अगर बूढ़ा नही होना तो खूब करो प्रदूषण!

जी हां आपको मेरा टाइटल देख कर लग रहा होगा की बुढ़ापे से बचने का उपाय मिल गया, पर मैं आपकी जानकारी के लिए ये बता दूं कि यदि इसी तरह प्रदूषण बढ़ता रहा तो शायद हम सच में कभी बूढ़े नही हो पाएंगे, क्योंकि जैसे- जैसे प्रदूषण बढ़ेगा हमारी उम्र अपने आप कम होती जाएगी.

प्रदूषण हमारे आने वाले कल के लिए एक बहुत ही चिंता का विषय है. यह हवा में घुल कर हमारे और हमारे बच्चों के लिए एक स्लो प्वाइजन की तरह काम कर रहा है.प्रदूषण से होने वाली बीमारियां जैसे अस्थमा, फेफड़ों का कैंसर और हार्ट अटैक का खतरा हमारे सिर पर मंडराता रहता है.

ग्लोबल बर्डेन ऑफ़ डिजीज (GBD) 2017 के विश्लेषण के अनुसार, हवा में जहरीले तत्व मिले होने के कारण भारत में हर 3 मिनट में एक बच्चे की मृत्यु हो जाती है.एक शोध के अनुसार विश्व के30 सबसे प्रदूषित शहरों में से 22 शहर भारत के हैं. वायु प्रदूषण के कारण वर्ष 2018 में लगभग 1.2 मिलियन भारतीयों की अकाल मृत्यु हुई थी.

क्या आपको पता है कि यूरोप मेंमार्निंग विजिबिलिटी 1000 m है और यही मॉर्निंग विज़िबिलिटी हमारी राजधानी दिल्ली में नवम्बर के महीने में10 m तक ही रह जाती है.

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हमे लगता है कि प्रदूषण बढ्ने का मुख्य कारण केवल पराली है लेकिन शायद हम यह नही जानते कि हम हर वक़्त खतरे के निशान के ऊपर जी रहे है.हमारे शहर का PM2.5 लेवल हमेशा 200 से 300 के बीच रहता है जबकि W.H.O की गाईड लाइन के अनुसारPM2.5 लेवल 50 से नीचे रहना बहुत जरूरी है, पर क्या आप जानते है कि 8 नवंबर को PM2.5 लेवल 726 पार कर गया था. इस प्रदूषण में सांस लेना 1 दिन में 40 सिगरेट पीने के बराबर है. चलिए जानते है कि प्रदूषण कम करने के उपाय और उनसे होने वाले फायदे के बारे में:

सबसे पहले

1-कागज़ का उपयोग कम करें

कागज़ का उपयोग एकदम कम कर दीजिए क्योंकि कागज़ की डिमांड के कारण हर साल लगभग 700 करोड़ पेड़ काटे जाते है.अगर पेड़ कम कटेगें तो प्रदूषणभी काफी हद तक नियंत्रित होगा.कागज़ का उपयोग कम करने से हम डिजिटल होंगे,हमारा डाटा लंबे समय तक रिटेन रहेगा और हमारी कॉस्ट बचेगी.

2- खाने की बर्बादी न करे

हमें पुराने जमाने मे जो संस्कार मिलते थे वो खुद के लिए भी अच्छे थे और जमाने के लिए भी. शायद लोगो को नही पता कि खाने की बर्बादी भी एक प्रकार का प्रदूषण है.जो खाना हम बर्बाद करते है उनसे एक प्रकार की मीथेन गैसनिकलती है जो कि कार्बन डाई ऑक्साइड गैस से 25 गुना ज्यादा खतरनाक है.1 किलो खाना बर्बादकरनेसे 4 किलो मीथेन गैस निकलती है. एक सर्वे के अनुसार आम घरों में 20% खाना हर महीने बर्बाद होता है.कॉरपोरेट फंक्शन,पार्टीज या किसी भी इवेंट में 30% खाना बर्बाद होता है.यदि हम खाने की वेस्टेज को न्यूनतमकर दें तो हमारापैसा बचेगा और प्रदूषण भी कम होगा.

3पानी बचाये

हमारी धरती पर सिर्फ 1% पानी पीने लायक है बाकी का 99% पानी हम पीने में उपयोग नही कर सकते.पानी की कमी को पूरा करने के लिए हम जमीन से पानीखीचते है जिससे पानी का लेवल काफी नीचे जा रहा है. इसका असर हमारे पेड़ो पर हो रहा है.अगर पेड़ ख़त्म होंगे तो न ही शुद्ध हवा होगी और न ही पानी. इसलिए जितना हो सके पानी बचाइये.

4पब्लिकट्रांसपोर्ट प्लान करें

आजकल गाड़ियों की संख्या इंसानो से ज्यादा हो गयी है गाड़ियों की संख्या में बढ़ोत्तरी के कारण प्रदूषण का लेवल बढ़ता जा रहा है. जितना हो सके पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें. अपनी गाड़ियों का समय समय पर प्रदूषण चेक कराएं. आप अपने सहकर्मियों के साथ कारपूल प्लान कर सकते हैं. इससे आपका सर्कल बढ़ेगा,पैसा भी बचेगा और प्रदूषण भी कम होगा.

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5पेड़ लगाए

प्रदूषण को रोकने में सबसे बड़ा योगदान पेड़ लगाना है. अपने ऑफिस/घर के आस पास हर महीने एक एक्टिविटी रखें जिसमे यह सुनिश्चित करें कि हर व्यक्ति पेड़ लगाए. सामाजिक रूप से जिम्मेदार बनिये.प्रतिष्ठा एक नई मुद्रा है.

