Family Kahani: सीरत

Family Kahani: लोग सूरत के दीवाने बड़ी जल्दी हो जाते हैं लेकिन अगर सीरत अच्छी न हो तो इंसान किसी काम का नहीं होता. दुनिया में सीरत को समझने वाले भी बहुत कम लोग ही होते हैं. दरअसल, सीरत वह हीरा है जो कोयले की खान में मिलता है. ‘‘संध्या प्लीज मुझे छोड़ कर मत जाओ मैं इस नन्ही सी जान को तुम्हारे बिना कैसे संभालूंगा… संध्या… संध्या…’’ प्रभात बच्चे को गोद में लिए मृत संध्या को झकझर रहा था… ‘‘ प्रभात बेटा, दुलहन की मांग में सिंदूर भरो,’’ मां की आवाज सुन कर प्रभात अपने अतीत की यादों से बाहर निकाला. प्रभात की यादों में आज भी उस की संध्या जिंदा थी जिसे वक्त ने उस से छीन लिया था.

वह जातेजाते 5 साल के बेटे निशांत को उस के हवाले कर गई थी. मां की आवाज सुनने के बाद प्रभात को यंत्रवत बराबर में विवाह की बेदी पर बैठी निशा को बिना देखे उस की मांग में सिंदूर भर दिया. फेरे लेते वक्त भी उस का व्यवहार अलग ही रहा गठबंधन का खयाल न होता तो शायद वह सातों फेरे अकेले ही घूम लेता. कन्यादान के समय निशा की हथेली और कलाई पर नजर फिसल गई थी. ‘‘उफ, कितनी काली है,’’ नजरों को समेट कर पंडितजी की ओर देखने लगा. ‘‘पंडितजी, सातों जन्म के शादी के मंत्र एक ही जन्म में पढ़ेंगे क्या?’’ प्रभात ने झल्ला कर कहा. ‘‘बस… समझ लीजिए हो ही गया,’’ कहते हुए पंडितजी दानदक्षिणा की पोटली समेटने लगे. ‘‘ जाओ बेटी अपने पति के साथ बड़ों का आशीर्वाद ले लो,’’ प्रभात की मां ने दोनों के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा.

निशा का हाल भी कुछ ऐसा ही था. उसे भी प्रभात की ओर देखने में, न साथ चलने में कोई दिलचस्पी थी. वह तो बस अपनी 7 साल की बेटी जीवा के लिए इस विवाहबंधन में बंधने के लिए तैयार हो गई थी. दरअसल, जीवा हर समय बीमार रहती थी और उस हालत में उस के जबान पर पापा नाम की रट होती थी. निशा कुछ भी कर ले फिर भी उसे पापा ही अपने आसपास चाहिए होते थे. उस नन्ही सी बच्ची को कैसे समझती कि उस के पापा विदेश जा कर किसी गोरी मेम की खिदमत में लग चुके हैं. कुछ महीने तक तो निशा के गिड़गिड़ाने पर पैसे आते रहे फिर अचानक से तलाकनामे के पेपर आ गए.

इसे भारतीय महिला निशा ने अपने स्वाभिमान पर एक बड़ा धब्बा समझ तलाक के कागजों पर दस्तखत कर दिए. ये सब बातें जीवा की समझ में कहां आने वाली थीं, वह तो केवल अपने क्लासमेट्स के पापा की तरह अपने पापा को भी अपने आसपास देखना चाहती थी. बच्चों की जिंद्द के आगे मातापिता को झकना ही पड़ता है और हुआ भी वही. विवाह के मंडप में जिस गठबंधन को दूल्हादुलहन अपना सब से कीमती गहना समझ कर संभलते रहते हैं वही गठबंधन अभी प्रभात को फांस की तरफ लग रहा था. विदाई की गाड़ी में बैठते ही सब से पहले उस ने अपने आप को उस बंधन से अलग किया क्योंकि उस बंधन में जो ताकत थी वह उसे संध्या से अलग कर रही थी जिस से अलग होने की कल्पना मात्र भी प्रभात नहीं करना चाहता था. विदाई की गाड़ी मंदिर से चली और गुलाबी रंग के दोमंजिला मकान के सामने पहुंच कर रुक गई. यह मकान प्रभात का अपना मकान था. प्रभात सोनी, भोपाल मध्य प्रदेश के शहर में एक सरकारी इंजीनियर था. उस के पास पैसों की कोई कमी नहीं थी. कमी थी तो केवल जज्बात की. रश्म के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ क्योंकि प्रभात अपनी मां से पहले ही इन बातों का जिक्र कर चुका था कि यह शादी केवल बच्चों के लिए किया हुआ एक समझता है. इसे कभी भी वास्तविकता का रूप न कोई दे और न ही देने की कोशिश करें. ‘‘कोई नहीं मतलब कोई नहीं,’’ इशारा निशा की तरफ था.

बेशक प्रभात और निशा एकदूसरे के साथ विवाह के बंधन में बंध चुके थे लेकिन मन एकदूसरे से बिलकुल जुदा थे. उन्होंने नजर उठा कर अभी तक एकदूसरे को देखा भी नहीं था बातचीत तो दूर की बात थी. प्रभात संध्या से इतना प्रेम करता था कि उस के जाने के बाद भी उस का कमरा ज्यों का त्यों सजा कर रखता था और शाम को औफिस से आने के बाद भी उसी कमरे में रहना पसंद करता था. कमरे में हमेशा संध्या की पसंद का गाना चलता रहता था… ‘‘इन रश्मों को, इन कसमों को, इन रिश्तेनातों को मैं न भूलूंगा…’’ प्रभात और निशा के बीच केवल उन के बच्चों के प्रति जिम्मेदारी का बंधन था जिसे वे दोनों ही बखूबी निभा रहे थे. एक तरफ निशा प्रभात के बेटे निशांत से जुड़ती जा रही थी तो दूसरी तरफ जीवा पापा की प्यारी बन चुकी थी. हफ्तों से ले कर महीने बीते गए लेकिन प्रभात और निशा के व्यवहार में कोई परिवर्तन नहीं आया. दोनों ने बच्चों की देखभाल को ही अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बना लिया था.

इस बीच प्रभात के मातापिता उन के साथ रहने आए जिन का मकसद प्रभात और निशा के गृहस्थी को करीब से देखना था. निशा ने सासससुर की सेवा में कोई कमी नहीं रखी. ‘‘बेटी, प्रभात को उस की पुरानी जिंदगी से बाहर निकालो और उस की शुरुआत तुम्हें उस के कमरे से करनी होगी, वहां अपना हक जमाओ,’’ जाते वक्त सासूमां ने इतना ही कहा था. निशा के टूटे मन में ऐसी कोई इच्छा नहीं थी फिर भी मां समान सास की इच्छा के आगे केवल ‘‘कोशिश करूंगी,’’ इतना ही कह पाई थी. देखतेदेखते 1 साल गुजर गया. लेकिन प्रभात और निशा ने एक दिन भी एकदूसरे से जरूरी कामों के अलावा कोई बात नहीं की. ऐसा नहीं था कि वे एकदूसरे से नफरत करते थे या हमेशा लड़ते रहते थे पर कभी कोई चाहत जागी ही नहीं थी. शारीरिक ख्वाहिश ने अंतर्मन के रेशे को छेड़ा ही नहीं था.

दोनों ने शांतिवार्त्ता के तहत ही अपनेअपने काम बांट लिए थे. निशा का काम बच्चों का होमवर्क कराना होता था तो प्रभात का काम स्कूल पहुंचाना. उन्होंने अपने कामों को कुछ इस तरह बांट लिया था कि नदी के किनारे बन गए थे जो साथ तो हमेशा रहते हैं पर मिलते कभी नहीं. एक दिन घर की सफाई करतेकरते निशा संध्या के कमरे में चली गई. प्रभात ने अपने कमरे में कुछ ऐसी तकनीकी व्यवस्था कर रखी थी कि दरवाजा खुलते ही रिकौर्ड बजने लगता था. ‘‘इन रश्मों को, इन कसमों को, इन रिश्तेनातों को मैं ना भूलूंगा मैं ना भूलूंगी…’’ निशा कुछ देर तक कमरे को निहारती रही. ठीक सामने की दीवार पर नजर पड़ी जहां संध्या की तसवीर बड़े से फ्रेम में लगी थी. सचमुच बेहद खूबसूरत थी संध्या.

तीखे नैननक्श, काले घने बाल, मुसकराता चेहरा. वहीं बाएं हिस्से में आदमकद आईना भी था जिस में निशा ने स्वयं को देखा तो नजरें अपनेआप नीची हो गईं. संध्या के सामने निशा कुछ भी नहीं थी. दिल के किसी कोने में कुछ हुआ. संध्या के मर कर भी जिंदा रहने की वजह उसे आज समझ में आ रही थी. इतनी खूबसूरत पत्नी को भला कोई कैसे भूल सकता है. वैसे तो कोई चाह भी नहीं थी कि प्रभात उस का हो जाए या उस के साथ अपनापनभरा कोई व्यवहार करे पर आज संध्या की तसवीर देखने के बाद तो रहीसही उम्मीद भी जाती रही. आज बच्चों का रिपोर्ट कार्ड आया था. दोनों ही अपनीअपनी कक्षा में अव्वल आए थे. निशा के खुशी का ठिकाना न था लेकिन अपनी खुशियां बांटे तो किस के साथ. बच्चों ने अपनीअपनी पसंद के खाने की फरमाइश की थी और निशा खाना बनाने में व्यस्त हो गई थी साथ ही साथ यों ही गुनगुनाए भी जा रही थी, ‘‘इन रश्मों को इन कसमों को इन रिश्तेनातों को मैं ना भूलूंगा मैं ना भूलूंगी.’’ तभी प्रभात औफिस से वापस आ गया. प्रभात के कदम आज संध्या के कमरे की तरफ न जा कर रसोई की तरफ मुड़ गए क्योंकि आवाज वहीं से आ रही थी. ‘‘इतनी कशिश, यह तो केवल संध्या में थी और कहीं नहीं,’’ कदम रसोई घर के दरवाजे पर रुक गए. आहट के साथ ही गाना भी बंद हो गया.

पहली बार दोनों ने एकदूसरे को यों आमनेसामने देखा था. नजरें स्थिर हो गई थीं पर जल्द ही सिमट गई थीं. प्रभात का मन ग्लानि और हीनभावना से भर गया. निशा के चेहरे में देखने लायक कुछ भी न था. सांवला चेहरा, सूखे होंठ, अस्तव्यस्त साड़ी. नजरें सिमट कर अपने जूतों पर टिक गईं, कदम पीछे मुड़ गए और सीधे संध्या वाले कमरे में जा कर राहत मिली. उस फ्रेम के सामने खड़ा हो गया. समुद्र का पानी पीने के बाद मटके के ठंडे पानी जैसा एहसास हुआ. ‘‘लेकिन गाना?’’ उस का ध्यान टूटा, ‘‘निशा को इस गाने के बारे में कैसे पता चला,’’ जा कर पूछना चाहता था. ‘‘क्या वह इस कमरे में आई थी?’’ ‘‘पर क्यों?’’ उस की इतनी हिम्मत,’’ अंतर्द्वंद्व चलता रहा.आज पहली बार निशा के लिए कुछ जागा था गुस्सा ही सही. बच्चे रिपोर्ट कार्ड दिखाने आए, ‘‘ पापा… पापा…’’ जीवा ने आवाज लगाई. ‘‘ए चुप. पापा बिजी हैं, हम उन्हें खाते वक्त दिखा देंगे,’’ निशांत ने समझया और दोनों लौट गए. निशा ने खाना बनाने के बाद बच्चों को खिलाया प्रभात को कई बार बुलावा भेजा पर हर बार औफिस के काम का बहाना आया तो निशा भी बच्चों को सुलातेसुलाते कब सो गई पता ही नहीं चला. अगले दिन बच्चों को स्कूल भेज कर प्रभात का लंच बौक्स तैयार कर मेज पर रख दिया.

निशा ने फिल्मों में देखा था पति औफिस जाते वक्त पत्नी को प्यारदुलार करते हैं लेकिन उस ने इन जज्बातों को दफना दिया था. बस इसी बात से खुश थी कि जीवा अब स्वस्थ रहने लगी थी. दिन के करीब 12 बजे थे. प्रिंसपल मैडम का फोन आया, ‘‘हैलो आप निशांत की मम्मी बोल रही हैं?’’ ‘‘जी,’’ निशा ने जवाब दिया. ‘‘दरअसल, आप के हस्बैंड का फोन नहीं लग रहा है. मैं निशांत के स्कूल से उस की प्रिंसिपल बोल रही हूं. आप जल्दी से सिटी हौस्पिटल आ जाइए,’’ निशांत के प्रिंसिपल ने इतना कह कर फोन रख दिया था. ‘‘क्या हुआ निशांत को बोलिए बोलिए न?’’ निशा चिल्लाती रही. किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया न होने पर निशा के चेहरे पर चिंता की गहरी लकीरें खिंच गईं. दरअसल, आज ही प्रभात 4 दिनों के टूर पर दिल्ली गया था और आज ही… घबराई हुई निशा ने अलमारी से कुछ पैसे निकाल पर्स में रखे और निकल पड़ी. जातेजाते पड़ोसिन को जीवा को अपने पास रखने का अनुरोध करना नहीं भूली.

औटोरिकशा में बैठने के बाद पैरों की ओर ध्यान गया. हड़बड़ाहट में चप्पल पहनना भूल गई थी. पैरों को समेट कर साड़ी से ढक लिया. करीब आधे घंटे में औटो वाले ने हौस्पिटल के सामने उतार दिया. भाड़ा दे कर छुट्टे की परवाह किए बगैर भागती हुई हौस्पिटल के अंदर पहुंची. रिसैप्शन से पूछ कर सीधे बच्चों वाले विभाग की ओर तेज कदमों से चलने लगी. मन अनजान आशंकाओं से घिरा हुआ था. कोई अनिष्ट न हो कुदरत को याद करती हुई निशांत के पास पहुंची. ‘‘निशांत कहां है? निशा ने सामने खड़ी एक संभ्रांत महिला से पूछा जो निशांत की टीचर थीं. ‘‘देखिए आप घबराइए मत सब ठीक हो जाएगा,’’ संभ्रांत महिला ने बड़े ही शांत स्वर में कहा. ‘‘मैं ने पूछा निशांत कहां है,’’ निशा ने थरथराए गले से पूछा. ‘‘उसे आईसीयू में ले गए हैं.’’ निशा भागती हुई आई.आईसीयू के सीसे से देखा निशांत लेटा हुआ था.

