महिलाओं में यह हिचकिचाहट क्यों?

महिलाएं आज भले अपनी काबिलीयत के बल पर हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिला कर चल रही हों, मगर यदि समाज में ओवरऔल कंडीशन देखी जाए तो ज्यादातर महिलाएं खुद को कतार में पीछे खड़ा पाती हैं. वे आगे बढ़ सकती हैं, पर बढ़ती नहीं. अपनी बात रखने या अपनी इच्छा का काम करने में हिचकिचाती हैं.

हाल ही में पौंड्स द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक महिलाएं लंबे समय से खुद को रोक रही हैं. 10 में से 9 महिलाएं कहती हैं कि वे अपनी इच्छा की बात कहने या इच्छा का काम करने से खुद को रोकती हैं.

खुद को रोकने के कारण

– 59% महिलाओं को जज किए जाने का डर

होता है.

– 58% महिलाएं इस बारे में अनिश्चित रहती हैं कि दूसरे क्या प्रतिक्रिया देंगे.

– 10 में से 5 महिलाओं को यह चिंता भी होती है कि वे जो कहेंगी उस से दूसरे उन के बारे में नकारात्मक बात सोचने लगेंगे.

जाहिर है कि मन का यह डर कि समाज या परिवार क्या सोचेगा, क्या प्रतिक्रिया देगा, महिलाओं को अपने मन का काम करने से रोकता है.

खुद को रोकने वाले इस संकोच के अनेक रूप और नाम हैं. इसे भले ही महिलाएं अंदर की आवाज कहें पर वास्तव में यह एक तरह की नकारात्मक सोच है. यह सोच महिलाओं के आगे बढ़ने के मार्ग की सब से बड़ी बाधा है. यह सोच रातोंरात जन्म नहीं लेती, बल्कि सालों से समाज द्वारा किए जा रहे ब्रेनवाश और समाज के तथाकथित परंपरावाद नियमों में जकड़े जाने और यह बताए जाने का परिणाम है कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं. नतीजा यह होता है कि महिलाएं अपनी इच्छा का काम करने का हौसला ही नहीं जुटा पातीं.

लगभग आधी यानी 47% महिलाएं बड़े समूह में प्रश्न पूछने में संकोच करती हैं. इसी तरह 10 में से 4 महिलाएं यानी 40% बौस को न कहने से खुद को रोकती हैं.

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व्यक्तिगत जीवन में 10 में से 4 महिलाएं यानी 40% बाहर जा कर अपने बौयफ्रैंड के साथ रहने से खुद को रोकती हैं, क्योंकि उन्हें डर होता है कि दूसरे लोग इस पर न जाने क्या प्रतिक्रिया देंगे.

खुद को क्यों रोकती हैं महिलाएं

बहुत सी औरतों को यह विश्वास नहीं होता है कि अगर वे बड़े समूह में कोई प्रश्न पूछती हैं तो वह काम का होगा भी या नहीं. उन्हें डर रहता है कि कहीं उन का मजाक न बन जाए.

कई महिलाओं का कहना होता है कि वे सोचने में बहुत ज्यादा समय लेती हैं, जिस से काम करने का अवसर हाथ से निकल जाता है. उन्हें लगता है कि वे जो कुछ भी कहेंगी उन के लिए उन्हें जज किया जा सकता है, दूसरों के सामने छवि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

यह सर्वे स्वतंत्र शोध कंपनी, इप्सोस द्वारा एक सैल्फ एडमिनिस्टर्ड औनलाइन सर्वे द्वारा किया गया. यह सर्वे भारत में 18 से 35 साल की महिलाओं के बीच मुंबई, चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता, बैंगलुरु, चंडीगढ़, लखनऊ, पुणे और मदुरई में किया गया.

सच तो यह है कि कभी कपड़ों के आधार पर, कभी उन के व्यवहार को देख कर या फिर लड़कों से बात करता देख अथवा किसी और तरह से समाज हर पल उन्हें जज करता रहता है. बिंदास लड़कियां तो ऐसे लोगों की परवाह नहीं करतीं, मगर सामान्य लड़कियों के कदमों पर हमेशा डर बेडि़यां डाले रखता है. कुछ भी करने से पहले उन के दिल में खौफ पैदा हो जाता है कि पता नहीं लोग कैसे जज करें, किस नजर से देखें.

कितने अफसोस की बात है कि 10वीं और 12वीं कक्षा के रिजल्ट के समय समाचारों की सुर्खियों में लड़कियां ही छाई रहती हैं. स्कूलकालेज में अकसर वे ही टौप करती हैं. मगर जब बात नौकरी और सैलरी की आती है, तो वे पीछे हो जाती हैं. अपना हक भी बड़ी सहजता से छोड़ देती हैं.

औनलाइन कैरियर ऐंड रिक्रूटमैंट सौल्यूशन प्रोवाइडर मौंस्टर इंडिया के हालिया सर्वे से पता चलता है कि देश में महिलाओं की औसत सैलरी पुरुषों के मुकाबले 27% कम है. पुरुषों की औसत सैलरी जहां क्व288.68 प्रति घंटा है, वहीं महिलाओं की क्व207.85 प्रति घंटा है. सरकारी नौकरियों को छोड़ कर यह भेदभाव हर क्षेत्र में है.

जाहिर है महिलाओं को बचपन से सिखाया जाता है कि पुरुषों की बराबरी न करो. जितना मिल जाए उस में संतोष कर लो. बाहर वालों के आगे ज्यादा बकबक न करो. किसी ऐसे पुरुष के आगे जबान न खोलो जो आप से बड़ा या सीनियर हो या जिस पर आप निर्भर करती हों. पुरुष स्वामी है और आप दासी. कभी अपने हक की बात न करो.

इसी का नतीजा है कि महिलाओं के दिलोदिमाग में यह बात इतनी गहराई से रचबस गई है कि वे अनजाने में भी इसी हिसाब से चलती हैं और कभी अपना मुंह नहीं खोलतीं.

अपनी मरजी का नहीं कर सकती महिलाएं

एक पुरुष को कौन सी नौकरी करनी है कभी भी इस बात पर अपने घर वालों या बीवी की सहमति की जरूरत नहीं होती. वह अपनी मरजी से नौकरी का चुनाव कर सकता है. उसे किसी की अनुमति की जरूरत नहीं. दूसरी तरफ लड़कियों और महिलाओं को पढ़ाई करने, काम करने, रोजगार योग्य नए कौशल सीखने के लिए अपने पिता, भाई, पति और कुछ मामलों में तो समाज तक से अनुमति लेनी पड़ती है.

उषा एक प्राइवेट कंपनी में काम करती है. उस की शादी नौसेना में काम करने वाले एक लड़के से होने वाली है. उस के काम पर उसे कोई एतराज नहीं है, लेकिन यदि वह सरकारी नौकरी करे तो.

