मच्छर करें परेशान तो घर में लगाएं यह पौधे

गर्मियों का मौसम शुरू होते ही मच्छरों की भिन-भिन भी शुरू हो जाती है और बरसात के मौसम में तो इनकी तादात बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. शाम होते ही मच्छरों का आतंक सबकी परेशानी का सबब बनने लगता है. इन्हें भगाने के लिए कहीं नीम की पत्तियां सुलगायी जाती हैं, कहीं हिट मारी जाती है तो कहीं मस्कीटो कौयल जलाये जाते हैं. सरकार भी मच्छरों से शहर को निजात दिलाने के लिए तमाम उपक्रम करती है. गली गली मच्छर मार दवा का छिड़काव या धुएं वाली गाड़ी दौड़ायी जाती है, नालियां, गड्ढे और जलभराव की जगहें साफ करवायी जाती हैं. मगर फिर भी मच्छरों का आतंक कम नहीं होता. मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया जैसी बीमारियों से लोग परेशान रहते हैं.

कछुआछाप, हिट या औलआउट जैसे प्रौडक्ट आपके बच्चों की सेहत के लिए कितने सुरक्षित हैं, यह कहा नहीं जा सकता. घर के अन्दर हर वक्त इनको जलाये रखना भी सम्भव नहीं है. पर टेंशन न लें. अगर आप अपने घर को मच्छरों के प्रकोप से बचाये रखना चाहते हैं तो बस कुछ पौधे खरीद लाएं और अपनी बालकनी, आंगन, बगीचे और ड्राइंग रूम को इन पौधों से सजा दें. देखिएगा कि किस चमत्कारी ढंग से मच्छर-मक्खी आपके घर से छूमंतर हो जाते हैं. यह पौधे न सिर्फ आपके घर में मच्छरों की एंट्री को रोकेंगे, बल्कि इनसे फैलने वाली बीमारियों से भी आपके परिवार को बचाये रखेंगे. आइये जानते हैं इन जादुई खुशबूदार पौधों के बारे में.

1. जड़ी-बूटी है लेमन ग्रास

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लेमन ग्रास एक जड़ी-बूटी है जिसका वैज्ञानिक नाम सिम्बेपोगोन साइट्रेटस है. इसमें मौजूद नींबू की सुगन्ध के कारण इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है. यह एक बारहमासी घास है जो भारत और एशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पैदा होती है. हर घर में लेमन ग्रास का इस्तेमाल उसकी सुगंध की वजह से किया जाता है. इसको चाय के रूप में खूब पीते हैं. गौरतलब है कि लेमन ग्रास के पौधे का इस्तेमाल खुशबू के साथ मच्छर भगानेवाली कई दवाओं में भी किया जाता है. इसकी मनमोहक और ताजगीभरी खुशबू एक तरफ जहां तनाव दूर कर आपके मूड को फ्रेश करने का काम करती है, वहीं मच्छर इसकी खुशबू से दूर भागते हैं. तो आज ही लेमन ग्रास का पौधा अपने घर की बालकनी और ड्राइंगरूम में लाकर रख दीजिए और देखिये कैसे मच्छर आपके घर में झांकने से भी डरेंगे.

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2. सालों साल उगने वाला फूल है गेंदा

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गेंदा तो सालों साल उगने वाला फूल है. मंदिरों-मजारों पर हर दिन लाखों टन गेंदा चढ़ाया जाता है. भारत में घर-घर में गेंदे का पौधा लगाया जाता है. पीले रंग का यह फूल ना सिर्फ आपके घर की बालकनी को खूबसूरत बनाने का काम करता है बल्कि इसकी खुशबू मच्छरों और उड़नेवाले कीड़ों को भी आपसे दूर रखती है. मच्छरों को भगाने के लिए इस फूल की जरूरत नहीं होती, उसके लिए इसका पौधा ही काफी होता है. इसकी पत्तियों से निकलने वाली सुगन्ध मच्छरों को कतई पसन्द नहीं होती और वह इस पौधे से दूर ही रहते हैं. घर के दरवाजे, खिड़की, बालकनी में गेंदे के पेड़ रखिये और मच्छरों से अपने घर को सुरक्षित बनाइये.

3. स्वास्थ्य लाभ के लिए अच्छा है लैवेंडर

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हल्के बैंगनी रंग के फूलों वाले इस पौधे का इस्तेमाल स्वास्थ्य लाभ के लिए खूब किया जाता है. चिंता को दूर करना, तनाव से छुटकारा, त्वचा समस्या और मुंहासे का उपचार, रक्त परिसंचरण में सुधार और श्वसन समस्याओं का इलाज करने की क्षमता लैवेंडर के पौधे में है. लैवेंडर तेल का उपयोग अरोमाथेरेपी के दौरान भी किया जाता है. यह प्राकृतिक रूप से नींद को प्रेरित करने में मदद करता है. आपको शायद ही इस बात का पता हो कि आप मच्छरों को खुद से दूर रखने के लिए जिस मस्कीटो रिपेलेंट्स का इस्तेमाल करते हैं, उसमें भी लैवेंडर औयल मिलाया जाता है. अपने घर को महकाने के साथ मच्छरों को दूर रखने के लिए घर में लैवेंडर का पौधा लगाइये. इसके फूल देखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं और इनकी सुगन्ध तरो-ताजगी से भर देती है, मगर मच्छरों को इससे मितली आती है.

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4. बेस्ट है लहसुन

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आपने बचपन में अपने बड़े-बुजुर्गों से सुना होगा कि लहसुन खाने से खून में एक अलग तरह की महक आने लगती है, जिसे मच्छर बिल्कुल पसंद नहीं करते हैं. अगर आप खुद लहसुन का सेवन नहीं करना चाहते तो अपने घर में लहसुन का एक पौधा लगा लें. सरसों के तेल में लहसुन भूनने से उठने वाला धुआं भी मच्छरों को दूर भगाता है. लहसुन का पौधा घर में लगाकर आप कई तरह से इसके फायदे उठा सकते हैं.

5. पूजनीय पौधा है तुलसी

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भारतीय घरों में तुलसी पूजनीय पौधा है. लगभग हर घर में तुलसी का पौधा मिल जाता है. तुलसी में औषधीय गुण तो होते ही हैं, इसका पौधा हवा साफ रखने के साथ-साथ छोटे-छोटे कीड़े और मच्छर को भी आपसे दूर रखता है. इसके पत्तों का इस्तेमाल आप चाय और काढ़ा बनाने के लिए कर सकते हैं. यदि आप अपने घर की बालकनी में सात-आठ गमलों में तुलसी के पौधे लगा कर रखें तो यह सुरक्षाकर्मी की तरह आपके घर पर पहरा देंगे और इनसे उत्पन्न सुगन्ध से मच्छर आपके घर के पास भी न फटकेंगे.

