खतरनाक हैं ये 4 एप्स! एक भी हो फोन में तो करें डिलीट

जैसे स्मार्टफोन एप्लिकेशन्स आपके फोन के फंक्शन्स और फीचर में इजाफा करती है, आपके स्मार्टफोन को और स्मार्ट बनाती हैं, वैसे ही कुछ स्मार्टफोन ऐप्स ऐसी भी होती हैं जो आपके फोन और प्राइवेसी दोनो के लिए खतरनाक हैं. इनमें से कई तो आपके फोन में प्री इंस्टौल भी आती हैं. ऐसे में आज हम आपको कुछ खतरनाक ऐप्स के बारे में अगाह करने वाले हैं जिनमें से अगर एक भी आपके फोन में हो तो अपने फोन और प्राइवेसी की खातिर उन्हें तुरंत डिलीट कर दें.

1. Cam Scanner

खतरनाक ऐप्स की बात करें तो ताजा मामला एक ऐसी ऐप को लेकर सामने आया है जो लगभग हर किसी के फोन में पाई जाती है. इसका नाम है कैम स्कैनर. ये एप डौक्यूमेंट्स को स्कैन करने के काम में आती है और लोग अच्छी खासी संख्या में इसका इस्तेमाल भी करते हैं. अगर आपके फोन में भी ये ऐप है तो इसे तुरंत डिलीट कर दें क्योंकि इसमें वायरस सपॉट किया गया है. साइबर सिक्योरिटी कैसपर्सस्कीने यूज़र्स को अपने ब्लौग पोस्ट में इसे लेकर चेतावनी भी दी है. बता दें कि इस ऐप के लेटेस्ट वर्जन में मैलिशस मॉड्यूल Dropper.AndroidOS.Necro.n पाया गया है. ये बिना यूजर की परमिशन के उसके फोन में मैलवेयर इंस्टॉल करता है, जो बैंकिंग डीटेल्स चुराने से लेकर फेक ऐड्स पर क्लिक करवाने और फेक सब्सक्रिप्शंस के लिए साइन-अप करवाने जैसे काम सकता है.

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2. UC Browser

क्रोम के बाद स्मार्टफोन्स पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला ब्राउजरयूसी ब्राउजर है. अगर आप भी इंटरनेट सर्फ करने के लिए इस ऐप का इस्तेमाल करते हैं तो तुरंत बंद कर दें और फोन से इसे अनइंस्टौल कर दें. दरअसल इस ऐप के सर्वर चीन में हैं और इस ऐप के जरिए यूजर का डेटा चीनी सर्वरों पर भेजा जाता है. कुछ समय पहले इसी वजह से गूगल ने इसे प्ले स्टोर से भी हटा दिया था. डेटा की सेफ्टी की वजह से भारतीय सेना ने भी सैनिकों को इन ऐप का इस्तेमाल करने से मना कर रखा है.

3. Anti Virus, Cleaner, Battery Saver Apps

 इस तरह के नाम वाली हजारों ऐप आपको गूगल प्ले स्टोर पर मिल जाएंगी और इनमें से एक ना एक ऐप लगभग हर किसी के फोन में मिलेगी. अगर आप के फोन में भी ऐसी कोई भी ऐप है तो जान लें कि आज स्मार्टफोन्स इतने स्मार्ट हैं कि उन्हें फोन की मैमोरी मैनेज करने, बैटरी बचाने या वायरस से सुरक्षित रहने के लिए किसी तीसरी ऐप की जरूरत नहीं है. हां जब यहां एक बात का ध्यान रखें कि जब तक आप सिर्फ प्ले स्टोर से ऐप्स डाउनलोड कर रहे हैं तब तक आपके फोन को वायरस का भी कोई खतरा नहीं है.

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4. WhatsApp Duplicates

कई लोग बेफिजूल के फीचर्स के लिए व्हाट्सऐप के डुप्लीकेट वर्जन इस्तेमाल करते हैं. इस तरह की रिस्क किसी को भी नहीं लेनी चाहिए क्योंकि व्हाट्सऐप के नाम से प्ले स्टोर पर थोक के भाव से मौजूद ऐप्स आपकी प्राइवेट चैट्स और जानकारी के लिए खतरनाक साबित हो सकती है. ऐसे में व्हाट्सऐप का सिर्फ ओरिजनल वर्जन ही इस्तेमाल करें.

GRAMMY AWARDS 2020: पति निक के साथ हौट लुक में पहुंचीं प्रियंका चोपड़ा, देखें फोटोज

प्रियंका  चोपड़ा बीती शाम पति निक जोनस के साथ ग्रैमी अवॉर्ड शो में पहुंचीं. दोनों की जोड़ी हमेशा की तरह परफ़ेक्ट लग रही थी. लेकिन इस दौरान प्रियंका के आउटफिट ने सबका ध्यान अपनी ओर खींचा.

दरअसल प्रियंका ने इस दौरान ऑफ व्हाइट कलर का फ्रंट से डीप कट गाउन पहना था. प्रियंका का ये गाउन जितना बोल्ड लग रहा था, उतनी ही प्रियंका इसमें हॉट लग रही थीं. प्रियंका का ये हॉट अंदाज देखकर फैन्स भी चौंक गए हैं. हालांकि कुछ को प्रियंका का ये आउटफिट पसंद नहीं आया है. कुछ यूजर्स प्रियंका के इस आउटफिट को लेकर उन्हें ट्रोल कर रहे हैं.

 

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So proud of this fam. Congratulations @jonasbrothers you guys crushed it today. #grammys

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प्रियंका और निक के साथ इस दौरान निक के दोनों भाई और भाभी साथ में थे. प्रियंका की दोनों जेठानी के साथ भी एक फ़ोटो सामने आई है जिसमें तीनों साथ में बैठी हुई हैं. फोटो में तीनों के बीच प्यारी बॉन्डिंग दिख रही है.

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अभी कुछ दिनों पहले जोनस ब्रदर्स ने अपना नया गाना रिलीज किया. गाने का नाम था What A Man Gotta do इस गाने में तीनों जोनस ब्रदर्स के साथ उनकी वाइफ़ थी. गाने को काफ़ी पसंद किया गया है. दिलचस्प बात तो ये है कि इसमें प्रियंका और निक का सबसे हॉट अंदाज देखने को मिला. दोनों ने इस गाने में व्हाइट शर्ट पहनी थी और दोनों के बीच की हॉट केमिस्ट्री को फ़ैन्स ने खूब पसंद किया.

 

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Pre-Grammys

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प्रियंका की प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो वो लास्ट फिल्म ‘द स्काई इज पिंक’ में नजर आई थीं. प्रियंका ने 3 साल बाद इस फ़िल्म से बॉलीवुड में वापसी की थी. हालांकि फिल्म को अच्छा रिस्पॉन्स नहीं मिला था और फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप साबित हुई.

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अब प्रियंका द व्हाइट टाइगर फिल्म में नजर आने वाली हैं जो नेटफ्लिक्स में रिलीज़ होगी. इस फिल्म में प्रियंका के साथ राजकुमार राव लीड रोल में हैं.

