Hindi Drama Story: नीरजा और रोहित थोड़ी देर बाद हमारे घर डिनर करने के लिए आने वाले हैं. शिखा ने बड़े उत्साह से उन के लिए खाना बनाया है. वह सुबह से ही बहुत खुश है जबकि मेरा मन अजीब सी खिन्नता और चिड़ का शिकार बना हुआ है. ‘‘खाना खाने के बाद आइसक्रीम खाने बाहर चलें या आप बड़ी वाली ब्रिक घर लाओगे?’’ बैडरूम में तैयार हो रही शिखा ने ऊंची आवाज कर के मुझसे पूछा.
‘‘मैं ब्रिक ले आता हूं. खाना खाने के बाद कौन बाहर जाने के झंझट में पड़ेगा. कौन सी आइसक्रीम लाऊं,’’ मेरे मन की खीज मेरी आवाज में साफ ?झलक रही थी.
‘‘आप नीरजा के साथ कालेज में पढ़े हो. क्या आप को याद नहीं कि उसे कौन सी आइसक्रीम पसंद है?’’
‘‘4 साल बाद ऐसी बातें कहां याद रहती हैं,’’ मैं ने झुझंलाए लहजे में जवाब दिया. ‘‘तो जो आप का मन करे, वही फ्लेवर ले आना. अब जल्दी जाओ और जल्दी आओ. उन लोगों के आने का समय हो रहा है.’’ ‘‘मैं जा रहा हूं. तुम आ कर दरवाजा बंद कर लो,’’ मैं सोफे से उठ कर दरवाजे की दिशा में चल पड़ा.
कालेज छोड़े 4 साल बीत चुके हैं पर मैं न नीरजा को भूला हूं, न रितु को. मुझे अच्छी तरह याद है कि नीरजा हमेशा मैंगो फ्लेवर वाली आइसक्रीम खाती थी. मैं मैंगो फ्लेवर वाली आइसक्रीम बिलकुल नहीं लाऊंगा. मैं नीरजा को खुश होने का कोई मौका नहीं देना चाहता हूं.
करीब 2 महीने पहले नीरजा और रोहित पहली बार हमें बाजार में अचानक मिल गए थे. नीरजा को बातों से किसी का दिल जीतने की कला हमेशा से आती है. बहुत जल्द ही उस ने शिखा के साथ अच्छी दोस्ती की नींव डाल दी थी.
शिखा बहुत भोली और सीधीसादी है. उस ने नीरजा और रोहित को उस पहली मुलाकात के समय ही अगले रविवार को घर पर खाने के लिए बुला लिया था. एकदूसरे के घर आनेजाने का उस दिन से शुरू हुआ सिलसिला बढ़ता ही जा रहा था. इन मुलाकातों ने नीरजा के लिए मेरे मन में बसे नापसंदगी व चिड़ के भावों को और ज्यादा बढ़ाया ही है. मैं बिलकुल नहीं चाहता हूं कि वह मेरी बहुत अच्छी तरह से चल रही घरगृहस्थी की खुशियों व सुखशांति को नष्ट करने का कारण बने. मैं ने आइसक्रीम खरीदने के बजाय जानबूझ कर रसमलाई खरीदी जोकि नीरजा को कभी अच्छी नहीं लगती थी. मेरे बाजार से लौटने के साथसाथ ही रोहित और नीरजा भी आ पहुंचे.
वे लोग गुलदस्ता ले कर आए थे और फूल शिखा को बहुत पसंद हैं. नीरजा से इस भेंट को स्वीकार करने के बाद शिखा बड़े अपनेपन के साथ उस के गले लग गई. जब शिखा रसोई में जाने लगी तो नीरजा भी उस के साथ जाने को उठ खड़ी हुई. मैं रोहित के साथ आस्ट्रेलिया और भारत के बीच चल रहे एक दिवसीय मैचों की शृंखला की चर्चा करने लगा.
रोहित मुझे पहली मुलाकात से ही हंसमुख और समझदार इंसान लगा है. हम दोनों के बीच बहुत अच्छी दोस्ती हो सकती है पर बीच में नीरजा के होने के कारण मैं अपना हाथ उस के साथ दोस्ती के लिए नहीं बढ़ा सकता हूं.
