19 दिन 19 टिप्स: 59 की उम्र में भी इतनी बोल्ड हैं आयुष्मान की ‘मम्मी’

फिल्म बधाई हो में आयुष्मान खुराना की मां का रोल निभाने वाली 59 साल की बौलीवुड एक्ट्रैस नीना गुप्ता पर्सनल लाइफ में मां होते हुए भी स्टाइल में पीछे नहीं है. नीना जितनी अपनी एक्टिंग के लिए जानी जाती हैं उतना ही अपने बोल्ड फैशन के लिए भी जानी जाती हैं. नीना अपने फैशन से यंग एक्ट्रेसेस को भी पीछे छोड़ रही हैं. जहां उम्र बढ़ते ही हम फैशन करना छोड़ देते हैं, वहीं नीना अपने फैशन को लेकर सुर्खियों में बनी रहती हैं. आइए आपको दिखाते हैं उनके कुछ खास लुक जिसे आप भी चाहें तो कौपी कर सकती हैं.

1. समर में beach के लिए परफेक्ट है नीना का ये लुक

 

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Missing Goa #flashbackmonday

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समर में अगर आप beach में घूमने जा रहे हैं तो ये लुक आपके लिए परफेक्ट है. डैनिम शौर्ट्स के साथ फ्लोरल टौप आपके लुक के लिए परफेक्ट रहेगा.

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2. पार्टी के लिए नीना का ये लुक करें ट्राई

 

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Glamorous banne ki koshish jari hai.. Wearing these lovely earrings and choker from the #MasabaxTribe collection!

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अगर आप समर में किसी पार्टी का हिस्सा बनने जा रही हैं तो नीना का ये लुक आपके लिए परफेक्ट है. वाइट कलर जितना आपको ठंडक देगा वहीं ये लुक सेक्सी भी दिखाएगा.

3. नीना शर्ट लुक जरूर करें ट्राई

 

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London mood

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अगर आप भी अपने आप को कूल और सिंपल लुक देना चाहती हैं तो ये लुक आपके लिए परफेक्ट रहेगा. ग्रे शर्ट के साथ वाइट शूज आपके लुक को समर में ठंडक देगा.

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4. ट्राउजर और टीशर्ट का ये लुक करें ट्राई

 

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Chef has promised khichdi Waiting

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अगर आप कही सिंपल लेकिन सेक्सी दिखना चाहती हैं तो नीना गुप्ता को ये ग्रीन आउटफिट आपके लिए परफेक्ट रहेगा. ये आपको कम्फरटेबल के साथ-साथ ट्रैंडी भी दिखाएगा.

5. डैनिम लुक करें टाई

 

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Happy to go home

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अगर आप को भी डैनिम का शौक है तो नीना गुप्ता का ये डैनिम लुक आपके लिए परफेक्ट रहेगा. सिंपल डैनिम जैकेट के साथ रिप्ड जींस आपके लुक को कम्प्लीट बनाएगा.

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बता दें, एक्ट्रेस नीना गुप्ता बौलीवुड ही नही टेलीविजन के कई सीरियल्स का हिस्सा रह चुकी हैं. जिसमें वह मां के लुक में अपनी एक्टिंग की छाप छोड़ चुकी हैं.

#lockdown: नफरत के वायरसों के बीच मोहब्बत की किरणें

वायरस दर वायरस. हर तरफ वायरस. तरहतरह के वायरस. मीडियावायरस, राजनीतिकवायरस, धार्मिकवायरस, विचारधारावायरस, कट्टरतावायरस, खरीदवायरस और न जाने कौनकौन से और भी वायरस. ये न दिखने वाले नहीं, बल्कि दिखाई देने वाले वायरस हैं. इन वायरसों का उद्देश्य डेस्ट्रक्शन होता है, यानी नाश करना, आसान शब्दों में कहें तो नफरत पैदा करना व उसे फैलाना होता है. मतलब यह है कि समाज में मोहब्बत न बचे.

लेकिन, मानवतापसंद लोग मानवता से दूर नहीं हो रहे. वे मोहब्बत फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे. लौकडाउन के समय में भी एक 60-वर्षीय मुसलिम मरीज को खून देकर जान बचाने के वास्ते हिन्दू रक्तदाताओं का रेला उमड़ पड़ा. इंसानी मोहब्बत और भाईचारे की इस मजबूत कड़ी में गृहिणी से लेकर कलक्ट्रेट के कर्मचारी तक शामिल रहे.

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली शहर के निवासी 60 वर्षीय नूर मोहम्मद करीब एक सप्ताह से बीमार थे. उनकी तबीयत अधिक खराब होने पर उन्हें एक नर्सिंगहोम में भरती कराया गया, जहां उन्हें पीलिया बताते हुए डाक्टरों ने 10 यूनिट ब्लड की जरूरत बताई.

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मरीज नूर मोहम्मद के बेटे मोहम्मद अनवर बताते हैं कि लौकडाउन के चलते लोग अपने घरों से नहीं निकल पा रहे, ऐसे में इतने यूनिट ब्लड के बारे में सुनते ही सिर चकरा गया. बहरहाल, डाक्टर के जरिए ब्लडबैंक संचालक अजय संगल से संपर्क किया. इसके बाद चंद घंटों में ही रक्तदाताओं से ब्लड का प्रबंध हो गया. ये सभी 10 ब्लडडोनर हिन्दू हैं जिनमें गृहिणी सीमा मित्तल से लेकर कलेक्ट्रेट कर्मचारी मनोज कुमार तक शामिल हैं.

ब्लडबैंक ऐंड कम्पोनेंट सेंटर के प्रबंधक अजय संगल बताते हैं कि जागलान ब्लड ग्रुप, शामली, के नाम से पिछले दिनों समाजसेवी रवि जागलान द्वारा व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया है जिसमें कई डोनर जुड़े हुए हैं. इस व्हाट्सऐप ग्रुप में सूचना पोस्ट की गई कि अस्पताल में भरती एक मुसलिम मरीज को 10 यूनिट ब्लड की जरूरत है. यह सूचना पहुंचते ही ये लोग बिना धर्म, जाति और उम्र देखे ब्लड डोनेट करने पहुंच गए. इस तरह 10 यूनिट ब्लड का प्रबंध चंद घंटों में हो गया. रक्तदान करने वालों में सीमा मित्तल, सागर, केशव, सतेन्द्र पाल, मनोज कुमार, वासू, राधे, अभिजीत मित्तल, शिवम मित्तल, गौरव और तुषार जैन शामिल रहे.

