BIGG BOSS 13: कर्वी गर्ल्स के लिए परफेक्ट हैं रश्मि देसाई के ये लुक्स

कलर्स का शो, ‘बिग बौस का 13वां सीजन फैंस को काफी पसंद आ रहा है. जहां एक तरफ फैंस शहनाज और सिद्धार्थ का प्यार और तकरार देखकर खुश हैं तो वहीं दूसरी तरफ सिद्धार्थ और रश्मि की लड़ाई फैंस को काफी पसंद आ रही हैं. पर आज हम आपको रश्मि के बिग बौस 13 के सफर के बारे में नहीं बल्कि उनके फैशन के बारे में बताएंगे. रश्मि हेल्दी हैं इसलिए वह नए-नए लुक कैरी करने से नहीं कतराती. आज हम उनके इंडियन फैशन की बारे में आपको बताएंगे, जिसे आप अगर हेल्दी हैं या शादी के बाद ट्राय कर सकती हैं.

1. पिंक कलर है परफेक्ट

अगर आप हेल्दी हैं और कुछ नया ट्राय करना चाहती हैं तो अनारकली फैशन ट्रैंडी है. रश्मि की तरह पिंक कलर का लौंग अनारकली ड्रेस आपके लुक को पतला दिखाने में मदद करेगा. साथ ही इसके साथ अगर आप सिंपल पिंक कलर है तो उसके साथ कोशिश करें कि इयरिंग्स हैवी हो ताकि ये आपकी ड्रेस को डल न दिखाए.

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2. रश्मि का सिंपल लुक करें ट्राय

अगर आप कहीं पार्टी में जानें की बजाय कहीं घूमने जाने वाली हैं तो फ्लावर प्रिंट अनारकली सूट एकदम परफेक्ट हैं. वाइट कलर के अनारकली सूट पर पिंक कलर के फ्लावर प्रिंट का कौम्बिनेशन आपके लिए परफेक्ट औप्शन है.

3. लाइट कलर है परफेक्ट

 

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Elegance does not consist in putting on a new dress… #independentwoman#itsallmagical??#indiawoman#designerwear ?

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अगर आप हेल्दी हैं तो कोशिश करें कि डार्क कलर की जगह लाइट कलर को पार्टी के लिए इस्तेमाल करें. डार्क कलर जहां आपको हाइलाइट करते हैं तो वहीं लाइट कलर आपके लुक को परफेक्ट दिखाता है. आप भी रश्मि की तरह लाइट ब्लू शरारा के साथ वाइट कलर का कुर्ता ट्राय कर सकती हैं. साथ ही ज्वैलरी के लिए आप अगर हैवी चीजें ट्राय करेंगी तो ये आपके लुक के लिए परफेक्ट रहेगा.

4.  रश्मि का ये लुक करें ट्राय

 

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#? Styledby: @stylebysugandhasood Outfitby: @getnatty_official Jewelleryby: @the_jewel_gallery Assistedby: @shubhgaikwad17

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अगर आप कुछ नया ट्राय करना चाहते हैं तो ये लुक आपके लिए परफेक्ट औप्शन रहेगा. शोल्डर कट कुर्ते के साथ सिंपल शरारा आपके लुक के लिए बेस्ट रहेगा.

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रश्मि देसाई के अगर वर्क फ्रंट की बात करें तो वह सलमान खान के हिट रियलिटी शो में                          ‘बिग बौस 13’ में नजर आ सकती हैं. अब देखना ये है कि अगर वह ‘बिग बौस 13’ का हिस्सा बनतीं हैं तो क्या वह अपनी लव लाइफ का खुलासा करेंगी.

काम न मिलने पर मैं दुखी हो जाती हूं – भारती आचरेकर

सीरियल ‘बागले की दुनिया’ में राधिका बागले की भूमिका से चर्चित हुई अभिनेत्री भारती आचरेकर से कोई अपरिचित नहीं. अब वह कलर्स टीवी की सीरियल ‘नाटी पिंकी की लम्बी लव स्टोरी’ में दादी की भूमिका निभा रही हैं. कैसे उन्होंने अपनी लम्बी जर्नी तय की है, आइये जाने उन्ही से,

सवाल- इस शो में आपको क्या खास लगा?

