वनराज के खिलाफ जाकर अनुज को पार्टनर बनाएगी Anupama, लेकिन नई करेगी दोबारा प्यार

सीरियल अनुपमा में वनराज और बा एक बार फिर साथ आ गए हैं, जिसके चलते दोनों अनुपमा और अनुज कपाड़ियां संग हुई डील पर बवाल शुरु हो गया है. इसी के चलते अपकमिंग एपिसोड में अनुपमा एक बड़ा फैसला लेने वाली है, जिसका अंदाजा शो के नए प्रोमो से लगाया जा सकता है. आइए आपको बताते हैं क्या होगा शो में आगे…

अनुपमा रखेगी शर्त

 

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हाल ही में सीरियल अनुपमा का मेकर्स ने नया प्रोमो रिलीज किया है, जिसमें अनुपमा, अनुज संग पार्टनरशिप के लिए हां कहती नजर आ रही हैं. दरअसल, डील साइन करने से पहले वह अनुज के सामने एक शर्त रखेगी, जिसमें अनुपमा, अनुज से कह रही है कि यह सिर्फ पार्टनरशिप और दोस्ती है और इससे ज्यादा कुछ नहीं. वहीं अनुज इस बात पर मुस्कुराते हुए सहमत होता दिख रहा है और अनुपमा के साथ उनकी डील होने पर हाथ मिला रहा है.

 

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वनराज को खिलाएगी मिठाई

अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि जहां एक तरफ अनुपमा, अनुज कपाड़िया डील मंजूर होने की खुशी में मिठाई देकर आएगी तो वहीं वह वनराज समेत पूरे शाह परिवार को भी मिठाई खिलाएगी. हालांकि वनराज इसकी वजह पूछेगा , जिसके जवाब में अनुपमा पूरे परिवार को डील पक्की होने की बात बताएगी, जिसे सुनकर सभी हैरान हो जाएंगे. वहीं अनुज पूरे स्टाफ को अनुपमा से मिलवाएगा.

 

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अनुपमा के आगे आई थी मुसीबत

अब तक आपने देखा कि अनुज कपाड़ियां, वनराज और काव्या की बजाय अनुपमा को पार्टनरशिप का प्रपोजल देता है, जिसे सुनकर सभी चौंक जाते हैं. वहीं अनुज के जाने के बाद ­वनराज, अनुपमा और अनुज की दोस्ती पर सवाल उठाते हुए उसे डील को मना करने के लिए कहता है, जिसके जवाब में अनुपमा कहती है कि अब वो उसकी पत्नी नही है तो वह उसकी बातें नहीं सुनेगी. वहीं इस मामले में बा भी वनराज का साथ देंगी, जिसके चलते अनुपमा हैरान रह जाएगी.

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उत्तर प्रदेश में पेप्सिको इण्डिया फूड्स प्लांट्स

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर आयोजित एक कार्यक्रम में पेप्सिको इण्डिया कोसी कलां मथुरा फूड्स प्लाण्ट का वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया.

मुख्यमंत्री जी ने इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार की सोच उसकी कार्य पद्धति में दिखाई देती है. सरकार की सकारात्मक सोच से निवेश बढ़ता है. निवेश से रोजगार सृजन होता है, जिससे आत्मनिर्भरता व स्वावलम्बन प्राप्त करने में मदद मिलती है. पेप्सिको द्वारा कोसी कलां में स्थापित इकाई इसी सकारात्मक सोच का परिणाम है. उन्हांेने कहा कि प्रधानमंत्री जी द्वारा कल 14 सितम्बर, 2021 को जनपद अलीगढ़ में उत्तर प्रदेश डिफेंस इण्डस्ट्रियल काॅरिडोर के अलीगढ़ नोड का शुभारम्भ किया गया था. इससे 1,250 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को जमीनी धरातल पर उतारने की कार्यवाही सम्पन्न हुई है. श्रीकृष्ण की पावन भूमि मथुरा के कोसी कलां में 800 करोड़ रुपए से अधिक की इस यूनिट का उद्घाटन सम्पन्न हुआ.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि ब्रज भूमि के किसानों की वर्षाें से मांग थी कि उनके क्षेत्र में खाद्य प्रसंस्करण की अत्याधुनिक इकाइयां स्थापित हों. प्रदेश सरकार की औद्योगिक नीति के अन्तर्गत पेप्सिको ने कोसी कलां में निवेश किया है. आज पेप्सिको द्वारा स्थापित इकाई का उद्घाटन किया गया है. सरकार व निवेशक जब मिलकर सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ंेगे, तो इसके सकारात्मक परिणाम इसी रूप में सामने आएंगे. उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार और पेप्सिको की साझेदारी उन्नति, विश्वास तथा स्वावलम्बन की साझेदारी होने के साथ ही, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्पों को आगे बढ़ाने की भी साझेदारी होगी.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए बनायी गयी नीतियों के तहत निवेशकों द्वारा राज्य में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है. यह निवेश किसानों के जीवन में व्यापक परिवर्तन का आधार बन रहा है. साथ ही, इससे नौजवानों के लिए रोजगार का सृजन हो रहा है. 04 वर्ष पूर्व प्रदेश में आलू उत्पादक किसान संकट में था. ऐसी स्थिति में आलू उत्पादक किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाने के लिए राज्य सरकार ने आलू का न्यून्तम समर्थन मूल्य घोषित किया, जिससे किसानों के सामने असहाय जैसी स्थिति पैदा न हो और उन्हें आलू का उचित मूल्य प्राप्त हो सके. पेप्सिको इण्डिया द्वारा स्थापित प्लाण्ट से इस क्षेत्र के किसानों को लाभ मिलेगा.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उन्हें अवगत कराया गया कि कोसी कलां में स्थापित फूड्स प्लाण्ट यूनिट के माध्यम से डेढ़ लाख मीट्रिक टन आलू का प्रति वर्ष प्रसंस्करण किया जाएगा.