उस का बाएं हिस्से के चेहरे से ले कर कंधे तक ढका हुआ था उसे देखते ही कलेजा मुंह को आ गया. प्रभात से क्या कहेगी और सब से बड़ी बात ऐसा क्या हुआ कि सुबह हंसताखेलता बच्चा अभी इस हाल में पड़ा है. ‘‘ऐसा क्या हो गया उस के साथ? सुबह तो मैं ने उसे इन्हीं हाथों से तैयार कर के भेजा था,’’ निशा भावुक हो रोने लगी. ‘‘दरअसल, जो बच्चा हर साल अव्वल आता था उस ने निशांत को अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाने के लिए कहा. जब निशांत ने दिखाने से मना किया तो उस ने… लैबौरटरी से ऐसिड ला कर निशांत पर फेंक दिया,’’ संभ्रांत महिला ने एक सांस में घटित घटना बयां कर दी. कुछ घंटों के बाद एक नर्स तेज कदमों से चलती हुई आई और बोली, ‘‘अभी निशांत ख़तरे से बाहर है बस…’’ ‘‘ बस क्या?’’ निशा ने बदहवास हो उसे झकझरा. ‘‘उस के चेहरे और गरदन की चमड़ी हमेशा झलसी ही रहेगी और उसे इस हादसे की याद दिलाती रहेंगी.’’ ‘‘कोई उपाय हो तो बताइए?’’ निशा ने विकल होते हुए कहा. ‘‘हां है कोई अपने शरीर की चमड़ी डोनेट करे तो…’’ नर्स को तभी दूसरे केस का बुलावा आ गया तो वह जल्दी से चली गई.

निशा को आज न केवल मां का कर्तव्य निभाना था बल्कि प्रभात की गैरमौजूदगी में उस के परिवार को सुरक्षित भी रखना था. वह सीधे डाक्टर के कैबिन में चली गई, जहां 2-3 डाक्टर बैठे केस स्टडी कर रहे थे. ‘‘क्या मेरी चमड़ी मेरे बेटे के काम आ सकती है?’’ सभी डाक्टर्स एकदूसरे की ओर देखने लगे. उन में से एक ने कहा, ‘‘बट मैम आप की स्किन खराब हो जाएगी.’’ ‘‘मेरा स्किन,’’ निशा के होंठ फड़फड़ाए. ‘जिसे उस का पति ही नहीं देखना चाहता वह रहे या बिगड़ जाए क्या फर्क पड़ता है,’ निशा ने मन ही मन सोचा. उस ने हाथ जोड़ कर विनती की, ‘‘यह पूरा शरीर निशांत का है जहां से, जिस हिस्से का स्किन चाहिए आप ले लीजिए लेकिन मेरे बच्चे की जिंदगी तबाह होने से बचा लीजिए.’’ ‘‘लेकिन मैडम इस के लिए हमें आप के पति की स्वीकृति चाहिए क्योंकि पत्नी का बिगड़ा हुआ शरीर अकसर पति देखना पसंद नहीं करते फिर उन की निजी जिंदगी…’’ ‘‘उस की चिंता आप न करें बस आप आगे की काररवाई करें जिस पेपर पर साइन करने के लिए कहेंगे मैं कर दूंगी,’’ निशा ने आंसुओं को आंचल से पोंछते हुए कहा.

सर्जरी शुरू की गई और सफल भी रही. बस निशा की जांघ वाला हिस्सा बीभत्स हो गया था. अलबत्ता निशांत के चेहरे पर अलग चमड़ी होने जैसा कोई निशान नहीं था. यह सभी के लिए खुशी की बात थी. प्रभात जब मीटिंग से फारिग हुआ तो 10 मिस्डकौल देख कर घबराया. प्रिंसिपल से आधीअधूरी जानकारी मिली. समय पर फोन न उठा पाने के कारण खुद को कोसता हुआ टूर कैंसल कर वापस आया और सीधा हौस्पिटल पहुंचा. निशांत को ऐसी हालत में देख कर वह कुछ देर के लिए सदमे में चला गया. उसे संध्या का चेहरा याद आ रहा था. ऐसे ही अस्पताल में वह भी उस दिन पड़ी थी और फिर वह सब को छोड़ कर चली गई थी.

आज निशांत को इस हालत में देख कर खुद को संभाल नहीं पा रहा था. वह रोए जा रहा था. नर्स ने डाक्टर द्वारा बुलाए जाने का संदेश दिया तो वह आंसू पोंछता हुआ डाक्टर के पास पहुंचा. नमनजी, यह वक्त रोने का नहीं है आप की पत्नी ने आप के बेटे को नई जिंदगी दे दी है. आज अगर वे समय पर अपना स्किन डोनेट नहीं करतीं तो शायद कुछ भी हो सकता था. डाक्टर ने कहा. यह सुन प्रभात के चेहरे पर कई तरह के भाव आतेआते रहे. ‘‘ सुना है वह…’’ ‘‘ जी आप ने सही सुना है, आज तक मैं उस से नफरत ही करता आया हूं,’’ प्रभात की सिसकी अब तक जोर पकड़ चुकी थी.

मन अब केवल निशा के आगे घुटने टेकने का कर रहा था, जिस ने निशा को ढंग से देखा तक नहीं था आज उस के हृदय में उस के लिए श्रद्धा के भाव उमड़ रहे थे. ‘‘मैं अपनी पत्नी से मिल सकता हूं?’’ ‘‘बिलकुल आप अपनी पत्नी और बच्चे दोनों से मिल सकते हैं,’’ डाक्टर ने कहा. निशा के पास पहुंच प्रभात ने उस के दोनों हाथों को अपने हाथों में ले लिया, ‘‘निशा, मैं निशांत को खोना नहीं चाहता. उस की मां को एक बार खो चुका हूं उस की निशानी के नाम पर मेरे पास सिर्फ उस की यादें हैं और निशांत है. मैं इस के बिना नहीं जी सकता. मैं तुम्हारा एहसान कभी नहीं भूलूंगा. तुम ने जो कुछ भी किया…’’ कहतेकहते प्रभात की आंखें नम हो गईं. निशा ने हक से अपने हाथ प्रभात के होंठों पर रख दिए.

आंसू तो उस की आंखों में भी थे पर वे खुशी के थे. कुछ दिनों के बाद निशांत को अस्पताल से छुट्टी मिल गई. उस का चेहरा पहले जैसा हो चुका था. उस दिन प्रभात पहले घर आ गया था. ड्राइवर से उस ने निशांत और निशा को पीछे से ले कर आने का आदेश दे दिया था. प्रभात ने कुमकुम थाल सजाया, दरवाजे पर चावलों से भरा कलश रखा. निशा ने जब इन तैयारियों को देखा तो उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह मुसकराए या नवेली दुलहन की तरह शरमाए. पर इन सब भावनाओं के बीच वह कमरा कहीं न कहीं खटक रहा था जिस में अभी भी संध्या का बड़ा सा फोटो लगा था.

वह वहां से उसे हटा कर अपनी सासूमां का वादा पूरा करना चाहती थी. वह सभी से नजरें बचा कर यह काम करना चाहती थी. इसीलिए जैसे ही उसे मौका मिला वह उस कमरे की तरफ चल पड़ी. दिल जोरजोर से धड़क रहा था जैसे कुछ चुराने जा रही हो. ‘कहीं प्रभात को बुरा लगा तो? लगता है तो लगे आखिर कब तक उस मृत आत्मा के साथ कोई जीएगा भला,’ मन ने सवालजवाब किया. तब तक उस के हाथ दरवाजे के हैंडल पर पड़ चुके थे. दरवाजा खुला, धड़कन तेज हो गई. आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था आश्चर्य का ठिकाना न रहा. ऐसा भी हो सकता है कभी सोचा न था. संध्या के फोटो की जगह निशा का फोटो लगा था. तब तक प्रभात भी कमरे में आ चुका था. आहट सुन कर मुड़ने ही वाली थी कि प्रभात ने उसे अपनी मजबूत बाहों से थाम लिया.

वह भी छुईमुई सी बन उस की बांहों में सिमट गई. ‘‘हम एक बार जन्म लेते हैं, एक बार मरते हैं और प्यार… मुझे तुम्हारी सूरत से नहीं सीरत से प्यार है निशा और तुम्हें?’’ प्रभात ने निशा की आंखों में आंखें डाल कर पूछा जिस में प्रभात का चेहरा साफ नजर आ रहा था. निशा भला क्या कहती. उस की आंखों ने खुशी के रस को उंड़ेल कर जवाब दे दिया था. सही माने में निशा और प्रभात का मिलन हो रहा था. पूर्व की दिशा में उगने वाले भोर के तारे ने इस बात की पुष्टि कर दी थी.

Family Kahani

Family Story: झांसी की रानी- सुप्रतीक ने अपनी बेटी से क्या कहा

Family Story: ‘‘पापा, आप हमेशा झांसी की रानी की तसवीर के साथ दादी का फोटो क्यों रखते हैं?’’ नवेली ने अपने पापा सुप्रतीक से पूछा था.

‘‘तुम्हारी दादी ने भी झांसी की रानी की तरह अपने हकों के लिए तलवार उठाई थी, इसलिए…’’ सुप्रतीक ने कहा. सुप्रतीक का ध्यान मां के फोटो पर ही रहा. चौड़ा सूना माथा, होंठों पर मुसकराहट और भरी हुई पनियल आंखें. मां की आंखों को उस ने हमेशा ऐसे ही डबडबाई हुई ही देखा था. ताउम्र, जो होंठों की मुसकान से हमेशा बेमेल लगती थी. एक बार सुप्रतीक ने देखा था मां की चमकती हुई काजल भरी आंखों को, तब वह 10 साल का रहा होगा. उस दिन वह जब स्कूल से लौटा, तो देखा कि मां अपनी नर्स वाली ड्रेस की जगह चमकती हुई लाल साड़ी पहने हुए थीं और उन के माथे पर थी लाल गोल बिंदी. मां को निहारने में उस ने ध्यान ही नहीं दिया कि कोई आया हुआ है.

‘सुप्रतीक देखो ये तुम्हारे पापा,’ मां ने कहा था.

‘पापा, मेरे पापा,’ कह कर सुप्रतीक ने उन की ओर देखा था. इतने स्मार्ट, सूटबूट पहने हुए उस के पापा. एक पल को उसे अपने सारे दोस्तों के पापा याद आ गए, जिन्हें देख वह कितना तरसा करता था.

‘मेरे पापा तो उन सब से कहीं ज्यादा स्मार्ट दिख रहे हैं…’ कुछ और सोच पाता कि पापा ने उसे बांहों में भींच लिया.

‘ओह, पापा की खुशबू ऐसी होती है…’

सुप्रतीक ने दीवार पर टंगे मांपापा के फोटो की तरफ देखा, जैसे बिना बिंदी मां का चेहरा कुछ और ही दिखता है, वैसे ही शायद मूंछें उगा कर पापा का चेहरा भी बदल गया है. मां जहां फोटो की तुलना में दुबली लगती थीं, वहीं पापा सेहतमंद दिख रहे थे. सुप्रतीक देख रहा था मां की चंचलता, चपलता और वह खिलखिलाहट. हमेशा शांत सी रहने वाली मां का यह रूप देख कर वह खुश हो गया था. कुछ पल को पापा की मौजूदगी भूल कर वह मां को देखने लगा. मां खाना लगाने लगीं. उन्होंने दरी बिछा कर 3 प्लेटें लगाईं.

‘सुधा, बेटे का क्या नाम रखा है?’ पापा ने पूछा था.‘सुप्रतीक,’ मां ने मुसकराते हुए कहा.

‘यानी अपने नाम ‘सु’ से मिला कर रखा है. मेरे नाम से कुछ नहीं जोड़ा?’ पापा हंसते हुए कह रहे थे.

‘हुं, सुधा और घनश्याम को मिला कर भला क्या नाम बनता?’ सुप्रतीक सोचने लगा.

‘आप यहां होते, तो हम मिल कर नाम सोचते घनश्याम,’ मां ने खाना लगाते हुए कहा था.

‘घनश्याम हा…हा…हा… कितने दिनों के बाद यह नाम सुना. वहां सब मुझे सैम के नाम से जानते हैं. अरे, तुम ने अरवी के पत्ते की सब्जी बनाई है. सालों हो गए हैं बिना खाए,’ पापा ने कहा था. सुप्रतीक ने देखा कि मां के होंठ ‘सैमसैम’ बुदबुदा रहे थे, मानो वे इस नाम की रिहर्सल कर रही हों. सुप्रतीक ने अब तक पापा को फोटो में ही देखा था. मां दिखाती थीं. 2-4 पुराने फोटो. वे बतातीं कि उस के पापा विदेश में रहते हैं. लेकिन कभी पापा की चिट्ठी नहीं आई और न ही वे खुद. फोनतो तब होते ही नहीं थे. मां को उस ने हमेशा बहुत मेहनत करते देखा था. एक अस्पताल में वे नर्स थीं, घरबाहर के सभी काम वे ही करती थीं. जिस दिन मां की रात की ड्यूटी नहीं होती थी, वह देखता कि मां देर रात तक खिड़की के पास खड़ी आसमान को देखती रहती थीं. सुप्रतीक को लगता कि मां शायद रोती भी रहती थीं. उस दिन खाना खाने के बाद देर तक वे तीनों बातें करते रहे थे. सुप्रतीक ने उस पल में मानो जमाने की खुशियां हासिल कर ली थीं. सुबह उठा, तो देखा कि पापा नहीं थे.

‘मां, पापा किधर हैं?’ सुप्रतीक ने हैरानी से पूछा था.

‘तुम्हारे पापा रात में ही होटल चले गए, जहां वे ठहरे हैं.’ मां का चेहरा उतरा हुआ लग रहा था. माथे की लकीरें गहरी दिख रही थीं. आंखों में काजल की जगह फिर पानी था. थोड़ी देर में फिर पापा आ गए, वैसे ही खुशबू से सराबोर और फ्रैश. आते ही उन्होंने सुप्रतीक को सीने से लगा लिया. आज उस ने भी कस कर भींच लिया था उन्हें, कहीं फिर न चले जाएं.

