मां-बाप को रखना है तनाव से दूर तो उन्हें सिनेमा दिखाएं

सिनेमा किसे नहीं पसंद होता. पर फिल्में हमेशा मनोरंजन के लिए नहीं होती, ये हमें बहुत कुछ सिखाती भी हैं. कई शोधों में ये बात सामने आई है कि जो लोग सिनेमा देखते हैं, ना देखने वालों की तुलना में उनका दिमाग ज्यादा सक्रिय रहता है, उनमें रचनात्मकता अच्छी होती है और मानसिक तौर पर वो ज्यादा स्वस्थ होते हैं. इस खबर में हम आपको सिनेमा से जुड़ा एक रोचक जानकारी देने वाले हैं.

हाल ही में हुए एक अध्ययन में ये बात सामने आई कि सिनेमा, थिएटर जैसे माध्यमों से नियमित रूप से संपर्क में रहने वाले बुजुर्ग तनाव से दूर रहते हैं. तनाव एक गंभीर समस्या है, जिससे लाखों लोग प्रभावित होते हैं, विशेषकर बुजुर्ग.

शोध में 50 वर्ष से ज्यादा के करीब ढाई सौ लोगों को शामिल किया गया था. इस अध्ययन में ये बात सामने आई कि लोग जो प्रत्येक दो-तीन महीने में फिल्म, नाटक या प्रदर्शनी देखते हैं, उनमें तनाव विकसित होने का जोखिम 32 फीसदी कम होता है, वहीं जो महीने में एक बार जरूर इन सब चीजों का लुत्फ उठाते हैं, उनमें 48 फीसदी से कम जोखिम रहता है.

ब्रिटेन में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, इन सांस्कृतिक गतिविधियों की शक्ति सामाजिक संपर्क, रचनात्मकता, मानसिक उत्तेजना और सौम्य शारीरिक गतिविधि के संयोजन में बेहद लाभकारी है.

जानकारों के मुताबिक, ये सारे माध्यम कई तरह के मानसिक विकारों से लड़ने में हमारी मदद करते हैं. जब आप इन माध्यमों से जुड़ते हैं तो आपके दिमाग को काफी आराम मिलता है. वो रिलैक्स पोजिशन में होता है. खास कर के जो लोग उम्र के एक खास पड़ाव पर खड़े हैं उन्हें जरूरत है कि खुद को तनाव से दूर रखने के लिए इस तरह के माध्यमों का सहारा लें.

आखिर कैसे बचें रेप के झूठे इल्जाम से…

यूं तो हर-रोज रेप के मामले लगातार सामने आते रहते हैं. लेकिन कई बार ऐसे मामले भी सामने आते हैं जिसमे प्रेमिका ने अपने प्रेमी पर रेप का इल्जाम लगाया हो. ऐसे मामले सच में चौका देने वाले होते हैं.

प्रयागराज से दिल्ली आए विशाल की कहानी भी कुछ ऐसे ही चौका देने वाली है. विशाल दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में अपनी गर्लफ्रेंड कंचन के साथ एक ही फ्लैट में रहता था. दोनों साथ में रहकर सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे. साथ में ही कोचिंग जाना, साथ में आना. दोनों ज्यादातर वक्त एक दूसरे के साथ बिताया करते थे.

विशाल अपने कैरियर को लेकर बहुत सीरियस था और कंचन अपने कैरियर से ज्यादा विशाल को लेकर सीरियस थी या यूं कह लीजिये कंचन विशाल के साथ अपना भविष्य देखने लगी थी.

यूपी के बलिया डिस्ट्रिक्ट की रहने वाली कंचन का स्वभाव थोड़ा जिद्दी और गुस्से वाला था. दिल्ली आने के बाद उस में काफी बदलाव आए. विशाल और कंचन की मुलाकात यहीं दिल्ली में हुई थी. देखते ही देखते दोनों एक-दूसरे के करीब आने लगे.

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लिव इन में रहना पड़ा भारी…

यह नजदीकियां विशाल के लिए खतरनाक साबित होगी इस का विशाल को अंदाजा भी नहीं था. एक ही फ्लैट में रहने के बावजूद विशाल ने कभी कंचन के साथ सैक्स सबंध बनाने की कोशिश नही की. दोनों एक दूसरे के क्लोज तो आए लेकिन एक दायरे में रह कर.

विशाल अपने घरवालो का अकेला बेटा था और उसके घरवाले चाहते थे कि विशाल जल्दी शादी कर ले. इधर विशाल के एग्जाम शुरू होने वाले थे और दूसरी तरफ शादी का दबाव. विशाल ने अपने परिवारजन से गुस्से में बोल दिया था कि अगर उसका एक्जाम क्लियर हो गया तो वह जल्द ही शादी कर लेगा.

2 महीने बाद विशाल का रिजल्ट आया जिसे देख कंचन के पैरो तले जमीन खिसक गयी. विशाल ने एग्जाम क्लियर कर लिया था. अब कंचन को डर था कि विशाल उस से दूर हो जाएगा. विशाल बहुत खुश नजर आ रहा था आखिर उसकी मेहनत रंग लाई. विशाल के घरवाले भी बहुत खुश थे.

इधर कंचन के व्यवहार में बदलाव दिखने लगा था. हर बात पर गुस्सा-चिड़चिड़ापन. यह सब विशाल देख रहा था लेकिन उस ने कंचन से कुछ कहा नहीं. रिश्ते के शुरुआत में ही विशाल ने कंचन को बोल दिया था वो उस से शादी नही कर सकता और इस बात पर कंचन भी विशाल से सहमत थी. लेकिन अब कंचन विशाल पर अपना हक दिखाने लगी थी. विशाल कंचन की इन हरकतों को नजरअंदाज कर देता था.