आज भी जबजब मुझे एहसास हुआ कि हम दोनों के बीच वार्त्तालाप खुल कर हो रहा है, मैं ने जानबूझ कर बोलना कम कर दिया. फिर बीचबीच में मैं अपने कम बोलने के निर्णय को भूल जाता तो हम दोनों के ठहाकों से कमरा गूंज उठता. बिना कारण किसी खुशमिजाज इंसान को नापसंद करने का नाटक करना सचमुच कठिन काम है. उन के आने के करीब आधे घंटे बाद हम चारों खाना खाने डाइनिंग टेबल पर बैठ गए. शिखा ने सचमुच दिल से खाना बनाया था. रोहित ने जब खाने की तारीफ करी तो मुझे अच्छा लगा, पर जब नीरजा ने ऐसा किया तो मैं मन ही मन चिढ़ उठा.
‘‘समीर, तुम्हारा मूड क्यों उखड़ा हुआ है? क्या खाना तुम्हारी पसंद का नहीं बना है?’’ नीरजा ने अचानक यह सवाल पूछ कर मुझे रोहित और शिखा की नजरों का केंद्र बना दिया.
‘‘मेरी भी समझ में नहीं आ रहा है कि इन का मूड सुबह से खराब क्यों बना हुआ है, पर कोई न कोई बात है जरूर,’’ शिखा ने यह बात यों तो मुसकरा कर कही पर मैं ने उस की आंखों में हलकी चिंता के भाव पढ़ लिए थे.
‘‘मेरा मूड ठीक ही है रोहित, तुम पनीर की सब्जी और लो न,’’ मैं ने वार्त्तालाप की दिशा बदलने की कोशिश करी.
‘‘समीर, कभीकभी मुझे लगता है कि…’’ नीरजा ने जानबूझ कर अपनी बात पूरी नहीं करी और मेरी तरफ शरारती भाव से देखने लगी.
‘‘क्या लगता है,’’ मैं ने इस अपेक्षित सवाल को पूछते हुए अपने स्वर में दिलचस्पी के भाव पैदा नहीं होने दिए.
‘‘मुझे कभीकभी ऐसा लगता है कि तुम अब भी रितु को नहीं भुला पाए हो,’’ उस ने मेरी टांग खींचने की कोशिश शुरू कर दी.
‘‘तुम बहुत बड़ी गलतफहमी का शिकार हो, नीरजा. शिखा जैसी समझदार, सुंदर और सुशील पत्नी को पाने के बाद कोई अपनी पुरानी प्रेमिका को भला क्यों याद करेगा?’’ मैं ने मुसकराने के बजाय संजीदा लहजे में जवाब दिया.
‘‘याद तो नहीं रखना चाहिए, पर तुम आदमी जरा अक्ल से पैदल होते हो. अब रोहित को ही लो. इन्हें मैं ने अंजु के जन्मदिन पर… अंजु इन की कालेज की प्रेमिका का नाम है. उस के जन्मदिन पर मैं ने इन्हें आंखों में आंसू भरे हर साल पकड़ा है. क्या मैं गलत कह रही हूं, रोहित?’’
“नहीं डियर,’’ रोहित ने हंसते हुए जवाब दिया, ‘‘पहले प्यार को भुला पाना संभव नहीं होता है. पुरानी यादें आंखों में आंसू भर जाती हैं, पर वह कोई महत्त्वपूर्ण बात नहीं क्योंकि अब तुम्हारे अलावा मेरे दिल में कोई दूसरी औरत नहीं बसती है.’’
नीरजा के कुछ बोलने से पहले ही मैं ने आवेश भरे लहजे में कहा, ‘‘रोहित भाई, इन दूसरी औरतों की ताकत को कभी कम कर के मत आंकना. बड़ी चालाकी से वे अपने रूपजाल में अपने शिकार को फंसाती हैं. मेरा तो यह मानना है कि समझदार आदमी को ऐसी खूबसूरत नागिनों से किसी तरह का रिश्ता बनने ही नहीं देना चाहिए. अगर कोई आदमी पहले से होशियार नहीं रहे तो बाद में उजड़ी हुई अपनी घरगृहस्थी और आजीवन पीड़ा देने वाले दिल के जख्मों के अलावा कुछ हाथ नहीं लगता है.’’