गौरतलब है कि लौकडाउन के चलते ब्लडबैंकों में ब्लड की भारी कमी चल रही है. ऐसे में सारा दारोमदार डोनर्स पर है. इन डोनर्स का ब्लड डोनेट करना, दरअसल, हमारे देश भारत की गंगाजमुनी तहजीब, आपसी भाईचारा और मोहब्बत का एक और ताजा उदाहरण है ऐसे समय में जब नफरत पैदा करने व उसे फैलाने वाले उफान पर हैं. यहां तक कि वे खानेपीने की जरूरी चीजों के खरीदने में भी समुदाय विशेष के लोगों को निर्देश दे रहे हैं कि वे अमुक समुदाय के दुकानदारों से कुछ भी न खरीदें. बहरहाल, मोहब्बत की किरणें भी समयसमय पर इंसानियत को झकझोरती रहती हैं.

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जानें कैसे Coronavirus के इलाज में कारगर हो रही है प्लाज्मा थैरेपी 

कोरोना मरीज के बढ़ते आंकड़ो ने पूरे विश्व में नयी-नयी थैरेपी और रिसर्च पर जोर दिया है. साइंटिस्ट और रिसर्चर दिनरात इस बीमारी की वैक्सीन और दवाई पर काम कर रहे है, ऐसे में प्लाज्मा थैरेपी उन मरीजों के लिए वरदान हो रही है, जो कोरोना से अधिक पीड़ित है और सीरियस स्टेज में जा रहे है.

इस बारें में मुंबई की रिजनेरेटिव मेडिसिन रिसर्चर Stem Rx  बायोसाइंस सोल्यूशन्स प्राइवेट लिमिटेड के डॉ. प्रदीप महाजन कहते है कि प्लाज्मा थैरेपी कोई नयी नहीं है. सार्स वायरस, मिडिल ईस्ट वायरस, इबोला, एच1 एन 1 आदि सभी में इस थैरेपी का प्रयोग हुआ है. भारत में कई मरीज इस थैरेपी से ठीक हो चुके है, जो अच्छी बात है. असल में जब वायरल इन्फेक्शन किसी भी शरीर में होता है तो शरीर 2 फॉर्म में काम करती है.

इन्मेट इम्युनिटी और अडॉपटिव इम्युनिटी

इन्मेट इम्युनिटी में शरीर में जो वायरस है, उसे टारगेट करने के लिए नेचुरल किलर सेल्स एक्टिव हो जाते है ये वायरस को सेल के अंदर जाने से पहले और बाद में पहचान कर डायरेक्टली एटैक करते है. असल में वायरस के सेल के अंदर जाते ही एंटीजन आती है, वे नेचुरल किलर सेल और टी सेल होते है, जो एटैक करती है, लेकिन अगर सेल की संख्या बढ़ जाती है और एटैक कम होता है, तो वही सेल बीटा सेल को इन्फॉर्म कर एंटीबाडी बनाना शुरू कर देती है. इसे ही प्लाज्मा थैरेपी कहते है.

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कैसे करती है काम 

प्लाज्मा थैरेपी के प्रयोग से सार्स, स्वाईन फ्लू, इबोला आदि जैसे किसी भी वायरस को ख़त्म करने में अच्छा रेस्पोंस रहा, क्योंकि उस वायरस के बारें में सबको पता था. कोरोना वायरस के बारें में किसी को कुछ पता नहीं था, ऐसे में ये थैरेपी कारगर होगी या नहीं, समझना मुश्किल था.  चीन, इटली, अमेरिका, इजराइल आदि सभी जगहों पर इस थैरेपी का प्रयोग हो चुका है. भारत में ये पहली बार हो रहा है. विदेशो में इसके परिणाम अच्छे रहे. इसकी प्रक्रिया में तीन बातों पर ध्यान रखना जरुरी है,

  • इम्युनिटी अच्छी होने पर अगर कोई व्यक्ति कोरोना वायरस से ठीक हो जाता है. वायरस के प्रवेश के 72 घंटे के बाद में एंटीबाडी का लेवल बढ़ना शुरू हो जाता है और ये 3 महीने तक बना रहता है. इसके बाद उसका स्तर कम होने लगता है. प्लाज्मा थैरेपी के लिए सेम ब्लड ग्रुप के मैच का होना जरुरी है.
  • व्यक्ति रिकवरी के स्टेज में रहने की जरुरत है जब प्लाज्मा का लेवल अधिक हो, इन्फेक्शन के 6 महीने के बाद अगर कोई ब्लड देता है तो उसमें एंटीबाडी बहुत कम होती है. उस प्लाज्मा का कोई अर्थ नहीं बनता,
  • कितनी मात्रा में प्लाज्मा रोगी को देना है इस बारें में भी जानकारी होने की जरुरत है, करीब 200 से 250 एम एल प्लाज्मा दिया जा सकता है. ये मरीज के वेंटिलेटर में जाने से पहले या बाद में 24 से 48 ऑवर्स में दिया जा सकता है और 7 दिन में वह पूरी तरह से रिकवर हो जाता है.

इलाज का खर्चा 

ये खर्चीला नहीं है. इसमें ठीक हुए रोगी को ब्लड डोनेट करना है, उसमे से व्हाईट ब्लड सेल निकल देना पड़ता है और बचा हुआ ब्लड मरीज़ को दे दिया जाता है, ब्लड डोनेशन ही इसमें प्रमुख होता है, ये आमतौर के प्लाज्मा से थोडा अंतर होता है, क्योंकि इसमें कोरोना वायरस से ठीक हुए मरीज के ब्लड ही काम में लाये जाते है.

डोनेशन की कैसी हो व्यवस्था 

हालाँकि भारत में ये नयी थैरेपी है, ऐसे में बहुत कम लोगों को इसकी जानकारी है. व्यवस्था कैसी होनी चाहिए,ताकि अधिक से अधिक लोग ब्लड डोनेट कर सकें इस बारें में पूछे जाने पर डॉ महाजन कहते है कि सरकार की तरफ से एक स्कीम या फाउंडेशन होने की जरुँरत है, जिससे कोविड 19 से ठीक हुए मरीज़ ब्लड डोनेट कर ही अस्पताल से जाएँ, ताकि जरुरत के अनुसार मैचिंग ब्लड ग्रुप के आधार पर प्लाज्मा रोगी को दी जा सकें. कोरोना वायरस से जो भी मरीज़ अधिक सीरियस है और रेस्पोंस अच्छा नहीं कर रहे है. वे जल्दी ठीक हो सकेंगे और मृत्यु दर कम होगी. इसके अलावा इस प्रोसेस को हर अस्पताल नहीं कर सकता, क्योंकि इसके कुछ प्रोसेस है, हर किसी को इसका लाइसेंस नहीं मिल सकता. कब ब्लड लेना और कब ब्लड देना है, इन सारी प्रक्रिया को सही तरह से करना आवश्यक है. किसी को भी ये प्रोसेस करने नहीं दिया जा सकता. इसके लिए आई सी एम् आर और सेंट्रल ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी से परमिशन लेने की जरुरत है. नहीं तो लापरवाही होने की आशंका हो सकती है.