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कुछ समय बाद विशाल ने फैसला किया कि अब उसे अलग हो जाना चाहिए और वो कुछ दिनो के लिए प्रयागराज चला गया. प्रयागराज जाते ही कुछ दिनो में उसकी सगाई हो गयी. यह बात जब विशाल ने कंचन को बताई तो कंचन विशाल पर चिल्लाने लगी और धमकियां देने लगी कि अगर विशाल ने उससे शादी नही की तो वो मर जाएगी, उसको बर्बाद करदेगी. विशाल ने कंचन को समझाने की कोशिश भी की लेकिन कंचन अपने जिद पर अड़ी थी. सगाई के बाद जब विशाल वापस दिल्ली आया तो वो अपना बाकी का समान लेने वापस फ्लैट पर गया.

कंचन उस दिन फ्लैट पर ही थी. विशाल के आने से कंचन फूट-फूट कर रोने लगी और उससे शादी के लिए बोलने लगी. विशाल उस को समझा ही रहा था कि तभी कंचन उस के घरवालो को भी उल्टा-सीधा सुनाने लगी. विशाल से ये बात बर्दाश्त नही हुई और वह उस वक्त ही गुस्से में वहां से निकल गया. पूरी रात विशाल परेशान था. उस रात विशाल अपने एक दोस्त के घर रुका हुआ था. उसको परेशान देख दोस्त ने उस से परेशानी की वजह भी पूछा लेकिन विशाल चुप था.

अगली सुबह जब विशाल उठा तो सबकुछ बदल चुका था पुलिस उसके सामने थी. उसके दोस्त के घरवाले उसे गुस्से में देख रहे थे. उसे समझ नही आ रहा था यह सब क्या हो रहा है. दरअसल मामला यह था कि कंचन ने विशाल पर जबर्दस्ती यानि रेप का आरोप लगाया था. यह बात सुनते ही विशाल हक्का-बक्का रह गया. उसे यकीन ही नही हो रहा था कंचन ऐसा घिनौना इल्जाम उस पर लगा सकती है. कंचन ने तो विशाल पर झूठा रेप का इल्जाम लगा दिया लेकिन इससे विशाल की पूरी दुनिया तहस-नहस हो गई.

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आखिर क्यों होता है ऐसा…

दरअसल, एक-दूसरे के टच मे रहते हुए यानि लंबे समय तक साथ रहते हुए पार्टनर के साथ इमोश्नल जुड़ाव हो जाता है. यह जुड़ाव इतना गहरा होता है कि किसी एक का जुदा होना दूसरे को बर्दाश्त नहीं होता.

ऐसे मे जब किसी एक की तरफ से कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया होती है तो वो कुछ भी करने पर उतारू हो जाते हैं. इस बारे में मनोचिकित्सक अमित कुमार का कहना है, “ जब हम किसी के साथ ज्यादा वक़्त बिताते हैं चाहे वो कोई पशु हो या कोई इंसान हम धीरे-धीरे उन से क्लोज हो जाते हैं. इस बात का एहसास हमे तब होता है जब वो दूर चला जाता है.

अगर हम रिलेशनशिप की बात करें तो एक ही रूम में एक व्यक्ति के साथ रहना, सारा वक्त साथ बिताना, छोटी से छोटी बातें शेयर करना ये सब हमारी जिंदगी का हिस्सा या आप इसे आदत भी कह सकते हैं. दरअसल, हमे इसकी आदत हो जाती है और जब ये आदत हमे न मिले तो ऐसे में गुस्सा आना स्वाभाविक है.

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लेकिन जरूरत से ज्यादा गुस्सा आना हर बात पर लड़ना ये तभी होता है जब सामने वाले की जिंदगी में वैसा नही होता जैसा वो चाहता है. आप देखेंगे ऐसे व्यक्ति फौरन गुस्सा करने लगते हैं तो कभी शांत रहते है. इनका ये व्यवहार इन्हें डिप्रेशन की ओर ले जाता है. डिप्रेशन से पीड़ित व्यक्ति हर वक्त खुद में खोया नजर आएगा, खुद को अकेला रखना, बार-बार रोना, आत्महत्या जैसे रास्ते को अपनाना, ऐसे लोग बहुत अहंकारी हो जाते हैं, जिद में आकर ये कुछ भी कर सकते है. लेकिन यहां ऐसे भी व्यक्ति हैं जो ऐसे घिनौने इल्जाम अपने फायदे के लिए लालच में आकर लगाते है.

कैसे बचे रेप के झूठे इल्जाम से

रेप एक जघन्य अपराध है, इस मे कोई दोराय नहीं, पर जब सहमति से संबंध बनें और बाद मे लड़की रेप का झूठा इल्जाम लगा दे तो यह कानून का बेजा इस्तेमाल ही कहलाएगा.

कई बार लड़की के माता-पिता ही ऐसा इल्जाम लगा देते हैं वो भी सिर्फ कुछ रुपयों, कुछ दिनो के सुख-सुविधाओ के लिए. यह कहां की समझदारी है?

शायद ये भूल जाते हैं कि इससे उन की बेटी के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा. हमारे कानून में यदि कोई किसी व्यक्ति पर झूठा रेप का इल्जाम लगाता है और वो सच में झूठा साबित हो जाता है तो उसे 10 साल की सजा के साथ जुर्माना भी देना पड़ सकता है.

मुद्दे की बात यह है की आखिर कैसे इन निर्दोष पीड़ितों को रेप के झूठे आरोप से बचाया जाए. न जाने आज भी कितने निर्दोष व्यक्ति कालकोठरी में इस कलंक के साथ घुट-घुट के नरक की जिंदगी जी रहे हैं.

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इस पूरे मामले पर एडवोकेट सुमित शर्मा कहते हैं, “ जैसा कि हम जानते है आजकल किसी भी महिला या पुरुष की दोस्ती के बाद शारीरिक सबंध बना ना कोई बड़ी बात नही है. ऐसे में बहुत सी महिलाएं पुरुष को शादी के लिए या ठगने के लिए उस पर धारा 376 IPC रेप का आरोप लगा देती हैं. यदि कोई पुरुष शादी का झांसा देकर शारीरिक सबंध बनाता है तो ये रेप के श्रेणी में आता है. लेकिन कई बार लड़का निर्दोष होता है और लड़की के जाल में फंस जाता है. ऐसे में लड़को को इन सुझावों को अपनाना चाहिए-

1 यदि रेप करने का कोई ठोस सबूत नहीं है तो आप लड़की से शारीरिक सबंध नकार सकते हैं और मेडिकल टेस्ट में टू फिंगर टेस्ट की रिपोर्ट पर जोर देकर महिला को गलत साबित कर सकते हैं.

