कहां हम कहां तुम: धूमधाम से होगी ‘रोहित-सोनाक्षी’ की मेहंदी सेरेमनी, PHOTOS वायरल

स्टार प्लस के शो ‘कहां हम कहां तुम’ के अपकमिंग एपिसोड में जल्दी ही ‘रोहित और सोनाक्षी’ एक होने वाले हैं. वहीं शो के सेट से शादी की रस्मों की खास फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं. दुल्हन ‘सोनाक्षी’ यानी दीपिका कक्कड़ की बाते करें तो उनका लुक फोटोज में बहुत खूबसूरत लग रहा है. आइए आपको दिखाते हैं ‘रोहित और सोनाक्षी’ की रस्मों की खास फोटोज…

मेहंदी में कुछ यूं नजर आए ‘रोहित’

सोशल मीडिया पर वायरल फोटोज में ‘डॉ रोहित’ यानी करण वी ग्रोवर मेहंदी लगाए हुए नजर आ रहे हैं, जिसमें वह फैंस का दिल जीत रहे हैं.

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‘सोनाक्षी’ के भी हो गए लाल हाथ

टीवी शो ‘कहां हम कहां तुम’ में ‘सोनाक्षी’ का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ इब्राहिम के हाथों में भी मेंहदी लग चुकी है. वहीं फैंस उनके लुक की भी तारीफें करने में लग गए हैं. मेहंदी सेरेमनी में दीपिका कक्कड़ इब्राहिम कुछ इस लुक में दिखने वाली है।

खुशी से दीवाने हो रहे हैं ‘रोहित’

‘मेहंदी’ हाथों में लगाकर रोहित सिप्पी उर्फ करण वी ग्रोवर खुशी से फूले नहीं समा रहे है. वहीं, ‘डॉ. रोहित’ की ‘मम्मी वीणा’ भी इस खुशी से झूम रही है. इन फोटोज से ये बात साफ पता लगती है.

कहर ढाने को तैयार है ‘तान्या सिप्पी’

इतना ही नहीं, इस टीवी शो में मेहंदी की रस्म में ‘तान्या सिप्पी’ का किरदार निभा रही एलीस कौशिक भी टीवी सीरियल में कहर ढाने की तैयारी में है.


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बता दें, अपकमिंग एपिसोड्स में ‘रोहित’ शादी से पहले बैचलर पार्टी भी इन्जौय करते हुए नजर आएगा, लेकिन बैचलर्स पार्टी की खास बात ये होगी कि इस बैचलर पार्टी में सिप्पी परिवार के लड़के लड़कियों के गेटअप में धमाल मचाते हुए नजर आएंगे. अब देखना ये है कि इस बैचलर्स पार्टी को देखने के बाद ‘सोनाक्षी’ का रिएक्शन क्या होगा.

प्राइवेट अस्पतालों की लूट बरकरार मरीज बदहाल: भाग-2

हौस्पिटल की तरफ से जवाब में कहा गया कि डिस्चार्ज करते समय उस के महत्वपूर्ण अंग सही काम कर रहे थे. वह पूरी तरह हाइड्रेटेड थी और उसे चेस्ट या यूटीआई इंफेक्शन भी नहीं था. 15/10/1911 से 17/10/1911 तक वह क्लीनिकली स्टेबल थी इसलिए उसे दवाओं के साथ डिस्चार्ज कर दिया गया.

स्टेट कमीशन ने विनोद कुमार के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें 15,00,000 का कंपनसेशन और इलाज पर 51 हजार खर्च हुए रुपए वापस लेने का आर्डर किया. इस फैसले के खिलाफ हॉस्पिटल मैनेजमेंट ने एनसीडीआरसी में अपील किया. एनसीडीआरसी का फैसला हॉस्पिटल के पक्ष में रहा और किसी भी तरह के चिकित्सीय लापरवाही की संभावना से इनकार करते हुए कहा कि इसे गलत डायग्नोसिस का केस भले ही कहा जा सकता है मगर यह चिकित्सीय लापरवाही का केस बिल्कुल भी नहीं है. मरीज को बहुत सारी बीमारियां थी. कई तरह के कैंसर भी हो चुके थे. उन्हें बाद में दुसरे हॉस्पिटल में भी एडमिट किया गया. इसलिए रेस्पॉन्डेंट्स यानि हॉस्पिटल मैनेजमेंट पर जुर्माना किया जाना उचित नहीं.

फॉर्टिस हॉस्पिटल द्वारा जारी किए गए मेडिकल सर्टिफिकेट के मुताबिक मल्टी ऑर्गन फेलियर की वजह से सेप्टिक शौक मौत की मुख्य वजह है. इस के अलावा डायबिटीज कंडीशन, मल्टीपल मैलिग्नेंसी और पोस्ट कीमो और रेडियोथैरेपी जैसी वजह भी उन की मौत के लिए जिम्मेदार है.

जाहिर है लंबी कानूनी कार्यवाहियों में फंस कर पैसा और रहासहा सुकून गंवाना सब के वश की बात नहीं. लम्बे कोर्ट केस के बाद यदि फैसला पक्ष में न हो तो सारी मेहनत और दौड़भाग पर पानी फिर जाता है. क्यों कि चिकित्सीय लापरवाही साबित कर पाना एक टेढ़ी खीर है. यही वजह है कि प्राइवेट अस्पतालों की मनमानियों का शिकार होने के बावजूद लोग सब सह जाते हैं और केस दर्ज नहीं कराते.

आलिशान अस्पतालों की चकाचौंध में फंसते मरीज

आजकल हॉस्पिटल्स इतने बड़े और आधुनिक फैसिलिटी से भरपूर होते हैं कि इस के गलियारों में घूमते हुए आप की आंखें चौंधिया जाएं. किसी बड़े 5 स्टार होटल का फील देने वाले ये हॉस्पिटल ऐसी सेवाओं की पेशकश करते हैं जिन की कल्पना भी कुछ दशक पहले तक नहीं की जा सकती थी. ये हॉस्पिटल भारत के संपन्न वर्ग के लोगों को टारगेट करते हैं और अपनी लग्जरियस ऑफरिंगस जिस में पिकअप से ले कर लाउंज और नौका विहार तक शामिल है, से लोगों को आकर्षित करने का प्रयास करते हैं. उदाहरण के लिए नई दिल्ली में अवस्थित फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीच्यूशन का उदाहरण लें. यहां आप को काफी महंगे आर्टवर्क्स, डांसिंग फाउंटेन, मॉल, रिटेल आउटलेटस से ले कर रिलैक्स होने के लिए बड़ा सा लाउंज भी उपलब्ध है. यहां एक कैफे और फूडकोर्ट भी है जो 12 एकड़ तक फैला हुआ है. जिस की कीमत अनुमानतः 500 करोड़ तक की होगी.