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Edited by Rosy

7 टिप्स: बिजी लाइफस्टाइल में बचाएंगे आपका समय

हर कोई खूबसूरत दिखना चाहता है लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी लाइफ में यह आसान काम नही है. हाल ही किए गए एक सर्वे के मुताबिक एक औफिस जाने वाली महिला मेकअप के लिए 55 मिनट देती है. इसीलिए अपनी खूबसूरती को निखारने के लिए और अपने डेली रूटीन को बदलने के लिए इन टिप्स को जरूर फौलो करें…

1. रात को कर लें प्लानिंग…

रात को ही सुबह की प्लानिंग  करते हुए अपने सामान को व्यस्थित रखें, इससे सुबह आप को फैसला लेने में कम वक्त के साथ सामान ढूंढ़ने में भी समय नही लगेगा.

2. बालों के लिए माइक्रोफाइबर टौवेल का इस्तेमाल…

रोजाना इस्तेमाल होने वाले टौवेल के मुकाबले माइक्रोफाइबर टौवेल ज्यादा जल्दी पानी सोखता है. यह न केवल आप के ड्रायर से बाल सुखाने का समय आधा करता है, बल्कि आप के बालों को लगने वाली गरमी की मात्रा भी कम करता है.

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3. बीबी या सीसी क्रीम…

रोजाना इस्तेमाल होने वाली बीबी या सीसी क्रीम में एसपीएफ होता है. यह आप की त्वचा को नमी देने के साथ कोमल बनाती है. साथ ही धूप से बचाते हुए चमकदार बनाती है. इसे लगाने के बाद आप को कंसीलर, फाउंडेशन, मौइस्चराइजर और सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नही पड़ती है.

4. क्विक फिक्स की करें तलाश

अगर आप का नेलपेंट टूट रहा है या सुबह बाल बहुत ज्यादा चिकने हो गए हैं तो क्विक फिक्स की तरह नेलपेंट री-टचिंग या ड्राई शैंपू का इस्तेमाल करें. लेकिन अगर आप नाखूनों पर पेंट लगाने बैठ गईं या बालों को धोने लगीं तो देर होनी तय है.

5. लास्ट में करें मेकअप…

सुबह कपड़े पहनकर रेडी होने के बाद ही मेकअप करें. समय न होने पर थोड़ा बहुत मेकअप भी चल जाता है, क्योंकि बाद में समय होने पर मेकअप री-टच भी किया जा सकता है.

6. कराएं सही हेयरकट…

अगर आप का हेयरकट सही है तो आप अपने 30 मिनट रोज बचा सकती हैं. अपने बालों का ऐसा हेयरस्टाइल रखें कि जिस से उन्हें मेंटेन करने में ज्यादा वक्त न लगे. इसके लिए अपनी हेयर स्टाइलिस्ट से बात करें.

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7. टाइम मैनेजमेंट है जरूरी…

त्वचा की देखभाल या ब्यूटी रिजीम से बचने के लिए टाइम मैनेजमेंट जरूरी है, जैसे आईब्रो प्लक करना, क्यूटिकल्स को क्लिप करना या एक्सफोलिएटिंग. यह काम वीकेंड के लिए रख सकती हैं.

साज़िशों के भंवर से क्या बच पाएगा, अनिरुद्ध और बोंदिता का रिश्ता?

बंगाल में बसी ये कहानी है 8 साल की बोंदिता की, जो बहुत ही शरारती और चंचल है. जाने-अनजाने में ही सही, पर वो समाज में हो रहे भेद-भाव और कुरीतियों पर अक्सर सवाल उठाती रहती है, जिसे सुन सब लोग दंग रह जाते हैं. कहानी का दूसरा मुख्य किरदार है अनिरुद्ध, जो लंदन से लॉ की पढ़ाई पूरी करके अपने देश वापस आया है. उसने इन सामाजिक कुरीतियों से देश को आज़ाद करने की ठान रखी है.

बोंदिता को बचाने के लिए शादी करता है अनिरूद्ध

अब तक की कहानी में आपने देखा कि बोंदिता को सती होने और उसकी जान बचाने के लिए अनिरुद्ध उससे शादी कर लेता है. लेकिन सभी अनिरुद्ध के फ़ैसले के खिलाफ़ हैं.उसके पिता बिनॉय, बोंदिता को घर से निकालने के लिए वृंदाबन से विधवाओं को बुलाते है,लेकिन अनिरुद्ध बोंदिता को वापस ले आता है. अनिरुद्ध के चाचा, त्रिलोचन बासी बिये रस्म करवाना चाहते हैं पर अनिरुद्ध ये रस्म करने से मना कर देता है क्योंकि वो बोंदिता को पत्नी नहीं, अपनी ज़िम्मेदारी मानता है.

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बोंदिता से दोस्ती करती है सौदामिनी

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एक तरफ बोंदिता, अनिरुद्ध से रस्म पूरी करने के लिए कहती है ताकि उसकी माँ उसके पास आ सके, तो दूसरी तरफ त्रिलोचन, उसकी माँ को धमकी देते हैं कि अगर वो बोंदिता के पास आई तो इसका अंजाम अच्छा नहीं होगा. उधर सौदामिनी, जो अनिरुद्ध से प्यार करती है, बोंदिता से मिलने के बाद उसे और अनिरुद्ध को अलग करने की चाल चलती है. सौदामिनी बोंदिता से दोस्ती कर लेती है और उसे घर से निकलवाने के लिए सही मौक़े ढूँढने लगती है. त्रिचोलोचन भी ऐसे ही एक मौक़े की तलाश में है जिससे वो बोंदिता को उसके घर भेज सके और अनिरुद्धके जिंदगी से हमेशा के लिए दूर कर दे.

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क्या सौदामिनी अपनी चाल में कामयाब हो पाएगी? क्या त्रिलोचन को ऐसा कोई मौक़ा मिलेगा? क्या इन साज़िशों से अंजान  अनिरुद्ध बचा पाएगा अनपे और बोंदिता ले रिश्ते को.जानने के लिए देखते रहिए बैरिस्टर बाबू, सोमवार से शुक्रवार रात 8.30 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

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Serial Story: उड़ान (भाग-3)

आखिर एक दिन उस का मन इतना विरक्त हुआ कि उस ने तय कर लिया कि वह अपने केश उतरवा देगी.