इसके अलावा डॉ. महाजन स्टेम सेल थैरेपी को भी इस दिशा में कारगर मानते है, जिसमें मेजोन गामा स्टेम सेल और नेचुरल किलर सेल्स के प्रयोग से भी कोरोना वायरस के रोगी को ठीक करने का सुझाव है. इसके प्रयोग के लिए सारे परमिशन लिए जा रहे है और जल्द ही इस पद्यति से भी इलाज शुरू हो जायेगा. इस पद्यति से भारत में कोरोना वायरस का इलाज पहली बार किया जायेगा.

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अभी अधिक रोगी के मरने की वजह डॉ. प्रदीप मरीजों का अधिक होना, बेड्स कम होना, वेंटिलेटर्स के लिए राह देखना, डॉक्टर्स और हेल्थ केयर्स के स्टाफ का कम होना मानते है. सही समय में सही इलाज मिलने पर मृत्यु कम होती है. उनके हिसाब से ये बीमारी घबराने या डरने वाली नहीं है, पर मीडिया, डॉक्टर्स और सरकार ने इसे विश्व में इतना बढ़ा-चढा दिया है, जिससे लोग डरने लगे है. इसमें बीमार लोगों से अधिक वे खतनाक है जो इस बीमारी को कैरी कर रहे है और उनमें कोई लक्षण नहीं है और वे लोग उसे बुजुर्गों और पहले से मधुमेह, दिल के मरीज़, कैंसर आदि बिमारियों से पीड़ित लोगों को अनजाने में इस वायरस को बाँट रहे है, जो सबके लिए खतरा बन रहा है. सभी को घर में रहना बहुत जरुरी है, ताकि ये रोग अधिक न फैले. डॉक्टर्स और हेल्थ केयर के लोगों में अधिक इस वायरस के फैलने की वजह इन्फ्रास्ट्रक्चर में कमी का होना कहते है. सोशल डिस्टेंसिंग और लॉक डाउन से ही इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सका है, जो सही कदम है.

19 दिन 19 टिप्स: मेकअप हाइलाइटर का है जमाना

गरमी के मौसम में ज्यादा मेकअप करना यानी मेकअप को पसीने में बहाना है. ग्लोइंग स्किन के लिए महिलाएं न जाने कितने जतन करती हैं. कभी घरेलू नुस्खें तो कभी तरह-तरह के ब्यूटी प्रौडक्ट का इस्तेमाल, लेकिन गरमी में काम की व्यस्तता और भागदौड़ के कारण चेहरे का ग्लो फीका पड़ जाता है. ऐसे में इस्टेंट ग्लो के लिए आप हाइलाइटर का इस्तेमाल कर सकती हैं.

 कैसे करें हाइलाइटर का इस्तेमाल

हाईलाइटर मेकअप का एक बेहद जरूरी हिस्सा होता है. यह आपके चेहरे को खूबसूरत व चमकदार के साथ-साथ चेहरे के जरूरी हिस्सों को हाइलाइट भी करता है. हाइलाइटर इस्तेमाल करने से पहले मौइश्चराइजर का इस्तेमाल जरूर करें. चेहरे पर नमी रहने से हाइलाइटर का ग्लो निखर कर आता है. अगर आप बिलकुल सिंपल लुक चाहती हैं तो मौइश्चराइजर के बाद बीबी क्रीम का इस्तेमाल करें और अपने चीकबोन पर फेन ब्रश के मदद से हाइलाइटर लगाएं.

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हाइलाइटर को सिर्फ चीकबोन पर ही नहीं बल्कि चेहरे के हर उन हिस्सों पर लगाया जा सकता है, जहां सूरज की किरणें पड़ती हैं. जैसे- चीकबोन्स, आइब्रो ब्रोन्स, नाक की टिप,होंठों के ऊपर. यदि हाइलाइटर का प्रयोग सही तरीके से किया जाए तो यह आपके चेहरे को बहुत आट्रेक्टिव बना देता है. लेकिन इसका प्रयोग करते वक्त सावधानी बरतना बहुत जरूरी है क्योंकि अगर यह थोड़ा भी ज्यादा लग गया तो आपका चेहरा एक चमचमाता हुआ बल्ब दिखने लगेगा. हाईलाइटर कई प्रकार के होते हैं. आप आपने स्किन के अनुसार इसका इस्तेमाल कर सकती हैं.

 जब मेकअप हो हाई

गरमी के मौसम में शादी-विवाह जैसे फंकशन में तो अधिकतर महिलाओं के चेहरे पर उदासी छाई रहती है. ऐसे मौके पर खुद को सुंदर दिखाना हर महिला की इच्छा होती है. लेकिन अधिक गरमी के कारण मेकअप खराब न हो जाए यह सोच कर महिलाएं परेशान रहती हैं.

ऐसे में शादी-विवाह में वाटरप्रूफ मेकअप का इस्तेमाल करें. मैट फाउंडेशन और कौम्पैक्ट पाउडर का यूज करें. चेहरे पर ग्लो और चमक लाने के लिए हाईलाइटर और हल्का ब्लशर लगा लें.

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यदि आपका चेहरा ड्राई है तो आप लिक्विड फाउंडेशन में हल्का लिक्विड हाइलाइटर को मिलकर चेहरे पर लगा लें. आंखों के लिए मसकारा का इस्तेमाल करें. लिप्स पर हल्का हाइलाइटर लगाने के बाद लिपस्टिक लगाएं. मेकअप फिनिश करने बाद चेहरे पर मेकअप सेटिंग स्प्रे का इस्तेमाल करना न भूलें. इससे आपका मेकअप फैलेगा नहीं. इस लुक में आपका चेहरा बहुत नैचुरल और ग्लोइंग नजर आएगा.

हाइलाइटर के अनेक रूप

हाइलाइटर के कई प्रकार होते हैं- जैसे औयली स्किन वालों को हमेशा पाउडर हाईलाइटर का इस्तेमाल करना चाहिए. यदि आपकी स्किन ड्राइ है तो क्रीम बेस्ड हाइलाइटर का ही इस्तेमाल करें. यह आपकी रूखी त्वचा को मौइश्चराइज भी करता है.

याद रहे जब भी कोई भी ब्यूटि प्रौडक्ट खरीदें अपने स्किन टोन को ध्यान में रख कर हाईलाइटर भी स्किन टोन के अनुसार ही खरीदें. फेयर स्किन के लिए पर्ली, शैमपेन शीन हाईलाइटर का इस्तेमाल करना चाहिए. यदि आपकी स्किन टोन मीडियम या टैंड लुक वाली है तो आप गोल्ड ब्रोंज, पीच, महरून या सैंड शेड वाला हाइलाइटर लगाएं.

अगर आप दिन में हाइलाइटर का इस्तेमाल कर रही हैं तो बिना शिमर वाले हाईलाइटर का इस्तेमाल करें. शिमर आपके चेहरे को और ज्यादा हाइलाइट करता है जो दिन में बिलकुल अच्छा लुक नहीं देता. रात को आप शिमर हाइलाइटर का इस्तेमाल कर सकती हैं. कम रोशनी में यह आपके चेहरे को पर्फेक्ट लुक देता है.