हमारे घर/औफिस के अंदर के प्रदूषण को नियंत्रित करने में कुछ पौधे मुख्य भूमिका निभाते है. आइये जानते है कुछ ऐसे पौधों के बारे में जिन्हें घर मे लगाने से इंडोर प्रदूषण से काफी हद तक निपटा जा सकता है. यह पौधे किसी भी नर्सरी में बहुत आसानी से हमें उचित रेट में मिल सकते हैं:

a)अलोवेरा

यह हवा में उपस्थित खराब तत्वों को नियंत्रित करने में मदद करता है और आसानी से कहीं भी लगाया जा सकता है.

b)मनीप्लांट

मनीप्लांट घर के अंदर या बाहर आसानी से लग जाता है. यह हवा को साफ करने में काफी मददगार है और हमारे घर के ऑक्सीजन की मात्रा को भी बढ़ा देता है.

c)पाम ट्री

इस पौधे को लिविंग रूम प्लांट भी कहते हैं. यह हवा में उपस्थित कार्बन मोनोऑक्साइड और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसों को दूर करता है और ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाता है. इस पौधे को घर के सभी दरवाजों के पास लगाएं.

d)तुलसी

यह पौधा हमारे घरों में आसानी से मिल जाता है. इस पौधे का हमारे वेदों में भी बहुत महत्व है. तुलसी की पत्तियों का रोज सुबहनियमित रूप से सेवन करने सेवायरल बुखार और अस्थमाजैसी बीमारियों से काफी हद तक छुटकारा मिल जाता है.

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e)स्पाइडर प्लांट

यह पौधा वायुमंडल में उपस्थित बहुत से जहरीले केमिकल से हमारी रक्षा करता है. इस पौधे को लगाना बहुत ही आसान है. इसे ना ही ज्यादा पानी की जरूरत है और ना ही सनलाइट की.

f)करी पत्ता

करी पत्ता बैड कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है, जिससे कि दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है.

आइये हम सब मिलकर अपनी आने वाली पीढ़ी को एक स्वच्छ वातावरण दे और प्रदूषण मुक्त भारत बनाये.

घर पर बनाएं टेस्टी वेज मोमो

मोमो एक बहुत प्रसिद्ध तिब्बतन रेसिपी है. अब तो भारत में भी इसका प्रचलन बहुत तेज़ी से बढ़ रहा है. मोमो की एक खासियत है की इसको बनाने में तेल का उपयोग बहुत ही कम होता है और यह आसानी से भाप में पाक जाता है. ठण्ड का मौसम है और बाज़ार बहुत ही हरी-भरी सब्जियां आ रही है. हम मोमो में मनचाही सब्जियां भी डाल सकते है. ये मोमो बच्चे और बड़े बहुत ही मन से खायेंगे और ये स्ट्रीट फ़ूड की तुलना में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी नहीं है. चलिए बनाते है वेज मोमो और मोमो वाली मार्केट जैसी चटनी-

हमें चाहिए-

250 gm मैदा

1 चम्मच नमक

1चम्मच तेल

जरूरत के अनुसार पानी

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स्टफिंग के लिए-

¼ कप बारीक़ कटी हुई प्याज

1 मध्यम साइज़ बारीक कटी बन्दगोभी

1/4 कप बारीक कटी शिमला मिर्च

1/4 कप बारीक कटा गाजर

1 टेबलस्पून लहसुन का पेस्ट

1 चुटकी अजीनोमोटो(ऑप्शनल)

½टेबलस्पून तेल

बनाने का तरीका-

1-एक कटोरी में गेहूं का आटा/मैदा लें और उसमें नमक और तेल डालें. इसमें पानी डालकर गूंधे .आटा ज्यादा कड़ा न गूंधे .आटे को एक कटोरे के साथ कवर करें और 1 घंटे के लिए अलग रखें.

फ्राइंग पैन में 1 छोटा चम्मच तेल गर्म करें. लहसुन का पेस्ट डालें और तब तक फ्राई करें जब तक कि यह रंग में हल्का सुनहरा न हो जाए. अब कटे हुए प्याज डालें .प्याज़को हल्का लाल होने तक भूने.अब बाकीकटी हुई सब्जियों को डालें और थोड़ी तेज़ आंच में भून लें.

अब ऊपर से नमक, अजीनोमोटो डालकर अच्छी तरह मिला लें. याद रखे अजीनोमोटो ऑप्शनल है .अब गैस का स्विच ऑफ करें और अलग रखें.

अब आटे की छोटी-छोटी गोलियां बनाये और उनको पतला पतला बेल ले .अब स्टफिंग को केंद्र में रखें और आटे का बाहरी हिस्सा उठाएं. रोल में भराव बंद करने के लिए बाहरी भाग को आपस में चिपका दें .

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बाकी आटे के लिए प्रक्रिया दोहराएं.

प्रेशर कुकर का इस्तेमाल भाप लेने के लिए करें. प्रेशर कुकर में एक 2 कप पानी डालें और उस कुकर पर छलनी रखें.अब छलनी के ऊपर मोमो रख दे और ऊपर से छलनी की शेप की प्लेट से ढक दे .8 से 10 मिनट तक पकाएं.

मोमो तैयार हैं. इसको लहसुन और लाल मिर्च की चटनी के साथ खाए.

6 टिप्स: सिर्फ पीने के नहीं, घर को चमकाने के काम भी आती है सौफ्ट ड्रिंक

कोल्ड ड्रिंक्स की बहुत से लोगों के घर में नो ऐन्ट्री है. जब से इसके नुकसानों का पता चला है इसका सेवन कम हो गया है. कुछ राज्यों में इसे बैन भी कर दिया गया है. जो लोग स्वास्थ्य के प्रति सजग होते हैं वे तो इसे बिल्कुल भी हाथ नहीं लगाते हैं. पर एक सच यह भी है कि आज भी बहुत से लोग बिना सौफ्ट ड्रिंक्स के नहीं रह सकते. पर सौफ्ट ड्रिंक्स को नापसंद करने वाले लोगों भी अब इसे घर में रखने पर मजबूर हो जाएंगे. कोल्ड ड्रिंक आपके स्वास्थ्य के लिए भले ही हानिकारक हो पर यह आपके घर के कई कामों को आसान कर देगा.