पेप्सिको इण्डिया किसान भाइयों के साथ पहले से ही साझेदारी करते हुए उनके उत्पाद का उचित मूल्य प्रदान करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि कोसी कलां में स्थापित प्लाण्ट खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में आलू उत्पादक किसानों की दृष्टि से मील का पत्थर साबित होगा. इस खाद्य प्रसंस्करण इकाई से किसानों को अपने उत्पादों को बेचने के लिए एक मंच मिला है.

मुख्यमंत्री जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा खाद्यान्न उत्पादक राज्य है. प्रदेश मंे पर्याप्त जल संसाधन एवं उर्वरा भूमि मौजूद है. प्रदेश में किसानों की बड़ी संख्या एवं देश का सबसे बड़ा बाजार है. प्रदेश में 24 करोड़ जनता निवास करती है. साथ ही, यहां पर निवेश के लिए अनुकूल वातावरण भी है. ब्रज क्षेत्र में आगरा एवं अलीगढ़ मण्डलों के 08 जनपदों में बड़े पैमाने पर आलू उत्पादन होता है. इस यूनिट की स्थापना इस क्षेत्र के आलू उत्पादक किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ाने में सहायक होगी.

औद्योगिक विकास मंत्री श्री सतीश महाना ने कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में प्रदेश में औद्योगिक विकास के नये युग की शुरुआत हुई है. सरकार, किसानों और उद्यमियों के बीच विश्वास पैदा हुआ है. प्रदेश सरकार के सहयोग से पेप्सिको द्वारा कोसी कलां में दो वर्ष से भी कम समय में खाद्य प्रंसस्करण इकाई की स्थापना की गयी है. यहां प्रति वर्ष डेढ़ लाख टन आलू का प्रसंस्करण किया जाएगा. प्लाण्ट की स्थापना से 1500 लोगों को प्रत्यक्ष तथा बड़ी संख्या में लोगों को परोक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे.

दुग्ध विकास मंत्री श्री लक्ष्मी नारायण चैधरी ने कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से सम्बोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी के मार्गदर्शन में जनपद मथुरा में पर्यटन विकास, बिजली, सड़क आदि विभिन्न विकास कार्य सम्पन्न कराये गये हैं. मुख्यमंत्री जी के प्रयास से प्रदेश में पेप्सिको की इकाई स्थापित हुई है. इससे किसानों को लाभ होगा. साथ ही, युवाओं को रोजगार के अवसर भी सुलभ होंगे.

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रेसिडेण्ट पेप्सिको इण्डिया श्री अहमद अलशेख ने कहा कि मुख्यमंत्री जी द्वारा पेप्सिको इण्डिया के कोसी कलां, मथुरा फूड्स प्लाण्ट का उद्घाटन पेप्सिको के लिए गर्व का विषय है. राज्य सरकार के सहयोग से दो वर्ष से भी कम समय में इस प्लाण्ट को स्थापित कर प्रारम्भ कराया जा रहा है. यह पेप्सिको इण्डिया का भारत में स्थापित सबसे बड़ा खाद्य प्रसंस्करण प्लाण्ट है. सीईओ एएमईएसए पेप्सिको श्री यूजीन विलेम्सन ने भी कार्यक्रम को वर्चुअल माध्यम से सम्बोधित किया. कार्यक्रम के दौरान पेप्सिको द्वारा निर्मित एक लघु फिल्म ‘उन्नति की साझेदारी’ भी प्रदर्शित की गयी.

इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री आरकेतिवारी, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त श्री संजीव मित्तल, अपर मुख्य सचिव सूचना एवं एमएसएमई श्री नवनीत सहगल, अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास श्री अरविन्द कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

निजामों का शहर हैदराबाद, अगर जाएं तो इन जगहों पर जरूर घूमें

तेलंगाना तथा आन्ध्रप्रदेश की राजधानी है हैदराबाद. जिसे निजामों का शहर भी कहा जाता है. इसे मुहम्मद कुली कुतुबशाह ने बनवाया था और अपनी प्रेमिका भागमती के नाम पर हैदराबाद का नाम ‘भाग्य नगर’ रखा था. जब भागमती का नाम ‘हैदरी बेगम’ पड़ा तो भाग्य नगर नाम बदलकर ‘हैदराबाद’ हो गया. तब से हैदराबाद को इसी नाम से जाना जाता है.

हैदराबाद को बेहतरीन ‘निजामों का शहर’ तथा ‘मोतियों का शहर’ भी कहा जाता है. हैदराबाद की खूबसूरती चारों तरफ खड़ी पहाड़ियों और उनके बीचो-बीच बहती मूसा नदी में देखी जा सकती है. आइए, हम आपको बताते हैं हैदराबाद की कुछ खूबसूरत जगहों के बारे में.

चारमीनार

चारमीनार का निर्माण 1591 में नवाब कुली कुतुबशाह ने करवाया था. कहा जाता है हैदराबाद में भयंकर महामारी प्लेग पर विजय पाने की खुशी में नवाब कुली कुतुबशाह ने इसे बनवाया था. इस मीनार की ऊंचाई 180 फुट है.

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मक्का मस्जिद

मक्का मस्जिद यह मस्जिद इस्लामिक कला का बेहद खूबसूरत और बेजोड़ नमूना है. चारमीनार के कुछ ही दूरी पर है. यह मक्का मस्जिद जिसे पर्यटक आसानी से देख सकती हैं. इस मस्जिद की खासियत यह है कि इसमें 10 हजार एक साथ नमाज अदा कर सकते हैं.

