Stand-up Comedy : निधि गोयल एक भारतीय स्टैंडअप कौमेडियन हैं, जिन की कौमेडी जीवन के अनुभवों से बनती है. इस में वे व्यक्तिगत कहानी और तीव्र सामाजिक आलोचना को एकसाथ मिला कर साहसपूर्वक सब के सामने पेश करती हैं. वे भारत की पहली नेत्रहीन महिला स्टैंडअप कौमेडियन हैं, जो विकलांगता, लिंग, रिश्तों और समावेशन के आसपास मौजूद रूढि़वादिता का सामना करने के लिए कौमेडी को सहानुभूति और जागरूकता में बदल देती हैं.
प्रारंभिक यात्रा
मुंबई में जन्मी और पलीबढ़ी निधि 15 साल की उम्र में रैटिनाइटिस पिगमैंटोसा से पीडि़त हुईं, जिस के कारण उन की दृष्टि पूरी तरह चली गई. शुरुआत में वे एक गहरी दृश्य कलाकार थीं. उन्होंने पेंटिंग से सक्रियता और सार्वजनिक जुड़ाव की ओर रुख किया. साथी ही कौमिक्स से प्रोत्साहित हो कर निधि ने दिसंबर, 2015 में स्टैंडअप कौमेडी में डेब्यू किया तथा बातचीत और बदलाव में कौमेडी को एक शक्तिशाली प्रेरक के रूप में सामने लाईं.
कार्य एवं कलात्मक अभ्यास
निधि का स्टैंडअप उन की व्यक्तिगत जीवनयात्रा और सक्रिय विश्व दृष्टिकोण पर आधारित रहता है. इस में वे सामाजिक व्यवहार पर तीखी टिप्पणियों के साथ हास्य को भी जोड़ती हैं. वे कौमेडी वेन्यू, त्योहारों, कार्यकर्ता स्थानों और सम्मेलनों में विकलांगता और सामाजिक असुविधा को अपनी सरल कौमेडी से चुनौती देते हुए प्रदर्शन करती हैं. उन की परफौर्मैंस अकसर विकलांगता के बारे में आत्मजागरूक पंक्तियों से शुरू होती है जो दर्शकों की पूर्व धारणाओं को शीघ्र ही खत्म कर देती हैं.
निधि का काम कौमेडी क्लबों तक ही सीमित नहीं है, वे साथी कौमेडियन अदिति मित्तल के साथ बैड गर्ल्स सहित वेब सीरीज और सहयोगी शो में दिखाई दी हैं. उन की कौमेडी का आधार ऐसी कहानियां हैं जो पहचान, इच्छा व नजरिए पर निंदनीय, तीक्ष्ण विचार को बिना किसी हिचकिचाहट के दिखाती हैं.
सामाजिक बदलाव व योगदान
निधि विकलांगता अधिकारों और हास्य के बीच एक स्पष्ट संबंध स्थापित करने वाली भारत की पहली हास्य कलाकारों में से एक हैं. निधि ने कहानियों के स्टैंडअप द्वारा बताई जा सकने वाली बातों का दायरा बढ़ाया, जिस से समावेशन स्वयं एक मंच योग्य विषय बन गया.
निधि की कौमेडी दर्शकों को एकसाथ हंसने और उन विषयों पर विचार करने के लिए आमंत्रित करती है जो वर्जित समझे जाते हैं,
जिन में कामुकता, रिश्ते और विकलांगता के बारे में सामाजिक धारणाएं शामिल हैं. यहां निधि जटिल मुद्दों की गहराई को कम किए बिना उन पर विचार को सुलभ बनाती हैं, साथ ही प्रदर्शन से परे उन्होंने अन्य विकलांग कलाकारों को प्रेरित भी किया है कि वे कौमेडी को सशक्तीकरण और सामुदायिक जुड़ाव के माध्यम के रूप में अपनाए.
ठोस पहचान
पुरुषप्रधान समझे जाने वाली कला की बाधाओं को तोड़ कर निधि बड़े स्तर पर भारत की पहली नेत्रहीन महिला स्टैंडअप कौमेडियन के रूप में उभरी हैं.
वैब और मीडिया फौर्मैट में विकलांगता हास्य की वकालत को विशेष रूप में प्रदर्शित करती हैं. संयुक्त राष्ट्र महिला और अन्य अंतर्राष्ट्रीय निकायों के साथ सलाहकार की भूमिकाएं शामिल हैं. वे अपनी विकलांगता और लिंग अधिकार सक्रियता के लिए विश्व स्तर पर पहचानी जाती हैं.