फोर्टिस इंडस्ट्री में अलगअलग 2 फ्लोर हैं जिन्हें सिग्नेचर फ्लोर्स के रूप में जाना जाता है. यहां कमरे का किराया 30,000 से 3,000,00 प्रतिदिन के हिसाब से ऑफर किए जा सकते हैं. ये कमरे ऐसे होते हैं जहाँ ट्रीटमेंट के दौरान पूरा परिवार शिफ्ट हो सकता है. यहाँ मरीजों को लाने ले जाने के लिए लग्जरियस वेहिकल्स भी उपलब्ध है.

इसी तरह कोच्चि बेस्ड एस्टर मेडिसिटी भी ऐसा ही अस्पताल है जहां मरीजों के लिए नौकाएं भी उपलब्ध होती हैं ताकि वे समुद्र की गहराइयों को महसूस करते हुए कोचि के बैकवॉटर्स का आनंद ले सकते हैं. यहां कैंपस के अंदर रिटेल आउटलेट्स भी उपलब्ध है. ड्राई क्लीनिंग स्टोर्स, सलून और कोचि के बैकवॉटर्स का अद्भुत नज़ारा भी उपलब्ध है. हॉस्पिटल में वार्म लाइटिंग और हार्डवुड फ्लोर्स लग्जरी का एहसास कराते हैं.

इन सब के बावजूद एशिया की तीसरी सब से बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश में लोगों का पर्याप्त चिकित्सा सुविधा के अभाव में दम तोड़ना आश्चर्यजनक है.

भारत के 10 लाख रजिस्टर्ड डॉक्टर्स में से 80% के करीब शहरों से हैं और मॉडर्न मेडिसीन की प्रैक्टिस करते हैं. मगर भारत की ग्रामीण जनता साधारणतः इस से वंचित रहती है. ये सरकारी हेल्थ केयर सर्विसेज पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं. इन के पास डॉक्टरों की कमी रहती है. यहां सरकारी हेल्थ सेक्टर में डॉक्टर जनता अनुपात 1.11,080  है जब कि वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन के मुताबिक़ यह अनुपात 1:1,000 का होना चाहिए.

अस्पतालों में बेड की कमी, कई स्थानों पर प्रशिक्षित डॉक्टर का अभाव और इस सब के बीच सरकार का कुछ न कर पाना. जब भी सवाल उठते हैं राज्य और केंद्र सरकार एक दूसरे पर दोष थोपते नजर आते हैं.

इंडिया स्पेंड ऑर्गेनाइजेशन के आंकड़ों के मुताबिक लाखों लोग भारत में अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पाते. अपने नंबर का इंतजार करते रह जाते हैं क्यों कि सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं कम और भीड़ ज्यादा है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मापदंडों के अनुसार प्रति व्यक्ति पर कम से कम एक डॉक्टर जरूर होना चाहिए मगर भारत में इस दृष्टि से देखा जाए तो 5,00 ,000 से ज्यादा डॉक्टरों की कमी है.

आम आदमी की दो मूलभूत जरूरतें हैं शिक्षा एवं स्वास्थ्य. दोनों को सहजता से उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है. भारत में हेल्थ सेक्टर पर जीडीपी का महज 1.4 प्रतिशत खर्च किया जाता है जो दुनिया के सब से निचले स्तरों में एक है. चीन 3% और यूके  8% खर्च करता है. यहां तक कि अफ्रीका का गरीब देश बुरुंडी भी इस सेक्टर पर 9% तक खर्च करता है.

बहुत से भारतीय विदेश जाते हैं. लग्जरी के लिए नहीं बल्कि ट्रीटमेंट के लिए लोग बाहर जा कर इलाज कराते हैं ताकि वे कॉन्फिडेंट रहे कि सही इलाज हो रहा है. वैसे भारतीय जो लग्जरी अफोर्ड कर सकें, उन की संख्या काफी कम है. साधारणतः जब हम अस्पतालों के बारे में सोचते हैं तो हमारा हमारा मतलब क्लिनिकल एक्सीलेंस होता है. लोग अच्छी देखभाल और वैसी सुविधाओं पर फोकस चाहते हैं जो मरीज के लिए फ़ायदेमंद और घर जैसा वातावरण देने का दावा करते हैं.

इलाज का व्यापारीकरण

आजकल इलाज को भी बहुत बड़ा व्यापार बना दिया गया है. हर बड़े व छोटे अस्पतालों में इतनी भीड़ होती है कि उन्हें देख ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे सारा शहर ही बीमार हो अस्पताल में आ गया हो. अगर बात की जाए सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों की तो ज्यादातर अस्पतालों में इलाज के नाम पर इतनी अंधी लूट मची हुई है कि एक मरीज की वजह से पहले से ही परेशान उस के परिजन अस्पतालों के बड़ेबड़े बिलों का भुगतान कर जहां बेहद परेशान हो रहे है वहीं वे आर्थिक तौर पर भी खोखले हो रहे हैं.

प्राइवेट अस्पतालों में डॉक्टर की चेकअप पर्ची फीस भी 200 से ले 1000 तक हो चुकी है. चेकअप के बाद जांचों का दौर शुरू हो जाता है जो कि ज्यादातर मामलों में हजारों रुपयों में होता है. फिर डॉक्टरों की तरफ से वही दवाईयां मरीज को लिख कर दी जाती है जो सिर्फ उन्हीं के अस्पताल में मौजूद होती है. एक आम अल्ट्रासाऊंड जो कि किसी सरकारी या किसी संस्था के अस्पताल में 150 से 300 रुपये में हो जाता है वही अल्ट्रासाऊंड के प्राइवेट अस्पताल वाले 500 से 1000 या इस से भी अधिक रूपए वसूल लेते है.

जरुरी है नियंत्रण

गुरुग्राम समेत दूसरी ऐसी घटनाओं को एक सबक के तौर पर लेने की आवश्यकता है ताकि निजी अस्पतालों समेत सभी महत्त्वपूर्ण स्वास्थ्य संस्थानों में गलत कार्य करने पर कड़ी कार्रवाई तय की जा सके. देश में छोटेछोटे अपराधों और गैरकानूनी कामों की सजा के तौर पर तो सख्त कानून हैं लेकिन इन बड़े एवं सभ्य कहे जाने वाले लूटेरों के लिये कोई प्रावधान नहीं. सैकड़ोंहजारों मामलों में इक्कादुक्का लोग ही न्यायालय का दरवाजा खटखटा पाते हैं. केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें, जिस तरह वे चिकित्सा-व्यवस्था को निजी क्षेत्र के भरोसे छोड़ रही हैं और स्वास्थ्य बजट में कटौती कर रही हैं, उसी का नतीजा है कि निजी अस्पताल अनियंत्रित होते जा रहे हैं.

जरुरी है कि प्राईवेट अस्पताल (चाहे वह छोटा हो या बडा़ ) में डाक्टर की पर्ची फीस 50 से 100 रूपए तक ही होनी चाहिए. सरकार की तरफ से ही प्राईवेट डाक्टरों की फीस की एक सीमा तय करनी चाहिए. यही नहीं अल्ट्रासाऊंड, एक्सरे व हर तरह की जांचों की कीमत सरकार को तय करनी चाहिए व सभी अस्पतालों में इन की कीमत एक समान होनी चाहिए.