‘‘तुम्हारे गुस्से को देख कर लगता है कि अतीत में किसी दूसरी औरत ने तुम्हें अपने जाल में फंसाने की कोशिश की है, समीर,’’ रोहित ने मुझे छेड़ा तो शिखा और नीरजा खुल कर हंस पड़ीं. ‘‘तुम्हें कैसे पता लगा?’’ मैं ने हैरान दिखने का बढि़या नाटक किया तो पूरा घर हम सब के सम्मिलित ठहाकों की आवाज से गूंज उठा. मैं ने नोट किया कि इस पल के बाद से नीरजा चुपचुप सी हो गई थी. उस के दिल को चोट पहुंचाने में मैं सफल रहा हूं, ऐसा सोच कर मेरा मन खुशी महसूस कर रहा था और इस कारण मैं ज्यादा खुल कर रोहित से गपशप करने लगा. खाना खत्म होने के बाद जब शिखा रसमलाई लाई तो नीरजा ने शिकायत करी, ‘‘समीर, यह रसमलाई क्यों मंगवा ली?’’ तुम्हें तो याद होना चाहिए कि मैं रसमलाई बिलकुल नहीं पसंद करती हूं.’’
‘‘सौरी नीरजा, पर मुझे बिलकुल याद नहीं कि तुम रसमलाई पसंद नहीं करती हो. मैं ने रोहित को बड़े स्वाद से रसमलाई खाते देखा हुआ है और यह शिखा को भी बहुत अच्छी लगती है. सौरी, अब आगे से याद रखूंगा,’’ मेरी आवाज में अफसोस के भाव किसी को ढूंढ़े से भी नहीं मिलते.
‘‘मेरा तो आइसक्रीम खाने का मन कर रहा है,’’ वह किसी छोटी बच्ची की तरह मचल उठी.
‘‘तो तुम्हें आइसक्रीम खिलवा देते हैं. रोहित और आप बाजार से आइसक्रीम ले आओ, प्लीज,’’ शिखा ने मुझसे ऐसी प्रार्थना करी तो मैं मन ही मन जोर से किलस उठा.
‘‘थैंक यू, शिखा. समीर, तुम्हें तो याद नहीं रहा होगा इसलिए मैं बता देती हूं कि मुझे मैंगो फ्लेवर वाली आइसक्रीम ही पसंद है,’’ नीरजा का अपनी पसंद बताते हुए मुसकराना मेरा खून फूंक गया. मुझे मजबूरन रोहित के साथ आइसक्रीम लेने जाना पड़ा. रास्ते भर अधिकतर रोहित ही कुछकुछ सुनाता रहा. मैं ने यह जाहिर नहीं होने दिया कि मेरा मूड खराब हो रहा.
नीरजा ने छक कर आइसक्रीम खाई. वह मुझ से सहज हो कर हंसबोल रही थी पर मुझे उस की तरफ देखना भारी लग रहा था. जब विदा लेने को वे दोनों उठ खड़े हुए तब ही मैं ने मन ही मन बहुत राहत महसूस करी.
‘‘अगले संडे को तुम दोनों हमारे घर डोसा खाने आ रहे हो?’’ नीरजा ने हमें अपने घर आने को आमंत्रित किया.
‘‘शायद हम संडे को शिखा के भाई के घर जाएं, इसलिए शनिवार की सुबह को तुम्हारे यहां आने का प्रोग्राम पक्का करते हैं,’’ मैं ने उन के यहां पहुंचने को जानबूझ कर हामी नहीं भरी.
‘‘तब शनिवार की रात छोलेभठूरे की दावत कर देती हूं.’’
‘‘अभी कोई कार्यक्रम नहीं बनाओ. हम बाद में फोन पर बात कर के कुछ तय करेंगे.’’
मैं ने नोट किया कि विदा के समय नीरजा सोच में डूबी सी नजर आ रही थी. मुझे उस के खराब मूड की कोई परवाह नहीं हुई क्योंकि मैं उस से अच्छे संबंध बनने का इच्छुक ही नहीं था. सोने से पहले शिखा ने मेरा हाथ अपने हाथ में ले कर अचानक संजीदा लहजे में बोलना शुरू किया, ‘‘समीर, मुझे आज पता लग गया है कि तुम नीरजा को क्यों पसंद नहीं करते हो. जब तुम रोहित के साथ आइसक्रीम लाने गए हुए थे, तब नीरजा ने मुझे तुम्हारी नापसंदगी का कारण बता दिया.’’
‘‘क्या बताया उस ने?’’ मैं ने माथे में बल डाल कर तीखे लहजे में पूछा.
‘‘यही कि रितु और तुम्हारे बीच गलतफहमी की जड़ में उस का तुम्हारे साथ खुल कर हंसनाबोलना था. जो हुआ उस का उसे आज तक अफसोस है क्योंकि वह रितु और तुम्हें बहुत पसंद करती थी.’’
‘‘मैं पुरानी बातों को याद नहीं करना चाहता हूं. मुझे रोहित से कोई शिकायत नहीं पर नीरजा से मिलनाजुलना अच्छा नहीं लगता है. इसीलिए हम उन के घर अगले संडे को नहीं जाएंगे,’’ अपना फैसला बताते हुए मैं चिढ़ सा उठा.