गोलकुंडा का किला

गोलकुंडा का किला गोलकुंडा कभी हीरों की खानों के लिए मशहूर है. 11 किलोमीटर के एरिये में फैले इस किले को मजबूत ग्रेनाइट दीवार जो किले को चारों ओर से घेरे हुए है. इसमें आठ प्रवेश द्वार हैं. इस किले की खासियत यह है कि यहां के मुख्य प्रवेश द्वार पर गुंबद के नीचे खड़े होकर ताली बजाने से उसकी आवाज को किले के सबसे ऊपरी हिस्से तक सुना जा सकता है.

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हुसैन सागर झील

हुसैन सागर झील इस झील के बीचो-बीच महात्मा बुद्ध की विशाल प्रतिमा बेहद खूबसूरत है. इस झील का निर्माण हजरत हुसैन शाह वली ने इब्राहिम कुतुबशाह के काल में करवाया गया था.

बिड़ला तारागृह तथा विज्ञान संग्रहालय

बिड़ला तारागृह तथा विज्ञान संग्रहालय बिड़ला तारा गृह पूरे देश के ताराग्रहों में से एक हैं. यह तारागृह हिंदी,अंग्रेजी और तेलुगु में स्काई शो आयोजित करता है.

नेहरू चिड़ियाघर

नेहरू चिड़ियाघर नेहरू चिड़ियाघर देश का ही नहीं बल्कि पूरे एशिया का सबसे बड़े चिड़ियाघरों में से एक है. यहां आप लायन सफारी तथा सफेद शेर लुफ्त उठा सकती हैं.

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कैसे पहुंचे

राष्ट्रीय राजमार्ग 2 गया से होकर गुजरता है, इस मार्ग का काम अभी चल रहा है, इसके प्रोजेक्ट को गोल्ड न क्वाहड्रिलैट्ररल प्रोजेक्ट कहा गया है. जो गया शहर से 30 किमी. की दूरी पर है. इस प्रकार, गया कोलकाता, वाराणसी, इलाहाबाद, कानपुर और दिल्ली आदि से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. गया में रेलवे स्टेाशन स्थित है. जहां से देश के कई हिस्सों जैसे कोलकाता, वाराणसी, इलाहाबाद, मुम्बई आदि के लिए महत्वसपूर्ण ब्रौड गेज मार्ग की ट्रेन मिल जाती है. गया, भारत के कई शहरों व राज्यों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है.

चखना न भूलें स्ट्रीट फूड

हैदराबादी बिरयानी के अलावा आप हलीम, फिरनी बोटी कबाब, मिर्ची का सालन ट्राई कर सकती हैं.

न बढ़े भाई-बहनों में जलन

सगे भाईबहनों के बीच ईर्ष्या और प्रतिद्वंद्विता का भाव यानी एकदूसरे से बेहतर करने की प्रतिस्पर्धा या होड़, जिसे सिबलिंग जेलेसी कहते हैं, में कुछ भी गलत या अजीबोगरीब नहीं है. जब किन्हीं भी 2 लोगों के बीच यह सहज और स्वाभाविक भाव है, तो फिर सगे भाईबहन इस से अछूते कैसे रह सकते हैं? लेकिन जब यह प्रतिस्पर्धा उग्र रूप धारण कर ईर्ष्या में परिवर्तित होने लगती है और सगे भाईबहन एकदूसरे का काम बिगाड़ने और नीचा दिखाने के मौके तलाशने लगते हैं, तो यह निश्चित रूप से मातापिता के लिए चिंता का विषय बन जाता है. अगर हम अपने आसपास झांक कर देखें तो हमें बहुत से ऐसे उदाहरण मिल जाएंगे, जिन में सगे भाईबहनों ने ईर्ष्या के चलते एकदूसरे पर जानलेवा हमले तक किए हैं. कुछ नामीगिरामी परिवारों के झगड़े तो घर की दहलीज लांघ कर सड़कों तक पहुंच जाते हैं.

हमारे समक्ष प्रतिस्पर्धा और ईर्ष्या का ताजा उदाहरण हैं दिवंगत धीरूभाई अंबानी के पुत्र मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी. विश्व के 10 अमीर व्यक्तियों की सूची में 5वें और छठे नंबर पर विराजमान इन भाइयों ने स्वयं को दूसरे से श्रेष्ठ साबित करने की जिद में न केवल सार्वजनिक रूप से मीडिया के सामने एकदूसरे पर आरोपप्रत्यारोप लगाए, बल्कि अपने घरेलू और व्यावसायिक झगड़ों को कोर्ट तक ले जाने में भी नहीं हिचकिचाए. अनिल अंबानी ने तो प्राकृतिक गैस विवाद के मामले में मीडिया के समक्ष भारत सरकार के पैट्रोलियम मंत्रालय पर ही सीधेसीधे आरोप लगाया था कि पैट्रोलियम मंत्रालय उन के भाई मुकेश अंबानी की तरफदारी कर उसे निजी लाभ पहुंचा रहा है. उन के इस बयान पर तत्कालीन पैट्रोलियम मंत्री मुरली देओरा ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि मुझे यह देख कर बहुत आश्चर्य हो रहा है कि ये दोनों भाई सार्वजनिक रूप से उस चीज के लिए लड़ रहे हैं, जो उन की है ही नहीं.

उन की मां कोकिलाबेन अंबानी ने शायद दोनों भाइयों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ईर्ष्या की भावना को भांप लिया था, इसीलिए उन्होंने पति की मृत्यु के बाद उन के व्यवसाय को दोनों भाइयों में बांट दिया था. लेकिन इस के बावजूद ये दोनों भाई आपसी झगड़ों के लिए निरंतर चर्चा में रहते हैं. एक अन्य खबर के अनुसार, अनिल अंबानी अपने नए घर को 150 मीटर ऊंचा बनाना चाहते हैं (उन के पास स्वीकृति सिर्फ 66 मीटर ऊंचा बनाने की है) क्योंकि उन के भाई मुकेश अंबानी का घर 170 मीटर ऊंचा है. जानीमानी लेखिका शोभा डे ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा था कि यह और कुछ नहीं सिबलिंग राइवलरी है.

