स्टार प्लस के सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ (Yeh Rishta Kya Kehlata Hai) में इन दिनों नायरा (Shivangi Joshi), त्रिशा को न्याय दिलाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है, जिसमें उसका साथ कार्तिक (Mohsin khan) दे रहा है. इसी कारण सिंघानिया हाउस में सीरियस माहौल बना हुआ है, लेकिन हाल ही में कुछ फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिसमें नायरा (Shivangi Joshi), त्रिशा के गुनहगारों की औनस्क्रीन मां के संग फोटोज क्लिक करवातीं नजर आ रही हैं. आइए आपको दिखाते हैं नायरा की वायरल फोटोज…
मस्ती करते हुए फोटोज हुई वायरल
नायरा का किरदार अदा करने वाली एक्ट्रेस शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) की फोटोज सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें वह त्रिशा के गुनहगारों की औनस्क्रीन मां यानी एक्ट्रेस शिल्पा एस रायजादा (Shilpa S Raizada) संग शो के सेट पर मस्ती करते हुए फोटोज क्लिक करवाती नजर आ रही हैं.
शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) और शिल्पा एस रायजादा (Shilpa S Raizada) की वायरल फोटोज में उनकी बौंडिंग साफ नजर आ रही है. साथ ही दोनों एक-दूसरे के साथ मिलकर जमकर पोज देती फोटोज क्लिक करवाती दिखीं, जिनमें से एक फोटोज में शिवांगी जोशी (Shivangi Joshi) दुल्हन की तरह शरमाती हुई नजर आ रही हैं.
नायरा यानी शिवांगी(Shivangi Joshi) ने शिल्पा (Shilpa S Raizada) के साथ-साथ कार्तिक यानी मोहसिन खान (Mohsin khan) के साथ भी सेल्फी खिंचवाईं, जिसमें कार्तिक और नायरा (Shivangi Joshi) की जोड़ी बेहद खूबसूरत लग रही थी.
बता दें, शो में जल्द ही नायरा के सामने लव-कुश की सच्चाई सामने आने वाली है कि त्रिशा को मोलेस्ट करने वाले वे दोनों ही हैं. अब देखना है कि लव-कुश का ये सच जानने के बाद नायरा क्या कदम उठाएगी.
समाज में टैबू समझे जाने यानी कि वर्जित विषयों के पर्याय बन चुके और ‘‘अंधाधुन’’ के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर चुके अभिनेता आयुष्मान खुराना (Ayushmann Khurrana) के लिए कहानी व किरदार ही मायने रखते हैं. इतना ही नहीं आयुष्मान खुराना खुद (Ayushmann Khurrana) को ‘‘गृहशोभा मैन’’ (Grihshobha Man) कहते हैं, क्योंकि जिस तरह से ‘गृहशोभा’ पत्रिका में हर वर्जित विषय पर खुलकर बात की जाती है, उसी तरह वह अपनी फिल्मों में वर्जित विषयों पर खुलकर बातें करते नजर आते हैं. इन दिनों वह आनंद एल रौय और टीसीरीज निर्मित तथा हितेष केवल्य निर्देषित फिल्म ‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’ (Shubh Mangal Zyada Saavdhan) को लेकर अति उत्साहित हैं, जिसमें दो समलैंगिक पुरूषों की प्रेम कहानी है. प्रस्तुत है ‘‘गृहशोभा’’ (Grihshobha) पत्रिका के लिए आयुष्मान खुराना से हुई एक्सक्लूसिब बातचीत के अंश
आप अपने आठ वर्ष के करियर में किसे टर्निंग प्वाइंट मानते हैं?
-सबसे पहली फिल्म ‘‘विक्की डोनर’’मेरे कैरियर की टर्निंग प्वाइंट थी. उसके बाद ‘‘दम लगा के हईशा’’टर्निंग प्वाइंट थी. यह फिल्म मेरे लिए एक तरह से वापसी थी. क्योंकि बीच के 3 साल काफी गड़बड़ रहे. ‘‘दम लगा के हाईशा’’के बाद ‘‘अंधाधुन’’टर्निंग प्वाइंट रही. जिसने मुझे सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्ीय पुरस्कार दिलाया. फिर फिल्म‘आर्टिकल 15’भी एक तरह का टर्निंग प्वाइंट था. इस फिल्म के बाद एक अलग व अजीब तरह की रिस्पेक्ट /इज्जत मिली. फिल्म‘‘आर्टिकल 15’’में मैने जिस तरह का किरदार निभाया,उस तरह के लुक व किरदार में लोगों ने पहले मुझे देखा नहीं था. फिर जब फिल्में सफल हो रही हों,तो एक अलग तरह की पहचान मिल जाती है. मुझे आपका,दशकों से, क्रिटिक्स से भी रिस्पेक्ट मिल रही है. यह अच्छा लगता है.
‘‘अंधाधुन’’के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद आपके प्रति फिल्मकारो में किस तरह के बदलाव आप देख रहे हैं?
-फिल्म‘‘अंधाधुन’’ ने बहुत कुछ दिया है. मुझे राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. यह फिल्म चाइना में बहुत बड़ी फिल्म बनी. बदलाव यह आया कि अब लोग मुझे अलग नजरिए से देखते हैं. मुझे रिस्पेक्ट देते हैं. अब दर्शक भी जदा इज्जत दे रहे हैं. जब मैं पत्रकारों से मिलता हूं, तो अच्छा लगता है. क्योंकि ‘अंधाधुन’ एक ऐसी फिल्म है, जिसे मैंने खुद जाकर मांगी थी.
आप अक्सर कहते है कि आप ‘गृहशोभा मैन’हैं. इसके पीछे क्या सोच रही है?
-कई लोगों ने मुझसे कहा कि मैं तो ‘गृहशोभा’ पत्रिका हूं. उनका कहना था कि मैं जिस तरह के विषय वाली फिल्में सिलेक्ट करता हूं, वह इतने निजी होते हैं, जिस पर आप खुलकर बात करने से कतराते नही हैं. पर आप ‘गृहशोभा’ पत्रिका की तरह खुल कर बात करते हैं. आप ‘गृहशोभा’ के लिए लिखते हैं,तो कितनी मजेदार लाइफ है आपकी.
आपने वर्जित विषयों पर आधारित फिल्में की,जिन पर लोग बात करना तक पसंद नहीं करते. जब आपने यह निर्णय लिया था, तो आपके घर में किस तरह की प्रतिक्रिया मिली थी?
-मेरा पूरा कैरियर रिस्क पर बना है. बाकी कलाकार जिन विषयों को रिस्की मानते हैं,उन्हीं विषयों पर बनी फिल्में कर मैंने अपना कैरियर बनाया. इस तरह की रिस्क मैं आगे भी लेता रहूंगा. मतलब मैं रिस्क ना लूं, ऐसा कैसे हो सकता है. कई लोगों के लिए समलैंगिकता विषय पर फिल्म एक रिस्क है. पर मुझे लगता है कि आज के दौर में इसकी जरूरत है. सुप्रीम कोर्ट ने भी सेक्शन 377 को जायज ठहरा दिया है. देखिए ‘गे’ लोगो की अपनी निजी जिंदगी है.
‘‘शुभ मंगल सावधान’’भी एक वर्जित विषय पर थी. इसके प्रर्दशन के बाद किस प्रतिक्रिया ने ज्यादा संतुष्टि दी?
-ऐसी तो कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली. पर फिल्म हर किसी को बहुत अच्छी लगी थी. वास्तव में हमारी धारणा होती है कि हीरो को ऐसा होना चाहिए. मर्दांनगी को लेकर हमने अपनी एक धारणा बना रखी है, जो कि हमारे देष में बिस्तर तक की सीमित होती है. इस फिल्म में मर्दांनगी को लेकर लोगों की सोच पर एक कटाक्ष था. उस सोच पर एक तरह का प्रहार था,जो कि बहुत सफल भी रहा. फिल्म के प्रदर्षन के बाद उस पर लोगों ने खुलकर बात करना भी शुरू किया. लोगों की समझ में आया कि खांसी या जुखाम की तरह इसका भी इलाज किया जा सकता है. अब लोग इसका इलाज करने लगे है. कुछ लोग मुझसे मिले और इस विषय पर फिल्म करने के लिए मेरा शुक्रिया अदा किया. पर खुले में किसी ने कुछ नही कहा. पर मेरे पास आकर जरूर बोलते थे.
मतलब अभी भी वह टैबू बना हुआ है?
-जी हां!! अभी भी वह टैबू बना हुआ है. पर फिल्म के प्रदर्शन के बाद कुछ तो बातचीत हुई. हमने पहला कदम उठाया.
होमोसेक्सुआलिटी जैसे विषय पर अपनी नई फिल्म‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’को आप पारिवारिक फिल्म मानते हैं. जबकि इस तरह के विषय में अश्लीलता आने की संभावनाएं ज्यादा होती हैं. ऐसे में बतौर कलाकार स्क्रिप्ट सुनते वक्त आपने किस बात पर ध्यान दिया?
-फिल्म के निर्माता आनंद एल राय पारिवारिक फिल्म के लिए जाने जाते हैं. जब वह आपके साथ हों, तो आपको इतनी चिंता की जरूरत नहीं होती. जब मुझे आनंद एल राय की तरफ से इस फिल्म का आफर मिला,तो मुझे यकीन था कि वह पारिवारिक फिल्म ही बनाएंगे. इसके बावजूद मैं स्क्रिप्ट जरुर सुनता हूं. स्क्रिप्ट सुनते समय मैं इस बात पर पूरा ध्यान देता हूं कि फिल्म में क्या होना चाहिए और क्या नहीं होना चाहिए. इस फिल्म में कुछ भी ऐसा नहीं है, जिसे आप परिवार के साथ बैठकर न देख सकें. वैसे भी अब तो बच्चे बच्चे को पता है कि समलैंगिकता क्या होती है. पर इसे अपनाना जरूरी है.