पूजा बेदी के डिवोर्स पर बेटी अलाया ने खोले दिल के राज, कही ये बात

फिल्म ‘जवानी जानेमन’ से डेब्यू करने वाली अलाया एफ पूजा बेदी की बेटी है. बचपन से उसे फिल्मों में आने की कोई रूचि नहीं थी, लेकिन समय के साथ-साथ उसे ये प्रोफेशन अच्छा लगने लगा और उसने इस दिशा में विदेश में पढाई पूरी कर भारत आई और पहली फिल्म मिली, जिसमें उसकी भूमिका सैफ अली खान की बेटी की है. वह इस रोल से बहुत खुश है, क्योंकि उसे पहली फिल्म से ही एक बड़े कलाकार के साथ काम करने का अवसर मिल रहा है. अत्यंत हंसमुख और चुलबुली अलाया से बातचीत करना रोचक था. पेश है अंश.

सवाल-क्या आपको बचपन से अभिनेत्री बनने का शौक था, क्योंकि आप पूजा बेदी की बेटी है?

बचपन में मुझे एक्टर बनने की बात, मेरे आसपास के सभी लोग कहा करते थे, पर मैंने सोच लिया था कि मैं एक्ट्रेस कभी नहीं बनूगी, क्योंकि मैं पढने में बहुत तेज थी और मैंने कई अवार्ड्स भी जीते थे. मैं सोचती थी कि एक्ट्रेस बने बिना भी बहुत सारा काम किया जा सकता है. मुझे फिल्में पसंद थी और डायरेक्टर बनने के लिए मैं विदेश गयी. वहां एक क्लास में मुझे किसी एक्टर को निर्देश देने के बारें में सीखना था. इसे करने के लिए मुझे अभिनय भी करने पड़े. इसके अलावा उस क्लास को करने में मुझे बहुत मज़ा आता था. इसलिए मैंने 4 साल के कोर्स में से केवल एक साल का कोर्स कर मुंबई आ गयी और मैंने माँ से अभिनेत्री बनने की इच्छा जाहिर की. पहले तो मेरी माँ को विश्वास नहीं हुआ, पर मेरी दृढ़ भावना को देखकर उसने हां कर दी और मैं अभिनय सीखने वापस विदेश गयी.

सवाल-इस फिल्म का मिलना कैसे हुआ और आपकी भूमिका क्या है?

इस फिल्म में मैं फिट हुई और ये भूमिका मिली. मुझे किसी ने लौंच नहीं किया. मैंने ऑडिशन दिए कई सारी वर्कशॉप किये और ये फिल्म मिल गयी. मैं बहुत खुशनसीब हूं कि पहली फिल्म में मुझे सैफ अली खान और तब्बू के साथ काम करने का मौका मिला. इससे पहले ऑडिशन के दौरान काफी बार रिजेक्शन भी मिले, पर मुझे विश्वास था कि एक दिन मुझे एक अच्छी फिल्म मिलेगी और मिल गयी. इसमें मैं सैफ अली खान की बेटी टिया की भूमिका निभा रही हूं, जो एक प्ले बॉय है. किसी करणवश मैं उनकी जिंदगी में आ जाती हूं और फिर क्या होता है उसकी कहानी है. बहुत ही मजेदार फिल्म है.

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सवाल-टिया से आप कितना मेल खाती है?

बहुत अधिक मेल है. आत्मनिर्भर, खुले विचारो वाली, मेच्योर आदि सबकुछ इस चरित्र के जैसा मेरा है.

सवाल-होम वर्क कितना करना पड़ा?

मैंने अभिनय से जुड़े सारी विधाओं की ट्रेनिंग ले ली है. निर्देशक के साथ अच्छी तरह से स्क्रिप्ट्स पढ़े है. मैंने जो भी परिवर्तन फिल्म के लिए कहा उन्होंने उसे स्वीकार भी किया. काम बहुत मज़ेदार था.

सवाल-फिल्म मिलने के बाद पूजा बेदी का रिएक्शन कैसा था?

वह बहुत उत्साहित है और मैंने उन्हें कह दिया है कि जिस तरह मैं आपकी बेबी हूं, उसी तरह से ये फिल्म मेरे लिए बेबी है. इसलिए मेरे कैरियर में कोई दखल दे, मुझे अच्छा नहीं लगेगा और उन्होंने मुझे किसी प्रकार की राय भी नहीं दी. वह मेरे बात का सम्मान करती है.अगर मुझे कोई भी राय उनसे लेनी हो तो मैं खुद उनके पास जाकर पूछ लेती हूं. मुझे हर किसी से बात करना अच्छा लगता है.

सवाल-सैफ और तब्बू के साथ काम करने का अनुभव कैसा था?

पहले मैं थोड़ी घबरा गई थी, लेकिन सेट पर आने के बाद सबकुछ आसान लगने लगा था. सबने मुझे कुछ न कुछ सलाह दी.  सैफ ने सेट पर आने से पहले मेरी तैयारी की काफी तारीफ की थी और मुझे बहुत अच्छा लगा था. इसके अलावा उनकी बेटी की भूमिका मैंने इसमें निभाई है, इसलिए मुझे उन्हें पिता के रूप में देखना था.

सवाल-माँ की किस बात को आप अपने जीवन में उतरना पसंद करती है?

मेरी माँ के साथ जीवन में कुछ भी हो जाय वह हमेशा मुस्कराती रहती है. मैं भी उनके जैसे ही हमेशा खुश रहना चाहती हूं.

सवाल-आप एक प्रतिभावान और समृद्ध परिवार से सम्बन्ध रखती है,इसका कितना फायदा और प्रेशर आप महसूस करती है?

बचपन से कला के माहौल को मैंने देखा है, जहां फिल्म मेकर से लेकर, निर्देशक, लेखक सभी का आना जाना मेरे घर में होता था. मैं उसी परिवेश में पैदा हुई. इसलिए मुझे विदेश में और यहाँ पर काम करने में कोई मेहनत नहीं हुई. बहुत कुछ मैंने देखकर सीखा साथ ही कांफिडेंस का लेवल भी बहुत बढ़ा है. कैमरे के सामने जाना मुश्किल नहीं था. प्रेशर मैं खुद हो अपने उपर बहुत डालती हूं. मैं सेट पर 5 मिनट लेट होने पर भी घबरा जाती हूं. ये सही है कि हमें संघर्ष कम करने पड़ते है और तनाव भी कम रहता है.

सवाल-आपने अभिनय के लिए अपना कुछ दायरा बनायी है?

मुझे हर तरीके के काम करने है. फिर चाहे वह वेब सीरीज हो या फिल्म मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. हर तरह की फिल्में करने की इच्छा है. मेहनत और ईमानदारी से काम करने की इच्छा है.

सवाल-फैशन की शौक़ीन कितनी है?

मुझे फैशन पसंद है, लेकिन कभी किसी पोशाक में अच्छी दिखती हूं तो कभी नहीं. ये सब मेरी मूड और स्किन के उपर निर्भर करता है. मैं साधारण रहना पसंद करती हूं.

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सवाल-आपका बचपन कैसा गुजरा है, क्योंकि तब आपके माता-पिता में टकराव होने लगा था?

