर से चावल और पानी डाल कर पकने दें.

– पकने के बाद थोड़ा घी, केसर व केवड़ा वाटर डाल कर अच्छी तरह चलाएं.

– फ्राइड प्याज, लहसुन, किशमिश, अनार दाना और सेब के टुकड़ों से सजा कर सर्व करें.

आखिर क्यों कबीर सिंह के रिव्यूज को हिप्पोक्रिटिकल मानते हैं शाहिद

16 साल के कैरियर में शाहिद कपूर ने काफी उतारचढ़ाव  झेले हैं. पर उन्होंने हार नहीं मानी. मगर अब फिल्म ‘कबीर सिंह’ को मिली अपार सफलता ने सारे समीकरण बदल कर रख दिए हैं. ‘कबीर सिंह’ अब तक लगभग 300 करोड़ रुपए कमा चुकी है. शाहिद के लिए यह एक नया अनुभव है, लेकिन वह कबीर सिंह के रिव्यूज को हिप्पोक्रिटिकल मानते हैं, जानें क्या है वजह…

फैंस को पसंद आई फिल्म

दर्शक फिल्म को पसंद कर रहे हैं, जबकि फिल्म आलोचकों ने काफी आलोचना की थी. इतना ही नहीं, कई समाजसेवियों ने भी फिल्म के खिलाफ आवाज उठाई थी.

 

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These weekend numbers got us all like ? #kabirsingh

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शाहिद का ये है मानना

फिल्म को मिले रिव्यूज पर शाहिद कहते हैं, ‘‘फिल्म के रिव्यू बहुत क्रिटिकल आए. जब हौलीवुड फिल्मों में रौ सीन दिखाते हैं, तो लोग कहते हैं कि यह बहुत महान सिनेमा है. यह पाखंड ही है कि 2013 में प्रदर्शित फिल्म ‘द वोल्फ औफ वाल स्ट्रीट’ में लियोनार्डो डि कैप्रियो ने जो किरदार निभाया था उस में तो कबीर सिंह से ज्यादा समस्याएं थीं. लेकिन सभी आलोचकों ने उस की जम कर तारीफ की थी. पर वही लोग कबीर सिंह की आलोचना कर रहे हैं. जबकि दर्शकों ने ‘द वोल्फ औफ वाल स्ट्रीट’ की ही तरह ‘कबीर सिंह’ को पसंद किया है. सच कह रहा हूं कि एक तरफ मु झे बहुत ही हिप्पोक्रिटिकल फीलिंग आई. रिव्यूज बहुत हिप्पोक्रिटिकल थे.’’

 

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Thank you for the overwhelming love. #kabirsingh

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बता दें, शाहिद कपूर जल्द ही नई फिल्म जर्सी में नजर आने वाले हैं. वहीं इल फिल्म में उनकी हिरोइन सुपर 30 और बाटला हाउस जैसी फिल्मों में काम कर चुकी एक्ट्रेस मृणाल ठाकुर नजर आएंगी. अब देखना ये है कि क्या शाहिद अपनी नई फिल्म से भी कबीर सिंह जैसा जादू चला पाते हैं या नहीं.

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कौमेडी करना कपिल शर्मा पर पड़ा भारी, फैंस ने ऐसे किया ट्रोल

टेलीविजन के कौमेडी किंग यानी कपिल शर्मा के घर जहां एक तरफ नया मेहमान आने वाला है तो वहीं उनके गले एक मुसीबत पड़ गई है. मामला उनके पौपुलर शो से जुड़ा हुआ है. कपिल इससे पहले भी अपने शो के चलते सुर्खियों में आ गए थे, लेकिन इस बार उनकी कौमेडी ही उन पर भारी पड़ गया है. आइए आपको बताते हैं क्या है पूरा मामला…

अर्चना पूरण सिंह पर कौमेडी पड़ी भारी

कपिल के शो में बतौर जज नजर आ रहीं अर्चना पूरन सिंह के शो से जुड़ जाने के बाद कपिल शर्मा लगभग हर एक एपिसोड में ही उन पर कटाक्ष करते और उनका मजाक उड़ाते नजर आ जाते हैं. शुरूआत में तो फैंस ने यह सब एन्जौय किया लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि फैंस को कपिल की ये कौमेडी पसंद नही आ रही.