‘पापा, अब आप भी हमारे साथ रहिएगा,’ सुप्रतीक ने कहा था.

‘मैं तुम्हें अपने साथ अमेरिका ले जाऊंगा. हवाईजहाज से. वहीं अच्छे स्कूल में पढ़ाऊंगा. बड़ा आदमी बनाऊंगा…’ पापा बोल रहे थे. सुप्रतीक उस सुख के बारे में सोचसोच कर खुश हुआ जा रहा था.

‘पर, तुम्हारी मम्मी नहीं जा पाएंगी, वे यहीं रहेंगी. तुम्हारी एक मां वहां पहले से हैं, नैंसी… वे होटल में तुम्हारा इंतजार कर रही हैं,’ पापा को ऐसा बोलते सुन सुप्रतीक जल्दी से हट कर सुधा से सट कर खड़ा हो गया था.

‘मैं कल से ही तुम्हारे आने की वजह समझने की कोशिश कर रही थी. एक पल को मैं सच भी समझने लगी थी कि तुम सुबह के भूले शाम को घर लौटे हो. जब तुम्हारी पत्नी है, तो बच्चे भी होंगे. फिर क्यों मेरे बच्चे को ले जाने की बात कर रहे हो?’ सुधा अब चिल्लाने लगी थी, ‘एक दिन अचानक तुम मुझे छोड़ कर चले गए थे, तब मैं पेट से थी. तुम्हें मालूम था न?

‘एक सुबह अचानक तुम ने मुझ से कहा था कि तुम शाम को अमेरिका जा रहे हो, तुम्हें पढ़ाई करनी है. शादी हुए बमुश्किल कुछ महीने हुए थे. तुम्हारी दहेज की मांग जुटाने में मेरे पिताजी रास्ते पर आ गए थे. लेकिन अमेरिका जाने के बाद तुम ने कभी मुझे चिट्ठी नहीं लिखी. ‘मैं कितना भटकी, कहांकहां नहीं गई कि तुम्हारे बारे में जान सकूं. तुम्हारे परिवार वालों ने मुझे ही गुनाहगार ठहराया. अब क्यों लौटे हो?’ मां अब हांफ रही थीं. सुप्रतीक ने देखा कि पापा घुटनों के बल बैठ कर सिर झुकाए बोलने लगे थे, ‘सुधा, मैं तुम्हारा गुनाहगार हो सकता हूं. सच बात यह है कि मुझे अमेरिका जाने के लिए बहुत सारे रुपयों की जरूरत थी और इसी की खातिर मैं ने शादी की. तुम मुझे जरा भी पसंद नहीं थीं. उस शादी को मैं ने कभी दिल से स्वीकार ही नहीं किया. ‘बाद में मैं ने नैंसी से शादी की और अब तो मैं वहीं का नागरिक हो गया हूं. लेकिन लाख कोशिशों के बावजूद हम मांबाप नहीं बन सके. यह तो मेरा ही खून है. मुझे मेरा बेटा दे दो सुधा…’

अचानक काफी बेचैन लगने लगे थे पापा. ‘देख रहा हूं कि तुम इसे क्या सुख दे रही हो… सीधेसीधे मेरा बेटा मेरे हवाले करो, वरना मुझे उंगली टेढ़ी करनी भी आती है.’ सुप्रतीक देख रहा था उन के बदलते तेवर और गुस्से को. वह सुधा से और चिपट गया. तभी उस के पापा पूरी ताकत से उसे सुधा से अलग कर खींचने लगे. उस की पकड़ ढीली पड़ गई और उस के पापा उसे खींच कर घर से बाहर ले जाने लगे कि अचानक मां रसोई वाली बड़ी सी छुरी हाथ में लिए दौड़ती हुई आईं और पागलों की तरह पापा पर वार करने लगीं. पापा के हाथ से खून की धार निकलने लगी, पर उन्होंने अभी भी सुप्रतीक का हाथ नहीं छोड़ा था. चीखपुकार सुन कर अड़ोसपड़ोस से लोग जुटने लगे थे. किसी ने इस आदमी को देखा नहीं था. लोग गोलबंद होने लगे, पापा की पकड़ जैसे ही ढीली हुई, सुप्रतीक दौड़ कर सुधा से लिपट गया. लाल साड़ी में मां वाकई झांसी की रानी ही लग रही थीं. लाललाल आंखें, गुस्से से फुफकारती सी, बिखरे बाल और मुट्ठी में चाकू. सुप्रतीक ने देखा कि सड़क के उस पार रुकी टैक्सी में एक गोरी सी औरत उस के पापा को सहारा देते हुए बिठा रही थी.

‘‘नवेली, तुम्हारी दादी बहुत बहादुर और हिम्मत वाली थीं,’’ सुप्रतीक ने अपनी बेटी से कहा. सुप्रतीक की निगाहें फिर से मां के फोटो पर टिक गई थीं.

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Short Story in Hindi: रावण अब भी जिंदा है

Short Story in Hindi: मीना सड़क पर आ कर आटोरिकशे का इंतजार करने लगी, मगर आटोरिकशा नहीं आया. वह अकेली ही बूआ के यहां गीतसंगीत के प्रोग्राम में गाने आई थी. तब बूआ ने भी कहा था, ‘अकेली मत जा. किसी को साथ ले जा.’

मीना ने कहा था, ‘क्यों तकलीफ दूं किसी को? मैं खुद ही आटोरिकशे में बैठ कर चली जाऊंगी?’ मीना को तो अकेले सफर करने का जुनून था. यहां आने से पहले उस ने राहुल से भी यही कहा था, ‘मैं बूआ के यहां गीत गाने जा रही हूं.’

‘चलो, मैं छोड़ आता हूं.’

‘नहीं, मैं चली जाऊंगी,’ मीना ने अनमने मन से कह कर टाल दिया था.

तब राहुल बोला था, ‘जमाना बड़ा खराब है. अकेली औरत का बाहर जाना खतरे से खाली नहीं है.’

‘आप तो बेवजह की चिंता पाल रहे हैं. मैं कोई छोटी बच्ची नहीं हूं, जो कोई रावण मुझे उठा कर ले जाएगा.’

‘यह तुम नहीं तुम्हारा अहम बोल रहा है,’ समझाते हुए एक बार फिर राहुल बोला था, ‘जब से दिल्ली में चलती बस में निर्भया के साथ…’

‘इस दुनिया में कितनी औरतें ऐसी हैं, जो अकेले ही नौकरी कर रही हैं…’ बीच में ही बात काटते हुए मीना बोली थी, ‘मैं तो बस गीत गा कर वापस आ जाऊंगी.’

यहां से उस की बूआ का घर 3 किलोमीटर दूर है. वह आटोरिकशे में बैठ कर बूआ के यहां पहुंच गई थी. वहां जा कर राहुल को फोन कर दिया था कि वह बूआ के यहां पहुंच गई है. फिर वह बूआ के परिवार में ही खो गई. मगर अब रात को सड़क पर आ कर आटोरिकशे का इंतजार करना उसे महंगा पड़ने लगा था.

जैसेजैसे रात गहराती जा रही थी, सन्नाटा पसरता जा रहा था. इक्कादुक्का आदमी उसे अजीब सी निगाह डाल कर गुजर रहे थे. जितने भी आटोरिकशे वाले गुजरे, वे सब भरे हुए थे. जब कोई औरत किसी स्कूटर के पीछे मर्द के सहारे बैठी दिखती थी, तब मीना भी यादों में खो जाती थी. वह इसी तरह राहुल के स्कूटर पर कई बार पीछे बैठ चुकी थी.

आटोरिकशा तो अभी भी नहीं आया था. रात का सन्नाटा उसे डरा रहा था. क्या राहुल को यहां बुला ले? अगर वह बुला लेगी, तब उस की हार होगी. वह साबित करना चाहती थी कि औरत अकेली भी घूम सकती है, इसलिए उस ने राहुल को फोन नहीं किया.

इतने में एक सवारी टैंपो वहां आया. वह खचाखच भरा हुआ था. टैंपो वाला उसे बैठने का इशारा कर रहा था. मीना ने कहा, ‘‘कहां बैठूंगी भैया?’’

वह मुसकराता हुआ चला गया. तब वह दूसरे टैंपों का इंतजार करने लगी, मगर काफी देर तक टैंपो नहीं आया. तभी एक शख्स उस के पास आ कर बोला, ‘‘चलोगी मेरे साथ?’’

‘‘कहां?’’ मीना ने पूछा.

‘‘उस खंडहर के पास. कितने पैसे लोगी?’’ उस आदमी ने जब यह कहा, तब उसे समझते देर न लगी. वह आदमी उसे धंधे वाली समझ रहा था. वह भी एक धंधे वाली औरत बन कर बोली, ‘‘कितना पैसा दोगे?’’ वह आदमी कुछ न बोला. सोचने लगा. तब मीना फिर बोली, ‘‘जेब में कितना माल है?’’

‘‘बस, 50 रुपए.’’

‘‘जेब में पैसा नहीं है और आ गया… सुन, मैं वह औरत नहीं हूं, जो तू समझ रहा है,’’ मीना ने कहा.

‘‘तब यहां क्यों खड़ी है?’’

‘‘भागता है कि नहीं… नहीं तो चप्पल उतार कर सारा नशा उतार दूंगी तेरा,’’ मीना की इस बात को सुन कर वह आदमी चलता बना.

अब मीना ने ठान लिया था कि वह खाली आटोरिकशे में नहीं बैठेगी, क्योंकि उस ड्राइवर में अकेली औरत को देख कर न जाने कब रावण जिंदा हो जाए?

‘‘कहां चलना है मैडम?’’ एक आटोरिकशा वाला उस के पास आ कर बोला. जब मीना ने देखा कि उस की आंखों में वासना है, तब वह समझ गई कि इस की नीयत साफ नहीं है.

वह बोली, ‘‘कहीं नहीं.’’

‘‘मैडम, अब कोई टैंपो मिलने वाला नहीं है…’’ वह लार टपकाते हुए बोला, ‘‘आप को कहां चलना है? मैं छोड़ आता हूं.’’

‘‘मुझे कहीं नहीं जाना है,’’ वह उसे झिड़कते हुए बोली.

‘‘जैसी आप की मरजी,’’ इतना कह कर वह आगे बढ़ गया.

मीना ने राहत की सांस ली. शायद आटोरिकशे वाला सही कह रहा था कि अब कोई टैंपो नहीं मिलने वाला है. अगर वह मिलेगा, तो भरा हुआ मिलेगा. मगर अब कितना भी भरा हुआ टैंपो आए, वह उस में लद जाएगी. वह लोगों की निगाह में बाजारू औरत नहीं बनना चाहती थी.

मीना को फिल्मों के वे सीन याद आए, जब हीरोइन को अकेले पा कर गुंडे उठा कर ले जाते हैं, मगर न जाने कहां से हीरो आ जाता है और हीरोइन को बचा लेता है. मगर यहां किसी ने उस का अपहरण कर लिया, तब उसे बचाने के लिए कोई हीरो नहीं आएगा.

मीना आएदिन अखबारों में पढ़ती रहती थी कि किसी औरत के साथ यह हुआ, वह हुआ, वह यहां ज्यादा देर खड़ी रहेगी, तब उसे लोग गलत समझेंगे.

तभी मीना ने देखा कि 3-4 नौजवान हंसते हुए उस की ओर आ रहे थे. उन्हें देख वह सिहर गई. अब वह क्या करेगी? खतरा अपने ऊपर मंडराता देख कर वह कांप उठी. वे लोग पास आ कर उस के आसपास खड़े हो गए. उन में से एक बोला, ‘यहां क्यों खड़ी है?’’

दूसरे आदमी ने जवाब दिया, ‘‘उस्ताद, ग्राहक ढूंढ़ रही है.’’

तीसरा शख्स बोला, ‘‘मिला कोई ग्राहक?’’

पहले वाला बोला, ‘‘अरे, कोई ग्राहक नहीं मिला, तो हमारे साथ चल.’’

मीना ने उस अकेले शख्स से तो मजाक कर के भगा दिया था, मगर यहां 3-3 जिंदा रावण उस के सामने खड़े थे. उन्हें कैसे भगाए?

वे तीनों ठहाके लगा कर हंस रहे थे, मगर तभी पुलिस की गाड़ी सायरन बजाती हुई आती दिखी.

एक बोला, ‘‘चलो उस्ताद, पुलिस आ रही है.’’

वे तीनों वहां से भाग गए. मगर मीना इन पुलिस वालों से कैसे बचेगी? पुलिस की जीप उस के पास आ कर खड़ी हो गई. उन में से एक पुलिस वाला उतरा और कड़क आवाज में बोला, ‘‘इतनी रात को सड़क पर क्यों खड़ी है?’’

‘‘टैंपो का इंतजार कर रही हूं,’’ मीना सहमते हुए बोली.

‘‘अब रात को 11 बजे टैंपो नहीं मिलेगा. कहां जाना है?’’

‘‘सर, सांवरिया कालोनी.’’

‘‘झूठ तो नहीं बोल रही है?’’

‘‘नहीं सर, मैं झूठ नहीं बोलती,’’ मीना ने एक बार फिर सफाई दी.

‘‘मैं अच्छी तरह जानता हूं तुम जैसी धंधा करने वाली औरतों को…’’ पुलिस वाला जरा अकड़ कर बोला, ‘‘अब जब पकड़ी गई हो, तो सती सावित्री बन रही हो. बता, वे तीनों लोग कौन थे?’’

‘‘मुझे नहीं मालूम सर.’’

‘‘झूठ बोलते शर्म नहीं आती तुझे,’’ पुलिस वाला फिर गरजा.

‘‘मैं सच कह रही हूं सर. वह तीनों कौन थे, मुझे कुछ नहीं मालूम. मुझे अकेली देख कर वे तीनों आए थे. मैं वैसी औरत नहीं हूं, जो आप समझ रहे हैं,’’ मीना ने अपनी सफाई दी.

