Online Shopping Problems : कहते हैं न रिश्ते निभाने के लिए दूरियां मायने नहीं रखतीं. दिल्ली में बैठी प्रियंका और स्मिता ने भी यही सोचा था. यह दिन था 9 फरवरी 2024 का यानी उन की प्यारी नानी का जन्मदिन. सुल्तानपुर में बैठी नानी के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए उन्होंने मोबाइल उठाया और ऑनलाइन बेकरी इंडिया केक्स की साइट खोली. वेबसाइट पर ‘पूरे देश में मुफ्त उसी दिन डिलिवरी’ का दावा किया गया था. उन्होंने तुरंत केक और फूल ऑर्डर कर दिए. लगा बस अब नानी का फोन आएगा – “अरे वाह मेरे बच्चों बहुत प्यारा सरप्राइज है.”

पर फोन नहीं आया. आया तो बैंक का मैसेज कि ‘डिलीवरी चार्ज’ के रूप में 275 रुपये और देना होगा. यानी फ्री डिलीवरी का वादा महज विज्ञापन था. दोनों लड़कियों ने वे पैसे भी दे दिए. फिर इंतज़ार… और इंतज़ार. केक नहीं पहुंचा. नानी का जन्मदिन बीत गया.

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कंपनी से पूछा तो जवाब मिला – “हम तो गए थे मैडम, आपके घर वालों ने ही लेने से मना कर दिया.

” और रिफंड?”

“हमारी पॉलिसी में नहीं है.”

यहां से कहानी मुड़ती है.

ऐसे हालात में ज्यादातर लोग क्या करते? 1031 रुपये का यह हिसाब यह कह कर छोड़ देते, ‘जाने दो, कोर्ट-कचहरी के चक्कर में कौन पड़े.’

पर प्रियंका और स्मिता ने इस बात को यो ही जाने नहीं दिया. क्यों? क्योंकि वो केक सिर्फ मैदा चीनी नहीं था. उसमें नानी के 80वें जन्मदिन की उम्मीद लगी थी. उसमें एक नातिन का प्यार लिपटा था.

उन्होंने फोन रिकॉर्डिंग संभाल कर रखी थी. स्क्रीनशॉट ले रखे थे. दिल्ली के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया और 23 मई को जो फैसला आया उसने ई-कॉमर्स की दुनिया को हिला दिया.

कोर्ट ने कहा – “ये सिर्फ 1031 रुपये का मामला नहीं है. ये उस लम्हे का मामला है जो दोबारा नहीं आता.”

कोर्ट ने कंपनी को आदेश दिया,’ पूरा पैसा 7% ब्याज के साथ लौटाओ. ऊपर से 2000 रुपये मानसिक कष्ट के. 60 दिन में नहीं दिए तो ब्याज 8% हो जाएगा. ‘

यह फैसला क्यों खास है

पहली बार किसी अदालत ने माना कि ‘खास दिन’ की डिलिवरी फेल होना सिर्फ सर्विस में कमी नहीं है. ये दिल तोड़ना है. पहली बार ‘फ्री डिलिवरी’ लिखकर बाद में पैसे मांगने को ‘धोखा’ कहा गया. पहली बार ग्राहक की कॉल रिकॉर्डिंग को कंपनी के झूठ से बड़ा सबूत माना गया.

आज प्रियंका जीत गईं. पर ये जीत सिर्फ उनकी नहीं है. ये उस हर महिला की जीत है जो भाई की भेजी साड़ी की डिलीवरी न होने पर चुप रह जाती है. उस हर बहू की जीत है जिसकी एनिवर्सरी का गिफ्ट टूटा-फूटा पहुंचता है. हर मां की जीत है जो बच्चे के बर्थडे पर ‘आउट ऑफ स्टॉक’ का मैसेज देखकर ठगी सी रह जाती है.

आप क्या करें

आप डरना बंद करें. ऑनलाइन मंगवाना बंद नहीं करना है बस आंख खोलकर मंगवाना है.

1.व्हाट्सप्प चैट पर पूछें, “क्या वाकई फ्री डिलीवरी है? एक्स्ट्रा चार्ज तो नहीं लगेगा?” इस बातचीत का स्क्रीनशॉट ले कर रख लें. यह समय आने पर पक्का सबूत बन जाएगा.

2. आवाज़ रिकॉर्ड करें. कस्टमर केयर से बात हो तो रिकॉर्डिंग ऑन कर दें. प्रियंका ने यही किया था.

3. आप 1915 याद रखें. यह नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन है. एक कॉल पर कंपनी को नोटिस जाता है.

4. ‘ e-daakhil पर जाएं. घर बैठे मोबाइल से केस फाइल होता है. वकील की जरूरत नहीं. 5 लाख तक के केस में फीस जीरो है.

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