इस शो में मैं दादी की भूमिका निभा रही हूँ. ये एक साधारण नाटी लड़की की कहानी है,क्योंकि समाज में ऐसी किसी भी कमतर लड़की को कैसे मजाक उड़ाया जाता है, उसकी शादी एक समस्या होती होती है आदि कई संवेदनशील मुद्दों को दिखाने की कोशिश की गयी है. इसके अलावा इसमें मेरी भूमिका अहम है और कहानी के साथ-साथ चलती है. धारावाहिक ‘सुमित संभाल लेगा’ के बाद मैंने कोई काम नहीं किया, क्योंकि सही काम मिल नहीं रहा था. इसमें मुख्य चरित्र पिंकी का दादी के साथ बहुत अच्छी दोस्ती है, जो मुझे अच्छी लगी.

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सवाल-क्या आपने अपने आसपास कभी ऐसी घटनाएं देखी है, जहां शारीरिक रूप से कुछ कम होने पर उसका मजाक उड़ाया जाता हो?

ये मैंने बहुत देखा है, जो मोटे होते है उन्हें लोग बहुत कुछ कहते है, उनका मजाक उड़ाया जाता है. उसपर फिल्में भी बहुत बनी है. वह दिमाग में सभी की होती है और ये एक मेंटल ब्लाक होता है, जो किसी की खामी को कहने से परहेज नहीं करती. इसमें भी खासकर लड़कियों को ये अधिक सहना पड़ता है. लडको के लिए कम होता है.

सवाल-आप ने एक लम्बी पारी अभिनय की पूरी की है, कैसे आई? अभी क्या महसूस कर रही है? इस बारें में बताएं.

मैंने 17 साल की उम्र से अभिनय शुरू किया और 25 साल तक थिएटर में काम करती रही. उस समय सोशल मीडिया और चैनेल्स भी नहीं थे. सिर्फ नाटकों में काम करती रही. साथ ही मैंने संगीत में ग्रेजुएट किया है. इसके बाद टीवी आई तो उसमें काम करना शुरू किया. फिर फिल्मों में काम मिलने लगा उसे किया, लेकिन फिल्मों में महिला चरित्र कलाकारों को अधिक काम नहीं मिलती थी, जबकि पुरुषों को अधिक महत्व दिया जाता था. ऐसे में टीवी और थिएटर में काम करने से संतुष्टि मिलती थी. अभी भी मैं नाटकों में काम करती हूँ. इसके अलावा 10 साल तक टीवी की प्रोड्यूसर भी बनी जो मैंने चैनल की तरफ से किया. बाद में मैंने खुद भी प्रोड्यूस की पर अधिक सफल नहीं रही.

सवाल-पहले की कहानी और आज की कहानियों में कितना अंतर पाती है?

बहुत अंतर है. मैं तो बागले की दुनिया की बात कहती हूँ जब लोगों के पास मनोरंजन के इतने साधन नहीं थे, जिससे लोगों में सिम्प्लिसिटी थी, जो आज नहीं है. मीडिया भी साधारण थी. अभी वेस्टर्न इन्फ्लुएंस आ गया है. इतने चैनेल आ गए है. लोगों की सोच और आदतें भी बदल गयी है. उन्हें आज हर चीज ‘लार्जर देन लाइफ’ चाहिए. वे कुछ अलग देखना चाहते है. आज लोगो की जिंदगी बहुत जद्दोजहद की है और जब वे घर आते है तो जो चीज उनके घर में नहीं है उसे देखना चाहते है. बागले की दुनिया उनके घर में होती है इसलिए वे उसे देखना नहीं चाहते.

सवाल-इतने सालों में आपको किसने अधिक प्रेरित किया?