2 अगर महिला ने कभी शारीरिक सबंधो के लिए अप्रोच किया है और उस का कोई सबूत आपके पास है तो आप उस सबूत को कोर्ट में पेश करें, गवाह भी पेश कर सकते है.

3 यदि शारीरिक सबंधो की रिपोर्ट फोरेंसिक रिपोर्ट या वीडियो या फोटो में है तो आप सबंध बनाना स्वीकार करें तथा सबंध धोखे से नहीं बनाये ये साबित करें. लेकिन ध्यान रखें ये तभी करगार है जब लड़की की उम्र 18 साल या इस से ज्यादा है.

4 मेडिकल रिपोर्ट की कमियां देखें और उन्हें हथियार के तौर पर इस्तेमाल करें.

5 यदि केस ज्यादा गंभीर है तो चार्जशीट जल्दी फाइल करवाने की कोशिश करें.

EDITED BY- NISHA RAI

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डार्क सर्कल्स हटाने के आसान तरीके हम से जानिए

कहते हैं आंखें दिल का हाल बयां करती हैं, मगर आप शायद यह नहीं जानते कि आंखें सेहत का हाल भी सुनाती हैं. स्वस्थ चमकदार आंखों की तुलना में थकीथकी, डार्क सर्कल्स से घिरी आंखें आप की गलत जीवनशैली और खराब सेहत का संकेत देती हैं. साथ ही आप को उम्रदराज भी दिखाती हैं.

मेकअप से डार्क सर्कल्स छिपाने की कितनी भी कोशिश की जाए ये छिपते नहीं हैं. क्यों होते हैं डार्क सर्कल्स डार्क सर्कल्स अस्तव्यस्त जीवनशैली, हारमोंस में परिवर्तन, आनुवंशिकता, तनाव आदि कई कारणों से हो सकते हैं.

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थकान और तनाव: महिलाएं अपनी सेहत के प्रति लापरवाह होती हैं. पूरा दिन घर वालों की फरमाइशें पूरी करने में लगी रहती हैं. उन्हें अपने खानेपीने या आराम करने का होश नहीं रहता. औफिस जाने वाली महिलाओं पर काम का दोहरा बोझ होता है. इस तरह तनाव, शारीरिक थकावट और नींद की कमी उन की आंखों के नीचे काले घेरों के रूप में उभरने लगती है.

बीमारी: ऐनीमिया, किडनी रोग, टीबी, टाइफाइड जैसी कई बीमारियों में कमजोरी से आंखों के नीचे काले घेरे बन सकते हैं.

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पानी की कमी: डिहाईड्रेशन की वजह से अकसर इस तरह की समस्या पैदा हो जाती है. कम पानी पीने से शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सही ढंग से नहीं हो पाता, जिस से आंखों के नीचे की नसों को पूरा खून नहीं मिल पाता. नतीजतन डार्क सर्कल्स हो जाते हैं.

नशा: धूम्रपान, शराब, कैफीन या और किसी तरह का नशा करने की आदत भी डार्क सर्कल्स की वजह बन सकती है.

पिगमैंटेशन: तेज धूप में ज्यादा रहने से भी डार्क सर्कल्स पड़ जाते है.

मेकअप: आंखों के नीचे की त्वचा काफी पतली और सैंसिटिव होती है. गलत मेकअप प्रोडक्ट्स का प्रयोग डार्क सर्कल्स की वजह बन सकता है.

सोडियम और पोटैशियम की अधिकता: भोजन में इन की ज्यादा मात्रा से डार्क सर्कल्स हो सकते हैं. बींस, पीनट बटर, योगर्ट, दूध, टमाटर, संतरे, आलू वगैरह में पोटैशियम अधिक मात्रा में पाया जाता है. अधिक नमक की वजह से भी शरीर में सोडियम अधिक मात्रा में पहुंच जाता है.

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ऐलर्जी पैदा करने वाले खाद्यपदार्थ: डार्क सर्कल्स किसी खास खाद्यपदार्थ के प्रति ऐलर्जिक रिएक्शंस या सैंसिटिविटी का नतीजा भी हो सकते हैं. चौकलेट, मटर, यीस्ट, खट्टे फल, चीनी आदि सामान्य ऐलर्जिक फूड्स हैं.

क्या है उपाय संतुलित और पौष्टिक भोजन: कोशिश करें कि आप के भोजन में विटामिन और आयरनयुक्त खाद्यपदार्थ पर्याप्त मात्रा में हों जैसे हरी पत्तेदार सब्जियां, फलियां, मौसमी फल, मछली, अंडे आदि.

नींद: वैसे तो हर व्यक्ति के लिए नींद की जरूरत अलगअलग होती है, फिर भी औसतन एक युवा महिला को 6-7 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए. कोशिश करें कि रोज रात में जल्दी सोएं और सुबह जल्दी उठें.

आंखों को तेज धूप से बचाएं: अपनी आंखों को अल्ट्रावायलेट किरणों के संपर्क में न आने दें. जब भी तेज धूप में निकलना हो काला चश्मा जरूर पहनें.

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विटामिन सप्लिमैंट्स: विटामिन बी 12, बिटामिन ए, के, ई या डी, फौलिक एसिड आदि की कमी से भी डार्क सर्कल्स हो सकते हैं. इस के लिए डाक्टर की सलाह से मल्टीविटामिन और दूसरे सप्लिमैंट्स ले सकती हैं.