सरकारी अस्पतालों में भी प्राईवेट अस्पतालों की तर्ज पर पूरी सुविधाएं मिलनी चाहिए. जिस से लोगों को मजबूरी में प्राईवेट अस्पतालों की तरफ न भागना पड़े. सरकार को सभी सरकारी अस्पतालों में पूरा स्टाफ, सभी दवाईयां, अल्ट्रासाऊंड,एक्सरे, हर तरह की जांच करवाने का पूरा बंदोबस्त करवाना चाहिए. सफाई आदि का पूरा ध्यान होना चाहिए. अगर सरकार सरकारी अस्पतालों में लोगों को यह सारी सुविधाएं उपलब्ध करवा दे तो फिर लोगों को प्राईवेट अस्पतालों की लूट से छुटकारा मिल सकता है.

गरम गुड़ और वौलनट रोटी

अगर आप फेस्टिवल में कुछ टेस्टी और हेल्दी ट्राय करना चाहती हैं तो आज हम आपको सरदियों के लिए गरम गुड़ और वौलनट रोटी की टेस्टी रेसिपी बताएंगे. गरम गुड़ और वौलनट रोटी की इस रेसिपी को आप अपनी फैमिली के लिए बनाकर सरदियों में तारीफें बटोर सकती हैं. आइए आपको बताते हैं गरम गुड़ और वौलनट रोटी की खास रेसिपी

पैनकेक

–  1 कप मैदा

–  2 अंडे फेंटे

–  1 चम्मच मक्खन पिघला

–  11/4 कप दूध

–  नमक स्वादानुसार

 सौस के लिए हमें चाहिए

–  1/2 कप गुड़

–  1 कप दूध

–  1/2 कप कटे कैलिफोर्निया वॉलनट्स

–  ग्रीसिंग के लिए तेल या मक्खन

गार्निशिंग के लिए हमें चाहिए

–  शहद

–  एडिबल फूल

बनाने का तरीका

बाउल में पैनकेक की सामग्री लें और इसे अच्छी तरह से मिलाएं. नौनस्टिक पैन गरम करें और उस में तेल या मक्खन गरम कर पैनकेक दोनों तरफ से सेंक कर तैयार कर लें. पैन में दूध उबालें, इस में गुड़ मिलाएं और सौस बनाने के लिए पिघलाएं. पैनकेक्स पर तैयार सौस डालें. ऊपर से कैलिफोर्निया अखरोट और एडिबल फूलों से गार्निश कर परोसें.

जब पार्टनर की आदतें हों नापसंद

बंटी और रोशनी कुछ समय पहले ही दोस्त बने थे. हर मुलाकात के दौरान रोशनी को बंटी का व्यक्तित्व और साथ बहुत भला लगता. हर मुलाकात में बंटी वैलडै्रस्ड दिखता, जिस से रोशनी बहुत प्रभावित होती. धीरेधीरे दोनों का प्रेम परवान चढ़ा और फिर उन के बीच शारीरिक संबंध भी बन गए. बंटी हमेशा रोशनी से स्त्रीपुरुष समानता की बातें करता. अंतत: रोशनी ने बंटी से शादी करने का फैसला कर लिया.

शादी हुए साल भर भी नहीं बीता था कि रोशनी के सामने बंटी की कई बुरी आदतें उजागर होने लगीं. उसे पता चला कि बंटी तो रोज नहाता भी नहीं है और जब नहाता है, तो नहाने के बाद गीले तौलिए को कभी दीवान पर तो कभी सोफे पर फेंक देता है. रात को सोते समय ब्रश भी नहीं करता है. रोशनी को बंटी से ज्यादा फोन करने की भी शिकायत रहने लगी. अब बंटी की स्त्रीपुरुष समानता की बातें भी हवा हो गईं. शादी के तीसरे ही साल दोनों अलग हो गए.

जब भी लव मैरिज की बात होती है तो उस के समर्थन में सब से बड़ा और ठोस तर्क यही दिया जाता है कि इस में दोनों पक्ष यानी लड़कालड़की एकदूसरे को अच्छी तरह जान लेते हैं. लेकिन क्या हकीकत में ऐसा हो पाता है? वास्तव में दूर रह कर यानी अलगअलग रह कर किया जाने वाला प्रेम बनावटी, अधूरा और भ्रमित करने वाला हो सकता है. ऐसा प्रेम करना किसी भी युवा के लिए काफी आसान होता है, क्योंकि इस में उसे अपने व्यक्तित्व का हर पक्ष नहीं दिखाना पड़ता. वह बड़ी आसानी से अपनी बुरी आदतें छिपा सकता है. इस प्रकार के प्रेम में ज्यादातर मुलाकातें पहले से तय होती हैं और घर से बाहर होती हैं, इसलिए दोनों ही पक्षों के पास तैयारी करने और दूसरे को प्रभावित करने का काफी समय होता है.

असली परीक्षा साथ रह कर

घर से बाहर प्रेमीप्रेमिका को एकदूसरे की अच्छी बातें ही नजर आती हैं. विभिन्न समस्याओं के अभाव में कुछ तो नजरिया भी सकारात्मक होता है, तो सामने वाला भी अपना सकारात्मक पक्ष ही पेश करता है. प्रेमी सैंट, पाउडर लगा कर इस तरह घर से निकलता है कि प्रेमिका को पता ही नहीं चल पाता कि वह आज 2 दिन बाद नहाया है. प्रेमिका को यह भी नहीं पता चलता कि उस का प्रेमी अपने अंडरगारमैंट्स रोज बदलता भी है या नहीं. और पिछली मुलाकात में उस के प्रेमी ने जो शानदार ड्रैस पहनी थी वह उसी की थी या किसी दोस्त से मांग कर पहनी थी.

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कुल मिला कर लव मैरिज हो या अरेंज्ड मैरिज, किसी भी जोड़े की असली परीक्षा तो साथ रह कर ही होती है. इस लिहाज से विवाह के स्थायित्व की गारंटी को ले कर लव मैरिज या अरेंज्ड मैरिज में ज्यादा अंतर नहीं है, क्योंकि दोनों ही मामलों में साथी का असली रूप तो साथ रह कर ही पता चलता है. दोनों ही तरह की शादियों में यह दावा नहीं किया जा सकता कि जीवनसाथी कैसा निकलेगा?

सामंजस्य भी जरूरी

हम यहां इस बहस में नहीं पड़ रहे कि दोनों तरह की शादियों में कौन सी शादी सही है, लेकिन इतना जरूर कह रहे हैं कि शादी से पहले किया गया प्रेम शादी के बाद किए जाने वाले प्रेम से आसान होता है. शादी के बाद जोड़े को एकदूसरे के बारे में सब पता चल जाता है. एकदूसरे की असलियत खुल जाती है. अच्छीबुरी सब आदतें पता चल जाती हैं. जिंदगी की छोटीबड़ी समस्याएं भी साथ चलने लगती हैं.