‘‘चल थाने, वहां सब असलियत का पता चल जाएगा. चल बैठ जीप में… सुना कि नहीं?’’

‘‘सर, मुझे मत ले चलो. मैं घरेलू औरत हूं.’’

‘‘अरे, तू घरगृहस्थी वाली औरत है, तो रात के 11 बजे यहां क्या कर रही है? ठीक है, बता, तेरा पति कहां है?’’

‘‘सर, वे तो घर में हैं.’’

‘‘मतलब, वही हुआ न… तू धंधा करने के लिए रात को अकेली निकली है और अपने पति की आंखों में धूल झोंक रही है. तेरा झूठ यहीं पकड़ा गया…

‘‘अच्छा, अब बता कि तू कहां से आ रही है?’’

‘‘बूआ के यहां गीतसंगीत के प्रोग्राम में आई थी सर. वहीं देर हो गई.’’

‘‘फिर झूठ बोल रही है. बैठ जीप में,’’ पुलिस वाला अब तक उस पर शिकंजा कस चुका था.

‘‘ठीक है सर, अगर आप को यकीन नहीं हो रहा है, तो मैं उन्हें फोन कर के बुलाती हूं, ताकि आप को असलियत का पता चल जाए,’’ कह कर वह पर्स में से मोबाइल फोन निकालने लगी.

तभी पुलिस वाला दहाड़ा, ‘‘इस की कोई जरूरत नहीं है. मुझे मालूम है कि तू अपने पति को बुला कर उस के सामने अपने को सतीसावित्री साबित करना चाहेगी. सीधेसीधे क्यों नहीं कह देती है कि तू धंधा करती है.’’

मीना की आंखों के आगे अंधेरा छाने लगा था कि तभी अचानक राहुल उसे गाड़ी से आता दिखाई दिया. उस ने आवाज लगाई, ‘‘राहुल… राहुल.’’

राहुल पास आ कर बोला, ‘‘अरे मीना, तुम यहां…’’

अचानक उस की नजर जब पुलिस पर पड़ी, तब वह हैरानी से आंखें फाड़ते हुए देखता रहा. पुलिस वाला उसे देख कर गरजा, ‘‘तुम कौन हो?’’

‘‘मैं इस का पति हूं.’’

‘‘तुझे झूठ बोलते हुए शर्म नहीं आती,’’ पुलिस वाला अपनी वरदी का रोब दिखाते हुए बोला, ‘‘तुम दोनों मुझे बेवकूफ बना रहे हो. अपनी पत्नी से धंधा कराते हुए तुझे शर्म नहीं आती. चल थाने में जब डंडे पड़ेंगे, तब भूल जाएगा अपनी पत्नी से धंधा कराना.’’

यह सुन कर राहुल हाथ जोड़ता हुआ बोला, ‘‘आप यकीन रखिए सर, यह मेरी पत्नी है, बूआ के यहां गीत गाने अकेली गई थी. लौटने में जब देर हो गई, तब बूआ ने बताया कि यह तो घंटेभर पहले ही निकल चुकी है.

‘‘जब यह घर न पहुंची, तब मैं इसे ढूंढ़ने के लिए निकला. अगर आप को यकीन न हो, तो मैं बूआ को यहीं बुला लेता हूं.’’

‘‘ठीक है, ठीक है. तुम झूठ तो नहीं बोल रहे हो,’’ पुलिस वाले ने जरा नरम पड़ते हुए कहा.

‘‘अकेली औरत को देर रात को बाहर नहीं भेजना चाहिए,’’ पुलिस वाले को जैसे अब यकीन हो गया था, इसलिए अपने तेवर ठंडे करते हुए वह बोला, ‘‘यह तो मैं समय पर आ गया, वरना वे तीनों गुंडे आप की पत्नी की न जाने क्या हालत करते. फिर आप लोग पुलिस वालों को बदनाम करते.’’

‘‘गलती हमारी है. आगे से मैं ध्यान रखूंगा,’’ राहुल ने हाथ जोड़ कर माफी मांगते हुए कहा.

पुलिस की गाड़ी वहां से चली गई. मीना नीचे गरदन कर के खड़ी रही. राहुल बोला, ‘‘देख लिया अकेले आने का नतीजा.’’

‘‘राहुल, मुझे शर्मिंदा मत करो. रावण तो एक था, मगर इस 2 घंटे के समय में मुझे लगा कि आज भी कई रावण जिंदा हैं.

‘‘अगर आप नहीं आते, तो वह पुलिस वाला मुझे थाने में बैठा देता,’’ कह कर मीना ने मन को हलका कर लिया.

‘‘तो बैठो गाड़ी में…’’ गुस्से से राहुल ने कहा, ‘‘बड़ी लक्ष्मीबाई बनने चली थी.’’ मीना नजरें झुकाए चुपचाप गाड़ी में जा कर बैठ गई.

Short Story in Hindi

Crime Story: दरिंदे- बलात्कार के आरोप में क्यों नहीं मिली राजेश को सजा

crime story: वह अपना सिर घुटनों में छिपा कर बैठी थी लेकिन रहरह कर एक जोर का कहकहा लगता और सारी मेहनत बेकार हो जाती. पास बैठा सोनाली का पति सुरेंद्र भरी आवाज में उसे दिलासा देने में जुटा था, ‘‘ऐसे हिम्मत मत हारो… ठंडे दिमाग से सोचेंगे कि आगे क्या करना है.’’ सुरेंद्र के बहते आंसू सोनाली की साड़ी और चादर पर आसरा पा रहे थे. बच्चों को दूसरे कमरे में टैलीविजन देखने के लिए कह दिया गया था. 6 साल का विकी तो अपनी धुन में मगन था लेकिन 10 साल का गुड्डू बहुतकुछ समझने की कोशिश कर रहा था. विकी बीचबीच में उसे टोक देता मगर वह किसी समझदार की तरह उसे कोई नया चैनल दिखा कर बहलाने लगता था.

2 साल पहले तक सोनाली की जिंदगी में सबकुछ अच्छा चल रहा था. पति की साधारण सरकारी नौकरी थी, पर उन के छोटेछोटे सपनों को पूरा करने में कभी कोई अड़चन नहीं आई थी. पुराना पुश्तैनी घर भी प्यार की गुनगुनाहट से महलों जैसा लगता था. बूढ़े सासससुर बहुत अच्छे थे. उन्होंने सोनाली को मांबाप की कमी कभी महसूस नहीं होने दी थी. एक दिन सुरेंद्र औफिस से अचानक घबराया हुआ लौटा और कहने लगा था, ‘कोई नया मंत्री आया है और उस ने तबादलों की झड़ी लगा दी है. मुझे भी दूसरे जिले में भेज दिया गया है.’ ‘क्या…’ सोनाली का दिल धक से रह गया था.

2 घंटे तक अपने परिवार से दूर रहने से घबराने वाला सुरेंद्र अब 2 हफ्ते में एक बार घर आ पाता था. बच्चे भी बहुत उदास हुए, लेकिन कुछ किया नहीं जा सकता. मनचाही जगह पर पोस्टिंग मिल तो जाती, मगर उस की कीमत उन की पहुंच से बाहर थी. हार कर सोनाली ने खुद को किसी तरह समझा लिया था. वीडियो काल, चैटिंग के सहारे उन का मेलजोल बना रहता था. जब भी सुरेंद्र घर आता था, सोनाली को रात छोटी लगने लगती थी. सुरेंद्र की बांहों में भिंच कर वह प्यार का इतना रस निचोड़ लेने की कोशिश करती थी कि उन का दोबारा मिलन होने तक उसे बचाए रख सके. उस के दिल की इस तड़प को समझ कर निंदिया रानी तो उन्हें रोकटोक करने आती नहीं थी.

बिस्तर से ले कर जमीन तक बिखरे दोनों के कपड़े भी सुबह होने के बाद ही उन को आवाज देते थे. जिंदगी की गाड़ी चलती रही, लेकिन अपनी दुनिया में मगन रहने वाली सोनाली एक बड़े खतरे से अनजान थी. उस खतरे का नाम राजेश सिंह था जो ठीक उन के पड़ोस में रहता था. शरीर से बेहद लंबेतगड़े राजेश को न अपनी 55 पार कर चुकी उम्र का कोई लिहाज था और न ही गांव के रिश्ते से कहे जाने वाले ‘चाचा’ शब्द का. उस की गंदी नजरें खूबसूरत बदन की मालकिन सोनाली पर गड़ चुकी थीं.

दबंग राजेश सिंह हत्या, देह धंधा जैसे अनेक मामलों में फंस कर कई बार जेल जा चुका था लेकिन हमेशा किसी न किसी से पैरवी करा कर बाहर आ जाता था. सुरेंद्र का साधारण समुदाय से होना भी राजेश सिंह की हिम्मत बढ़ाता था. राजेश सिंह का कोई तय काम नहीं था. बेटों की मेहनत पर खेतों से आने वाला अनाज खा कर पड़े रहना और चुनाव के समय अपनी जाति के नेताओं के पक्ष में इधर से उधर दलाली करना उस का पेशा था. हालांकि बेटे भी कोई दूध के धुले नहीं थे. बाकी सारा समय अपने दरवाजे पर किसीकिसी के साथ बैठ कर यहांवहां की गप हांकना राजेश सिंह की आदत थी. सोनाली बाहर कम ही निकलती थी, लेकिन जब भी जाती और राजेश सिंह को पता चल जाता तो घर से निकलने से ले कर वापस लौटने तक वह उस को ही ताकता रहता.

उस के उभारों और खुले हिस्सों को तो वह ऐसे देखता जैसे अभी खा जाएगा. एक दिन सोनाली जब आटोरिकशा पर चढ़ रही थी तो उस की साड़ी के उठे भाग के नीचे दिख रही पिंडलियों को घूरने की धुन में राजेश सिंह अपने दरवाजे पर ठोकर खा कर गिरतेगिरते बचा. उस के साथ बैठे लोग जोर से हंस पड़े. सोनाली ने घूम कर उन की हंसी देखी भी, पर उन की भावना नहीं समझ पाई. आखिर वह दिन भी आया जिस ने सोनाली का सबकुछ छीन लिया. उस के सासससुर किसी संबंधी के यहां गए हुए थे और छोटा बेटा विकी नानी के घर था. बड़ा बेटा गुड्डू स्कूल में था.

बाहर हो रही तेज बारिश की वजह से मोबाइल नैटवर्क भी खराब चल रहा था जिस के चलते सोनाली और सुरेंद्र की ठीक से बात नहीं हो पा रही थी. ऊब कर उस ने मोबाइल फोन बिस्तर पर रखा और नहाने चली गई. सोनाली ने दोपहर के भोजन के लिए दालचावल चूल्हे पर पहले ही चढ़ा दिए थे और नहाने के बीच में कुकर की सीटियां भी गिन रही थी. हमेशा की तरह उस का नहाना पूरा होतेहोते कुकर ने अपना काम कर लिया. सोनाली ने जल्दीजल्दी अपने बालों और बदन पर तौलिए लपेटे और बैडरूम में भागी आई. बालों को झटपट पोंछ कर उस ने बिस्तर पर रखे नए सूखे कपड़े पहनने के लिए जैसे ही अपने शरीर पर बंधा तौलिया हटाया कि अचानक 2 मजबूत हाथों ने उसे पीछे से दबोच लिया.

अचानक हुए इस हमले से बौखलाई सोनाली ने पीछे मुड़ कर देखा तो हमलावर राजेश सिंह था जो छत के रास्ते उस के घर में घुस आया था और कमरे में पलंग के नीचे छिप कर उस का ही इंतजार कर रहा था. उस के मुंह से शराब की तेज गंध भी आ रही थी. सोनाली चीखती, इस से पहले ही किसी दूसरे आदमी ने उस का मुंह भी दबा दिया. वह जितना पहचान पाई उस के मुताबिक वह राजेश सिंह का खास साथी भूरा था और उम्र में राजेश सिंह के ही बराबर था.

सोनाली के कुछ सोचने से पहले ही वे दोनों उसे पलंग पर लिटा कर वहां रखी उस की ही साड़ी के टुकड़े कर उसे बांध चुके थे. सोनाली के मुंह पर भूरा ने अपना गमछा लपेट दिया था. इस के बाद राजेश सिंह ने पहले तो कुछ देर तक अपनी फटीफटी आंखों से सोनाली के जिस्म को ऊपर से नीचे तक देखा, फिर उस के ऊपर झुकता चला गया.

काफी देर बाद हांफता हुआ राजेश सिंह सोनाली के ऊपर से उठा. भयंकर दर्द से जूझती, पसीने से तरबतर सोनाली सांयसांय चल रहे सीलिंग फैन को नम आंखों से देख रही थी. टैलीविजन पर रखा सोनाली, सुरेंद्र और बच्चों का ग्रुप फोटो गिर कर टूट चुका था. रसोईघर में चूल्हे पर चढ़े दालचावल सोनाली के सपनों की तरह जल कर धुआं दे रहे थे. इस के बाद भूरा बेशर्मी से हंसता हुआ अपनी हवस मिटाने के लिए बढ़ा. राजेश सिंह बिस्तर पर पड़े सोनाली के पेटीकोट से अपना पसीना पोंछ रहा था. भूरा ने अपने हाथ सोनाली के कूल्हों पर रखे ही थे कि तभी दरवाजे पर किसी की दस्तक हुई. राजेश सिंह ने दरवाजे की झिर्री से झांका तो गुड्डू की स्कूल वैन का ड्राइवर उसे साथ ले कर खड़ा था. राजेश सिंह ने जल्दी से भूरा को हटने का इशारा किया.

वह झल्लाया चेहरा लिए उठा और अपने कपड़े ठीक करने लगा. ‘तुम ने बहुत ज्यादा समय ले ही लिया इस के साथ, नहीं तो हम को भी मौका मिल जाता न,’ भूरा भुनभुनाया. लेकिन राजेश सिंह ने उस की बात पर ध्यान नहीं दिया और जैसेतैसे अपने कपड़े पहन कर जिधर से आया था, उधर से ही भाग गया. जब दरवाजा नहीं खुला तो गुड्डू के कहने पर ड्राइवर ने ऊपर से हाथ घुसा कर कुंडी खोली. घुसते ही अंदर के कमरे का सब नजारा दिखता था. ड्राइवर के तो होश उड़ गए. उस ने शोर मचा दिया. सुरेंद्र आननफानन आया. सोनाली के बयान पर राजेश सिंह और भूरा पर केस दर्ज हुए.