देखिए,समलैंगिकता ऐसा नहीं है कि आप एक दिन सुबह सोकर जगे और आपको ऐसा लगा कि मैं ‘गे’ब न जाऊंगा. ऐसा होता नहीं है. बचपन से आपकी वही सोच होती है,जो आपको पसंद है. वही आपको पसंद है. हर युवक लड़के या लड़कियां या कुछ लोग दोनों पसंद करते हैं. लेकिन यह आपकी निजी जिंदगी है,आप जिसका चयन करना चाहें, उसका चयन करें. आपकी जिंदगी में अगर उससे फर्क नहीं पड़ता है,तो फिर दूसरों को क्या तकलीफ?
जैसा कि आपने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सेक्शन 377 को कानूनी जामा पहना दिया है. तो अब आपकी यह फिल्म कितनी महत्वपूर्ण हो गई है?
-मेरी राय में यह ह्यूमन राइट की बात है. ‘गे’ लोगों को ‘बुली’ किया जाता है. बचपन से इनका मजाक उड़ाया जाता है. बचपन से इनको नीची नजरों से देखा जाता है. तो हमारा और हमारी फिल्म का मकसद उनमें समानता लाना जरूरी है. यह फिल्म भी फिल्म ‘आर्टिकल 15’ की तरह से ही है. एक तरह से देखा जाए, तो यह उसका कमर्शियल वर्जन है. फिल्म ‘‘आर्टिकल 15’’में पिछड़े वर्ग को समानता दिलाने की बात है. यहां हम होमोसेक्सुआलिटी की बात कर रहे हैं. लेकिन यह कमर्शियल और पारिवारिक फिल्म है. जबकि ‘‘आर्टिकल 15’’कमर्शियल नहीं थी. वह डार्क थी. जबकि ‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’ कॉमेडी फिल्म है. यह फिल्म इंसानों के बीच समानता को जरूरी बताती है. फिर चाहे जैसा इंसान हो,चाहे जिस जाति का और जिस सोच का भी हो.
फिल्म ‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’की स्क्रिप्ट पढ़ने पर किस बात ने आपको इसे करने के लिए प्रेरित किया?
-सबसे पहले तो इसका विषय समसामायिक और बहुत अच्छा है. मेरी राय में होमोसेक्सुअलिटी पर आज तक कोई भी अच्छी फिल्म नहीं बनी है. जो बनी हैं, वह पूर्ण रूपेण कलात्मक रही,जो कि दर्षको तक पहुंचने की बजाय केवल फिल्म फेस्टिवल तक सीमित रही. जबकि हमारा हिंदुस्तान इस तरह की फिल्में देखने के लिए तैयार है.
दूसरी बात इस फिल्म की स्क्रिप्ट पढ़ते समय मुझे फिल्म ‘‘ड्रीम गर्ल’’की शूटिंग के वक्त का आंखों देखी घटना याद आयी. मैं मथुरा जैसे छोटे षहर में रात के वक्त शूटिंग कर रहा था. मैने देखा कि पार्किंग में दो लड़के एक दूसरे को ‘किस’कर रहे हैं. तो मेरे दिमाग में बात आयी कि भारत इसके लिए तैयार है. क्योंकि खुले में कभी भी लड़के या लड़कियों का ‘किस’नहीं होता है. मुंबई में ऐसा हो सकता है,पर छोटे शहरों में संभव नही. तो मैंने कहा कि हम इसके लिए तैयार तो हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी कानूनन मंजूरी दे ही दी है. मैंने खुले में भी देख लिया हैं. इसलिए इसके ऊपर फिल्म बनाई जा सकती हैं. जब से मैने दो लड़को को ‘किस’करते हुए देखा था,तब से मैं ‘होमोसेक्सुआलिटी के विषय को एक्स्प्लोरर कर रहा था. फिर मुझे पता चला कि हितेश जी इसी विषय पर फिल्म लिख रहे है,तो मैने उनसे कहा था कि स्क्रिप्ट पूरी होने पर मुझे सुनाएं. जब उन्होने स्क्रिप्ट सुनाई,तो मुझे तो बहुत फनी लगी. इस विषय की फिल्म का फनी होना बहुत जरूरी है. अगर फिल्म गंभीर हो जाएगी,तो लोग इंज्वॉय नहीं कर पाएंगे और हम जो बात कह रहे हैं,वह वहां तक पहुंची नहीं पाएगी. इसी विषय पर इससे पहले बनी गंभीर होने के चलते ही सिर्फ फेस्टिवल में ही दिखाई गई है. फिल्म फेस्टिवल में इस तरह की फिल्मों के दर्शक ‘गे’ समलैंगिक या समलैंगिकों के साथ खड़े रहने वाले लोग ही रहे. जबकि हमें यह फिल्म उनको दिखानी है,जो ‘गे’ समलैंगिकता के विरोध में हैं. इन तक हम तभी अपनी फिल्म को पहुंचा सकते हैं, जब हम इन्हें मनोरंजन दें. फिर पता भी नहीं चलेगा कि कैसे उन तक संदेश पहुंच जाता है. तो वही चीज हमने भी इस फिल्म के जरिए सोचा है.
-मैने इसमें कार्तिक का किरदार निभाया है, जो कि समलैंगिक है और उसे एक अन्य समलैंगिक युवक अमन से प्यार है.
इस फिल्म के अपने किरदार को निभाने के लिए किस तरह के मैनेरिज्म या बौडी लैंगवेज अपनायीं?
-हमने यह दिखाया है कि हाव भाव कोई जरूरी नहीं है कि लड़कियों की तरह हों. रोजमर्रा की जिंदगी में आप किसी भी आदमी को देख सकते हैं, जो समलैंगिक हो सकता है. एक नजर में आपको नही पता चलेगा कि सामने वाला समलैंगिक है. यह कटु सच्चाई भी है. यही बात हमारी फिल्म के अंदर भी है. हमने कुछ भी स्टीरियोटाइप नहीं दिखाया है कि यह हाव भाव होना चाहिए. लड़कियों की तरह बात करता है,कभी-कभी ऐसा होता भी है,पर जरूरी नहीं है. मैं फिल्में कम देखता हूं. किताबें ज्यादा पढ़ता हूं. मैं एक अंग्रेजी किताब पढ़ रहा हूं ‘लिव विथ मी. ’यह किताब मैंने पढ़़ी है,जो कि ‘गे’लड़कों की कहानी है. इस किताब से मैंने कुछ चीजें कार्तिक के किरदार को निभाने के लिए ली हैं.
इसके अलावा भी आपने कुछ पढ़ने की यह जानने की कोशिश की है?
-जी हां!हमारी फिल्म इंडस्ट्री में भी काफी समलैंगिक लोग हैं. फैशन इंडस्ट्री में भी हैं. यॅंू तो हर जगह हैं और होते हैं. पर इस तरह के लोगों को हमारी इंडस्ट्री में ज्यादा स्वीकार किया जाता है. कॉरपोरेट में भी होते हैं,लेकिन वहां वह खुलकर आ नहीं पाते. वहां वह बंधन में महसूस करते हैं. जबकि हमारी फिल्म इंडस्ट्री बहुत खुली है. यहां आप जैसे हैं,वैसे रहिए. यह बहुत बड़ी बात है. इस बात को मुंबई आने के बाद से तो मैं जानता ही हॅूं. आप तो मुझसे पहले से मुंबई में हैं और फिल्लम नगरी में सक्रिय हैं,तो आप ज्यादा बेहतर ढंग से जानते व समझते हैं.
जब मैं कौलेज में पढ़ रहा था,तब हमारे कौलेज में ‘‘गे’’क्लब हुआ करता था. एक दिन मुझे इस ‘गे’क्लब के अंदर गाना गाने के लिए बुलाया गया. उन्होंने मुझसे कहा कि,‘हम सभी को आपका गाना बहुत पसंद आया है. आप हमारे क्लब में आकर गाना गाइ. ’आप यकीन नहीं करेंगे,पर उनकी बात सुनकर मैं डर गया था. मैंने कह दिया था कि यह मुझसे नहीं हो पाएगा. मैं आप लोगों से नहीं मिल सकता. पर आज मैं उन्ही ‘गे’/ समलैंगिक लोगों के साथ खड़ा हूं. तो समय के साथ यह बदलाव मुझमें भी आया है. मैं चाहता हूं कि यही बदलाव देश के बाकी लोगों में भी आ सके.
बदलाव हो रहा है?
-जी हां! हमारी इस फिल्म के अंदर भी वही है कि जब दो इंसान प्यार करते हैं, भले वह लड़के लड़के हांे या लड़की लड़की हो,इस पर यदि इन दोनों की निजी एकमत है,तो इन्हें अपने हिसाब से जिंदगी जीने देना चाहिए.
हम पटना गए थे. वहां हमसे किसी पत्रकार ने पूछा यदि यह होगा तो वंश कैसे आगे बढ़ेगा? मैंने कहा कि,‘सर आपको जिंदगी जीने के लिए वंश की पड़ी है. ज्यादा से ज्यादा क्या होगा?आप बच्चे को गोद ले सकते हैं?इसके अलावा अब तो बच्चे पैदा करने के लिए कई वैज्ञानिक तकनीक आ गयी हैं,जिससे आप बच्चा कर सकते हैं. इस तरह की सोच को बदलना जरूरी है. यह सोच रातों रात नहीं बदलेगी,वक्त लगेगा. लेकिन पहला कदम हम ले चुके हैं.