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‘सिबलिंग राइवलरी: सैवन सिंपल सौल्यूशंस’ पुस्तक की लेखिका करेन दोहर्टी, जिन के अपने 4 बच्चे हैं, कहती हैं, ‘‘सिबलिंग राइवलरी यानी भाईबहनों के मन में एकदूसरे के लिए ईर्ष्या का भाव एक ऐसा जख्म है, जिस का उपचार न किया जाए तो वह नासूर बन जाता है और रिश्तों में इतनी कड़वाहट पैदा कर देता है कि हम अपने सगे भाईबहनों की तरक्की को भी सहन नहीं कर पाते हैं. उलटे उन की असफलताओं से हमें खुशी मिलती है.’’

प्रतिस्पर्धा की अहमियत

बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए उन के बीच प्रतिस्पर्धा का भाव जरूरी है. छोटे बच्चों में यह प्रतिस्पर्धा उन्हें एकदूसरे के करीब लाती है, एकदूसरे से बेहतर करने की प्रेरणा देती है, जिस से बच्चों के सर्वांगीण विकास में सहायता मिलती है. लेकिन जैसेजैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं, यह प्रतिस्पर्धा ईर्ष्या में परिवर्तित होने लगती है और बच्चे एकदूसरे से आगे निकलने की होड़ में एकदूसरे को नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं या फिर एकदूसरे के काम बिगाड़ते हैं. यह बहुत नाजुक समय होता है, जिस में बच्चों को कदमकदम पर मार्गदर्शन की जरूरत होती है. बच्चों की नकारात्मक सोच को नियंत्रित कर सही दिशा प्रदान करना ही हर मातापिता का कर्तव्य है.

हरकतों पर नजर रखें

मातापिता को बड़े होते बच्चों की हर छोटीबड़ी हरकतों पर नजर रखनी चाहिए. अगर बच्चों की बातों में तनिक भी ईर्ष्या का भाव झलकता है, तो प्यार से समझाबुझा कर उन के बीच पनप रही ईर्ष्या की भावना को उसी समय दबा देना चाहिए. इस के लिए सब से जरूरी है कि मातापिता बच्चों में तुलना कभी न करें, न ही एक के मुकाबले दूसरे को ज्यादा होशियार, समझदार सिद्ध करने का प्रयास करें. इस से दूसरे बच्चे का मन आहत होता है और उस के मन में हीनभावना पनपने लगती है, जो आगे चल कर ईर्ष्या का रूप धारण कर लेती है.

बच्चों को समय दें

मातापिता सभी बच्चों को अधिक से अधिक समय दें. सभी के साथ एकसाथ बैठें, अलगअलग नहीं. अगर मातापिता बच्चों को पूरा समय नहीं देते, तो वे खुद को असहाय सा पाते हैं और उन का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए अजीबोगरीब हरकतें करते हैं. अगर वे एक बच्चे के साथ अधिक समय व्यतीत करते हैं, तो दूसरा बच्चा निश्चित रूप से आहत होता है और उन का ध्यान आकर्षित करने के लिए कई बार वह खुद को नुकसान भी पहुंचाता है. अगर वे दोनों बच्चों को पूरा समय देते हैं, तो एक बच्चे को थोड़ा अधिक समय देने से दूसरे बच्चे को उतना बुरा नहीं लगता. जहां मातापिता दोनों कामकाजी हैं, उन्हें बच्चों को समय देने के लिए कुछ अधिक मेहनत करनी पड़ती है. ज्यादा नहीं, तो सोने के समय बच्चों के कमरे में उन के साथ एकाध घंटा व्यतीत करें, स्कूल में क्या हुआ, सुनें. उन के साथ बिस्तर में लेटें, किस्सेकहानियां सुनेंसुनाएं, घरपरिवार की बातें करें. इस तरह वे न केवल मातापिता से बल्कि एकदूसरे से भी तन और मन से जुड़े रहेंगे.

तुलना न करें

जब मातापिता दोनों बच्चों के बीच तुलना कर एक को दूसरे से बेहतर साबित करने की कोशिश करते हैं, तो वे नहीं जानते कि अनजाने में ही वे दूसरे बच्चे के मन में पनप रही ईर्ष्या की आग को हवा दे रहे हैं. अपने बच्चे की तुलना किसी बाहर वाले बच्चे से कर उसे छोटा दिखाने की कोशिश भी न करें. ‘जब रोहन तीसरी कक्षा में था तो वह हमेशा कक्षा में प्रथम आता था, तुम्हारी रैंक इतनी नीचे क्यों है?’ ‘तुम्हें तो बात करने की तमीज तक नहीं है, रिया ने तो कभी हमें पलट कर जवाब नहीं दिया. अपनी बहन से कुछ सीखो.’ इस तरह की बातें सुन कर बच्चों में ईर्ष्या की भावना जोर पकड़ने लगती है.