खूब पानी पीएं: दिनभर में 7-8 गिलास पानी जरूर पीएं. डिहाइड्रेशन से बचने के लिए जूस, सूप और दूसरे पौष्टिक पेयपदार्थ भी बीचबीच में लेती रहें.

दूध: दूध लैक्टिक एसिड, अमीनो एसिड, ऐंजाइम्स, प्रोटीन और दूसरे कई ऐंटीऔक्सीडैंट्स के गुणों से भरपूर होता है. अत: दिन में 2 बार दूध पीने की आदत डालें.

कंसीलर: एक अच्छी क्वालिटी का कंसीलर उपयोग में लाएं, जो त्वचा की टोन से मिलता हो. इस की सहायता से डार्क सर्कल्स कवर करें. फिर पाउडर बुरक कर इसे सैट कर लें.

स्किन पैच टैस्ट करें: जो उत्पाद त्वचा पर जलन पैदा करे या रैशज लाए, आंखों में दर्द या पानी आने की वजह बने उस का उपयोग तुरंत बंद कर दें.

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घर की दीवारों को इन 5 टिप्सों से बनाएं खास

घरों की सफेद दीवारें बेहद शांत सी दिखती हैं. क्रिएटिव लोगों के घरों की दीवारों पर आपको हमेशा कुछ न कुछ आर्टिस्टिक दिखेगा. सफेद दीवारों से घर और कमरे बड़े दिखते हैं, रोशनी ज्‍यादा आती है लेकिन आपको कुछ समय बाद खालीपन सा लगने लगता है. अगर आप अपनी सफेद दीवार में कुछ ब्‍यूटी जोड़ना चाहते हैं तो इनमें से कुछ क्रिएटिव काम कर सकते हैं.

कमरे की दीवारों को आर्टवर्क, पुरानी तस्‍वीरों या डिजाइन से सजाएं. इससे आपको कमरे में नयापन भी लगेगा और रौनक भी आएगी.

4 टिप्स: पुरानी चीजों से दें अपने घर को नया लुक

  1. पुरानी तस्‍वीरें

अपने घर की दीवारों को पुरानी तस्‍वीरों से सजाएं. आप चाहें तो कलर्ड फ्रेम ला सकते हैं या फिर यूं ही तस्‍वीरों को पेस्‍ट कर सकते हैं. इससे आपको बहुत मजा आएगा और आप लेटे-लेटे उन यादों को ताजा भी कर लेंगे.

2. पेंट ब्रश से करें कलाकारी

ब्रश और पेंट लें व दीवारों पर कुछ अच्‍छी सी डिजाइन पेंट कर लें. इससे दीवारों पर रौनक आ जाएगी और रूम में अच्‍छा सा लगेगा. जो भी बनाएं, वो बहुत पॉजीटिव होना चाहिए. रंगों और शेड का खास ख्‍याल रखें.

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3. रंगों और फैब्रिक से करें सजावट

रंगों को मिक्‍स करके और फैब्रिक को मिलाकर आप डिजाइन तैयार करें. आप चाहें तो वेल्‍वेट पेपर पर रंग से कुछ तैयार कर सकते हैं. इस डिजाइन पर तस्‍वीरों को चिपका सकते हैं. इस तरह कुछ भी अलग और स्‍टाइलिश सा बन जाएगा.

4. वूडन बुक शेल्‍फ

अगर आप किताबों के शौकीन हैं तो दीवारों पर वूडन शेल्‍फ बनवा दें और इनमें किताबों को रखें. इससे आपका कलेक्‍शन भी तैयार हो जाएगा और दीवार पर भी कुछ क्रिएटिव काम हो जाएगा.

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5. बोल्‍ड एस्‍सेसरीज

प्‍योर व्‍हाइट वॉल पर बोल्‍ड एस्‍सेसरीज को कोई नहीं बीट कर सकता है. आप मेटेलिक प्रिंट के कुशन को कमरे में रखें. एक्‍ट्रा लाइट लगाएं और बोल्‍ड कलर की एस्‍सेसरीज को स्‍टक करें.

इस गाने की वजह से करण जौहर की नई स्टूडेंट बनीं तारा सुतारिया

आमतौर पर बौलीवुड में नए प्रतिभाशाली कलाकार को ब्रेक किसी की सिफारिश या संघर्ष करते हुए कई बार औडीशन देने के बाद ही मिलता है. मगर करण जौहर की नई फिल्म ‘‘स्टूडेंट आफ द ईअर 2’’ में ‘मिया’ का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस तारा सुतारिया के सेलेक्शन की कहानी बिल्कुल ही अलग और हटकर है.

एक्टिंग में नहीं आना चाहती थीं तारा…

हकीकत यह कि पिछले 13 सालों से देश और विदेश में डांस और सिंगिंग के स्टेज शो करती आ रहीं तारा सुतारिया ने एक्टिंग के बारे में सोचा ही नहीं था. मगर एक म्यूजिक कंसर्ट के दौरान तारा और करण जौहर की मुलाकात हुई और दोनों इस कदर जुड़े कि करण ने उसी वक्त तारा को अपनी फिल्म ‘‘स्टूडेंट आफ द ईअर 2’’ की स्टूडेंट बना लिया था. यह कोई अफसाना नही बल्कि हकीकत है.

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हाल ही में फिल्म ‘‘स्टूडेंट आफ द ईअर 2’’ के प्रमोशन के दौरान जब तारा सुतारिया से हमारी एक्सक्लूसिव बातचीत हुई, तो तारा सुतारिया ने इस बारे में खुलकर बताया…

एक गाने की वजह से बनीं करण की हीरोइन…

‘‘मैं क्लियर कर दूं कि अब तक मैं डांस और सिंगिंग के शो ही करती आई हूं. पहले मेरी तमन्ना डांस और सिंगिंग के क्षेत्र में ही कैरियर बनाने की थी, पर तकदीर ने मुझे एक्ट्रेस बना दिया. दरअसल, हुआ यूं कि जब एक शो में मैं पहली बार करण जौहर से मिली, तो हम फौरन एक दूसरे के साथ जुड़ गए थे. उसकी वजह यह थी कि उस दिन मैंने ‘आ गले लग जा’ सौन्ग गाया था. यह मेरा फेवरेट गाना है. करण जौहर का भी यह फेवरेट सौंग है. इसी वजह से हम दोनों एक दूसरे के सथ जुड़ गए थे.