आप अपनी तरफ से क्या करना चाहेंगे कि इंसानी सोच बदल सके?
-मैं तो फिल्मों के जरिए ही कर सकता हूं. मैं एक्टिविस्ट नहीं हूं. मैं हर मुद्दे पर फिल्म के जरिए ही बात करता रहूंगा. एक्टिविस्ट बनने का निर्णय आपका अपना होता है. मैं समाज में जो भी बदलाव लाना चाहता हूं,उसका प्रयास अपनी कला के जरिए ही करना चाहता हूं. मुझे लगता है कि जो आप चैराहे पर खड़े होकर नहीं कर सकते हैं,उसे आप फिल्म के जरिए ज्यादा बेहतर ढंग से कर सकते हैं. एक अंधेरे कमरे में फिल्म इंसान को हिप्नोटाइज कर लेता है. आपको अपने अंदर ले जाता है और आपको समझा देता है. फिल्म के साथ भावनात्मक रुप से आप जुड़ जाते हैं. फिल्म के जरिए रिश्ता जो बन जाता है.
इस फिल्म को देखने के बाद दर्शक अपने साथ क्या लेकर जाएगा?
-सबसे पहले तो दर्शक अपने साथ मनोरंजन लेकर जाएगा. फिल्म देखते समय बहुत ठहाके लगेंगे. इस फिल्म में दिखाया गया है कि एक छोटे आम मध्यम वर्गीय परिवार को जब पता चलता है कि उनका बेटा ‘गे’/समलैंगिक है, तो वह इसे किस तरह से लता है. उसके इर्द -गिर्द कैसा मजाक होता है? फिर वह परिवार कैसे इसे स्वीकार करता है.
आपके लिए प्यार क्या मायने रखता है?
– मुझे लगता है दोस्ती सबसे बड़ी चीज होती है. अगर आपकी बीवी आपके दोस्त नहीं है, उनका साथ आपको अच्छा नहीं लगता,तो आपकी उनसे कभी नहीं निभ सकती. आकर्षण तो कुछ वर्षों का होता है. उसके बाद तो दोस्ती होती है. आप कितने कंपैटिबल है. आपको साथ में फिल्में देखना अच्छा लगता है या एक ही तरह की किताबें पढ़ना अच्छा लगता है या एक ही तरह के गाने सुनना अच्छा लगता है. जब तक यह ना हो तब तक प्यार नहीं बरकरार रहता. शाहरुख खान साहब ने बोला कि प्यार दोस्ती है,तो सही कहा है.
-मैं वैलेंटाइन डे में विश्वास नहीं रखता. मुझे लगता है कि यह तो सिर्फ कार्ड और फूल बेचने के लिए एक मार्केटिंग का जरिया है. प्यार तो आप रोज कर सकते हैं,उसके लिए एक दिन रखने की क्या जरूरत है? जितने भी दिन बने हुए हैं,वह सिर्फ फूलों और केक की बिक्री के लिए बने है,इसके अलावा कुछ नहीं है.
आप लेखक व निर्देषक कब बन रहे हैं?
-अभी तो नहीं. . . जब तक लोग मुझे कलाकार के तौर पर देखना चाहते हैं,तब तक तो एक्टिंग ही करूंगा. क्योंकि अभिनय करना बहुत आसान काम है. लेखन व निर्देषन बहुत कठिन काम है.
वेब सीरीज करना चाहते हैं?
-ऐसी कोई योजना नहीं है. पर अगर कुछ अलग व अंतरराष्ट्रीय स्तर का हो,तो बिल्कुल करना चाहूंगा.
सोशल मीडिया पर क्या लिखना पसंद करते हैं?
-सोशल मीडिया पर कभी कविताएं लिख देता हूं. कभी मैं अपनी फिल्म के संबंध में लिख देता हूं. ऐसा कुछ नियम नहीं है कि क्या लिख सकता हूं. आजकल तो फिल्म ही प्रमोट कर रहा हूं.
कभी आपने यह नहीं सोचा कि किसी एक विषय को लेकर लगातार कुछ न कुछ सोशल मीडिया पर लिखते रहें?
-पहले ब्लौग लिखता था. मैं कुछ ना कुछ लिखता रहता था. पर अब समय नहीं मिलता है. लिखना तो चाहता हूं,पर समय नहीं मिलता है. क्योंकि आजकल लगातार फिल्म की शूटिंग कर रहा हूं.
38 वर्ष के अभिनय कैरियर में नीना गुप्ता (Neena Gupta) की जिंदगी में ऐसा वक्त भी आया था, जब फिल्मकारों ने उन्हे तवज्जो देनी बंद कर दी थी. तब नीना गुप्ता (Neena Gupta) ने इंस्टाग्राम पर लिखा था कि मैं अभी भी अच्छी अभिनेत्री हूं और मुंबई में ही रहती हूं. नीना गुप्ता (Neena Gupta) की इंस्टाग्राम की इस पोस्ट के बाद उन्हें ‘‘बधाई हो’’(Badhai Ho) सहित कई फिल्में मिली और इन दिनों नीना गुप्ता (Neena Gupta) एक बार पुनः अति व्यस्त हो गयी हैं. इन दिनों वह हितेश केवल्य निर्देशित फिल्म ‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’ (Subh Mangal Zyada Saavdhan) को लेकर चर्चा में हैं. इस फिल्म में नीना गुप्ता ने अपने ‘गे’ बेटे अमन (जीतेंद्र कुमार) की मां सुनयना का किरदार निभाया है.
सवाल- लोग कह रहे हैं कि सोशल मीडिया बहुत डैंजरस है. मगर आपके कैरियर की दूसरी शुरूआत सोशल मीडिया के ही चलते हो पायी. ऐसे में आप क्या कहना चाहेंगी?
-यह भी सच है कि सोशल मीडिया बहुत डैंजरस है, मगर मुझे तो सोशल मीडिया से बहुत फायदा हुआ. अभी भी हो रहा है. पर डैंजरस यूं है कि कई बार हम इमोशन में या गुस्से में कुछ लिख देते हैं, जो कि लोगों को पसंद नहीं आता,फिर हमें नुकसान हो जाता है. कई लोगों को नुकसान हुआ है. मैंने भी कुछ दिन पहले लिखा था कि ‘आई विश फिल्म ‘सांड़ की आंख’ में मुझे लिया गया होता.’तो इससे मुझे बहुत नुकसान हुआ. बात कहां की कहां फैल गयी. मैंने तो बस यूं ही लिखा था. इसलिए सोशल मीडिया का उपयोग बहुत सोच समझकर करना चाहिए.
सवाल- सोशल मीडिया पर किसी को भी ट्रोल करने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है?
-यह आसान काम है. बस मोबाइल पर कुछ टाइप ही तो करना है. मेरी राय में हर किसी को सोशल मीडिया पर काफी सोच समझकर लिखना चाहिए. यदि मुझे ट्वीटर या फेसबुक या इंस्टाग्राम सूट नहीं कर रहा है, तो उससे दूरी बना लेनी चाहिए. यदि मुझे लगता है कि मेरा गुस्सा और मेरा इमोशन मेरे कंट्रोल में नही है, तो फिर सोशल मीडिया पर मत जाओ. यदि आप बैंलेंस कर सकते हो, तो लिखें. बेवजह किसी का विरोध करना या गाली देना उचित नही.
सवाल- लेकिन सोशल मीडिया के चलते निर्माता व निर्देशक ‘इंस्टाग्राम’ पर कलाकार के फॉलोअर्स की संख्या के आधार पर कलाकारों को काम देने लगे हैं. क्या यह सही तरीका है?
-मैं ऐसा नही मानती. इंस्टाग्राम के आधार पर फिल्म में किरदार नहीं मिलते हैं. इसके आधार पर कलाकार को ‘एड’मिलते हैं. आपको गिफ्ट मिलते हैं. आपको फ्री घूमने का मौका मिलता है. गिफ्ट वाउचर मिलते हैं. आपको फ्री एयर टिकट मिलता है.
सवाल- आप सोशल मीडिया पर क्या लिखना पसंद करती हैं?
-मैं तो बहुत कुछ लिखना पसंद करती हूं, लेकिन कई बार चाहकर भी चुप रह जाती हूं. सोशल मीडिया का मिजाज समझ नहीं पा रही हूं. मैं यदि फ्राक में अपनी तस्वीर इंस्टाग्राम पर पोस्ट करती हूं, तो इतने लाइक्स मिल जाते हैं कि क्या कहूं. मगर जब मैने ढंकी हुई तस्वीर डाली, तो कोई उसे देखना नहीं चाहता. इसके बावजूद मैने एक सीरीज लिखनी शुरू की थी, जो कि कुछ समय से बंद है, फिर शुरू करने की सोच रही हूं. मैने सीरीज शुरू की थी- ‘‘सच कहॅूं तो..’’. इसके अंतर्गत मैं तीन चार मिनट फैशन, फिटनेस सहित विविध विषयों पर बोलती थी, पर इसमें कोई उपदेश नहीं देती थी. यह लोगों को बहुत पसंद आता था. इसका रिस्पॉंस अच्छा है. मुझे लगता है कि मुझे यह सीरीज लोगों को लगातार देते रहना चाहिए. लोगों को मेरी इस सीरीज का बेसब्री से इंतजार है. जल्द शुरू करने वाली हूं. मसलन इस सीरीज में एक दिन मैने कहा कि मुझे आज भी पटरे पर बैठकर बालती में पानी भरकर स्नान करना पसंद है. इसी तरह की चीजों पर बात करती रहती हूं.