घर में उत्सव जैसा माहौल था. नाई आया. आंगन में एक पीढ़े पर वह बैठी. नाई ने अपना उस्तरा तेज किया और उस के सिर पर फेरना शुरू किया. केशगुच्छ जमीन पर गिरते गए. नाई के जाने के बाद घर की बड़ीबूढि़यां आईं और बोलीं, ‘‘चलो बेटी, अब नहा लो.’’

अरुणा उठ खड़ी हुई. नहा कर उस ने एक कोरी रेशम की साड़ी पहनी जो विधवाओं का लिबास था. अब उस की दिनचर्या बिलकुल बदल गई थी. उस के हिस्से में आए जप, तप, पूजापाठ, व्रतउपवास और संयमी जीवन.

उस के गांव से कुछ स्त्रियां तीर्थयात्रा पर जा रही थीं. अरुणा भी उन के साथ हो ली.

घर लौटी तो हमेशा की तरह उस के भाई उसे बसस्टैंड पर लेने आए थे.

‘‘कहो अक्का, तुम्हारी यात्रा सुखद रही न?’’ केशव ने पूछा.

‘‘हां,’’ वह बताने लगी, ‘‘मैं ने चारों धाम के दर्शन कर लिए. मेरा जीवन सार्थक हो गया.’’

उस ने देखा राघव कुछ अनमना सा था.

‘‘क्या बात है राघव, तुम्हारी तबीयत तो ठीक है न?’’

‘‘हां, अक्का.’’

नागमणि द्वार पर खड़ी उस का रास्ता देख रही थी.

‘‘भाभी, मैं तुम सब के लिए उपहार लाई हूं,’’ अरुणा बोली, ‘‘तुम्हारे और जया के लिए चंदेरी साडि़यां…’’

कहतेकहते उस की निगाह अंदर सहन में झूले पर बैठी जया पर पड़ी तो वह ठिठक गई.

‘‘अरे, यह क्या?’’ उस के मुंह से निकला.

जया का गला व माथा सूना था. सारे सुहाग के चिह्न नदारद. एक मैली सी साड़ी लपेटे वह शून्य में ताकती अनमनी सी बैठी थी.

‘‘भाभी,’’ अरुणा ने अस्फुट चीत्कार किया, ‘‘यह क्या देख रही हूं मैं? यह कब और कैसे हुआ?’’

नागमणि ने रोरो कर बताया कि जया का पति उसे मायके छोड़ने आया था. सुबह नदी में नहाने गया. हेमावती नदी में बाढ़ आई हुई थी. सुरेश तैरते हुए एक भंवर में फंस गया और तुरंत डूब गया.

‘‘ओह, इतना बड़ा हादसा हो गया और आप लोगों ने मुझे खबर तक न की.’’

‘‘यही नहीं,’’ नागमणि रो कर बोली, ‘‘पति की मृत्यु की खबर से जया को इतना गहरा सदमा लगा कि उसी शाम उसे प्रसव वेदना हुई और एक सतमासा बच्चा पैदा हुआ, वह भी मरा हुआ. इस दोहरे आघात से लड़की एकदम विक्षिप्त सी हो गई है. न किसी से बोलतीचालती है न ठीक से खातीपीती है. बस, दिनभर गुमसुम सी इस झूले पर बैठी रहती है.’’

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‘‘लेकिन आप लोगों ने इस के गहने क्यों उतरवा दिए? यह तो बड़ी ज्यादती है.’’

‘‘हम ने नहीं, इस ने खुद उतार फेंके हैं. मुझे तो डर है कि यह कहीं दुख से पागल न हो जाए.’’

‘‘ओह,’’ अरुणा ने ठंडा निश्वास छोड़ा. इस भतीजी से उसे बहुत लगाव था. पलभर में उस का सुखी संसार उजड़ गया था.

कुछ दिन बाद बैठक में भाई राघव, भाभी नागमणि, भतीजे श्रीधर और भतीजी जया के साथ अरुणा बैठी हुई थी. अचानक भाई ने प्रसंग छेड़ा.

‘‘स्वामीजी ने कहा था कि जया मांगलिक है इसलिए उस का एक वटवृक्ष से गठबंधन करा कर बाद में उस का विवाह करना चाहिए. हम ने वह भी किया. फिर भी पता नहीं क्यों यह हादसा हो गया? स्वामीजी के अनुसार तो यदि एक नवग्रह जाप करा कर ग्रहशांति के लिए एक छोटा सा यज्ञ करा दिया गया होता तो यह अनर्थ न होता.’’

‘‘उन की छोड़ो, आगे की सोचो. अब जया के बारे में क्या इरादा है?’’

‘‘क्या मतलब?’’

‘‘उसे यों मझधार में तो छोड़ा नहीं जा सकता. तुम लोग उस की दूसरी शादी क्यों नहीं कर देते?’’

‘‘दूसरी शादी?’’

नागमणि भौचक उस का मुंह ताकने लगी. उस के होंठ कांपे और आंखों से आंसू ढुलकने लगे, ‘‘अक्का, क्या यह संभव है?’’

‘‘क्यों नहीं.’’

‘‘लेकिन लोग क्या कहेंगे? समाज इस की अनुमति देगा?’’ राघव ने टोका.

‘‘राघव, तुम किस समाज की बात कर रहे हो? हम लोग भी तो समाज का अंग हैं और तुम तो गांव के मुखिया हो. सब के अगुआ हो. तुम्हें यह क्रांतिकारी कदम उठाना ही होगा. तुम्हें एक दृष्टांत कायम करना होगा. आखिर किसी को तो पहल करनी चाहिए तभी तो इन कुरीतियों का अंत होगा.’’

‘‘लेकिन बिरादरी वाले हमें जीने नहीं देंगे.’’

‘‘न सही, पर बेटी पहले है या बिरादरी? जरा सोचो, जया के पति की अकाल मृत्यु हुई है, पर तुम लोग जया को जीतेजी मार रहे हो. क्षति उस की हुई और सजा भी वही भुगते. यह कहां का न्याय है?’’

‘‘अक्का ठीक कह रही हैं,’’ केशव ने कहा.