इस के बाद भी यदि उन में प्रेम बना रहता है तो हम उसे असली प्रेम कह सकते हैं. बेशक कुछ लोग इसे समझौता भी कहते हैं, मगर हर रिश्ते का यह अनिवार्य सच है कि कुछ समझौते किए बिना कोई भी, किसी के भी साथ, लंबे समय तक या जिंदगी भर नहीं रह सकता.

अंत में घर के अंदर और बाहर के इसी प्रेम के बारे में चुनौती सी देतीं ये लाइनें भी गौर करने लायक हैं:

घर से बाहर तो प्रेमी सब बन लेते हैं,

घर से बाहर तो प्यार सब कर लेते हैं,

करो घर में, घरवाली से तो जानें.

दाल खाते वक्त कंकड़ जो मुंह में आ जाए,

या रोटी में बाल लंबा तुम्हें दिख जाए,

तब आई लव यू बोलो तो जानें.

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#coronavirus 5 टिप्स: होम क्लीनिंग के लिए नमक है फायदेमंद

कोरोनावायरस के बढ़ते केस लोगों के दिल में डर बढा रहे हैं, जबकि सरकार लोगों को इन सबसे बचने के लिए घर पर रहने की सलाह दे रहे हैं. ऐसे में घर की साफ सफाई और जरूरी हो गई है. इसीलिए हम आपको घर को जर्म फ्री क्लीनिंग और कोरोनावायरस से बचाने के लिए कुछ टिप्स बताएंगे.

घर हमारी जिंदगी का ही एक हिस्सा है और उसे क्लीन रखना हमारी जिम्मेदारी है. घर को चमकाने के लिए अक्सर हम मार्केट से कईं महंगे सामान खरीदते हैं, जो कभी-कभी हमारे घर को बनाने की बजाय बिगाड़ देते हैं. पर हमारे घर में कई चीजें ऐसी होती हैं, जिसे हम रोजाना इस्तेमाल करते हैं, लेकिन उसका इसतेमाल हम नहीं करते हैं. ऐसे ही नमक हमारे खाने के टेस्ट को अच्छा बनाता है पर क्या आप जानते हैं कि नमक हमारे खाने के टेस्ट को बढ़ाने के साथ-साथ घर की सफाई में भी मददगार साबित होता है. आज हम आपको नमक से घर के किन-किन चीजों को चमका सकते हैं, इसके बारे में बताएंगे…

1. माइक्रोवेव अवन की सफाई के लिए नमक को करें ट्राय

माइक्रोवेव अवन में कैक या पेस्ट्री बनाने में जितना मजा आता है उतना ही उसे साफ करने में हमें आफत आती हैं. लेकिन नमक से हमारी अवन की सफाई की मेहनत बच जाएगी. अवन को सक्रब करने से पहले उस पर नमक छिड़क दें, जिससे दाग आसानी से निकल जाएंगे.

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2. इंक के दाग तुरंत छुड़ाए नमक

अक्सर काम करते हुए हमारे कपड़ों पर इंक लगना आम बात है. उसी इंक के दाग को निकालने के लिए नमक से दाग पर नमक और नींबू रगड़ें. इससे स्याही के दाग आसानी छूट जाएंगे.

3. सिंक और ड्रेन पाइप की बदबू को करने में मददगार है नमक

सिंक और ड्रेन पाइप की बदबू हमेशा परेशानी का सबब बनती है. पर जब नमक है तो चिंता की कोई बात नहीं. एक भगोने में पानी और एक कप नमक को गर्म करें. इस पानी को सिंक और ड्रेन पाइप में डाल दें, थोड़े देर बाद बदबू दूर हो जाएगी.

4. जूतों की बदबू दूर करने के लिए ट्राय करें नमक

गरमी में पसीने के कारण जूतों से बदबू आने लगती है. यह बदबू आपके पसीने और चमड़े से मिलकर बनती है. पर नमक जूतों की बदबू भी आसानी से भगाता है. आप नमक से भरे क्लोथ बैग्स रखकर या जूतों में नमक डालकर जूतों की बदबू दूर कर सकते हैं. अगर आप नमक डाल रहे हैं तो जूतों को झाड़ना न भूलें.

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5. तेल को कढ़ाई से चिकनाई को दूर करे नमक

मछली या मटन बनाने में कई बार तेल कढ़ाई में चिकनाई रह जाती है. कढ़ाई धोते वक्त उसमें थोड़ा नमक डालें और सूखने रख दें. और फिर उसे बर्तन धोने वाले साबुन से धो दें, इससे कढ़ाई की सारी चिकनाई निकल जाएगी.

उजड़ा चमन फिल्म रिव्यू: ‘‘दूरी ही भली…’’

रेटिंगः एक स्टार

निर्माताः मंगत कुमार पाठक

निर्देशकः अभिषेकपाठक

कलाकारः सनी सिंह,मानवी गगरू,सौरभ शुक्ला,ग्रुशा कपूर,ऐश्वर्या सखूजा, करिश्मा शर्मा,अतुल कुमार

अवधिः दो घंटे

हीन ग्रथि से उबरने के साथ साथ इंसान की असली सुंदरता उसके लुक शारीरिक बनावट पर नही बल्कि उसके अंतर्मन में निहित होती है,उसके स्वभाव में होती है.इस मुद्दे पर एक हीन ग्रथि के शिकार  तीस वर्षीय प्रोफेसर, जिसके सिर पर बहुत कम बाल है,की कहानी को हास्य के साथ पेश करने वाली फिल्म‘‘उजड़ा चमन’’फिल्मकार अभिषेक पाठक लेकर आए हैं.मगर वह बुरी तरह से असफल रहे हैं.फिल्म दस मिनट के लिए भी दर्शक को बांधकर नहीं रखती.

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कहानीः

2017 की सफल कन्नड़ फिल्म ‘‘ओंडू मोट्टेया कठे’’की हिंदी रीमेक‘उजड़ा चमन‘की कहानी दिल्ली युनिवर्सिटी के हंसराज कौलेज में लेक्चरर प्रोफेसर के रूप में कार्यरत 30 वर्षीय चमन कोहली (सनी सिंह) की दुःखद दास्तान है, जो कि सिर पर बहुत कम बाल यानी कि गंजा होने के कारण हर किसी के हंसी का पात्र बनते हैं. उनके विद्यार्थी भी कक्षा में उन्हें ‘उजड़ा चमन’कह कर मजाक उड़ाते हैं. इसी समस्या के चलते उनकी शादी नहीं हो रही है, इससे चमन के पिता (अतुल कुमार   )और माता (ग्रुशा कपूर ) बहुत परेशान हैं. यह परेशानी तब और अधिक बढ़ जाती है जब एक ज्योतिषी गुरू जी (सौरभ शुक्ला) भविष्यवाणी कर देते हैं कि यदि 31 की उम्र से पहले चमन की शादी न हुई, तो वह संन्यासी हो जाएंगे. इसलिए चमन शादी के लिए लड़की तलाशने के लिए कई जुगाड़ लगाते हैं. टिंडर पर दोस्ती करना शुरू करते हैं. दूसरों की शादी में जाकर लड़कियों के आगे पीछे मंडराते हैं. अपने गंजेपन को छिपाने के लिए विग लगाने से लेकर ट्रांसप्लांट तक की सोचते हैं, लेकिन बात नहीं बनती. अचानक टिंडर के कारण उनकी मुलाकात एक मोटी लड़की अप्सरा (मानवी गगरू) से होती है. पर जब दोनों सामने आते हैं, तो कहानी किस तरह हिचकोले लेती है, वह तो फिल्म देखकर ही पता चलेगा.