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हर बच्चे की सुनें

अगर आप के बच्चे आपस में झगड़ते हैं, एकदूसरे पर चीखतेचिल्लाते हैं, तो कभी भी एक बच्चे को दोषी ठहरा कर दूसरे को डांटें या डराएंधमकाएं नहीं. दूसरे को भी अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दें. इस से उन्हें लगता है कि आप दोनों की बात को महत्त्व देते हैं. किस की गलती है, यह फैसला पूरी ईमानदारी से करें. मातापिता आमतौर पर छोटे बच्चे का साथ देते हैं और बड़े बच्चे को हमेशा पीछे हटने के लिए कहते हैं, जिस से उस का अहं आहत होता है. जहां बच्चों में अंतर कम होता है, वहां बड़ा बच्चा 2 साल की उम्र से ही बड़ा हो जाता है और छोटा 10 वर्ष की उम्र तक भी छोटा रहता है. इस से न केवल वह बिगड़ता है, बल्कि गलत काम करने से भी नहीं हिचकिचाता, क्योंकि वह जानता है कि उसे छोटे होने का फायदा मिलेगा. दूसरी तरफ मातापिता का स्नेह छोटे को ज्यादा मिलता है, यह देख कर बड़े भाई या बहन का मन आहत होता है और मातापिता व भाई या बहन के प्रति उस की सोच नकारात्मक होती चली जाती है. जब युवा बच्चे किसी विषय पर बहस कर रहे हों, तो बीच में न पड़ें. उन्हें अपनी बात कहने का और दूसरे की सुनने का मौका दें. किसी एक का पक्ष ले कर न बोलें. अगर बहस ज्यादा गरम हो जाए, तो विषय बदल कर बहस को खत्म करने के लिए कहें. जैसे, खाने का समय हो तो खाने के लिए बुला लें या फिर घूमने अथवा फिल्म देखने का प्रोग्राम बनाने के लिए कहें.

लाइलाज नहीं थाइराइड की बीमारी

40 साल की सुधा का वजन अचानक बढ़ने लगा, किसी काम में उसका मन नहीं लगता था रह-रहकर उसे घबराहट होती थी, उसने डाइट शुरू कर दिया, लेकिन उसका वजन कम नहीं हो रहा था. परेशान होकर उसने अपनी जांच करवाई और पता चला कि उसे थाइराइड है. दवाई लेने के बाद वजन और घबराहट दोनों कम हुआ. असल में थाइराइड की बीमारी महिलाओं में अधिक होती है. 10 में 8 महिलाओं को ये बीमारी होती है, लेकिन महिलाओं में इसे लेकर जागरूकता कम है. इसलिए इसे पकड़ पाने में मुश्किलें आती है और रोगी को सही इलाज समय पर नहीं मिल पाता.

इस बारें में थाइराइड एक्सपर्ट डा शशांक जोशी कहते है कि यहाँ हम हाइपोथायराइडिज्म के बारें में बात कर रहे है,क्योंकि इसमें ग्लैंड काम करना बंद कर देती है.जिसका सीधा सम्बन्ध स्ट्रेस से होता है. इतना ही नहीं इस बीमारी का सम्बन्ध हमारे औटो इम्युनिटी अर्थात सेल्फ डिस्ट्रक्सन औफ थाइराइड ग्लैंड से जुड़ा हुआ होता है, जो तनाव की वजह से बढती है. आज की महिला अधिकतर स्ट्रेस से गुजरती है, क्योंकि उन्हें घर के अलावा वर्कप्लेस के साथ भी सामंजस्य बैठाना पड़ता है जो उनके लिए आसान नहीं होता. ये सभी तनाव थाइराइड को बढ़ाने का काम करती है, क्योंकि इसके बढ़ने से एंटी बौडी तैयार होना बंद हो जाती है. इसके लक्षण कई बार पता करने मुश्किल होते है, लेकिन कुछ लक्षण निम्न है जिससे थाइराइड का पता लगाया जा सकता है,

  • मोटापे का बढ़ना,
  • थकान महसूस करना,
  • काम में मन न लगना,
  • केशों का झरना,
  • त्वचा का सूखना,
  • मूड स्विंग होना,
  • किसी बात पर चिड़चिड़ा हो जाना,
  • अधिक मासिक धर्म का होना,
  • किसी बात को भूल जाना आदि सभी इसके लक्षण है.

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ऐसा देखा गया है कि सर्दियों में थाइराइड अधिक बढ़ जाता है, इसलिए इस मौसम में रोगी को जांच के बाद नियमित दवा लेनी चाहिए. थाइराइड हार्मोन हमारे शरीर की मेटाबोलिज्म प्रक्रिया और एनर्जी को चार्ज करती रहती है, इसलिए अगर शरीर कोशिकाए सही तरह से चार्ज नहीं होगी, तो व्यक्ति सुस्त और हमेशा सोने की कोशिश करता है और ये समस्या अधिकतर ‘एक्सट्रीम क्लाइमेट’ वाले जगहों में होता है. ये बीमारी होने के बाद आयोडीन युक्त नमक लेना सबसे जरुरी होता है.

अधिकतर लोगों को जिन्हें हाइपोथायराइडिज्म की शिकायत है उनका ग्लैंड काम करना बंद कर देती है और उनकी समस्या धीरे-धीरे बढती जाती है, लेकिन दवा के नियमित सेवन से इस बीमारी से बचा जा सकता है.

थाइराइड हर उम्र के व्यक्ति को हो सकती है. जन्म से लेकर किसी भी उम्र में ये बीमारी हो सकती है. इसके होने से महिला इनफर्टिलिटी की भी शिकार हो सकती है. मोटापे के अलावा महिला ह्रदय रोग की भी शिकार हो सकती है.

कोई भी एन्द्रोक्रोनोलोजिस्ट डा.इस बीमारी का इलाज कर सकता है. इसमें मुख्यतः खून की जांच करनी पड़ती है. जिसमें टी3 टी4 और टीएसएच होता है. एक बार इसका पता लगने पर साल में दो बार खून की जांच करवाएं ताकि दवा का असर पता चलता रहे.