‘‘समीर, रोहित तुम्हें अपना बहुत दोस्त समझाने लगा है. तुम तो जानते ही हो कि वह आजकल बहुत तनाव में जी रहा है. अपने कुछ नजदीकी दोस्तों के हाथों उस ने बिजनैस में तगड़ा धोखा खाया है. नीरजा का मानना है कि रोहित को डिप्रैशन में जाने से बचाने में तुम से हुई दोस्ती बहुत अहम भूमिका निभा रही है. इस के लिए उस ने मेरे हाथ तुम्हें दिल से धन्यवाद भिजवाया है,’’ शिखा अपनी सहेली की तरफदारी करने की भरपूर कोशिश कर रही थी.
‘‘वह सब ठीक है, पर मुझे इन लोगों से कैसे भी संबंध नहीं रखने हैं,’’ मैं ने अपना फैसला फिर से दोहरा दिया.
‘‘लेकिन ऐसा करना तो गलत बात होगी समीर,’’ वह भावुक हो उठी, ‘‘मुझे एक बात सचसच बताओगे.’’
‘‘पूछो,’’ मैं तनाव से भर उठा.
‘‘क्या तुम्हें इस बात का डर सता रहा है कि कहीं नीरजा का हमारे यहां आनाजाना और तुम्हारे साथ खूब खुल कर हंसनाबोलना हमारे बीच गलतफहमी न पैदा करा दे.’’
‘‘क्या ऐसा होना तुम्हें नामुमकिन लगता है?’’ मैं ने चुभते लहजे में पूछा.
‘‘बिलकुल नामुमकिन लगता है. अरे, मुझे तुम्हारे ऊपर पूरा विश्वास है. हमारे बीच प्यार की नींव इतनी कमजोर नहीं है जो नीरजा के तुम्हारे साथ हंसीमजाक करने से डगमगा जाएगी. तुम इस डर को अपने मन से निकाल दो. मैं कभी रितु की तरह गलतफहमी का शिकार नहीं बनूंगी,’’ उस ने मुझे आश्वस्त करना चाहा.
मैं ने शिखा की आंखों में गहराई से झंका. वहां मुझे अपने लिए प्यार का समुद्र लहराता नजर आया. एक बार को तो मेरा मन डगमगाया पर फिर मैं ने अपना फैसला बदलने का विचार झटके से त्याग दिया.
‘‘मैं किसी तरह का रिस्क नहीं लूंगा, शिखा. हम नीरजा और रोेहित से अच्छे संबंध नहीं बनाएंगे और इस मामले में मैं किसी तरह की दलील नहीं सुनना चाहता हूं,’’ अपना फैसला एक बार फिर से दोहराने के बाद मैं उठा और बैडरूम से निकल कर ड्राइंगरूम में चला आया.
मुझे मालूम है कि शिखा को इस मामले में मेरा अडि़यल रुख बिलकुल समझ में नहीं आ रहा होगा, पर मैं ने यह फैसला बहुत सोचसमझ कर किया है. शिखा को यह असलियत बताने की हिम्मत मेरे अंदर नहीं है कि वर्षों पहले रितु से मेरा प्रेम संबंध मेरी गलती के कारण टूटा था. नीरजा के साथ अपने खुल कर हंसनेबोलने का रितु ने नहीं बल्कि मैं ने गलत अर्थ लगाया था. मैं ने रितु को प्यार में धोखा दे कर नीरजा का प्रेमी बनने की कोशिश करी थी क्योंकि वह रितु से ज्यादा खूबसूरत और आकर्षक थी.
सच यही है कि नीरजा के प्रति मेरा दिल आज भी वैसा ही जबरदस्त आकर्षण महसूस करता है. मुझे पता है कि अगर हम भविष्य में मिलते रहे तो मैं फिर से फिसल जाऊंगा और उस स्थिति की कल्पना कर के ही मेरा मन कांप उठता है. अपनी भूल को दोहरा कर मैं शिखा की नजरों में गिर कर उस के प्यार को कभी नहीं खोना चाहूंगा.
मुझे मालूम है कि नीरजा और रोहित की दोस्ती को ठुकरा कर मैं ने सही कदम उठाया है. बाद में बुरी तरह पछताने के बजाय यह बेहतर है कि मैं अभी इस मसले में अडि़यल रुख अपना कर शिखा, रोहित व नीरजा की नजरों में बुरा बन जाऊं.
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