क्या आपने कभी सौफ्ट ड्रिंक से कपड़े धोने की सोची है? या फिर कभी आपके दिमाग में यह ख्याल आया कि आप सौफ्ट ड्रिंक से अपने कार की बैट्री भी साफ कर सकती हैं? नहीं न? पर यह कुछ ऐसे काम हैं जो सौफ्ट ड्रिंक से आसान हो सकते हैं. अब सौफ्ट ड्रिंक को घर पर रखने के मिल गए हैं कई कारण. घर के इन कामों को आसान करे सॉफ्ट ड्रिंक-

1. कीट-पतंगों का सफाया

आपके खूबसूरत किचन गार्डन पर अगर कीट-पतंगों ने कब्जा कर लिया है तो सौफ्ट ड्रिंक की सहायता से आप आसानी से उन्हें दूर कर सकते हैं. एक बाउल में सॉफ्ट ड्रिंकरख दें. कीट-पतंगे उसकी महक से खींचे चले आएंगे, और उसमें मौजूद जहर से मर जाएंगे.

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आप चींटियों के घर से भी सौफ्ट ड्रिंक की मदद से निजात पा सकती हैं. जहां चींटियों का घर हो वहां पर सौफ्ट ड्रिंक डाल दें, और चींटियों का काम तमाम करें.

2. कार की देखभाल

सौफ्ट ड्रिंक की मदद से कार की बैट्री की भी देखभाल कर सकते हैं. सौफ्ट ड्रिंक का एसिड और बैट्री का एसिड रिएक्ट नहीं करते. इसलिए सौफ्ट ड्रिंक की मदद से आप आसानी से कार के कोरोजन को हटा सकते हैं. इसके अलावा आप कार के विंडशिल्ड पर जमे बर्फ को भी सौफ्ट ड्रिंक की मदद से हटाया जा सकता है.

3. करे टौयलेट को क्लीन

आप खुद अपने घर में आजमा कर देखें. एक बोतल सौफ्ट ड्रिंक को टौयलेट पैन या कमोड में डालें और अपने टौयलेट को आसानी से चमकाएं. जिद्दी से जिद्दी दाग भी सौफ्ट ड्रिंक से साफ हो जाएंगे.

4. जंग हटाए

कई बार घर में रखे औजारों को अच्छे से संभालकर रखने के बावजूद भी उनमें जंग लग जाते हैं. पर सॉफ्ट ड्रिंक की मदद से औजारों के जंग को भी हटाया जा सकता है. जंग लगे औजारों और नट-वोल्ट को रात भर के लिए सौफ्ट ड्रिंक में भिगो के रख दें. उसके बाद इन्हें एक ब्रश से स्क्रब कर लें. फर्क आप खुद देखें.

5. ग्रीज के स्टेन

वक्त आ गया है कि आप अपने लौन्ड्री एरिया में सौफ्ट ड्रिंक को ऐन्ट्री दें. ग्रीज के स्टेन हटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है. पर सौफ्ट ड्रिंक से ये काम आसानी से किया जा सकता है. बेस्ट रिजल्ट के लिए स्टेन पर तुरंत सौफ्ट ड्रिंक लगाएं. कुछ देर के लिए छोड़ दें. फिर गर्म पानी और डिटर्जेंट से कपड़े को धो लें.

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6. तांबे के बर्तनों की सफाई

तांबे के बर्तन में खाना बेहद लजीज बनता है. पर  वक्त के साथ-साथ तांबे के बर्तन भी अपनी चमक खोने लगते हैं. यूं तो आप तांबे के बर्तनों को चमकाने के लिए कई नुस्खें अपनाती होंगी, पर क्या आप जानती हैं कि आप सौफ्ट ड्रिंक की मदद से अपने तांबे के बर्तन भी चमका सकती हैं. सौफ्ट ड्रिंक में मौजूद एसिड से तांबे के बर्तनो की चमक बनी रहती है.

गुड न्यूज के गाने मचा रहे है धूम

गुड न्यूज़ के ट्रेलर के बाद अब दर्शक इस फिल्म के संगीत को भी पसंद करते नज़र आ रहे है. फिल्म का पहल गाना ” दिलादे घर चंडीगढ़ में” का  लांच भव्य पैमाने में अक्षय कुमार , किआरा अडवाणी , बादशाह और हार्डी संधू के उपस्थिति में चंडीगढ़ में किया गया, जिसको देशभर से काफी सराहा गया इस फिल्म का दूसरा गाना सौदा खरा खरा लांच होते पहले ही दिन से यूट्यूब पर लगातार टौप पर है, सुखविंदर ने फिर एक बार दर्शको को अपनी धुन पर थिरकने मजबूर किया है.

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हर कही डिस्को , पब, औटोरिक्षा, बस,  ट्रैन या चलते चलते लोग गुड न्यूज के गाने सुनते नज़र आ रहे है.पंजाबी फ्लेवर होने के वजह से शादियों  में भी यह गाने  बार बार बजाई जा रहे है. अक्षय ने सौदा खरा खरा में घोड़े पे बैठके नागिन डांस किया है उसकी भी चर्चा जोरो शोरो से हो रही है.

फिल्म के अन्य गाने अभी आने बाकि है, देखते है वह संगीत प्रेमियों के दिल पे राज करने में कितने सफल होते है.अक्षय कुमार , करीना कपूर , दिलजीत दोसांझ और किआरा अडवाणी अभिनीत , राज मेहता द्वारा निर्देशित यह फिल्म 27 दिसंबर को सभी सिनेमागृह में प्रदर्शित की जाएगी.

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रेटिंगः ढाई स्टार

निर्माताः टीसीरीज और बीआर फिल्मस

निर्देशकः मुदस्सर अजीज

कलाकारः कार्तिक आर्यन, भूमि पेडनेकर, अपारशक्ति खुराना, अनन्या पांडे.

अवधिः दो घंटे आठ मिनट

1978 की बीआर चोपड़ा की सुपर हिट फिल्म ‘‘पति पत्नी और वह’’ की इस रीमेक फिल्म को  फिल्मकार मुदस्सर अजीज ने समसामायिक बनाते हुए इसमें आदर्शवाद के साथ हास्य तड़का भी डाला है. मगर मुदस्सर अजीज अपनी पिछली फिल्म ‘‘हैप्पी भाग जाएगी’’ के के मुकाबले इस बार कुछ मात खा गए हैं.