मुझे कुछ फर्क नहीं पड़ता. मेरे हिसाब से अगर दो लोग एक छत के नीचे रहकर खुश नहीं, जबकि अलग दो घरों में रहकर खुश है तो मुझे इसमें कोई खराबी नज़र नहीं आती. अलग होने के बावजूद मेरी माँ पिता के साथ समय बिताती है. मेरी स्टेप मदर भी मेरी माँ की तरह है. उनके एक बच्चे को भी मैं बहुत पसंद करती हूं. मैं अपनी माता-पिता से बहुत क्लोज हूं. डिस्टर्ब नहीं थी. मैं एक हैप्पी चाइल्ड हूं.

सवाल-कोई सामाजिक काम जिसे आप करना चाहे?

मैंने हमेशा से ही सामाजिक काम किये है, गरीबो को घर दिलवाई, बच्चों को शिक्षा दी. इसके अलावा मैंने हमेशा ही सामाजिक काम को अधिक महत्व दिया है. हर किसी को कुछ न कुछ काम अपनी हैसियत के हिसाब से करते रहना चाहिए.

पति सुयश रावत संग ठुमके लगाती नजर आईं मोहेना कुमारी, VIDEO VIRAL

टीवी सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ से फैंस के बीच पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस मोहेना सिंह शादी के बाद अक्सर सोशल मीडिया पर छाई रहती हैं. कभी मोहेना की शादी की तो कभी अपने हस्बैंड सुयश रावत के साथ मस्ती करते हुए उनकी फोटोज वायरल होती रहती है. हाल ही में मोहेना की पति सुयश संग डांस और बच्चे के साथ खेलते हुए वीडियो वायरल हो रही है, जिसमें वह खूबसूरत लग रही हैं. आइए आपको दिखाते हैं मोहेना की वायरल वीडियो….

पति संग मोहेना ने लगाए ठुमके

हाल ही में मोहिना अपने पति सुयश संग एक शादी का हिस्सा बनने के लिए गुजरात पहुंची थीं. शादी के जश्न के दौरान मोहिना कुमारी बड़े ही मजे से डांस करती नजर आई. मोहिना कुमारी के साथ साथ पति सुयश भी उनके साथ ताल से ताल मिलाते दिखे. वहीं इस वीडियो की सोशल मीडिया पर फैंस जमकर तारीफ कर रहे हैं.

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शादी के बाद कुछ ऐसे समय बिता रही हैं मोहेना

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में मोहेना एक छोटे से बच्चे के साथ खेलती दिख रही हैं. वीडियो में रीवा की राजकुमारी कभी तो शैतानी करती दिख रही है तो कभी मस्ती करती नजर आ रही है.

मोहेना ने शादी की खास फोटोज की शेयर

 

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“Poshaking It” all the way with @mandvi_kumari for the legendary #rirawedding ?

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मोहेना की शादी हर किसी को याद होगी. इस शाही शादी में राज घरानों से लोग आए. वहीं इस शादी की फोटोज ने भी सोशल मीडिया पर काफी धमाल मचाया था. वहीं मोहेना ने हाल ही में अपनी वेडिंग एल्बम की फोटोज सोशल मीडिया पर शेयर की, जिसे फैंस ने काफी पसंद किया.

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बता दें, अभी ज्यादा समय नहीं हुआ था जब मोहेना ने लाल रंग को जोड़े में अपनी शादी की फोटोज शेयर की थीं, जिनमें वह घूंघट मे नजर आईं थीं. वहीं कुछ ट्रोलर्स ने इस फोटो के जरिए शादी में घूंघट रखने पर सवाल उठाया था, जिसके बाद मोहेना ने ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया था.

#coronavirus: चीन से निकला ये वायरस अब फैला दुनिया के कई देशों में

चीन को इस वक्त एक वायरस ने बुरी तरह से अपनी चपेट में ले लिया है और अब ये वायरस दुनिया के कई देशों में फैल रहा है. इस वायरस का नाम है कोरोना वायरस. इस वायरस की वजह से चीन मे हाई अलर्ट है और इस जानलेवा वायरस के तेजी से फैलने के कारण कई शहरों तक को सील कर दिया है. लाखों लोग घरों में कैद हो गए हैं औऱ एयरपोर्ट भी बंद हो गए हैं.  क्योंकि इस वायरस का कहर इस कदर लोगों पर टूट रहा कि लोगों की जान चली जा रही है.  चीन में इस वायरस की वजह से अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है.  वुहान समेत चीन के कुछ शहरों झिंझियांग, हुंगांग, एझाओ और कुंगझियान को किले में तब्दील कर दिया गया है क्योंकि इस वायरस का असर सबसे ज्यादा वहीं हुआ है चीन में इसके 800 से ज्यादा मामले हो चुके हैं यहां तक की मरीजों की देखभाल करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों में भी संक्रमण फैल चुका है और इसको रोकने का कोई भी तरीका अभी तक नहीं मिला है.  चीन के वुहान से बाहर जाने वाली उड़ानों और ट्रेनों को सस्पेंड कर दिया गया है. इसके साथ ही ये गाइडलाइन जारी कर दी गई है
कोई भी बिना इमरजेंसी शहर नहीं छोड़ेगा.

अब सवाल ये है कि कोरोनो वायरस क्या है?

तो विश्व स्वास्थय संगठन ने बताया कि इसका नाम कोरोना वायरस है और जानवरों में होता है जो कि आम बात है और ये जानवरों से इंसानों में भी फैल जाता है अब तक कोरोना कटेगरी के 6 तरह के वायरस थे. अब सातवीं कटेगरी का वायरस सामने आया है.

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चीन की एक डॉक्टर ने बताया कि “कोरोना एक प्रकार का वायरस है और इसे इसकी संरचना के नाम पर रखा गया है जो मुकुट जैसा दिखता है.  यह एक आरएनए वायरस है. कोरोनोवायरस की कई अलग-अलग प्रजातियां हैं. हम जानते हैं कि वे कई सामान्य संक्रमणों का कारण बन सकते हैं जो हम देखते हैं, इसलिए छोटी सांस की बीमारियां.  हाथ, पैर और मुंह जो हम कभी-कभी बच्चों में देखते हैं जब उनके मुंह और हाथों और पैरों पर चकत्ते हो जाते हैं.  वे आम हैं जो हम यहां देखते हैं. लेकिन हम यह भी जानते हैं कि ऐसे अन्य भी हैं जो अधिक गंभीर हो सकते हैं, सार्स जो लगभग 10 से 20 साल पहले एक चिंता थी. ”