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करण ने कहा था- पढ़ाई पूरी करो…

इसके बाद करण ने मुझे ‘स्टूडेंट आफ द ईअर 2’ का आफर दिया था. लेकिन तब मैं पढ़ाई कर रही थी. तो मैंने कह दिया कि मैं तो अभी पढ़ाई कर रही हूं. तब उन्होंने कहा, ‘आप ग्रेज्युएशन पूरा कर लीजिए. तब तक हमारी फिल्म की स्क्रिप्ट तैयार हो जाएगी.’ ग्रेज्युएशन के एग्जाम देने के बाद मैंने ‘स्टूडेंट आफ द ईअर 2’ के लिए आडिशन दिए और मिया के किरदार के लिए मेरा चयन हो गया.’’

Edited By- Nisha Rai

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बिपाशा की शादी के 3 साल पूरे, लंदन में ऐसे किया सेलिब्रेट…

यह कहना गलत नही है कि एक्ट्रेस बिपाशा बसु और करन दोनों बौलीवुड के हौट कपल्स में से हैं. जो आज यानी 30 अप्रैल को अपनी तीसरी वेडिंग एनिवर्सरी मना रही हैं. जिसे सेलिब्रेट करने के लिए बिपाशा अपने पति करण के साथ लंदन पहुंच गई हैं, जहां पर वह शादी की सालगिरह के साथ-साथ अपना वेकेशन भी खूब इंजौय कर रही हैं. आइए आपको दिखाते हैं उनके वेकेशन की कुछ खास तस्वीरें, जिन्हें बिपाशा ने अपने सोशल मीडिया पर शेयर किया.

शादी के वीडियो के साथ मैसेज किया शेयर

अपने पति करण के लिए लिखा, शादी के दिन से अब तक मेरे चेहरे पर उस बड़ी मुस्कान का कारण… तुम हो. विश्वास नहीं हो रहा कि यह हमारी तीसरी शादी की सालगिरह है, इतनी जल्दी,  मुझे प्यार करने के लिए थैक्स… आप मेरे लिए बहुत कीमती हो.

नेपोटिज्म पर खुलकर बोलीं करण की नई स्टूडेंट, ऐसी की सबकी बोलती बंद

फैंस का भी किया शुक्रिया अदा

 

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Celebrating our love ❤️ #monkeyversary #monkeylove

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लोगों को थैंक्स कहते हुए अपने इंस्टाग्राम पर बिपाशा ने लिखा, मुझे हर एक व्यक्ति याद है… चाहे मेरे जानने वाले हो या अजनबी… जिन्होंने मुझे हमारी शादी पर कहा कि मैं अब तक की सबसे खुश दुल्हन लग रही हूं.

सेट पर बेहोश हुईं दीपिका, फोटो देख फैंस ने पूछा ये सवाल

 

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Love in Soho❤️ #monkeylove #londonloving

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बता दें, पौवर कपल इस समय लंदन में छुट्टियां मना रहा है और लगातार क्यूट फोटोज और वीडियोज से फैन्स से शेयर कर रहे है. वहीं बड़े पर्दे पर बिपाशा और करण जल्द ही विक्रम भट्ट की एक्शन थ्रिलर, एडिट डायरीज में स्क्रीन शेयर करते हुए दिखाई देंगे. जिसका सेट लंदन में है, और  फिल्म 2019 में रिलीज होगी.

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प्रकृति के नियमों पर कैसे चढ़ा धार्मिक रंग

क्या आप ने कभी देखा की चींटियों ने अपने ईष्ट देव के मंदिर बनाए, मूर्तियां गढ़ीं और पूजा की या मस्जिद बनाई और नमाज पढ़ी? चींटियों, दीमक की बांबियों में, मधुमक्खियों के छत्तों में क्या कोई कमरा ईश्वर के लिए भी होता है? क्या आप ने कभी देखा कि बंदरों ने व्रत रखा या त्योहार मनाया. पक्षी अपने अंडे देने के लिए कितनी कुशलता और तत्परता से सुंदरसुंदर घोंसले बनाते हैं, मगर इन घोंसलों में वे ईश्वर जैसी किसी चीज के लिए कोई पूजास्थल नहीं बनाते? ईश्वर जैसी चीज का डर मानव के सिवा धरती के अन्य किसी भी जीव में नहीं है. ईश्वर का डर मानवजाति के दिल में हजारों सालों से निरंतर बैठाया जा रहा है.

इस धरती पर करीब 87 लाख जीवों की विभिन्न प्रजातियां रहती हैं. इन लाखों जीवों में से एक मनुष्य भी है. ये लाखों जीव एकदूसरे से भिन्न आकारव्यवहार के हैं, मगर इन में एक चीज समान है कि इन में से प्रत्येक में 2 जातियां हैं, एक नर और एक मादा. प्रकृति ने इन 2 जातियों को एक ही काम सौंपा है कि वे एकदूसरे से प्रेम और सहवास के जरिए अपनी प्रजाति को आगे बढ़ाए और धरती पर जीवन को चलाते रहें.

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जीवविज्ञानियों ने धरती पर पाए जाने वाले लाखों जीवों के जीवनचक्र को जानने के लिए तमाम खोजें, अनुसंधान और प्रयोग किए हैं. मगर आज तक किसी वैज्ञानिक ने अपनी रिसर्च में यह नहीं पाया कि मनुष्य को छोड़ कर इस धरती का कोई भी अन्य जीव ईश्वर जैसी किसी सत्ता पर विश्वास करता हो.