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कहानीः

कहानी कानपुर में पले बढ़े और कानपुर के पीडब्लूडी में कार्यरत इंजीनियर अभिनव त्यागी उर्फ चिंटू त्यागी (कार्तिक आर्यन) की है. उनकी शादी वेदिका (भूमि पेडनेकर) के संग हुई है. वेदिका को कानपुर छोड़ दिल्ली में बसने की चाह है. शादी के कुछ अरसे तक तो सबकुछ बेहतर चलता है. वेदिका भी एक कालेज में पढ़ाने लगती है. चिंटू की जिंदगी भी रूटीन और बोरियत से गुजरने लगती है. पर तभी दिल्ली से कानपुर शहर में तपस्या सिंह (अनन्या पांडे) का आगमन होता है. वह कानपुर में एक भूखंड लेकर उस पर अपना ब्यूटिक का व्यापार शुरू करना चाहती हैं, इसी सिलसिले में तपस्या जब पीडब्लू डी आफिस पहुंचती है, तो तपस्या और चिंटू त्यागी की मुलाकात होती है. यहीं से चिंटू की जिंदगी बदल जाती है. चिंटू तपस्या की ओर आकर्षित हो जाता है. उन दोनों की नजदीकी का राजदार चिंटू का दोस्त फहीम रिजवी (अपारशक्ति खुराना) है. एक दिन तपस्या को पता चलता है कि चिंटू त्यागी शादीशुदा है, तो वह चिंटू से दूरी बनाने गलती है. ऐसे हालत में तपस्या का साथ पाने के लिए चिंटू त्यागी, तपस्या के सामने अपनी पत्नी वेदिका को चरित्रहीन बताता है. दोनो फिर से नजदीक आ जाते हैं. उधर फहीम अपनी तरफ से चिंटू को शादी और दुनियादारी की बातें समझाने की कोशिश करता है. चिंटू अपनी पत्नी वेदिका और वह तपस्या के बीच कोई संतुलन साध पाता, उससे पहले ही हालात बिगड जाते हैं. फिर कहानी में कई अजीबोगरीब मोड़ आते हैं.

निर्देशनः

पटकथा के स्तर पर कुछ कमियों के बावजूद फिल्म शुरू से अंत तक दर्शकों को हंसाने का प्रयास करती है. मगर कई जगह हास्य दृश्य जबरन खींचे हुए लगते हैं. कहानी धीरे धीरे विकसित होती है कानपुर शहर की पृष्ठभूमि और संवादो की भाषा और लहजा फिल्म को रोचक बनाते हैं. इसे एडीटिंग टेबल पर कसने की जरुरत थी. वेदिका आज की नारी है, जो कि पति के आगे दबकर जीने में यकीन नही रखती. पटकथा की कमजोरी के चलते चिंटू त्यागी की पूर्व प्रेमिका नेहा का बार बार जिक्र होता है, पर चिंटू त्यागी अभी भी नेहा से किस वजह से जुड़ाव महसूस करता है, इसका कहीं कोई जिक्र नही होता.

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अभिनयः

मूलतः कानपुर निवासी कार्तिक आर्यन ने कानपुर के युवक चिंटू त्यागी के किरदार में जान डाल दी है. चिंटू त्यागी के किरदार को कार्तिक आर्यन अपने हलके से हकलानेवाले अंदाज से मनोरंजक बनाते हैं. वेदिका के किरदार में भूमि पेडनेकर ने साबित कर दिखाया कि उनके अंदर विविधतापूर्ण किरदार निभाने की अद्भुत क्षमता है. वेदिका के किरदार में वह ग्लैमरस और घरेलू दोनों ही रूप में अच्छी लगी हैं. भूमि पेडनेकर की जितनी तारीफ की जाए, उतना कम है. तपस्या के किरदार में अनन्या पांडे ने शानदार अभिनय किया है. अनन्या पांडे के करियर की यह दूसरी फिल्म होने के बावजूद उनके अंदर जबरदस्त आत्मविश्वास नजर आता है. फहीम के किरदार में अपारशक्ति खुराना ने भी जानदार परफौर्मेंस दी है. नीरज सूद व नवनी परिहार ने ठीक ठाक अभिनय किया है.

छोटी सरदारनी: मेहर को जिंदा देखकर क्या होगा सबका रिएक्शन?

कलर्स टीवी पर प्रसारित होने वाले पौपुलर शो ‘छोटी सरदारनी’ में दर्शकों को लगातार धमाकेदार ट्विस्ट देखने को मिल रहे हैं.  जी हां, यह शो दर्शकों को काफी एंटरटेन कर रहा है. कहानी का एंगल एक नया मोड़ लेते नजर आ रहा है. तो चलिए आपको बताते हैं, इस शो में आने वाले ट्विस्ट के बारे में…

क्या मुसीबत की वजह बन जाएगी सरब की चुप्पी…

आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि सरबजीत की चुप्पी उसे गुनहगार साबित करने वाली है. जज फैसला सुनाने वाले होंगे कि तभी कोर्ट के बाहर शोर शराबे की आवाज सुनाई पड़ेगी.

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मेहर को जिंदा देखकर क्या होगा सबका रिएक्शन…

जब गुंडों से लड़कर मेहर कोर्ट पहुंचेगी, तब उसे जिंदा देखकर गिल फैमिली का रिएक्शन देखने लायक होगा. यहां आप ये भी देखेंगे कि नन्हा परम कितना अकेला हो गया है और अपनी मेहर मम्मा के बिना बैचेन और दुखी है.