सवाल- फिल्म ‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’ में भी आप मां के ही किरदार में हैं?
-उपरी सतह पर वह मां नजर आती है. मगर यह आधुनिक मां है, जो कि पूरे परिवार को लेकर चलती है. ‘बधाई हो’ के बाद यह कमाल की स्क्रिप्ट मुझे मिली है. जब इस फिल्म के लेखक व निर्देशक हितेश केवल्य ने मुझे स्क्रिप्ट सुनायी, तो मुझे स्क्रिप्ट इतनी पसंद आ गयी कि मैने कह दिया कि मुझे अभी की अभी यह फिल्म करनी है. यह कमाल की स्क्रिप्ट है. जब मैने स्क्रिप्ट सुनी, तो मुझे लगा कि यह स्क्रिप्ट हंसते खेलते बहुत बड़ी यानी कि होमोसेक्सुआलिटी पर बात कह रही है. धमाल फिल्म है, पर बहुत गंभीर बात कह रही है. मेरा एक एक संवाद मीटर में बंधा हुआ है. फिल्म ‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’ में कई किरदार हैं और हर किरदार का अपना ग्राफ है, हर किरदार की अहमियत है.
सवाल- फिल्म के अपने किरदार पर रोशनी डालना चाहेंगी?
-मैंने इसमें अमन त्रिपाठी (जीतेंद्र कुमार) और गौगल त्रिपाठी (मानवी गगरू ) की मां सुनयना त्रिपाठी का किरदार निभाया है. बहुत फनी है. पति के हिसाब से चलती है, तो वहीं वह अपनी बात भी कहती है. परिवार में सामंजस्य बैठाकर रखने का प्रयास करती है. मगर डफर नहीं है. सुनयना डोमीनेटिंग या बेचारी मां नही है, बल्कि कुछ अलग किस्म की है. अंततः वह अपने बेटे के साथ ही खड़ी नजर आती है.
सवाल- बतौर निर्देशक हितेश केवल्य की यह पहली फिल्म है.उनके साथ काम करने के आपके अनुभव क्या रहे?
-इस फिल्म के वह लेखक भी हैं, इसलिए सेट पर निर्देशन के दौरान वह आवश्यक बदलाव कर लेते थे. अगर सेट पर किसी कलाकार ने कुछ कहा तो वह उसकी बात पर गौर करते थे. उनका सेंस औफ ह्यूमर बहुत अच्छा व बहुत कमाल का है.
एक दिन मेरा एक सीन कहीं खत्म नहीं हो रहा था, मतलब मुझसे नहीं हो रहा था. हर सीन का एक सुर होता है, तो वह सुर बैठ नहीं रहा था, हितेश ने देखा और उसे तुरंत ऐसा इंप्रूव कर दिया कि मैं उनकी प्रतिभा की कायल हो गयी. बतौर निर्देशक उन्हे पता रहता था कि उन्हें क्या चाहिए.
सवाल- ‘म्यूजिक टीचर’ सही ढंग से प्रदर्शित भी नहीं हुई? इसे डिजिटल पर दे दिया गया.
-जी हॉ! अब फिल्म बनाना आसान हो गया है, पर उसे रिलीज कर पाना कठिन हो गया है. फिल्म रिलीज करने के लिए बहुत बड़ी रकम खर्च करनी पड़ती है. आपको याद होगा कि रमेश सिप्पी को भी अपनी फिल्म ‘‘शिमला मिर्च’’को डिजिटल पर ही रिलीज करना पड़ा. शायद अब हमारी फिल्म ‘‘ग्वालियर’’ भी डिजिटल प्लेटफार्म यानी कि ‘नेटफ्लिक्स’ पर आने वाली है. अब सिर्फ बड़ी कंपनियां ही अपनी फिल्में ठीक से रिलीज कर सकती हैं. एक बात यह थी कि ‘म्यूजिक टीचर’ में बड़े स्टार नहीं थे. मार्केटिंग में कई चीजे होती हैं. मैं तो यह भी मानती हूं कि फिल्म ‘‘बधाई हो’’ में यदि आयुश्मान खुराना और सान्या न होती तो फिल्म को सफलता न मिलती. नीना गुप्ता और गजराज राव को परदे पर देखने कोई नहीं आता.
सवाल- फिल्म‘‘ग्वालियर’’भी अब अमैजॉन यानी कि डिजिटल पर आएगी.मगर आपने इस फिल्म में अभिनय यह सोचकर किया था कि यह फिल्म ‘‘थिएटर’’में रिलीज होगी.पर अब यह थिएटर में नहीं हो रही है.तो बतौर कलाकार कितनी तकलीफ होती है?
-कम से कम यह प्रदर्शित हो रही हैं.पर उन फिल्मों की सोचिए,जो बिलकुल प्रदर्शित नहीं होती.अब मुझे लगता है कि मैं उन फिल्मों से दूर ही रहूं, जो रिलीज नही होती.जब फिल्म रिलीज नही होती,तो बहुत तकलीफ होती है.क्योंकि मेहनत उतनी ही जाती है. फिल्म ‘‘ग्वालियर’’ की शूटिंग करने से आप समझ लें कि मेरी जिंदगी के पांच साल कम हो गए होंगे. क्योंकि 45 डिग्री के तापमान में हम लोग रिक्शा में शूटिंग करते थे. सुविधाएं भी नहीं थी. क्योंकि यह छोटी फिल्म थी. मेरे पूरे शरीर में रैशेज हो गए थे. खुजलाते हुए मैं सीन करती थी. मैं बहुत कठिन समय से गुजरी थी. पर मुझे करने में मजा आया. अच्छा भी लगा. कोई शिकायत नहीं है. फिल्म ‘ग्वालियर’ पति पत्नी की एक बेहतरीन कहानी है, जिसमें मेरे साथ संजय मिश्रा है. मगर ऐसे में आप यह उम्मीद करते हैं कि फिल्म बहुत अच्छे से ढंग से रिलीज हो और ज्यादा से ज्यादा लोग देखें, लेकिन नेटफ्लिक्स और अमैजॉन के दर्शक काफी हैं. इसलिए अब मुझे इतना बुरा नहीं लगता,पर जो फिल्में बिल्कुल रिलीज नहीं होती, उस पर बुरा लगता है.
सवाल- आप एक सीरियल लिख रही थीं, जिसका निर्माण व निर्देशन करना चाहती थी. उसकी क्या प्रगति है?
-आप ‘सांस 2’ की बात कर रहे हैं. उस पर काम चल रहा है पर अब मैं इसे ‘स्टार प्लस’ के लिए नहीं कर रही हूं. पहले ‘स्टार प्लस’ के लिए किया था. अब मैं किसी अन्य चैनल के लिए कर रही हूं. इस बार मैं इसे पूर्णेन्दु शेखर के साथ मिलकर लिख रही हूं.
स्टूडियो और कारपोरेट कंपनियों के आने से सिनेमा या टीवी को फायदा हुआ है या नुकसान हुआ है?
-टीवी को तो नुकसान हुआ है पर फिल्मों को फायदा हुआ है. टीवी को बहुत नुकसान हुआ है. डिजिटल प्लेटफार्म से फायदा हुआ है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर छोटे छोटे लोग अच्छे कंटेंट को लेकर काम कर रहे हैं. डिजिटल प्लेटफार्म के चलते अब हमें 100 करोड़ की फिल्म बनाने की बाध्यता नही रही. अब 5 करोड़ की भी फिल्म बनाएंगे, तो भी दर्शको तक पहुंच जाएगी. हर किसी को अपने टैलेंट के साथ अपनी बात कहने का मौका मिला रहा है. लोगों के लिए यह बहुत अच्छी बात है. मैंने खुद भी दो लघु फिल्में की हैं.एक लघु फिल्म ‘‘पिन्नी’’का निर्देशन ताहिरा खुराना कश्यप ने किया है, जिसकी निर्माता गुनीत मोंगा हैं. मेरी एक लघु फिल्म ‘एडीशन सिंधी’ अभी ‘मिफ’ में दिखायी गयी है. ‘पिन्नी’ बहुत अच्छी फिल्म है, मुझ पर आधारित है.
सवाल- टैलेंट और पीआर दो अलग-अलग चीजें होती हैं.इस वक्त पीआर बहुत ज्यादा हावी हो गया है.तो आपको नहीं लगता कि टैलेंट की कद्र बहुत कम हो रही है?
– टैलेंट की कद्र तो हमेशा से कम थी. कम से कम अब पीआर की वजह से थोड़ी सी बेहतर हो रही है.
‘‘शुभ मंगल ज्यादा सावधान’’के बाद कहां नजर आएंगी?
-‘अमैजॉन’पर मार्च माह में एक आठ एपीसोड का वेब शो ‘‘पंचायत’’ आएगा. इसमें मेरे साथ रघुवीर यादव और जीतेंद्र कुमार हैं. मुझे लगता है कि इस साल के अंत तक औस्कर मे नोमीनेट हुई फिल्म‘‘द लास्ट कलर’’भी प्रदर्शित हो ही जाएगी.मार्च अप्रैल में ही ‘‘नेटफ्लिक्स’’पर एक अति रोमांचक वेब सीरीज‘‘मासाबा मासाबा’’आएगी.यह वेब सीरीज मसाबा के जीवन पर है. मासाबा ने खुद एक्टिंग की है. मैंने इसमें उसकी मां का किरदार निभाया है.यह भी बहुत कमाल की बनी है.इसका निर्माण अश्विनी यार्डी तथा निर्देशन ‘खुजली फेम सोनम नायर ने किया.
