ब्रैस्ट शेपिंग के नए तरीके

किशोरावस्था के शुरू होते ही लड़कियों के शरीर में बदलाव आने लगता है. इस का सब से अधिक प्रभाव लड़कियों की बौडी फीगर पर पड़ता है. इस में भी ब्रैस्ट की शेप को ले कर सब से अधिक परेशानियां होती हैं. किसी को अपने छोटी ब्रैस्ट साइज से दिक्कत होती है तो किसी को अपनी बड़ी ब्रैस्ट से. ऐसे में उन्हें लगता है कि अगर उन का ब्रैस्ट साइज परफैक्ट नहीं होगा तो उन का आकर्षण कम हो जाएगा.

जिन लड़कियों की ब्रैस्ट का आकार छोटा या ज्यादा बड़ा होता है वे परेशान रहती हैं. ऐसे में ब्रैस्ट शेपिंग को ले कर तमाम तरह के प्रयास चलते हैं. ब्रैस्ट शेपिंग की सब से बड़ी चिंता का कारण क्लीवेज होती है. फैशनेबल ड्रैस पहनने वाली लड़कियों को लगता है कि अगर उन की क्लीवेज नहीं दिखेगी तो उन्हें सैक्सी, बोल्ड और ब्यूटीफुल नहीं माना जाएगा.

1. ब्रैस्ट शेपिंग के अलग-अलग तरीके

ब्रैस्ट शेपिंग के 2 तरीके होते हैं- पहला तरीका ब्रैस्ट इंप्लांट होता है. यह सामान्य रूप से नहीं किया जाता. जब ब्रैस्ट बहुत छोटी होती है, तो इस सर्जरी को अपनाया जाता है. ब्रैस्ट का साइज कप साइज के ऊपर निर्भर करता है. महिलाओं के ब्रैस्ट का साइज ‘ए’ से शुरू हो कर ‘एच’ तक बढ़ता रहता है. ‘सी’ और ‘डी’ साइज को भारतीय ब्यूटी में सब से खूबसूरत माना जाता है. ब्रैस्ट के साइज में किशोरावस्था से ले कर मां बनने की उम्र तक में बहुत बदलाव होता है.

खूबसूरत ब्रैस्ट का पैमाना उम्र और लंबाई के हिसाब से जो खूबसूरत लगे उसी को माना जाता है. सब से छोटे साइज को हाइपोमेस्टिया और बहुत बड़े साइज को जिंगटोमेस्टिया कहते हैं. ये दोनों ही साइज औरतों में हीनभावना को बढ़ावा देने वाले होते हैं. बड़े साइज की ब्रैस्ट से फैट निकाल कर उस का साइज ठीक किया जाता है.

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ब्रैस्ट का छोटा होना कुदरती बात होती है. बहुत सारे मामलों में शादी और बच्चा पैदा होने के बाद ब्रैस्ट के साइज में बदलाव होता है. कभीकभी ऐसा नहीं भी होता है. इस तरह के मामलों में कौस्मैटिक सर्जरी के जरीए ब्रैस्ट का इंप्लांट कर के मनचाहा आकार हासिल किया जा सकता है. कभीकभी औरतों में एक ब्रैस्ट छोटी और दूसरी बड़ी भी होती है. आमतौर पर यह फर्क इतना मामूली होता है कि किसी को पता नहीं चलता है. अगर साइज का यह फर्क दूर से दिखाई देने वाला हो तो ब्रैस्ट इंप्लांट के जरीए दोनों का साइज बराबर किया जा सकता है.

ब्रैस्ट इंप्लांट के लिए पहले सिलिकौन इंप्लांट का ही प्रयोग किया जाता था. आधुनिक तकनीक से ब्रैस्ट इंप्लांट में बहुत बदलाव आ गए हैं. इस से ब्रैस्ट नैचुरल लुक देने लगती है. ब्रैस्ट इंप्लांट के लिए मैमरी ग्लैंड के नीचे, सर्कमरिओलर, आर्मपिट या ट्रांसबिलिकल में चीरा लगा कर सिलिकौन पैड डाला जाता है. नीचे चीरा लगने के कारण इस का निशान छिप जाता है और धीरेधीरे खत्म भी हो जाता है. ब्रैस्ट कैंसर वाले मसलों में यह काफी कारगर होने लगा है.

औपरेशन के बाद त्वचा में खिंचाव पैदा होने के कारण कुछ दिनों तक दर्द बना रह सकता है. इसे दूर करने के लिए दवा दी जाती है. अलगअलग साइज के इंप्लांट बाजार में मिलते हैं. ब्रैस्ट इंप्लांट सर्जरी के द्वारा किया जाता है. यह औपरेशन लगभग 1 घंटे का होता है. आमतौर पर औपरेशन के बाद परेशानी नहीं आती है. कुछ माह के बाद मरीज को इस बात का पता ही नहीं चलता कि उस का औपरेशन हुआ है. मां बनने के बाद बच्चे को ब्रैस्ट फीडिंग कराने में भी कोई परेशानी नहीं आती है. जब चाहें इसे निकाला भी जा सकता है.

2. मसाज से ब्रैस्ट शेपिंग

आमतौर पर 20 से 22 साल की उम्र में जब ब्रैस्ट का आकार 30 ब्रा साइज से कम होता है तो उसे छोटा और 34 से ज्यादा होता है तो उसे बड़ा माना जाता है. सर्जरी के अलावा मसाज द्वारा भी ब्रैस्ट को सही आकार दिया जा सकता है.

कई लड़कियों में छोटी ब्रैस्ट की आनुवंशिक समस्या होती है. वहां मसाज कम असरदार होती है. ऐसे में हारमोंस की दवा देने से ब्रैस्ट के आकार को बड़ा किया जाता है. शादी से पहले ब्रैस्ट के आकार को बड़ा या छोटा करने के लिए सर्जिकल प्रोसीजर का प्रयोग नहीं करना चाहिए जब तक कि कोई दूसरा उपाय न हो. अगर बड़ी ब्रैस्ट को छोटा करना है तो डाइट पर ध्यान दे कर शरीर के बढ़ते फैट को कम कर ब्रैस्ट के आकार को ठीक किया जा सकता है. कई लड़कियों में ब्रैस्ट के ढीलेपन की परेशानी भी होती है. इसे भी मसाज और ऐक्सरसाइज से ठीक किया जा सकता है.

भारतीय माहौल में 32 से 34 ब्रा साइज की ब्रैस्ट को सब से परफैक्ट माना जाता है. फैशन के जानकार भी मानते हैं कि इस साइज की ब्रैस्ट में ही सही उभार आता है. सब से सुंदर क्लीवेज भी इसी से बनती है. 32 ब्रा साइज की ब्रैस्ट को ब्रा की सपोर्ट दे कर क्लीवेज उभारने का काम किया जाता है. इस के लिए पैडेड ब्रा, अंडरवायर ब्रा, डबल पैडेड ब्रा का सहारा लिया जाता है. ब्रा से ब्रैस्ट के साइज को ज्यादा और क्लीवेज को सुंदर दिखाया जा सकता है. लड़कियों के लिए परेशानी की बात तब होती है जब ब्रैस्ट को ब्रा का सहारा नहीं देना होता है.