 हाइलाइटर ब्रश

हाइलाइटर इस्तेमाल करते वक्त सही ब्रश का यूज करना बहुत जरूरी है. इस से हाईलाइटर सही मात्रा में लग पाता है. यदि आप गालों और ललाट पर हाइलाइटर का इस्तेमाल करना

चाहती हैं तो बफिंग ब्रश का इस्तेमाल करें. चिकबोन्स के लिए फेन ब्रश, ब्रो ब्रोन और ब्रोन बोन के ऊपरी हिस्से के लिए फ्लैट ब्रश का इस्तेमाल करें.

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बौडी का गलो

हाइलाइटर सिर्फ चेहरे पर ही नहीं बल्कि बौडी के कई हिस्सों को हाइलाइट करने के लिए लगाया जाता है. अगर आपको अपनी टांगों को और खूबसूरत दिखाना हैं तो आप थाईबोन पर हाइलाइटर का प्रयोग करें. अगर आपने कोई ऐसी ड्रेस पहनी हैं जिस में आपकी कोलरबोन्स नजर आ रही है तो आप इसे हाइलाइटर कर इस्तेमाल से और निखार सकती हैं.

औफिस की मुश्किल सिचुएशन

औफिस में कई बार कठिन परिस्थितियां आती हैं क्योंकि यहां आप को कैरियर के साथसाथ कलीग्स और बौस का भी खयाल रखना पड़ता है. इन मुश्किलों से निबटने के लिए काफी सावधानी और संयम बरतने की जरूरत पड़ती है. जानिए ऐसी ही कुछ मुश्किल सिचुएशंस और उन के समाधान के बारे में.

1. आप का पूर्व बौस आप का जूनियर बन जाए

आप जिस कंपनी में काम करते थे, वहां के बौस का आप बड़ा सम्मान करते थे. अचानक एक दिन आप को पता लगता है कि वही बौस आप की मौजूदा कंपनी में काम करने लगा है और अब वह आप को रिपोर्ट करेगा यानी अब वह आप का जूनियर है. ऐसी स्थिति में आप को सिचुएशन को बहुत ही आराम से हैंडिल करना होगा. इस बात का खयाल रखें कि पूर्व बौस को इंडस्ट्री में आप से ज्यादा अनुभव है और मौजूदा स्थिति में उसे कंफर्टेबल होना चाहिए. आप को उस से सलाह लेनी चाहिए. अगर आप अपने पूर्व बौस के साथ काम करने में सहज नहीं हैं तो आप प्रबंधन की मंजूरी से एक अलग टीम के साथ काम कर सकते हैं. अगर आप को मौजूदा स्थिति में ही काम करना है तो पूर्व बौस से काम की चुनौतियों को ले कर चर्चा करें. आप अब भी अपने पर्सनल स्पेस में पूर्व बौस का सम्मान करते रहें. अपने नियोक्ता को इस बारे में बता दें कि वह शख्स आप का बौस रह चुका है. अगर आप खुद ऐसे व्यक्ति को रिपोर्ट कर रहे हैं, जो पहले आप के जूनियर के तौर पर काम कर चुका है तो प्रोफैशनल की तरह व्यवहार करें.

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2. आप के बारे में गौसिप का माहौल

कई बार आप को पता चलता है कि औफिस में आप को ले कर काफी नैगेटिव बातें हो रही हैं जिन्हें सुन कर आप का मन दुखी भी हो जाता है और आप का औफिस जाने का भी मन नहीं करता. ऐसी स्थिति में आप को धैर्य से काम लेना होगा. अगर आप सब से उलझेंगे तो आप के रिश्ते सब के साथ और भी बिगड़ जाएंगे. वक्त के साथसाथ ऐसी बातों पर से लोग खुद ही अपना ध्यान हटा लेते हैं. वहीं, अगर आप को अफवाहें फैलाने वाले का पता चल जाए तो अलग से उस से बात जरूर करें और प्रेमपूर्वक मामला सुलझा लें.

3. आप का दोस्त काम में दक्ष नहीं है

औफिस में अगर आप को प्रमोशन दे कर टीम लीडर बनाया गया हो और आप के बैस्ट फ्रैंड को इग्नोर किया गया हो क्योंकि वह अपने काम में दक्ष नहीं है, यह भी हो सकता है कि नियोक्ता आप को यह जिम्मेदारी सौंप दें कि आप उस की परर्फौमैंस सुधारने के लिए काउंसलिंग करें, अगर वह खुद को इंप्रूव नहीं कर पाया तो उसे नौकरी से निकाल दिया जाएगा. ऐसी स्थिति में अपने दोस्त से किसी रैस्टोरैंट वगैरह में मिलें. उसे बताएं कि आप को क्या जिम्मेदारी दी गई है और आप उसे दोस्त के रूप में पहली प्राथमिकता देते हैं, लेकिन फिर भी आप को बौस की बात को फौलो करना पड़ेगा. ऐसी स्थिति में वह आप की स्थिति को जरूर समझेगा और इस से आप दोनों का रिलेशन भी खराब नहीं होगा.

4. बौस के साथ सार्वजनिक झगड़ा

कभीकभी जब बौस बुरी तरह चिल्लाने लगता है तो अधीनस्थ कर्मचारी भी धैर्य खो देता है और वह भी पलट कर ऊंचे स्वर में जवाब देने लगता है. इस से मामला बिगड़ जाता है. कभी ऐसा हो जाए तो उस वक्त तुरंत अपनी जगह पर जा कर बैठ जाएं. लेकिन कुछ समय बाद सब के सामने बौस से गंभीरतापूर्वक क्षमा मांग लें. उन्हें बेहद सधी हुई भाषा में बता दें कि उन के जोर से बोलने के कारण आप ने अपना संयम खो दिया था, जो आप को नहीं खोना चाहिए था. इस से बौस को अपनी गलती समझ में आ जाएगी और आप के द्वारा सब के सामने माफी मांगने से उन के सम्मान को लगी ठेस भी दूर हो जाएगी. आप के और बौस के रिश्ते फिर से पहले जैसे हो जाएंगे.

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5. सहकर्मी जीवनसाथी को प्रमोशन मिल गया

अगर आप का पति/पत्नी आप की कंपनी में ही काम करता है और उसे प्रमोशन मिलता है तो आप को खुशी के साथसाथ ईर्ष्या भी होगी. खुद को थोड़ा समय दें और पता करें कि क्या आप इस स्थिति को उस कलीग के रूप में ले सकते हैं, जिसे प्रमोशन मिला है और आप को नहीं. इस बात को पहचानें कि आप की पहली प्राथमिकता निजी संबंध होने चाहिए. अगर आप को लगता है कि इस घटना का सामाजिक और निजी प्रभाव बहुत ज्यादा चुनौतीपूर्ण है तो आप कंपनी बदल सकते हैं. अगर आप को लगता है कि आप अपने इमोशंस पर कंट्रोल कर सकते हैं तो वहीं काम करते रहें. आप चाहें तो अपनी फीलिंग्स को अपने जीवनसाथी के साथ भी शेयर कर सकते हैं और पता कर सकते हैं कि वह इस के बारे में क्या सोचता है. अगर आप ऐसे व्यक्ति हैं जिसे प्रमोशन मिला है और जीवनसाथी उसी कंपनी में काम करता है तो पहले अपने निजी जीवन पर फोकस करना चाहिए और पार्टनर के प्रति संवेदनशील बनना चाहिए.