-‘83’में मैंने ‘पंगा’से भी छोटा रोल किया है, इसलिए इसका नाम नहीं लेती. इसमें मैं क्रिकेटर कपिल शर्मा(रणवीर सिंह)की मां का किरदार कर रही हूं.अब उसकी मां लंदन गई नहीं थी.सिर्फ एक दिन मैंने शूटिंग की.पर एक दिन में भी मुझे बड़ी तृप्ति हो गई.कुल आठ बार पोशाक बदली है.
उन्होंने केवल इंटरमीडिएट तक ही पढाई की है यानि की सिर्फ बारवीं कक्षा तक ही उन्होंने शिक्षा प्राप्त की है. मेनका गाँधी ने शादी भी बहुत जल्दी कर ली थी उन्होंने महज़ 18 वर्ष की उम्र में ही संजय गाँधी जी के साथ शादी क्र ली थी. शादी के बाद उन्होंने अपनी एक हिंदी पत्रिका भी शुरू की थी जिसका नाम सूर्या था. आज मेनका गाँधी बीजेपी सरकार में एक एहम भूमिका निभाती है.
3. बिहार की मुख्यमंत्री रह चुकी राबड़ी यादव
उन्होंने कोई भी शिक्षा प्राप्त नहीं की है.उनकी शादी 14 साल की उम्र में लालू प्रसाद यादव से हो गयी थी. बाद में कुछ एहम घोटालों की वजह से लालू प्रसाद को जेल हो गयी और उन्होंने अपनी सारी बागडोर अपनी पत्नी के हाथों सौंप दी.
4. तेजस्वी यादव
इन्होंने केवल 9वीं कक्षा तक ही पढाई की है.
5. राहुल गांधी
देहरादून के ‘दून स्कूल’ से स्कूल पढ़ाई की है.1984 में इंदिरा गांधी की हत्या होने के बाद राहुल को सुरक्षा कारणों के चलते अपनी पढ़ाई घर से ही करनी पड़ी.1989 में राहुल ने दिल्ली का Saint stepehen कॉलेज में दाखिला लिया और सुरक्षा कारणों के चलते उन्हें यहां भी पढ़ाई छोड़नी पड़ी. आगे की पढ़ाई के लिए राहुल अमेरिका चले गए.इसके बाद राहुल ने हावार्ड यूनीवर्सिटी में एडमिशन लिया. इसके बाद 1991 से 1994 तक रोलिंस कॉलेज से ग्रेजुएशन पास किया. 1995 में यूनीवर्सिटी ऑफ कैंम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज में एमफिल से डिग्री ली.
6. समृति ईरानी
जो की टेलीविज़न दुनिया की मनपसंदीदा बहु व सास रह चुकी है. अब वे बीजेपी पार्टी में एक एहम भूमिका निभा रही है. बता दे की सिम्रिति ईरानी ने दिल्ली से ही अपनी 12वीं की है और फिर उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही कोरेस्पोंडेंट के जरिये बीए के फर्स्ट ईयर तक की पढाई की हुई है.
7. वरुण गांधी
भाजपा नेता वरुण गांधी ने अपनी पढ़ाई डिस्टेंस लर्निंग के जरिए पूरी की थी.
8. ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पास ईस्ट जॉर्जिया यूनिवर्सिटी से डॉक्ट्रेट की उपाधि है. जब की कोई डिग्री अस्तित्व में ही नहीं है.
सपा नेता अखिलेश यादव की शुरुआती पढ़ाई राजस्थान बाद में सिविल इंवायमेंटर इंजीनियरिंग में बैचलर्स और मास्टर्स की डिग्री हासिल की.
10. सुरेश प्रभु
पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने द इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड एकाउटेंट्स आफ इंडिया से एकाउंट्स की डिग्री हासिल की है.
11. डिंपल यादव
सपा नेता अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव भी पढ़ाई में बहुत होशियार रही हैं. वो आर्मी स्कूल से पढ़ी हुई हैं.
12. रविशंकर प्रसाद
बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद ने पटना विश्वविद्यालय से बीए,एमए और एलएलबी की है. उन्होंने एमए पॉलिटिकल साइंस से किया है.
13. मनमोहन सिंह
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पंजाब यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में बैचलर्स और मास्टर्स किया. इसके बाद वे कैमब्रिज यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स ट्रिपॉस की डिग्री हासिल की.
14. प्रियंका गांधी
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी की स्कूलिंग मॉर्डन स्कूल और कॉन्वेंट आफ जीजस मेरी से हुई है. इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के जीजस मेरी कॉलेज से साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद प्रियंका ने बुद्धिस्ट में एमए भी किया है.
15. उमा भारती
बीजेपी की तेजतर्रार नेता मंत्री उमा भारती ने सिर्फ पांचवीं तक की पढ़ाई की है.
16. योगी आदित्यनाथ
44 साल के यूपी के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ उत्तराखंड के पौढ़ी गढ़वाल की श्रीनगर यूनिवर्सिटी से बीएससी मैथ हैं.
अक्सर खाना खाने के थोड़ी देर बाद ही हमें भूख लगने लग जाती है, जिसके लिए हम स्नैक्स के तौर पर तली हुई चीजें खा लेते हैं. आज हम आपको हल्की भूख को मिटाने के लिए टेस्टी सूप की रेसिपी बताएंगे. स्वीट पोटैटो सूप बनाना आसान है और स्वीट पोटैटो सूप हेल्दी के साथ-साथ टेस्टी भी होता है.
1 शकरकंदी को छील कर पतलेपतले स्लाइस में काट लें. 1 शकरकंदी को उबाल कर छिलका निकाल कर मैश कर लें. कड़ाही में मक्खन गरम कर सभी शिमलामिर्च और शकरकंदी के स्लाइस डाल कर भूनें. नमक, कालीमिर्च और 1 कप पानी डालें. शकरकंदी के पकने पर पनीर के टुकड़े, चीनी और मैश शकरकंदी डालें. ऊपर से 1 चुटकी दालचीनी पाउडर डाल कर गरमगरम परोसें.
कौ स्मैटिक्स की रंगीली दुनिया न केवल महिलाओं को आकर्षित करती है, बल्कि उन्हें आकर्षक भी बनाती है. यदि आप के पास कौस्मैटिक्स की बारीकियों को जानने के लिए अधिक समय नहीं है तो चिंता न करें. हम आप को करवाते हैं कौस्मैटिक्स में क्रैश कोर्स.
कौस्मैटिक टूल्स
फाउंडेशन, पाउडर, ब्लश, काजल, आईलाइनर, आईशैडो, लिपस्टिक के अलावा अब और कई नए कौस्मैटिक टूल्स मार्केट में आ गए हैं. जैसे:
– ब्यूटी ब्लैंडर एक ऐसा स्पंज है जिसे सही ढंग से फाउंडेशन व कंसीलर लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा है. इसे पानी में भिगो कर इस का असली फुलाव लाया जाता है. इस से न केवल फाउंडेशन व कंसीलर एकसार लगते हैं, बल्कि चेहरा प्राकृतिक कांति लिए भी लगने लगता है.
– अब सही प्रकार से मेकअप करने के लिए अलगअलग ब्रश उपलब्ध हैं जैसे गालों पर कंटूरिंग करने के लिए, आंखों पर आईशैडो की लेयरिंग के लिए, पलकों के लिए आईलैशेज कर्लर.
– हेयरड्रायर और हेयरस्टे्रटनर खरीदने से पहले बालों को सुल झाने के लिए बढि़या ब्रश खरीदें. गीले बालों के लिए वैट ब्रश और सूखे बालों के लिए डीटैगलिंग ब्रश.
– तौलिए या हाथों से चेहरे का मेकअप पोंछने पर गंदगी फैलने व कीटाणु होने का खतरा रहता है. इसी कारण आजकल चेहरा पोंछने के लिए फेशियल क्लीनिंग डिवाइस की सलाह दी जाती है. इस से न सिर्फ मेकअप साफ किया जा सकता है, बल्कि यह औयली स्किन के लिए भी उत्तम है. यह डैड स्किन भी निकाल देता है, साथ ही चेहरे पर ब्यूटी प्रोडक्ट्स के एब्जौर्ब होने की क्षमता भी बढ़ाता है.
– सिलिकौन का बना मेकअप ब्रश क्लीनर लेना न भूलें. दूसरे ब्रश प्रयोग के बाद गंदे हो जाएं तो यही आप के काम आएगा.
बढि़या मेकअप गुर
– सब से पहले चेहरे को साफ कर लें. चाहे धो कर या फिर वैट वाइप्स से. फिर उस पर गुलाबजल टोनर का स्प्रे कर लें.
– स्किन ड्राई हो तो चेहरे पर अच्छी तरह मौइस्चराइजर लगा लें. बरसात या गरमियां हों या आप की स्किन औयली हो तो मौइस्चराइजर न लगाएं. गरमियों में सनस्क्रीन अवश्य लगा लें.