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अब देखना ये है कि क्या मेहर के आने से सरबजीत की बेगुनाही साबित हो पाएगी…

जानने के लिए देखिए ‘छोटी सरदारनी’, सोमवार से शनिवार, शाम 7:30 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

पानीपत फिल्म समीक्षाः जानें क्या है फिल्म में खास

रेटिंगः ढाई स्टार

निर्माताः सुनीता गोवारीकर और रोहित शेलातकर

निर्देशकः आशुतोष गोवारीकर

संगीतकार: अजय अतुल

कलाकारः अर्जुन कपूर, संजय दत्त, कृति सैनन, मोहनीश बहल, पद्मिनी कोल्हापुरे, जीनत अमान और नवाब शाह

अवधिः दो घंटे 53 मिनट

फिल्मकार आशुतोश गोवारीकर पहली बार इतिहास पर केंद्रित फिल्म लेकर नही आए हैं. वह इससे पहले भी ‘जोधा अकबर’ और ‘मोहन जोदाड़ो’ जैसी फिल्में बना चुके हैं. पर इस बार वह 1761 की पानीपत की तीसरी लड़ाई पर फिल्म लेकर आए हैं, जिसके संबंध में हर किसी को पता है कि आततायी व लुटेरे अति क्रूर अफगानी शासक अहमद शाह अब्दाली से मराठा परास्त हुए थे. मगर निर्देशक आशुतोश गोवारीकर अपनी इस फिल्म में पानीपत के उस तीसरे युद्ध में मराठाओं के परास्त होने की वजहों के साथ शौर्य, जांबाजी, प्रेम, बलिदान की गाथा को पिरोया है.

कहानीः

फिल्म शुरू होती है सदाशिव राव भाऊ (अर्जुन कपूर) द्वारा उदगीर के निजाम को परास्त कर विजयी होकर लौटने और नाना साहेब पेशवा के दरबार में उनके सम्मान से. सदाशिव राव भाउ अपने चचेरे भाई नाना साहब पेशवा (मोहनीश बहल) की सेना का जांबाज पेशवा है. अपने सम्मान के दौरान सदाशिव दरबार मे ही उदयगीर की सेना स जुड़े इस इब्राहिम खान गार्डी (नवाब शाह) को कुछ विरोधों के बावजूद मराठा सेना का हिस्सा बनाने की घोषणा करता है.

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उदगीर के निजाम को परास्त करने के बाद दरबार में सदाशिव राव भाऊ के बढ़ते रसूख और ख्याति से पेशवा की पत्नी गोपिका बाई (पद्मिनी कोल्हापुरे) इस बात को लेकर असुरक्षित हो जाती हैं कि कहीं गद्दी का वारिश सदाशिव न बन जाए. वह अपने पुत्र विश्वास राव (अभिषेक निगम) को गद्दीन शीन देखना चाहती हैं. इसी के चलते सदाशिव के प्रभाव को कम करने के लिए उसे युद्ध से हटाकर धनमंत्री बना दिया जाता है.

उधर राज वैद्य की बेटी पार्वती बाई (कृति सेनन) सदाशिव से प्रेम करने लगी है, वह उनके शरीर पर लगी चोट पर दवा लगाते हुए अपने प्रेम का इजहार भी कर देती है. और जल्द ही वह विवाह के बंधन में बंध जाते हैं. तभी दिल्ली की गद्दी को हथियाने के लिए नजीब उद्दौला (मंत्रा) अफगानिस्तान के बादशाह अहमद शाह अब्दाली (संजय दत्त) के साथ हाथ मिलाता है. ऐसे समय में दिल्ली की गद्दी और देश को बचाने के लिए मराठा सेना का नेतृत्व सदाशिव राव भाऊ को सौंपा जाता है.

सदाषिव राव, शुजाउद्दौला (कुनाल कपूर) व अन्य राजाओं के साथ नजीब उद्दौल व अहमद शाह अब्दाली के खिलाफ मोर्चा खोल देते हैं. पानीपत के मैदान में सदाशिव और अब्दाली की जंग के बीच वीरता और शौर्यता के साथ-साथ विश्वासघात की कहानी सामने आती है. पर इस युद्ध में विश्वास राव व सदाशिव के साथ तकरबीन डेढ़ लाख सैनिक मारे जाते हैं और अहमद शाह अब्दाली की जीत होती है.

निर्देशनः

फिल्मकार आशुतोष गोवारीकर ने इतिहास के उस जटिल अध्याय को चुना है, जहां सत्ता के लिए पीठ पर खंजर भोंकना आम बात थी. पेशवा शाही की अंदरूनी राजनीति के साथ-साथ दिल्ली की जर्जर होती स्थिति और अपने निजी स्वार्थों के लिए देश की सुरक्षा को दांव पर लगाने वाले राजाओं के साथ आशुतोश ने उन वीरों की शौर्यगाथा का भी चित्रण किया है, जो देश की आन-बान के लिए शहीद हो गए थे.

ऐतिहासिक विषयों पर फिल्म बनाते समय आषुतोश गोवारीकर का सारा ध्यान भव्य सेट और कास्ट्यूम पर ही रहता है. जिसके चलते वह इस बार काफी चूक गए हैं. एडीटर कई जगह मात खा गए. फिल्म बेवजह लंबी होने के साथ ही धीमी गति से आगे बढ़ती है. पानीपत पहुंचते पहुंचते इंटरवल हो जाता है.

इसके अलावा कास्ट्यूम पर ध्यान देते समय वीएफएक्स पर कम ध्यान दिया है, जिसके चलते अमहद शाह अब्दाली का दरबार सही ढंग से नहीं उभरा. वीएफएक्स काफी कमजोर है.अहमद शाह अब्दाली के चरित्र को भी फिल्मकार ठीक से रेखांकित नहीं कर पाए. वास्तव में फिल्मकार का सारा ध्यान राष्ट्वाद और मराठा वीरता तक ही रहा. सदाशिव राव और पार्वती बाई की प्रेम कहानी भी ठीक से उभर नहीं पायी. गोपिका बार्ठ के किरदार को भी सही ढंग से चित्रित नहीं किया गया.

फिल्म के कई संवाद मराठी भाषा मे हैं, जिसके चलते गैर मराठी भाषायों को दिक्कत होगी. युद्ध के दृष्य सही ढंग से नही बने हें. एक्शन दृष्य भी कमजोर हैं. अफगानी शासक अहमद शाह अब्दाली जिस तरह का खुंखार दरिंदा था, उस तरह से वह इस फिल्म में नहीं उभरता. सदाशिव राव और अहमद शाह अब्दाली के बीच युद्ध के एक भी दृष्य का न होना कई सवाल खड़े करता है. नितिन देसाई का आर्ट डायरेक्शन और नीता लुल्ला के कौस्ट्यूम ने इस एतिहासिक फिल्म को भव्य बनाने में मदद की हैं. कैमरामैन सी के मरलीधरन बधाई के पात्र हैं.