लेखनः

फिल्मकार ने एक बेहतरीन विषय को चुना,मगर पटकथा व संवाद लेखक दानिश खान ‘बाल नहीं, तो लड़की नहीं‘ पर ही दो घंटे तक इस तरह चिपके रहे कि दर्शक कहने लगा ‘कहां फंसाओ नाथ. ’इंटरवल से पहले गंजेपन के चलते मजाक के ही दृश्य हैं,जो कि जबरन ठूंसे गए नजर आते है. हंसराज हंस कालेज के अंदर के दृश्य,खासकर प्रिंसिपल के आफिस के अंदर का दृश्य इस कदर अविश्वसनीय और फूहड़ लगता है कि आम दर्शक को भी लेखक की सोच पर तरस आने लगता है. लेखक चमन के किरदार को भी सही ढंग से नहीं गढ़ पाए. वह कभी सभ्य व संवेदनाशील लगते हैं, तो कभी बहुत गंदे नजर आते हैं. पिता व पुत्र के बीच के रिश्ते व संवाद भी फूहड़ता की सारी सीमाएं तोड़ते हैं. चमन के पिता ‘लड़का प्योर है’ व ‘वर्जिन है’ कई बार दोहराते हैं.जिसके कोई मायने नहीं.

निर्देशनः

कुछ वर्ष पहले अभिषेक पाठक ने पानी पर एक बेहतरीन डाक्यूमेंटरी फिल्म बनायी थी,जिसके लिए उन्हे पुरस्कृत भी किया गया था.उस वक्त वह एक संजीदा निर्देशक रूप में उभरे थे. मगर ‘उजड़ा चमन’देखकर यह अहसास नही होता उन्ही अभिषेक पाठक ने इसका निर्देशन किया है. निर्देशन में भी खामियां हैं. निर्देशकीय व लेखक की कमजोरी के चलते पूरी फिल्म में हीनग्रंथि की बात उभरकर आती ही नही है.

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अभिनयः

सनी सिंह की यह पहली फिल्म नहीं है. मगर पूरी फिल्म में वह एकदम सपाट चेहरा लिए ऐसे इंसान नजर आते हैं, जिसके अंदर किसी तरह की कोई भावना नही होती. वह इस फिल्म में सोलो हीरो बनकर आए हैं, पर वह इसका फायदा उठाते हुए बेहतरीन अदाकारी दिखाने  का मौका खो बैठे. जबकि छोटे किरदार में मानवी गगरू अपनी छाप छोड़ जाती हैं. अतुल कुमार, ग्रुशा कपूर, गौरव अरोड़ा, करिश्मा शर्मा, ऐश्वर्या सखूजा, शारिब हाशमी ने ठीक ठाक काम किया है.

प्राइवेट अस्पतालों की लूट बरकरार : मरीज बदहाल भाग-1

यह मामला पारस अस्पताल का है जहाँ हिसार के रहने वाले जंगबीर ने शिकायत दर्ज कराई कि सुनील कुमार नाम का उन का 24 वर्षीय भांजा 6 महीने पारस अस्पताल में भरती रहा. इस दौरान डॉक्टरों के गलत इलाज के कारण वह वेंटिलेंटर पर पहुंच गया.

जंगबीर के अनुसार एक हादसे में सुनील के गर्दन और सिर पर चोट आई थी. पहला इलाज हिसार में हुआ जहां उन की गर्दन का ऑपरेशन कराया गया. बाद में वहां के डॉक्टरों ने कहा कि सिर में चोट की वजह से सुनील को न्यूरो सर्जन की जरूरत है. इस के बाद उसे गुरुग्राम के पारस अस्पताल में ले जाया गया जहां के डॉक्टरों ने कहा कि मरीज को न्यूरो सर्जन की नहीं बल्कि एक नेक-स्पाइन सर्जन की जरूरत है.

बाद में परिवार की स्वीकृति न मिलने के बावजूद डॉक्टरों ने उस का फिर से औपरेशन किया. जिस के बाद मरीज की हालत और खराब होने लगी. डॉक्टरों ने खुद स्वीकारा की ऑपरेशन गलत होने के कारण ये समस्या हुई है. इस बीच एक करोड़ के करीब का बिल बन चुका था.

गुरुग्राम की यह घटना कोई पहली या अकेली घटना नहीं है. इस तरह की न जाने कितनी घटनाएं रोज निजी अस्पतालों में दोहराई जाती हैं. निजी अस्पतालों में मरीजों के इलाज में लापरवाही व मनमानी ही नहीं की जाती बल्कि मरीजों से अधिक बिल वसूलने के लिये गलत तरीके अपनाए जाते है. यहां तक कि पैसे नहीं दिये जाने पर अस्पताल प्रबंधन परिजनों को शव तक ले जाने नहीं देता है.

निजी अस्पतालों में इलाज के नाम पर मरीजों के साथ किस तरह से लूट की जा रही है इसे ले कर एक रिपोर्ट सामने आई है. फरवरी 2018 में की गई एनपीपीए (राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण) की स्टडी में जो खुलासा हुआ है वह बेहद चौंकाने वाला है.

रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर के कई निजी अस्पताल दवाओं समेत अन्य मेडिकल उपकरण के एमआरपी में भारी हेराफेरी कर के 1700 प्रतिशत से ज्यादा का मुनाफा कमा रहे हैं. रिपोर्ट में पता चला है कि ये निजी अस्पताल एक रुपये में खरीदे गए ग्लव्स को 2800 रुपये में बेच रहे हैं. इसी तरह से सीरिंज और दवाओं पर भी अक्सर 1200 से 1700 प्रतिशत तक का मुनाफा वसूला जाता है.

एनपीपीए ने फोर्टिस समेत दिल्ली-एनसीआर के 4 बड़े और नामी अस्पतालों पर स्टडी कर के यह रिपोर्ट तैयार की गई.