‘‘लेकिन मेरा मन इस की गवाही नहीं देता. हमारे हिंदू धर्म में विधवा विवाह वर्जित है.’’

‘‘अन्य धर्मों में विधवा विवाह की छूट है. मुसलमानों और ईसाइयों में विधवा विवाह होते रहते हैं. पता नहीं, हम हिंदू ही नारी के प्रति इतने बर्बर क्यों हैं? पुरुष एक छोड़ दस शादियां कर सकता है. एक पत्नी के मरने पर दोबारा कुंआरी कन्या से विवाह कर सकता है. ये सारे कायदेकानून, सारे प्रतिबंध स्त्रियों के लिए ही हैं. क्यों न हों, ये नियम पुरुषों ने ही तो बनाए हैं. लेकिन अब सारे देश में बदलाव की लहर बह रही है.

‘‘स्त्रियों के हित में नित नए कानून बन रहे हैं. स्त्रियां अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं. वे अन्याय के विरुद्ध आवाज उठा रही हैं, पर अफसोस, हमारा गांव वहीं का वहीं है. वही संकीर्ण मानसिकता, वही पिछड़ापन. कुप्रथाओं के मकड़जाल में फंसा, तंत्रमंत्र, छुआछूत, टोनाटोटका, झाड़फूंक और अंधविश्वासों से घिरा है हमारा ग्रामीण समाज. ऊपर से हमारे धर्म के ठेकेदार हमें धर्म की दुहाई दे कर तिगनी का नाच नचाते रहते हैं. मैं यह सब इसलिए कह रही हूं कि हमें जया को आजीवन रोने व कलपने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए. उस का भविष्य संवारने के लिए कोई ठोस कदम उठाना चाहिए.’’

‘‘मैं अक्का से सहमत हूं,’’ केशव बोला, ‘‘हमें जया की दूसरी शादी कर देनी चाहिए. मेरी नजर में एक अति उत्तम लड़का है. वह सुलझे विचारों वाला है. उस की सोच नई है. मैं उस से बात करूंगा.’’

‘‘ठीक है, पर एक बात, जातपांत को ले कर कोई बंदिश नहीं होनी चाहिए. जया को इस माहौल से निकालो. उसे शहर भेजो. वहां के उन्मुक्त वातावरण में उसे सांस लेने दो. उस के पंख मत कतरो. उस पर अंकुश मत लगाओ. उसे उड़ान भरने दो. उसे स्वच्छंद विचरने दो. उस के  व्यक्तित्व को विकसित होने दो.’’

‘‘अक्का, तुम ने भी तो कम उम्र में अपने पति को गंवाया था. तुम ने भी तो सारी उम्र निष्ठा से वैधव्य धर्म का पालन किया.’’

‘‘राघव, उस समय मेरे सामने और कोई विकल्प नहीं था. मुझ में मातापिता के विरुद्ध जाने की हिम्मत नहीं थी. लेकिन यह जरूरी नहीं कि जया का हश्र मेरे जैसा हो. उस में और मुझ में एक पीढ़ी का फर्क है. हमारे समय में लड़कियों को पढ़ायालिखाया नहीं जाता था. उसे पहले पिता फिर पति और फिर पुत्र का आश्रित हो कर रहना पड़ता था. विधवा होना तो उस के लिए एक बड़ा अभिशाप था.

अपनी इच्छाओं का दमन कर, रूखासूखा खा कर, मोटाझोटा पहन कर वह एक उपेक्षित की जिंदगी गुजारती थी. उसे मनहूस, कुलच्छिनी माना जाता था और उस की दशा जानवरों से भी बदतर होती थी. तुम तो जानते हो कि हमारी तमिल भाषा में ‘मुंडे’ यानी ‘विधवा’ गाली है. ‘मुंडेदे’ यानी विधवा की अवैध संतान भी एक गाली है. लेकिन अब हम विधवा के प्रति सदय हैं. हम में जागरूकता आई है. हम ने कई पुरानी कुप्रथाओं का त्याग किया है. एक समय था कि हमारे देश में सती का चलन था. बालविवाह और देवदासी की प्रथा थी. हमारे दक्षिण भारत के गांवों में नवजात बच्चियों को दूध के गागर में डुबो कर मार दिया जाता था. अब जमाना बदल रहा है. हमें जमाने के साथ चलना चाहिए. जया पढ़ीलिखी है, सबल है, सक्षम है. उसे स्वावलंबी बनने दो. उसे नया जीवनदान दो.’’

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नागमणि अरुणा के पैरों पर गिर पड़ी, ‘‘अक्का, मुझे क्षमा कर दो. मैं ने आप को बहुत जलीकटी सुनाई है. आप को बहुत दुख पहुंचाया है.’’

‘‘वह सब भूल जाओ. अब हमारे सामने जया की ज्वलंत समस्या है. इस का समाधान ढूंढ़ना है. जिंदगी जीने के लिए है, घुटघुट कर मरने के लिए नहीं.’’

वह उठ कर जया की बगल में जा बैठी. उस की पीठ पर हाथ फेरते हुए उस ने कहा, ‘‘क्यों बिटिया, मैं ने ठीक कहा न?’’

जया के निस्पंद शरीर में तनिक हरकत हुई. उस ने सिर घुमा कर अरुणा को देखा और बिना कुछ बोल अपना सिर उस के कंधे पर टिका दिया.

रीमा कागती की वेब सीरीज में पुलिसवाले के रोल में नजर आएंगे ‘KAAL’ फेम सोहम शाह 

तुम्बाड फेम सोहम शाह जिनकी फिल्म को समीक्षकों द्वारा सराहा गया था, अब एक और दिलचस्प प्रोजेक्ट के साथ वापस आ गए हैं. खबरों के अनुसार सोहम ने रीमा कागती द्वारा निर्देशित वेब सीरीज की शूटिंग शुरू कर दी है .

सोहम सीरीज़ में एक पुलिस वाले का किरदार निभा रहे हैं, जो की इस सीरीज़ में एक छोटे शहर का निवासी  है. चूंकि सोहम पहले से ही एक छोटे शहर से नाता रखते है इसलिए उनके किरदार को और बेहतर बनाने के लिए यह बहुत आसान और सहज था.

सोहम पहले से ही वेब सीरीज की शूटिंग कर रहे हैं और  कैरेक्टर में आने के लिए वर्कशॉप के सेशनस में जा रहे है. वे पुलिस स्टेशनों का दौरा कर रहे है , पुलिस वालो से मील रहे है, उनकी दिनचर्या और हावभाव का निरिक्षण कर रहे है ,पुलिस  विशेषताओं और उनकी कार्यशैली सीख रहे है वे यह भूमिका को जिवंत दिखाने के लिए पुरजोर मेहनत कर रहे है.