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अभिनयः

सदाशिव राव भाऊ के किरदार में अर्जुन कपूर ने काफी मेहनत की है, मगर एक मराठा योद्धा के रूप मे वह सटीक नही बैठते. पार्वती बाई के किरदार में कृति सैनन खूबसूरत लगी हैं और अपने किरदार के साथ उन्होनें न्याय भी किया है. अहमद शाह अब्दाली के किरदार में संजय दत्त ने जबरदस्त परफौर्मेंंस दी है. विश्वास राव के किरदार में अभिशेक निगम अपनी अभिनय प्रतिभा की छाप छोड़ जाते हैं. सहयोगी कलाकारों में पद्मिनी कोल्हापुरे, मोहनीश बहल, सुहासिनी मुले, नवाब शाह, अभिषेक निगम आदि ने अपनी भूमिकाओं को सही ढंग से निभाया है. जीनत अमान की प्रतिभा को जाया किया गया है.

वजह: भाग-1

“तूने क्या सोच कर अपनी मां से मेरी शादी कराई ? जब देखो मैडम साधू माता के चरणों में पड़ी रहती है. दिन भर काम कर के मैं थकामांदा घर लौटता हूं कि चलो अब बीवी के साथ समय बिताऊंगा पर नहीं. बीवी तो कभी फ्री मिलती ही नहीं. कभी बाबा के आश्रम में तो कभी साधू माता के साथ फोन पर, कभी अपनी आश्रम की सहेलियों के साथ गायब रहती है तो कभी तुझ से बातें करने में मगन. मेरे पास आने का तो कभी समय ही नहीं है उस के पास. फिर क्यों मुझ से शादी कर मेरी जिंदगी खराब की?” निशा का तथाकथित डैडी यानी सौतेला पिता गुस्सा में बोले जा रहा था.

निशा कोई जवाब देने में असमर्थ थी. क्या करती? बातें तो उस की सही ही थीं। अपने पापा के मरने के बाद निशा ने काफी समय तक मां को अकेला और उदास देखा था. कॉलेज से उस के लौटने के बाद ही मां के चेहरे पर खुशी की चमक दिखाई पड़ती थी. वह कॉलेज के बाद का अपना सारा समय इसी प्रयास में निकाल देती कि किसी तरह मां खुश रहे. उन के होठों पर मुस्कान आ सके.

निशा का प्रयास रंग लाता। मां उस के साथ दुनिया के गम भुला कर खिलखिलाने लगतीं। तब उसे लगता जैसे वह दुनिया की सब से खुशहाल बेटी है. आखिर मां को मिला ही क्या था जीवन में? दिनरात ताने सुनाने वाली सास, हुक्का गुड़गुड़ ने वाले बीमार ससुर ,किशोर बेटे की असामयिक मौत का गम और फिर कम उम्र में ही विधवा हो जाने का दंश. आज के समय में मां के पास उस के सिवा अपना कहने वाला कौन था? मायके में भी एक भाई के सिवा कोई नहीं था और उस भाई का होना न होना बराबर था. वह सिंगापुर में रहता था और सालों में कभी मुलाकात होती थी.

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ऐसे में अपनी शादी के बाद मां के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए निशा ने उन से दूसरी शादी की बात छेड़ी थी,”मां मेरी मानो अब आप भी शादी कर लो. अकेले जिंदगी कैसे गुजरेगी आप की ?”

मां एकदम से नाराज हो गई थी,” यह क्या कह रही है तू ?होश में तो है? इस उम्र में शादी करूंगी मैं? रमेश क्या सोचेंगे? मैं उन के सिवा किसी और के साथ….  नहींनहीं। कभी नहीं। कल्पना भी मत करना ऐसी बातों की.”

मां के साफ इनकार करने पर निशा का मुंह उतर गया था. निशा ने उन्हें फिर से समझाने का प्रयास किया था,” जरा ध्यान से सुनो आप मेरी बात. आप अब 50 साल से ऊपर की हो. पूरे घर में अकेली हो. कल को अचानक कोई तकलीफ हुई तो मेरे पहुंचतेपहुंचते तो बहुत देर हो जायेगी न. और फिर मेरे सासससुर का मिजाज तो जानती ही हो आप। उन्हें तो यही डर लगा रहता है कि कहीं मैं अपनी मां को हमेशा के लिए उन के घर ले कर न पहुँच जाऊँ. मेरे हाथ बंधे हुए हैं मां। वैसे भी मेरे घर आप की कोई इज्जत नहीं होगी तो फिर अपना घर ही बसा लो न. यही उपाय सब से बेहतर है. बी प्रैक्टिकल मॉ और पापा क्या सोचेंगे इस की चिंता आप बिलकुल भी मत करो. एक तो पापा अब इस दुनिया में है नहीं और यदि रहते भी तो आप को दुखी तो नहीं ही देखना चाहते।”

” पर बेटी इस उम्र में कोई और पुरुष?”

“तो क्या हुआ मां ? अपने बारे में सोचो आप. कोई बहुत बड़ा बैंकबैलेंस नहीं है आप के पास. बड़ा सा बंगला भी नहीं है. अकेली रहती हैं आप इस छोटे से घर में. नौकरचाकर भी नहीं हैं. आगे आप की उम्र बढ़ेगी. उम्र के साथ बीमारियां भी आती है. मैं आप की जिम्मेदारी उठाना भी चाहूं तो भी पति की मर्जी के खिलाफ ऐसा नहीं कर सकती। इसलिए शादी ही सब से अच्छा उपाय है. आप हां बोल दो मां। आप का जीवन सुरक्षित हो जाएगा। मैं भी निश्चिंत हो सकूंगी आप की तरफ से.”