6. दो बौस के बीच जिन की न बनती हो

एकदूसरे को पसंद न करने वाले दो सीनियर्स के बीच में फंस जाना वाकई खतरनाक स्थिति है. ऐसी स्थिति में हर बौस आप से दूसरे बौस के बारे में जानकारी जुटाने में लगा रहेगा. इस से आप का समय बरबाद होगा और आप अपना काम पूरा नहीं कर पाएंगे. वैसे इस अनुभव से आप को पता लग जाएगा कि अलगअलग स्वभाव के 2 बौस को एकसाथ किस तरह से साधना है. आप को दोनों की निगाहों में अच्छा बने रहना होगा. किसी भी बौस की बुराई करने के बजाय हां में हां मिलाना अच्छा रहेगा. कोशिश करें कि किसी भी नैगेटिव चर्चा का हिस्सा बनने से बचें. कुछ समय बाद आप के बौस आप की इस आदत से काफी खुश होंगे कि आप पीठपीछे किसी की भी बातें नहीं करते.

7. नौकरी छोड़ना चाहते हैं

अगर आप जौब छोड़ना चाहते हैं तो किसी से चर्चा न करें. अगर कोई ऐसा कलीग है जिसे आप बचपन से जानते हैं और उस के साथ हर बार जौब स्विच की है तो उस से बातें शेयर कर सकते हैं. इस के अलावा किसी से बात शेयर करना खतरनाक हो सकता है.

8. शिकायत करना चाहते हैं

किसी की भी शिकायत करने से पहले फैक्ट्स जांच लें. ईमेल या किसी विश्वसनीय गवाह की मदद लें. अगर आप किसी जांचपड़ताल के बिना ही शिकायत करेंगे तो नुकसान आप को ही होगा.

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9. किसी से लड़ना चाहते हैं

औफिस के किसी सहकर्मी के साथ अनबन हो गई है और आप उसे मजा चखाना चाहते हैं. ऐसे में विचार करें कि क्या आप उस के साथ लड़ाई में जीत सकते हैं या नहीं. अगर नहीं जीत सकते तो रहने दें. ऐसा न हो कि खुद ही लड़ाई से परेशान हो कर रह जाएं.

#lockdown: फैमिली के लिए बनाएं दही के कबाब

अगर आप भी लॉकडाउन में कुछ टेस्टी और हेल्दी डिश ट्राय करना चाहते हैं तो दही के कबाब आपके लिए परफेक्ट रेसिपी है. दही के कबाब आसानी से बनने वाली रेसिपी है, जिसे आप अपनी फैमिली के लिए कभी भी स्नैक्स के रूप में सर्व कर सकते हैं.

हमें चाहिए

– पानी निकला दही

– भुना हुआ बेसन  (2-3 बड़े चम्मच)

– कार्न फ्लोर ( 03 बड़े चम्मच)

– तेल/घी  (02 बड़े चम्मच)

– हरी धनिया (02 बड़े चम्मच कटी हुई)

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– हरी मिर्च  (01 बारीक कटा हुआ)

– अदरक का पेस्ट (1/2 छोटा चम्मच)

– काली मिर्च पाउडर (1/5 छोटा चम्मच)

– नमक (स्वादानुसार)

दही के कबाब बनाने की विधि :

– सबसे पहले आपको पानी निकला दही बनाना होगा-

– इसके लिए 500 ग्राम ताजा दही लें और उसे सूती कपड़े में बांध कर पोटली नुमा बना लें.

– पोटली को थोड़ा ऊंचाई पर लटका दें और उसके नीचे एक बाउल रख दें.

– 4-5 घंटे में दही से पानी निचुड कर बाउल में जमा हो जाएगा और कपड़े में बचेगा पानी निकला दही.

– अब कबाब बनाने की बारी है-

– इसके लिए एक बड़े बाउल में हंग कर्ड को रखें और उसमें भुना बेसन मिला दें.

– साथ ही बाउल में हरी धनिया, हरी मिर्च, काली मिर्च पाउडर, अदरक पेस्ट और नमक डाल दें.

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– अब सारी चीजों को आपस में अच्छी तरह से मिला लें.

– अब कौर्न फ्लोर को एक बडी प्लेट में निकाल लें.

– इसके बाद थोड़ा सा कौर्न फ्लोर हाथों में लगाएं और कबाब बनाने भर का बेसन का मिश्रण हाथ में लें और उसे गोल कर लें.

– इसके बाद गोले को हथेलियों से दबा कर चपटा कर लें और उसके दोनों ओर कौर्न फ्लोर अच्छी तरह से लगा लें.

– सारे कबाब इस तरह तैयार करने के बाद नौन स्टिक तवा गरम करें.

– तवा गरम होने पर उसमें 2 छोटे चम्मच तेल डालें.

– तेल गरम होने पर कबाब को तवे पर रखें और धीमी आंच में हल्का भूरा होने तक सेंक लें.

– एक ओर का कबाब सिंकने के बाद उसे पलट दें और दूसरी ओर से भी इसी तरह सेंक लें.

– आपके स्‍वादिष्‍ट आपके दही कबाब तैयार हैं.

– कबाब को हरी धनिया की चटनी और टोमैटो सौस के साथ परोसें.

#coronavirus: प्लेवर्क फर्नीचर से औफिस को दें नया लुक

कोरोना का संक्रमण दिन प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. इंडिया में कुल मामले 28,000 से ज्यादा होने गई है. हाल ही में सरकार ने यह अन्नाऊंस किया कि  सरकारी दफ्तर और आईटी  कंपनी अब खुल जाएंगे.  वहीं दूसरी ओर लॉक डाउन के दौरान काफी मीडिया हाउस है जो रोज़ाना काम कर रहे है. ऐसे में सोचने वाली बात यह है कि ये वायरस एक दूसरे के संपर्क में आने से फैलता है.

हमें ऑफिस में भी कई तरह की सावधानी बरतने की ज़रूरत है. जैसे कि एक दूसरे से थोड़ा दूर बैठे, हर घंटे साबुन से हाथ धोये, अपने आस पास की चीज़े सैनीटाइज़ करे, मुंह पर मास्क लगाकर रखें. फ़ुरसीज़ ग्रुप, दक्षिण कोरिया सौंदर्य डिजाइन, गुणवत्ता सामग्री और उच्च कार्यक्षमता के साथ फर्नीचर लाइनों के लिए जाना जाता है.