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अपने किरदार की तैयारी के बारे में अधिक बात करते हुए सोहम शाह ने कहा, “जब मुझे स्क्रिप्ट मिली, तो मुझे यह बेहद पसंद आया और मैंने इसे सिर्फ एक बार में पढ़ा. इसके बाद मैं रीमा से मिला और हमने इस करेक्टर पर चर्चा की. उन्होंने मुझे केरेक्टर समझाया मैंने  अपने कुछ विचार सामने रखे जो उन्हें भी पसंद आये. वहां से मैंने अपने भूमिका पर काम करना शुरू कर दिया. मैंने रीमा और पूरे कलाकारों के साथ कुछ रीडिंग सेशन किये. मैंने अपने जीवन में पहली बार पुलिस की वर्दी पहनी है इसलिए मैंने अपने  बॉडी में बदलाव के लिए भी काम करना शुरू कर दिया . मैंने इस बात पर गहन शोध किया है कि एक पुलिसकर्मी कैसे बोलता है, कैसे काम करता है और उनके तौर तरीके कैसे होते है . मैंने वर्क शॉप में भाषा और बोली पर भी काम किया है. ”

इस वेब सीरीज़ के अलावा सोहम शाह, द बिग बुल में अभिषेक बच्चन के भाई का  किरदार निभाते हुए नज़र आएंगे जो कि 2020 की वित्तीय अपराध-ड्रामा फिल्म है. यह फिल्म कूकी गुलाटी द्वारा निर्देशित है और अभिषेक बच्चन, इलियाना डिक्रूज और निकिता दत्ता द्वारा अभिनीत है. सोहम कृति कुल्हारी के साथ एक और शार्ट फिल्म में भी नजर आएंगे और जिसका निर्देशन पवन कृपलानी कर रहे हैं.

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Khatron Ke Khiladi 10 के Promo में तेजस्वी प्रकाश पर बरसे Rohit Shetty, जानें क्या है वजह

कलर्स के शो ‘खतरों के खिलाड़ी का 10वां सीजन (Khatron Ke Khiladi 10) फैंस को काफी पसंद आ रहा है. आए दिन शो में नए-नए स्टंट फैंस को काफी एंटरटेन कर रहे हैं. वहीं शो के होस्ट रोहित शेट्टी (Rohit Shetty) भी फैंस के लिए नए-नए ट्विस्ट लाते रहते हैं. हाल ही में शो का नया प्रोमो आया है, जिसमें रोहित शेट्टी (Rohit Shetty) शो की कंटेस्टेंट तेजस्वी प्रकाश पर गुस्सा करते नजर आ रहे हैं. आइए आपको दिखाते हैं शो के नए प्रोमो की खास झलक…

प्रोमो में रोहित शेट्टी का दिखा गुस्सा

रोहित (Rohit Shetty) शो के कंटेस्टेंट्स से ऐसे-ऐसे हैरतगेंज स्टंट्स करवाते है, जिससे सभी कंटेस्टेंटस की नीदें ही उड़ जाती है. वहीं इसी बीच शो के नए प्रोमो में होस्ट रोहित शेट्टी कंटेस्टेंट और पौपुलर टीवी एक्ट्रेस तेजस्वी प्रकाश (Tejasswi Prakash) पर भड़कते हुए नजर आ रहे हैं.

 

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तेजस्वी के सपोर्ट में आए फैंस

प्रोमो रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर तेजस्वी के फैंस उनके सपोर्ट में आ गए हैं. फैंस को लगता है कि तेजस्वी ने अपना पौइंट रखकर सही किया. इसी के साथ फैंस ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘अगर वह फेवरटिज्म के खिलाफ स्टैंड ले रही हैं हैं तो वह सही हैं. स्टंट हर किसी के लिए फेयर होने चाहिए.’ जबकि दूसरे फैन ने लिखा है कि कंटेस्टेंट्स को कैंडल वैक्स टास्क क्यों करना पड़ा, जब कोई एलिमिनेशन ही नहीं होना था.

बता दें, होस्ट रोहित शेट्टी की फिल्म ‘सूर्यवंशी’ जल्द ही रिलीज होने वाली हैं. वहीं सोशल मीडिया पर उनकी फिल्म के ट्रेलर को फैंस ने काफी पसंद किया है. दूसरी तरफ देश में कोरोना वायरस का कहर देखते हुए फिल्म ‘सूर्यवंशी’ की रिलीज डेट भी आगे बढ़ाने का फैसला किया है, जिसका ऐलान सोशल मीडिया के जरिए किया गया है.

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अगर बनना चाहती हैं फैशन क्वीन, तो ट्राय करें ये टिप्स

कभी ऑफिस तो कभी पार्टी के दौरान और कभी ही राह चलते हुए कोई ना कोई ऐसी दिवा नजर आ ही जाती है, जिस से नजर हटाने का दिल नहीं करता. अगर आप भी इनकी कैटेगरी में शामिल होना चाहती हैं तो बस फॉलो करें आसान टिप्स .

1. ट्रेंड या सीजन का इंतजार नहीं करना

स्टाइलिश महिलाएं किसी ड्रेस को पहनने के लिए सीजन और ट्रेंड का इंतजार नहीं करतीं .उन्हें जब जो पहनना होता है बिंदास होकर पहनती हैं. भले ही वह फैशन में इन हो या आउट, क्योंकि ऐसा बिल्कुल भी जरूरी नहीं होता कि हर एक ट्रेंड   ड्रेस, हर एक लेडीस को सूट करें. यहां तक कि मार्केट में प्लाजो और क्रॉप टॉप पर जबरदस्त सेल के बावजूद इनके पास इसका एक पेयर भी नहीं मिलता.

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2. दूसरों के लिए ड्रेस अप होना

फैशन दिवा हमेशा खुद के लिए ड्रेस अप होना पसंद करती हैं ना कि दूसरों को इंप्रेस करने के लिए .स्टाइलिश लड़कियों के लिए फैशन एक्सप्रेशन और खुद को खुश करने का सबसे बेहतरीन जरिया होता है .इसलिए शायद वह हमेशा सबसे अलग और खास दिखती हैं.