ये बताना थोडा मुश्किल है, क्योंकि मैंने बहुत सारे बड़े-बड़े कलाकारों के साथ नाटकों में काम किया है, जिसमें अमोल पालेकर, डॉ. श्रीराम लागू, आदि सभी कलाकारों के साथ काम करते हुए मार्ग दर्शन मिले. आज के कलाकारों को तो ऐसे गुरु मिलना भी मुश्किल हो चुका है. ऐसे नहीं है, जिससे उन्हें कुछ सीखने का मौका मिले. वे करें तो करें क्या. उन्हें तो रेस में जाना है. यही चल रही है. बागले की दुनिया और मराठी नाटक ‘हमीदा बाईची कोठी’ को मैं आज भी मिस करती हूँ.

सवाल-संगीत में आपने शिक्षा ली है, क्या उस दिशा में कुछ किया? क्या कोई मलाल रह गया है?

उस समय संगीत में इतना पैसा नहीं था, जिससे की घर चले. आज अच्छा हो गया है. एक्टिंग अच्छी चल रही है. इस लिए उसमें कुछ नहीं कर पायी और मलाल रह गया है. मेरी माँ माणिक वर्मा गायिका थी और उन्होंने पद्मश्री भी प्राप्त की थी इसलिए परिवार में कला का माहौल हमेशा रहा और माता-पिता ने सहयोग भी दिया है. अभी मेरा एक बेटा है, जो विदेश में रहता है और दूसरे क्षेत्र में काम करता है. मुझे याद आता है, जब मैंने 34 साल की उम्र में अपने पति को खो दिया था.मेरा बेटा उस समय 9 साल का था और मुझे कमाने की जरुरत थी. ऐसे में संगीत के क्षेत्र में कोई पैसा नहीं मिल रहा था. अभिनय ने मेरा साथ दिया.

सवाल-नई जेनरेशन के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?

कभी-कभी मुश्किल उनके साथ काम करने की होती है. उनकी सोच मुझसे बहुत अलग है. मैं उसमें दखल नहीं देती. मैंने जो अपने जीवन में सीखा है, वह बहुत अलग है. अगर मैंने कभी किसी को कुछ कहा भी है तो कई बार उन्हें अच्छा नहीं लगता और मुझे पता चल जाता है, लेकिन कुछ लड़के लड़कियां है जो मुझसे सीखना चाहते है और मैं उन्हें सिखाती भी हूँ. इसके अलावा आज प्रतियोगिता अधिक है, जबकि हमारे समय में कलाकारों की संख्या कम थी. इसलिए उन्हें उस रेस में पड़ना पड़ता है और उन्हें आगे निकलने की होड़ लगी रहती है.

सवाल-आपकी फिटनेस का राज क्या है?

मैं हमेशा खुश रहना पसंद करती हूँ. इसके अलावा काम करते रहना चाहती हूँ. काम न मिलने पर मैं दुखी हो जाती हूँ.

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सवाल-खाली समय में क्या करती है?

मुझे खाना बनाने का शौक है. इसके अलावा फिल्में देखना, घूमना, नाटक देखना, बहनों के साथ मिलना आदि कई चीजे करती हूँ. मुझे अक्षय कुमार, दीपिका पादुकोण और करीना कपूर की फिल्में बहुत पसंद है.

सवाल-गृहशोभा की महिलाओं के लिए क्या मेसेज देना चाहती है?

जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते है. उसमें हमेशा सकारात्मक सोच बनाए रखने की जरुरत होती है. इसके अलावा हर महिला को आत्मनिर्भर होने की जरुरत है. इससे आत्मशक्ति बहुत बढती है और वे खुश रहती है. चौके चूल्हे में उसे गवाने की जरुरत नहीं होती.

BIGG BOSS 13: टास्क के दौरान बेहोश हुईं हिमांशी खुराना, प्रोमो हुआ रिलीज

‘बिग बौस 13’ में आए दिन नए-नए हंगामे होते रहते है. हर कंटेस्टेंट जीतने के लिए बेताब है. बीते दिनों घर में कैप्टेंसी टास्क में हर कंटेस्टेंट का साथ देने के लिए उनके कनेक्शन आए. वहीं इन कनेक्शन्स में सबसे ज्यादा इंतजार फैंस को हिमांशी खुराना (Himanshi Khurana) का था. वहीं अब घर में हिमांशी के साथ ऐसा हुआ कि असीम रियाज (Asim Riaz) घबरा गए. आइए आपको बताते हैं क्या हुआ शो में खास…

हिमांशी हुई बेहाश

मेकर्स ने वीकेंड से जुड़ा एक प्रोमो रिलीज किया है, जिससे हिमांशी और असीम के फैंस को झटका लगने वाला है. दरअसल, प्रोमो में दिखाया गया है कि टास्क के ‘नोटों की बारिश’ के दौरान भागा-दौड़ी के बीच हिमांशी खुराना को चोट लग जाएगी और वह टास्क के बीचों-बीच ही बेहोश हो जाएंगी.