ईश्वर की सत्ता को साकार करने के लिए उस के नाम पर धर्म गढ़े गए. धर्म के नाम पर मंदिर, मस्जिद, शिवाले, गुरुद्वारे, चर्च ईजाद हुए. इन में शुरु हुए पूजा, भक्ति, नमाज, प्रार्थना जैसे कृत्य. इन कृत्यों को करवाने के लिए यहां महंत, पुजारी, मौलवी, पादरी, पोप बैठाए गए और उस के बाद यही लोग पूरी मानवजाति को धर्म और ईश्वर का डर दिखा कर अपने इशारों पर नचाने लगे. अल्लाह कहता है 5 वक्त नमाज पढ़ो वरना दोजख में जाओगे. ईश्वर कहता है रोज सुबह स्नान कर के पूजा करो वरना नरक प्राप्त होगा जैसी हजारों अतार्किक बातें मानवजगत में फैलाई गईं. हिंसा के जरीए उन का डर बैठाया गया. स्वयंभू धर्म के ठेकेदार इतने शक्तिशाली हो गए कि कोई उन से यह प्रश्न पूछने की हिम्मत ही नहीं कर पाया कि ईश्वर कब आया? कैसे आया? कहां से आया? दिखता कैसा है? सिर्फ तुम से ही क्यों कह गया सारी बातें, सब के सामने आ कर क्यों नहीं कहीं?

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मानवजगत ने बस स्वयंभू धर्माचार्यों की बातों पर आंख मूंद कर विश्वास किया, उन्होंने जैसा कहा वैसा किया. धर्माचार्यों ने तमाम नियम गढ़ दिए. ऐसे जियो, ऐसे मत जीयो. यह खाओ, वह न खाओ. यह पहनो, वह मत पहनो. यहां जाओ, वहां मत जाओ. इस से प्यार करो, उस से मत करो. यह अपना है, वह पराया है. अपने से प्यार करो, दूसरे से घृणा करो. इस में कोई संदेह नहीं है कि धर्माचार्यों ने इस धरती पर मानवजाति को भयंकर लड़ाइयों में झोंका है. किसी भी धर्म की जड़ों को तलाश लें, उस धर्म का उदय लड़ाई से ही हुआ है. हजारों सालों से धर्म के नाम पर भयंकर जंग जारी है. आज भी धरती के विभिन्न हिस्सों पर ऐसी लड़ाइयां चल रही हैं. यहूदी, मुसलमानों, ईसाइयों, हिंदुओं को हजारों सालों से धर्म और ईश्वर के नाम पर लड़ाया जा रहा है.

क्या इस धरती पर रह रहे किसी अन्य जीव को देखा है धर्म और ईश्वर के नाम पर लड़ते? वे नहीं लड़ते, क्योंकि उन के लिए इन 2 शब्दों (ईश्वर और धर्म) का कोई वजूद ही नहीं है. वे जी रहे हैं खुशी से, प्रेम से, जीवन को आगे बढ़ाते हुए, प्रकृति और सृष्टि के नियमों पर.

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धर्म ने सब से ज्यादा प्रताडि़त और दमित किया है औरत को, जो शारीरिक रूप से पुरुष से कमजोर है. अगर उस ने अपने ऊपर लादे जा रहे नियमों को मानने से इनकार किया तो उस के पुरुष को उस पर जुल्म करने के लिए उत्तेजित किया गया. उस से कहा गया अपनी औरत से यह करवाओ वरना ईश्वर तुम्हें दंड देगा. तुम नर्क में जाओगे, तुम जहन्नुम में जाओगे. और पुरुष लग गया अपने प्यार को प्रताडि़त करने में. उस स्त्री को प्रताडि़त करने में जो उस की मदद से इस धरती पर मानवजीवन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी निभाती है.

1 धर्म की देन है वेश्यावृत्ति

प्रकृति ने पुरुष और स्त्री को यह स्वतंत्रता दी थी कि युवा होने पर वे अपनी पसंद के अनुरूप साथी का चयन कर के उस के साथ शारीरिक संबंध स्थापित करें और सृष्टि को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दें. धर्म ने मानवजाति को अलग-अलग दायरों में बांध दिया. हिंदू दायरा, मुसलिम दायरा, क्रिश्चियन दायरा, पारसी, जैनी वगैरहवगैरह. इन दायरों के अंदर भी अनेक दायरे बन गए हैं. इंसान विभाजित होता चला गया.

हर दायरे को नियंत्रित करने वाले धर्माचार्यों ने नायकों या राजाओं का चयन किया और उन्हें तमाम अधिकारों से सुसज्जित किया. इन्हीं अधिकारों में से एक था स्त्री का भोग. धर्माचार्यों ने स्त्रीपुरुष समानता के प्राकृतिक नियम को खारिज कर के पुरुष को स्त्री के ऊपर बैठा दिया.

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धर्माचार्यों ने राजाओंनायकों को समझाया कि स्त्री मात्र भोग की वस्तु है. रंगमहलों में, हरम में भोग की इस वस्तु को जबरन इकट्ठा किया जाने लगा. 1-1 राजा के पास सैकड़ों रानियां होने लगीं. नवाबों के हरम में दासियां इकट्ठा हो गई. इसी बहाने से धर्माचार्यों ने अपनी ऐय्याशियों के सामान भी जुटाए.

देवदासी प्रथा की शुरुआत हुई. स्त्री नगरवधू बन गई. मरजी के बगैर सब के सामने नचाई जाने लगी. सब ने उस के साथ जबरन संभोग किया. देवदासियों का उत्पीड़न एक रिवाज बन गया. कालांतर में औरत तवायफ, रंडी, वेश्या के रूप में कोठों पर कैद हो गई और आज प्रौस्टीट्यूट या बार डांसर्स के रूप में होटलों में दिखती है. स्त्री की इस दशा का जिम्मेदार कौन है? सिर्फ धर्म.