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ब्यूटी प्रोडक्ट्स में ब्रैस्ट की शेपिंग और साइज को बढ़ाने के नाम पर बहुत सारे प्रोडक्ट्स बाजार में मौजूद हैं. लड़कियां ब्रैस्ट के साइज को ले कर मानसिक कुंठा से बाहर निकलें तो उन्हें लगेगा कि ब्रैस्ट का साइज नहीं आत्मविश्वास ज्यादा मैटर करता है. जहां तक क्लीवेज की बात है तो उसे ब्रा के सहारे उभारा जा सकता है. इस तरह की ब्रा का प्रयोग उतने ही समय के लिए करें जितना जरूरी हो. ज्यादा समय तक ऐसी ब्रा पहनने से ब्रैस्ट की परेशानियां बढ़ सकती हैं.

ब्रैस्ट का साइज कभी एकजैसा नहीं होता है. दोनों ब्रैस्ट के साइज में थोड़ाबहुत अंतर अवश्य होता है. यह अंतर ऐसा होता है जो आसानी से दिखता नहीं है. बहुत कम औरतों में यह अंतर ऐसा होता है जो आसानी से पता चला जाता है. यह अंतर इतना ज्यादा होता है कि इसे आसानी से छिपाया नहीं जा सकता है. अगर अंतर इतना ज्यादा है तो डाक्टर से मिलना जरूरी हो जाता है. ज्यादातर मामलों में यह अंतर सामान्य होता है. माहवारी के पहले यह अंतर दिखाई देता है. बाद में अपनेआप सही हो जाता है.

बिना खोये का गाजर का हलवा

गाज़र खाना हर किसी को पसंद होता है. गाजर खाने से न सिर्फ शरीर को पोषक तत्व मिलते हैं, बल्कि कई शारीरिक बीमारियों से भी छुटकारा मिलता है। गाजर की सबसे बड़ी खूबी ये है की इसमें बहुत प्रचुर मात्रा में  विटामिन-A , विटामिन-C, विटामिन-K, पोटैशियम व आयरन पाया जाता है.इसका  रोजाना सेवन करने से कब्ज व एसिडिटी तो दूर होती ही है , कील-मुंहासों से भी छुटकारा मिलता  है. गाजर में मौजूद विटामिन-A ,आंखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है.

ठण्ड का मौसम है और अगर ठण्ड के मौसम में गाज़र का हलवा न खाया तो क्या खाया? आज हम बनायेंगे गाज़र का हलवा वो भी बिना खोये का.जी हाँ दोस्तों ये हलवा घर पर आसानी से कम समय में बनाया जा सकता है और इसमें लागत भी कम लगती है. तो चलिए बनाते है बिना खोये का गाजर का हलवा-

हमें चाहिए

1 किलो  गाज़र ( घिसी हुई )

1.5 लीटर फुल क्रीम दूध

200 ग्राम चीनी

8-10 काजू (कटे हुए )

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8-10 बादाम(कटे हुए )

9-10 किशमिश

½-चम्मच इलायची पाउडर

1 टेबल स्पून घी

बनाने का तरीका-

1-सबसे पहले 1 किलो गाज़र को अच्छे से पानी से साफ़ करके छील लीजिये फिर उसे घिस लीजिये. अब घिसी हुई गाज़र को कुकर में डाल दीजिये फिर उसमे 1 ग्लास पानी डाल कर कुकर बन्द कर दीजिये. अब कुकर में 1 शीटी आने के बाद गैस बन्द कर दीजिये.

2-जब गाज़र ठंडी हो जाये तो उसे अच्छे  से हाथ से दबा-दबा कर निचोड़ कर एक प्लेट में रख लीजिये .अब एक कढाई  में घी गरम कर ले फिर उसमे गाज़र डाल कर अच्छे से भून ले. अब उसमे 1.5 लीटर पका हुआ फुल क्रीम दूध दाल दे.

3-अब कलछी से अच्छे से  गाजर  और दूध  के मिश्रण को हर 5-6 मिनट पर तब तक चलाते रहें जब तक कि गाजर का रस और दूध सूखने न लगे.

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4-जब आपको लगे की गाज़र और दूध का मिश्रण अच्छे से मिलकर सूख गया है तब उसमे चीनी मिला दे और अच्छे से कलछी से चलाते रहे.

5-अब उसमे ऊपर से इलायची का पाउडर डाल दे और अच्छे से मिला ले .

6-तैयार है टेस्टी गाज़र का हलवा .अब गार्निशिंग के लिए ऊपर से कटे हुए बादाम,काजू और किशमिश डाल दे.

शुभारंभ: राजा-रानी की खुशियों में आ रही अड़चनों को कैसे दूर करेगी राजा की माँ?

कलर्स के शो ‘शुभारंभ’ में राजा-रानी की शादी में कई रुकावटें आ रही हैं. कीर्तिदा अपनी साजिशें चलकर शादी रोकने की कोशिश करने में जुटी हुई है. पर क्या ये साजिशें राजा-रानी की शादी को रोकने में कामयाब हो जाएंगी. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

रानी के परिवार को बचाती है राजा की माँ

पिछले एपिसोड में आपने देखा कि कीर्तिदा रानी के परिवार पर खानदानी ज्वैलरी चोरी करने का इल्जाम लगाती है, जिससे रानी टूट जाती है. वहीं राजा की माँ, आशा कीर्तिदा की चालें समझकर पूरा इल्जाम अपने ऊपर ले लेती है और कहती है कि चोरी होने के डर से उसने पोछी बदल दी थी.

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रानी को भरोसा दिलाएगा राजा

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आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि रानी, राजा से मिलकर दोनों के परिवार के बीच आर्थिक स्थिति में अंतर होने के अपने डर के बारे में बताएगी, लेकिन राजा रानी को भरोसा दिलाएगा कि ये अंतर उनकी शादी और आने वाली जिंदगी में नही पड़ेगा.

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आशा और कीर्तिदा में लगेगी शर्त

 

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राजा की माँ आशा और कीर्तिदा के बीच बहस होगी, जिसमें आशा कहेगी कि ये उसका दावा है कि वह घर और दुकान पर अपना अधिकार हासिल करके रहेगी, जबकि कीर्तिदा आशा को चुनौती देगी कि राजा खुद ही शादी को रोक देगा.

शादी को रोकने के लिए कहेगी रानी

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आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि रानी को अपनी माँ, वृंदा के 2 लाख रुपए के लोन के बारे में पता चल जाएगा और गुस्से में राजा को मैसेज करेगी कि वह शादी को रोकना चाहती है. तभी, उत्सव 2 लाख रुपए लेकर आएगा और रानी से वादा करेगा कि वह पोपट के पैसे चुका देगा और उसे अब चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.