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घबरा गए असीम

इसी के साथ प्रोमो में ये भी दिखाया गया है कि हिमांशी खुराना के बेहोश होने पर असीम घबरा जाएंगे, दूसरी तरफ हिमांशी की हालत इतनी बिगड़ जाएगी कि वह सांस लेना भी बंद कर देगी, ऐसे में असीम रियाज के साथ-साथ घर के सभी सदस्य हैरान-परेशान हो जाएंगे.

असीम कर चुके हैं प्यार का इजहार

आप सभी जानते हैं कि हिमांशी की शो में दोबारा एंट्री होते ही असीम रियाज, हिमांशी को शादी के लिए प्रपोज कर चुके हैं, जबकि विकास गुप्ता ने शहनाज को शो से बाहर उनकी गर्लफ्रेंड के बारे में बताया था.

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बता दें, वीकेंड के वार स्पेशल में आज घर का एक सदस्य घर से बाहर होने वाला है, जिसमें सबसे पहला नाम विशाल आदित्य सिंह का आ रहा है. वहीं शो में दोबारा एंट्री लेने वाले शो में कंटेस्टेंट्स के कनेक्शन भी शो से चले जाएंगे. अब देखना ये है कि इससे असीम और हिमांशी दोबारा घर से दूर चले जाएंगे.

क्रिएटिव आइडियाज से ऐसे घर को संवारे

घर में बहुत सारा सामान ऐसा होता है, जिसे हम बेकार समझ कर कबाड़ में फेक देते हैं लेकिन शायद आप नहीं जानते कि घर में प्लास्टिक की बोतलों से लेकर मैगजीन तक का सामान किसी न किसी काम में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है. बस इसके लिए आपको थोड़ी मेहनत करनी पड़ेगी. आज हम आपको ऐसा क्रिएटिव काम सिखाएंगे, जिसके बाद आप घर का वेस्ट सामना फेकने से पहले दो बार जरूर सोचेंगे. इन क्रिएटिव आइडियाज की मदद से आप बेकार मैटीरियल को अच्छे तरीके दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं.

1. घर में पड़ी बेकार बोतल को कुछ इस तरह उपयोग में लाए कि घर की सजावट अच्छी लगे, जिसके लिए आप सबसे पहले 2 प्लास्टिक की कोल्ड ड्रिंक बोतल ले और उसके base को  चाक़ू की  मदद से काट ले. अब आप दोनों  bottles के base को ऊपर-नीचे रख कर टेप से चिपका दे ध्यान रहे टेप पारदर्शक होनी चाहिए. अब आप एक मोटी वाली सुई लेकर बेस में छेद करे जो की जिपर को सिलने में मदद करेंगे. इसके बाद टेप को हटा लीजिये और जिपर को अंदर की तरफ सिल दे. बिलकुल ऐसे ही दूसरी बोतल के बेस को सिले.

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2. आजकल गाड़ी या साइकिल तो सबके पास होती है और कुछ सालों के बाद हम उनके टायर्स को चेंज भी करते है उस समय पुराना टायर आप दुकानदार के पास ही छोड़ आते हैं लेकिन टायर को हम अपने बगीचे में इस्तेमाल कर सकते है. इनके बीच मिटटी भर कर पौधा लगा सकते है.

3. जब हमारे बैग पुराने हो जाते है तो हम उन्हें फेक देते है पर कभी आपने सोचा है कि आप इन बैग को दीवार पर टांग कर घर को सजा सकते है. आप चाहे तो इनमे कोई भी अपनी मनपसंद तस्वीर लगा सकते है और इसे सजाने के लिए आप आर्टिफीसियल फूलों को भी लगा सकते है और फोटो फ्रेम भी बना सकते है.