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फैंस ने ऐसे किया ट्रोल


ट्विटर पर कई सारे लोगों ने कपिल शर्मा को अर्चना पूरन सिंह का मजाक ना उड़ाने की हिदायत दी और कहा कि अब यह अच्छा नहीं लगता है. अर्चना पूरन सिंह उनसे बड़ी हैं और उन्हें उनका सम्मान करना चाहिए.

फैंस ने कही ये बात

एक फैन ने कपिल शर्मा को बहुत ही शालीनता से कहा है कि, ‘डियर कपिल शर्मा मैं आपसे एक प्रार्थना करना चाहता हूं कि आप अर्चना पूरन सिंह को थोड़ी इज्जत देना सीख लें. मैं जानता हूं कि आप मजाक करते हैं लेकिन यह बहुत ही खराब लगता है. मुझे नहीं लगता है कि उन्हें आपकी बातें सुनने के लिए पैसे मिलते हैं.’

पहले भी हो चुकी है कौंट्रवर्सी

कपिल शर्मा के इससे पहले वाले शो में भी कास्ट से झगड़े के चलते पिछला शो बंद हो गया था, जिसके बाद नए शो में नवजोत सिंह सिद्दू के शो छोड़ने के चलते भी कपिल सुर्खियों में आ गए थे.

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हंस कर रहने में ही चतुराई

आर्थिक मंदी घरों को बुरी तरह आहत कर रही है. जिस तरह घरेलू चीजों की खपत कम हुई है उस से साफ है कि घर चलाने वालों को कटौतियों पर मजबूर होना पड़ रहा है. पर सिर्फ रोनेधोने से काम नहीं चलेगा. सरकार गलत है पर यह सोच कर चलिए कि सरकारी फैसलों पर आप का वैसे ही कोई कंट्रोल नहीं है जैसे बारिश या गरमी पर नहीं. आज तो इस से हंस कर निबटने में चतुराई है.

हम लोग असल में काफी कम में काम चला सकते हैं. अगर कमाई कम हो गई है तो हंसना न छोड़ें, बल्कि ज्यादा हंसें, जम कर हंसें. रोनी सूरत गम को बढ़ा देती है, दर्द कमर को  झुका देता है. आज जो हालात हो रहे हैं वे जल्दी सुधरेंगे इस के आसार नहीं हैं इसलिए हर तरह के पर्यायों के साथ खुल कर जीने के उपाय ढूंढ़ें. न घर पर, न कपड़ों पर और न ही चेहरे पर आफत की शिकनें आएं यह जरूरी है, यह संभव है.

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यदि पुराने लोगों से कुछ सीखें तो पता चलेगा कि वे कैसे कम में गुजारा करते थे. हंस कर तो वे नहीं रहते थे, क्योंकि पुराने लोगों को रोनेधोने का पाठ पढ़ाया जाता था. हर जना रोता रहता था ताकि दूसरा कुछ दया कर के दे जाए. आज जमाना है खुद कुछ कर के, हंस कर के जीवन सुखी बनाने का और इस में कठिनाई क्या है. अकेले स्वीगी या जोमैटो का भेजा गया चीज, मशरूम, चिकन, टौपिंग वाले पिज्जा से ज्यादा स्वाद पूरी में आ सकता है अगर घर के सब लोग मिल कर बनाएं, साथ खाएं.