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आशा करेगी कीर्तिदा की चालों को नाकामियाब करने की कोशिश

आने वाले एपिसोड में आप देखेंगे कि शादी के दिन राजा-रानी अपनी शादी में खुशियों के पल साथ बिताते हैं. अब देखना ये है कि कीर्तिदा की चालों का क्या कोई समाधान निकाल पाएगी आशा? या फिर राजा-रानी की शादी में फिर आएगी कोई रुकावट? जानने के लिए देखते रहिए शुभारंभ, सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

अगर खून बहेगा तो वह लाल ही बहेगा – काजोल

90 की दशक की एक बेहतरीन अदाकारा के रूप में उभर कर आने वाली अभिनेत्री काजोल ने हिंदी सिनेमा में कई बेहतरीन अभिनय कर अवार्ड जीते है. फ़िल्मी माहौल में पैदा हुई काजोल को विरासत में अभिनय के गुण मिले है, जिसे वह गर्व के साथ कहती है. हिंदी फ़िल्मी कैरियर की शिखर पर होते हुए उन्होंने अजय देवगन से शादी की और दो बच्चों न्यासा और युग की माँ बनी. माँ बनने के बाद उन्होंने कुछ दिनों का ब्रेक लिया. पर्दे पर आई और हमेशा एक अच्छी और नयी फिल्म दर्शकों को देने की कोशिश करती है. अभी उसकी ऐतिहासिक पीरियोडिकल फिल्म ‘तानाजी –द अनसंग वैरियर’ आने वाली है, जिसमें उन्होंने तानाजी की पत्नी सावित्रीबाई मालुसरे की भूमिका निभाई है. सालों बाद वह अपने पति अजय देवगन के साथ एक बार फिर से अभिनय कर खुश है. ट्रेडिशनल ड्रेस में वह सामने आई, पेश है बातचीत के कुछ अंश.

सवाल-आपको किस तरह के आउटफिट अधिक पसंद है?

मुझे साड़ियाँ बहुत पसंद है. हमेशा से मुझे इंडियन ऑउटफिट पसंद थे और मैं अधिकतर इसे ही पहनती हूँ, क्योंकि भारतीय महिलाएं किसी भी शेप, साइज़ या रंग की क्यों न हो, साड़ी हमेशा उनपर जंचती है.

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सवाल-इस फिल्म में मराठी संस्कृति को बहुत ही नजदीक से दिखाया गया है और आप खुद मराठी संस्कृति से सम्बन्ध रखती है, ऐसे में आपका अनुभव कैसा था?

इसे करने में बहुत अच्छा लगा मैंने इस फिल्म में नव्वारी साड़ी पहनी है, जो मैंने 20 साल पहले अपने शादी पर नथ और मंगलसूत्र के साथ पहनी थी. अभी फिर से पहनी है. मैंने अपनी नानी उसकी माँ और सारे रिश्तेदारों को ऐसे ड्रेस में देखा हुआ है. कैसे उसे पहनकर चलते है उसकी समझ थी पर इस फिल्म में बुजुर्ग महिला आशाताई को सेट पर बुलाया गया, जो पुराने तरीके से नव्वारी पहनाती है. मुझे आधे से पौने घंटे इस साडी को पहनने में लगते थे.

सवाल-इस भूमिका के लिए आपने कितनी तैयारी की?

मुझे अधिक तैयारी नहीं करनी पड़ी, क्योंकि निर्देशक ने सारी रिसर्च पिछले 5 साल से करते हुए यहाँतक पहुंचे है. मैंने उनके हिसाब से ही काम किया है. मेरी भूमिका के बारें में अधिक कहीं कुछ लिखा हुआ नहीं है. 500 साल पहले की डिटेल अधिक कहीं लिखी हुई भी नहीं है, पर जो भी है, इतिहास को लेकर ही इसे बनाया गया है.

सवाल-इतने सालों बाद फिर से सेट पर अजय के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

हम दोनों ने करीब 10 फिल्में साथ की है और घर पर भी हम साथ रहते है. ये सही है कि उनके साथ सीन्स करने में बहुत अच्छा लगा. मेरे हिसाब से किसी दृश्य में 50 प्रतिशत निर्देशक और 50 प्रतिशत कलाकार का हाथ उसे सफल बनाने में होता है. बीच में कई बार अजय ने मुझे और अधिक अच्छा अभिनय करने की सलाह भी दी, जो मेरे लिए अच्छी बात थी.

सवाल-इतने सालों में अजय देवगन और इंडस्ट्री में आप कितना परिवर्तन पाते है?

चरित्र के हिसाब से वे जैसे थे वैसे ही है, फिल्म सेट को मैं घर की तरह ही समझती हूँ . घर पर थोड़े अलग हो गए है, पर सेट पर वैसे ही काम करते है. आजकल इंडस्ट्री में भी काम करने का तरीका काफी बदल गया है. दर्शक आज कोरियन, चायनीज, जर्मन, इंग्लिश आदि हर तरही की फिल्में देखते है, इसलिए 15 साल पहले जो चीज चलती थी. वह आज नहीं चलती, इसलिए इंडस्ट्री को भी बदलना पड़ा.

सवाल-फिल्मों का चुनाव आप कैसे करती है?

मैं फिल्म की कहानी, निर्देशक बैनर आदि सब देखती हूँ, इसके अलावा जो भी कहानी मेरे पास आती है, उसमें से अच्छी फिल्म और किरदार को चुनकर उसे अधिक अच्छा बनाने की कोशिश करती हूँ.

सवाल-आप दोनों की जोड़ी शादी के बाद अच्छी चल रही है इसका क्रेडिट किसे जाता है?

मैंने हमेशा से ये माना है कि किसी भी रिश्ते को थोडा समय हर रोज देने की जरुरत पड़ती है, जैसे एक पौधे को रोज पानी देने की आवशयकता होती है. ये उस पेड़ के बड़े होने पर भी ध्यान देने की जरुरत होती है. यही हम दोनों को भी करने पड़ते है. हम दोनों एक ही रास्ते पर है, हमारी सोच एक है.

सवाल-बच्चे आप दोनों को एक साथ काम करते हुए देख कितने खुश है?

बच्चे बहुत खुश है, वे इसे देखना चाहते है. उन्हें लगता है कि मैं हर पिक्चर में रोती हूँ और वे उसे देखना नहीं चाहते.

सवाल-आप किस तरह की माँ है?

मैं बहुत अधिक कड़क माँ नहीं हूँ. मैं विश्वास करती हूँ कि अगर आपको बच्चों को सही तरह से पालन-पोषण करनी है तो उनपर विश्वास रखना पड़ेगा,क्योंकि दुनिया इतनी अलग है और छोटी उम्र से ही उनको सबकुछ पता चल जाता है, ऐसे में आप उन पर अधिक ध्यान नहीं रख सकते. अगर आप एक बैलेंस्ड पैरेंट बनना चाहते है ,तो आपको अपने बच्चों पर भरोसा रखना पड़ेगा कि आपने बच्चों को सही सीख दी है और वे खुद के लिए भी सही निर्णय लेने में समर्थ होंगे.

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सवाल- अधिकतर महिलाएं परिवार के साथ काम को छोड़ देती है आपने ऐसा नहीं किया और थोड़े दिनों बाद पर्दे पर दिखी, इसे कैसे किया?

मेरे हिसाब से महिलाएं अधिकतर परिवार के साथ भी काम करना चाहती है ,लेकिन उन्हें सहयोग नहीं मिलता और वे काम पर नहीं जा पाती. मुझे हमेशा परिवार का सहयोग रहा है, इसलिए अधिक सोचना नहीं पड़ा.

सवाल- आपकी माँ ने आपकी परवरिश कैसे की?

वे कभी ओवर प्रोटेक्टिव नहीं थी. मेरी माँ हमेशा खुले विचार रखती थी. उन्होंने बहुत हिम्मत के साथ हमें पाला है. बचपन में मुझे माँ से बहुत मार पड़ती थी. लेकिन जब मैं 13 साल की हुई, तो उन्होंने कहा कि अब वह मेरे उपर हाथ नहीं उठाएगी और मुझे अपनी जिम्मेदारी खुद सम्हालनी है.