4. आप संतरे को छिलके को मोमबत्ती स्टैंड की तरह प्रयोग कर सकते है. थोड़ा सा संतरा ऊपर से काट ले और अंदर से सारा गुदा निकल ले.  इसे डिज़ाइन से काट कर आप इसमें मोमबती रख सकते है.

5. आप कांच की बोतल को गुलदस्ते की तरह इस्तेमाल कर सकते है. सबसे पहले जितना भी बचा हुआ ऊन आपके घर में है वो ले लीजिए और बोतल में फेविकोल लगा कर चारो तरफ से लपेट दे, आपका गुलदस्ता तैयार है.

6. आप घर में पुरानी पड़ी CD से फोटो फ्रेम बना सकती है. जिससे आपके घर की दीवार और भी अच्छी लगेगी और आप भी थोड़े क्रिएटिव हो जाएंगे.

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हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए काम आएंगे ये टिप्स

पतिपत्नी और वो के बजाय पतिपत्नी और जीवन की खुशियों के लिए रिश्ते को प्यार, विश्वास और समझदारी के धागों से मजबूत बनाना पड़ता है. छोटीछोटी बातें इग्नोर करनी होती हैं. मुश्किल समय में एकदूसरे का सहारा बनना पड़ता है. कुछ बातों का खयाल रखना पड़ता है:

मैसेज पर नहीं बातचीत पर रहें निर्भर

ब्रीघम यूनिवर्सिटी में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक जो दंपती जीवन के छोटेबड़े पलों में मैसेज भेज कर दायित्व निभाते हैं जैसे बहस करनी हो तो मैसेज, माफी मांगनी हो तो मैसेज, कोई फैसला लेना हो तो मैसेज ऐसी आदत रिश्तों में खुशी और प्यार को कम करती है. जब कोई बड़ी बात हो तो जीवनसाथी से कहने के लिए वास्तविक चेहरे के बजाय इमोजी का सहारा न लें.

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ऐसे दोस्तों का साथ जिन की वैवाहिक जिंदगी है खुशहाल

ब्राउन यूनिवर्सिटी में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक यदि आप के निकट संबंधी या दोस्त ने डिवोर्स लिया है तो आप के द्वारा भी यही कदम उठाए जाने की संभावना 75% तक बढ़ जाती है. इस के विपरीत यदि आप के प्रियजन सफल वैवाहिक जीवन बिता रहे हैं तो यह बात आप के रिश्ते में भी मजबूती का कारण बनती है.

पतिपत्नी बनें बैस्ट फ्रैंड्स

‘द नैशनल ब्यूरो औफ इकोनौमिक’ द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जो दंपती एकदूसरे को बैस्ट फ्रैंड मानते हैं वे दूसरों के मुकाबले अपना वैवाहिक जीवन दोगुना अधिक संतुष्ट जीते हैं.

छोटी-छोटी बातें भी होती हैं महत्त्वपूर्ण

मजबूत रिश्ते के लिए समयसमय पर अपने जीवनसाथी को स्पैशल महसूस कराना जरूरी है. यह जताना भी जरूरी है कि आप उन की केयर करते हैं और उन्हें प्यार करते हैं. इस से तलाक की नौबत नहीं आती. आप भले ही ज्यादा कुछ नहीं पर इतना तो कर ही सकते हैं कि प्यारभरा एक छोटा सा नोट जीवनसाथी के पर्स में डाल दें या दिनभर के काम के बाद उन के कंधों को प्यार से सहला दें. उन के बर्थडे या अपनी ऐनिवर्सरी को खास बनाएं. कभीकभी उन्हें सरप्राइज दें. ऐसी छोटीछोटी गतिविधियां आप को उन के करीब लाती हैं.