2 धर्म की देन है वैधव्य

पुरुष साथी की मृत्यु के बाद स्त्री द्वारा दूसरे साथी का चुनाव करने पर धर्म और ईश्वर का डर दिखा कर धर्माचार्यों ने प्रतिबंध लगा दिया. पुरुष की मृत्यु किसी भी कारण से क्यों न हुई हो, इस का दोषी स्त्री को ठहराया गया. सजा उसे दी गई. उस से वस्त्र छीन लिए गए. बाल उतरवा लिए गए. शृंगार पर प्रतिबंध लगा दिया.

उसे उसी के घर में जेल जैसा जीवन जीने के लिए बाध्य किया गया. उसे नंगी जमीन पर सोने के लिए मजबूर किया गया. जिस ने चाहा उस के साथ बलात्कार किया. उसे रूखासूखा भोजन दिया गया. स्त्री की इच्छा के विरुद्ध ये सारे हिंसात्मक कृत्य धर्माचार्यों ने ईश्वर का डर दिखा कर पुरुष समाज से करवाए. विधवा को वेश्या बनाने में भी वे पीछे नहीं रहे.

इस धरती पर किसी अन्य जीव के जीवनचक्र में क्या ऐसा होते देखा गया है? किसी कारणवश नर की मृत्यु के बाद मादा दूसरे नर के साथ रतिक्रिया करती हुई सृष्टि के नियम को गतिमान बनाए रखती हैं. मादा की मृत्यु के बाद ऐसा ही नर भी करता है. वहां प्रताड़ना का सवाल ही पैदा नहीं होता, वहां सिर्फ प्रेम होता है.

3 धर्म की देन है सती और जौहर प्रथा

धर्माचार्यों ने अपने धर्म के प्रसार के लिए पहले लड़ाइयां करवाईं. उन में लाखों पुरुषों को मरवाया. लूटपाट मचाई, जीते हुए राजाओं और उन के सैनिकों ने हारने वाले राजाओं और उन के कबीले की औरतों पर जुल्म ढाए. सैनिकों ने उन से सामूहिक बलात्कार किए, उन की हत्याएं कीं, उन्हें दासियां बना कर ले गए. धर्माचार्यों ने इस कृत्य की सराहना की. इसे योग्य कृत्य बताया. कभी किसी धर्माचार्य ने इस कृत्य पर उंगली नहीं उठाई.

औरतों ने इस प्रताड़ना, शोषण, उत्पीड़न और बंदी बनाए जाने के डर से अपने राजा की सेना के हारने के बाद सती और जौहर का रास्ता इख्तियार कर लिया. धर्माचार्यों ने इस कृत्य को भी उचित ठहरा दिया. औरतें अपने पुरुष सैनिकों की लाशों के साथ खुद को जला कर खत्म करने लगीं. सामूहिक रूप से इकट्ठा हो कर आग में जिंदा कूद कर जौहर करने लगीं.

जरा सोचिए, कितना दर्द सहती होंगी वे. आप की उंगली जल जाए, फफोला पड़ जाए तो कितना दर्द होता है. और वे समूची आग में जलती रहीं, किसी धर्माचार्य ने उन के दर्द को महसूस नहीं किया, यह उस वक्त का सब से पुनीत धार्मिक कृत्य बताया जाता था.

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4 बाल विवाह भी धर्म की देन

धर्म के ठेकेदारों ने अपनेअपने धर्म के दायरे खींचे और स्त्रीपुरुष की इच्छाअनिच्छा को अपने कंट्रोल में कर लिया. पुरुष और स्त्री अपने धर्म के दायरे से निकल कर कहीं दूसरे के धर्म में प्रवेश न कर जाएं, किसी अन्य के धर्म के व्यक्ति को अपना जीवनसाथी न बना लें, इस पर नियंत्रण करने के लिए बाल विवाह की प्रथा शुरू की गई. नवजात बच्चों तक की शादियां करवाई जाने लगीं ताकि जवान होने के बाद वे अपनी पसंद या रुचि के अनुसार अपना प्रेम न चुन सकें.

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4 होममेड टिप्स: आसानी से ऐसे छुड़ाएं नेल पौलिश

नेल पौलिश लगाने से आपकी उंगलियों की सुंदरता बढ़ती हैं. पर इन्हें लगाने का सही तरीका पता होना चाहिए. आमतौर पर नेल पौलिश उंगलियों के किनारे चिपक जाते हैं. अगर आप भी नेल पौलिश छुड़ाना चाहती हैं तो आपको कुछ घरेलू उपाय बताते हैं जिससे आप आसानी से छुड़ा सकती हैं.

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  1. सिरका

सिरके का उपयोग भी नेल पौलिश छुड़ाने के लिए किया जा सकता है. कौटन की रुई को सिरके में डुबोकर धीरे-धीरे उंगलियों पर रगड़ें. इससे नेल पौलिश पूरी तरह छूट जाएगी.

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2. टूथपेस्ट

अगर नेल पौलिश पूरी तरह ना छूट रही हो तो नाखून पर टूथपेस्ट लगा लें. धीरे-धीरे इसे कौटन से रगड़ें. नेल पौलिश छूट जाएगी.

3. नेल पौलिश

नेल पौलिश लगाने से पहले उसकी कुछ बूंदें नाखून पर गिराएं और तुरंत कपड़े से साफ कर लें. नाखून पूरी तरह साफ हो जाएगा. अब आप आराम से नेल पौलिश लगा सकती हैं.

4. गर्म पानी

गर्म पानी से भी नेल पौलिश को छुड़ाया जा सकता है. एक कटोरी में गर्म पानी लें और अपने नाखूनों को 10 मिनट तक उसमें डुबो कर रखें. उसके बाद कौटन से मल लें. पुराना नेल पौलिश उतर जाएगा.

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तेजी से वजन कम करना है खतरनाक

मोटापे से पीड़ित लोगों के लिए वजन कम करना किसी चुनौती से कम नहीं है. इसके लिए लोग सब कुछ करने को तैयार होते हैं. वो एक्सरसाइज करते हैं, डाइटिंग करते हैं, दवाइयां लेते हैं, पर कई बार उन्हें इसका परिणाम मन मुताबिक नहीं मिलता. वजन जल्दी कम करने की इस जद्दोजहत में लोग कई गलत तरीके अपना बैठते हैं और उसका उनकी सेहत पर काफी बुरा असर होता है.