सवाल- कोई ऐसी सीख,जिसे आपने माँ से सीखा है और बच्चों को भी देना चाहती है? उम्र होने पर माता –पिता बच्चों की तरह हो जाते है, इस बात पर आप कितना विश्वास करती है?

बहुत सारे है,जिसे मैंने माँ से सीखा है. जिसमें बच्चों पर विश्वास रखना और उन्हें निर्णय लेने की आज़ादी देना. मुझे याद आती है, जब मैं माँ बनी, तो एकदिन मैंने उन्हें फ़ोन पर कही थी कि मुझे आज पता चला है कि आपने मुझे कैसे पाला है और कितना प्यार दिया है. ये सही है कि आप तब तक इस बात को समझ नहीं सकते, जब तक कि आप खुद माँ न बनी हो. उन्होंने कितनी राते जगी होंगी, काम के साथ-साथ कितनी मुश्किलों से मुझे इतना बड़ा किया होगा आदि. हम इन सारी बातों को भूल जाते है. माता-पिता का प्यार बच्चों के प्रति हमेशा बिना शर्तो के होता है. इसलिए बच्चो को भी माता-पिता का ध्यान हमेशा रखने की जरूरत होती है. उन्होंने मेरे लिए जितना किया है, मैं उनके लिए अभी तक नहीं कर पायी हूँ. मैं हमेशा उनकी ऋणी रहूंगी. माता-पिता जिंदगी भर हमारे माता-पिता ही रहेंगे. उनसे हमेशा कुछ न कुछ आज भी सीखती हूँ. हॉस्पिटल के बेड पर होने पर भी कुछ न कुछ अवश्य सिखाएगी. इसलिए मैं उन्हें बच्चे की तरह कभी नहीं समझ सकती.

सवाल- आप एक ऐसे परिवार से आती है, जहाँ महिलाओं ने शुरू से काम किया है, आप इसे कैसे लेती है?

मेरे परिवार की सभी महिलाओं से मैंने एक बात सीखी है कि महिलाओं को कोई भी सशक्त नहीं बना सकता, जब तक वह खुद न चाहे. लोग महिला सशक्तिकरण के बारें में जो बातें करते है,मेरे हिसाब से उन्हें कुछ भी कहने की जरुरत नहीं होती. अगर आप खुद अपने आप में विश्वास रखे, तो वही सबसे बड़ी एम्पावरमेंट होती है. अगर मैं काम पर जाती हूँ, तो मेरा बेटा भी समझ जायेगा कि मैं काम कर सकती हूँ. मैं सभी माँ से कहना चाहती हूँ कि बेटे को महिलाओं के बारें में बताएं और उनके सशक्तिकरण के बारें में चर्चा उनके बचपन से करें, क्योंकि माँ के पास शक्ति होती है कि वे एक अच्छे भविष्य का निर्माण कर सके.

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सवाल-साल 2020 के लिए क्या मेसेज देना चाहती है?

साल 2020 बहुत अच्छा साल होने वाला है और मैं सब खुश रहे इसकी कामना करती हूँ. इसके अलावा मैं चाहती हूँ कि इस साल पूरी दुनिया के लोग एक दूसरे को ह्यूमन बीइंग की तरह देखें. चाहे वह किसी भी वर्ग, जाति, धर्म, वर्ग या रंग का हो, उन्हें अलग न समझे, क्योंकि अगर खून बहेगा तो वह लाल ही बहेगा, इसलिए हमें एक दूसरे को सहयोग करने की जरुरत है.

WELCOME 2020: इस साल शादी के बंधन में बंध सकते हैं ये सितारे

नया साल यानी 2020 शुरू हो गया है. जहां इस साल कई नई फिल्में आने वाली हैं, जिनका फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं तो वहीं बौलीवुड और टीवी की कुछ जोड़ियां इस साल शादी के बंधन में बंधने वाली हैं. हालांकि अभी तक ये साथ नही है कि शादी कब होगी, लेकिन कुछ जोड़ियां ऐसी हैं, जिन्होंने अपनी शादी को लेकर खुलासे किये हैं. आइए आपको बताते हैं साल 2020 में शादी के बंधन में बंध सकती है बौलीवुड की ये जोड़ियां…

बौलीवुड एक्टर वरुण धवन और नताशा दलाल

बौलीवुड के हीरो यानी वरुण अपनी बचपन की दोस्त नताशा दलाल से साल 2020 में शादी कर सकते हैं. कौफी विद करण सीजन 6 में, जहां वरुण कैटरीना कैफ के साथ आए, जिसमें अभिनेता ने नताशा के साथ अपने रिश्ते को न केवल स्वीकार किया, बल्कि यह भी कहा कि वह जल्द ही उनसे शादी करेंगे.

 

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☃️mountain ke dost @natashadalal88 @virat.kohli @anushkasharma

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रणबीर कपूर और आलिया भट्ट

 

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बौलीवुड में एक्टर रणबीर और आलिया अक्सर अपनी डेटिंग लाइफ को लेकर सुर्खियों में रहते हैं. वहीं आलिया को अक्सर रणबीर के पेरेंट्स के साथ देखा जा चुका है. वहीं कहा जा रहा है कि रणबीर और आलिया साल 2020 में शादी के बंधन में बंध सकते हैं.

सुष्मिता सेन और रोहमन शॉल

 

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#love ?

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एक्ट्रेस सुष्मिता सेन फिलहाल उनसे 15 साल छोटे मौडल रोहण शॉल को डेट कर रही हैं, जो उनके साथ अक्सर फैमिली फंक्शन में नजर आते हैं. हाल ही में सुष्मिता ने अपना बर्थडे मनाया था, जिसके लिए उनके बौयफ्रैंड सरप्राइज पार्टी रखी थी. अनुमान है कि सुष्मिता सेन और रोहमन शॉल साल 2020 में शादी के बंधन में बंध सकते हैं.

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अर्जुन कपूर और मलाइका अरोड़ा

 

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Sun,star,light,happiness…….2020✨

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अरबाज खान से ब्रेकअप के बाद एक्ट्रेस मलाइका अरोड़ा खान इन दिनों अपने एक्टर अर्जुन कपूर को डेट कर रही हैं. इसी के साथ वह अपने प्यार को सभी के सामने कूबूल भी कर चुकी हैं. इसी के साथ संभावना है कि इस साल दोनों शादी के बंधन में बंध जाएंगे.

अरबाज खान और जॉर्जिया एंड्रियानी

 

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Happy birthday Giorgia ❤️

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तलाक के बाद जैसे मलाइका अर्जुन के साथ अपनी जिंदगी में आगे बढ़ चुकी हैं वैसे ही अरबाज खान भी जॉर्जिया एंड्रियाणी के साथ अपनी जिंदगी शुरू कर चुके हैं. साल 2020 में दोनों की शादी के बंधन में बंधने की अफवाह है.

प्रोटीन सप्लिमैंट से जुड़े मिथ के बारे में भी जानना है जरूरी

प्रोटीन सप्लिमैंट को ले कर बहुत से मिथ हैं, जिन की वजह से लोग इन का सेवन करने से घबराते हैं. आइए फिटनैस ऐक्सपर्ट संकल्प (गुडवेज फिटनैस) से जानें कि क्या प्रोटीन  सप्लिमैंट लेना वाकई खतरनाक हो सकता है?