दोनों की गिरफ्तारी भी हुई लेकिन राजेश सिंह ने अपनी पहचान के नेता से बयान दिलवा लिया कि घटना वाले दिन वह और भूरा उस के साथ मीटिंग में थे. मैडिकल जांच पर भी सवाल खड़े कर दिए गए. कुछ समाचार चैनलों और स्थानीय महिला संगठनों ने थोड़े दिनों तक अपनीअपनी पब्लिसिटी के लिए प्रदर्शन जरूर किए, बाद में अचानक शांत पड़ते गए. सालभर होतेहोते राजेश सिंह और भूरा दोनों बाइज्जत बरी हो कर निकल आए. ऊपरी अदालत में जाने लायक माली हालत सुरेंद्र की थी नहीं.

आज राजेश सिंह के घर पर हो रही पार्टी सुरेंद्र और सोनाली के घावों पर रातभर नमक छिड़कती रही. इस के बाद राजेश सिंह और भी छुट्टा सांड़ हो गया. छत पर जब भी सोनाली से नजरें मिलतीं, वह गंदे इशारे कर देता. इस सदमे से सोनाली के सासससुर भी बीमार रहने लगे थे. राजेश सिंह के छूट जाने से सोनाली के मन में भरा डर अब और बढ़ने लगा था.

रातों को अपने निजी अंगों पर सुरेंद्र का हाथ पा कर भी वह बुरी तरह से चौंक कर जाग उठती थी. कई बार सोनाली के मन में खुदकुशी का विचार आया, लेकिन अपने पति और बच्चों का चेहरा उसे यह गलत कदम उठाने नहीं देता था. दिन बीतते गए. गुड्डू का जन्मदिन आ गया. केवल उस की खुशी के लिए सोनाली पूरे परिवार के साथ होटल चलने को राजी हो गई. खाना खाने के बाद वे लोग काउंटर पर बिल भर रहे थे कि तभी सामने राजेश सिंह दिखाई दिया. सफेद कुरतापाजामा पहने हुए वह एक पान की दुकान की ओट में किसी से मोबाइल फोन पर बात कर रहा था. राजेश सिंह पर नजर पड़ते ही सोनाली के मन में उसी दिन का उस का हवस से भरा चेहरा घूमने लगा.

उस के द्वारा फोन पर कहे जा रहे शब्द उसे वही आवाज लग रहे थे जो उस की इज्जत लूटते समय वह अपने मुंह से निकाल रहा था. सोनाली का दिमाग तेजी से चलने लगा. उबलते गुस्से और डर को काबू में रख वह आज अचानक कोई फैसला ले चुकी थी. उस ने सुरेंद्र के कान में कुछ कहा. सुरेंद्र ने बच्चों से खाने की मेज पर ही बैठ कर इंतजार करने को बोला और होटल के दरवाजे के पास आ कर खड़ा हो गया. सोनाली ने आसपास देखा और राजेश सिंह के ठीक पीछे आ गई.

वह अपनी धुन में था इसलिए उसे कुछ पता नहीं चला. सोनाली ने अपने पेटीकोट की डोरी पहले ही थोड़ी ढीली कर ली थी. उस ने राजेश सिंह का दूसरा हाथ पकड़ा और अपने पेटीकोट में डाल लिया. राजेश सिंह ने चौंक कर सोनाली की तरफ देखा. वह कुछ समझ पाता, इस से पहले ही सोनाली उस का हाथ पकड़ेपकड़े रोते हुए चिल्लाने लगी,

‘‘अरे, यह क्या बदतमीजी है? तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरे साथ ऐसी घटिया हरकत करने की?’’ सोनाली के चिल्लाते ही सुरेंद्र होटल से भागाभागा वहां आया और उस ने राजेश सिंह पर मुक्कों की बरसात कर दी. वह मारतेमारते जोरजोर से बोल रहा था, ‘‘राह चलती औरत के पेटीकोट में हाथ डालेगा तू?’’ जिन लोगों ने राजेश सिंह का हाथ सोनाली के पेटीकोट में घुसा देख लिया था, वे भी आगबबूला हुए उधर दौड़े और उस को पीटने लगे. भीड़ जुटती देख सुरेंद्र ने अपने जूते के कई जोरदार वार राजेश सिंह के पेट और गुप्तांग पर कर दिए और मौका पा कर भीड़ से निकल गया.

जब तक कुछ लोग बीचबचाव करते, तब तक खून से लथपथ राजेश सिंह मर चुका था. जो सजा उसे बलात्कार के आरोप में मिलनी चाहिए थी, वह उसे छेड़खानी के आरोप ने दिलवा दी थी.

crime story

Shraddha Das: इस सीरिज में IMDb रैंक में शाहरुख सलमान को भी पीछे छोड़ा

Shraddha Das: अभिनेत्री श्रद्धा दास इस समय सफलता और ग्रेटिटूड की लहर पर सवार हैं. उनकी सीरीज़, ‘सर्च: द नैना मर्डर केस’ में उनके रोल ने उन्हें आधिकारिक IMDb की लोकप्रिय भारतीय हस्तियों की सूची में पर पहुंचा दिया है.

यह पैन इंडिया स्टार अब शाहरुख खान, सलमान खान, जान्हवी कपूर, कियारा आडवाणी और कोंकणा सेन शर्मा जैसी हस्तियों से आगे निकल गई हैं.

अपनी IMDb रैंक में इस नाटकीय उछाल के बारे में जानकर अभिनेत्री ने अपना आश्चर्य व्यक्त किया. दास ने कहा, “मुझे इस बारे में पता नहीं था जब तक कि मेरे एक दोस्त ने मुझे यह नहीं भेजा और 15 से 4 पर आने के कारण मैं बहुत अभिभूत और हैरान थी. सीरीज में ‘रक्षा’ का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री ने अपनी इस नई पहचान का श्रेय दर्शकों के प्यार को दिया. उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता था कि ‘सर्च: द नैना मर्डर केस’ सीरीज़ में मेरा रक्षा का किरदार मुझे दर्शकों से इतना प्यार दिलाएगा! मैं आभारी महसूस कर रही हूं! और सीरीज़ भी सुपरहिट है.

IMDb चार्ट्स पर एक सपना हुआ सच

इंडस्ट्री के कुछ सबसे बड़े नामों के साथ सूचीबद्ध होना अभिनेत्री के लिए एक बड़ी बात है, जिन्होंने मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय सिनेमा (तेलुगु, तमिल, मलयालम, और कन्नड़ फिल्मों) के साथ-साथ कुछ हिंदी और बंगाली प्रोजेक्ट्स में भी काम किया है.

अपने करियर को दर्शाते हुए श्रद्धा ने साझा किया, “मैं सालों से इन अभिनेताओं को देखती आई हूँ, और सिर्फ़ उसी सूची में होना ही मेरे लिए सम्मान की बात है.” श्रद्धाने आगे कहा, “लेकिन सूची में शीर्ष पर होना कल्पना से परे है. मैं लंबे समय से काम कर रही हूँ, लेकिन आखिरकार मुझे मेरा हक मिल रहा है.

जब उनसे लोकप्रियता में अचानक आए उछाल के संभावित कारण के बारे में पूछा गया, जो प्लेटफॉर्म पर सेलिब्रिटी प्रोफाइल के पेज व्यूज़ को मापता है, तो दास ने अनुमान लगाया कि इस सीरीज़ की पहुंच और अलग-अलग भाषाओं में किए गए उनके काम ने इसमें एक बड़ी भूमिका निभाई है.

क्षेत्रीय दर्शकों के प्रभाव को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा, “हाँ, शायद यही कारण हो सकता है.” उन्होंने जोड़ा, “तेलुगु, कन्नड़ और बंगाली दर्शक भी इसे अपनी डब भाषाओं में ज़रूर देखे होंगे. लेकिन मुझे हिंदी दर्शकों से भी इतने सारे संदेश मिल रहे हैं. यहाँ तक कि फ्रांस और कनाडा के लोगों से भी!” उन्होंने शो की व्यापक अंतरराष्ट्रीय पहुँच को उजागर किया.

आभार व्यक्त करते हुए एक हार्दिक संदेश में, श्रद्धा दास ने अपने प्रशंसकों को उनके समर्थन और पहचान के लिए धन्यवाद दिया.

उन्होंने निष्कर्ष निकाला, “मैं आपसे प्यार करती हूं! हर उस व्यक्ति को धन्यवाद, हर उस राज्य से जहाँ मैंने काम किया है और उन लोगों को भी जहाँ मैंने काम नहीं किया है! और मेरे काम को पहचानने के लिए धन्यवाद.

अभिनेत्री अपनी फ़िल्मों ‘आर्या 2’ और ‘दिल तो बच्चा है जी’ में अपने अभिनय के लिए जानी जाती हैं और उनकी वर्तमान रैंकिंग उनके काम की बढ़ती हुई वैश्विक और बहु-सांस्कृतिक अपील का प्रमाण है.

Shraddha Das

Dark Circles: आंखों के डार्क सर्कल्स से न हों परेशान, जानें सही इलाज

Dark Circles: सुरभि को हमेशा आंखों के नीचे काले घेरे रहते हैं, जिस से उन्हें हमेशा कहीं जाने से पहले कसींलर लगा कर मेकअप करना पड़ता है. उन्होंने इस बारे में कभी डाक्टर से सलाह नहीं ली, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह उन्हें अपनी मां से मिला है और यह जाने वाला नहीं है. मां को भी उन्होंने हमेशा आंखों के नीचे काले घेरे को देखा है.

असल में डार्क सर्कल्स आनुवंशिक हो सकते हैं, क्योंकि यह आप के परिवार के इतिहास से आ सकता है, क्योंकि आनुवंशिक कारण आंखों के नीचे की त्वचा को पतला बना सकते हैं या हाइपरपिग्मेंटेशन (मिलेनिन का अधिक उत्पादन) को बढ़ा सकते हैं, जिस से रक्त वाहिकाएं और गहरी त्वचा अधिक दिखाई देने लगती हैं. लेकिन ये केवल आनुवंशिक के कारण नहीं होते हैं, बल्कि आज की गलत लाइफस्टाइल भी इस के जिम्मेदार हो सकते हैं, जिसे जान लेना जरूरी है.

डार्क सर्कल्स नहीं बीमारी

यहां ये समझना आवश्यक है कि डार्क सर्कल कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक लक्षण है, जो अस्थायी या लंबे समय तक रह सकता है. इस का रंग कई वजहों से भूरा, नीला या बैंगनी हो सकता है. साथ ही यह किसी भी उम्र में हो सकता है और अधिकतर लड़के और लड़कियों में आजकल देखने को मिलता है.

इस बारे में मुंबई की स्किन केयर क्लिनिक की त्वचा रोग विशेषज्ञ डा. शरीफा चौस कहते हैं कि आंखों के नीचे काले घेरे (डार्क सर्कल्स) वे हिस्से हैं जहां त्वचा का रंग गहरा दिखाई देता है या छाया जैसी लगती है, जिस से चेहरा थका हुआ या उम्रदराज लगता है. यह स्थिति त्वचा में पिगमेंट जमा होने, पतली त्वचा के कारण रक्त वाहिकाएं दिखने या चेहरे के वौल्यूम घटने से पड़ने वाली छाया के कारण होती है.

जानें वजह

डा. आगे कहते हैं कि सूरज की रोशनी, आनुवंशिक कारण या किसी त्वचा की सूजन के बाद होने वाला हाइपरपिगमेंटेशन त्वचा को गहरा कर सकता है. आंखों की त्वचा पतली होने या कोलेजन की कमी से नीचे की नसें और रक्त जमाव अधिक दिखाई देने लगते हैं.

चेहरे की चरबी या वौल्यूम कम होने से आंखों के नीचे गड्ढे बन जाते हैं, जिस से छाया जैसी लगती है. ऐलर्जी, नाक बंद होना या सूजन भी नसों की दृश्यता और पिगमेंटेशन बढ़ा सकते हैं. इस के अलावा उम्र बढना, हार्मोनल बदलाव, आयरन की कमी या अन्य बीमारियां भी कारण हो सकती हैं. इस के आलवा आज के समय में जीवनशैली भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसलिए उसे सुधारना बहुत आवश्यक होता है.

जीवनशैली से जुड़े कारण

नींद की कमी, तनाव और थकान डार्क सर्कल्स को बढ़ा सकते हैं, हालांकि कई बार ये मुख्य वजह नहीं भी हो सकते हैं, क्योंकि कई बार ऐसा देखा गया है कि पानी की कमी, ज्यादा शराब या धूम्रपान से त्वचा पतली और बेजान हो जाती है. धूप में ज्यादा रहना, आंखों के आसपास पिगमेंटेशन बढ़ाता है. पोषक तत्त्वों की कमी (जैसे आयरन, विटामिन बी12) और थायरायड या साइनस की समस्या के कारण भी यह हो सकता है. आनुवंशिक कारण की अगर बात करें, तो उम्र के साथ चेहरे की चरबी कम हो सकती है, जिसे बदलना संभव नहीं होता.

कुछ बातें निम्न हैं, जिन से डार्क सर्कल को कम किया जा सकता है :

डार्क सर्कल कम करने के उपाय

  • ऐलर्जी का इलाज करें.
  • पोषण की कमी पूरी करें.
  • पर्याप्त नींद लें और पानी पीएं.
  • हर दिन सनस्क्रीन और सनग्लासेस का उपयोग करें.
  • मोइस्चराइजर, विटामिन सी या रेटिनौलयुक्त क्रीम त्वचा को मजबूत बनाती हैं और धीरेधीरे रंग हलका करती हैं.
  • आंखों को रगड़ना, किसी भी अज्ञात व्हाइटनिंग क्रीम या टूथपेस्ट का उपयोग न करें इस से त्वचा खराब हो सकती है.
  • कंसीलर या कलर करेक्टर से तुरंत लुक सुधारा जा सकता है.

अगर फिर भी डार्क सर्कल्स रहें, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें.