– अब चेहरे पर प्राइमर वाटर स्प्रे करें. 2-3 बार स्प्रे करें. इसे चेहरे पर थपथपाएं और सूखने दें. स्प्रे करते समय आंखें बंद रखें. अगर आप प्राइमर जैल लगा रही हैं तो केवल मटर के दाने जितना लें. इसे डौटडौट कर के पूरे चेहरे पर लगाएं. थपथपा कर ब्लैंड करें. प्राइमर को कम से कम 1 मिनट और ज्यादा से ज्यादा 5 मिनट तक सूखने दें.
– हथेली की पिछली तरफ 2 बार पंप कर के फाउंडेशन ले लें. फिर डौटडौट कर के पूरे चेहरे और गरदन पर लगाएं खासकर आंखों के नीचे, होंठों के आसपास और टीजोन पर. ब्यूटी ब्लैंडर की मदद से थपथपा कर पूरे चेहरे पर अच्छी तरह ब्लैंड कर लें. जितना भी ऐक्सपोज्ड फेस एरिया है, उस पर इसे इच्छी तरह ब्लैंड करें. अगर आप के पास ब्यूटी ब्लैंडर नहीं है तो अच्छे ब्रश से पूरे चेहरे पर स्टैंप कर लें. फाउंडेशन की जगह आप बीबी क्रीम का प्रयोग भी कर सकती हैं.
– अब बारी आती है एसपीएफ युक्त कौंपैक्ट की. इस से आप का मेकअप सैट हो जाएगा.
– यदि आप की आईब्रोज शेप में हैं तो ठीक है वरना आईब्रो पैंसिल से उन्हें शेप दें. चूंकि आईब्रोज पूरे फेस को फ्रेम देती हैं, इसलिए उन की सही शेप होनी बहुत जरूरी है.
– आंखों को डैफिनिशन देने के लिए उन पर हलके रंग का और क्रीज पर डार्क कलर का आईशैडो लगाएं. अगर आप अपनी आंखों को डिफ्यूज इफैक्ट देना चाहती हैं तो आईशैडो के 2-3 शेड्स को मिक्स कर के लगाएं.
– ऊपरी आईलाइन पर काजल न लगाएं. कई बार काजल आइलिड तक फैल कर उसे काला कर देता है. लिक्विड आईलाइनर लगाएं. इसे लगाते समय आंखों के कोनों से शुरू करते हुए ब्रश को क्रीज लाइन तक लाएं. पतले ब्रश का प्रयोग करें ताकि लाइन टेढ़ी बन जाने पर आप उसे सही कर सकें. बाद में इस लाइन को अपनी इच्छानुसार थिक कर सकती हैं.
– काजल का उपयोग आप वाटरलाइन पर कर सकती हैं. इस से आंखों को कलर मिलता है और वे गहरी लगती हैं.
– यदि आप किसी पार्टी में जा रही हैं या अपनी आंखों को और अट्रैक्टिव बनाना चाहती हैं तो मसकारा लगा सकती हैं.
– गालों पर हलके रंग का ब्लशर लगाएं. याद रखें, ब्लश की लाइन दूर से दिखाई नहीं देनी चाहिए. अपने चेहरे से मैचिंग या एक हलके शेड का ब्लश लें. पिंक या न्यूट्रल शेड हो तो और बेहतर. कंटूरिंग ब्रश से जौ लाइन से अंडरचीक्स से होते हुए कानों के पास तक स्ट्रोक दें. थोड़ स्ट्रोक नोज ब्रिज पर भी दें.
– आंखों के नीचे के हिस्से में हाइलाइटर लगाने से पूरा चेहरा चमक उठेगा.
– अब पहले लिप लाइनर से होंठों को शेप दें, फिर अंदर सधे हाथ से लिपस्टिक लगाएं. लिक्विड लिपस्टिक हो तो उस के ज्यादा समय तक टिके रहने की संभावना ज्यादा होती है. लोअर लिप के अंदर की तरफ भी लगाएं वरना होंठों के रंग और लिपस्टिक में फर्क साफ दिखाई देता है.
– आखिर में चेहरे पर मेकअप सैटर का 2-3 बार स्प्रे करें. यह मेकअप की सारी लेयर्स को ब्लैंड कर चेहरे को अच्छी फिनिश देगा और मेकअप ज्यादा देर तक भी टिका रहेगा.
डार्क सर्कल्स और पिगमैंटेशन कैसे छिपाएं
इंडियन स्किन में आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स होने के साथसाथ होंठों के आसपास पिगमैंटेशन भी अकसर होता है. इसे छिपाने के लिए औरेंज रंग के कंसीलर या करैक्टर का प्रयोग करें. औरेंज रंग इंडियन स्किन टोन के लिए सब से अच्छा रिजल्ट देता है. इसे आंखों के नीचे, होंठों के आसपास और जहां भी पिगमैंटेशन है वहां लगाएं. आंखों के नीचे इसे इनवर्टेड ट्राइऐंग्युलर लगाएं और अच्छी तरह ब्यूटी ब्लैंडर से ब्लैंड करें.
इंडियन स्किन टोन के लिए मेकअप
ध्यान रहे,फाउंडेशन गोरा लगने के लिए नहीं,बल्कि मेकअप को एक बेस देने के लिए लगाया जाता है. गलत शेड का फाउंडेशन न चुनें. अगर आप ने अपने रंग से डार्क फाउंडेशन लिया तो आप का चेहरा केकी लुक देगा और अगर आप ने अपने रंग से लाइट कलर का फाउंडेशन लिया तो आप का चेहरा ऐशी लगेगा.
इंडियन स्किन टोन अकसर सांवली, औयली और फाइनलाइंस लिए होती है. औयली पार्ट्स और फाइनलाइंस पर कंसीलर फ्रीज हो जाता है, इसलिए कौंपैक्ट को अच्छी तरह स्पंज की मदद से लगाएं. डबल चिन छिपाने के लिए अपनी जौलाइन पर ब्लश लगाएं जो आप के चेहरे को कंटूर लुक देगा.
याद रखिए
– उंगलियों की तपिश से ब्यूटी प्रोडक्ट्स अच्छी तरह ब्लैंड हो जाते हैं.
– ब्यूटी ब्लैंडर से चेहरे को जितना थपथपाएंगी उतनी ही न्यूट्रल फिनिश आएगी.
– अपनी स्किन टोन से मैच करता या एक टोन कम फाउंडेशन ही लें.
– कंसीलर चुनते समय अपनी स्किन टोन से 1 या 2 शेड लाइट लें.
– आईब्रोज पैंसिल का कलर भी 1 टोन हलका या फिर मैचिंग होना चाहिए.
बौलीवुड एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ा (Priyanka chopra) और निक जोनस (Nick Jonas) के घर जल्द ही किलकारी गूंजने वाली है, उनके घर जल्द ही एक नन्हा मेहमान आने वाला है. दरअसल प्रियंका चोपड़ा की जेठानी और ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ टीवी शो में सान्सा स्टार्क (queen of north) का रोल निभाने वाली एक्ट्रेस ‘सोफी टर्नर ‘जल्द ही मां बनने वाली हैं.
खास मैसेज किया शेयर
इस खबर का खुलासा उनके पति और फेमस अमेरिकन सिंगर जो जोनस (Joe Jonas) ने शुक्रवार को valentine day के दिन अपनी पत्नी सोफी टर्नर को विश करते हुए किया. उन्होंने सोफी की एक फोटो शेयर किया. जहां वह पेड़ों की दो पंक्तियों के बीच फुटपाथ पर टहलती हुई दिखाई दे रही है. उन्होंने फोटो को दिल के कैप्शन से कैद किया.
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सोफी टर्नर (23) चार महीने की प्रेग्नेंट हैं. उन्होंने घरवालों को बच्चे की खुशखबरी सुनाई. तो इसका मतलब है कि निक जोनस और प्रियंका चोपड़ा चाचा और चाची बनने के लिए तैयार है. करीब एक साल की डेटिंग के बाद अक्टूबर 2017 में उनकी सगाई हुई. उस वक़्त सोफी टर्नर 21 साल की थी. निक के बड़े भाई जो और सोफी ने पिछले साल ही घरवालों और करीबियों के सामने एक-दूसरे का हाथ थामा था.
सोफी टर्नर ने रॉलिंग स्टोन (रोलिंग स्टोन्स 1962 में लंदन में गठित एक अंग्रेजी रॉक बैंड) से पिछले साल मार्च में अपनी शादी के बारे में बातचीत की थी .बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि ” joe से मिलने से पहले मैं पूरी तरह से तैयार थी अपनी लाइफ में खुद को सिंगल रखने के लिए”.उन्होंने कहा. “मुझे लगता है कि एक बार जब आपको अपनी लाइफ में सही पार्टनर मिल जाता है तो आपको पता चल जाता है. Joe से मिलने के बाद मेरा प्यार में विश्वास बहुत बढ़ गया और मै भी ‘i do’ कहने के लिए तैयार हो गयी “.
page6.com की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में आयोजित हुए ग्रैमी अवॉर्ड में इन दोनों ने साथ में शिरकत की, इसके कुछ दिनों बाद इन्हें लंदन में देखा गया जहां सोफी एक ढीले-ढाले स्वेटशर्ट में नजर आईं. बता दें कि सोफी टर्नर ने ‘गेम ऑफ थ्रोन्स’ में सान्सा स्टार्क का रोल निभाया था. उनकी एक्टिंग लोगों को बहुत पसंद आई थी.