3. सही फिटिंग वाले कपड़े

फैशन फॉरवर्ड लेडीस जितनी अहमियत अपने कपड़ों को देती हैं उतना ही अपने टेलर्स को भी .कौन सी ड्रेस पहनकर उन्हें कॉन्प्लिमेंट्स मिल सकते हैं और किस से उनका मजाक बन सकता है, यह उन्हें अच्छे से पता होता है .इसमें कोई दो राय नहीं कि टेलर से स्टिच कराने से  बजट बढ़  सकता है ,लेकिन लॉन्ग टाइम वेयरिंग के लिए  यह बेस्ट होते हैं.

4. कपड़ों की केयर करना

ऑफिस से आने के बाद उन कपड़ों को उतार कर बिस्तर या वार्डरोब में ऐसे ही रख देना भी उनकी आदतों में शामिल नहीं .अच्छे से और सलीके से, उन्हें हैंड्स से तह करके रखती हैं, जिससे रिंकल्स और डैमेजिंग का खतरा नहीं रहता.

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5. अनकंफर्टेबल कपड़े

ऐसे कपड़े जिन्हें पहनने के बाद बार-बार उन्हें सही करने की नौबत आए, इरिटेशन हो ,ऐसा  लगे कि हर कोई बस आप को ही देख रहा है, ऐसे कपड़े स्टाइलिश क्वींस अपने वार्डरोब में रखना बिल्कुल भी पसंद नहीं करती. कपड़ों के कंफर्ट का अंदाजा आप उनके  मूव और बॉडी लैंग्वेज को देखकर आसानी से लगा सकते हैं. घंटों शीशे के सामने खड़े होकर ड्रेस पर टाइम वेस्ट करना उनका स्टाइल नहीं.

8 टिप्स: नेचुरल तरीकों से बनाएं हार्मोन्स का संतुलन

अगर हमारे हार्मोन संतुलित न हों तो हमें इसका अहसास होने लगता है, हालांकि हम इसके कारण से अनजान होते हैं. मूड में बदलाव, रोशनी के लिए संवेदनशीलता, औयली त्वचा और बाल, कुछ खाने का मन करना, नींद न आना, चिंता, तनाव और चिड़चिड़ापन ये सब हार्मोनल बदलावों के संकेत हो सकते हैं. महिलाओं में हामोनल संतुलन बदलने की संभावनाएं अधिक होती हैं, खासतौर पर जब वे गर्भवती हों, तनाव में हों या विशेष उम्र के बाद महिलाओं में हार्मोनल संतुलन बदलने लगता है. लेकिन हार्मोनों को फिर से सामान्य करना कोई मुश्किल बात नहीं. आइए कुछ तरीके जानें, जिनके द्वारा आप प्राकृतिक तरीकों से अपने हार्मोनों को संतुलित रख सकती हैं.

1. अलसी के बीज का सेवन करें

अलसी के बीज अच्छे स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं. इनमें फाइबर, लिगनान, ओमेगा-3 फैटी एसिड पर्याप्त मात्रा में होता है, ये ब्लड शुगर और दिल के स्वास्थ्य को सामान्य बनाए रखने में मदद करते हैं. अनुसंधानों से साफ हो गया है कि वे महिलाएं जो अपने आहार में अलसी के बीज का सेवन करती हैं, उनके प्रोजेस्टेरोन और एस्ट्रोजन स्तर में सुधार आता है. जो महिलाओं में हार्मोनों का संतुलन बनाए रखने के लिए ज़रूरी है.

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2. पेय पदार्थों का सेवन सावधानी से करें-

एल्कोहल, कैफीन और चीनी युक्त पेय पदार्थ हमारे शरीर में हार्मोनों का संतुलन बिगाड़ सकते हैं, क्योंकि इनसे कार्टिसोल का उत्पादन बढ़ता है, जिसका असर अण्डाश्यों की कार्य प्रणाली पर पड़ता है. अगर आपको प्यास लगे, तो सादा, मिनरल या नारियल पानी पीएं. अगर आप एनर्जी चाहती हैं तो ग्रीन टी पीएं. इसमें कैफीन की सही मात्रा और एमिनो एसिड एल-थिएनिन होता है, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को चुस्त बनाता है.

3. तनाव का बेहतर प्रबंधन करें

अक्सर हम तनाव में अपने स्वास्थ्य की अनदेखी करते हैं, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन करने लगते हैं और नींद पूरी नहीं करते. तनाव से शरीर में कार्टिसोल ज़्यादा बनता है जिससे थकान होती है. ऐसा होने पर शरीर की बीमारियों की लड़ने की क्षमता कम हो जाती है और आपका हाॅर्मोनल संतुलन बिगड़ने लगता है. तनाव को दूर करने के लिए शावर लें, सैर करें या योगा करें.

4. धूम्रपान छोड़ दें

तंबाकू का कई हार्मोनों पर बुरा असर पड़ता है. युनिवर्सिटी औफ रीडिंग के शोधकर्ताओं ने साफ कर दिया है कि तंबाकू के सेवन से थायराईड का स्तर बिगड़ जाता है, यह पिट्युटरी हार्मोन को स्टिमुलेट करता है और कोर्टिसोल को बढ़ाता है. अगर आप धूम्रपान छोड़ने की योजना बना रहे हैं तो यह सबसे अच्छा समय है.

5. डेयरी उत्पादों का सेवन सोच समझ कर करें

डेयरी उत्पाद पोषकों का अच्छा स्रोत हैं. हालांकि अगर आप सेक्स हार्मोनों को लेकर चिंतित हैं तो आपको डेयरी उत्पादों खासतौर पर योगहर्ट और क्रीम के सेवन से पहले दो बार सोचना चाहिए. एक अध्ययन से पता चला है कि डेयरी उत्पादों के सेवन से कुछ विशेष हार्मोंनों का स्तर कम हो जाता है. अध्ययनों में योगहर्ट एवं क्रीम तथा एनोवुलेटरी साइकल के बीच का संबंध भी बताया गया है.

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6. पूरक आहार और हब्र्स का सेवन करें

विटामिन सी, बी5, इल्युथेरो और रोडिओला ऐसे हब्र्स हैं जो एनर्जी देते हैं. ये न्यूरोट्रांसमिटर्स को सपोर्ट करते हैं और तनाव दूर करने वाले हाॅर्मोन बढ़ाते हैं. ये शरीर में हाॅर्मोंनों का प्राकृतिक संतुलन बनाने में मदद करते हैं. मैका एक और शक्तिशाली बूटी है जो मेनोपाॅज़ के लक्ष्यों से राहत देती है जैसे रात मंे पसीना आना, अचानक गर्मी लगना. यह सेहतमंद लिपिडो को बढ़ाने में मदद करती है. मैका पाउडर को अपनी ग्रीन टी में मिलाएं और हार्मोनों को प्राकृतिक रूप से संतुलि बनाएं.