उषा कहती है,  ‘‘मैं सरकारी नौकरी पाने के लिए प्रयास कर रही हूं, लेकिन यह आसान नहीं है. शादी से पहले अपनी प्राइवेट जौब से इस्तीफा दे दूंगी, क्योंकि यही मेरे वुड बी हसबैंड की मरजी है.’’

कमोबेश यही सोच और स्थिति सभी अविवाहित और विवाहित लड़कियों की रहती है. पहली प्राथमिकता घरपरिवार और पति होता है. नौकरी और कैरियर दूसरे स्थान पर होते हैं. हाल तो यह है कि कुछ लड़कियां महज समय बिताने के लिए काम कर लेती हैं. कैरियर में अच्छा करना, आगे बढ़ना या लीडर बनना जैसी बातें उन के फ्यूचर प्लान का हिस्सा होती ही नहीं.

ऐसा नहीं है कि महिलाओं में योग्यता की कमी होती है. अमेरिका के वाशिंगटन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का दावा है कि महिलाओं का मस्तिष्क उन के हमउम्र पुरुषों की तुलना में 3 साल जवां रहता है. इस वजह से उन का दिमाग लंबे अरसे तक तेज चलता है.

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इस अध्ययन में 20 से 84 वर्ष की 121 महिलाओं और 84 पुरुषों ने हिस्सा लिया. उन के मस्तिष्क  में ग्लूकोस और औक्सीजन के प्रवाह को मापने के लिए उन का पीईटी स्कैन किया गया. ऐसा नहीं है कि पुरुषों का दिमाग तेजी से वृद्ध होता है. दरअसल, वे दिमागी तौर पर महिलाओं से 3 साल बाद वयस्क होते हैं.

फाइनैंस संबंधी फैसलों पर निर्भरता

ऐसी महिलाएं जो निवेश के फैसले खुद करती हैं उन में उन के पति या मातापिता के प्रोत्साहन का अहम योगदान होता है, करीब 13% महिलाओं ने कहा कि उन्हें पति की मौत या तलाक की वजह से अपने निवेश के फैसले खुद लेने पड़े. 30% महिलाओं के मुताबिक वे निवेश इसलिए कर पाईं, क्योंकि उन्होंने खुद निवेश करने का फैसला लिया.

जहां तक निवेश की आवश्यकता या मकसद की बात है तो यह करीब एकजैसे ही रहे. मसलन, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, घर खरीदना, बच्चों की शादी, अच्छा लाइफस्टाइल आदि मुख्य मकसद के रूप में नजर आए. यह भी पाया गया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं का अपने बच्चों से जुड़े लक्ष्यों की ओर  झुकाव अधिक रहता है.

पुरुष जहां कार या घर खरीदने का फैसला अधिक लेते हैं वहीं महिलाओं ने ज्वैलरी, रोजमर्रा की जरूरतों जैसे टीवीफ्रिज खरीदने में ज्यादा रुचि दिखाई.

ज्यादा अच्छा यही है कि महिला और पुरुष मिल कर वित्तीय योजनाएं बनाएं और केवल वित्तीय योजनाएं ही नहीं, बल्कि जिंदगी के सारे अहम फैसलों पर महिलाओं को अपनी राय देने से नहीं बचना चाहिए, क्योंकि इस तरह वे अपने परिवार और पति के लिए बेहतर कर पाने में सक्षम होंगी.

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सोशल मीडिया पर सोच-समझ कर बनाएं दोस्त

दिल्ली में 28% महिलाओं को हर सप्ताह यौन उत्पीड़न से जुड़े कौल या मैसेज आते हैं. जो बाकि किसी भी राज्य की तुलना में सब से ज्यादा है. इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन औफ इंडिया की तरफ से जारी रिपोर्ट ‘इंटरनेट इंन इंडिया 2017’ के मुताबिक देश में 50 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं जिन में 30% यानी 14.3 करोड़ महिलाएं हैं. देश में इंटरनेट का सब से अधिक इस्तेमाल यंगस्टर्स और स्टूडेंटस करते हैं. गांवों में 100 इंटरनेट यूजर्स में 36 महिलाएं ही इंटरनेट का इस्तेमाल करती हैं. एनसीआरबी के मुताबिक 2016 में देश में महिलाओं के खिलाफ साइबर क्राइम के 930 मामले दर्ज किए गए थे.

1. दोस्ती करें सोच समझ कर

किसी ने आप को फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी और आप ने तुरंत स्वीकार कर लिया इस टेंडेंसी को छोड़ दें. दोस्ती हमेशा सोचसमझ कर करें. अनजान लोगों की रिक्वेस्ट को इग्नोर करें या डिलीट मार दें. यदि कोई पुराण दोस्त जानबूझ कर आप को परेशान कर रहा है तो पहले उसे समझाने का प्रयास करें कि आप को यह सब पसंद नहीं. मगर यदि वह न माने तो उसे तुरंत ब्लॉक कर दें. किसी को भी इतनी ढील न दें कि वह आप को परेशान कर सके.

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2. झांसे में न आएं

कभी भी अश्लील मैसेज और फेक कौल्स करने वाले व्यक्ति के झांसे में न आएं. यदि किसी वजह से आप ने उस से दोस्ती कर ली है तो भी कभी उस के बुलाने पर अकेली, सुनसान जगह या अकेले उस के घर पर मिलने न जाएं. मिलना ही है तो मॉल या मेट्रो स्टेशन जैसी खुली जगहों पर मिलें. उसे अपनी निजी बातें न बताएं और कभी भी ऐसी निजी तस्वीरें शेयर न करें जिन का वह गलत इस्तेमाल कर सके.

3. कानून का सहारा लें

फोन पर बिना मर्जी दोस्ती के लिए कहना भी अपराध है. महिलाओं के साथ होने वाले इस तरह के छेड़छाड़ या उत्पीड़न के मामलों में सामान्यतः आरोपी के खिलाफ धारा 354 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है. महिलाओं को फोन या सोशल मीडिया पर उन की इच्छा के बिना दोस्ती के लिए कहना उत्पीड़न का मामला है. इस तरह किसी की निजता में दखल देना अपराध माना जाता है. बारबार टैक्स्ट मैसेज भेजना, मिस्ड कौल करना, फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजना, महिला के स्टेटस अपडेट पर नजर रखना और सोशल मीडिया पर उस के पीछे लगे रहना आईपीसी की धारा 354 डी के तहत दंडनीय अपराध है.

4. पुलिस में शिकायत करें

महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने अब इस तरह के मामलों में साइबर क्राइम के तहत मामला दर्ज करना शुरू कर दिया है. पहले फोन पर मैसेज करने या अश्लील फोटो भेजने पर पुलिस रिपोर्ट तो दर्ज कर लेती थी लेकिन ऐसे मामलों में कार्रवाई करना मुश्किल होता था. क्यों कि ज्यादातर लड़के फेक आईडी पर सिम कार्ड ले कर इस तरह की हरकत करते हैं. ऐसे में कई बार उन्हें सबक सिखाने के लिए आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर मामले की जांच की जिम्मेदारी क्राइम ब्रांच को सौंप दी जाती है  ताकि क्राइम ब्रांच सर्विलांस की मदद से आरोपी पर कार्रवाई कर सके.