आइए जाने कि जल्दी वजन कम करने के लालच में सेहत का क्या नुकसान होता है.

डिहाइड्रेशन

quick weight loss is dangerous to health

वेटलौस की कई डाइट्स से शरीर में डिहाइड्रेशन होता है. शरीर में पानी की कमी होने से कब्ज, सिर दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और एनर्जी की कमी होने लगती है. साथ ही स्किन भी अधिक ड्राई हो जाती है.

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शरीर में न्यूट्रिशन की कमी

वजन कम करने के लिए लोग अक्सर कैलोरी फ्री डाइट लेने लगते हैं, जिसका असर होता है कि उनके शरीर से न्यूट्रिशन की कमी हो जाती है. जैसे कि कीटो डाइट में कार्बोहाइड्रेट नहीं होता है, जो शरीर में एनर्जी बनाए रखने के लिए जरूरी होता है. यही कारण है कि जिन लोगों की डाइट में कार्बोहाइड्रेट की कमी होती है, उन लोगों को जल्दी थकान महसूस होने लगती है. साथ ही ऐसे लोगों का मूड भी तेजी से स्विंग होता है. कई लोगों में खून की कमी भी हो जाती है.

दिमाग के लिए होता है बुरा

वेट लौस से शरीर के साथ साथ मानसिक सेहत भी बुरी तरह से प्रभावित होती है.  डाइट के बिगड़ने और शरीर में न्यूट्रिशन की कमी होने से कई प्रकार की मानसिक समस्याएं होने लगती हैं.

मेटाबौलिज्म के लिए सही नहीं

मोटापे से परेशान लोग वजन कम करने के चक्कर में अक्सर भूल जाते हैं कि वजन कम करने से मेटाबौलिज्म पर बुरा असर होता है. डाइट में कैलोरी की कमी होने से मेटाबॉलिज्म के काम करने की क्षमता धीमी हो जाती है. बता दें, मेटाबौलिज्म के सही ढंग से काम ना करने की वजह से वजन कम होने के बजाए बढ़ने लगता है.

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मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं

वजन कम करने वाली डाइट से कई बार मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं. लंबे समय तक इस डाइट का सेवन मांसपेशियों के लिए अच्छा नहीं होता.

मिनटों में ऐसे चमकाएं किचन टाइल्स

किचन को रोज पूरी तरह से साफ करना हर किसी के लिए मुश्किल होता है. ऐसे में किचन फ्लोर और किचन वाले टाइल्स पर गंदगी जमा होने लगती है और जब सफाई करने की बारी आती है तो समझ में नहीं आता कि इसे कैसे साफ करें.

जानिए, कुछ आसान उपाय जो टाइलों पर जमा गंदगी साफ करने में आप की सहायता करेंगे:

किचन फ्लोर की सफाई

  1. किचन फ्लोर पर रोज पोंछा लगाएं. पोंछे के पानी में डिटर्जैंट या कीटाणुनाशक का प्रयोग जरूर करें. यह ध्यान रखें कि जिस कपड़े से पोंछा लगा रही हैं, वह साफ हो और इस्तेमाल के बाद भी उसे अच्छी तरह धो लें.

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2. यदि आप के घर में चींटियां हों, तो पोंछे के पानी में 1 बड़ा चम्मच नमक डाल लें.

3. यदि आप कुछ दिनों के बाद फर्श साफ कर रही हैं, तो पोंछा गरम पानी से लगाएं.

4.  पोंछा लगाने के बाद फर्श को दूसरे सूखे पोंछे से साफ करें. इस से फर्श चमक उठेगा और फर्श पर धूल भी नहीं जमेगी.

5. यदि फर्श पर कुछ गिर जाए तो उसे तुरंत साफ करें. वहां दाग न बनने दें.

सफाई किचन की टाइलों की

किचन की टाइल्स को आप निम्न घरेलू चीजों से भी साफ कर सकती हैं:

  1. सिरका: 2 कप सिरका और 2 कप पानी को मिला कर स्प्रे बोतल में भर लें. फिर इसे टाइल्स पर स्प्रे कर माइक्रो फाइबर कपड़े से साफ करें. यह कपड़ा दूसरे किसी भी कपड़े की तुलना में गंदगी को ज्यादा अच्छी तरह अवशोषित कर लेता है और इस से सतह पर खरोंचें भी नहीं पड़तीं.

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2. बेकिंग सोडा: बेकिंग सोडे का इस्तेमाल कर आप टाइल्स पर लगे दागों से आसानी से छुटकारा पा सकती हैं. बेकिंग सोडा और पानी का पेस्ट बना लें और फिर उसे दागों पर लगाएं. 10-15 मिनट तक सूखने दें. फिर गीले कपड़े से साफ करें. यदि दाग फिर भी साफ न हों तो किसी पुराने टूथब्रश से रगड़ कर साफ करें.

3. ब्लीच या अमोनिया: यदि आप को टाइल्स पर कीटाणु दिखाई दें, तो ब्लीच और पानी को समान मात्रा में मिला लें. इस मिश्रण को कीटाणु वाली सतह पर गोलाकार मुद्रा में लगाएं. अब टाइल्स को गरम पानी से साफ करें. इस के बाद सूखे कपड़े से साफ कर लें. याद रखें ब्लीच का इस्तेमाल करने से पहले हाथों में दस्ताने जरूर पहन लें.

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ध्यान रखें

  1. टाइल्स को साफ करने के लिए कभी तेजाब या अन्य हार्ड लिक्विड क्लीनर का प्रयोग न करें.

2. यदि रोज किचन वाल टाइल्स साफ करती हैं तो पानी में थोड़ा सा डिटर्जैंट मिला कर साफ करें.

3. टाइल्स को लोहे की जाली से रगड़ कर साफ करने की कोशिश न करें.

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