मिथ: प्रोटीन सप्लिमैंट से वजन बढ़ता है.

सच्चाई: असल में प्रोटीन, प्रोटीन शेक, स्मूथी वजन को कम करने और दुबला बनाने में मदद करते हैं. आप के पेट की चरबी तेजी से कम करते हैं. जब आप किसी भी रूप में प्रोटीन का सेवन करते हैं तो आप को अपना पेट भरा हुआ महसूस होता है. प्रोटीन लेने के बाद आप लंबे समय तक भोजन किए बिना रह सकते हैं और बहुत कम कैलोरी खाते हैं. यह आप के वजन घटाने के पीछे की महत्त्वपूर्ण वजह बनती है. लेकिन प्रोटीन बहुत अधिक मात्रा में लेने पर उलटा असर भी पड़ सकता है.

 

मिथ: प्रोटीन सप्लिमैंट लेने से हड्डियां कमजोर होती हैं.

सच्चाई: जो लोग सही मात्रा में प्रोटीन खाते हैं वे उम्र के अनुसार हड्डियों पर मांस को बेहतर बनाए रखते हैं और उन्हें औस्टियोपोरोसिस और फ्रैक्चर का खतरा बहुत कम होता है. यह महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है, जो मेनोपौज के बाद औस्टियोपोरोसिस के हाई रिस्क पर होती हैं. भरपूर मात्रा में प्रोटीन का सेवन करना और सक्रिय रहना एक अच्छा तरीका है.

मिथ: प्रोटीन सप्लिमैंट का सेवन किडनी के लिए हानिकारक है.

सच्चाई: बहुत से लोगों का मानना है कि हाई प्रोटीन का सेवन किडनियों को नुकसान पहुंचाता है. यह बात सही है, लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि उच्च प्रोटीन सप्लिमैंट का सेवन किडनियों की समस्याओं वाले व्यक्तियों को नुकसान पहुंचा सकता है, मगर स्वस्थ किडनियों वाले लोगों के लिए इस से कोई संबंध नहीं है. जरूरी है कि प्रोटीन सप्लिमैंट लेने के साथ भरपूर मात्रा में पानी पीया जाए ताकि किडनियों पर लोड न पड़े, साथ ही बाकी शरीर पर भी कोई हानिकारक प्रभाव न पड़े.

मिथ: प्रोटीन सप्लिमैंट मुख्य रूप से पशु प्रोटीन होता है.

सच्चाई: प्रोटीन सप्लिमैंट केवल ऐनिमल बेस्ड प्रोडक्ट्स में ही होता है, यह सोचना गलत है, क्योंकि बाजार में प्लांट प्रोटीन भी पाउडर की फौर्म में मिलते हैं जो शरीर में प्रोटीन की कमी को पूरा करते हैं. जो लोग शुद्ध शाकाहारी हैं वे प्लांट बेस्ड प्रोटीन का इस्तेमाल कर सकते हैं. प्रोटीन शुद्ध शाकाहारियों के लिए अच्छा है जो अपने प्रोटीन को अपनी डाइट में शामिल नहीं कर पाते.

आप घर पर भी प्लांट प्रोटीन बना सकते हैं. कुछ नट्स मिला कर पीस कर प्रोटीन तैयार कर सकते हैं. बाजार में सोया प्रोटीन पाउडर भी मिलता है, जो पूरी तरह से नैचुरल और प्लांट बेस्ड होता है. वैसे शाकाहारी बनने का जनून भी निरर्थक है. हम सब दूध पीते हैं जो शाकाहारी नहीं है. बहुत चीजों में जानवरों की चरबी इस्तेमाल होती है. कई कौस्मैटिक उत्पादों में जानवरों के भीतर से निकली चीजें डाली जाती हैं. यह धार्मिक अंधविश्वास है कि शुद्ध शाकाहारी होना हिंदूपने की निशानी है.

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मिथ: प्रोटीन लेने से हमारा पाचन खराब होता है.

सच्चाई: कुछ लोगों को व्हे प्रोटीन को पचाने में समस्या होती है और सूजन, गैस व दस्त जैसे लक्षण महसूस होते हैं. लेकिन इन में से ज्यादातर दुष्प्रभाव लैक्टोज इन्टौलेरैंस से संबंधित हैं. व्हे प्रोटीन में लैक्टोज मुख्य कार्ब है. जो लोग लैक्टोज इन्टौलरैंट हैं वे ऐंजाइम लैक्टोज का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाते जिस की आवश्यकता शरीर को लैक्टोज को पचाने के लिए होती है. यदि आप लैक्टोज इन्टौलरैंट हैं तो व्हे प्रोटीन का आइसोलेट पाउडर ले सकते हैं.

मिथ: जितना ज्यादा प्रोटीन उतना बेहतर.

सच्चाई: कुछ लोगों का मानना है कि वे जितना ज्यादा प्रोटीन अपने भोजन में शामिल करेंगे उन के लिए उतना ही अच्छा होगा. मगर ऐसा बिलकुल नहीं है. प्रोटीन हमें अपने शरीर के अनुसार निर्धारित मात्रा में ही लेना चाहिए. जैसे 0.5 से 0.8 ग्राम उस व्यक्ति के लिए पर्याप्त है,

जिसे शारीरिक रूप से बहुत कम काम करना होता है. 1 से 1.5 ग्राम ऐथलीट्स के लिए पर्याप्त है, जो बहुत मेहनत का काम करते हैं.

 खूबसूरत वादियों और वनस्पतियों की रानी है ऊटी

प्रकृति से प्रेम करने वाला और खूबसूरत वादियों के नज़ारे को देखने की शौक रखने वाला व्यक्ति अधिकतर अपने परिवार और दोस्तों के साथ सुकून और प्रदूषण रहित स्थान पर जाने की कल्पना करता है, जो आजकल मैदानी इलाकों में खासकर बड़े या छोटे शहरों में मिलना संभव नहीं, जहां नीले खुले आकाश में हरी-भरी वादियाँ और पक्षियों की चहचहाहट सुनने को मिले. आज हम बताते है तमिलनाडू में स्थित बेहतरीन पर्यटन स्थल पहाड़ों की रानी ऊटी के बारें में, जो प्रकृति प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं. दूर-दूर तक फैली हसीन वादियाँ, हरे-भरे पेड़ पौधे इसकी खूबसूरती में चार चाँद लगाते है. यह बेस्ट हनीमून डेस्टिनेशन है. जहाँ अधिकतर जोड़े शादी के बाद आते है और अपनी खूबसूरत यादे लेकर वापस जाते है.

समुद्र की सतह से करीब 7,700 फीट की ऊँचाई पर स्थित यह पर्यटन स्थल देश में ही नहीं विदेश में भी प्रचलित है. यहाँ का तापमान सर्दियों के अलावा सालभर सुहाना रहता है, केवल जाड़े में तापमान शून्य से भी नीचे चला जाता है, पर यहाँ बर्फ नहीं गिरती. निलगिरी हिल्स पर स्थित चाय के बागान, अलग-अलग तरह की वनस्पतियाँ पर्यटकों को अनायास ही आकर्षित करती है.यहाँ कई टूरिस्ट स्पॉट है मसलन डोडा बेट्टा पीक, लैम्ब्स रॉक, कोडानाद व्यू पॉइंट, बोटानिकल गार्डन, निलगिरी माउंटेन, चर्च आदि है.