7. योगासन व्यायाम

योगा / नियमित व्यायाम के फायदों को नकारा नहीं जा सकता. इससे शरीर में बेहतर सर्कुलेशन बनता है, एंडोर्फिन रिलीज़ होते हैं, शरीर का वज़न सामान्य बना रहता है और दिल का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है. व्यायाम एक व्यक्ति के लिए प्राकृतिक दवा है. इससे शरीर में कोर्टिसोल की मात्रा कम होती है और तनाव दूर करने में मदद मिलती है. सप्ताह में कम से कम 150 मिनट के लिए हल्का एरोबिक व्यायाम करें.

8. पूरी नींद लें

जब आप सो रहे होते हैं तो दिमाग शरीर को डिटाॅक्सिफाय करता है. इसलिए रोज़ाना कम से कम आठ घण्टे की नींद ज़रूर लें. इससे शरीर में कोर्टिसोल, मेलाटोनिन, सोमाट्रोपिन हाॅर्मोन संतुलित रहते हैं. हमेशा अंधेरे कमरे में सोंएं जहां फोन, लैपटाॅप या टीवी स्क्रीन की नीली रोशनी न हो. इन आसान से उपायों के द्वारा आप तीन सप्ताह से भी कम समय में प्राकृतिक रूप से अपने हाॅर्मोनों को संतुलित कर सकती हैं. फिर भी अगर समस्या बनी रहे तो एक अच्छे न्यूरोपैथ और योगा अध्यापक से मिलें, जो आपकी ज़रूरत के अनुसार आपको सही सलाह देंगे.

डॉ श्रीविद्या नंदकुमार . सीनियर नेचुरोपैथ — जिंदल नेचरक्योर इंस्टीट्यूट, से बातचीत पर आधारित.

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आज अगर लैपटौप न हो तो पहाड़ जैसी हो जाए जिंदगी

आधुनिक जीवन का एक भी दिन कंप्यूट्र्स और लैपटौप के बिना गुजारना असंभव है. ऐसा नहीं है कि हम इनके बिना मर जाएंगे. लेकिन इनके बिना आज 90 फीसदी से ज्यादा कामकाज किये ही नहीं जा सकते. चाहे आधुनिक ग्लोबल व्यापार हो, चाहे माॅडर्न कम्युनिकेशन हो, चाहे यातायात हो. गरज ये कि आज कोई भी काम बिना कंप्यूटर नहीं हो सकता सिवाय जिस्मानी श्रम के और इस जिस्मानी श्रम में भी जिस दिशानिर्देश की जरूरत होती है, वे भी कंप्यूटर और लैपटौप के जरिये ही हासिल होते हैं. खेतों में काम करना तो जिस्मानी श्रम है. लेकिन इसे कैसे किया जाना है, कितना करना है, इस सबके लिए भी तमाम गाइड लाइन इन्हीं कंप्यूटर और लैपटौप में मौजूद होती हैं.

यूरोप में 95 फीसदी खेती आधुनिक उपकरणों और मौडर्न डेमो व्यवस्था के जरिये होती है, जिसे किसान अपने कंप्यूटर या लैपटौप में देखकर ही खेतों में अंजाम देतर है. खेती किसानी के तमाम डाटा, बेहतर किसानी के तमाम टिप्स ये सब इन्हीं उपकरणों से संभव हैं. यूं तो लैपटौप कंप्यूटर का ही छोटा और पोर्टेबल संस्करण है. लेकिन जिस तरह से इस छोटी सी मशीन ने अपना महत्व विकसित किया है, उसके कारण, आज यह कंप्यूटर पर भारी है. लैपटौप आज की दुनिया में चलता-फिरता और हर आधुनिक कामगार की पीठ में लदा उसका दफ्तर है. जब तक लैपटौप का चलन इतना ज्यादा नहीं था, तब तक हमारे साथ हमारा दफ्तर बहुत थोड़ी मात्रा में ही घर आता था. जब से लैपटौप मुख्य कामकाजी मशीन मंे तब्दील हुआ है, तब से पूरा का पूरा दफ्तर हमारे साथ घर चला आता है.

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आज की तारीख में पूरी दुनिया में 50 करोड़ से ज्यादा लोग दफ्तर नहीं जाते हैं. उन्हें दफ्तर जाने से मुक्ति इसी लैपटौप ने दिलवायी है. ये लोग जो दफ्तर नहीं जाते, लैपटौप की बदौलत ही जहां होते हैं, वहीं अपने दफ्तर को क्रिएट कर लेते हैं. वर्क फाॅर्मे होम कामकाजी दुनिया में एक नयी और बहुत अर्थपूर्ण शब्दावली बन गई है. इस शब्दवाली को अभिव्यक्ति भले भाषा देती हो, लेकिन इसका अविष्कार इसी लैपटौप ने किया है. जब तक लैपटौप नहीं था, तब तक घर से काम करने की ऐसी सुविधा नहीं थी, जैसी आज है. आज इस लैपटौप की बदौलत ही टोक्यो में 20 लाख स्क्वायर फिट आॅफिस स्पेस की मांग कम हो गई है. दूसरे अर्थों में लैपटौप ने टोक्यो में आॅफिस स्पेस की बढ़ती मांग पर लगाम लगा दिया है.

सिर्फ टोक्यो की ही बात नहीं है. न्यूयार्क, मुंबई, बंग्लुरु. कहने का मतलब दुनिया का कोई भी तेजरफ्तार कामकाजी शहर ऐसा नहीं है, जहां इस लैपटौप की बदौलत लाखों कामगार आॅफिस से दूर रहकर अपने काम निपटा रहे हैं और इस तरह से आॅफिस स्पेस की बढ़ती मांग को कम करने में मदद कर रहे हैं. अगर आर्थिक नजरिये से देखें तो आज की तारीख में हर दिन दुनिया में जितना कामकाज होता है, उसमें 50 फीसदी से ज्यादा अकेले लैपटौप के जरिये सम्पन्न होता है. जिसे हम सेवा क्षेत्र का कामकाज कहते हैं, वह तो 95 फीसदी तक इसी कंप्यूटर और लैपटौप से होता है. इसलिए बैकिंग, इंश्यारेंस, आईटी जैसे क्षेत्रों के तो ज्यादातर काम इसी से हो रहे हैं. अगर इस सम्पन्न काम का आर्थिक मूल्य निकालें तो 5000 अरब डाॅलर की कीमत का कामकाज हर दिन लैपटौप निपटाते हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि आज की अर्थव्यवस्था में लैपटौप की कितनी बड़ी भूमिका है.