“एक बार जब वायरस शरीर में पहुंच जाता है, तो यह कुछ कोशिकाओं पर हमला करने की कोशिश करता है, और यह ऐसा इसलिए करता है क्योंकि इसे रिप्रोडक्शन करने के  लिए हमारी कोशिकाओं के अंदर प्रोटीन का उपयोग करने की आवश्यकता होती है और इसलिए यह हमारी कोशिकाओं में जाने की कोशिश करेगा और नई वायरस कोशिकाओं को बनाएगा जिसे हम प्रतिकृति कहते हैं और फिर यह पूरे शरीर में फैल सकता है. तो वायरस का उद्देश्य जीवित रहना और रिप्रोडक्शन करना है.  लेकिन हमारा शरीर वायरस को मारने की कोशिश में प्रतिक्रिया देगा क्योंकि यह पहचान लेगा कि यह कुछ ऐसा है जो बुरा है और ये शरीर में नहीं चाहता है.  और जब ऐसा होता है, तो यह वायरस और अन्य कोशिकाओं को वायरस और कणों को पहचानने की कोशिश करने और उन्हें मारने की कोशिश करने के लिए प्रतिरक्षा प्रणाली में कुछ रसायनों का उत्पादन करेगा और उन्हें आज़माएगा  यह वास्तव में, जो हमें बिमार सा महसूस कराएगा. तो यह वह रसायन है जो हम उस वायरस से लड़ने के लिए पैदा करते हैं जो हमें बुखार या मांसपेशियों में दर्द आदि की भावनाएँ देता है।“

चीन में एक वायरल बीमारी जो सैकड़ों लोगों को बीमार कर चुकी है वह वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल नहीं है. “कोई गलती मत करो, हालांकि, यह चीन में एक आपात स्थिति है. लेकिन यह अभी तक एक वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल नहीं बन पाया है. यह अभी भी एक हो सकता है ये सभी बातें डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक “टेड्रोस एडहोमम घेबायियस” ने कहीं. .

सिरदर्द, नाक बहना, खांसी, गले में खराश, बुखार, अस्वस्थता का अहसास, छींक आना, अस्थमा,थकान महसूस करना, निमोनिया, फेफड़ों में सूजन. इस वायरल के लक्षण क्या हैं औऱ अब इस वायरस का संकट भारत पर भी मंडराने लगा है साथ ही चीन में 25 भारतीय फंसे हैं जो केरल के बताए जा रहे हैं. चीन के वुहान शहर में आर्मी तैनात कर दी गई है.  ताकि कोई भी व्यक्ति शहर से बाहर ना जा सके.  ऐसे में इन भारतीयों का वहां फंसा होना भारत के लिए एक चेतावनी है. साथ ही दूसरों देशों में भी अलर्ट जारी कर दिया है. लोगों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है. क्योंकि दूसरे देशों से भी इसके की मामले सामने आ रहे हैं.

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बौयफ्रैंड पर इकोनौमिक डिपैंडैंस नो…नो…नो…

लड़के-लड़कियों का रिलेशनशिप में होना कोई नई बात नहीं हैं और न ही लड़कियों का अपने बौयफ्रैंड्स से छोटेमोटे गिफ्ट्स की उम्मीद लगाना नया है. लड़कियों की अपने बौयफ्रैंड्स से कई तरह की अपेक्षाएं होती हैं. कुछ के लिए रिलेशनशिप में आने का मतलब ही यह होता है कि आज तक जो इच्छाएं पूरी न हो सकीं, अब करेंगे. लेकिन, ये लड़कियां या तो स्कूलगोइंग होती हैं या फिर कालेजगोइंग, और उन के खुद के पास इतने पैसे नहीं होते जो उन के अरमानों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हों.

ऐसे में उन की जरूरतें पूरी करने के लिए प्रकट होते हैं उन के बौयफ्रैंड्स जिन्हें शरूशुरू में तो पैसा लुटाने और अपनी धाक जमाने में बड़ा मजा आता है, लेकिन जैसेजैसे उन के हाथ से पैसा जाने लगता है यह मजा सजा बन कर रह जाता है. डेट्स का बिल, मूवी टिकट, महंगे कैफे में खाना, मिलने पर फूल या चौकलेट, फोन का रिचार्ज विद ऐक्स्ट्रा डाटा पैक, फैस्टिवल और वेलैंटाइन पर अलग तोहफे और बर्थडे पर तो सम झो दीवाला निकल जाता है.

कहीं आनाजाना हो, तब भी रिकशे से ले कर पानी खरीदने तक का बिल बौयफ्रैंड की जेब से ही खर्च होता है, क्योंकि गर्लफ्रैंड का हाथ बैग में लिपस्टिक के लिए तो हर घंटे जाता है लेकिन पैसों के लिए नहीं. लड़कियों का पैसों के मामले में पूरी तरह से बौयफ्रैंड पर आश्रित हो जाना और हर छोटीबड़ी चीज के लिए उस का मुंह ताकना एक आदत बन जाती है जो समय के साथ पहले से ज्यादा गहराती जाती है.

लड़कियों की प्यार के नाम पर अपने बौयफ्रैंड्स पर यह इकनौमिक डिपैंडैंस लड़कों का जीना मुश्किल कर देती है या यों कहें कि उन्हें बरबाद कर देती है. ये वही लड़के हैं जो बेचारे बाबू, जानु, शोनामोना करते रह जाते हैं और रिलेशनशिप खत्म होने पर इन्हीं गर्लफ्रैंड्स को गोल्डडिग्गर होने का टैग देते फिरते हैं. सोशल मीडिया पर तो ऐसे लड़कों की भरमार है. असल में देखा जाए तो इस में पूरी तरह लड़कियों की गलती नहीं कही जा सकती. लड़कों को खुद को एक लैवल अप दिखाने का कोई मौका छोड़ना पसंद नहीं. ऐसे में पैसा, रुतबा दिखाने से बेहतर क्या होगा?

1. बौयफ्रैंड खर्च करने को शान मानते हैं

पीयूष एक अमीर घराने का लड़का था जिसे दिन के 700-800 रुपए लुटाना आम बात लगती थी. उस की गर्लफ्रैंड नीता भी खूब खर्चीली थी और आएदिन पापा से पैसे मांग कर खर्च करती थी. पीयूष और नीता रिलेशनशिप में थे और काफी खुश भी थे. लेकिन जब भी दोनों डेट पर जाते तो सारा खर्च पीयूष उठाता. उसे नीता का पैसे खर्च करना खुद की बेइज्जती लगता था. नीता के पास भी पैसे होते थे लेकिन पीयूष ही सारे बिल भरता था.

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कालेज के थर्ड ईयर तक आतेआते पीयूष को पैसों की तंगी होने लगी, जिस के चलते अब वह नीता पर खर्च नहीं कर पाता था. नीता के सामने  झुकना और ‘लड़की के पैसों पर जीना’ वाली धारणा लिए रिलेशनशिप में रहना पीयूष को कतई मंजूर नहीं था. उस ने डेट्स पर जाना, नीता के साथ फिल्म देखना, घूमनाफिरना सब कम कर दिया. फिर क्या होना था, नीता और पीयूष के बीच अनबन होने लगी. पीयूष हमेशा टैंशन में रहने लगा, नीता को टाइम भी नहीं देता था. आखिर, कुछ ही दिनों में दोनों का ब्रेकअप हो गया.