आकर्षक जगहें

ऊटी जाने के बाद पहले दिन ऊटी और कुन्नूर को घूमना अच्छा रहता है, अगले दिन पाईकरा  मदुमलाई, उसके बाद अव्लांचे लेक, 3 दिन में पूरी ऊटी को घूमा जा सकता है. सफारी का आनंन्द भी ऊटी में आप उठा सकते है जो सुबह 9 बजे से शाम को 6 बजे तक होता है. इसके लिए परमिशन की जरुरत नहीं होती. जंगल की गाडी ही इस सफारी को करवाती है. जिसका मूल्य प्रति व्यक्ति 400 रुपये होती है. हर दिन इसे आप कर सकते है. कई बार यहाँ हर तरह के जंगली जानवर से भी रूबरू होना पड़ता है.

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डोडा बेट्टा पीक के बारें में कार चालक स्माइल बताते है कि ऊटी शहर से 8 से 9 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ, ये पीक यहाँ की सबसे ऊँची चोटी है. इसकी ऊँचाई 2623 मीटर है इसके बाद पहाड़ी से नीचे की ओर जाना पड़ता है. यहाँ पर्यटक अधिकतर कार से आते है. यहाँ जंगलों में कई प्रकार के जंगली जानवर जैसे बाईसन, हिरण और चीता है. यहाँ चीड़ के पेड़ काफी मात्रा में पाए जाते है.यहाँ बारिश के मौसम में लैंडस्लाइड नहीं होती, इसलिए सैलानी यहाँ हर मौसम में आ सकते है, यहाँ से ऊटी का पूरा नज़ारा देखने लायक होता है. 90 प्रतिशत लोग यहाँ आते है. इसके अलावा लैम्ब्स रॉक कुनूर से केवल 9 किलोमीटर की दूरी पर है. यहाँ से कोयंबटूर के सुंदर और चाय के बागानों के मनमोहक दृश्य आसानी से देखे जा सकते है, जिसे फोटोग्राफी के शौक़ीन व्यक्ति कैमरे में कैद कर सकते है. कोडानाद व्यू पॉइंट भी ऐसी ही एक सुंदर पीक है, यह निलगिरी पर्वत श्रृंखला के पूर्वी छोर पर कोटागिरी से 16 किलोमीटर की दूरी पर है. यहाँ से मयार नदी और चाय के बागान देखे जा सकते है.

निलगिरी माउंटेन के बारें में स्टर्लिंग हॉलीडेज के रीजनल मैनेजर मुत्थुराज रिचार्ड बताते है कि ऊटी की निलगिरी चाय 187 सालों से प्रसिद्ध है, ये 1832 में क्रिस्टी नाम के एक सर्जन ने इसे उगाया था. जब वह एक दिन इन पहाड़ियों के बीच से गुजर रहा था तो चाय के तरह के केमेलिया वेरायटी के पौधों को पहाड़ियों पर देखा और चीन से कुछ चाय के बीज मंगवाकर इन पहाड़ियों पर लगवाएं. जब तक पौधे बड़े होते उनकी मृत्यु हो चुकी थी. इसके बाद सरकार ने 1935 में इस तरफ ध्यान दिया. यहाँ की सरकार ने इसकी पहली नर्सरी केटी वैली में शुरू की और चाय की खेती शुरू हुई. जिसे यहाँ के लोग पहाड़ों की ढलान पर सीढ़ीनुमा खेतो में उगाते है. ये चाय स्वाद और सुगंध के लिए बहुत मशहूर है. सैलानी यहाँ आने पर उसका अच्छा लुत्फ़ उठाते है. कोरा कोंडा सबसे ऊँची चाय के बागान है. कई प्रकार के चाय यहाँ पायी जाती है. यहाँ की पहाड़ियों में ग्रीन टी, ब्लैक टी, वाइट टी आदि कई वैरायटी है. जिसमें वाइट टी सबसे अधिक महँगी और स्वाद में अच्छी होती है. ये निलगिरी पहाड़ियों की सबसे ऊँचाई पर ही पैदा होती है. इसके कली के खिलने से पहले इसे तोड़ी जाती है, ताकि इसकी फ्लेवर बनी रहे. अधिक ऊँचाई पर उगने वाले चाय का स्वाद और सुगंध सबसे अच्छा होता है.

इसके अलावा निलगिरी पर्वत नाम पड़ने के बारें में ऊटी निवासी संतोष कहते है कि इन पहाड़ियों में निलगिरी के पेड़ काफी मात्रा में है, जिसकी महक ऊटी जाते समय ही अनुभव होता है. निलगिरी का तेल सैलानी यहाँ से ले जाते है, जो सर्दी जुकाम और सिरदर्द के लिए काफी उपयोगी होता है. कुछ लोग मानते है कि बसंत ऋतु में एक ख़ास तरह के नीले फूल इन पर्वत श्रृंखलाओं पर खिलते है, जिससे पूरा पर्वत माला नीला दिखाई पड़ता है, इसलिए इसे निलगिरी पर्वत कहा जाता है.

प्रकृति प्रेमियों के लिए वनस्पति उद्यान ऊटी की एक खास जगह है, इसकी स्थापना साल 1847 में की गयी थी. 22 हेक्टेयर में फैले इस वन की रखवाली वनविभाग करती है. यहाँ पेड़-पौधों की 650 प्रजातियाँ है और यह करीब 2 करोड़ वर्ष पुराना है.

ऊटी झील में नौका विहार सबसे अच्छा और खूबसूरत है. मछली के शिकार करने के लिए यहाँ परमिशन लेनी पड़ती है. इसका निर्माण साल 1825 में जॉन सुलिवान ने करवाया था. यह झील 2.5 किलोमीटर लम्बी है. इसके अलावा यहाँ एक बगीचा और जेट्टा भी है.

जाने ऊटी की इतिहास करीब से

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स्टर्लिंग हॉलीडेज के मुख्य मार्केटिंग ऑफिसर पेशवा आचार्य बताते है कि निलगिरी चेर साम्राज्य  का भाग हुआ करती थी. इसके बाद वह गंग साम्राज्य के पास गयी और 12वीं शताब्दी में होयसल साम्राज्य के राजा विष्णुवर्धन के अंतर्गत आ गयी और बाद में यह मैसूर राज्य का हिस्सा बना. 18 शताब्दी में टीपू सुल्तान ने इसे अंग्रेजों के हवाले कर दिया, लेकिन पड़ोसी कोयम्बटूर के गवर्नर जॉन सुलिवान को यहाँ का मौसम बहुत सुहावना लगा और उन्होंने यहाँ बसे आदिवासियों, जिसमें तोडा, इरुम्बा और बडगा प्रमुख थे, उनसे जमीनें खरीदनी शुरू कर दी. इस जगह का अधिक विकास ब्रिटिश राज्य में हुआ. बाद में ऊटी को मद्रास प्रेसिडेंसी की ग्रीष्मकालीन राजधानी का दर्जा दिया गया. तोडा लोग भैस पालने के लिए जाने जाते थे, जबकि बडगा अच्छी खेती करने में माहिर माने जाते है. यहाँ की अर्थव्यवस्था अधिकतर पर्यटन और कृषि पर ही टिकी हुयी है. ठंडी मौसम होने की वजह से चाय के अलावा यहाँ की आलू, गाजर, गोभी आदि की खेती काफी अच्छी होती है. इसके आगे उनका कहना है कि ऊटी की तोडा आदिवासियों के बारें में जानकारी, उनकी संस्कृति और हेंडीक्राफ्ट को आगे लाने के लिए वे निरंतर प्रयास कर रहे है.