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कौलिफ्लौवर पेटी

अक्सर हम बाजार से पेटी खरीद कर खाते हैं, जो हेल्थ के लिए फायदेमंद नहीं होती, लेकिन आज हम आपको हेल्दी कौलिफ्लौवर (cauliflower patty)  रेसिपी के बारे में बताएंगे, जिसे आप अपने बच्चों को स्नैक्स में परोस सकती हैं. ये टेस्टी के साथ-साथ झटपट बनने वाली रेसिपी है.

हमें चाहिए-

-1 कप चावल पके

-1 कप गोभी कसी

-1/4 कप बादाम का पेस्ट

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-1 प्याज कटा

-1/2 चम्मच अदरक बारीक कटा

-1 हरीमिर्च कटी

-2-3 बड़े चम्मच तेल

-नमक स्वादानुसार.

बनाने का तरीका

चावलों को मिक्सी में पीस कर पेस्ट बना लें. अब इस में गोभी, बादाम का पेस्ट, हरीमिर्च, प्याज, अदरक व नमक अच्छी तरह मिला लें. आकार दे कर कटलेट बना गरम तवे पर तेल लगा दोनों तरफ से सुनहरा होने तक पका कर चटनी के साथ गरमगरम परोसें.

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जानें पीरियड्स के दौरान क्या खाएं और क्या नहीं

पीरियड्स से पहले होने वाली तकलीफ़, मूड स्विंग्स, पेट में दर्द, क्रैम्प्स (ऐंठन) जैसी समस्याएं यानी पीएमएस की तकलीफें हार्मोन्स के कम या ज़्यादा होने के कारण होती हैं. सच कहें तो हार्मोन्स में बदलाव ही महिलाओं के मासिक धर्म का प्रमुख कारण होता है. लेकिन यदि ये हार्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं तो ये तकलीफें हद से ज़्यादा बढ़ जाती है.आइये जानते हैं डायटीशियन डॉ स्नेहल अडसुले से कि पीरियड्स के समय , बाद में और पहले क्याक्या चीज़ें खानी चाहिए;

पीरियड्स के पहले

पीरियड्स के पहले यानी मेन्स्ट्रुअल सायकल के 20वें से 30 वें दिन तक आप के अंदर की ऊर्जा कम हो जाती है. आप थोड़ी उदासी भी महसूस कर सकती हैं. दिन में कई बार काफी ज़्यादा भूख महसूस हो सकती है और इसलिए इन दिनों आप के शरीर और मन के लिए सेहतमंद स्नैक्स ज़रुरी होते हैं.

रिफाइन्ड शक्कर, प्रोसेस्ड फूड और अल्कोहल का सेवन जितना संभव हो कम करें. बादाम, अखरोट, पिस्ता जैसे सूखे मेवे यानी हेल्दी फैट का सेवन करें. सलाद में तिल और सूरजमुखी के बीज शामिल करें. सेब, अमरुद, खजूर,पीच जैसे अधिक फायबर वाले फलों को अपने आहार में शामिल करें.

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हायड्रेटेड रहें. सोड़ा और मीठे पेय से परहेज़ करें. पर्याप्त मात्रा में पानी पियें. नींबू पानी में पुदिना और अदरक डाल कर पिएं. रात को सोने से पहले शरीर और मन को आराम मिले इसके लिए पेपरमिंट या कैमोमाईल चाय लें.

खून में आयरन सही मात्रा में रहने से आप का मूड और ऊर्जा का स्तर भी अच्छा रहेगा. नट्स, बीन्स (फलियां), मटर, लाल माँस और मसूर जैसे लोहयुक्त खाद्यपदार्थों का आहार में समावेश करें. पेट फूलने या सूजन जैसी समस्या से बचने के लिए नमक का सेवन कम करें.

पीरियड्स के दिनों में (पहले से सातवें दिन तक)

पीरियड्स के दिनों में खास कर पहले दो दिनों में आप को ऐसा लग सकता है जैसे सारी शक्ति चली गई हो. ऊर्जा का स्तर बेहद कम हो जाता है और आप को थकान महसूस हो सकती है. इसलिए इन दिनों ऐसा भोजन करें जिस से आप के शरीर में ऊर्जा का स्तर ऊँचा ऱखने में मदद मिले. अपने आहार में किशमिश, बादाम, मूँगफली, दूध का समावेश करें.

जंक और प्रोसेस्ड फूड में सोडियम और रिफाइन्ड कार्ब्ज प्रचुर मात्रा में होते हैं. इन्हें खाने से बचें. शीतल पेयों में रिफाइन्ड शक्कर भारी मात्रा में होती है जिस के कारण क्रैम्प्स (ऐंठन) आने की मात्रा और पीड़ा बढ़ सकती है. शीतलपेय या सोड़ा के बजाय नींबूपानी, ताजा फलों का रस या हर्बल टी लें.

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पीरियड्स के बाद के दिन (सातवें दिन से अठारहवें दिन तक)

इन दिनों आप काफी अच्छा महसूस करती हैं. इन्ही दिनों में ओव्यूलेशन होता है. ऐसे में व्यायाम के लिए ये दिन सर्वश्रेष्ठ होते हैं. अपने सलाद या सब्ज़ी में एक चम्मच फ्लैक्स या कद्दू के बीज डालें. इस से आप के शरीर में नैसर्गिक रुप से एस्ट्रोजन का स्तर ऊँचा रहेगा. पालक, दही, हरी सब्ज़ियां, फलियां जैसे कैल्शियमयुक्त खाद्यपदार्थ का सेवन करने के लिए यह सप्ताह सब से अच्छा है. इस चरण में आप की भूख धीरेधीरे कम होती है इसलिए समय पर भोजन करने का खासतौर पर ध्यान रखें.

अधूरी कहानी: भाग-2

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कहानी- नज्म सुभाष

आज 14 साल बाद फिर से वही नाम उस की आंखों के सामने तैर गया. इन सालों में उस ने कितने संघर्ष किए, क्याक्या परेशानियां नहीं उठाईं… सब याद है उसे. किस तरह उस ने लोगों के घर काम कर के अपना जीवन काटा. यह तो अच्छा हुआ कि उसे निर्मलजी जैसे श्रेष्ठ साहित्यकार का आशीर्वाद प्राप्त हुआ. उन्हीं की प्रेरणा से उस ने एक किताब ‘स्त्रीवजूद’ लिखी जो पूरे भारत साहित अन्य देशों में भी अनुवादित हो कर हाथोंहाथ ली गई. उस ने अपना नाम बदल कर माधवी कर लिया. पुस्तकों से प्राप्त होने वाली धनराशि से उस ने एक घर खरीदा. अनाथाश्रम से उस ने एक बेटी को गोद लिया. उस की जिंदगी में हर तरफ खुशियां ही खुशियां थीं. लेकिन आज अतीत ने जख्मों को फिर से ताजा कर दिया.