हाइपोथायराइडिज्म के तीन प्रकार होते हैं

-प्राइमरी, जिसमें जहाँ थाइराइड ग्लैंड में बीमारी है,

-सेकेंडरी में पिट्युटरी ग्लैंड में टीएस एच रस बनता है वहां कई बार ट्यूमर आ जाता है, जो एक बिलियन में  केवल एक व्यक्ति को ही होता है,

–  पिट्युटरी ग्लैंड,हाइपोथेलेमस के द्वारा कंट्रोल किया जाता है,जो टी आर एच बनाती है. उसे टरशियरी कहते है.

केवल टी एस एच की जांच से ही थाइराइड का पता लगाया जा सकता है. 8 से लेकर 10 तक की मात्रा होने पर डाक्टर की सलाह लेकर दवा शुरू करना जरुरी होता है. इसके साथ ही अगर कोलेस्ट्राल की मात्रा है, तो दवा शुरू कर लेनी चाहिए. इसके रिस्क फैक्टर निम्न है-

-अगर घर में किसी को थाइराइड की बीमारी हो खासकर मां, बहन या नानी तो भी अगली पीढ़ी को ये बीमारी 80 प्रतिशत होने के चांसेस होते है.

-ये वंशानुक्रम में चलती है.

-80 प्रतिशत ये महिलाओं को और 20 प्रतिशत पुरुषों को होती है.

-पुरुषों में जो अधिकतर धूम्रपान करते है, उन्हें थाइराइड हो सकता है, क्योंकि ये थाइराइड को ट्रिगर करता है.

डा. जोशी आगे कहते हैं कि लाइफस्टाइल को बदलने से थाइराइड की वजह से होने वाले मोटापे को कुछ हद तक काबू में किया जा सकता है,लेकिन थाइराइड की दवा लेना हमेशा जरुरी होता है. ये मिथ है कि मेनोपोज के बाद थाइराइड होता है. दरअसल तब ये पता चलता है कि महिला में थाइराइड है.

डाईबेटोलोजिस्ट डा.प्रदीप घाटगे कहते है कि थाइराइड के मरीज पिछले 10 सालों में दुगुनी हो चुकी है. इसमें कोई खास परिवर्तन शरीर में नहीं आने की वजह से आसानी से इसे समझना मुश्किल होता है. अगर समय पर जांच न हो पाय, तो रोगी एक्सट्रीम कोमा में चला जाता है. ये अधिकतर हाइपोथायराइडिज्म में होता है. इस लिए जब भी इसके लक्षण दिखे, तुरंत जांच करवा लेनी चाहिए.

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जिसमें रोगी का वजन कम होता जाता है, उसे हाइपरथायराइडिज्म कहते है. ये बीमारी अधिक खतरनाक होती है,क्योंकि इसमें रोगी के हार्ट पर उसका असर होता है.

थाइराइड होने पर निम्न चीजों को खाने से परहेज करें,

– पत्ता गोभी, फूल गोभी, ब्रोकोली, सोयाबीन और स्ट्राबेरी और नान वेज में क्रेबस, शेलफिश न खाएं,

– समय से खाएं, नियम से खाए.

फैशन के मामले में किसी से कम नही हैं अनुज कपाड़िया की रियल लाइफ ‘अनुपमा’

सीरियल अनुपमा इन दिनों टीआरपी चार्ट्स में धमाल मचा रहा है, जिसका श्रेय हाल ही में शो में नई एंट्री अनुपमा के खास दोस्त अनुज कपाड़िया यानी गौरव खन्ना की एंट्री के कारण हुआ है. वहीं सोशलमीडिया पर गौरव खन्ना की फोटोज वायरल हो रहे हैं, जिसमें वह अपनी रियल लाइफ अनुपमा यानी वाइफ आकांक्षा चमोला के साथ नजर आ रहे हैं.

एक्ट्रेस रह चुकीं आकांक्षा चमोला फैशन के मामले में काफी बोल्ड और खूबसूरत हैं, जिसका अंदाजा सोशलमीडिया को देखकर लगाया जा सकता है. आइए आपको दिखाते हैं उनके खूबसूरत फैशन की झलक…

हौट लुक में जीतती हैं फैंस का दिल

 

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सीरियल स्वरागिनी से सुर्खियां बटोर चुकीं एक्ट्रेस आकांक्षा चमोला काफी फैशनेबल हैं, उनका हर लुक फैंस को काफी पसंद आता है. ड्रैसेस में हौट लुक में नजर आनेवाली आकांक्षा काफी खूबसूरत लगती हैं. उनका एक से बढ़कर एक लुक फैंस के बीच वायरल होता रहता है.

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 इंडियन लुक में भी लगती हैं खूबसूरत

 

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वेस्टर्न लुक में नजर आने वाली आकांक्षा चमोला का लुक फैंस के बीच काफी पौपुलर हैं. सीरियल स्वरागिनी में परिणीता के किरदार में इंडियन लुक में नजर आती थीं, जिसमें उनके इंडियन लुक काफी सुंदर लगते थे. उनका लुक सोशलमीडिया पर काफी वायरल हुआ था.

हस्बैंड के साथ भी खूबसूरत लगता है लुक

 

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अनुपमा एक्टर गौरव खन्ना के साथ भी आकांक्षा चमोला का लुक काफी स्टाइलिश लगता है. वेस्टर्न हो या इंडियन हर लुक में वह पति के साथ कदम से कदम मिलाए नजर आती हैं. फैंस इसे काफी पसंद करते हैं.

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हौट लुक की होती हैं तारीफें

 

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आकांक्षा चमोला के सोशलमीडिया के औफिशियल अकाउंट पर हौट फोटोज को देखकर फैंस उनकी काफी तारीफें करते हैं. साथ ही सोशलमीडिया पर फोटोज वायरल होती हैं.