क्या खाए और कहाँ से  

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एक्जीक्यूटिव शेफ सर्वानन्द बताते है कि इस तरह के चाय किसी भी समय आप कभी भी ले सकते है. इसके अलावा ऊटी की स्ट्राबेरी स्मूदी डीटोक्स करने के लिए बहुत अच्छी होती है जो यहाँ के लोग अधिकतर घर पर ही बनाते है. यहाँ का मौसम पूरे साल ठंडा रहता है. इसलिए सैलानी पूरे साल यहाँ घूमने आते है. यहाँ के फ़ूड की बात करें तो यहाँ की अधिकतर व्यंजन कर्नाटक और साउथ इंडियन फ़ूड से ही प्रेरित है. जिसे आप किसी भी रेस्तरां या होटल से खा सकते है. इसके अलावा यहाँ आने पर बडगांव फ़ूड और ऊटी वर्की जो यहाँ के आदिवासी अधिक खाते है. ऊटी वर्की मक्खन और मैदे के साथ मिलाकर बनाया जाता है, उसे अवश्य खाने की कोशिश करें. यहाँ बडगाव के लोग अधिक बसते है. ऊटी की सेव जो बेसन, चावल के आटे, काजू और मसालें से बनायी जाती है, जिसे किसी भी व्यंजन के साथ या खाली खा सकते है ये हर डिश को लज़ीज़ बनाती है. असल में ऊटी 8 जिले के अन्तर्गत विभाजित है. यहाँ हजारों प्रकार की इडली प्रसिद्द है. जो उस समय के राजा-रजवाड़े के खान पान से प्रेरित है. संतागई एक ब्रेकफास्ट फ़ूड है, जिसे चावल और उर्द के पेस्ट से बनायीं जाती है इसके अलावा कांचीपुरम इडली, जैस्मिन इडली आदि कई है. यहाँ के लोग अधिकतर स्टीम्ड फ़ूड खाते है, क्योंकि वे अधिकतर किसान है, इसलिए वे इस तरह के भोजन करने पर पूरा दिन काम कर सकते है. इसे बनाना, खाना और हज़म करना आसान होता है. इतना ही नहीं यहाँ के किसान अधिकतर चावल और मक्खन खाते है.

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कैसे जाएँ

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निकटतम हवाई अड्डा कोयम्बटूर है, यहाँ से गाडी से ऊटी की 87 किलोमीटर की दूरी करीब 3 घंटे की जर्नी कर पहुंचा जा सकता है, जबकि रेलवे स्टेशन उदगमंडलम है, यहाँ से टॉय ट्रेन से ऊटी पहुँचने में साढ़े 6 घंटे लगते है.

ठहरने की सुविधा

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ऊटी में रहने की बहुत सुविधाएँ है. शॉप में काम करने वाले सरजू कहते है कि हर बजट के होटल और हॉलिडे होम्स यहाँ पर उपलब्ध है. 1 हज़ार रुपये प्रतिदिन से लेकर 6 हज़ार रुपये के अच्छे कमरे मिल सकते है. अप्रैल से जून तक का समय घूमने के लिए सबसे अच्छा होता है और अधिकतर सैलानी तभी आते है. ठंड में पर्यटकों की संख्या कम हो जाती है.

क्या खरीदें

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शॉप के ओनर उमेश का कहना है कि ऊटी के चाय, हाथ से बनी चोकलेट, खुशबूदार निलगिरी तेल और मसालों के लिए प्रसिद्द है. बाज़ार में आसपास की दुकानों पर ये आसानी से मिल जाता है. यहाँ के तोडा आदिवासी महिलाएं हाथ से कपड़ा, शाल और स्टोल बुनती है. इसके अलावा तोडा शैली के चांदी के पारंपरिक गहने भी आसानी से मिलते है, जिसे वे सोने में भी बना देते है. तमिलनाडू के हस्तशिल्प केंद्र से इसे ख़रीदा जा सकता है.

छोटी सरदारनी: खतरे में पड़ेगी सरब की जान, क्या साथ आएंगी मेहर और हरलीन?

कलर्स के शो ‘छोटी सरदारनी’ में मेहर के पास अपने बच्चे या सरब और परम के बीच में से किसी एक को चुनने के लिए बहुत कम दिन बचे हैं. तो वहीं हरलीन और सरब के बीच भी मेहर के कारण दूरियां खत्म होने का नाम ही नही ले रही हैं. आइए अब आपको बताते हैं क्या होगा शो में आने वाला नया ट्विस्ट…

सरब ने किया बटवारे का फैसला

अब तक आपने देखा कि मेहर के बच्चे के नाम प्रौपटी करने से गुस्से में हरलीन, सरब को दो रास्ते देती है कि वह घर छोड़कर चली जाएगी या फिर घर का बटवारा होगा, लेकिन सरब दोनों बातों के लिए नही मानता. तो रौबी सरब को कहता है कि घर और प्रौपर्टी को बेच दे. वहीं मेहर इस पूरे मामले में चुप्पी बनाए रखती है.

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मेहर को कंस्ट्रक्शन साइट पर ले जाएगा सरब

आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि सरब, मेहर को कंस्ट्रक्शन साइट पर लेकर जाएगा. जहां वो मेहर को बताएगा कि वो गरीबों के लिए एक अस्पताल बनवाना चाहता है जो उसके पिताजी का सपना था.

मेहर को गोद में उठा लेगा सरब

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मेहर की प्रेग्नेंसी को देखते हुए सरब परेशान होता है, इसीलिए वह मेहर को गोद में उठा लेता है ताकि उसे सीढ़ियों पर चलने में कोई तकलीफ ना हो.

खतरे में पड़ेगी सरब की जान

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कंस्ट्रक्शन साइट पर सरब का पैर फिसल जाएगा और वो ऊंचाई से नीचे गिर जाएगा, जिससे उसकी जान खतरे में पड़ जाएगी. सरब की ये हालत देख मेहर और हरलीन बुरी तरह घबरा जाएंगी.

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अब सवाल ये है कि क्या सरब को बचाने के लिए मेहर और हरलीन अपने गिले-शिकवे भुलाकर एक साथ आएंगी? जानने के लिए देखते रहिए ‘छोटी सरदारनी’, सोमवार से शनिवार, रात 7:30 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

फैशन का नया पैमाना बन रहा है खादी

 स्वदेशी आन्दोलन के समय विदेशी कपड़ो के विरोध में जब गाँधी जी ने  जन-जन से खादी पहनने का अवहान किया था तो किसी ने नही सोच था कि एक दिन यही खादी  फैशन का पैमाना बनकर उभरेगा. खादी में डिजायनों में खूबसूरती की नई संभावनाएं नजर आने लगी हैं. इसे देखते हुए अब लग रहा है कि भारत में खादी के वस्त्रों का फैशन भी आने वाले दिनों में चल निकलेगा. इसको लेकर भारत के फैशन डिजायनर कई किस्मों के परिधान और समयानुसार नई डिजाइनों में लेकर उतरने लगे हैं. इससे खादी के उत्पाद को प्रोत्साहन और खादी के व्यवसाय में वृद्धि हुई है. साथ ही  फैशन की दुनिया में अगर फैब्रिक्स की बात करें तो खादी की अपनी अलग जगह है. खादी की शुरूआत तो अंग्रेजों की नीतियों की विरोध करने के लिए हुआ था लेकिन आज ये एक फैशन ट्रेंड बन चुका है. उस वक्त  किसी को ये अंदाजा भी नहीं होगा कि खादी इस तरह फैशन का पैमाना बनकर उभरेगा.