प्लेवर्क्स” फर्नीचर

इंडो इनोवेशंस के सहयोग से, फ़ुरसीज़ ने “प्लेवर्क्स”  फर्नीचर को हाल ही में लांच किया. यह फर्नीचर खासकर कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए बनाया गया है. बता दें की आप यह फर्नीचर अपने दफ्तर में इस्तेमाल कर सकते है. यह आपको अपनी ऑफिस के सहकर्मियों से दूरी बनाएं रखने में आपकी मदद करेगा.

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वर्तमान विश्व परिदृश्य को देखते हुए, हम आने वाले समय में भी सोशल -डिस्टन्सिंग का पालन करना पड़ेगा.वह भी काफी लम्बे समय तक . प्लेवर्क्स, आपको  सोशल -डिस्टन्सिंग का पालन करने में आपकी मदद करेगा .

स्पेशल फीचर

प्लेवर्क्स फर्नीचर में स्क्रीन इनबिल्ट मिलेगी जिससे आप अपने सहकर्मी से आसानी से डिजिटल माध्यम से काम कर सकते है. यह फर्नीचर आप ऑफिस के कई हिस्सों में इस्तेमाल कर सकते है जैसे कि रिसेप्शन, वेटिंग एरिया, ब्रेक-आउट ज़ोन, एयरपोर्ट लाउंज आदि में रखा जा सकता है. इस उत्पाद का एक और दिलचस्प उपयोग आधुनिक बोर्डरूम में है.

प्लेवर्क्स, यह सुनिश्चित करने के लिए है कि यह सहकर्मियों से पर्याप्त दूरी बनाए रखते हुए उपयोगकर्ताओं को आराम के साथ-साथ दक्षता की आवश्यकता है.

आप यह मीटिंग के दौरान अपने कांफ्रेंस रूम में भी इसका इस्तेमाल कर सकते है . इसमें लगा टैबलेट स्टैंड  अडजस्टेबल है. इस फर्नीचर में  इलेक्ट्रॉनिक्स चीज़े चलाने के लिए इसमें  बिजली की सुविधा भी है और इसकी सीट आप आसानी से घुमा भी सकता है.

यह फर्नीचर आने वाले समय में हम सभी के लिए बहुत उपयोगी साबित हो सकता है. इसका इस्तेमाल आप घर में भी आसानी से कर सकते है. यह आपको घर में भी  सोशल -डिस्टन्सिंग के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है.

आशीष अग्रवाल, सी ई ओ ,इंडो इनोवेशन्स से बातचीत पर आधारित.

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तबियत बिगड़ने के बाद एक्टर ऋषि कपूर का हुआ निधन, बिग बी ने दी जानकारी

बॉलीवुड के फेमस एक्टर ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) को बुधवार रात मुंबई के एनएच. रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल में एडमिट किया गया, जिसके बाद उनका आज यानी 30 अप्रैल को निधन हो गया. बीती रात ऋषि कपूर की तबियत कुछ ज्यादा ही खराब हो गई, जिसकी वजह से उन्हें जल्दी में हॉस्पिटल ले जाया गया. वहीं ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) के निधन के खबर उनके खास दोस्त एक्टर अमिताभ बच्चन ने दी है.

एक्टर रणधीर कपूर ने भाई ऋषि कपूर के अस्पताल में भर्ती होने की खबर बताई थी कि उनकी तबियत ठीक नहीं है, इसलिए उन्हें एडमिट किया गया है. अस्पताल में ऋषि कपूर की पत्नी नीतू सिंह उनके साथ हैं.

बिग बी ने दी जानकारी

ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) के निधन की दुखद खबर बिग बी ने अपने ट्वीट के जरिए उनके फैंस को बताई और लिखा कि ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) हमें छोड़ कर चले गए हैं. मैं पूरी तरह टूट चुका हूं.  जानकारी के अनुसार, 67 वर्षीय ऋषि कपूर को चेस्ट इन्फेक्शन, सांस लेने में दिक्कत और हल्का बुखार है. उनका कोविड-19 टेस्ट भी कराया जाएगा. दो स्पेशलिस्ट डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं.

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पिछले तीन महीनों से ऋषि कपूर की तबियत कई बार खराब हो चुकी है, दिल्ली में शूटिंग के दौरान भी ऋषि की तबियत बिगड़ गई थी पिछले दिनों ही ऋषि कपूर ने फिल्म ‘शर्माजी नमकीन’ की शूटिंग दिल्ली में शुरू की थी. फरवरी महीने की शुरुआत में जब उनकी तबियत खराब हुई थी, तब उन्हें दिल्ली के अस्पताल में भर्ती करवाया गया था. खराब तबीयत की वजह से ऋषि अपने भांजे अरमान जैन की मेहंदी सेरिमनी में भी नहीं पहुंच पाए थे. उस समय भी उन्हें जल्दी दिल्ली के अस्पताल में ऐडमिट कराया गया था.

पिछली बार जब ऋषि कपूर मुंबई के अस्पताल में भर्ती हुए थे तब एक बातचीत में बताया था, ‘मुझे इंफेक्शन हुआ था और उसका इलाज चल रहा है. कोई घबराने की बात नहीं है. शायद प्रदूषण की वजह से मुझे इंफेक्शन हो गया.’

आपको बता दें वर्ष 2018 में खबर आई थी कि वो कैंसर से पीड़ित हैं, अपने इलाज के लिए वो न्यूयॉर्क गए. करीब एक साल तक वो न्यूयॉर्क में ही रहे और उनका इलाज चला. ऋषि कपूर जब न्यूयॉर्क में इलाज के लिए थे तो नीतू सिंह उनके साथ ही रहीं. ऋषि कपूर पिछले साल सितंबर में भारत लौटे थे. वहां करीब एक साल तक उनका कैंसर का इलाज चला.

ऋषि कपूर ने न्यू यॉर्क से लौटने के बाद 2012 में रिलीज हुई फ्रेंच फिल्म ‘द बॉडी’ की इसी नाम से बनी हिंदी फिल्म में काम किया था. इस फिल्म में उनके साथ इमरान हाशमी और शोभिता धुलिपाला मुख्य भूमिकाओं में थे.

सोशल मीडिया पर एक्टिव रहने वाले ऋषि कपूर ने 2 अप्रैल को ट्विटर पर एक पोस्ट किया था. अपनी पोस्ट में उन्होंने दीपिका पादुकोण के साथ आने वाली अपनी एक फिल्म के बारे में बताया था. उसके बाद से कोई पोस्ट नही किया.

जानें क्या है न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर, जिससे लड़े थे इरफान खान

साल 2018 में न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर बीमारी से एक्टर इरफान खान इस बीमारी से पीड़ित हुए थे, जिसके साल भर बाद लंदन में पूरी तरह इलाज करवाने के बाद इरफान ठीक हो गए थे, लेकिन आज यानी 29 अप्रैल को उनका पेट में इंफेक्शन के चलते निधन हो गया. The Lunchbox और Piku जैसी फिल्मों से फैंस का दिल जीत चुके एक्टर इरफान खान की न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर बीमारी के बारे में आज हम आपको पूरी जानकारी देंगे. साथ ही इसका इलाज किस तरीके से होता है इसके बारे में बताएंगे….

