Motivational Story : जहां एक तरफ कई सारे यंगस्टर्स, खासकर जेनजी आबादी, झूठी दुनिया को अपनी दुनिया मान सबकुछ भुला बैठे हैं वहीं उन्हीं में से एक नीरू यादव अपने गांव से जुड़ कर समाज के कामों को कर रही है. ऐसा नहीं है कि वह सोशल मीडिया से नहीं जुड़ी, मगर उस ने अपनी रूट नहीं छोड़ी है.
सपना टूटता है, तो इंसान भी टूट सा जाता है. वह हार मान हाथ पर हाथ धर कर बैठ जाता है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो फिर से सपना देखते हैं और उसे पूरा करने में अपनी जान लगा देते हैं और कुछ ऐसे भी होते हैं जो अपना टूटा सपना दूसरों के सपने पूरे कर जीते हैं.
उन्ही में से एक है नीरू यादव, जिसे लोग हौकी वाली सरपंच के नाम से जानते हैं. नीरू यादव राजस्थान के झुं झुनू जिले के गांव लांबी अहीर की पहली युवा सरपंच है. वह अपने अच्छे कामों और प्रयासों की वजह से इतनी लोकप्रिय और प्रभावशाली बनी कि उसे दिल्ली में हुए यूनाइटेड नैशन वूमन इंडिया के दो दिवसीय ‘शी लीड्स ’ की कार्यशाला में भारत की 30 उभरती महिला नेताओं में शामिल किया गया.
साथ ही, मिनिस्ट्री औफ पंचायती राज ने नीरू यादव को 57वें सीपीडी नीट में भारत को पेश करने की कमान सौंपी, जिस का आयोजन यूनाइटेड नैशन के मुख्यालय न्यूयौर्क में हुआ. वहां नीरू की हौकी टीम, बरतन बैंक और मेरा पेड़ मेरा दोस्त जैसे नवाचार और ठोस उदाहरणीय कदमों को बहुत सराहा गया.
नीरू यादव ने गांव के सरपंच की कमान संभाली तो गांव और गांव वालों की स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी. पंचायत औफिस की दीवारें दरारों से भरी थीं, छत से पानी टपकता था, गांव में पीने के पानी की परेशानी थी, सड़कें खराब, गांव के बच्चे पढ़ाई और खेल से दूर थे. ऐसी बहुत सी मुसीबतों को दूर करने के लिए नीरू ने अपना हौसला मजबूत किया और सरपंच की भूमिका निभाते हुए अदित्री फाउंडेशन की नींव रखी. इस फाउंडेशन के तहत नीरू ने कई मिसाल देने लायक पहल कीं, जैसे बरतन बैंक, हौकी टीम, मेरा पेड़ मेरा दोस्त, होम्स फौर बर्ड्स, स्किल्स प्रोगाम, प्ले स्कूल आदि.

बरतन बैंक
नीरू यादव शादीब्याह, सामूहिक आयोजनों के चलते गांव में प्लास्टिक प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल से फैली गंदगी को देख बहुत परेशान हुई. इस पर गंभीर विचार कर प्लास्टिक उपयोग को काफी हद तक दूर करने के लिए उस ने बरतन बैंक की शुरुआत की. इस बैंक में स्टील के बरतन उपलब्ध होते हैं. इस पहल के तहत गांव के किसी भी घर में कोई शादी या कोई आयोजन हो तो वह बरतन बैंक से निशुल्क बरतन ले कर अपना समारोह आयोजित कर सकता और समारोह के बाद वापस कर देता है. इस तरह गांव के लोग किसी भी समारोह में प्लास्टिक के बरतनों के इस्तेमाल को रोक पाते हैं. इस से गांव प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्त रहता है.
हौकी टीम
गांव में लड़कियों के खेल पर रोक लगाई जा रही थी, उन्हें घरों में बंद रहने को कहा जा रहा था, कुछ लड़कियों को कम उम्र में ही शादी के जाल में बांधा जा रहा था. नीरू यादव ने गांव के हर घर का दरवाजा खटखटाया. लड़कियों को खेल, शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के लिए सभी गांव वालों को नीरू ने खूब सम झाया. अपने खर्च पर उस ने गांव की लड़कियों के लिए हौकी किट से ले कर हौकी कोच, प्लेग्राउंड, लड़कियों का पोषणआहार हर चीज का खर्च उठाया. नीरू की यह पहल और लड़कियों की मेहनत इतनी रंग लाई कि आज गांव की लड़कियां हौकी खेल में अच्छा प्रदर्शन करते हुए मैडल जीत रही हैं.
मेरा पेड़ मेरा दोस्त
इस पहल की शुरुआत पर्यावरण के संरक्षण और उस की महत्ता को बढ़ावा देने के लिए की गई है. नीरू ने वनों की कटाई, क्लाइमेट इमबैलेंस और प्रदूषण की गंभीरता को सम झते हुए पर्यावरण के बचाव की पहल अपने गांव से शुरू की. नीरू ने गांव के लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया.
नीरू ने अपने गांव वालों के साथ गांव और आसपास की जगहों में कई पेड़ लगाए. आज भी वह जगहजगह पेड़ लगा रही है. साथ ही, प्रकृति के छोटे जीवों के संरक्षण को भी महत्त्व देते हुए नीरू ने गांव में एक 70 फुट के टावर का निर्माण कराया, जिस का खर्च नीरू ने अपनी तनख्वाह से दिया. यह टावर एक बर्ड हाउस की तरह काम करेगा, जहां 2000 चिडि़यां अपना घर बसाएंगी.
नीरू गांव में होते नए बदलावों, आयोजनों और गांव के विकास में होती हर छोटीबड़ी पहल व जानकारी को सोशल मीडिया पर डालती रहती है. उस के इंस्टा अकाउंट पर सवा 3 लाख से अधिक फौलोअर्स हैं जहां गांव के विकास से जुड़ी हर बात से वह सब को जोड़ती है.
बनी मिसाल
गांव में ऐसे बहुत से लोग हैं जो परेशानी के चलते पंचायत औफिस नहीं जा पाते, जैसे बुजुर्ग या बीमार व्यक्ति. उन लोगों की परेशानी सुनने व उन की मदद करने के लिए नीरू खुद उन के घर जाती है, जिसे वह ‘पंचायत आप के द्वार’ कहती है. नीरू की इन्हीं खूबियों व प्रयत्नों पर नजर रखते हुए उन्हें केबीसी मंच पर भी बुलाया गया. साथ ही, भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने नीरू के प्रयासों व हौसले की सराहना करते हुए उन्हें संसद भ्रमण के लिए भी बुलाया.
नीरू यादव एक मेधावी सरपंच का उत्तम और ठोस उदाहरण है. नीरू उन राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए एक बड़ी कसौटी भी है जो यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं कि अपने गांव-समाज की मदद इसलिए नहीं कर पा रहे कि उन्हें फंड नहीं मिले या कर्मचारियों की कमी है या पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. नीरू जैसे सरपंच अगर हर गांव में, उस के जैसे जज्बा रखने वाले नेता अगर हर शहर में और कर्मठ व्यक्तित्व अगर हर देश में हों तो उस गांवदेश का कौशल, विकास कभी पीछे नहीं रह सकता.
साथ ही, नीरू यादव की प्रतिभा उन लोगों के मुंह पर ताला लगाती है जो यह कहते हैं कि भला एक औरत नेता बन क्या ही गांवदेश चलाएगी.