2. गर्लफ्रैंड को इंप्रैस करने के लिए करते हैं खर्च

काव्या रोहित को कालेज में मिली थी. रोहित उसे देख कर मानो हवा में उड़ने लगा. जब वे दोनों रिलेशनशिप में आए तो रोहित जबतब उसे अपनी स्कूटी पर घुमाने ले जाता. वह उसे उस की मनपसंद आइसक्रीम खिलाने ले जाता था. काव्या के पास इतने पैसे नहीं होते थे कि वह महंगे कपड़े खरीद पाती. वह रोहित के सामने जानबू झ कर कहा करती थी कि उसे यह या वह ड्रैस लेने का बहुत मन है लेकिन पैसे नहीं हैं अभी. रोहित यह सुन कर सम झ जाता कि उसे काव्या को गिफ्ट में अगली बार क्या देना है. काव्या और रोहित एक ही ग्रुप में थे. कोई और दोस्त काव्या को यह न कहे कि वह रोहित के पैसों पर जी रही है, रोहित उस के साथसाथ गु्रप की बाकी लड़कियों को भी शौपिंग करा आता. वे सभी कहीं कुछ खाने जाते तो काव्या खाने से इसलिए मना कर देती कि उस के पास पैसे नहीं हैं. इस पर रोहित अपने साथसाथ उस के पैसे भी दे देता.

रोहित हर दूसरे दिन अपनी मम्मी से पैसे मांगता था. मम्मी के मना करने पर उन से लड़ भी पड़ता. अपनी गर्लफ्रैंड का दिल जीतने के लिए उसे जो कुछ भी करना पड़ता, वह करता था. पर वह दिन दूर नहीं था जब दोनों का ब्रेकअप हो गया. रोहित और काव्या दोनों को ही ब्रेकअप का दुख था लेकिन ब्रेकअप के बाद रोहित को काव्या पर बहुत गुस्सा आया था. वह अब उस के बारे में किसी को भी कुछ बताता तो यह जरूर कहता कि वह एक पैसा खाने वाली लड़की है जिस ने उस का पैसों के लिए खूब इस्तेमाल किया. ऐसे में यह सम झना बहुत जरूरी हो जाता है कि चाहे आप का बौयफ्रैंड खुद आप पर पैसे लुटाना चाहे, फिर भी आप को उसे खुद पर खर्च करने से रोक देना चाहिए.

3. गर्लफ्रैंड्स खुद के खर्चे उठाना सीखें

ऐसा नहीं है कि हर लड़की अपने बौयफ्रैंड पर ही निर्भर रहती है. ऐसी लड़कियां भी हैं जो अपने खर्चे खुद उठाती हैं. फिर भी जिन लड़कियों को अपने पैसे खर्च करने के बजाय अपने बौयफ्रैंड की जेब ढीली करने में आनंद आता हो उन्हें यह सम झना बहुत जरूरी है कि वे अपने रिलेशनशिप को तो डिसबैलेंस्ड कर ही रही हैं, साथ ही, अपने बौयफ्रैंड की टैंशन और अजीब व्यवहार का कारण भी बन रही हैं.

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4. हर समय तोहफों की अपेक्षा न करें

लड़कियों का हर समय तोहफे मांगते रहना या अपने बौयफ्रैंड से महंगे तोहफे लेने की अपेक्षाएं असल में लड़कों के लिए परेशानी का सबब बन जाती हैं. वे कभी दोस्तों से पैसे उधार मांगते हैं तो कभी बड़े भाईबहन से. मम्मीपापा अगर पैसे के लिए मना कर दें तो वे उन से लड़ाई झगड़े पर उतर आते हैं. पैसों को ले कर बौयफ्रैंड की यह टैंशन गर्लफ्रैंड अपनी अपेक्षाएं कम कर आसानी से दूर कर सकती है.

5. अपने बिल खुद भरें

हर चीज में लड़कियां लड़कों से आगे हैं तो इस में क्यों पीछे रहें. लड़कियों को जरूरत है कि वे डेट्स या मूवीज का पूरा बिल न सही पर अपने हिस्से का तो दे ही दें. इस से बेचारे बौयफ्रैंड का कम से कम थोड़ा बो झ तो कम होगा.

6. मनपसंद चीजों के लिए पैसे बचाना सीखें

लड़कियों को भी अपने घर से अच्छाखासा जेबखर्च तो मिल ही जाता है. और अगर किसी महंगी चीज को खरीदने का मन करे तो उस के लिए पैसे बचाएं. अपने खुद के पैसों से खरीदी हुई चीज का मोल कहीं ज्यादा होता है.

7. पैसे नहीं हैं तो इच्छाएं कम रखें

हर सुंदर चीज पर दिल आ जाना और अपने बौयफ्रैंड की तरफ नजर घुमा लेना बहुत सी लड़कियों की आदत होती है. यह एक बुरी आदत है क्योंकि आप की इच्छाएं पूरी करना आप के बौयफ्रैंड का काम नहीं है. अगर पैसे नहीं हैं तो ऐसी इच्छाएं रखना कम कर दीजिए. यानी, रिलेशनशिप में खर्च केवल लड़का ही उठाए, यह सरासर गलत है. लड़कालड़की दोनों ही रिलेशनशिप में बराबर की हिस्सेदारी रखते हैं, तो बिल्स के भी बराबर हिस्से होने चाहिए.

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20 टिप्स: बालों को ऐसे बनाएं खूबसूरत

खूबसूरत लहराते बालों की चाह हर लड़की की होती है, पर इस भागदौड़ भरी जिंदगी, प्रदूषण और स्ट्रैस के चलते यह चाह पूरी करना थोड़ा मुश्किल तो है, लेकिन नामुमकिन नहीं. बालों का थोड़ा सा खयाल कर आप लहराते बालों की मलिका बन सकती हैं.

इस बारे में क्यूटिस स्किन क्लीनिक की डर्मैटोलौजिस्ट डा. अप्रतिम गोयल कहती हैं कि बालों की क्वालिटी को सही बनाने के लिए उन्हें थोड़ा समय देने की जरूरत होती है. नए साल में 20 हेयर हैक्स निम्न हैं:

1. सब से पहले यह निर्णय कर लें कि अपनी स्कैल्प के अनुसार कब और कितनी बार शैंपू करना है. सप्ताह में 2 बार शैंपू करना सही रहता है. अगर आप की स्कैल्प औयली है तो अलटरनेट डे या रोज शैंपू करें.

2. बालों में तेल लगाना पुरानी प्रथा है और इस से बालों की ग्रोथ का कोई संबंध नहीं, क्योंकि औयल धूलमिट्टी को आकर्षित करता है, जिस से डैंड्रफ होता है, इसलिए बालों में तेल लगाने को अवौइड करें.

3. हमेशा लूज हेयर स्टाइल अपनाएं. कसी पोनीटेल या चोटी हेयर लौस का कारण बनती है.

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4. शैंपू करते वक्त हेयर से अधिक स्कैल्प की सफाई पर ध्यान दें. अधिक शैंपू डालने से बाल ड्राई और फिजी हो जाते हैं.

5. कंडीशनर का प्रयोग स्कैल्प के बजाय बालों पर करें. स्कैल्प पर अधिक कंडीशनर का प्रयोग करने पर बाल निर्जीव हो जाते हैं.