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खादी का क्रेज आपको यंगस्टर से लेकर बड़े-बुजुर्गों तक सबके बीच मिलेगा. खादी की बढ़ती लोकप्रियता का ही कमाल है कि फैशन डिजाइनर खादी के नए-नए कलेक्शन लान्च कर रहे हैं और इसका इस्तेमाल क्लॉथस के अलावा बैग, फुटवियर, एक्सेसरीज और शोपीस बनाने में कर रहे हैं. किसी तरह की स्किन एलर्जी में खादी पहनना अच्छा होता है.

कपड़े- आपको चाहे इंडियन पसंद हो या वेस्टर्न ड्रेसेज, खादी में आपको सब मिलेगा. खादी में लॉग स्कर्ट, कुरती, लूज कुरता, शर्ट, शॉट जैकेट, साड़ी, सलवार-सूट, मल्टीकलर दुपट्टा और शेडेड स्टोल का नाम हॉट लिस्ट में है.

फुटवियर- खादी के फुटवियर स्टाइलिश के साथ-साथ आरामदायक होने की वजह से काफी लोकप्रिय है. मार्केट में आपको खादी से बने शूज, सैंडिल, हील्स, चप्पल, फ्लोटर की बड़ी रेंज मिलेगी. अगर आपको ज्याता पसीना आता है तो गर्मियों में कॉटन खादी के फुटवियर पहने.  सर्दियों में वुलेन खादी के शूज पैरों को गरम रखते हैं.

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एक्ससरीज- खादी से बने हैंडबैग और पर्स कॉलेज गर्ल्स के साथ-साथ महिलाएं भी खूब जी भर के खरीद रही हैं. इसके अलावा मार्केट में खादी के इयर रिंग्स, हेयर बैंड्स, हैंड बैंड्स, सजाने के लिए हैंगिग्स और मोबाइल कवर की बेशुमार वैराइटी आपको दीवानी बना देगी.

बच्चों की खुशियों और परेशानियों में उन की दोस्त बन कर रही- मालिनी अवस्थी

मालिनी अवस्थी

लोक कलाकार

सुपर मौम वही है जो खुद तो सफल हो ही उस की परवरिश में बच्चे भी आगे बढ़ते हुए अपना मुकाम हासिल करें. उत्तर प्रदेश के कन्नौज की मालिनी अवस्थी ऐसी ही सुपर मौम हैं. उन की एक बेटी और एक बेटा है. बेटी अनन्या डाक्टर है और बेटा अद्वितीय इंजीनियर. बेटी की शादी हो चुकी है. बेटी खुद भी गायन में पूरी तरह निपुण है.

सुर साधना के साथसाथ परिवार और बच्चों की परवरिश करना मालिनी के लिए आसान न था. वे यह सब अपनी कुशलता और पति के साथ की वजह से कर पाईं. आज के समय में अपने कैरियर में संघर्ष के दौरान मालिनी अवस्थी ने बच्चों को कैसे संभाला, आइए जानते हैं उन्हीं से:

सवाल- कजरी के साथसाथ आप ठुमरी, दादरा, भजन भी कैसे गाना सीख गईं?

मेरे पिता पीएन अवस्थी सरकारी सेवा में डाक्टर थे. उन का छोटेबड़े सभी शहरों में ट्रांसफर होता रहता था. इसीलिए मेरे जीवन पर भी सभी शहरों की छाप पडी. इसी का प्रभाव है कि जिस लय और मधुरता के साथ मैं मिर्जापुर की कजरी गाती हूं उसी लय और मधुरता के साथ ब्रज और अवधी के लोकगीत भी गा लेती हूं. मैं ने देश के बाहर भी भारतीय कला और संस्कृति का प्रदर्शन किया है. मैं ठुमरी, दादरा, निरगुन, चैती, कजरी, भजन और गजल के साथसाथ अवधी और भोजपुरी लोक गीत भी गाती हूं.

सवाल- आप के जीवन में मां का कितना प्रभाव रहा?

मैं ने गायकी का यह मुकाम ऐसे हासिल नहीं किया. हर बेटी की तरह मेरे जीवन पर भी अपनी मां निर्मला अवस्था का बहुत प्रभाव पड़ा. मां को गायकी पसंद थी. वे चाहती थीं कि मैं भी गायकी में अपना हुनर दिखाऊं. 12 साल की उम्र में ही मैं ने संगीत प्रभाकर पास कर लिया. इस के बाद मैं ने गायकी में हर मुकाम हासिल किया. गोरखपुर आकाशवाणी के लिए भी गायन किया. इस के बाद मुड़ कर नहीं देखा.

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1988 में लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए करते समय ही मेरी शादी कानपुर में रहने वाले अवनीश अवस्थी के साथ तय हो गई. अवनीश का गायकी में कोई दखल नहीं था. वे इलैक्ट्रिकल इंजीनियर थे. पति के रूप में ऐसा जीवनसाथी मिला जो मेरी उड़ान में मेरा सहायक बना.

शादी के बाद जल्दीजल्दी एक बेटा और एक बेटी हो गए. ऐसे में गाने और रिकौर्डिंग के लिए जाते समय परेशानी होती तो अवनीश पूरी मदद करते. जौनपुर में तैनाती के समय दोनों बच्चे छोटे थे, मु झे एक कार्यक्रम में गाने जाना था. कैसे जाया जाए यह सम झ नहीं आ रहा था. तब बच्चों को संभालने के लिए मेरी मां और सास दोनों मेरे साथ गईं.

जब बच्चे 10वीं कक्षा में पहुंच गए तो कुछ दिन नोएडा में रह कर बच्चों की पढ़ाई पूरी कराई. कक्षा 12वीं  की पढ़ाई के बाद जब बच्चे आगे बढ़े तब थोड़ी राहत मिली.

इस के बाद भी बच्चों के साथ तालमेल बैठाना जरूरी होता है. हम दोनों ने बच्चों से हमेशा दोस्त बन कर बातचीत की. उन की परेशानियों, उन की खुशियों में हर तरह से शामिल रहे. जरूरत के अनुसार एक स्पेस भी रखा. कैरियर में उन की जो रुचि थी उसे ही आगे कर के काम किया. जैसे और जितना भी संभव हुआ अपने काम से समय निकाल कर बच्चों को समय दिया.

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सवाल- बतौर सुपर मौम एक मां का बच्चे के प्रति कितनी जिम्मेदारी होनी चाहिए?

एक मां ही बच्चों को संपूर्ण देखभाल करती है उसे भविष्य के लिए संवारती है. मां से ही बच्चा संस्कार सीखता है. कह सकते हैं कि एक बच्चे के लिए मां ही उस की पहली गुरु होती है. इसलिए जहां तक संभव हो बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए मां को पूरापूरा समय देना चाहिए.

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