तेल मालिश के हैं फायदे अनेक, आप भी जानिए

बालों में आजकल कैमिकल युक्त उत्पादों का इतना ज्यादा प्रयोग किया जाता है कि वे कमजोर हो जाते हैं और शाइन नहीं करते. ऐसे में अगर बालों को स्वस्थ व मजबूत बनाए रखने के लिए तेल लगाने का सुझाव दिया जाए तो जवाब मिलता है कि तेल तो दादीनानी के जमाने में लगाया जाता था. अब भला कौन तेल लगाता है?

मगर क्या आप को पता है कि तेल बालों को घना बनाता है, उन में चमक लाता है? यही नहीं, स्कैल्प को सूखा भी नहीं होने देता और त्वचा को बैक्टीरिया और फंगल इन्फैक्शन से भी दूर रखता है. यानी तेल से बालों को पौष्टिक तत्त्व मिलते हैं. इसलिए अपनी व्यस्त दिनचर्या में से कुछ समय निकाल कर बालों की तेल से मालिश जरूर करें. नियमित रूप से अगर बालों में तेल से मालिश की जाए, तो इस के अनेक फायदे होते हैं. मसलन: 

अगर बालों की जड़ें सूखी हैं तो तेल की मालिश उन्हें ताकत देती है और नए बाल निकलने में मदद करती है.

तेल बालों को टूटने व उलझने से रोकता है, साथ ही तेल से सिर की मालिश करने से सिर का रक्तसंचार सुचारु रहता है.

बालों में सही मात्रा में तेल न लगाने से बाल दोमुंहे होने लगते हैं. पर्याप्त तेल लगाने से यह समस्या दूर हो जाती है.

मालिश से न केवल बाल स्वस्थ होते हैं, बल्कि शरीर को भी लाभ पहुंचता है. रात को अच्छी नींद आती है. दिमाग भी शांत होता है.

तेल से बालों में नमी आती है. वे मुलायम व चमकदार बनते हैं. जब भी बालों में तेल लगाएं तो इस बात का ध्यान रखें कि एक ही बार में पूरे बालों में तेल न लगाएं वरन सैक्शन बना कर तेल लगाएं. ऐसा करने से तेल स्कैल्प तक अच्छी तरह पहुंचता है.

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बालों और सिर की त्वचा के लिए हौट स्टीम बाथ लेना भी फायदेमंद होता है. गरम तेल से सिर की त्वचा की मसाज करें और इस के बाद कुनकुने पानी से भीगे तौलिए को कुछ मिनट के लिए सिर पर लपेटें. ऐसा करने से सिर की त्वचा के रोमछिद्र खुल जाते हैं और बाल चमकदार बनते हैं.

तेल बालों की ग्रोथ के लिए जरूरी है. इस की मालिश से आप के सिर की कोशिकाएं काफी सक्रिय हो जाती हैं, जिस से बाल जल्दी लंबे होते हैं.

अगर आप की घने और सिल्की बालों की चाह है तो सरसों के तेल में दही मिला कर लगाएं. इस से बाल बढ़ेंगे भी और घने भी होंगे.

रात में सोने से पहले या फिर हफ्ते में कम से कम 2 बार सिर की मालिश जरूर करें. इस से बालों को तो पोषण मिलता ही है, तनाव भी कम होता है.

कौन सा तेल फायदेमंद

आज मार्केट में कई तरह के खुशबूदार तेल उपलब्ध हैं. उन से दूर रहें. प्राकृतिक तेल से ही मालिश करें. सिर की मसाज के लिए जैतून का तेल, नारियल तेल, तिल का तेल, बादाम तेल, भृंगराज तेल, नीम का तेल, जोजोबा, चमेली व पेपरमिंट तेल और मेहंदी का तेल आदि अच्छे विकल्प हैं. यदि आप नियिमित हेयरकलर कराती हैं तो जोजोबा का तेल आप के लिए बेहतरीन विकल्प है. इस से क्षतिग्रस्त रंगीन और रूखे बालों की रिपेयर होती है.

अपने बालों की जरूरत के अनुसार तेल का चुनाव ऐसे करें:

नौर्मल हेयर: इस तरह के बालों की कुदरती चमक बनाए रखने के लिए इन की आंवले या बादाम के तेल से मसाज करें.

ड्राई हेयर: रूखे बालों के लिए नारियल, तिल, सरसों और बादाम का तेल उपयुक्त है. सप्ताह में एक बार नारियल के दूध से बालों को धोना भी फायदेमंद है.

औयली हेयर: एक खास तरह का सीबम निकलने की वजह से बाल तैलीय दिखते हैं. ऐसे बालों में तिल या जैतून का तेल लगाने से फायदा मिलता है.

डैंड्रफ हेयर: स्कैल्प में रूसी हो जाने के कारण बालों की ग्रोथ भी रूक जाती है और वे कमजोर भी हो जाते हैं. इस समस्या से बचने के लिए टीट्री औयल और भृंगराज तेल का इस्तेमाल करें.

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कैसे करें मसाज: जब सिर की त्वचा सेहतमंद रहेगी, तभी बाल मजबूत और घने होंगे. स्वस्थ बालों के लिए सब से जरूरी है कि मसाज सही तरीके से की जाए. बालों में तेल लगाने से पहले उसे हलका कुनकुना कर लें. इस के बाद पोरों से स्कैल्प की धीरेधीरे मसाज करें. इस से स्कैल्प में रक्तसंचार बढ़ता है और स्कैल्प के बंद छिद्र खुल जाते हैं. बालों में तेल लगाते वक्त उंगलियों का मूवमैंट महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. मसाज करते समय उंगलियों में प्रैशर दें और पूरे सिर की त्वचा में रोटेट करें. आप चाहें तो रात में तेल से अच्छी तरह मालिश कर के अगले दिन शैंपू कर सकती हैं. अगर आप रात भर तेल बालों में नहीं लगाए रखना चाहती हैं, तो सब से आसान तरीका यह है कि शैंपू करने से पहले अच्छी तरह मसाज करें और 1 घंटे के लिए छोड़ दें. इस के बाद शैंपू से बालों को धो लें.