देश के निजी अस्पताल लूटपाट एवं धन उगाहने के ऐसे अड्डे बन गये हैं जिन का शिकार आम जनता हो रही है. सरकारी अस्पतालों में गंदगी, भीड़ और बदहाली के कारण मौत से जूझ रहे रोगियों के लिये कोई जगह नहीं है जहाँ वे निश्चिन्त हो कर अपना इलाज करा सकें. जिन के पास पैसा है वे निजी अस्पतालों की शरण में भागते हैं. पर विडंबना यह है कि निजी अस्पतालों ने लूटखसोट मचा रखी है.

मरीजों पर महंगी जांच करवाने के लिए दबाव डाला जाता है. बगैर जरूरत मरीज को वेंटिलेशन व ऑपरेशन थियेटर में डाल दिया जाता है. तय पैकेज पर एक्सट्रा पैसे लेने के मामले भी सामने आये हैं.

यदि बात करें गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल और गुरुग्राम के मेदांता की तो ये दोनों इतने बड़े अस्पताल हैं कि आप इन्हें प्राइवेट अस्पताल नहीं बल्कि फाइव स्टार होटल कह सकते हैं. इन दोनों ही अस्पतालों पर 2 बच्चों का सामान्य सा इलाज करने की एवज़ में लाखों रुपये का बिल बनाने का आरोप है. ये दोनों मामले लगभग एक जैसे थे. लेकिन कार्रवाई सिर्फ एक अस्पताल पर हुई.

आरोपों के मुताबिक फोर्टिस अस्पताल ने 7 साल की एक बच्ची के इलाज के नाम पर 15 लाख 59 हज़ार रूपये का बिल बना दिया. मेदांता ने भी 7 साल के एक बच्चे का 15 लाख 88 हज़ार रुपये का बिल बनाया. इन दोनों ही बच्चों को डेंगू हुआ था. फोर्टिस अस्पताल में इलाज के लिए आई बच्ची 15 दिन तक अस्पताल में भर्ती रही जबकि मेदांता अस्पताल में लाया गया बच्चा 22 दिनों तक भर्ती रहा. फोर्टिस अस्पताल का बिल चुकाने के लिए बच्ची के परिवारवालों को कर्ज़ लेना पड़ा, जबकि मेदांता अस्पताल का बिल चुकाने के लिए बच्चे के पिता को अपना घर गिरवी रखना पड़ा. इन दोनों ही मामलों में लाखों रुपये का बिल चुकाने के बावजूद इन दोनों बच्चों की जान नहीं बच पाई.

इस मामले के सामने आने के बाद हरियाणा सरकार ने जांच कमेटी बनवाई थी. इस कमेटी की जांच के बाद बहुत सी अनियमितताओं का पता चला.  बच्ची के इलाज के दौरान अस्पताल नेजेनेरिक दवाओं का इस्तेमाल करने के बजाए ब्रांडेड दवाओं का इस्तेमाल किया जो बहुत महँगी होती हैं. अक्सर देश के प्राइवेट अस्पताल मरीज़ को सिर्फ पैसे कमाने की वस्तु समझते हैं

इसी तरह एक मामले में विनोद जैन नामक शख्स ने अपनी पत्नी सुधा जैन की मौत का जिम्मेदार संतोकबा दुर्लभजी मेमोरियल हॉस्पिटल, राजस्थान को ठहराया. विनोद जैन ने 31 अगस्त 2011 को हुई अपनी पत्नी की मौत की वजह चिकित्सीय लापरवाही मानते हुए स्टेट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रेड्रेसल कमीशन में शिकायत दर्ज कराई. कमीशन ने अपने आदेश (दिनांक 11 /5 /16) के तहत विनोद की शिकायत को सही माना. मगर इस आदेश के खिलाफ हॉस्पिटल मैनेजमेंट की तरफ से नेशनल डिस्प्यूट्स रेड्रेसल कमीशन, नई दिल्ली में अपील दायर की गई. अंतिम फैसला विनोद जैन के खिलाफ और हॉस्पिटल के पक्ष में दिया गया.

क्या था मामला

 

विनोद की पत्नी सुधा जैन को कई तरह की बीमारियां थीं. एसोफैगल कैंसर ,कोलन और ब्रैस्ट कैंसर (जो पहले थे ), हाइपरटेंशन और टाइप 2 डॉयबिटीज़ वगैरह. बुखार की स्थिति में उन्हें 15 अगस्त 2011 को एडमिट किया गया. उन का नैजल फीड ट्यूब रीइंसर्शन भी करना था. क्यों कि डिसफेजिया की वजह से यह डिस्लॉजड हो गया था.

मरीज के एडमिट होने के बाद डॉ अनुराग गोविल ने नैजल फीड ट्यूब इन्सर्ट कर दिया और कुछ ब्लड टेस्ट कराने को कहा. ब्लड काउंट टेस्ट में पाया गया कि डब्लू बी सी बहुत ज्यादा था जो इंफेक्शन इंडीकेट करता है. उन्हें 104 डिग्री बुखार भी था. इस के लिए उन्हें मैग्नेक्स ( magnex ,1.5 mg ) के इंजेक्शन लगाए गए. मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इंट्रावेनस ट्रीटमेंट के लिए उसे दिए जानेवाले कैनुएला ने काम करना बंद कर दिया था. तब डॉ ने एक दूसरा एंटीबायोटिक टैबलेट, पॉलीपॉड प्रेसक्राईब किया जिसे नैजल ट्यूब से देना था.

18 अगस्त 2011 को मरीज को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया. इस समय भी उन का डब्लूबीसी काउंट बहुत अधिक था. सो डॉ ने उन्हें और 5 दिनों तक दवा खाने को कहा.

विनोद जैन के मुताबिक 23 अगस्त 2011 को उन की पत्नी कोमा में चली गईं. उन्हें तुरंत पास के हार्ट और जेनरल हॉस्पिटल में एडमिट किया गया जहाँ उन्हें लाइफ सपोर्ट वैंटिलेशन में रखा गया. उन का डब्लूबीसी काउंट अब और भी ज्यादा बढ़ गया था और सिस्टोलिक बीपी केवल 46 था. उन्हें फोर्टिस हॉस्पिटल शिफ्ट किया गया 31 अगस्त को उन की मृत्यु हो गई.

