आखिर वही हुआ जिस का डर था. देश के लाखों बच्चे एक बार फिर नैशनल टैस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की लापरवाही के कारण पुन: गंभीर मानसिक तनाव और शैक्षणिक उत्पीड़न झेलने के लिए विवश हैं. नैशनल टैस्टिंग एजेंसी ने 3 मई को हुई नीट की परीक्षा पेपर लीक होने के बाद अब रद्द कर दी है. अब इस परीक्षा में शामिल हुए सभी बच्चों को यह परीक्षा दोबारा देना होगी.
मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला स्वतंत्र भारत के सब से बड़े शिक्षा घोटालों में से एक था. इसी घोटाले के बाद प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितता, भ्रष्टाचार और लापरवाही को रोकने के लिए एनटीए को प्रवेश परीक्षाएं कराने की जिम्मेदारी दी गई थी. यदि हम व्यापम की कार्यशैली और वर्तमान में एनटीए के तहत हो रही गड़बडि़यों की तुलना करें तो पैटर्न डरावनी हद तक समान नजर आता है.
व्यापम में भी एक राज्य से दूसरे राज्य तक फैले बिचौलिए सक्रिय थे. नीट 2026 में भी हम देख रहे हैं कि केरल में बैठा एक छात्र राजस्थान के सीकर में पेपर सप्लाई कर रहा है. यह अंतर्राज्यीय जाल बिना किसी संगठित सिंडिकेट के नहीं चल सकता.
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अभी तक जो जानकारी मिली है उस के अनुसार पेपर लीक के इस मामले में कई लोगों से पूछताछ हो रही है, जिन में अनेक बच्चे भी शामिल हैं लेकिन एनटीए (जिस पर परीक्षा कराने की पूरी जिम्मेदारी है) के किसी भी अधिकारी से किसी भी तरह की पूछताछ की कोई बात सामने नहीं आई है.
नीट 2026 में लगभग 22 लाख छात्र शामिल हुए. इन में से अधिकतर वे हैं जो अपनी मेहनत के दम पर 600-650 का आंकड़ा छूने का प्रयास करते हैं. लेकिन जब परीक्षा से कई दिन पहले ही बाजार में 600 नंबर के सवाल के 150 प्रश्न व्हाट्सऐप पर फौरवर्डेड मैनी टाइम्स के टैग के साथ घूम रहे हों तो योग्यता का दम घोटना तो तय ही है.
सीकर में जिस तरह से 1 मई को ही पेपर पहुंच गया था, उस ने तकनीकी सुरक्षा के एनटीए के दावों की हवा निकाल दी है. एनटीए कहता है कि उन के पास 5जी जैमर्स और बायोमीट्रिक्स हैं, जैमर से वे व्हाट्सऐप को परीक्षा केंद्र के अंदर आने से तो रोक लेते हैं लेकिन जो प्रश्न पेपर होने से 8 दिन पहले ही व्हाट्सऐप की दुनिया में फौरवर्ड होने लगे हों उसे रोकने की एनटीए ने क्या व्यवस्था की उस की जानकारी किसी को नहीं है.
नैशनल टैस्टिंग एजेंसी का गठन एक ‘औटोनोमस’ और ‘ट्रांसपैरेंट’ संस्था के रूप में किया गया था लेकिन आज यह संस्था खुद एक बो?ा और विवाद का केंद्र बन गई है. जब तक हर दोषी सलाखों के पीछे नहीं पहुंचता, तब तक देश का युवा इस व्यवस्था पर भरोसा नहीं करेगा.
अगर आज एनटीए को व्यापम बनने से नहीं रोका गया तो भारत की चिकित्सा और शिक्षा व्यवस्था की नींव ढह जाएगी. 22 लाख बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले हर व्यक्ति, चाहे वह कोई कोचिंग संचालक हो, पीजी संचालक हो, प्रिंटिंग प्रैस का कर्ताधर्ता हो या एनटीए के अंदर बैठा कोई विभीषण, उसे कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए.
जांच केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि इस का रुख उन वातानुकूलित कमरों की तरफ भी मुड़ना चाहिए जहां ये साजिशें रची जाती हैं. देश को ‘क्लीन नीट’ चाहिए, ‘दागी एनटीए’ नहीं ताकि देश में भगवान का दर्जा प्राप्त डाक्टर सदैव अपनी गरिमा बनाए रख सकें अन्यथा ऐसे एनटीए से नीट पास करने वाले भविष्य के डाक्टरों की ईमानदारी पर सदैव प्रश्न चिह्न लगा रहेगा.
वैसे यह पक्का है आखिर में कुछ न होगा क्योंकि हमारी सरकार तो चाहती ही है कि हमारे यहां डाक्टर न बनें, पूजापाठी पंडित बनें जो संस्कृत मंत्रों से बीमारों को ठीक करें. नैशनल टैस्टिंग एजेंसी इस लक्ष्य पर पहुंचानेका काम बढि़या ढंग से कर रही है, मैडिकल क्षेत्र में ही नहीं इजीनियरिंग में भी और तभी लगातार पुल गिरते हैं, नए विशाल भवनों में पहली बारिश में पानी टपकता है.