6. यह सही है कि हैल्दी बौडी में ही हैल्दी हेयर रहते हैं, इसलिए डाइट पर हमेशा ध्यान देने की जरूरत होती है. खाने में प्रोटीन की मात्रा अधिक रखें. इस से हेयर हैल्दी और स्ट्रौंग रहते हैं. अंडा, मछली, सोयाबींस, हरी सब्जियां आदि प्रोटीन रिच होती हैं, जिन्हें अपनी डाइट में हमेशा शामिल करें.

7.  हमेशा विटामिन लैवल चैक करें. जरूरत के अनुसार सप्लिमैंट्स लें. ऐनीमिक होना ठीक नहीं. आयरन की कमी से हेयर लौस होने लगता है. अगर बाल अधिक झड़ते हों तो हेयर ऐक्सपर्ट की सलाह लें.

8. मैडिटेशन एक अच्छा विकल्प है, जो तनाव को कम करता है, जिस से हेयर लौस कम होता है. अपनी नसों को शांत रखने के लिए मैडिटेशन अवश्य करें.

9. धूम्रपान को अवौइड करें, क्योंकि कई शोधों में पता चला है कि स्मोकिंग से हेयर लौस अधिक होता है.

10. अपने भोजन में रिच ऐंटीऔक्सिडैंट फूड जैसे बेरीज, ऐवोकाडो और नट्स को अधिक शामिल करें.

11. हेयर स्टाइलिंग सही तरीके से करने की जरूरत होती है. टैक्स्चर और वौल्यूम स्प्रे पर्क दोनों निर्जीव बालों के लिए अच्छे होते हैं, जबकि कंडीशनर और कर्ल क्रीम दोनों कर्ली हेयर के लिए अच्छे रहते हैं.

12.  किसी भी प्रकार की हीट बालों में प्रयोग करने से पहले हीट प्रोटैक्ट स्प्रे और सीरम अवश्य लगा लें.

13. ब्लो ड्राई करना है तो उसे अच्छी तरह जान लें. घर पर हेयर ड्राई करना ठीक है पर स्ट्रेट हेयर के लिए सैलून अच्छा रहता है. इस के अलावा अगर घर पर हेयर स्ट्रेट कर रही हैं तो हीट को मीडियम रख कर हेयर रूट से टिप तक ले जाएं. इस से बालों का स्लीक रूप दिखेगा.

14. ब्लौंड और रैड हेयर भी आकर्षक लगते हैं, क्योंकि बालों पर ऐक्सपैरिमैंट करना मजेदार और सेफ होता है. हेयर कलर करने के बाद सही शैंपू और कंडीशनर लगाना आवश्यक होता है.

15. ड्राई शैंपू का प्रयोग बालों के लिए सब से बड़ा हैक्स है जब आप के पास शैंपू करने के लिए समय नहीं होता, लेकिन यह याद रखें कि ड्राई शैंपू बालों को धोने का विकल्प नहीं है.

16. कुछ घरेलू नुसखे हेयर केयर के लिए अच्छे होते हैं. जैसे एक हेयर मास्क बालों को चमकदार और मुलायम बनाता है, बालों के अनुसार अंडे की सफेद जर्दी को एक कटोरी में ले कर भीगे बालों में लगा कर कौंब कर लें.

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17. भीगे बालों में मेयोनीज को कंडीशनर के  रूप में लगाएं और थोड़ी देर तक मसाज करें. 20 मिनट तक लगा रहने के बाद धो लें. इस से ग्लौसी लुक आएगा.

18.  2 सप्ताह में 1 बार एक एस्पिरिन को शैंपू में मिला कर हेयर पर लगाएं. इस से हेयर की निर्जीवता खत्म हो जाती है और वे हैल्दी दिखते हैं.

19. बालों को कभी भी टौवेल से अधिक झाड़ें या पोंछें नहीं. बालों को धोने के बाद उन्हें टौवेल से लपेट कर रखें. इस से वे कम फिजी होते हैं और मुलायम रहते हैं.

20. बालों की किसी भी समस्या का समाधान आसान होता है, पर समय से डाक्टर के पास जाना जरूरी है. स्टेम सैल ट्रीटमैंट, लेजर ट्रीटमैंट आदि काफी पौपुलर हैं.

इन जूट बैग्स से अपने लुक को बनाएं स्टाइलिश

बदलते फैशन के साथ इस बार चेंजिंग कैम्पस फैशन ट्रेंड्स का बोलबाला है. आजकल हर तरफ कॉलेज गोइंग छात्राओं में  फैंसी जूट बैग्स का टशन खूब सिर चढ़ कर बोल रहा है. छात्राओं को केवल डिजाइनदार ब्रांडेड कपड़े ही नहीं  बल्कि विभिन्न डिजाइन्स के बैग्स वो भी लेटेस्ट फैशन के जो कि लेटेस्ट कपड़ों और स्लीपर्स के साथ स्टाइल कर सकें चाहिए. उनको इनके बिना हर स्टाइल अधूरा लगता है. फैशनेबल, ट्रेंडी, फैंसी और क्लासिक बैग्स के जरिए भी अब अधिकांश स्टूडेंट्स अपना स्टाइल स्टेटमेंट देने लगे हैं.

1. फैशन

लेकिन आजकल सबसे ज्यादा जोर कंधे पर लटकाने वाले जूट  बैग्स का है. इन दिनों  जूट बैग्स स्टाइल स्टेटमेंट हैं व फैशनेबल, ट्रेंडी, फैंसी और क्लासिक बैग्स के रूप में आ रहे हैं और अब प्लास्टिक बैग्स बंद होने के बाद लोगों की जरूरत बन गए हैं. यदि आप भी शापिंग पर जाने की सोच रही हैं तो जूट बैग एक बेहतर विकल्प है.

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2. डिस्पोजेबल

जूट बैग अत्याधिक चलते हैं एवं जैविक रूप से डिस्पोजेबल भी है. जिसके बिना न तो घर की सब्जी आती है और न ही बच्चों के कपड़े. लंच पैकेट भी जाता है तो इसी बैग में और ऑफिशियल डॉक्यूमेंट को ले जाने के लिए भी इसी का सहारा लेना पड़ता है.

3. आरामदायक

मतलब जूट बैग हमारी रूटीन लाइफ में बहुत आराम देते है. बीच में पॉलिथीन का चलन बढ़ गया था लेकिन पॉलीथीन के नालियों में जमा हो जाने और इसके नष्ट नहीं होने के कारण वातावरण के प्रदूषित होने के साथ-साथ यह कई तरह की समस्या खड़ी कर रहा है.

4. हाइजैनिक

एक तरफ पॉलीथीन के ढ़ेर पर जो गंदगी पैदा होती है उस पर मच्छर अपना घर बनाते हैं और  हमें मलेरिया, डेंगू जैसी गंभीर बीमारी देते है. इसलिए अब कई जगह पॉलीथीन को बैन किया जा रहा है और इसकी जगह जूट या कागज को बढ़ावा दिया जा रहा है.