वैसे पुरुष जिन्हें अपनी बीवी से इस तरह की सपोर्ट नहीं मिलती उन के द्वारा तलाक दिए जाने की संभावना दोगुनी ज्यादा होती है, जबकि स्त्रियों के मामले में ऐसा नहीं देखा गया है. इस की वजह यह है कि स्त्रियों का स्वभाव अलग होता है. वे अपने दोस्तों के क्लोज होती हैं. ज्यादा बातें करती हैं. छोटीछोटी बातों पर उन्हें हग करती हैं. अनजान लोग भी महिलाओं को कौंप्लिमैंट देते रहते हैं, जबकि पुरुष स्वयं में सीमित रहते हैं. उन्हें फीमेल पार्टनर या पत्नी से सपोर्ट की जरूरत पड़ती है.

आपसी विवादों को करें बेहतर ढंग से हैंडल

पतिपत्नी के बीच विवाद होना बहुत स्वाभाविक है और इस से बचा नहीं जा सकता. मगर रिश्ते की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि आप इसे किस तरह हैंडल करते हैं. अपने जीवनसाथी के प्रति हमेशा सौम्य और शिष्ट व्यवहार करने वालों के रिश्ते जल्दी नहीं टूटते. झगड़े या विवाद के दौरान चिल्लाना, अपशब्द बोलना या मारपीट पर उतारू हो जाना रिश्ते में जहर घोलने जैसा है. ऐसी बातें इंसान कभी भूल नहीं पाता और वैवाहिक जिंदगी पर बहुत बुरा असर पड़ता है.

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एक अध्ययन में इस बात का खुलासा किया गया है कि कैसे फाइटिंग स्टाइल आप की मैरिज को प्रभावित करती है. शादी के 10 साल बाद वैसे कपल्स जिन्होंने तलाक ले लिया और वैसे कपल्स जो अपने जीवनसाथी के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहे थे, के बीच जो सब से महत्त्वपूर्ण अंतर पाया गया वह था शादी के 1 साल के अंदर उन के आपसी विवाद और झगड़ों को निबटाने का तरीका.वे कपल्स जिन्होंने शादी के प्रारंभिक वर्षों में ही अपने जीवनसाथी के साथ समयसमय पर क्रोध और नकारात्मक लहजे के साथ व्यवहार किया उन का तलाक 10 सालों के अंदर हो गया. ‘अर्ली इयर्स औफ मैरिज प्रोजैक्ट’ में भी अमेरिकी शोधकर्ता ओरबुच ने यही पाया कि अच्छा, जिंदादिल रवैया और मधुर व्यवहार रहे तो परेशानियों के बीच भी कपल्स खुश रह सकते हैं. इस के विपरीत मारपीट और उदासीनता भरा व्यवहार रिश्ते को कमजोर बनाता है.

बातचीत का विषय हो विस्तृत

पतिपत्नी के बीच बातचीत का विषय घरेलू मामलों के अलावा भी कुछ होना चाहिए. अकसर कपल्स कहते हैं कि हम तो आपस में बातें करते ही रहते हैं संवाद की कोई कमी नहीं. पर जरा गौर करें कि आप बातें क्या करते हैं. हमेशा घर और बच्चों के काम की बातें करना ही पर्याप्त नहीं होता. खुशहाल दंपती वे होते हैं जो आपस में अपने सपने, उम्मीद, डर, खुशी और सफलता सबकुछ बांटते हैं. एकदूसरे को जाननेसमझने का प्रयास करते हैं. किसी भी उम्र में और कभी भी रोमांटिक होना जानते हैं.

अच्छे समय को करें सैलिब्रेट

‘जनरल औफ पर्सनैलिटी ऐंड सोशल साइकोलौजी’ में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक अच्छे समय में पार्टनर का साथ देना तो अच्छा है पर उस से भी जरूरी है कि दुख, परेशानी और कठिन समय में अपने जीवनसाथी के साथ खड़ा होना. पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर मोनिका लेविंस्की ने जब यौनशोषण का आरोप लगाया तो उस वक्त भी हिलेरी क्लिंटन ने अपने पति का साथ नहीं छोड़ा. उन दिनों के साथ ने दोनों के रिश्ते को और मजबूत बना दिया.

