Aparna sen : अपर्णा सेन एक भारतीय फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखिका और अभिनेत्री के रूप में जानी जाती हैं. अपने शक्तिशाली महिला केंद्रित कहानी कहने के माध्यम से उन्होंने भारतीय सिनेमा को फिर से परिभाषित कर कई पुरस्कार प्राप्त किए हैं. इन में 9 राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कई फिल्म फेयर पुरस्कार ईस्ट और कई बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन पुरस्कार शामिल हैं. यही नहीं कला के क्षेत्र में भी उन के योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘पद्मश्री’ से सम्मानित किया है.

गृहशोभा इंस्पायर में अपर्णा सेन ने लाइफटाइम अचीवमैंट अवार्ड प्राप्त करते समय फिल्म जगत की युवा महिलाओं के लिए कहा, ‘‘जब मैं इस इंडस्ट्री में आई थी, तब उस समय हम कुछ महिलाएं ही थी तो यह एक तरह से एकल सफर ही रहा. लेकिन आज गिनती नहीं है कि कितनी महिलाएं इंडस्ट्री में ऐक्टर ही नहीं बल्कि डाइरैक्टर, प्रोड्यूसर भी हैं. आज बहुत सी मेनस्ट्रीम ऐक्ट्रैस मीनिंगफुल सिनेमा बना रही हैं, जिस से हमें भविष्य के लिए बहुत उम्मीद दिख रही है.’’

एक अदाकारा की शुरुआत

ऐंटरटेनमैंट की दुनिया में अपर्णा ने तब प्रवेश किया जब वे 15 वर्ष की थीं. 1960 की मौनसून शृंखला की प्रसिद्ध तसवीर के लिए ब्रायन ब्रेक ने उन की तसवीर खींची थी. यह तसवीर लाइफ के कवर पर छपी थी. फिर उन्होंने 16 साल की उम्र में सत्यजीत रे द्वारा निर्देशित 1961 की फिल्म ‘तीन कन्या’ में मृणमयी की भूमिका निभाई. यह उन की पहली फिल्म थी. इस के बाद उन्होंने फिल्म ‘जन अरणया’, ‘पीकू’, ‘आकाश कुसुम’, ‘बसंता बिलाप’, मेम साहब जैसी लोकप्रिय फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई है. वे फिल्म ‘ईमान धर्म’, ‘एक दिन अचानक’ और ‘घाट’ जैसी हिंदी फिल्मों का भी हिस्सा रही हैं. वे हिंदी और बंगाली फिल्मों का भी प्रतिष्ठित हिस्सा रही हैं.

निर्देशन यात्रा

अपर्णा सेन ने जेनिफर केंडल द्वारा अभिनीत फिल्म ‘36 चौरंगी लेन’ (1981) से लेखक, निर्देशक के रूप में अपनी शुरुआत की. शशि कपूर द्वारा निर्मित इस फिल्म को काफी आलोचनात्मक प्रशंसा मिली और अपर्णा को सर्वश्रेष्ठ निर्देशन के लिए अपना पहला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला.

‘36 चौरंगी लेन’ और ‘परोमा’ से ले कर ‘मिस्टर ऐंड मिसेज अय्यर’, ‘द जैपनीज वाइफ’ और ‘गोयनार बक्शो’ तक उन के काम ने लगातार परंपराओं को चुनौती दी है और कहानी कहने की भाषा का विस्तार किया है.

अवार्ड्स ऐंड अचीवमैंट

पद्मश्री: 1987 में भारत सरकार द्वारा चौथा सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार.

1981 में ‘36 चौरंगी लेन’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार.

1981 में ‘36 चौरंगी लेन’ के लिए इंग्लिश में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार.

1984 में ‘परोमा’ के लिए बंगाली में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार.

1995 में ‘युगांत’ के लिए बंगाली में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार.

2000 में ‘पैरोमिटार एक दिन’ के लिए बंगाली में सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार.

2002 में ‘मिस्टर ऐंड मिसेज अय्यर’ के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार.

अपर्णा को और बहुत से अवार्ड्स मिले हैं, साथ ही सेन ने दुनियाभर के फिल्म समारोहों में जूरी में भी काम किया है.1989 में वे 16वें मास्को अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में जूरी की सदस्य थीं. 2008 में उन्हें एशिया पैसिफिक स्क्रीन अवार्ड्स की अंतर्राष्ट्रीय जूरी में चुना गया. 2013 में उन्होंने दूसरे लद्दाख अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव की जूरी का नेतृत्व किया. सिनेमा से परे भी एक पत्रकार और संपादक के रूप में उन्होंने स्पष्टता और दृढ़ विश्वास के साथ सांस्कृतिक विमर्श को आकार  दिया है.

और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...