उपचार के विकल्प

टौपिकल ट्रीटमैंट्स : डाक्टर द्वारा दी गई रेटिनौल, विटामिन सी, ऐंटी औक्सीडेंट्स या पिगमेंट लाइटनिंग क्रीम्स उपयोगी हो सकती हैं. मसलन :

 

  • प्रोसीजरल ट्रीटमैंट्स.
  • कैमिकल पिल्स
  • लेजर.

प्लेटलेट रिच प्लाजमा (पीआरपी)

डर्मल फिलर्स (वौल्यूम बढ़ाने के लिए)

इलाज का चुनाव कारण के अनुसार किया जाता है, जैसे पिगमेंट, नसें या त्वचा का होलोनेस आदि. इन में से कुछ प्रक्रियाओं में कई सीजन और रिकवरी टाइम लगता है और इस के नतीजे व्यक्ति विशेष की लाइफस्टाइल पर निर्भर करते हैं.

डार्क सर्कल्स से जुड़े मिथक

 

  • डार्क सर्कल्स सिर्फ नींद की कमी से होते हैं. नींद जरूरी है, लेकिन आनुवंशिक कारण, पिगमेंटेशन और चेहरे की वॉल्यूम लॉस भी प्रमुख कारण हैं.

 

  • खीरा या चाय के टी बैग्स से डार्क सर्कल हमेशा के लिए हट जाते हैं. ये सिर्फ ठंडक और अस्थायी राहत देते हैं, पर स्थायी इलाज नहीं हैं.

 

  • टूथपेस्ट या ब्लीचिंग एजेंट से त्वचा गोरी हो जाती है. ये त्वचा को जला सकते हैं और पिगमेंटेशन बढ़ा सकते हैं.

 

  • एक ही इलाज से सब के डार्क सर्कल ठीक हो जाते हैं. इलाज कारण पर निर्भर करता है, सही निदान और विशेषज्ञ की सलाह जरूरी है.

इस प्रकार डार्क सर्कल्स से नजात पाना आज समस्या नहीं, सही समय पर सही इलाज और लाइफस्टाइल के बदलाव से इसे कम किया जा सकता है, इसलिए देर न करें, बल्कि समय रहते अपनी खूबसूरती को निखारें और बन जाएं खूबसूरत आंखों की मलिका.

Dark Circles

Pregnancy Test: प्रैगनैंट हैं, यह कैसे पता करें

Pregnancy Test: प्रैगनैंट होना हर महिला का सपना होता है और पीरियड मिस होना इस का पहला संकेत होता है लेकिन इस के आलावा भी कई कारण होते हैं जिस से पता चलता है आप प्रैगनैंट हैं. वैसे भी प्रैगनैंट होना किसी भी महिला के लिए काफी पर्सनल मामला होता है, इसलिए पहले वह इस के लिए खुद कनफर्म होना चाहती है. उस के बाद ही यह खुशखबरी सब को सुनती है. तो आइए, जानें कैसे पता करें कि आप प्रैगनैंट हैं.

पीरियड मिस होना एक बड़ा संकेत

अगर पीरियड रैगुलर हैं और अचानक किसी महीने पीरियड नहीं आया तो हो सकता है ऐसा प्रैगनैंसी की वजह से ही हुआ हो. हालांकि कई बार पीरियड्स खून की कमी होने और टैंशन होना जैसे अन्य कारणों से भी मिस हो सकता है, लेकिन एक बार जांच करवा लेना जरूरी होता है.

जी मिचलाना और उलटी आना

कई बार महिला को लगता है कुछ गलत खापी लिया होगा इस वजह से ऐसा हो रहा है. लेकिन अगर यह लगातार हो रहा है तो हो सकता है कि आपका शरीर प्रैगनैंसी के लिए तैयार हो रहा है क्योंकि ऐसा तब होता है जब शरीर में हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है.

यूरिन पास करने की फ्रीक्वेंसी का बढ़ जाना

यदि आप आपनी ओवुलेशन प्रक्रिया के बाद गर्भधारण कर लेती हैं, तो आप एक दिन में सामान्य से अधिक बार यूरिन  के लिए जा सकती हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि गर्भावस्था के दौरान आप के शरीर में रक्त की मात्रा बढ़ जाती है, जिस से आपकी किडनी अधिक मात्रा में तरल पदार्थ निकालने लगती है जो यूरिन की सहायता से बाहर निकलता है.

कमर में दर्द तो नहीं

कई बार पीरियड्स के जाने पर भी कमर दर्द होता है. बिलकुल वैसा ही दर्द कमर के निचले हिस्से में हो रहा है तो यह प्रैगनैंसी भी हो सकता है.

सिरदर्द होना भी एक वजह

गर्भावस्था के शुरुआती दिनों में शरीर में बढ़ते रक्त परिसंचरण और (निश्चित रूप से) बढ़ते हार्मोन के स्तर के कारण सिर में दर्द होना आम बात हो सकती है.

मूड स्विंग का होना

हार्मोन में असंतुलन होने की वजह से मस्तिष्क में न्यूरोट्रांसमीटर प्रभावित होते हैं जिस की वजह से आप ज्यादा भावुक हो जाती हैं. कई बार यह लक्षण तनाव के कारण भी पैदा होता है. इसलिए कभी किसी बात पर बहुत हंसी आ जाती है और किसी बात पर दुखी हो जाना स्वभाविक हो जाता है.

कौंस्टिपेशन (कब्ज) होना भी वजह

हार्मोनल असंतुलन होने के कारण आप के शरीर की मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं. इन के साथ साथ आप का पाचनतंत्र भी रिलैक्स हो कर धीमी गति से काम करने लगता है जिस की वजह से आपको कौंस्टिपेशन की शिकायत हो सकती है. जैसेजैसे आप की गर्भावस्था का समय आगे बढ़ता है वैसेवैसे आप के कौंस्टिपेशन की समस्या भी बढ़ सकती है. इस से बचने के लिए आप को पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए और खुद को हमेशा हाइड्रेट रखने की कोशिश करनी चाहिए.

ब्रैस्ट में चेंज आने लगता है

हार्मोन्स में बदलाव के कारण स्तनों में संवेदनशीलता, भारीपन और दर्द महसूस हो सकता है. इस के साथ ही कुछ महिलाओं में निपल्स का रंग गहरा हो सकता है.

टेस्ट और स्मेल में बदलाव होना

अगर कोई महिला गर्भवती होती है तो हो सकता है कि खाने की कुछ चीजों की महक उस को बुरी लग सकती हैं व कुछ की अच्छी भी लग सकती हैं. ऐसा भी होता है कि जो चीजें पहले पसंद होती हैं उन का टेस्ट बुरा लगने लगता है. यह बहुत ही सामान्य बात है क्योंकि प्रैगनैंसी में ऐसा होता है.

स्पौटिंग होना भी वजह

कभीकभी गर्भधारण के समय हलका ब्लीडिंग (स्पौटिंग) और पेट में हलका खिंचाव हो सकता है. इसे इंप्लांटेशन ब्लीडिंग कहा जाता है, जो फर्टिलाइज्ड एग के यूटेरस की दीवार से चिपकने के कारण होता है.

वीकनैस होना भी एक लक्षण

अगर आप को बुखार नहीं है और अन्य कोई बीमारी भी नहीं है, बस कुछ दिनों से थकान महसूस हो रही है, तो गर्भधारण करने के बाद एक महिला का खुद में कमजोरी और सुस्ती अनुभव करना सामान्य है. यह भी गर्भावस्था के शुरुआती लक्षणों में से एक हो सकता है.

प्रैगनैंट होने के कितने दिनों में ये लक्षण दिखने लगते हैं

अगर आप प्रैगनैंट हो गए हैं तो 10 से 15 दिन के अंदर अंदर आप को ये लक्षण दिखने लगते हैं.

प्रैगनैंसी को ऐसे कन्फर्म करें 

यूरिन प्रैगनैंसी होम किट : सुबह उठने के तुरंत बाद वाशरूम जाएं और किसी प्लास्टिक के कंटेनर में यूरिन इकट्ठा करें. थोड़े से यूरिन से ही आप यह टेस्ट कर सकती हैं.

प्रैगनैंसी टेस्ट किट में एक ड्रौपर होता है. कंटेनर से उस ड्रौपर की मदद से यूरिन की बूंदें ले कर उसे सैंपल वेल पर डालें.

प्रैगनैंसी का रिजल्ट आने में पूरे 5 मिनट लगते हैं. टेस्ट किट पर धीरेधीरे गुलाबी लाइनें नजर आने लगेंगी. अगर एक गुलाबी लाइन दिखती है, तो इस का मतलब रिजल्ट निगेटिव है यानी आप प्रैगनैंट नहीं हैं.

अगर टेस्ट किट पर 2 गुलाबी लाइनें नजर आएं, तो इस का मतलब आप प्रैगनैंट हैं.

कई बार किट पर 2 लाइनें तो दिखती हैं, लेकिन उन का कलर अलगअलग होता है. गुलाबी के साथ एक नीली लाइन नजर आ सकती है. इस का मतलब टेस्ट फेल है. दूसरे किट से फिर से टेस्ट करें.  अगर आपका परिणाम प्रैगनैंट दिखाता है, तभी आप को गाइनकोलौजिस्ट के पास चेकअप के लिए जाना चाहिए.

गायनकोलौजिस्ट से सलाह लें

अल्ट्रासाउंड : यह एक अन्य प्रमुख तरीका है जिस का उपयोग प्रैगनैंसी की जांच के लिए किया जाता है. इस में अल्ट्रासाउंड के द्वारा गर्भाशय की जांच की जाती है और गर्भधारण की पुष्टि की जाती है.

ब्लड टेस्ट : यह एक रक्त की जांच होती है जिस के आधार पर डाक्टर प्रैगनैंसी कन्फर्म करते हैं. लक्षण हो या न हो डाक्टर से कंसल्ट कर के बीटा एचसीजी टेस्ट करवाना चाहिए. चाहे यूपीटी में जो भी रिजल्ट आए बाद में बीएचसीजी करवाना ही चाहिए.

प्रैगनैंसी टेस्ट कब कराएं

अगर पीरियड की डेट मिस हो गए हो और पीरियड्स नहीं आ रहे हों और साथ में ये सभी लक्षण भी आप महसूस कर रही हों तो हो सकता है कि आप प्रैगनैंट हों. इसे कन्फर्म करना जरूरी है और यही समय है जब आप डाक्टर के पास जा सकती हैं. यह तकनीक गर्भावस्था के शुरुआती चरणों में बच्चे के लिए छवियों को बनाती है.

Pregnancy Test

Shilpa Shetty: जानें शिल्पा की फिटनेस का राज, खान-पान को लेकर दी सही हिदायत

Shilpa Shetty: 50 साल की उम्र में भी शिल्पा शेट्टी 25 साल की हीरोइन को पीछे छोड़ती है क्योंकि वह आज भी बला की खूबसूरत है, आज भी शिल्पा उतनी ही खूबसूरत है जितनी आज से 25 साल पहले थी. उनके खूबसूरत फिगर के चलते वह जो भी पहनती है वह उन पर अच्छा लगता है. आज फिल्मों को लेकर वह भले ही बहुत ज्यादा सक्रिय नहीं है लेकिन रियलिटी शोज की जजिंग वेब सीरीज और कई प्रोडक्ट्स के लिए मॉडलिंग करने के चलते हमेशा चर्चा में बनी रहती हैं.

हर कोई यह जानने को उत्सुक रहता है कि वह ऐसा क्या खाती है या उनका क्या लाइफस्टाइल है , जो आज भी वह स्लिम ट्रिम और जवान नजर आती है. इसके पीछे खास वजह है शिल्पा का अनुशासन प्रिय  रहना , आज भी शिल्पा शेट्टी पूरी शिद्दत के साथ योग और जिम वर्कआउट रोजाना करती हैं, उनके योगा सेशन के वीडियो सोशल मीडिया पर हमेशा मिलते हैं जिसे देखकर कहीं लोग योगा करके फिट होने की कोशिश करते हैं.

योग और वर्कआउट के अलावा शिल्पा शेट्टी खान पान को लेकर भी अलग डाइट और स्टाइल रखती है , जिसे फॉलो करके कई लड़कियां अपना काया पलट कर सकती हैं.

एक्ट्रेस के अनुसार वह कोई स्ट्रिक्ट डाइट फॉलो नहीं करती बल्कि सही तरीके से खान पान का ध्यान रखती है. जैसे शिल्पा अपने दिन की शुरुआत डेढ़ गिलास गुनगुने पानी के साथ करती हैं, फिर नोनी जूस  की कुछ मात्रा पीती है जो एनर्जी बूस्टर का काम करता है आखिर में एक बड़ा चम्मच नारियल तेल से कुल्ला करती हूं, जो शिल्पा के अनुसार एक आयुर्वेदिक विधि है जिसमें मुंह में तेल भर के चार-पांच मिनट तक उसको मुंह में ही घूमना है.

इस प्रक्रिया के बाद शिल्पा ब्रेकफास्ट करती है जिसमें वह ताजा फल , जैसे आम सेब बादाम दूध, कुछ स्लाइस, थोड़ी मूसली भी ले लेती हूं , और कई बार नाश्ते में अंडे भी खाती हूं , क्योंकि मुझे अंडा बहुत पसंद है. शिल्पा के अनुसार  शरीर में फैट बढ़ने से रोकने के लिए वह नारियल का दूध  पीती है , और लंच में देसी घी का सेवन करना जरूरी समझती हूं , क्योंकि देसी घी शरीर की मजबूती के लिए अहम रोल अदा करता है , इसके अलावा केला भी सेहत के लिए बहुत अच्छा है क्योंकि उसमें कार्बोहाइड्रेट होता है.  जो अच्छी सेहत के लिए जरूरी होता है, लेकिन कई लोग मोटे होने के डर से इससे दूर रहते है . जबकि ये बहुत जरूरी है शरीर के लिए . इसके अलावा लंच में मै ब्राउन राइस दाल चिकन  मछली साथ में चपाती और सलाद खाना भी पसंद करती हूं. मेरी कोशिश रहती है कि मैं ऐसा ही खाना खाऊं जो मेरे वजन को नियंत्रित रखें और मैं एक्टिव भी रहूं  और इसके अलावा हल्का खाना खाने से चेहरे का ग्लो भी बना रहता है

शाम के टाइम स्नैक्स में अंडे के साथ टोस्ट और एक कप चाय लेना पसंद करती हूं और रात के खाने में एकदम हल्का-फुल्का जैसे सुपर ग्रिल्ड व्यंजन लेना पसंद करती हूं. मेरी कोशिश रहती है कि मेरे शरीर में 1800 कैलरी से ज्यादा ना जाए,

खाने को लेकर खास टिप्स

मेरा खाना जैतून के तेल में या स्वास्थ्यवर्धक तेल मैं बनता है जो बहुत ही कम मात्रा में होता है.  मैं खाने में सफेद चीनी सफेद सफेद चावल से पूरी तरह दूरी रखती हूं .