“ठीक है बेटा। तुझे सही लगता है तो ऐसा ही सही,” बुझे मन से मा ने स्वीकृति दी थी पर निशा बहुत खुश थी. जल्दी से जीवनसाथी मेट्रोमोनियल साइट में मां की प्रोफाइल बनाने लगी , ‘ 50 साल की स्वस्थ, खूबसूरत और संस्कारी बहू…. ‘

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मां यह पढ़ कर बहुत हंसी थी. फिर दोनों ने मिल कर प्रोफाइल तैयार की। पहला इंटरेस्ट भेजा था निशा के प्रेजेंट डैडी यानी कमल कुमार सिंह ने. 55 साल के बिजनेसमैन। बेटाबहू लंदन में सेटलड। नोएडा में अपना बंगलागाड़ी। निशा ने पहली नजर में ही यह रिश्ता पसंद कर लिया था. मां ने भी ज्यादा आनाकानी नहीं की और उन की शादी हो गई.

मां की शादी करा कर निशा बड़ी खुश थी. अपनी जिम्मेदारियां किसी और के माथे सौंप कर निशा को सुकून मिल रहा था पर उसे कहां पता था कि यह सुकून कुछ पलों का साथी है.

( अगले अंक में पढ़िए कि पिता की मौत के बाद मां की दोबारा शादी करा कर अपनी जिम्मेदारी निभाने वाली निशा को क्या इस शादी के बाद वाकई मां की तरफ से सुकून हासिल हो सका … ?)

ऐसे फौलो करें इंस्टाग्राम मेकअप ट्रेंड

मेकअप करना हर किसी को पसंद होता है खासकर महिला वर्ग को. मेकअप करने से न केवल हम सुन्दर दिख पाते है, बल्कि हमारी आंखे, लिप्स जैसी अन्य चीजें भी और अच्छी लगती है. और आज कल बढ़ते दौर के साथ हमारे पास कई चीज़े एडवांस भी हो गयी है, जैसे की हम हम सिर्फ पार्लर में ही नहीं बल्कि घर पर भी अपना मेकअप कर सकते है.  अगर अब किसी पार्टी में जा रही है तो आप ऑनलाइन मेकअप वीडियो देखकर भी अपना मेकअप कर सकती है. औनलाइन प्लेटफॉर्म में आपको कई अन्य तरह के मेकअप देखने को मिल सकते है. औनलाइन प्लेटफौर्म पर आप मेकअप के साथ साथ अलग अलग तरह के हेयरस्टाइल देखकर भी बना सकते है.

युवा और सोशल मीडिया

आज कल के युवा सोशल मीडिया का इस्तेमाल ज्यादा करते है खासकर इंस्टाग्राम और फेसबुक जिस पर आपको कई तरह की वीडियो देखने को मिलती है, और ये वीडियो देखकर युवा ज्यादा इन्फ्लूंस होते है, और उसी वीडियो को देखकर वह अपना मेकअप भी करते है. वे ऐसी वीडियो देखकर ट्राई करते है की शायद वे भी बिलकुल हूबहू मेकअप कर सके.

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आंकड़े

एक स्टडी के अनुसार यह भी माना गया है की 91-96 % महिलाएं रोज़ किसी न किसी मेकअप प्रोडक्ट का इस्तेमाल करती है. और यह भी देखा गया है की मेकअप ने केवल ज्यादा उम्र की महिलाएं करती है बल्कि स्कूल और कौलेज की लड़कियां सबसे ज्यादा मेकअप करना पसंद करती है.  पर यह लोग ये भूल जाते है की मेकअप हमे रोजाना नहीं करना चाहिए खासकर वे लोग जिनकी हमारी 25 साल से काम है , क्योंकि उनकी स्किन बहुत ही ज्यादा सेंसिटिव होती है , जिससे की वो जडस केमिकल व हार्श मेकअप करेंगी तो उनकी स्किन भी खराब हो सकती है.  जैसे की उनके पिम्पले , वाइट स्पौट , डार्क स्पौट जैसी अन्य समस्या का का सामना करना पढ़ सकता है.

मेकअप हो लाइट

इंस्टाग्राम और फेसबुक की मेकअप वीडियोस  देख कर यह उनका मेकअप अपनाने का प्रयास करती है. पर वह ये भूल जाती है कि ये ऑनलाइन वीडियो उनके लिए कितनी  खतरनाक साबित हो सकती है. बता रही हैं सेलिब्रिटी मेकअप आर्टिस्ट समायरा संधू. यह वीडियो केवल देखने में ही सुन्दर लगती है पर असल में इस तरह की वीडियोस की सच्चाई कुछ और ही होती है. यदि आपको मेकअप करना ही है तो आप कोशिश करें की मेकअप का इस्तेमाल आप कम से कम ही करें और अपना मेकअप लाइट ही रखें. और फाउंडेशन हमेशा अपने स्किन टोन के हिसाब से ही रखें , और अगर आपकी स्किन औयली है तो आप आयल फ्री मेकअप ही इस्तेमाल करें. इंस्टाग्राम पर दिखाई जाने वाली वीडियो अक्सर पूरा सच नहीं होती, उस वीडियो के दौरान उसमें लाइट्स के इस्तेमाल किया जाता है और वीडियो बनाने के बाद उसकी एडिटिंग भी की जाती है.

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टिप्स –

मेकअप करने के बाद आप हमेशा मेकअप  स्प्रे का इस्तेमाल करें , जिससे की आपका मेकअप लम्बे समय तक टिका रहेगा. और यदि आपकी स्किन औयली है तो आप ब्लौट शीट अपने पास रखें जिससे की आप आप मेकअप सारा दिन औयल फ्री रख सकते है.

क्यों जरूरी है कोचिंग

लेखक- नवीन सिंह पटेल

सीमा की ख्वाहिश मैडिकल में कैरियर बनाने की थी. उस के शिक्षक मम्मीपापा भी इकलौती बेटी को डाक्टर बनाना चाहते थे. उन्हें अपनी बेटी की मेहनत पर पूरा भरोसा था. 10वीं कक्षा में उस ने 95 फीसदी अंक हासिल कर के न सिर्फ अपनी क्षमता दिखाई वरन घर वालों के सपनों को पंख भी लगा दिए. मैडिकल के कंपीटिशन से सभी वाकिफ थे. सीमा ने दिल्ली के एक प्रतिष्ठित कोचिंग सैंटर में दाखिला ले लिया. स्कूल की पढ़ाई के साथ 2 साल तक नियमित मैडिकल की कोचिंग ने रंग दिखाया. आज वह एक मैडिकल कालेज में अपने सपनों की पढ़ाई में जुटी हुई है.