विनोद ने पहले मेडिकल काउंसिल औफ राजस्थान में शिकायत किया जहां असफल होने पर उन्होंने स्टेट कमीशन में कंज्यूमर कंप्लेंट किया. विनोद ने निम्न चार बातों पर आधारित केस दर्ज कराया;

  1. अपर्याप्त और अप्रभावी मेडिकेशन
  2. मेडिकेशन के लिए कैन्यूला को फिर से शुरू करने में असफलता
  3. समय से पहले डिस्चार्ज करना जब कि मरीज की स्थिति क्रिटिकल थी.
  4. पौलिपौड एंटीबायोटिक का ओरल एडमिनिस्ट्रेशन

आगे पढ़ें- क्या था हौस्पिटल का जवाब

‘इशिता की बहू’ का ये वेडिंग फैशन करें ट्राय

सीरियल ‘ये है मोहब्बतें’ में ‘इशिता की बहू’ के रोल में नजर आने वाली कृष्णा मुखर्जी इन दिनों सोशल मीडिया पर अपने वेडिंग लुक में फैंस का दिल जीत रही हैं. हाल ही में कृष्णा ने एक ब्राइडल फोटोशूट करवाया, जिसमें वह बेहद खूबसूरत नजर आ रही थीं. इसीलिए आज हम आपको कृष्णा के वेडिंग सीजन के कुछ आउटफिट के बारे में बताएंगे, जिसे आप आसानी से वेडिंग सीजन में ट्राय कर सकती हैं. कृष्णा के ये लुक आपके फैशन पर चार चांद लगा देंगे. वहीं अगर आपकी हाइट छोटी है तो ये लुक आपके लिए परफेक्ट औप्शन रहेंगे. आइए आपको दिखाते हैं कृष्णा के वेडिंग सीजन लुक…

1. कौंट्रास्ट लुक करें ट्राय

अगर आप वेडिंग सीजन के लिए नए आउटफिट ट्राय करना चाहती हैं तो सिंपल पर्पल कलर के सिंपल लहंगे के साथ फ्लावर प्रिंट डीप नेक ब्लाउज ट्राय कर सकती हैं. सिंपल इस आउटफिट के साथ कौंट्रास्ट औरेंज कलर का दुपट्टा परफेक्ट औप्शन रहेगा.

2. वेडिंग के लिए ब्लैक कलर करें ट्राय

 

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Thank you❤️❤️?? Styledby: @stylebysugandhasood Outfitby: @kaamakyabyrashmi Clutchby: @rossoyuki Assistedby: @jangidpooja1998

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अगर आप वेडिंग के लिए सिंपल लेकिन ट्रेंडी आउटफिट ट्राय करना चाहते हैं तो प्लेन ब्लैन कलर की लूज पैंट के साथ गोल्डन कढ़ाई वाला ब्लैक ब्लाउज परफेक्ट रहेगा. साथ ही साड़ी की तरह हैवी गोल्डन आपको हैवी लुक देगा.

3. ब्राइड के लिए परफेक्ट है ये ब्राइडल लुक


अगर आप अपनी शादी के लिए ब्राइडल लहंगे के औप्शन ढूंढ रही हैं तो कृष्णा का ये ब्राइडल लुक आपके लिए परफेक्ट औप्शन है. सिंपल लेकिन ट्रेंडी लुक आपके लिए परफेक्ट रहेगा.

4. फ्लावर प्रिंट पैटर्न है परफेक्ट

 

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I wasn’t ready ?

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अगर आप वेडिंग के लिए कुछ नया ट्राय करना चाहते हैं तो कृष्णा का फ्लावर प्रिंटेड अनारकली सूट आपके लिए परफेक्ट औप्शन है. ये आपके लुक को परफेक्ट रखेगा. साथ ही आपकी हाइट को भी अच्छा दिखाएगा.

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5. सिंपल लुक है परफेक्ट

 

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Tenu takdiii raha….

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अगर आपको सिंपल लुक रखना पसंद है तो कृष्णा का ये सिंपल लुक परफेक्ट रखेगा. सिंपल लौंग अनारकली सूट के साथ हैवी दुपट्टा और हैवी ज्वैलरी आपके लुक को परफेक्ट बनाने में मदद करेगा. साथ ही आपको एलीगेंट लुक भी देगा.

बता दें, सीरियल ‘ये है मोहब्बतें’ में काम करने के बाद से कृष्णा मुखर्जी का नाम एक्टर एली गोनी के साथ जोड़ा जा रहा है. वह बात अलग है कि दोनों ने अपने रिलेशनशिप को लेकर कोई खुलासा नही किया है.

शौपिंग प्लाजा: फेस्टिव सीजन में खरीदे ये यूजफुल चीजें

टाइटन के नए ब्रैंड तनाएरा ने दिल्ली के क्राफ्ट्स म्यूजियम में एक विशेष कार्यक्रम ‘परिचय’ का उद्घाटन किया, जिस में हाथ से बनी खादी की 150 साडि़यां प्रदर्शित की गईं. खादी से बनी तनाएरा की ये साडि़यां पूरी तरह स्वदेशी हैं.

1. नाम्या की पेशकश

नाम्या ले कर आया है नया बौडी टोनिंग और स्कल्पटिंग वंडर औयल जो प्राकृतिक गुणों से बना है. इस बौडी औयल को पूरे शरीर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. यह स्ट्रैच मार्क्स, ड्राइनैस, क्षतिग्रस्त त्वचा, फाइन लाइनों और झुर्रियों की स्थिति में मददगार है. इस के 200 एमएल पैक की कीमत ₹800 है.

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2. हवाइयंस का ऐनिमल प्रिंट

हवाइयंस ले कर आया है ट्रैंडी ऐनिमल प्रिंट्स से सजे नए फ्लिप फ्लाप, जो आप के व्यक्तित्व की मजबूती को दर्शाते हैं. ये बोल्ड और एलिगैंट होने के साथ ही इंस्टैंट फैशन स्टेटमैंट बनाते हैं. किसी भी लुक को ग्लैमरस या आकर्षक बनाने के लिए आप मेटैलिक स्ट्रैप वाले इस प्रिंटेड फुटवियर को अपना सकती हैं. हवाइयंस स्लिम ऐनिमल्स की कीमत ₹999 है.

3. फेबइंडिया सिल्वर कौइन

कमल, मयूर और बरगद के पेड़ जैसी खूबसूरत पारंपरिक डिजाइनों से सजे फेबइंडिया सिल्वर कौइन फैस्टिव सीजन के दौरान शानदार गिफ्टिंग सौल्यूशन बन सकते हैं. ये 99.9% चांदी से बने हैं. 10 ग्राम सिक्के की कीमत ₹990 और 50 ग्राम के सिक्के की ₹3,990 है. ये सिक्के फेबइंडिया स्टोर्स में और औनलाइन उपलब्ध है.

4. एस्टाबेरी की पेशकश

एस्टाबेरी बायोसाईंसेस ने अपना नया पपाया फेस वाश बाजार में उतारा है, जो त्वचा को मौइस्चराइज करने के साथ अनचाही पिगमैंटेशन कम करता है. यह गाजर और सोया प्रोटीन के एक्सट्रैक्ट्स जैसे प्राकृतिक तत्त्वों से युक्त है और त्वचा की समस्याओं से निबटता है. यह रंगत सुधारने का काम करता है और टैनिंग को दूर करता है. इस के 100 एमएल पैक की कीमत ₹110 है. यह एक फ्री फेयरनेस क्रीम के साथ आता है. इस के 50 एमएल पैक की कीमत ₹85 है.