5. बायोडिग्रेडेबल

जूट  शब्द संस्कृत के जटा रूप से निकला है. जूट  एक बायोडिग्रेडेबल आइटम है और इसका दोबारा से इस्तेमाल किया जा सकता है .जो पर्यावरण के अनुकूल है. खरीदारी करने के उपयोग में लाए जाने वाले जूट बैग लैमिनेटेड होते हैं.

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6. उत्पादन

जूट बैग मार्केट बिजनेस या इंडस्ट्री से जुड़ा हुआ बिजनेस है. इसलिए इसमें नई इकाइयों के लिए अवसर भी है. जूट बैग के निर्माण से लघु एवं कुटीर उद्योगों को भी बढ़ावा मिलता है.विश्व में सबसे ज्यादा जूट  का उत्पादन भारत में ही होता है  यह पॉलीबैग के मामले में सौ प्रतिशत जैव निम्नीक है.जूट बैग कागज की तुलना में बहुत अधिक वजन ले सकता है. पर्यावरण की दृष्टि से जूट बैग का इस्तेमाल करना बहुत जरूरी है.

7. नये डिजाइन

 

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प्लास्टिक थैलियों की पैकेजिंग से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में इसे क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है. प्लास्टिक की थैलियां कूड़े का पहाड़ खड़ा कर रही हैं और वे नष्ट नहीं होतीं जबकि  जूट से बना सामान कूड़ेदान में पहुंचते ही नष्ट हो जाता है. ये अलग अलग साइजेस और अलग-अलग हैंडिल्स में उपलब्ध हैं.

8. फंकी यूनीसेक्स बैग्स

इन दिनों फंकी और चीक यूनीसेक्स कॉलेज बैग्स का भी चलन है. ये लाइटवेट होते हैं और इन्हें इस्तेमाल करना आसान होता है. इन दिनों न्यूज प्रिंट्स की डिजाइन वाले बैग्स भी दिखाई देने लगे हैं. ये आपको कुछ अलग स्टाइल देते हैं. जिसमें सीधी धारियों वाला सिंपल बैग बदलते और करियर ओरिएंटेड स्टूडेंट्स की जरूरतों के मुताबिक न केवल डिजाइन किए जाते हैं बल्कि ये कई तरह के मटेरियल, पैटर्न्स और रंगों में उपलब्ध हैं. कॉलेज में बड़े बैग का फैशन भी दोबारा लौट कर आ गया है. छात्राओं का कहना है कि ऐसे बैग देखने में तो सुंदर होते ही हैं, साथ में इसमें जरूरत का सभी सामान भी समा जाता है.

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पेट को फिट रखना है जरूरी

पेट में दर्द, जलन व सूजन का एहसास, सीने में जलन व उलटी की शिकायत, यह सुनने में भले ही बहुत गंभीर बीमारी न लगे, पर ऐसे लक्षण उस वक्त भी दिखते हैं जब पेट में अल्सर की शिकायत होती है. जीवनशैली और खान-पान में बदलाव का नतीजा है कि आजकल पेट के अल्सर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

पेप्टिक अल्सर होने की वजह

पेट में म्यूकस की एक चिकनी परत होती है, जो पेट की भीतरी परत को पेप्सिन और हाइड्रोक्लोरिक ऐसिड के तीखेपन से बचाती है. इस ऐसिड की खासीयत यह है कि जहां यह ऐसिड पाचन के लिए जरूरी होता है, वहीं शरीर के ऊतकों के सीधे संपर्क में आने पर उनको नुकसान भी पहुंचाता है. इस ऐसिड और म्यूकस परतों के बीच तालमेल होता है. इस संतुलन के बिगड़ने पर ही अल्सर होता है. अल्सर कुछ दवाओं के निरंतर प्रयोग, जैसे दर्दनिवारक दवाओं के कारण भी हो सकता है.

एच. पायलोरी बैक्टीरिया है प्रमुख कारण

पेप्टिक अल्सर का सबसे प्रमुख कारण एच. पायलोरी बैक्टीरिया है. वर्ष 1980 में एक ऑस्ट्रेलियाई डाक्टर बेरी जे. मार्शल ने एच. पायलोरी (हेलिकोबेक्टर पायलोरी) नामक बैक्टीरिया का पता लगाया था. इस बैक्टीरिया  को बिस्मथ के जरीए जड़ से मिटाने में सफल होने की वजह से 2005 का नोबेल पुरस्कार भी उन्हें मिला. उन्होंने माना था कि सिर्फ खानपान और पेट में ऐसिड बनने से पेप्टिक अल्सर नहीं होता, बल्कि उसके लिए एक बैक्टीरिया भी दोषी है. इसका नाम एच. पायलोरी रखा गया. एच. पायलोरी का संक्रमण मल और गंदे पानी से फैलता है. शारीरिक सक्रियता कम होने और रोगप्रतिरोधक तंत्र में होने वाले बदलाव भी इस बैक्टीरिया को बनाने में सहायक होते हैं.

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इसके साथ-साथ ज्यादा तला-भुना, मसालेदार खाना और चाय-कौफी लेना पेट में ऐसिड के स्तर को बढ़ाता है, जिससे अल्सर का खतरा बढ़ जाता है. एच. पायलोरी बैक्टीरिया के संक्रमण से बचने का सबसे आसान तरीका साफ-सफाई का खास ध्यान रखना है.

अल्सर के लक्षण

अल्सर के लक्षणों में ऐसिडिटी होना, पेट फूलना, गैस बनना, बदहजमी, डायरिया, कब्ज, उलटी, आंव, मितली व हिचकी आना प्रमुख हैं.

तला-भुना और मसालेदार खाना पेट में एच. पायलोरी बैक्टीरिया को फलनेफूलने का वातावरण देता है. इस कारण धीरे-धीरे अल्सर की समस्या पैदा हो जाती है.

पेप्टिक अल्सर होने पर सांस लेने में भी दिक्कत होती है. बदहजमी की वजह से कभी-कभी ऐसिड ऊपर की ओर आहार नली में चला जाता है. इससे सीने में तेज जलन और दर्द महसूस होता है और ऐसा लगता है जैसे दिल संबंधी कोई रोग हो गया हो. आवाज भारी हो जाती है और मुंह में छाले पड़ जाते हैं.

गंभीर लक्षण

खून की उलटी हो या घंटों या दिनों पहले खाया भोजन उलटी में निकले अथवा हमेशा मतली जैसी महसूस होती हो, तो यह अल्सर के गंभीर लक्षण हैं. असामान्य रूप से कमजोरी या चक्कर महसूस हो, मल में रक्त आता हो, अचानक तेज दर्द उठे जो दवाई लेने पर भी दूर न होता हो और दर्द पीठ तक पहुंचे, वजन लगातार घटने लगे, तो ये लक्षण गंभीर पेप्टिक अल्सर के संकेत हैं.

क्या न करें

– तंबाकू युक्त पदार्थों से दूर रहें.

– मांसाहार और शराब का सेवन न करें.

– मसालेदार भोजन से बचें.

क्या करें

– पुदीना पेट को ठंडा रखता है. इसे पानी में उबाल कर या मिंट टी के रूप में लिया जा सकता है.

– अजवाइन पेट को हलका रखती है और दर्द से भी राहत दिलाती है.