‘नहीं ऐसा नहीं हो सकता… हो सकता है यह कोई दूसरा इनसान हो. आजकल तो एक नाम के कई लोग मिल जाते हैं,’ उस ने सोचा.

करीब 10 दिन बाद उस के पास निर्मलजी का फोन आया. उन्होंने उसे बताया कि साहित्यकार मंडल ने अरुण कुमार को पुरस्कार प्रदान करने के लिए तुम्हें चुना है. यह सुन कर वह अवाक रह गई. वह जिस तरह जाने से बचती है, लोग उसे उसी तरफ क्यों धकेल देते हैं… उस ने साफ मना कर दिया कि वह नहीं आ पाएगी. मगर निर्मलजी ने बताया कि यह बात लेखक को डाक द्वारा बताई जा चुकी है कि उसे पुरस्कार प्रदान करने के लिए तुम आ रही हो.

‘‘लेकिन इतना सब करने से पहले आप ने मु झ से पूछा क्यों नहीं?

‘‘अरे, यह भी कोई बात हुई… आजकल तो लोग प्रसिद्धि पाने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की फिराक में रहते हैं और एक आप हैं कि…’’

‘‘सौरी सर मैं नहीं आ सकती.’’

‘‘यानी मेरी इज्जत मिट्टी में मिलाने का पूरा इरादा है… अब तो कार्ड भी बांटे जा चुके हैं, खैर, ठीक है आप की मरजी,’’ एक लंबी सांस खींचते हुए वे बोले. उन्हें ऐसा महसूस हो रहा था जैसे लंबी रेस जीतने से पहले ही वे थक गए हों.

‘‘ठीक है सर मैं आ जाऊंगी… मगर केवल पुरस्कार प्रदान करने के तुरंत बाद चली जाऊंगी.’’

निर्मलजी उस की जिंदगी में एक आदर्श की तरह थे… उसे बेटी की तरह प्यार करते थे. लिहाजा उन की बात काटने की उस में हिम्मत न थी.

शाम के 7 बज रहे थे जब निर्मलजी ने तमाम लेखकों और बुद्धिजीवियों से भरे हौल

में अरुण कुमार को पुरस्कार प्रदान करने के लिए माधवी के नाम की घोषणा की. माधवी ने ज्यों ही सम्मानित होने वाले शख्स को देखा, उस के पैर थम गए. उस शख्स ने भी एक नजर उसे देख कर अपनी नजरें  झुका लीं. उफ, वही शख्स… कितना दुखद दृश्य था वह… इसी दृश्य से तो वह बचना चाहती थी… मगर अब…

जो इनसान अब तक यह सम झता आया था कि उस से दूर होने के बाद मधुमालती ने अपना वजूद गिरवी रख दिया होगा या फिर मरखप गई होगी आज वही मधुमालती उसे पुरस्कार प्रदान करेगी और वह पुरस्कार ग्रहण करेगा… इस से बड़ा नियति का क्रूर मजाक और क्या होगा…

उस से नजरें मिलते ही अरुण कुमार का सारा अहंकार शीशे के माफिक टूट कर उस के मन में चुभने लगा. माधवी ने पुरस्कार निर्मलजी के हाथ से ले कर उसे पकड़ा दिया. औपचारिक रूप से उस ने धन्यवाद किया. किसी से कुछ कहने के बजाय वह धम्म से कुरसी पर बैठ गया. जैसे उस का सम्मान न किया गया हो, बल्कि सैकड़ों जूते मारे गए हों.

माधवी वहीं खड़ी रही. अचानक वहां बैठे साहित्यकार माधवी से अपनी पसंद की गजल सुनाने की फरमाइश करने लगे. तब तक निर्मलजी ने भी सभी साहित्यकारों का दिल रखने के लिए उसे एक छोटी सी रचना सुनाने को कह दिया.

अंदर से हूक उठ रही थी. बस मन यही कर रहा था कि वह तुरंत यहां से चली जाए. मगर निर्मलजी की बात कैसे ठुकराती. अत: उस ने माइक संभाल लिया

यों तो मेरे लब पर आई, अब तक कोई आह नहीं,

तेरी जफाओं पर चुप हूं तो इस का मतलब चाह नहीं.

तू कहता था तेरी मंजिल, नजरों में वाबस्ता है,

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सचसच कहना मेरी तरह ही, तू भी तो गुमराह नहीं.

पत झड़ का मौसम काबिज है, दिल में पूरे साल इधर,

कितनी बार कैलेंडर पलटा, उस में फागुन माह नहीं.

अश्कों का था एक समंदर, जिस के पार उतरना था,

डूब गई मैं जिस के गम में, उस को है परवाह नहीं.

तु झ से मिल कर मेरी धड़कन, बेकाबू हो जाती थी,

अब ये बर्फ सरीखे रिश्ते, मिलने का उत्साह नहीं.

जीना मुश्किल कर देती है, बेचैनी को बढ़ा कर जो,

अपनी यादें ले जा मु झ से, होगा अब निर्वाह नहीं.

आज माधवी की आवाज में दर्द का एहसास अधिक गहरा था. लोग मंत्रमुग्ध हो कर सुन रहे थे. गजल खत्म होते ही हौल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. मगर माधवी बदहवासी में  झट से मंच से उतर कर बाहर खड़ी कार में जा बैठी. सब हैरान थे.

घर पहुंचने के बाद माधवी का मन चाह रहा था कि फूटफूट कर रोए. मगर गले में जैसे

कुछ धंस गया था. वह इन्हीं खयालों में गुम थी कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई.

‘‘कौन है?’’ आंसू पोंछ कर  झुं झलाते हुए उस ने दरवाजे की जगह खिड़की खोल दी. सामने वही चेहरा था जिस से उसे नफरत हो चुकी थी.

‘‘तुम… अब यहां क्या करने आए हो?’’

‘‘मैं… मैं तुम से माफी मांगने आया हूं मालती.’’

‘‘कौन मालती…? मालती को तो मरे 14 साल हो चुके हैं. मैं माधवी हूं, मैं तुम्हें नहीं जानती, चले जाओ यहां से,’’ अंतिम शब्द तक आतेआते वह चीख पड़ी थी.

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‘‘चला जाऊंगा, लेकिन बस… एक बार… बस एक बार कह दो कि तुम ने मु झे माफ कर दिया,’’ घुटनों के बल बैठ कर गिड़गिड़ा उठा था वह.

‘‘मैं ने कहा न मैं तुम्हें नहीं जानती… अब तुम शराफत से जाते हो या मैं शोर मचाऊं,’’ कह कर उस ने खिड़की बंद कर दी.

करीब 15 मिनट तक कोई आहट नहीं हुई. उसे लगा वह जा चुका है… अच्छा है… जब उस से कोई वास्ता नहीं तो फिर किसलिए माफी… मेरी जिंदगी नर्क बना कर आज मु झ से माफी मांगने आया है.