माना जाता है कि सिलिकाॅन वैली ने पूरी दुनिया का चेहरा बदल दिया. लेकिन इस सिलिकाॅन वैली की दुनिया वास्तव में जिस कए डिवाइस पर सबसे ज्यादा निर्भर है, उसे लैपटौप कहते हैं. इस समय एक मोटे अनुमान के मुताबिक दुनिया में करीब 6 अरब लैपटौप मौजूद हैं और करीब 5.5 अरब लैपटौप हर दिन 10 से 12 घंटे तक सक्रिय रहते हैं. मोबाइल फोन के बाद दुनिया में जो डिवाइस सबसे ज्यादा मौजूद है, वह लैपटौप है. आज शायद ही कोई ऐसा काम हो, जो लैपटौप से संभव न होता हो. चाहे पढ़ना हो, चाहे लिखना हो, चाहे पढ़ाना हो, चाहे दिखाना हो या कोई भी काई काम करना हो, वह लैपटौप से ही संभव है. लैपटौप में सिर्फ आपका दफ्तर ही नहीं आज के जमाने की पूरी की पूरी आधुनिक दुनिया और जीवन मौजूद है.

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हर दिन 10 करोड़ से ज्यादा फिल्में लैपटौप के जरिये देखी जाती हैं. हर दिन करीब 36 करोड़ गाने लैपटौप के जरिये सुने जाते हैं. हर दिन 2000 अरब डाॅलर का लेनदेन इसी लैपटौप के जरिये होता है और हर दिन करीब 53 करोड़ ई-मेल लैपटौप द्वारा ही भेजे या पाये जाते हैं. लैपटौप में आज क्या नहीं है? यह आपको संगीत सुनाता है, ये आपको वर्कआउट में मदद करता है, ये आपको घर बैठे बाजार कराता है, ये आपको घर बैठे दुनिया की ही नहीं ब्रह्मांड की भी सैर कराता है. लैपटौप आज की दुनिया का ऐसा आधार है जिस पर ये दुनिया टिकी है. अगर ये आधार दुनिया के नीचे से निकल जाए तो पूरी दुनिया न सिर्फ भरभराकर ढह जाए बल्कि एक पल भी ऐसी न रह सके जैसे की वो है.

पहली बार जा रही हैं डेट पर तो न करें ये काम

हर महिला के लिए उनकी पहली डेट यादगार होती है और आप किसी भी कीमत पर इस दिन को बिगाड़ना नहीं चाहेंगी. अपने पार्टनर के साथ पहली डेट पर जा रही हैं तो इस दौरान ये चिंता होना लाजमी है कि कुछ गलत ना हो जाएं. हालांकि आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है. आप जब डेट पर जा रही हैं तो अपने मन में सकारात्मकता रखें और आत्मविश्वास के साथ इसका सामना करें.

अगर आप अपनी पहली डेट यादगार बनाना चाहती हैं तो कुछ सावधानियां बरतनी होगी. आइए जानते हैं कि क्या हैं वो काम जो पहली डेट पर जाते वक्त महिलाओं को नहीं करने चाहिए.

1. अपने बारे में ज्यादा ना बोलें

जब आप पहली डेट पर जा रही हैं तो अपने साथी को अपने बारे में बताना ठीक है लेकिन आपको अपने डेटिंग पार्टनर की बातें भी सुननी जरूरी है. आपको केवल अपने बारे में बाते नहीं करनी चाहिए. डेट पर होते समय जरुरी है कि आप दोनों एक दूसरे के बारे में जानें इसलिए अपने पार्टनर को भी उनके बारे में बाते करने और आपको समझने का मौका दें.

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2. देरी से ना जाएं

ऐसा कहा जाता है कि डेट के लिए महिलाएं देरी से जा सकती हैं क्योंकि ये एक फैशन है. लेकिन आपको बता दें कि अब समय बदल चुका है और अगर आप देरी से जाती हैं तो यह आपके पार्टनर पर आपकी पहली छवि को खराब कर सकता है. हर किसी के लिए समय कीमती है. आपका पार्टनर समय निकाल कर ही आपसे मिलने आया है और आपको इसका सम्मान करना चाहिए. इसलिए उसे इंतजार कराना उचित नहीं होगा.

3. डेट के दौरान फोन अलग रख दें

पहली डेट पर आप एक-दूसरे को समझते और जानते हैं. अगर डेट के दौरान आप पूरा वक्त फोन में लगे रहेंगे तो आप अपना और अपने साथी दोनों का समय बेकार करेंगी. इसलिए बेहतर होगा कि आप अपने फोन को अलग रखकर अपने साथी से बात करें.

4. जरूरत से ज्यादा मेकअप ना लगाएं

जब आप पहली बार डेट पर जा रही हैं तो आप सुंदर दिखना तो चाहेंगी ही. साथ ही उस वक्त मेकअप लगाना भी स्वभाविक है लेकिन मेकअप अप्लाई करते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि ये लाइट शैड में हो. जरूरत से ज्यादा मेकअप करने से आपका साथी आपके साथ सहज महसूस नहीं करेगा. अगर आप नेचुरल दिखने वाला मेकअप लगाएंगे तो आपका लुक अधिक रियल होगा और आपका प्रभाव भी अच्छा पड़ेगा.

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5. अपने पहले साथी के बारे में बात ना करें

आपकी पहली डेट आपके रिश्ते के भविष्य को तय करती है. इसलिए बेहतर होगा कि आप अपने पुराने रिश्ते या अपने एक्स के बारे में बात ना करें. अगर आप आने वाले समय में भी साथ रहेंगे तो आपको काफी समय मिल पाएगा जिसमें आप इन सभी बातों के बारे में बात कर सकती हैं. अगर आप किसी के साथ अपनी पहली डेट पर अपने एक्स के बारे में बात करती हैं तो आपका पार्टनर सोचेगा कि अभी भी आपके जहन में पहले रिश्ते के लेकर फिक्र है.

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