शाम के नाश्ते में हेवी स्नेक्स से दूर रहती हूं क्योंकि उसमें ज्यादा कैलोरी होती और वजन बढ़ने के चांसेस भी ज्यादा होते हैं.

मैं भले ही पूरे हफ्ते स्ट्रिक्ट डाइट करती हूं, लेकिन हफ्ते में एक दिन मेरे लिए चीट डे होता है, जिसमें होटल जाकर मैं अपना पसंदीदा खाना खा लेती हूं.

बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा शेट्टी के अगर वर्क फ्रंट की बात करें तो शिल्पा का अभिनय करियर 1993 में एक सुपरहिट फिल्म बाजीगर के साथ हुआ. उसके बाद शिल्पा ने एक के बाद एक कई हिट फिल्में दी, जैसे मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी, धड़कन, हंगामा 2, लाइफ इन मेट्रो, जैसी कई हिट फिल्में देने वाली शिल्पा शेट्टी ने हिंदी के अलावा तेलुगू तमिल कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया है. अपने फिल्मी करियर के ढलान के दौरान शिल्पा शेट्टी ने ब्रिटिश रियलिटी शो बिग ब्रदर की विजेता बनकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई. इसके साथ उनकी फिल्मों में और ग्लैमर वार्ड में फिर से एक अलग पहचान बनी. और फिल्मों के अलावा शिल्पा शेट्टी डांस शो झलक दिखला जा, नच बलिए जैसे डांस शोज की जज भी रह चुकी है.

इतना ही नहीं शिल्पा शेट्टी विदेशी फिल्म केडी: द डेविल में 2024 में काम कर चुकी है. इसके अलावा शिल्पा शेट्टी के योग वीडियो भी लोगों द्वारा पसंद किए जाते हैं. ग्लैमर वर्ल्ड से जुड़ने के अलावा शिल्पा ने एक रेस्टोरेंट की भी शुरुआत की जिसका नाम वैलनेस ब्रांड है. शिल्पा एक प्रोडक्शन हाउस भी चलाती है. 2014 में बतौर निर्माता शिल्पा शेट्टी ने फिल्म डिशक्याउंन का निर्माण किया.

शिल्पा शेट्टी और पति राज कुंद्रा से जुड़े गंभीर विवाद

प्रसिद्धि के साथसाथ विवादों में घिरना सेलिब्रिटीज के लिए आम बात है. जिसके चलते शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा कई बार विवादों में घिर चुके हैं. जैसे पोर्नोग्राफी फिल्म बनाने के चक्कर में जहां पति राज कुंद्रा को जेल की हवा खानी पड़ी वही 2002 में बिटकॉइन पोजी स्कीम घोटाले में मनी लांड्रिंग से जुड़ा मामला सामने आया इसमें शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा पर कई आरोप लगे. जिसके चलते खबरों के अनुसार 97 करोड़ की प्रॉपर्टी कुर्क की गई थी.

इतना ही नहीं शिल्पा शेट्टी और उनके पति राज कुंद्रा ने आईपीएल की टीम राजस्थान रॉयल्स को खरीदा था साल 2013 में इसी टीम के कुछ खिलाड़ी मैच फिक्सिंग मैं फंस गए थे, इस दौरान राज कुंद्रा पर भी मैच फिक्सिंग का आरोप लगा, इसके अलावा हाल ही में शिल्पा शेट्टी और पति राज कुंद्रा पर लोटस कैपिटल फाइनेंशियल विशेष लिमिटेड की डायरेक्टर और बिजनेसमैन दीपक कोठारी ने 60 करोड़ की धोखा घड़ी का आरोप लगाया.

जिस पर अभी सुनवाई चल रही है. इस केस के लिए शिल्पा और उनके पति पर आरोप लगाया गया है इस सेलिब्रिटी ने बिजनेस एक्सपेंड करने के बहाने पैसे लिए लेकिन उसका इस्तेमाल निजी खर्चों में किया.

Shilpa Shetty

Shahrukh Khan कैसे बने दुनिया के सबसे अमीर एक्टर

Shahrukh Khan: बौलीवुड के बादशाह शाहरुख खान का नाम हाल ही में दुनिया के सबसे अमीर एक्टर की श्रेणी में शामिल हुआ. 1 अक्टूबर 2025 को जारी की गई हुरून रिच लिस्ट में इंडिया के सबसे अमीर एक्टर की श्रेणी में शामिल शाहरुख खान की नेटवर्थ 1.4 बिलियन डॉलर अर्थात 12490 करोड़ रुपए बताई गई है.

गौरतलब है बिलियनर्स की लिस्ट में शामिल शाहरुख खान ने विदेशी एक्टर अर्नाल्ड, टेलर स्विफ्ट और सेलेना गोमेज, टॉम क्रूज आदि अमीर ऐक्टरों को काफी पीछे छोड़ दिया है. इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार शाहरुख की नेटवर्थ 12490 करोड़ है.

शाहरुख के अनुसार सफलता पाने से ज्यादा उस सफलता को संभालना ज्यादा मुश्किल है

शाहरुख खान ने बतौर एक्टर अपनी करियर की शुरुआत टीवी अर्थात छोटे पर्दे से आर्मी और सर्कस सीरियल से की थी, उस दौरान शाहरुख खान ने भी शायद नहीं सोचा होगा, कि वह एक दिन इतने बड़े एक्टर बन जाएंगे की पूरी दुनिया में सबसे अमीर एक्टर कहलाएंगे, लेकिन इस बात का विश्वास उनकी मां को जरूर था की एक दिन उनका बेटा शाहरुख बतौर एक्टर सबके दिलों पर राज करेगा.

शाहरुख खान ने अपने इंटरव्यू में अपनी मां के इसी कॉन्फिडेंस को साझा किया था, इस दुख के साथ कि अगर काश मेरी मां आज जिंदा होती तो अपने बेटे की ये कामयाबी देख कर बहुत खुश होती, शाहरुख खान के अनुसार एक कलाकार के लिए कामयाबी पाना या पैसा कमाना उतना मुश्किल नहीं है जितना कि उसको संभाल पाना है.

गौरतलब है पिछले कुछ सालों में शाहरुख की जिंदगी में कई बड़े उतार चढ़ाव आए लेकिन उसका असर शाहरुख ने कभी भी अपने काम पर नहीं पड़ने दिया.

मजे की बात तो यह है की हाल ही में जब शाहरुख खान ने अपना बंगला मन्नत रिनोवेशन के लिए खाली किया और कुछ समय के लिए दूसरी जगह शिफ्ट हुए तो कुछ ढोंगी ज्योतिष भविष्यवाणी करने लगे कि शाहरुख खान बैंक करप्ट हो गए हैं जिस वजह से उनको अपना बंगला खाली करना पड़ा, इस दौरान कई हेटर्स और ढोंगी ज्योतिष ने शाहरुख को दिवालिया घोषित कर दिया था, जिसका मुंह तो जवाब शाहरुख ने दुनिया का सबसे अमीर एक्टर का अचीवमेंट के साथ दिया.

शाहरुख खान की खासियत है, कि चाहे जो हो जाए वह कभी अपना आपा नहीं खोते और ना ही कभी गुस्से से पेश आते है, बस वो पब्लिकली अपने अंदाज में कह देते हैं, कुर्सी की पेटीयां बांध लो मौसम बदलने वाला है.

खास बात ये है कि वो मौसम बदल भी देते हैं, बतौर एक्टर उनकी फिल्में जवान और पठान की अपार सफलता इस बात का उदाहरण है.

एक्टिंग के जरिए कमाए हुए पैंसो को कई सारे बिजनेस में इन्वेस्ट करके 10 हजार करोड़ में शाहरुख का फैला हुआ कारोबार

एक समय था जब बॉलीवुड के कई एक्टर अपना कमाया हुआ पैसा शराब और शबाब में तबाह कर दिया करते थे, और जब उनका आखिरी वक्त आया तो उनके पास कुछ नहीं बचा था सिवाय बीमारी के. लेकिन आज के एक्टर ग्लैमर वर्ल्ड की चमक दमक की सीमित समय सीमा से वाकिफ हैं जिसके चलते वह एक्टिंग से कमाया पैसा किसी ना किसी बिजनेस में इन्वेस्ट कर देते हैं जिसका जीता जागता उदाहरण 12,490 करोड़ के मालिक शाहरुख खान है, जिसने अपनी एक्टिंग से कमाया पैसा कई अलगअलग व्यवसाय में इन्वेस्ट किया और उस पैसे को दोगुना तिगुना करके उससे भी कहीं ज्यादा कमाकर अपना खुद का अंपायर खड़ा कर लिया जिसके वह बेताज बादशाह है.

एक्टिंग के जरिए कमाए पैसों को उन्होंने कई सारे बिजनेस में इस तरह इन्वेस्ट कर किया कि उनकी 10000 करोड़ की नेट इनकम सिर्फ उनके कई बिजनेस के जरिए दिखाई देती है. पेश है इसी पर एक नजर.

1 साल में 5000 करोड़ बढ़ी बादशाह शाहरुख खान की नेटवर्थ …. हुरून इंडिया रिच लिस्ट 2024 में शाहरुख की नेटवर्थ 7300 करोड़ दर्ज की गई थी . लेकिन 2025 में महज 1 साल में उनकी नेटवर्थ 5000 करोड रुपए बढ़कर 12490 करोड़ पहुंच गई.

शाहरुख खान की फिल्मों की फीस के अलावा प्रोडक्शन हाउस रेड चिली एंटरटेनमेंट से भी बड़ी कमाई आती है जिसमें वह फिल्म, वेब सीरीज और विज्ञापन का निर्माण करते हैं. उनके रेड चिली प्रोडक्शन हाउस में बनी फिल्में जवान और डंकी ने ज़बरदस्त कमाई की है, इसके अलावा 2006 में शाहरुख ने रेड चिलीज वीएफएक की स्थापना भी की, जो एक आधुनिक विजुअल इफेक्ट स्टूडियो है.

इसके अलावा शाहरुख खान ब्रांड एंडोर्समेंट के लिए करोड़ों की फीस लेते हैं, साथ ही पत्नी गौरी खान डी डेकोर की फाउंडर है, वही उनका बेटा आर्यन खान लग्जरी क्लोदिंग ब्रांड डीव्योल के मालिक है. इसके अलावा आर्यन ने 120 करोड़ के बजट में वेब सीरीज द बेड्स ऑफ बॉलीवुड बनाई जिसने अच्छा बिजनेस किया.

उनके बंगले मन्नत की कीमत 200 करोड़ है जो रिनोवेशन के बाद और बढ़ जाएगी. इसके अलावा शाहरुख खान के पास दिल्ली, अलीबाग, दुबई, लंदन और इंग्लैंड में प्रॉपर्टी है. लंदन के पॉकलेन में अपार्टमेंट, बारवेर्ली हिल्स में विला,दिल्ली में प्रॉपर्टी, अलीबाग में फार्महाउस, दुबई में नया घर, आदि प्रॉपर्टी है.

शाहरुख खान ने रेडीको खेतान, और निखिल कामत के साथ मिलकर डी यावोल स्पिरिट नामक एक लग्जरी एल्कोबेव (मादक पेय शराब ) कंपनी की स्थापना की है. जो प्रीमियर शराब का उत्पादन और विपणन करती है, यह साझेदारी भारतीय और अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम शराब बाजार को लक्षित करती है, इसका पहला उत्पाद लग्जरी टेकीला है. इस कंपनी का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डिजाइन आधारित प्रीमियम स्पिरिट का उद्घाटन करना है. यह साझेदारी भारत के प्रीमियम शराब बाजार में प्रवेश करने और उसको बढ़ाने पर केंद्रित है.

शाहरुख खान की कारों का कलेक्शन

शाहरुख खान के पास बीएमडब्ल्यू और मर्सिडीज से लेकर रोल्स-रॉयस और ओडी तक कई लग्जरी गाड़ी शामिल है. उनकी सबसे महंगी कार बुगाटी वेरॉन की कीमत 12 करोड़ है, रोल्स-रॉयस कार की कीमत 9.5 करोड़ है. और बैटले कॉन्टिनेंटल कार की कीमत 3.29 है.

इसके अलावा क्रिकेट प्रेमी शाहरुख आबूधाबी नाइट राइडर्स, लॉस एंजेलिस नाइट राइडर्स, ट्रीन बांगो नाइट राइडर्स जिसकी ब्रैंड वैल्यू 109 करोड़ मिलियन डॉलर है. अर्थात 966 करोड़ से ज्यादा है. शाहरुख खान कोलकाता नाइट राइडर्स आईपीएल टीम के सह मालिक है जहां से उनके अतिरिक्त आय अच्छी कमाई होती है.

इन सब से यही साबित होता है कि वह एक सफल एक्टर ही नहीं बल्कि एक अच्छे बिजनेस मैन भी है, जो आज की युवा पीढ़ी के लिए मिसाल है.