– बेलाडोना मरोड़ और ऐंठन से राहत दिलाता है.

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– स्टोमाफिट लिक्विड और टैबलेट का सेवन पेट को फिट रखने के लिए लाभकारी है. इस में मौजूद बिस्मथ पेट के विकार को  बढ़ने से रोकने के साथसाथ पाचनक्रिया को भी दुरुस्त रखता है. डाक्टर की सलाह से इस का सेवन किया जा सकता है.

एग फ्रीज़िंग- अब भला करियर से क्यों करें समझौता

परिवर्तन के इस दौर में बहुत सी चीज़े काफी तेज़ी से बदल रहीं हैं और इसी के साथ ही हमारी सोचऔर प्राथमिकताएं भी बदल रही हैं. यही कारण है कि पहले जहाँ  लड़कियाँ अपने घर -परिवार , शादी और बच्चों को प्राथमिकता देती थी. वो आज अपने करियर को ले कर काफी सजग हो गई हैं. इसी कारण  कुछ  महिलायें ऐसी हैं, जो अपने कॅरियर को एक अच्छा आयाम देना चाहती हैं. उसके बाद ही वो अपनी फैमली को आगे बढ़ाने के बारे में सोचती हैं. इसके पीछे उनकी मंशा ये होती है कि ना सिर्फ वो खुद एक अच्छी लाइफ जी सके, बल्कि वो अपने बच्चों को भी एक बेहतर ज़िन्दगी दे पाएं .जो हर सुख – सुविधा से भरपूर हो. लेकिन इन सभी बातों के अलावा ये भी सच है कि देर से माँ बनना एक जोखिम भरा कदम है , क्योंकि एक आयु विशेष के बाद उनकी बॉडी में काफी चेंजेस आते जिसकी वजह से प्रेग्नेंसी काफी कॉम्प्लिकेटेड हो जाती है. ऐसे में अगर हम ये कहें की आज की आधुनिक तकनीक  और एग फ्रीज़िंग हमारे लिए वरदान की तरह है तो गलत नहीं होगा.

क्या है एग फ्रीज़िंग ?

पिछले पांच सालों में एग फ्रीज़िंग उन महिलाओं के बीच बहुत अधिक लोकप्रिय हो गया है जो अपनेकॅरियर को ले कर बहुत अधिक गंभीर हैं. इस बारे में फर्टिलिटी एंड आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ  प्रीतीगुप्ता (फर्स्ट स्टेप आईवीएफ क्लिनिक )  का कहना है कि “ यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें महिला के अण्डों को भविष्य में प्रयोग करने के लिए सुरिक्षत रखा जाता है. यह प्रजनन की स्वतंत्रता को बढ़ाने के लिए एक क्रांतिकारी कदम है. इसके फायदे ये हैं कि ये ना सिर्फ जल्दी मेनोपॉज़ की संभावना के दौरान , बल्कि किसी ख़ास हेल्थ समस्या के कारण कंसीव करने में आने वाली दिक्कतों का भी बेहतरीन विकल्प है.”

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क्या हैं संभावनाएं ?

एग फ्रीज़िंग को ह्यूमन ऑसकेट क्राईओपरसर्वेशन (human oocyte cryopreservation)के नाम से भी जाना जाता है. इस सन्दर्भ में हुए कई अंतरराष्ट्रीय शोधों में यह बात सिद्ध हुई है कि एग फ्रीज़िंग के बाद फ्रीज़ किये गए एग का प्रयोग कर के भविष्य में गर्भधारण करना पूरी तरह से सुरक्षित  और विश्वसनीय प्रक्रिया है. इस प्रक्रिया को अगर प्रयोग में लाना चाहती हैं तो  इस बात का ध्यान  ज़रूर रखें कि इसके लिए किसी अच्छे  फर्टिलिटी एंड आईवीएफ एक्सपर्ट की ही सहायता लें. ”

इसके अलावा अगर आप एग फ्रीज़िंग करना चाहते हैं तो इस बात का ख़ास ख्याल रखें कि 20 वर्ष से 30 वर्ष की आयु ही बेहतर होती है और इस प्रक्रिया के लिए काम से काम 25 से 30 एग्स ज़रूर फ्रिज़ करें.

अब ना तो लड़कियों को अपने कॅरियर की कुर्बानी देने की ज़रूरत है ना ही चिंता करने की. यही कारण है कि आज एग फ्रीज़िंग एक बहुत ही लोकप्रिय प्रक्रिया बनता जा रहा है .

प्रक्रिया

एग फ्रीजिंग के लिए माहवारी के 21वें दिन से जीएनआरएच एनालॉग के साथ यह प्रक्रिया शुरू होती है और माहवारी आने तक जारी रहती है. इसके बाद गोनेडोट्रॉफीन हॉर्मोन की बड़ी खुराक दी जाती है, जो ओवरी को इस तरह सक्रिय कर देती है, कि वह अधिक संख्या में अंडाणु पैदा कर सके. फिर मासिक चक्र के दूसरे दिन से लेकर 10 से 12 दिन तक रोजाना इंजेक्शन दिए जाते हैं. अंडाणु के एक खास आकार में आने के बाद उसे पूर्ण परिपक्व अवस्था में लाने के लिए हयूमन क्रॉनिक गोनेडोट्राफीन का इंजेक्शन दिया जाता है. 30 घंटे बाद महिला को बेहोश कर उसकी ओवरी से इन अंडाणु को निकाला लिया जाता है. परिपक्वता के आधार पर अच्छे अंडाणुओं को छांटकर लिक्विड नाइट्रोजन में रख दिया जाता है, जो कि माइनस 196 सेंटीग्रेट (-320 फारेनहाइट) पर जमता है.

मां बनने की उम्र

ध्यान दिया जाए तो अपने अंडाणुओं को फ्रीज किये बिना भी न सिर्फ भारतीय समाज में, बल्कि पूरी दुनिया में लड़कियों के मां बनने की उम्र में भारी बदलाव हुआ है. पिछली पीढ़ी की लड़कियां 15 से 20 साल की उम्र में मां बन चुकी थीं. वहीं उनकी बेटियां 25 से 30 की आयु में मां बनी, या फिर इससे भी आगे की उम्र में. मां बनने की उम्र में यह बदलाव निश्चित तौर पर लड़कियों की शिक्षा और नौकरी के बदलते आयमों के चलते आया है. जिसे टाला नहीं जा सकता.

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एग फ्रीजिंग की लागत

एग फ्रीजिंग की लागत हर देश में अलग है, इसकी कीमत $5000 से लेकर $12,000 के बीच है. इस राशि में प्रजनन दवाओं का खर्चा शामिल नहीं है जोकि लगभग $4,000 या $5,000 के बीच पड़ सकता है. अंड़ाणु भंडारण के लिए आपको $100 से लेकर अधिकतम $1000 तक की राशि खर्चनी पड़ सकती है.

डौ. प्रीती गुप्ता फर्टिलिटी एंड आईवीएफ एक्सपर्ट (फर्स्ट स्टेप आईवीएफ क्लिनिक ) ,AIIMS,DELHI.

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