स्मार्ट फोन पर इयर प्लग लगा कर गाने सुनने से अच्छा है कुछ गा कर, गुनगुना कर सब को हंसानागुदगुदाना. महंगे खेलों को मोबाइलों पर डाउनलोड कर के अपनेआप से खेलने से कहीं अच्छा 2 का चैस खेलना और 4 का ऊपर से देखना. ये सब आप की उत्पादकता बढ़ाएंगे, आप को स्फूर्ति देंगे, नया जोश भरेंगे.

सरकारी बेवकूफियों के कारण होते आर्थिक नुकसान और सरकार के संरक्षण में पलते पूजापाठ के बाजार में फंसने की जगह अपने बल पर भरोसा रखें. प्रकृति ने आदमी को हर चीज से लड़ने के लायक बनाया है. कुछ जम कर मुकाबला करते हैं, कुछ दोष मढ़ते हैं, कुछ पूजापाठ करने लगते हैं. आप क्या कर रहे हैं?

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स्नैक्स में परोसें मसाला पापड़

अगर आप बच्चों को स्नैक्स में कुछ हेल्दी और टेस्टी खिलाना चाहते हैं तो ये रेसिपी ट्राय करें. मसाला पापड़ की ये रेसिपी टेस्टी की साथ-साथ आसानी से बनने वाली रेसिपी है. आप इसे कभी भी अपनी फैमिली के लिए फिल्म देखते हुए परोस सकती हैं.

हमें चाहिए

4-5 उड़द दाल के पापड़

1/4 कप बेसन

1/4 कप चावल का आटा

1/4 कप प्याज बारीक कटा

थोड़ी सी धनियापत्ती कटी

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1/4 कप टमाटर बारीक कटे

1/4 कप गाजर कसी हुई

तलने के लिए तेज

चाटमसाला आवश्यकतानुसार

नमक स्वादानुसार.

बनाने का तरीका

बेसन व चावल का आटा मिला लें. इस में नमक मिला कर पकौड़ों के घोल जैसा बना लें. कड़ाही में तेल गरम कर पापड़ों को घोल में डुबो कर सुनहरा होने तक तल लें. ऊपर प्याज, टमाटर, धनियापत्ती, गाजर व चाटमसाला बुरक कर गरमगरम परोसें.

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नई दुल्हन पर प्रेग्नेंसी का दबाव पड़ सकता है भारी, जानें क्यों

समाज में महिलाओं की भूमिका पिछले कुछ दशकों में बहुत बदल गई है आज की मल्टीटास्किंग महिला घर और दफ्तर दोनों का ध्यान रखती है. हालांकि, विवाहित महिलाओं को अभी भी बच्चे पैदा करनी जैसी अनुचित अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए मजबूर किया जाता है.  पिछले एक साल में, अपोलो क्रैडल ने ऐसे मामलों में काफी बढ़ोतरी देखी है जहां महिलाओं में मानसिक स्वास्थ्य मे कमी के लक्षण दिखे हैं, जिनमें से अधिकांश मां ना बन पाने और काम और जीवन को संतुलित करने की चिंता के कारण होते हैं. अपोलो क्रैडल के विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि महिलाओं पर इस तरह के पारिवारिक और सामाजिक दबाव, विशेष रूप से इस प्रकार की अनुचित इच्छा उनके मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने के साथ मानसिक दबाव का कारण बन सकते हैं.

अपोलो क्रेडल अस्पताल और मिरैकिल क्लीनिक, गुरुग्राम  की सीनियर कंसल्टेंट, गाइनाकोलॉजिस्ट, डॉ साधना शर्मा,  कहती हैं,  ” मां बनना खुशी की बात है और यह एक ऐसी यात्रा होती है जिसकी कल्पना काफी सुखद होती है . ऐसे हालात में पहली बार मां बनने जा रही नवयौवनाओं को मानसिक विकार हो सकते हैं. इनमें तनाव, डिप्रैशन और बेचैनी शिकायतें अक्सर महिलाओं को होती है. इन सबके पीछे बच्चे के लिये घर परिवार और सामाजिक दबाव प्रमुख कारण है. हालाँकि पिछले एक साल मे यह देखा है कि न्यूली मैरिड युवतियों सहित महिलाएं परिवार और समाज के दबाव के कारण मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों जैसे तनाव, अवसाद, आदि की शिकायतें कर रही हैं .

