Vini Mahajan : जून, 2020 का दिन पंजाब के इतिहास में दर्ज हो गया. पहली बार किसी महिला  के हाथ में राज्य की सब से बड़ी प्रशासनिक कमान आई और यह नाम था विनी महाजन. 1987 बैच की आईएएस अधिकारी विनी महाजन ने 37 साल तक देश की सेवा की और अक्तूबर, 2024 में सम्मान के साथ रिटायर हुईं. उन की कहानी सिर्फ एक अफसर की तरक्की की कहानी नहीं है. यह हर उस लड़की की कहानी है जो क्लास में सब से आगे बैठती है, सवाल पूछती है और बड़े सपने देखती है.

किताबों से कुरसी तक का सफर

विनी महाजन ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कालेज से अर्थशास्त्र में औनर्स किया फिर आईआईएम कोलकाता से एमबीए. अमेरिकन यूनिवर्सिटी से ह्यूबर्ट हम्फ्रे फैलो भी रहीं. इतनी शानदार पढ़ाई के बाद कौरपोरेट की चमकदमक उन्हें खींच सकती थी. पर उन्होंने देश की सेवा चुनी. 1987 में आईएएस बनीं और पंजाब उन का घर बन गया. इस के बाद 1995 में रोपड़ की डीसी बनीं. वे जिले की पहली महिला उपायुक्त थीं. वहां उन्होंने साक्षरता का ऐसा अभियान चलाया कि पूरे देश में तारीफ हुई और उन्हें पुरस्कार भी मिला.

फिर जिम्मेदारी बढ़ती गई. दिल्ली में प्रधानमंत्री की संयुक्त सचिव, वित्त मंत्रालय में निदेशक, पंजाब में स्वास्थ्य, वित्त, उद्योग, आईटी, राजस्व जैसे हर मुश्किल विभाग की कमान संभाली. मुख्य सचिव के रूप में उन के कार्यकाल के दौरान पंजाब राष्ट्रीय सामान्य दस्तावेज पंजीकरण प्रणाली लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना. रिटायरमैंट से पहले जल शक्ति मंत्रालय में सचिव रहते हुए ‘हर घर जल’ के सपने को जमीन पर उतारा. गांवगांव नल से पानी पहुंचाना, बहनों को घूंघट से निकाल कर पानी समिति की अध्यक्ष बनाना— यह काम आसान नहीं था पर विनीजी ने कर दिखाया.

अफसर नहीं बड़ी बहन बन कर काम किया

विनी महाजन की सब से बड़ी खूबी थी जनता से जुड़ाव. फाइलें उन के लिए कागज नहीं किसी के जीवन का सवाल थीं. पंजाब में उन्होंने ई गवर्नैंस को बढ़ावा दिया ताकि बूढ़ी अम्मां को पैंशन के लिए धक्के न खाने पड़ें. अस्पतालों में दवाई का हिसाब डिजिटल किया. उद्योगों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लाईं. उन का मंत्र था— ‘‘शासन में दिमाग के साथ दिल भी लगाओ.’’ तभी तो कोविड जैसे संकट में भी पंजाब ने हिम्मत से मुकाबला किया.

घर और दफ्तर दोनों संभाले

दिलचस्प बात यह है कि जब विनीजी मुख्य सचिव थीं तब उन के पति पंजाब के डीजीपी थे. पंजाब को पहली बार ‘पावर कपल’ मिला था. पर विनीजी की पहचान कभी ‘किसी की पत्नी’ से नहीं बनी. वे हमेशा अपने काम, अपनी ईमानदारी और अपने फैसलों से जानी गईं. उन्होंने अपने परिवार को भी पूरी अहमियत दी.

विनी महाजन का मानना है कि लड़कियों को भी सपने देखने चाहिए. लड़कियां कलैक्टर, सचिव, वैज्ञानिक कुछ भी बन सकती हैं. बस मेहनत करो, कोई शौर्टकट नहीं. पढ़ाई, ईमानदारी और लगातार काम ही आगे ले जाता है.

समाज में महिलाओं की स्थिति

विनी महाजन कहती हैं कि समाज में काफी बदलाव आया है. चाहे प्रिविलेज वूमन की बात करें जो बड़ी पोजीशन पर पहुंच पाती हैं या ग्रामीण और शहरी हाउस वाइफ या वर्किंग वूमन की, महिलाओं की सोच बदली है. आज उन के पास जानकारी ज्यादा है. पेरैंट्स और फैमिली भी अपनी बेटियों को वैल्यू करते हैं, मौके देते हैं. फिर भी इसे परफैक्ट नहीं कहा जा सकता. अभी भी महिलाओं को बहुत सी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उन को इतनी रिस्पैक्ट अभी भी नहीं मिलती जितनी मिलनी चाहिए. हम सबों का दायित्व है कि  हम इस को सम?ों और दूर करने का प्रयास करना चाहिए. लड़कियों को अपने ऊपर कौन्फिडैंस होना चाहिए. अपने इंटेलैक्चुअल, इमोशनल, मैंटल और फिजिकल कैपेबिलिटी पर भरोसा होना चाहिए. वे बाकियों को भी इसी तरह रिस्पैक्ट के साथ ट्रीट करें. इस से अभी भी समाज में लड़केलड़की के बीच जो गैप है वह भी दूर हो जाएगा.

विनी महाजन ने दिखाया कि साड़ी पहन कर, बिंदी लगा कर भी सब से बड़ी कुरसी संभाली जा सकती है और वह भी पूरे आत्मविश्वास और गरिमा के साथ. आज वे रिटायर हैं पर हजारों लड़कियों के लिए रास्ता खोल गई हैं. याद रखिए जब एक औरत उठती है तो सिर्फ एक परिवार नहीं पूरा समाज उठता है. उन्होंने साबित किया कि औरतें सिर्फ घर ही नहीं बल्कि सरकार भी चला सकती हैं और वह भी पूरे अनुशासन, संवेदना और ताकत के साथ.

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