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जनसंख्या नियंत्रण और समाज

जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने वाली कट्टरपंथी हिंदू सोच की सरकारों को असल में औरतों के दुख की चिंता ही नहीं है. जनसंख्या नियंत्रण के नाम पर वे न केवल औरतों का यौन सुख का हक छीन रही हैं, अगर गर्भ ठहर जाए तो उन्हें अपराधी की सी श्रेणी में डाल रही हैं. तीसरा बच्चा नाजायज है, अपराधी है, समाज विरोधी है, राज्य पर बोझ है जैसे शब्दों से चाहे जनसंख्या नियंत्रण कानून न भर हों, पर ये शब्द हैं जो केवल उन्हें दिखेंगे जो भुगतेंगी, सचिवालयों और मंत्रालयों में बैठने वालों को नहीं.

फ्रांस का उदाहरण लें. उस की प्रति व्यक्ति आय भारत की महज 2000 डौलर प्रतिवर्ष के मुकाबले 60,000 डौलर प्रति वर्ष है यानि वहां के लोग 30 गुना अमीर हैं. फिर भी वहां बहुत गर्भ ठहर जाते हैं क्योंकि लड़कियां गर्भनिरोधक नहीं खरीद पातीं. अब फ्रांस सरकार ने 25 वर्ष की आयु तक डाक्टर की फीस, दवाएं व गर्भपात सब फ्री कर दिया है. फ्रांस सरकार का मानना है कि यह मामला लडक़ी की इच्छा का है कि वह कब सेक्स सुख ले और कब बच्चा पैदा करे. सरकार को लडक़ी की इच्छा का आदर करना चाहिए.

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हमारे यहां लडक़ी को पहले ही दिन से बोझ माना जाता है. उस के सारे हक बनावटी हैं. दिखाऊ हैं. उसे धर्मकर्म में अकेला जाता है जहां और कुछ नहीं तो सेक्स सुख अवश्य मिल जाता है चाहे पति हो या न हो औरतें घरों में सेक्स सुख से वंचित रहें इसलिए ङ्क्षहदूमुसलिम के नाम पर उन के जननांग और कोख पर आदेशों के ताले लगाए गए हैं, उन्हें कहां गया है कि 2 बच्चों के बाद या तो ताला या सरकारी समाज से बाहर, न नौकरी मिलेगी न राशन, न चुनाव लडऩे की सुविधा. कहने को यह बढ़ती जनसंख्या को रोकने के लिए पर असल में यह भ्रामक सोच पर आधारित है जो नरेंद्र मोदी ने जम कर गुजरात विधानसभा चुनावों में कही थी कि एक समाज 5 से 25 होता है और दूसरा 2 पर संतोष करता है.

मुसलमानों और दलितों के लिए गर्भ नियंत्रण कठिन है, मंहगा है यह इस कानून में सुलझाना नहीं गया है, सुविधाएं छीनने का खौफ दर्शाया गया है. आज यदि गर्भ निरोधक सस्ते या मुफ्त हो और गर्भपात्र जब चाहों जहां चाहो मुफ्त में करा लो तो नैतिकता नहीं खत्म होगी औरतों के अधिकारों की स्थापना होगी. हर युवती, चाहे विवाहित हो या अविवाहित अपने शरीर का कैसे इस्तेमाल करे, उस का अपना मामला है और वह खुद बेकार का गर्भ नहीं चाहती. आज की कामकाजी औरत बच्चों को चाहती है पर सीमा में. इस के लिए कानून चाहिए तो सुविधाएं देने वाले पर उस में खर्च होता है. सरकार तो ऐसा आदेश देना जानती है जिस से नागरिकों के हाथ पैर बंंधे, अब जननांग भी बांध रहे हैं.

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फैमिली के लिए बनाएं कौर्न कोन

आपने कौर्न की कई तरह की रेसिपी ट्राय की है. लेकिन क्या आप कौर्न कोन की रेसिपी ट्राय की है, जिसे आप आसानी से शाम के नाश्ते में बना सकते हैं. आइए आपको बताते हैं कौर्न कोन की आसान रेसिपी…

सामग्री कोन की

– 1/2 कप मैदा

– 1 छोटा चम्मच घी

– 1/2 छोटा चम्मच अजवाइन

– कोन तलने के लिए पर्याप्त रिफाइंड औयल

– कोन बनाने का सांचा

– नमक स्वादानुसार.

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सामग्री कौर्न की

– 1/2 कप मक्की के दाने उबले

– 2 बड़े चम्मच हरे मटर उबले

– 1 बड़ा चम्मच टमाटर बारीक कटा

– 1 बड़ा चम्मच प्याज बारीक कटा

– 1 छोटा चम्मच मक्खन पिघला

– थोड़ी सी धनियापत्ती कटी

– थोड़े से सलादपत्ते

– चाटमसाला, लालमिर्च व नमक स्वादानुसार.

विधि

मैदे में घी, अजवाइन और नमक डाल कर पानी से पूरी लायक आटा गूंध लें. 15 मिनट ढक कर रखें फिर मोटीमोटी 2 लोइयां बनाएं और खूब बड़ी बेल लें. कांटे से गोद दें व 4 टुकड़े कर लें. प्रत्येक टुकड़े को कोन पर लपेटें और किनारों को पानी की सहायता से सील कर दें. धीमी आंच पर सारे कोन तल लें. मक्की के दानों में सारी सामग्री मिला लें. सलादपत्तों के छोटे टुकड़े कर लें. प्रत्येक कोन में थोड़ा सा सलादपत्ता लगाएं. फिर मक्की के दाने वाला मिश्रण भरें. स्पाइसी कौर्न इन कोन तैयार है. तुरंत सर्व करें.

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