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पिछले एक साल में, हमने ऐसे मामलों में वृद्धि देखी है जहां महिलाओं ने मानसिक कल्याण की कमी के लक्षण दिखाए हैं, जिनमें से अधिकांश माँ ना बन पाने की चिंता के कारण होते हैं और बच्चे होने के बाद काम और जीवन में संतुलित करते हैं. एक महिला को बच्चा होने के लिए जिम्मेदार बनाना एक असहनीय स्थिति है क्योंकि यह एक निजी फैसला है और इसे भागीदारों की आपसी तालमेल लिया जाना चाहिए, न कि समाज द्वारा थोपा जाये. केवल एक महिला जैविक रूप से एक बच्चे को सहन कर सकती है लेकिन बच्चे की परवरिश पर माता-पिता दोनों को ध्यान रखना चाहिए. इसलिए, पुरुष और महिला दोनों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे एक बच्चा चाहते हैं, ” .

महिलाओं को मानसिक विकारों से प्रभावित होने की सबसे अधिक खतरा है, सबसे आम चिंता और डिप्रैशन रोग है. डॉ साधना शर्मा कहती हैं  “महिलाओं में, विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के प्रति समाज का रवैया और परिवार में उनकी भूमिका हमारे समाज में तेजी से हो रहे बदलावों के साथ नहीं रही है. इस संक्रमणकाल में भी, परिवार और बच्चों की देखभाल करना मां की उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी मानी जाती है. जो महिलाएं गृहिणियां हैं, वे परिवार के लिए अपने योगदान के लिए शायद ही कभी अहम् हैं और वे तनावग्रस्त हैं क्योंकि वे कामकाजी महिलाओं की तुलना में हीन महसूस करती हैं जबकि कामकाजी महिलाएं घर और कार्यस्थल दोनों पर कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को निभाने के बीच संतुलन बनाने के लिए संघर्ष करती हैं. कामकाजी महिलाएं में तनाव, मानसिक थकान, तनाव, चिंता, निराशा, डिप्रैशन, क्रोध, भय, और अन्य सामाजिक और भावनात्मक संकट खास हैं.

विश्व स्तर पर लगभग 14 प्रतिशत बीमारियों के कारण मानसिक रोग है. इसकी वजह से महिलाएं विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त होती है. यह सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दों में से एक है. विशेषज्ञों का सुझाव है कि दबाव का सामना करने का सबसे अच्छा तरीका है कि आप खुद को जानें और इस बात की ठोस समझ रखें कि आपने चुनाव क्यों किया है.

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डौ. साधना शर्मा ने कहा, “उन कारणों को लिखने के लिए समय निकालें जिन्होंने आपको यह विकल्प बनाने के लिए प्रेरित किया है, जिसमें आपको उन चीजों को भी शामिल करना होगा जिनका आपको त्याग करना होगा इसके बजाय आपने अपना समय और ऊर्जा समर्पित की है. स्थिति की सकारात्मकता पर ध्यान दें जो आपके नियंत्रण से परे हालात के कारण उत्पन्न हुई है. बच्चे नहीं होने के कारण दबाव या दोषी महसूस न करें, और कृपया स्थिति को संभालें क्योंकि आप अपने बारे में कुछ बोलना चाहते हैं या प्रश्नों का सही उत्तर दे सकते हैं. इसके अलावा, यदि आप अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बात नहीं करना चाहते हैं, तो अपनी भावनाओं को ईमानदारी से बताएं. हम एक विशेष जीवनशैली का चयन क्यों कर रहे हैं, इसके बारे में हमें जितनी अधिक जागरूकता होगी, उतनी ही कम हम अनिश्चितता का अनुभव करेंगे.”

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