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5. मोदीकेयर की अर्बन कलर प्रो व्हाइट स्किन रेंज

मोदीकेयर ले कर आया है अर्बन कलर प्रो व्हाइट स्किन रेंज. इस में 4 इन 1 रैडिएंस व्हाइटनिंग कौंप्लैक्स है, जो स्किन टोन का निखार बढ़ाने और उस की सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है. यह गहरे धब्बों को कम करता है तथा लंबे समय तक हाइड्रेशन प्रदान करता है. मोदीकेयर प्रो व्हाइट रेंज उत्पाद ₹499 से ₹1699 के बीच हैं.

6. मैजिकल मिसलर

ब्लू हैवन ले कर आया है बी फेज मिसलर क्लींजिंग वाटर. इस के प्रयोग से आप बहुत आसानी से एक हलके से स्वाइप के साथ अपना सारा मेकअप रिमूव कर सकती हैं. यही नहीं यह त्वचा को हाइड्रेशन और नरिशमैंट भी देता है. इस के 125 एमएल पैक की कीमत ₹150 है.

7. ओशिया का रेडिएंस डी-टैन फेस पैक

ओशिया हर्बल्स ने नया ओशिया रेडिएंस डी-टैन फेस पैक बाजार में उतारा है, जिस में लिकोराइस के ऐक्सट्रैक्ट्स की अच्छाई है. यह सनटैन से छुटकारा पाने के लिए प्रभावी है. लिकोराइस के अलावा इस में मौजूद बादाम का तेल, शियाबटर, ग्लिसरीन, शहतूत, एलोवेरा धूप व प्रदूषण के कारण त्वचा में हुए क्षति को कम करता है. साथ ही यह त्वचा को पर्याप्त पोषण प्रदान कर फिर से जीवंत, तरोताजा, तेल मुक्त और असमान त्वचा टोन प्रदान करता है. इस के 120 ग्राम पैक की कीमत ₹285 है.

8. हिबिस्कस मंकी के उत्पाद

हिबिस्कस मंकी ने ब्यूटी, वूमन पर्सनल केयर और मैंस्ट्रुएशन से जुड़ी रूढि़वादी सोच को तोड़ने के लिए कुछ परंपरागत उत्पाद बाजार में पेश किए हैं. इन उत्पादों की रेंज में 5 खास उत्पाद हैं जो बालों, त्वचा और माहवारी के दौरान नैचुरल और कैमिकल फ्री केयर देते हैं. वहीं हिबिस्कस हेयर औयल भारतीय महिलाओं को ठंडीठंडी चंपी का वही पुराना एहसास याद दिला देता है.

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ताकि याद रहे मेहमाननवाजी

यह सच है कि भारतीय त्योहारों व शादी में रस्में बहुत धूमधाम से मनाई जाती हैं. मेहमानों का आना भी अच्छा लगता है. मगर मेहमानों के खानेपीने और रहने का विशेष प्रबंध होना चाहिए ताकि वे वापस जा कर यह कहते न थकें कि आप की मेहमाननवाजी बहुत ही अच्छी रही. जबरदस्त मेजबानी हुई. मेहमानों को कैसे करें ऐसा कहने को मजबूर इस के लिए प्रस्तुत हैं कुछ टिप्स:

रहने की व्यवस्था

आप सब से पहले आने वाले मेहमानों की लिस्ट बनाएं. इस में यह भी देखें कि कितने सीनियर सिटीजंस है और कितने यंग. बड़ी उम्र के मेहमानों के लेटनबैठने की व्यवस्था के लिए बैड, कुरसी आदि का इंतजाम हो. उन्हें अपना सामान रखने के लिए एक छोटी मेज हो, ताकि उन्हें झुकना न पड़े. यंग लोग तो जमीन पर भी गद्दा आदि लगा कर रह सकते हैं. यदि बैठने का इंतजाम ऊपर व नीचे की मंजिल पर हो और लिफ्ट न हो तो सीनियर सिटीजंस को हमेशा नीचे की मंजिल पर रखें और टौयलेट भी पास हो. गरमी का मौसम है तो किराए पर ही एयर कंडीशनर या कूलर लगवा लें ताकि मेहमान गरमी से बेहाल न हों.

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खाने-पीने की व्यवस्था

शुरुआत चाय से होती है. अत: मीठी और फीकी चाय का इंतजाम हो. साथ में बिस्कुट भी अवश्य होने चाहिए. जिन के बच्चे छोटे हों और दूध पीते हों उन के लिए दूध की भी व्यवस्था हो. इस सब के साथसाथ नीबूपानी, कुनकुने पानी का भी इंतजाम हो.

स्नैक्स में डीप फ्राई चीजों जैसे पकौड़ों, कचौड़ी, हलवा आदि का प्रबंध हो तो साथ में सैंडविंच, पोहा, उपमा, दलिया, इडली, सांभर चटनी आदि का भी प्रबंध रखें, ताकि जो मेहमान तला नाश्ता नहीं करते हो वे नाश्ता कर सकें.

इसी तरह लंच और डिनर का भी समय सही रखने का प्रयास करें. खाना बहुत स्पाइसी न बनवाएं. अपने परिवार के मेहमानों के बारे में जानते हुए 1-2 सब्जियां हलके नमक की अवश्य रखें. उबले आलू, दही, सलाद फ्रिज में अवश्य रखें. दही खट्टा न हो. छाछ, नारियल पानी आदि भी अवश्य रखवाएं.

जब भी कोई मेहमान आए पानी के साथ मिठाई अवश्य दें. सब से मिलते रहें और एकदूसरे से परिचय कराते रहें, ताकि मेहमान आपस में भी घुलतेमिलते रहें.

प्रतियोगिताओं का आयोजन

शादी में सिर्फ बातचीत से काम नहीं चलता. अत: शादी के माहौल को मजेदार और यादगार बनाने के लिए यंग जैनरेशन सीनियर सिटीजंस के बीच अंत्याक्षरी आदि प्रतियोगिताएं रखें. पुरुषों में साड़ी जल्दी कौन तह करता है तो स्त्रियों में रखें कि साड़ी कौन जल्दी बांधती हैं. किसी महिला वाले पोस्टर पर स्त्रीपुरुष दोनों माथे पर कौन सही जगह बिंदी लगाता है प्रतियोगिता रखें.

इस सीजन में फल बहुतायत में आते हैं. अत: लड़कियों और महिलाओं के बीच जल्दी फल को काटनेछीलने की प्रतियोगिता रखें. इस से एक और फायदा यह होगा कि सभी मेहमानों को फल खाने को मिलेंगे और वे कट भी जाएंगे. प्रतियोगिता जीतने वाले के लिए पहले से ही इनाम तय रखें. तंबोला भी खिला सकते है. डांस का भी आयोजन कर सकते हैं.

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यंग बनाम सीनियर सिटीजंस.

शादी व त्योहार को यादगार बनाने के लिए प्रत्येक मेहमान के साथ ज्यादा से ज्यादा क्वालिटी टाइम बिताने की कोशिश करें. गिफ्ट सब को बराबर दें. इस तरह मेहमानों को एहसास होता है कि वे वाकई खास हैं. वे कभी आप की मेजबानी नहीं भूल पाएंगे.

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