Shahrukh Khan

Best Hindi Story: अपने लिए वक्त

Best Hindi Story: ‘‘कहां जा रही हो चंचलिका?’’ जयश्री ने अपार्टमैंट से बाहर जा रही चंचलिका को टोका. वह अभीअभी कहीं बाहर से आकर अपार्टमेंट के अंदर प्रवेश कर रही थी. ‘‘जा रही हूं प्रवीण के साथ बाहर.’’ चंचलिका ने फीकी मुसकराहट के साथ कहा. ‘‘ओहो प्रवीण के साथ बाहर…? ’’ जयश्री ने उसे छेड़ा. ‘‘आज मेरा मन था घर में आराम करने का पर प्रवीण है कि मानता नहीं,’’ चंचलिका ने थोड़ा झंझलाते हुए कहा. इस बीच कैब ड्राइवर की कौल आ गई, ‘‘कैब वाला इंतजार कर रहा है. फिर मिलती हूं. सी यू,’’ बोलते हुए चंचलिका आगे बढ़ गई और फिर फोन रिसीव कर ड्राइवर से कहा, ‘‘एक मिनट में आई.’’ कैब ठीक गेट के बाहर खड़ी थी. कैब में बैठ कर चंचलिका ने ड्राइवर को ओटीपी बताया. ड्राइवर ने अपने मोबाइल में ओटीपी फीड किया और कैब को आगे बढ़ा दी. आज चंचलिका का बिलकुल मूड नहीं था बाहर जाने का.

उस ने प्रवीण से कहा भी कि आज मुझे माफ करो. मगर प्रवीण ने उस की एक न सुनी. लाचार हो कर उसे बाहर जाने के लिए तैयार होना पड़ा. कैब सड़क पर दौड़ी जा रही थी क्योंकि आज ट्रैफिक काफी कम था. चंचलिका अपने खयालों में खोई हुई थी… पिछले 7 महीनों से चंचलिका प्रवीण के साथ डेटिंग कर रही थी. इन 7 महीनों में एक भी रविवार को वह फ्री नहीं रह पाई है.

ऐसा नहीं था कि प्रवीण के साथ समय बिताना उसे अच्छा नहीं लगता था बल्कि उस के साथ समय बिताना बहुत ही अच्छा लगता था. प्रवीण उस का साथ अधिक से अधिक चाहता था और वह इसे बहुत ही अच्छा मानती थी. पर कभीकभी मुश्किल हो जाती थी उस के लिए. जैसे आज का दिन. औफिस में पिछले 3 दिनों से वह इतनी व्यस्त रही कि पूछो मत. औफिस से आतेआते 10 बज जाते थे. सुबह जल्दी निकालना पड़ता था. ऐसेऐसे कार्यक्रम हुए पिछले 3 दिनों में कि लंच करने तक का समय मुश्किल से निकल पता था. ऐसे में वह इस रविवार को आराम करना चाहती थी.

कल भी औफिस से आतेआते 10 बज गए थे. 11 बजे तक वह सो पाई थी. सोचा था आज दिनभर घर में रहेगी और आराम करेगी पर सुबह 6 बजे ही प्रवीण की कौल आ गई थीं. जानू, सोना, हीरा, मोती उस का कुछ भी संबोधन अच्छा नहीं लग रहा था. जी चाह रहा था कि फोन काट कर फिर से सो जाए. नैटवर्क की कृपा से फोन एक बार कट भी गया. उस ने कौल बैक करने के स्थान पर सोना उचित समझ पर अगले ही पल प्रवीण का फिर से फोन आ गया. ‘‘बाबा आज मैं बहुत थक गई हूं. अभी सो रही हूं. बाद में फोन करती हूं,’’ चंचलिका ने उबासी लेते हुए कहा. ‘‘जितना सोओगी उतना ही थकान हावी रहेगी. जल्दी से उठ जाओ.

आज चलेंगे पिंक पर्ल. वाटर गेम्स का मजा लेंगे,’’ प्रवीण ने कहा. ‘‘नहीं, आज नहीं. फिर कभी,’’ उस ने प्रोग्राम को टालने की कोशिश की. ‘‘ऐसा मत कहो, मैं ने 2 टिकट ले भी लिए हैं,’’ प्रवीण ने मनुहार की. चंचलिका कुछ देर चुप रही. उसे लगा वह जोर से चिल्ला कर डांट दे प्रवीण को कि सिर्फ अपनी बात समझ में आती है तुम्हें, दूसरों का कोई खयाल नहीं रहता पर प्रत्यक्षत: बोली, ‘‘कितने बजे आना है?’’ ‘‘दैट्स लाइक अ गुड गर्ल,’’ प्रवीण खुश हो गया. बोला, ‘‘11 बजे तक मेरे फ्लैट में आ जाओ. यहां से इकट्ठा चल पड़ेंगे. आज दोपहर का लंच और शाम के स्नैक्स वहीं ले कर आएंगे. दिनभर वाटर पार्क में मस्ती करेंगे.

यदि आने में दिक्कत हो तो मैं आ जाता हूं कार ले कर.’’ ‘‘थोड़ी देर से चलें तो कैसा रहेगा?’’ चंचलिका ने कहा. ‘‘ठीक है, 12 तक आ जाओ,’’ प्रवीण ने कहा और फोन काट दिया. थोड़ी देर और सोने की इच्छा हो रही थी चंचलिका की पर इतनी देर बात करने के बाद नींद उड़ चुकी थी. साथ ही यह भी चिंता थी कि 12 बजे तक प्रवीण के फ्लैट पर पहुंचना भी है. अंत में उस ने बिस्तर छोड़ दिया. सिर भारी लग रहा था. सब से पहले उस ने चाय बना कर पी. कुछ कपड़े इकट्ठा हो गए थे धोने के लिए, उन्हें धोया. फिर ब्रेकफास्ट तैयार कर ब्रेकफास्ट किया.

नहाधो कर बेमन से वह बाहर निकली. ‘‘लोकेशन यही दिखा रहा है,’’ ड्राइवर की आवाज सुन कर उस की तंद्रा भंग हुई. ‘‘हां, यहीं रोक दो, बार कोड देना,’’ उस ने बार कोड स्कैन कर कैब का भुगतान किया और प्रवीण को कौल करनी चाही. तभी देखा कि मोबाइल पर ऐप मैसेज आया हुआ था, ‘प्रवीण हैज इन्वाइटेड यू,’ यह प्रवीण की खासीयत थी. वह पहले ही ऐप के जरीए उसे फ्लैट में प्रवेश करने का पास भेज दिया करता था. गेट पर गार्ड को दिखाकर वह अंदर चली गई. प्रवीण के फ्लैट की डोरबैल जैसे ही दबाई, प्रवीण बाहर निकाल आया, ‘‘हैलो, यू आर लेट बाय फाइव मिनट,’’ वह चहका.

चंचलिका कहना तो चाहती थी कि मैं तो आना ही नहीं चाहती थी पर सिर्फ इतना ही बोली, ‘‘5 मिनट चलता है.’’ ‘‘नैपोलियन ने अपने कमांडर को 1 मिनट लेट आने पर क्या बोला था पता है? चेंज योर वाच और आई विल चेंज माई कमांडर,’’ प्रवीण ने कहा. ‘‘तुम थे वहां सुनने के लिए?’’ चंचलिका ने पूछा. ‘‘अरे, मैं ही कमांडर था. उस के बाद मैं कभी भी देर से नहीं पहुंचता,’’ प्रवीण ने कहा और जोरदार ठहाका लगाया. चंचलिका उस का साथ नहीं दे पाई. उसे चुप देख कर प्रवीण चिंतित हो गया, ‘‘क्या हुआ? परेशान लग रही हो?’’ ‘‘अरे बाबा बुरी तरह थकी हुई हूं, आराम चाहिए मुझे,’’ चंचलिका ने कहा. बाहर घूमनेफिरने से ही थकावट दूर होती है. चाय पीओगी?’’ प्रवीण ने कहा. ‘‘नहीं अभी ब्रेकफास्ट ले कर आई हूं.

चाय की इच्छा नहीं है,’’ चंचलिका ने कहा. ‘‘तो फिर चलते हैं,’’ प्रवीण ने दीवार पर टंगी गाड़ी की चाबी हाथ में लेते हुए कहा. दोनों बाहर निकले. गाड़ी की चाबी के साथ ही वह फ्लैट की भी एक चाबी रखता था. फ्लैट का दरवाजा लौक कर दोनों साथ में लिफ्ट में दाखिल हो गए. लिफ्ट से बेसमैंट में जा कर गाड़ी में बैठे और चल पड़े वाटर पार्क की ओर. दिनभर खूब मस्ती की दोनों ने. वहीं लंच लिया. शाम को स्नैक्स भी वहीं लिए. 7 बजे प्रवीण ने चंचलिका को उस के फ्लैट पर पहुंचाया और फिर वापस लौट गया.

कपड़े बदलते वक्त चंचलिका सोच रही थी कि इस में कोई दो मत नहीं कि प्रवीण मेरा बहुत खयाल रखता है पर कभीकभी अपने लिए भी समय चाहता है इनसान. अगर प्रवीण का यही रवैया रहा तो कहीं उस के प्रति दिल में अरुचि न पैदा हो जाए. कैसे समझऊं यह बात मैं प्रवीण को? सोचतेसोचते चंचलिका सोफे पर ही सो गई. नींद खुली तो रात के 11 बज रहे थे. खाना बनाने की जरा भी इच्छा नहीं हुई उस की.

बिस्तर पर जा कर वह फिर से सो गई. आखिर अगले दिन औफिस भी तो जाना था. दिन बीतते रहे और शनिवार आ गया. चंचलिका की एक सखी थी विनीता. उ स ने अपनी लिखी एक कहानी संग्रह भेजा था. वह उन कहानियों को पढ़ना चाहती थी. मौका निकाल कर 1-2 कहानियां पढ़ तो ली थीं पर अधिकांश कहानियां नहीं पढ़ पाई थी. कभीकभी विनीता पूछ भी लेती थी. उसे कहते हुए बुरा भी लगता था कि वह अभी तक उस की कहानियां नहीं पढ़ पाई है.

अगले रविवार को चंचलिका ने इस काम के लिए मन ही मन तय कर रखा था. पर शनिवार को ही प्रवीण का फोन आ गया, ‘‘कल हम चलेंगे सैयारा देखने मौल औफ जयपुर में. पहले कहीं खाना खाएंगे फिर 4 का शो देख कर वापस आएंगे.’’ ‘‘मुझे माफ करो, यह रविवार मैं ने किसी और काम के लिए रखा है. तुम देख आओ सैयारा,’’ चंचलिका ने कहा. ‘‘क्या बात कर रही हो? अकेले मूवी देखने में वह आनंद नहीं आता. ऐसा कौन सा काम है जिस के लिए तुम्हें सारा दिन चाहिए?’’ प्रवीण ने कहा. ‘‘प्रवीण समझ करो बात को. मुझे कई महीनों से अपने लिए समय नहीं मिला है. मुझे अपने लिए भी समय चाहिए होता है और कल मैं कोई फोन भी नहीं उठाऊंगी. प्लीज मुझे डिस्टर्ब मत करना,’’ चंचलिका ने रूखेपन से कहा.

इस के बाद प्रवीण ने सिर्फ ‘ओके’ कहा और फोन काट दिया. कुछ देर के लिए बुरा भी लगा चंचलिका को. पर वह जानती थी अगर उस की बात मान लेगी तो फिर पूरा रविवार उसे उस के साथ रहना पड़ेगा और फिर पछताना पड़ेगा उसे. रविवार को चंचलिका देर से सो कर उठी. आराम से अपने काम निबटाए और फिर विनीता का कहानी संग्रह पढ़ने लगी. उन कहानियों में एक कहानी ‘नया रास्ता’ शीर्षक से थी जो काफी हद तक उस की अभी की स्थिति को दर्शाती थीं. उस कहानी का नायक नायिका से इतना चिपका रहता था कि नायिका का जीना दूभर हो गया था. फिर नायिका ने एक नया रास्ता अपनाया. वह नायक से इतना ज्यादा चिपकने लगी कि नायक को कहना पड़ा कि इतनी नजदीकी भी ठीक नहीं. मुझे अपने लिए कुछ समय चाहिए.

नायिका ने उसे तब समझया कि वह उसे बस यही बताना चाहती थी कि हर व्यक्ति को चाहे वह पति हो, पत्नी हो, प्रेमी हो या प्रेमिका अपने लिए समय चाहिए होता है. क्या यही उपाय वह अपना सकती है प्रवीण के साथ? चंचलिका ने सोचा और फिर निर्णय ले लिया कि वह यही उपाय अपनाएगी प्रवीण को समझने के लिए. कुछ दिन तो प्रवीण शांत रहा पर फिर उसी ढर्रे पर चलने लगा. अब चंचलिका ने भी उसे दिनरात कौल करना शुरू कर दिया. कई बार उसे बिना काम के अपने फ्लैट पर बुला लेती. प्रवीण पहले तो खुशीखुशी उस की कौल उठाता रहा और खुशीखुशी उस के फ्लैट पर आता भी रहा पर बाद में उसे परेशानी होने लगी. एक दिन चंचलिका ने फोन कर उसे अपने फ्लैट पर बुलाया.

औफिस में थक कर उस समय वह घर आया ही था. चंचलिका के फोन पर वह उस के पास आ तो गया पर रास्ते में ट्रैफिक ने उस की हालत पतली कर दी. चंचलिका ने उसे बताया, ‘‘एक स्टोर से नमकीन लाई हूं. सोचा तुम्हारे साथ इस का स्वाद चखूं. प्रवीण बहुत परेशान महसूस कर रहा था. उस के दिमाग में कुछकुछ बात आ रही थी कि चंचलिका यह सब उसे यह समझने के लिए कर रही है कि आपस में कितना भी प्रेम हो अपने लिए सभी को वक्त चाहिए होता है. ‘‘चंचलिका, तुम यह सब यही समझने के लिए कर रही हो न कि हर व्यक्ति को अपने लिए वक्त चाहिए चाहे वह किसी के कितना भी नजदीक क्यों न हो?’’ प्रवीण ने कहा.

चंचलिका चुप रही. बस उसे देखती रही. प्रवीण ने आगे बात बताई, ‘‘मैं समझ गया हूं. पहले तुम ने स्पष्ट रूप से समझया था. मैं ने तुम्हारी बातों की परवाह नहीं की थी. अब तुम व्यवहार से इस बात को समझ रही हो. मैं समझ गया. आगे से मैं इस बात का खयाल रखूंगा कि तुम पर अपने प्रोग्राम न ला दूं, हम जो भी करें दोनों की सहमति से करें.’’ चंचलिका ने प्यार से प्रवीण की नाक पकड़ कर हिला दी. बोली, ‘‘चलो इसी बात पर नमकीन के साथसाथ चाय भी बना लाती हूं. और हां खाना भी मेरे हाथ का बना हुआ खा कर ही जाना.’’

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