बता दें कि प्रियंका चोपड़ा के पति निक जोनस तीन भाई हैं. उनका म्यूजिक बैंड बेहद पॉपुलर है. जो जोनस (30) की बात करें तो कुछ दिनों पहले उन्होंने अपने भाइयों निक और केविन के साथ मिलकर ‘वॉट ए मैन गॉट डू’ वीडियो बनाया, जिसमें प्रियंका भी नज़र आई थीं.
कलर्स के पॉपुलर टीवी शो बिग बौस सीजन 13 का फिनाले हो गया है, जिसमें विनर बने हैं सिद्धार्थ शुक्ला. आज हम आपको Bigg Boss के अब तक के winners और उनकी प्राइज मनी के बारें में. तो आइये जानते है–
1-Bigg Boss Season 1
Bigg Boss का पहला सीजन 2006 में टेलीकास्ट हुआ था और इस सीजन के विनर थे एक्टर राहुल रॉय और इनकी प्राइज मनी 1 करोड़ रुपए थी. Bigg Boss हिंदी के पहले सीज़न को अरशद वारसी ने होस्ट किया था. राहुल रॉय एक भारतीय फिल्म अभिनेता, निर्माता और मॉडल हैं. उन्होंने बॉलीवुड में अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1990 की ब्लॉकबस्टर फिल्म आशिकी से की थी.
2-Bigg Boss Season 2
Bigg Boss का दूसरा सीजन 2008 में टेलीकास्ट हुआ था और इस सीजन के विनर थे एक्टर आशुतोष कौशिक और इनकी प्राइज मनी 1 करोड़ रुपए थी. Bigg Boss के दूसरे सीज़न को एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी ने होस्ट किया था. आशुतोष कौशिक एक भारतीय टीवी अभिनेता है और 2007 में एमटीवी हीरो होंडा रोडीज़ 5 के विजेता भी रह चुके हैं.
Bigg Boss का तीसरा सीजन 2009 में टेलीकास्ट हुआ था और इसके विनर थे बिंदु दारा सिंह और और उनकी प्राइज मनी 1 करोड़ रुपए थी. Bigg Boss के तीसरे सीजन को अभिनेता अमिताभ बच्चन ने होस्ट किया था. विंदू दारा सिंह भारतीय फिल्म जगत के एक प्रसिद्ध व्यक्ति हैं. उन्होंने 1994 की फिल्म ‘करण’ के साथ हिंदी फिल्म जगत में अपने अभिनय की शुरुआत की और एक पंजाबी फिल्म, ‘रब दियां राखां’ में अभिनय किया, जिसे उनके पिता दारा सिंह ने निर्देशित किया था. साइड अभिनेता के रूप में भी उन्होंने कई फिल्मों में अभिनय किया है.
4- Bigg Boss Season 4
Bigg Boss का चौथा सीजन 2010 में टेलीकास्ट हुआ था और इसकी विनर थी ऐक्ट्रेस श्वेता तिवारी और इनकी प्राइज मनी भी 1 करोड़ रुपए थी. Bigg Boss के चौथे सीजन को अभिनेता सलमान खान ने होस्ट किया था. श्वेता तिवारी एक भारतीय टीवी अभिनेत्री हैं, जो स्टार प्लस के पॉपुलर शो ‘कसौटी ज़िंदगी की’ में प्रेरणा के रोले में काफी लोकप्रिय हुई.
5- Bigg Boss Season 5
Bigg Boss का पांचवा सीजन 2011 में टेलीकास्ट हुआ था और इसकी विनर थी एक्ट्रेस जूही परमार और इनकी प्राइज मनी भी 1 करोड़ रुपए थी. Bigg Boss के पांचवे सीजन को भी अभिनेता सलमान खान ने होस्ट किया था. एक्ट्रेस जूही परमार एक भारतीय टीवी अभिनेत्री है, जो स्टार प्लस के पॉपुलर शो ‘कुमकुम-एक प्यारा सा बंधन ‘में कुमकुम के रोले में काफी पौपुलर हुई.
6-Bigg Boss Season 6
Bigg Boss का छठा सीजन 2012 में टेलीकास्ट हुआ था और इसकी विनर थी एक्ट्रेस उर्वशी ढोलकिया और इनकी प्राइज मनी भी थी 1 करोड़ रुपए. Bigg Boss के छठे सीजन को भी अभिनेता सलमान खान ने होस्ट किया था. उर्वशी ढोलकिया एक भारतीय टीवी अभिनेत्री हैं, जो स्टार प्लस के पॉपुलर शो ‘कसौटी ज़िंदगी की’ में कोमोलिका के रोल में काफी लोकप्रिय हुई.
7- Bigg Boss Season 7
Bigg Boss का सातवां सीजन 2013 में टेलीकास्ट हुआ था और इसकी विनर थी एक्ट्रेस गौहर खान और इनकी प्राइज मनी भी थी 1 करोड़ रुपए. Bigg Boss के सातवे सीजन को भी अभिनेता सलमान खान ने होस्ट किया था.
गौहर खान एक भारतीय टीवी अभिनेत्री और मॉडल हैं. टीवी शो में अभिनय के अलावा, उन्होंने कई बॉलीवुड फिल्म रॉकेट सिंह: सेल्समैन ऑफ द ईयर (2009), रोमांटिक कॉमेडी फिल्म बद्रीनाथ की दुल्हनिया (2017) और बेगम जान (2017) जैसी फिल्मों में भी काम किया है.
Bigg Boss का आठवां सीजन 2014 में टेलीकास्ट हुआ था और इसके विनर थे एक्टर गौतम गुलाटी और इनकी प्राइज मनी भी थी 1 करोड़ रुपए. Bigg Boss के आठवे सीजन को भी अभिनेता सलमान खान ने होस्ट किया था. गौतम गुलाटी एक भारतीय टीवी अभिनेता और मॉडल हैं, जिन्हें ‘प्यार की ये एक कहानी’ और ‘दीया और बाती हम में’ उनकी हास्य भूमिका के लिए जाना जाता है.
9– Bigg Boss Season 9
Bigg Boss का नौवां सीजन 2015 में टेलीकास्ट हुआ था और इसके विनर थे प्रिंस नरूला और इनकी प्राइज मनी 50 लाख रुपए थी. Bigg Boss के नौवें सीजन को भी अभिनेता सलमान खान ने होस्ट किया था. प्रिंस नरूला एमटीवी रोडीज़ 12 के विजेता रह चुके है इसके आलावा उन्होंने कई अन्य रियलिटी टीवी शो के खिताब भी जीतेहैं.
10— Bigg Boss Season 10
Bigg Boss का दसवां सीजन 2016 में टेलीकास्ट हुआ था और इसके विनर थे मनवीर गुर्जर और इनकी प्राइज मनी थी. 50 लाख रुपए. Bigg Boss के दसवें सीजन को भी अभिनेता सलमान खान ने होस्ट किया था. मनवीर गुर्जर ने बानी जे, लोपामुद्रा राउत, रोहन मेहरा, गौरव चोपड़ा और मोनालिसा जैसी लोकप्रिय हस्तियों को पीछे छोड़ते हुए, बिग बॉस सीजन 10 के विजेता बने थे.
11- Bigg Boss Season 11
Bigg Boss का ग्यारहवां सीजन 2017 में टेलीकास्ट हुआ था. इसकी विनर थी एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे और इनकी प्राइज मनी थी 44 लाख रुपए. Bigg Boss के ग्यारहवें सीजन को भी अभिनेता सलमान खान ने होस्ट किया था. शिल्पा शिंदे एक भारतीय टीवी अभिनेत्री हैं, जो TV के पॉपुलर शो ‘भाभी जी घर पर है’ में अंगूरी भाभी के किरदार में काफी लोकप्रिय हुई .
12- Bigg Boss Season 12
Bigg Boss का बारहवां सीजन 2018 में टेलीकास्ट हुआ था. इसकी विनर थी एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ और इनकी प्राइज मनी थी 30 लाख रुपए. Bigg Boss के ग्यारहवें सीजन को भी अभिनेता सलमान खान ने होस्ट किया था. दीपिका कक्कड़ निस्संदेह सबसे लोकप्रिय भारतीय टीवी अभिनेत्रियों में से एक हैं. वो TV के पोपुलर शो ‘ससुराल सिमर का’ में सिमर भारद्वाज के किरदार में काफी लोकप्रिय हुई.
Bigg Boss 13 का ग्रैंड फिनाले आखिरकार 15 फरवरी, 2020 को प्रसारित हो गया. जी हां, Bigg Boss 13 के विजेता के नाम की घोषणा की गई है. जी हां, सिद्धार्थ शुक्ला, जो 2019 के सबसे अधिक खोजे जाने वाले भारतीय टीवी अभिनेताओं में से एक थे, ने बिग बॉस 13 का खिताब जीता है और इनकी प्राइज मनी है 50 लाख रुपए. Bigg Boss के इस सीजन को भी अभिनेता सलमान खान ने ही होस्ट किया है.
कौफी का सेवन हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है. कॉफ़ी में मौजूद कैफीन का असर हमारे पूरे शरीर पर पड़ता है. ऑफिस में थकान के बाद कौफी का सेवन करने से ऊर्जा मिलती है, यानी अगर आप ऊर्जा चाहते हैं तो कौफी का सेवन कीजिए. अगर आप वर्कआउट के 1 घंटे पहले कौफी पी लें फिर वर्कआउट करें तब आप अधिक देर तक वर्कआउट कर पायेंगे. एक शोध में पाया गया है की नियमित रूप से दिन में 2 से 3 बार Coffee पीने से लीवर कैंसर, टाइप 2 मधुमेह, और हार्ट से सम्बंधित सभी रोगों का जोखिम कम होता है. लेकिन कौफी का सेवन सीमित मात्रा में करने से ही इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. अगर आप हर रोज 4-5 कप कौफी का सेवन करते हैं तो यह आपके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकता है.