आगे पढ़ें  अचानक उस के मन ने उसे धिक्कारा…

6 टिप्स: कम बजट मे घर को ऐसे बनाएं अट्रेक्टिव

प्रत्येक महिला की चाहत होती है की वह अपने आसपास को और अपने घर को इस तरह सजाए की उसका आशियाना सुकूनभरा बनें. इसके लिए जरूरी नहीं कि ढेरों पैसे खर्च करके ही आप अपने घर को सजाएं. घर की सजावट के लिए रचनात्मकता की जरूरत होती है, पैसों की नहीं. कम बजट में भी अपने घर को खूबसूरत कैसे बनाया जाए आईए जानें.

1. मुख्य द्वार की सजावट

इसके लिए आप फूलों या मिट्टी से बने सजावट के सामान का इस्तेमाल कर सकती हैं. आजकल बाजार में मिट्टी से बना बेहद आकर्षक सजावट का सामान उपलब्ध है. आप अपने घर के मुख्य द्वार पर मिट्टी की रंग-बिरंगी विंड चाइम लगा सकती हैं. इसके अलावा आप दरवाजे के पास मिट्टी के आकर्षक बरतन में पानी भर कर उसमें 5 से 7 सुंदर फूल सजा सकती हैं.

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2. कैसे करें लिविंग रूम की सजावट

यदि आपको लग रहा है कि घर में रंग-रोगन कराना आपके बजट से बाहर है तो चिंता की कोई बात नहीं. आप पूरे घर में पेंट न करवा कर अपने ड्राइंग रूम की एक दीवार को गहरे रंग में रंग कर नया लुक दे सकती हैं. इसके अलावा सोफे के ऊपर के भाग में किसी खास आकार में पहले से मौजूद रंग का 3 गुना ज्यादा गहरा शेड लगा कर दीवार पर कला का काम कर सकती हैं.

3. दीवार की सजावट

आजकल पेपर वर्क, पेपर पेस्टिंग द्वारा भी दीवारों को सजाने का चलन है. इसकी लागत पेंट करवाने की तुलना में बेहद कम आती है और आपका घर भी बिल्कुल नया-सा दिखने लगता है. ये पेपर घर की साज-सज्जा के मुताबिक फ्लोरल, प्लेन हर प्रकार के डिजाइन में मार्केट में आसानी से मिल जाते हैं.

4. सोफा कवर बदलें

दूसरा विकल्प यह है कि सोफा बदलने की बजाय सोफे के कवर और कुशन को बदल दें. अगर आपके सोफे के कवर का रंग क्रीम है, तो कुशन आप तीन बड़े आकार के और तीन छोटे साइज के लें. छोटे वाले कुशन का रंग थोड़ा डार्क शेड का रखें. आप अपने कुशन कवर का रंग अपने दरवाजे और खिड़कियों के रंग से मैच करता हुआ भी रख सकती हैं.

5. कृत्रिम फर्श से पाएं नया फर्श

यदि आपका फर्श खराब हो गया है या पुराने चलन के मुताबिक बना है तो चिंता की कोई बात नहीं. आप फ्लोरिंग मैटीरियल द्वारा अपने फर्श को बिना तोड़-फोड़ किए ही नया जैसा बना सकती हैं. ये फ्लोरिंग मैटीरियल हर रंग व डिजाइन में बाजार में उपलब्ध हैं.

आप चाहें तो अगले साल इसे फिर बदल सकती हैं और घर को फिर से एक नया लुक दे सकती हैं. इस फ्लोरिंग की खासियत यह है कि इसे आप ठीक उसी प्रकार से साफ कर सकती हैं, जैसे मार्बल, टाइल्स या चिप्स के फर्श को साफ किया जाता है.

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6. फूलों से सजाएं घर

घर में फूलों से सजावट सबसे सस्ती, सरल व आकर्षक होती है. इसके लिए आप ताजे फूल या बाजार में आसानी से उपलब्ध आर्टिफिशयल फूलों का इस्तेमाल भी कर सकती हैं. सेंटर टेबल पर कांच की कटोरी में पानी भर कर उसमें रंग-बिरंगे फूल रखें या फिर बाउल में फ्लोटिंग कैंडल जला कर भी आप कमरे की रौनक बढ़ा सकती हैं.

औफिस फैशन: कही आप भी तो नहीं करती ये 5 गलतियां

आजकल के डेली लाइफस्टाइल में महिलाएं केवल घर पर नहीं बैठती हैं. महिलाएं घर संभालने के साथ-साथ औफिस का काम भी सभांलती हैं. लेकिन कहीं न कहीं फैशन के मामले में पीछे रह जाती हैं. शादी या पार्टी में महिलाएं अपने फैशन का ख्याल रखना नहीं भूलती पर जब बात औफिस की आती है तो वह जल्दबाजी में अपने फैशन का ख्याल नहीं रख पातीं. इसीलिए आज हम आपको औफिस फैशन में होने वाली गलतियों से बचने के बारे में बताएंगे.

1. औफिस के अकौर्डिंग हो रखें अपना लुक

अगर आप अपने कैरियर के प्रति संजीदा हैं, तो आप फैशनेबल दिखने के  बजाय पेशेवर दिखने की कोशिश करें. आज लोग काम के साथ आप के बोलने के लहजे, पहनावे पर भी ध्यान देते हैं. इसलिए कामकाजी महिलाओं का औफिस में खुद को सही तरीके से पेश करना बहुत जरूरी है.औफिस जाते वक्त अपने पहनावे पर जरूर ध्यान दें. ज्यादा चटक रंग, अधिक गहने, चमकीले वस्त्र आप की छवि को बिगाड़ सकते हैं. यदि आप की ड्रैस अनुकूल है, तो इससे आपके काम पर असर पड़ता है. आप के औफिस में आप के साथी आप की ड्रैस को ले कर बातें बनाने लगते हैं, जिस से आप का काम में मन नहीं लग पाता.

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कुछ समय पहले तक महिलाएं सूटसलवार, साड़ी पहन कर काम पर जाती थीं, लेकिन अब वे काफी स्मार्ट हो चुकी हैं. आज की कामकाजी महिलाएं ट्राउजर, शर्ट जैसे परिधानों को अपना चुकी हैं. अब ज्यादातर महिलाओं के वार्डरोब में सूट, साड़ी कम फौर्मल ज्यादा दिखाई देते हैं.

2. जब मीटिंग के लिए हों तैयार

यदि औफिस में कोई मीटिंग है तो ऐसे में आप साड़ी को नजरअंदाज कर के ट्राउजर, फौर्मल शर्ट, टौप पहन कर जाएं. साड़ी संभालने से ज्यादा आरामदेह फौर्मल ड्रैस है. इस से आप का ध्यान भटकेगा नहीं और एकाग्रता बनी रहेगी.