न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर उस अवस्था को कहते हैं, जिस में शरीर में हार्मोंन पैदा करने वाले ‘न्यूरोएंडोक्राइन सेल्स’ सामान्य से बहुत ज्यादा हार्मोन बनाने लगते हैं. एक तरह से यह शरीर में हार्मोंस बनने की अधिकता की बीमारी है. इसलिए इस ट्यूमर को कारसिनौयड्स भी कहते हैं.

हालांकि जिन कुछ खास लोगों में यह बीमारी सामने आई है, उन में से ज्यादातर के पेनक्रियाज में ये ट्यूमर पाए गए हैं.

लेकिन पेनक्रियाज शरीर की अकेली जगह नहीं है, जहां यह ट्यूमर हो सकता है. यह ट्यूमर शरीर के कई हिस्सों में हो सकता है, जैसे कि लंग्स, गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल टै्रक्स, थायरौयड या एड्रिनल ग्लैंड.

असल में यह शरीर में अपनी मौजूदगी के विशेष स्थान के आधार पर ही अपना आकार, प्रकार तय करता है. इस का इलाज संभव है, बशर्ते समय रहते या इस ट्यूमर के एडवांस स्टेज में पहुंचने के पहले इस का पता चल जाए.

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बहरहाल ये ट्यूमर एक नहीं 3 प्रकार के होते हैं.

  1. गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल न्यूरोजएंडोक्राइन टयूमर- यह गेस्ट्रोइंटेस्टाइनल टै्रक्ट के किसी भी हिस्से में हो सकता है, जिस में बड़ी आंत और एपेंडिक्स शामिल हैं.
  2. लंग न्यूरोजएंडोक्राइन ट्यूमर- यह फेफड़ों में होने वाला ट्यूमर है, जिस में खांसी के दौरान ब्लड आना और सांस लेने में दिक्कत होती है.
  3. पेंक्रियाटिक न्यूरोजएंडोक्राइन ट्यूमर – यह पेनक्रियाज में होने वाला ट्यूमर है. हार्मोन से जुड़ाव के कारण न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर ब्लड शुगर को काफी प्रभावित करता है.

सवाल है, आखिर यह ट्यूमर होता क्यों है? इस की कई वजह हैं, मसलन इस की एक सब से बड़ी वजह मातापिता में इस बीमारी के होने को माना जाता है. माता या पिता में से किसी एक को भी अगर यह बीमारी है तो बच्चों में भी इस के होने की आशंका बढ़ जाती है.

इस के होने का दूसरा बड़ा कारण स्मोकिंग और ढलती उम्र के साथ शरीर का कमजोर प्रतिरक्षातंत्र भी होता है. असल में जब हमारे अंदर किसी भी किस्म की बीमारी से लड़ने की स्वाभाविक ताकत नहीं रहती तो कोई भी बीमारी परेशान कर सकती है.

इस के अलावा अल्ट्रावायोलेट किरणें भी न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर होने के खतरे को बढ़ाती हैं. लेकिन इतना खतरनाक होने के बावजूद भी यह कई दूसरी बीमारियों की तरह बहुत चुपचाप वार करने वाली बीमारी है या कहें साइलैंट किरण है.

इस बीमारी की पहचान

आखिर हम कैसे जानें कि वे कौन सी चीजें हैं, जिन की शरीर में मौजूदगी से पता चल सके कि हम न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर का शिकार हो चुके हैं. इस की मौजूदगी के सामान्य लक्षण इस तरह है-ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, थकान या कमजोरी लगातार महसूस होती है. पेट में अकसर दर्द बना रहता है और वजन गिरने लगता है.

कई बार इस के चलते टखनों में सूजन भी आ जाती है और त्वचा में बहुत चमकीले धब्बे निकलने लगते हैं. जब यह बीमारी काफी ऊंची स्टेज में पहुंच गई हो और लोग इस का पता न लगा पा रहे हों तो भी इस का पता लगाया जा सकता है. मसलन अगर शरीर से सामान्य से ज्यादा पसीना आ रहा है और रह रह कर बेहोशी छा रही है. बहुत डलनेस महसूस हो रही है तो फिर इसे होने से कोई नहीं रोक सकता.

इस बीमारी में खासतौर पर शरीर में ग्लूकोज का लेबल तेजी से बढ़ने या गिरने लगता है. जिन लोगों को इस के बारे में ज्यादा कुछ मालूम न हो और इसे जानना चाहते हों तो इसे कुछ इस प्रकार समझना चाहिए.

— सीबीसी, बायोकैमेस्ट्री टेस्ट, सीटी स्केन, एमआरआई और बायोप्सी कर के इस बीमारी की पुष्टि की जाती है.

— इस के अलावा बेरियम टेस्ट, पैट स्केन, एंडोस्कोपी व बोन स्कैन भी इस का पता लगाने में सहायता करते हैं.

— आखिर ट्यूमर किस स्टेज में है यह भी कुछ जांचों से पता चल जाता है.

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जहां तक इस के इलाज का सवाल है तो इस का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि वह शरीर के किस हिस्से में है. साथ ही वह किस स्टेज में है.

इलाज के जो कई तरीके हैं, उन में से एक तरीका सर्जरी की मदद से इस ट्यूमर को हटाया जाना भी है. कुछ मामलों में रिजल्ट के आधार पर दोबारा सर्जरी भी की जाती है, ड्रग थैरेपी भी देते हैं. इस में कीमोथैरेपी, टारगेटेड थैरेपी और दवाएं ली जाती हैं.

साथ ही रेडिएशन और लिवर डायरेक्टटेड थैरेपी भी दी जाती है. इस बीमारी को शायद आज पूरी दुनिया इतनी गहराई से नहीं जान पाती, यदि यह खास बीमारी स्टीव जौब्स को न हुई होती. इस बीमारी से पीडि़त स्टीव जौब्स वास्तव में अमेरिकी मल्टीनेशनल कंपनी एप्पल के पूर्व फाउंडर थे, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे. स्टीव जौब्स की मौत का कारण पेनक्रियाटिक न्यूरोजएंडोक्राइन ट्यूमर था, जिस का खुलासा उन्होंने 2009 में एक ओपन लैटर में दिया था.

अलविदा मकबूल: जब कैंसर से जूझ रहे इरफान खान ने लिखा था ये इमोशनल लेटर

बौलीवुड से लेकर हौलीवुड तक अपनी एक्टिंग से सभी का दिल जीतने वाले एक्टर इरफान खान (Irrfan Khan) का 54 साल की उम्र में निधन हो गया. पेट में इंफेक्शन की परेशानी से जूझ रहे इरफान खान (Irrfan Khan) की आज यानी बुधवार 29 अप्रैल को निधन हो गया है.