आपने अक्सर देखा होगा की बाहर मशीन से जो Coffee बनायीं जाती है वो झाग वाली होती है पर जब हम घर पर Coffee बनाते है तो उसमे झाग नहीं होता. आज हम बनायेंगे झाग वाली Butter Coffee. जी हाँ दोस्तों सुनने में अजीब लगा होगा पर वाकई में ये Butter Coffee पीने में बहुत स्वादिष्ट होती है. दोस्तों अगर आपके घर में Coffee मशीन नहीं है तो आप hand Blander या स्टील की मथानी की सहायता से भी झाग वाली Coffee घर पर ही आसानी से बना सकते है.यकीन मानिये ये मशीन वाली Coffee से ज्यादा टेस्टी लगेगी. चलिए जानते हैं की इसे कैसे बनाना है-
1 -Butter Coffee बनाने के लिए सबसे पहले एक केतली में 4 कप दूध को गरम होने के लिए गैस पर रख देंगे .जब तक दूध गरम हो रहा है तब तक में बाकी की तैयारी कर लेंगे.
2 –एक गिलास में ½ कप गरम दूध लेकर उसमे Butter और Coffee को डाल देंगे.फिर एक चम्मच की सहायता से उस मिश्रण को अच्छे से फेटेंगे. इस मिश्रण को 2- 3 मिनट तक फेंटते रहेंगे .
3 –अब इस मिश्रण को खुलते हुए दूध में दाल देंगे. अब hand Blander या स्टील की मथानी की सहायता से दूध को 3 से 4 मिनट तक अच्छे से फेंटते रहेंगे.
4 –आप देखेंगे की केतली में झाग ही झाग हो गया है . अब गैस को बन्द कर दे .अब इस झाग वाली Coffee को 4 अलग- अलग Coffee mug में बराबर बराबर मात्रा में डाल लेंगे. अब चारों कप में ऊपर से थोड़ा-थोड़ा Coffee पाउडर या कोई भी हेल्थ ड्रिंक (Bournvita,horliCks ) डालकर serve करें.
अमुमन सभी माताओं की एक ही चिंता रहती है कि उनके बच्चे का सही तरीके से विकास नहीं हो रहा, क्यों कि वह काफी दुबला है. गोलमटोल चेहरे और उभरी हुई जांघों वाले बच्चे उच्च ‘‘कडल कोटेटिव‘‘ के कारण आपके रिश्तेदारों के बीच पसंदीदा हो सकते हैं, लेकिन वे सभी तंदुरूस्त नहीं हो सकते हैं. वास्तव में, एक बच्चा स्वस्थ है या नहीं यह उसके शारीरिक स्वास्थ्य द्वारा निर्धारित नहीं किया जा सकता है. नवजात शिशु की औसत ऊंचाई 50 सेमी और औसत वजन करीब 3.25 किलो होना चाहिए.
अब यदि आपके शिशु की लम्बाई में 55 सेमी है और उसका वजन 3.3 किलो है उसे दुबला कहा जा सकता है. लेकिन वह सामान्य व स्वस्थ बच्चा है. कुछ शिशु एक आनुवंशिक है जिसकी वजह से दुबले रहते हैं जबकि कुछ का मॉडरेशन के बावजूद वजन बढ़ सकता है.
इसलिए, जब तक आपके बच्चे की उचित ऊंचाई और वजन का अनुपात नहीं होता, तब तक चिंता करने की आवश्यकता नहीं है.
क्या फैट एक चिंता का विषय है?
हां, क्योंकि कुछ शोधों से पता चला है कि एक मोटे बच्चे को भविष्य में मोटापा बढ़ने की संभावना अधिक हो सकती है. एक ऐसे युग में जहां गैर-संचारी रोग (एनसीडी) मोटापे, जीवन शैली विकल्पों और जंक फूड से शुरू हुआ, महामारी के अनुपात तक पहुंच गया है, शुरुआत से ही वजन बनाए रखना एक अच्छी शुरुआत है. बच्चों में जल्द से जल्द वजन की समस्याओं और मोटापे को खत्म करना, गंभीर चिकित्सा स्थितियों को पैदा करने वाले कारणों को कम कर सकता है. क्योंकि वे बड़े हो जाते हैं और पूरे परिवार को शामिल करके, आप वजन की समस्याओं और मोटापे के घेरे को तोड़ सकते हैं. साथ ही अपने बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकते हैं और उन्हें अच्छी डाइट सजेस्ट कर सकते हैं. यहां माता-पिता के लिए कुछ सरल मापदण्ड बताए जा रहे हैं ताकि वे अपने बच्चे को स्वस्थ्य वयस्कों के रूप में बड़ा कर सकें.
कम से कम 6 महीने तक बच्चे को स्तनपान कराने से न चूकें. अध्ययनों से पता चला है कि इस अवधि के लिए स्तनपान करने वाले बच्चे दुबले हो सकते है लेकिन उनकी प्रतिरक्षा शक्ति अधिक होती है और संक्रमण और एलर्जीस होने की संभावना कम रहती है. भोजन पूरी तरह से बच्चे की पोषण सम्बन्धी जरूरतों के लिए बनाया गया है और हमेशा विकास की मांगों को पूरा करता है. इसके अलावा, स्तनपान करते समय आवश्यकता से अधिक खिलाना लगभग असंभव है, हालांकि, फार्मूला मिल्क फीडिंग के कारण आमतौर पर अत्यधिक वजन बढ़ सकता है.
2. बच्चे के रोते ही उसे फीड न कराए:
शिशु रो रहा है इसके मायने यह नहीं की उसे भूख ही लगी होगी. आमतौर पर ऐसा होता है कि माताएं बच्चे के रोते ही उसे फीड कराती हैं ताकि वह चुप हो जाए. बच्चे का वजन बढ़ने का एक प्रमुख कारण यह भी है. बच्चा क्यों रोता है कभी शायद भूख के कारण, लेकिन वे थके होने, असहज होने पर भी रो सकता हैं. यदि यह एक फीड के बाद से केवल कुछ समय के लिए है, तो आपको कुछ अन्य चीजों की कोशिश करनी चाहिए जैसे डायपर बदलने, पकड़ने , बात करने और खेलने की कोशिश करें. यह महत्वपूर्ण है कि बच्चे को दूध पिलाने के बारे में सोचने की बजाय बच्चे के लिए क्या सही है क्या गलत जानने की कोशिश करें. खाने के साथ एक अस्वास्थ्यकर सम्बन्ध बनाते है तो उसे पूर्ववत करना आपके लिए कठिन होगा.
3. ओवरफीड न करें:
जब तक कि डॉक्टर यह न बता दें कि शिशु को अधिक पोषण की आवश्यकता है, हर कीमत पर ऐसा करने से बचें. बच्चे को खाना ख़त्म करना है जरूरी है पर जैसे ही बच्चा इसे खाना बंद कर देता है, आपको रोकना चाहिए.
4. स्वस्थ ठोस भोजन दें:
जब तैयार हों (लगभग 6 महीने तक), अपने बच्चे को फल और सब्जियां, फलियां, साबुत अनाज दें, और यदि आप मांसाहारी हैं, तो अंडे, मछली और थोडा सा मीट उसे दे सकती हैं. इससे पहले कि वे चूजी हो जाए इस समय का उपयोग करें. आयरन-फोर्टिफाइड बेबी सीरियल्स अधिक मात्रा में नहीं दें.
5. परिवार का भोजन जल्दी शुरू करें
जो बच्चे अपने माता-पिता के साथ भोजन करते हैं, उनका वजन अधिक होने की संभावना कम होती है, इसलिए उन्हें खाने की मेज पर एक साथ बैठायें. परिवार के साथ भोजन करना मजबूत रिश्ते बनाते हंै और बच्चों को स्कूल में सफल होने में मदद करते हैं.
अपने बच्चे को घुमाने ले जाएँ और उसे व्यायाम की सलाह दें. चलना और दौड़ना सिखाएं, ‘टमी टाइम‘ करें, उसके चलने-फिरने या दौड़ने को प्रोत्साहित करें. उन्हें सैर के लिए बाहर ले जाएं और तय करें कि वे खुले स्थानों में चलते और दौड़ते हों.
7. अत्याधिक टीवी या गैजेट्स से दूर रखें:
अधिक समय तक टीवी या मोबाइल पर चिपके रहने से बच्चे की शारीरिक गतिविधिया कम हो जाती नतीजतन उसे भूख नहीं लगती, और इससे मोटापा बढ़ने की संभावना रहती है. इसके साथ ही उसके विकसित होते दिमाग पर भी इसका विपरीत असर पड़ता है.
हम अपने बच्चों को जो भोजन खिलाते हैं, वह उनके जीवन के पोषण का आधार बनता है. माता-पिता बच्चों को स्वस्थ पौष्टिक खाने के ट्रैक पर लाने के लिए जिम्मेदार हैं. डॉक्टरों को निश्चित रूप से माता-पिता (और देखभाल करने वालों) को सरल शिक्षा के माध्यम से ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए.
डॉ. रोहित अरोड़ा, हेड नियोनेटोलॉजी एवं पीडियाट्रिक, मिराकेल मेडिक्लीनिक एण्ड अपोलो क्रेडल हौस्पिटल, गुरूग्राम से बातचीत पर आधारित.