3. परिधान ऐसा जो दिलाए आराम

ऐसा कई बार होता है कि हम औफिस ऐसी ड्रैस पहन कर चले जाते हैं जिस में हम पूरा दिन कंफर्ट महसूस नहीं करते. अत: कपड़े ऐसे चुनें जो जरूरत से ज्यादा टाइट न हों. अकसर टाइट कपड़ों में हम काम से ज्यादा कपड़ों पर ध्यान देते हैं. अधिक फैशनेबल ड्रैस न पहनें, जो कहीं से कटी डिजाइन वाली या जरूरत से ज्यादा शौर्ट हो.

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हमारे यहां ऐसी कामकाजी औरतें भी हैं, जिन्हें काम करने की अनुमति तो दे दी गई है, लेकिन जींस, टौप पहनने के लिए अभी भी उन्हें रोका जाता है. ऐसे में आप चाहें तो ऐसा कुरती कलैक्शन रखें, जिसे आप मिक्स ऐंड मैच कर के पहन सकें. औफिस के लिए कुरती या सूट बहुत सिंपल लें. यह ज्यादा चमकदमक वाली न हो. आप ब्लैक या सफेद कुरती के साथ रंगबिरंगा दुपट्टा कैरी कर सकती हैं. यदि कुरती बुटीक में सिलवा कर पहनती हैं, तो ज्यादा डीपनैक न करवाएं न ही ज्यादा डीप बैक. कुरती की डिजाइन जितनी सिंपल रहेगी औफिस लुक के लिए उतना ही बेहतर होगा.

4. कंफर्ट ही है ट्रैंड

 

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कामकाजी महिलाओं के लिए कंफर्ट ही ट्रैड है. फैशन डिजाइनर अंजलि बेदी का कहना है, ‘‘वर्किंग महिलाओं को फैशन से ज्यादा कंफर्ट लैवल देखना चाहिए. यदि आप अपनी ड्रैस में कंफर्ट हैं, तो आप को खुद अच्छा महसूस होने लगता है और आप ज्यादा से ज्यादा समय अपने काम को दे पाती हैं. औफिस के लिए हमेशा फौर्मल लुक ही रखना चाहिए. आप चाहें तो डार्क ब्लू जींस के साथ व्हाइट शर्ट पहन सकती हैं. ब्राउन ट्राउजर के साथ भी व्हाइट शर्ट मैच हो सकती है. फिटेड पैंट के साथ टीशर्ट पहन सकती हैं. स्ट्रेट स्कर्ट के साथ सेमी फौर्मल टौप कैरी कर सकती हैं.’’

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5. कंफर्ट के साथ स्टाइल भी जरूरी

 

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कामकाजी महिलाओं को कंफर्ट के साथसाथ स्टाइल का भी ध्यान रखना चाहिए. हमेशा ऐसी ड्रैस पहनें, जिस में न तो बहुत ऐक्सपोज हो और न ही अत्यधिक ट्रैडिशनल लुक. ड्रैस प्रौपर आयरन होनी चाहिए. उस पर सिलवटें न हों. ऐसा नहीं लगना चाहिए कि आप ने उसे जबरदस्ती पहना हो. सही परिधान आप के व्यक्तित्व को दर्शाता है. अगर आप को ज्वैलरी पहनना पसंद है तो कान की सिंपल बालियां पहन सकती हैं या फिर गले में सिंपल सा लौकेट डाल सकती हैं.

Edited by Rosy

शुभारंभ: क्या रानी के प्रोत्साहन से राजा अपने हक की माँग कर पाएगा?

कलर्स के शो, ‘शुभारंभ’ में एक तरफ रानी के सामने धीरे-धीरे दुकान और घर की कई बातों का खुलासा हो रहा है, तो दूसरी तरफ राजा अपनी जिम्मेदारियों से अनजान है. वहीं राजा की माँ, आशा, राजा की ताई जी, कीर्तिदा के कहने पर रानी के खिलाफ चालें चल रही है. आइए आपको बताते हैं राजा और रानी की जिंदगी में आने वाला है कौनसा नया मोड़…

रानी होती है हैरान

अब तक आपने देखा कि रानी दुकान पर जाकर देखती है कि मुंबई से डील करने आए डीलर्स के लिए राजा बिजनेस चेक बुक ढूंढता है. रानी ये देखकर हैरान हो जाती है कि राजा को बिजनेस की थोड़ी सी भी जानकारी नहीं है और दूसरी तरफ इस कारण से डीलर्स डील को रद्द करने की बात कहकर चले जाते हैं.

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रेशमिया निवास में होता है हंगामा

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डील रद्द होने के बाद रेशमिया निवास में राजा के ताऊ, गुणवंत और उसका बेटा , हितांक डीलर्स के आने के समय दुकान से गायब होने के लिए गुणवंत के बेटे, मेहुल को फटकार लगाते हैं. राजा अपने आपको इस डील के रद्द होने का दोषी मानता है, लेकिन गुणवंत उससे कुछ नहीं कहता. इसी बीच, रानी को पता चलता है कि राजा को बिजनेस के मामले में कुछ भी नहीं पता है, जिसके चलते रानी, राजा से दुकान की जिम्मेदारी उठाने की बात कहती है.

राजा की उड़ गई नींद

रानी की बातें राजा के मन में घर कर जाती हैं. वह रात भर यही सोचता है कि वो इस बात का हल कैसे निकाले. आज के एपिसोड में आप देखेंगे कि राजा, रानी की दुकान से जुड़ी जिम्मेदारियों को संभालने की बात को सोचते हुए एक फैसला लेगा, जिससे पूरा परिवार दंग रह जाएगा. इसी के साथ आशा का भी रानी की तरफ मन बदलेगा.

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अब देखना ये है कि क्या राजा की माँग, गुणवंत और बाकी घरवालों को रास आएगी? क्या आशा का रानी के प्रति सच में मन बदल जाएगा? जानने के लिए देखते रहिए शुभारंभ, सोमवार से शुक्रवार रात 9 बजे, सिर्फ कलर्स पर.

एक्सिडेंट के बाद इतनी बदल गई ‘आशिकी’ गर्ल की जिंदगी, अब दिखतीं हैं ऐसी

‘मैं दुनिया भूला दूंगा तेरी चाहत में’ (main duniya bhula dunga) इस गाने को सुनते ही फिल्म आशिकी (aashiqui) की भोलीभाली एक्ट्रेस अनु अग्रवाल की याद ताज़ा होती है. जिन्होंने फिल्म रिलीज होने के बाद रातोंरात प्रसिद्धी पायी और अपनी एक अलग पहचान बनाई. सफलता की सीढ़ी पर चढ़ चुकी अभिनेत्री अनु का साल 1999 बहुत ही ख़राब रहा वह एक सड़क दुर्घटना की शिकार हुई. 29 दिनों तक कोमा में रहने के बाद जब अनु अग्रवाल (anu aggarwal)  होश में आईं, तो उनकी यादाश्त जा चुकी थी. बौडी का निचला हिस्सा पैरालाईजड भी हो चुका था. उस समय किसी ने उसकी खबर तक नहीं ली, पर उन्होंने हार नहीं मानी और 3 साल तक इलाज करवाया. अपने इस दर्दनाक जर्नी की बायोपिक अंग्रेजी और मराठी में लिखी. अनु एक बार फिर एक्टिव हो चुकी हैं और कई इवेंट्स पर जाकर सामाजिक काम करती हैं. पेश है उनसे बातचीत के कुछ अंश.