‘न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर’ नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित रह चुके इरफान खान का मानना था कि ‘अनिश्चितता में ही निश्चितता है’. लंदन में इलाज के दौरान इरफान ने अपने चाहनेवालों के लिए एक खत लिखा था. आप भी पढ़िए इस खत की कुछ खास बातें.

लंदन से एक खत

एक वक्त गुजर चुका है जब पता चला था कि मैं हाई-ग्रेड न्यूरोएंडोक्राइन कैंसर से जूझ रहा हूं. यह मेरे शब्दकोश में एक नया नाम है, जिसके बारे में मुझे बताया गया कि यह एक असाधारण बीमारी है, जिसके कम मामले सामने आते हैं और जिसके बारे में अपेक्षाकृत कम जानकारी है और इसलिए इसके ट्रीटमेंट में अनिश्चितता की संभावना ज्यादा थी. मैं अब एक प्रयोग का हिस्सा बन चुका था.

मैं एक अलग गेम में फंस चुका था. तब मैं एक तेज ट्रेन राइड का लुत्फ उठा रहा था, जहां मेरे सपने थे, प्लान थे, महत्वकांक्षाएं थीं, उद्देश्य था और इन सबमें मैं पूरी तरह से अस्त-व्यस्त था. …और अचानक किसी ने मेरे कंधे को थपथपाया और मैंने मुड़कर देखा. वह टीसी था, जिसने कहा, ‘आपकी मंजिल आ गई है, कृपया उतर जाइए.’ मैं हक्का-बक्का सा था और सोच रहा था, ‘नहीं नहीं, मेरी मंजिल अभी नहीं आई है. उसने कहा, नहीं, यही है. जिंदगी कभी-कभी ऐसी ही होती है.’

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इस आकस्मिकता ने मुझे एहसास कराया कि कैसे आप समंदर के तेज तरंगों में तैरते हुए एक छोटे से कॉर्क की तरह हो! और आप इसे कंट्रोल करने के लिए बेचैन होते हैं.

इस उथल-पुथल, हैरानी, भय और घबराहट में अपने बेटे से कह रहा था, ‘केवल एक ही चीज जो मुझे अपने आप से चाहिए वह यह है कि मुझे इस मौजूदा परिस्थिति का सामना नहीं करना. मुझे मजबूत बने रहकर अपने पैरों पर खड़े रहने की जरूरत है, डर और घबराहट मुझ पर हावी नहीं होने चाहिए वरना मेरी लाइफ तकलीफदेह हो जाएगी.’

और तभी मुझे बहुत तेज दर्द हुआ, ऐसा लगा मानो अब तक तो मैं सिर्फ दर्द को जानने की कोशिश कर रहा था और अब मुझे उसकी असली फितरत और तीव्रता का पता चला. उस वक्त कुछ काम नहीं कर रहा था, न किसी तरह की सांत्वना, कोई प्रेरणा…कुछ भी नहीं. पूरी कायनात उस वक्त आपको एक सी नजर आती है- सिर्फ दर्द और दर्द का एहसास जो ईश्वर से भी ज्यादा बड़ा लगने लगता है.

जैसे ही मैं हॉस्पिल के अंदर जा रहा था मैं खत्म हो रहा था, कमजोर पड़ रहा था, उदासीन हो चुका था और मुझे इस चीज तक का एहसास नहीं था कि मेरा हॉस्पिटल लॉर्ड्स स्टेडियम के ठीक ऑपोजिट था. मक्का मेरे बचपन का ख्वाब था. इस दर्द के बीच मैंने विवियन रिचर्डस का पोस्टर देखा. कुछ भी महसूस नहीं हुआ, क्योंकि अब इस दुनिया से मैं साफ अलग था.

हॉस्पिटल में मेरे ठीक ऊपर कोमा वाला वॉर्ड था. एक बार हॉस्पिटल रूम की बालकनी में खड़ा इस अजीब सी स्थिति ने मुझे झकझोर दिया. जिंदगी और मौत के खेल के बीच बस एक सड़क है, जिसके एक तरफ हॉस्पिटल है और दूसरी तरफ स्टेडियम. न तो हॉस्पिटल किसी निश्चित नतीजे का दावा कर सकता है और ना स्टेडियम. इससे मुझे बहुत कष्ट होता है.

मेरे पास केवल बहुत सारी भगवान की शक्ति और समझ है. मेरे हॉस्पिटल की लोकेशन भी मुझे प्रभावित करती है. दुनिया में केवल एक चीज निश्चित है और वह है अनिश्चितता. मैं केवल इतना कर सकता हूं कि अपनी पूरी ताकत को महसूस करूं और अपनी लड़ाई पूरी ताकत से लड़ूं.

इस वास्तविकता को जानने के बाद मैंने नतीजे की चिंता किए बगैर भरोसा करते हुए अपने हथियार डाल दिए हैं. मुझे नहीं पता कि अब 8 महीने या 4 महीने या 2 साल बाद जिंदगी मुझे कहां ले जाएगी. मेरे दिमाग में अब किसी चीज के लिए कोई चिंता नहीं है और उन्हें पीछे छोड़ने लगा हूं.

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पहली बार मैंने सही अर्थों में ‘आजादी’ को महसूस किया है. यह एक उपलब्धि जैसा लगता है. ऐसा लगता है जैसे मैंने पहली बार जिंदगी का स्वाद चखा है और इसके जादुई पक्ष को जाना है. भगवान पर मेरा भरोसा और मजबूत हुआ है. मुझे ऐसा लगता है कि वह मेरे शरीर के रोम-रोम में बस गया है. यह वक्त ही बताएगा कि आगे क्या होता है लेकिन अभी मैं ऐसा ही महसूस करता हूं.

मेरी पूरी जिंदगी में दुनियाभर के लोगों ने मेरा भला ही चाहा है, उन्होंने मेरे लिए दुआ की, चाहे मैं उन लोगों को जानता हूं या ना जानता हूं. वे सभी अलग-अलग जगहों पर दुआ कर रहे थे और मुझे लगा कि ये सभी दुआएं एक बन गईं. इसमें वैसी ही ताकत थी जैसी पानी की तेज धारा में होती है और यह पूरी जिंदगी मेरे अंदर बसी रहेगी. यह मेरे भीतर एक नया जीवन उगते हुए देख रहा हूं जो हर एक दुआ से पैदा हुआ है. इन दुआओं से मेरे भीतर बहुत खुशी और उत्सुकता पैदा हो गई. वास्तव में आप अपनी जिंदगी को कंट्रोल नहीं कर सकते. आप धीरे-धीरे प्रकृति के पालने में झूल रहे हैं.

इरफान खान (Irrfan Khan) के अचानक चले जाने से उनके फैंस और पूरा बॉलीवुड सदमे में हैं. सबकी संवेदनाए उनके परिवार के साथ है.

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