सीमा कहती है, ‘‘मु झे कोचिंग सैंटर में2 सालों में जो सिखायाबताया गया वह मैं और कहीं हासिल नहीं कर सकती थी. पढ़ाई के तौरतरीके और बेसिक्स क्लियर करने में कोचिंग ने बहुत मदद की.’’

शानदार सफलता पाने की हसरत हर किसी की होती है. बात चाहे आला दर्जे की नौकरी पाने की हो या फिर ऊंची कमाई दिलाने वाले कोर्स में दाखिला लेने की, कोचिंग अचूक हथियार साबित हो रही है. तभी तो कोचिंग लेने वालों की भीड़ दिनबदिन बढ़ती जा रही है और कोचिंग सैंटरों की भी. कई स्कूलों ने तो अपने ही कैंपस में कोलैबोरेशन कर के इंजीनियरिंग या मैडिकल की कोचिंग दिलानी शुरू कर दी है.

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कोचिंग बच्चों को सही दिशा और प्रोत्साहन देती है, लक्ष्य पाने का हुनर सिखाती है. कोचिंग सैंटरों की पढ़ाई टौनिक सरीखी होती है.

दिल्ली के एक प्रतिष्ठित कोचिंग सैंटर में सिविल सेवा की तैयारी में जुटे एक छात्र राजीव कहते हैं, ‘‘आईएएस की परीक्षा के लिए कोई किताब प्रकाशित नहीं हुई है कि उसे पढ़ो और पास हो जाओ. उस का कोर्स बहुत विस्तृत है. इस के लिए सैकड़ों किताबें खरीदनी और पढ़नी पड़ती हैं. इस में पैसा तो खर्च होता ही है, नोट्स बनाने में भी काफी समय बीत जाता है. जबकि कोचिंग सैंटर से हमें पढ़ने का सारा मैटीरियल तैयार किया मिल जाता है. परीक्षा के पैटर्न और सिलेबस में बदलाव होने पर भी कोचिंग में ऐक्सपर्ट फटाफट तैयारी करा देते हैं. यह सब घर बैठे पढ़ाई में कहां संभव है?’’

1. सही दिशा

कैरियर प्लानिंग सैंटर की निदेशक डा. शीला कहती हैं, ‘‘हम यह मान कर चलते हैं कि जो किताबें हमें रूटीन में पढ़नी हैं, प्रतियोगी परीक्षा में भी उन्हीं में से पूछा जाना है. पर ऐसा होता नहीं है. रूटीन और प्रतियोगी पढ़ाई का अंतर तब पता चलता है, जब बच्चा कोचिंग सैंटर जाता है. वहां टाइम मैनेजमैंट तो सिखाया ही जाता है, कंपीटिशन की प्रैक्टिस भी कराई जाती है. इस से एग्जाम क्रैक करना आसान हो जाता है.’’

यह मान लेना भी ठीक नहीं कि कोचिंग सैंटर में दाखिला लेने से ही सबकुछ हासिल हो जाएगा. कोचिंग का काम पौलिशिंग का है. पर कोयले पर पौलिश से क्या मिलेगा? हीरे पर पौलिश होगी तो वह चमक उठेगा. इसीलिए, वही बच्चे कामयाब हो पाते हैं, जिन में खुद कुछ है और आगे करना चाहते हैं.

2. सफलता की कुंजी

प्रतियोगी परीक्षाओं का दौर बढ़ने के साथ कोचिंग क्लासेज की उपयोगिता भी तेजी से बढ़ी है. आज सीए, सीएस, एमबीए जैसे कोर्सेज के लिए कोचिंग प्रवृत्ति बन गई है. बैंकिंग, रेलवे और एसएससी जैसे कंपीटिशन की तैयारी के लिए भी कोचिंग की संख्या में इजाफा हो रहा है. छात्रों को लगता है कि कोचिंग ही सफलता का मूल मंत्र है.

दरअसल, बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कालेज में न माहौल मिल पाता है, न कोचिंग सैंटर के प्रोफैशनल टीचर सरीखी पढ़ाई ही मिल पाती है. कोचिंग क्लासेज में हर विषय का बढि़या स्टडी मैटीरियल मिल जाता है, जो अच्छे अंक प्राप्त करने में मददगार बनता है.

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3. कोचिंग की जरूरत

कोचिंग की जरूरत और उपयोगिता निरंतर बढ़ रही है और छात्रों की संख्या भी. कमाल की बात है कि यह कारोबार हजारों करोड़ में पहुंच चुका है. राजस्थान में कोटा, उत्तर प्रदेश में कानपुर, इलाहाबाद व लखनऊ, बिहार में पटना, मध्य प्रदेश में इंदौर और महाराष्ट्र में मुंबई जैसे शहर अब अच्छी कोचिंग के लिए जाने जाते हैं. अकेले कोटा में ही हर साल करीब 6 लाख से अधिक छात्र कोचिंग के लिए पहुंचते हैं. आईआईटी हो या अन्य प्रतियोगी परीक्षाएं, कोटा को कोचिंग का मक्का समझा जाने लगा है.

कोचिंग सैंटरों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते यहां पढ़ाने के तौरतरीकों मैं टैक्नोलौजी का इस्तेमाल भी शुरू हो गया है. आज हर बड़ा कोचिंग इंस्टिट्यूट औनलाइन टैस्ट के जरिए अपने छात्रों की दक्षता आंक रहा है. एयरकंडीशंड क्लासरूमों और लाइबे्ररियों की सुविधा भी कोचिंग सैंटर दे रहे हैं. कई कोचिंग सैंटर गरीब बच्चों को मुफ्त कोचिंग भी दे रहे हैं.

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