सवाल-मौडलिंग में कैसे जाना हुआ?

मेरा जीवन एक मिस्ट्री है. इसमें बहुत सारे उतार-चढ़ाव आये है और ये एक्सट्रीम लेवल पर हुआ है. पढाई के दौरान मैं सामाजिक काम एक पाकिस्तानी एन जी ओ के साथ किया करती थी, जिसमें महिलाओं को सशक्तिकरण के बारें में बताई जाती थी. मुस्लिम महिलाएं तब घर से बाहर नहीं निकलती थी. उन्हें मैंने एन जी ओ के साथ जाकर पुरानी फिल्म ‘देवदास’ दिखाई, जिसमें देवदास पारो को एक पत्थर से मारकर उसके चेहरे पर खून निकाल देता है, इस दृश्य का उनसे अधिक मुझपर बहुत गहरा असर पड़ा. मैं तब हिंदी फिल्में नहीं देखती थी, क्योंकि फिल्मों में महिलाओं के पोशाक बहुत ही अभद्र तरीके से पहनाये जाते थे. उनके शरीर को सेक्स सिंबल बनाया जाता था. लड़की की कोई दिमाग नहीं दिखाते थे. फिल्मों में भी मुझे जाने की कोई इच्छा नहीं थी. महेश भट्ट ने मुझे कही कि ये फिल्म मुझे ही बनानी है, क्योंकि ये मेरी कहानी है. फिर भी मैं करने के लिए राजी नहीं थी.मैंने पहले नाटकों में काम स्कूल और कॉलेज में किया है, पर फिल्मों में काम करने की इच्छा नहीं थी.


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मॉडलिंग से कोई नाता कभी नहीं था.मुझे याद आता है जब मैं दिल्ली से मुंबई घूमने आई और किसी ने मुझे चर्चगेट में देखा और मुझे ऑफर मॉडलिंग की दी. मुझे तब ख़ुशी हुई कि मैं इसके द्वारा आत्मनिर्भर बन सकती हूँ जिसकी इच्छा मुझे सालों से थी. मैंने किया और पेरिस में भी मुझे प्रसिद्धी मिली. साल 1986-87 में मुंबई आकर काम करना भी आसान नहीं था. किराये के कमरे के लिए जाने पर लोग मुंह पर दरवाजा बंद कर देते थे. तब लाइफ बहुत कठिन थी. काम मिलना भी बहुत मुश्किल था. उसी दौरान फेस स्वेप्स इंडिया टॉनिक पेरिस के लिए भारत के सारे बड़े शहरों में 3 महीने ऑडिशन हुए और उनमें से मैं चुनी गयी. मैं पेरिस गयी और मुझे लोगों का प्यार मिलता गया. मेरे साथ काम करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता मेरे इस हुनर को देख आश्चर्य में पड़ गए, क्योंकि इस प्रोफेशन को लोग अच्छा नहीं समझते थे. मैंने इसके बाद कई बार रैम्प वाक किया. इससे पैसे मिले और मेरे घर का किराया मैंने चुकाया.

सवाल-आपकी जर्नी आगे कैसे बढ़ी?

मेरी लाइफ में कब क्या होगा मुझे कभी पता नहीं चला. मैं फिल्म नहीं करना चाह रही थी, लेकिन सामाजिक काम करना पसंद करती थी. सुपर मॉडल बनने के बाद मैंने जनसंख्या कंट्रोल के लिए ‘कामसूत्र कंडोम’ को एंडोर्स किया था. मेरा प्रभाव लोगों पर कैसे पड़ेगा, इसके लिए मैं हमेशा सोचती रहती थी. इस बीच महेश भट्ट बीच-बीच में मुझे फ़ोन करते थे, मैंने एक दिन मिलकर उन्हें मना करने की बात सोची. वहां पहुँचने पर उन्होंने कहानी सुनानी शुरू की. आधी कहानी सुनने के बाद मुझे उसमें कोई रूचि पूर्ण तथ्य नहीं दिखा. मैं ये सोचकर कहानी सुनने की इच्छा ज़ाहिर की थी कि अगर कुछ नया कांसेप्ट हो तो मैं कर सकती हूँ, पर ऐसा नहीं लगा. शाम के 5 बज गए और कमरे की लाइट के जलते ही मुझे उसे करने की इच्छा पैदा हो गयी. मैं मना नहीं कर पायी. लड़की का नाम फिल्म में अनु था. चरित्र मुझसे काफी मेल खाता हुआ था. ‘प्रेम ही जीवन है’ दर्शकों ने इस फिल्म को देखकर अनुभव किया. मैंने इस फिल्म में एक टेक में हर दृश्य को किया है, क्योंकि मुझे थिएटर का अनुभव था.

सवाल-परिवार का सहयोग कितना रहा?

मुझे कभी ये महसूस नहीं हुआ कि मैं लड़की हूं. पिता ने मेरे भाई से मुझे कभी कम नहीं समझा. मुझे हर बात की आज़ादी थी. समाज से पहले परिवार आता है, जहां माता-पिता लड़के और लड़की में अंतर महसूस करवाते है.

सवाल-ऐसा सुना जाता है कि महेश भट्ट का अपनी अभिनेत्रियों के साथ काफी गहरा रिश्ता रहता है, आपके साथ उनके सम्बन्ध कैसे थे?

मेरे साथ कोई समस्या नहीं थी. मुझे कुछ कहना किसी के वश में नहीं था, क्योंकि मैं एक सोशल वर्कर थी और किसी का कुछ भी करने के लिए दूसरे की रजामंदी होने की जरुरत होती है. कोई भी पुरुष किसी महिला को कभी छू नहीं सकता. अगर उन्हें कुछ स्कोप मिलता है, तभी वे आगे बढ़ते है. निर्देशक मणिरत्नम, राकेश रोशन, सावन कुमार टांक, मणि कौल आदि सभी के साथ मैंने काम किया, लेकिन किसी ने मुझे कुछ भी नहीं कहा. जरुरत पड़ने पर मैं फिल्म छोड़ भी सकती थी. असल में लड़कियों को क्लियर होना चाहिए कि उन्हें करना क्या है. नहीं तो अभिनेत्री और वेश्या में अंतर ही क्या रह जायेगा. मैं किसी को जज नहीं करती, पर मेरी राय यही है.

सवाल-राहुल रॉय के साथ कैसे सम्बन्ध हैं?

अभी आशिकी के 30 साल हुए है और हम लन्दन में मिले थे. राहुल बहुत शांत स्वभाव का रहा. वह मुझे बहुत सम्मान देता है.

सवाल-‘आशिकी’ के बाद जिंदगी कैसे बदल गयी?

‘आशिकी’ की रिलीज के बाद हजारों लोग मेरे घर के पास जमा हो गए. मुझे खिड़की दरवाजे बंद करने पड़े. मेरे माता-पिता बहुत खुश थे. मैं अब कही ऑटों में आना जाना नहीं कर पाती थी. हर जगह आशिकी के गाने लगे होते थे. एक बार मैं एक शॉप में गयी और वहां किसी ने मुझे देख लिया और मुझे पीछे की दरवाजे से बाहर निकलना पड़ा, क्योंकि सामने लोग मुझे देखने के लिए खड़े थे. मुझे पैसे खूब मिले, मैं कई ब्रांड की ब्रांड अम्बेसेडर बन गयी. मैंने दो साल में वर्ली में अपना घर खरीद लिया. मैं सुपर मॉडल से स्टार बन गयी. फिर मैने योगा में ज्वाइन किया और फिल्में छोड़ दी. फिर वापस मुंबई आई तो दुर्घटना हो गयी. मेरी यादाश्त चली गयी. मुझे अपना नाम तक याद नहीं था. बच्चों की तरह हो गयी थी, उस समय मेरी देखभाल मेरी माता-पिता और भाई ने की और मुझे अब दूसरी जिंदगी मिली है.

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सवाल-ऐसी जिंदगी से बाहर कैसे निकलीं?

कोमा के बाद जब होश आया तो मैं चलने में असमर्थ थी. मुझे उठाकर गाड़ी में सबने रखा. मुझे कुछ पता नहीं था, लेकिन मन शांत था. डॉक्टर से लेकर किसी को विश्वास नहीं था कि मैं ठीक हो जाउंगी. उन्होंने मेरी जिंदगी केवल 3 साल की बताई थी, पर मैं उससे निकलकर ठीक हो गयी. इसमें परिवार वालों ने बहुत सहयोग दिया. सबने इसे मिरेकल समझा, अब मैं बिल्कुल नार्मल हूँ. अब मैं ‘अनु अग्रवाल फाउंडेशन’ से जुडकर काम करती हूं. इसमें मानसिक स्वास्थ्य, पर्यावरण, शिक्षा आदि सभी पर काम किया जाता है.

सवाल-आप आगे क्या कर रही हैं?

मैंने अपनी जीवनी लिखी है और ये बताने की कोशिश की है कि व्यक्ति सब खोकर भी सब पा सकता है अगर उसमें आत्मशक्ति हो. लोगों में तनाव बहुत बढ़ रहा है, उसे तनावमुक्त करने के तरीकों के बारें में एक किताब लिख रही हूं. इसके अलावा कई कांसेप्ट मिले है, जिस पर बात चल रही है.

Valentine’s Special: मिनटों में पाएं क्लीयर और स्मूद स्किन

लेखक -पारुल

वैलेंटाइन डे, जिसे ले कर हर कोई उत्साहित रहता है खासकर लड़कियां व महिलाएं. इस समय मौसम भी इतना सुहावना होता है कि मिलने का मजा ही कुछ और होता है. हर लड़की इस दिन खुद को फैशनेबल दिखाना चाहती है ताकि छा जाए, जिस के लिए वह एक से बढ़ कर एक स्टाइलिश कपड़े पहनती है, साथ ही स्किन को फ्लालैस लुक देने के लिए एक से बढ़ कर एक उपाय करती हैं.

इतना ही नहीं पैरों व हाथों के अनचाहे बालों को हटाने के लिए घंटों पार्लर में बैठ कर समय व पैसे भी खर्च करने में पीछे नहीं रहती. लेकिन अब इस के लिए आप को पैसे खर्च करने की जरूरत नहीं है, बल्कि फेम फेयरनेस नेचुरल हेयर रिमूवल क्रीम, आप को घर बैठे मिनटों में अनचाहे बालों से छुटकारा दिला कर आप को सौफ्ट व क्लीयर स्किन देगी.

1. घर पर पार्लर जैसा निखार

महिलाएं खुद की स्किन के साथ किसी भी तरह का सम झौता करना पसंद नहीं करतीं. वे हरदम चमकतीदमकती स्किन पाना चाहती हैं, फिर चाहे कोई भी मौसम क्यों न हो. ऐसे में उन्हें हेयर रिमूवल क्रीम से घर पर पार्लर जैसा निखार मिल जाएगा और लंबे समय तक अनचाहे बालों की समस्या से छुटकारा भी मिल जाएगा.

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2. क्यों है खास

फेम फेयरनेस नेचुरल हेयर रिमूवल क्रीम बाकी क्रीमों से काफी अलग है. यह त्वचा से अनचाहे बालों को हटाती है वह भी सिर्फ 3-6 मिनटों (क्लीनिकल स्टडी के अनुसार) में. यह डर्मैटोलौजिकली और क्लीनिकली टेस्टेड है.

3. इस्तेमाल में आसान

जब भी हम पार्लर में जा कर वैक्सिंग करवाते हैं या फिर रेजर से हेयर रिमूव करते हैं तो कभी ज्यादा गरम वैक्स लगाने के कारण स्किन जल जाती है या फिर सैंसिटिव स्किन होने के कारण स्किन कट व उस पर रैशेज पड़ जाते हैं.

4. खुद के मुताबिक लगाने की छूट

आप हेयर रिमूवल क्रीम को अपनी स्किन पर मनमुताबिक लगा सकती हैं, क्योंकि अगर लगाने पर आप को स्किन पर जरा भी जलन महसूस होगी तो आप के पास तुरंत हटाने का औप्शन होता है. लेकिन पार्लर वाले कई बार अपने क्लाइंट्स की बातों को इग्नोर कर देते हैं और बाद में स्किन पर रैशेज पड़ने पर सैंसिटिव स्किन होने की बात कह कर छुटकारा पा लेते हैं.

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किन इन्ग्रीडिऐंट्स से मिल कर बना यह लीकोराइस से एनरिच्ड है जो अपने फेयरनेस गुणों के लिए जाना जाता है. इस में ऐवोकाडो ऑयल भी है जो विटामिन ए, डी और ई का अच्छा स्रोत है, जोकि स्किन को मौइस्चराइज करने के साथसाथ उसे पोषण भी देने के लिए जाना जाता है. खास बात यह है कि यह हर स्किन टाइप को ध्यान में रख कर बनाया गया है.

5. अप्लाई करने में ईजी

क्रीम को अप्लाई करने के लिए आप स्पैचुला की मदद लें, जो आप को क्रीम के साथ ही मिलेगा. फिर क्रीम को बालों की सिधाई की ओर से अप्लाई करें. फिर क्रीम को स्किन पर 3-6 मिनट के लिए लगा रहने दें और फिर हलके हाथों से स्पैचुला की मदद से बालों की ग्रोथ की उलटी दिशा में हटाएं. इस के बाद गीले कपड़े से स्किन को क्लीन कर पाएं ग्लोइंग व क्लीयर स्किन.

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