रिस्क लेने से न घबराएं

पतिपत्नी के बीच यदि नोवैल्टी, वैराइटी और सरप्राइज का दौर चलता रहता है तो रिश्ते में भी ताजगी और मजबूती बनी रहती है. साथ मिल कर नईनई ऐक्साइटमैंट्स से भरी ऐक्टिविटीज में इन्वौल्व हों, नईनई जगह घूमने जाएं, रोमांचक सफर का मजा ले, लौंग ड्राइव पर जाएं, एकदूसरे को खानेपीने, घूमने, हंसने, मस्ती करने और समझने के नएनए औप्शन दें. कभी रिश्ते में नीरसता और उदासीनता को न झांकने दें. जिंदगी को नएनए सरप्राइज से सजा कर रखें.

केवल प्यार काफी नहीं

हम जिंदगी में अपने हर तरह के कमिटमैंट के लिए पूरा समय देते हैं, ट्रेनिंग्स लेते हैं ताकि हम उसे बेहतर तरीके से आगे ले जा सकें . जिस तरह  खिलाड़ी खेल के टिप्स सीखते हैं, लौयर किताबें पढ़ते हैं, आर्टिस्ट वर्कशौप्स करते हैं ठीक उसी तरह शादी को सफल बनाने के लिए हमें कुछ न कुछ नया सीखने और करने को तैयार रहना चाहिए. सिर्फ अपने साथी को प्यार करना ही काफी नहीं, उस प्यार का एहसास कराना और उस की वजह से मिलने वाली खुशी को सैलिब्रेट करना भी जरूरी है.

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साइंटिफिक दृष्टि से देखें तो इस तरह के नएनए अनुभव शरीर में डोपामिन सिस्टम को ऐक्टिवेट करते हैं जिस से आप का दिमाग शादी के प्रारंभिक वर्षों में महसूस होने वाले रोमांटिक पलों को जीने का प्रयास करता है. एकदूसरे को सकारात्मक बातें कहना, तारीफ करना और साथ रहना रिश्ते में मजबूती लाता है.

गुल मकाई रिव्यू: परदे पर मलाला की कमजोर कहानी

रेटिंगः एक स्टार

निर्माताः संजय सिंघाला,प्रीति विजय जाजू,धवल जयंतीलाल गाड़ा

निर्देशकः अमजद खान

कलाकारः रीम शेख, ओम पुरी, आरिफ जाकरिया, अतुल कुलकर्णी,दिव्या दत्ता और अभिमन्यू सिंह

अवधिः दो घंटे, बारह मिनट

नोबल पुरस्कार से सम्मानित पाकिस्तानी लड़की मलाला युसुफजई की बायोपिक फिल्म के नाम पर फिल्म निर्देशक अमजद खान एक एजेंडे वाली फिल्म गुल मकई लेकर आए हैं, जिसमें उन्होंने यह साबित करने की पुरजोर कोशिश की है कि पाकिस्तानी सेना और पाकिस्तान की आईएसआई एजेंसी पूरी ताकत के साथ आतंकवादियों का सफाया करने में जुटी हुई है.

कहानीः

फिल्म की कहानी के केंद्र में 2008 से 2009 तक का पाकिस्तान का स्वात इलाका, तालिबानी आतंकवाद, मलाला युसुफजई तथा उनके पिता जियाउद्दीन के इर्द गिर्द घूमती है. फिल्म शुरू होती है तालिबानी आतंकियों के जुल्मों के चित्रण से. उधर जियाउद्दीन (अतुल कुलकर्णी) पाकिस्तान के स्वात इलाके में खुशाल हाई स्कूल नामक एक अंग्रेजी माध्यम का स्कूल चला रहे हैं, जिसके वह प्रधानाध्यापक भी है. इस स्कूल में लड़के व लड़कियां दोनों पढ़ते हैं और इसी स्कूल में उनका बेटा अटल व बेटी मलाला (रीम शेख) भी पढ़ती है. तालिबानियों के जुल्म, लड़कियों की शिक्षा के खिलाफ नित नए नए आदेशों का असर खुशाल स्कूल पर भी पड़ता है. स्कूल की तरफ से लड़कियों की पोशाक बदली जाती है. उधर तालिबानी आए दिन निर्दोष लोगों की हत्या कर रहे हैं. जियाउद्दीन शांति कमेटी के माध्यम से एक मुहिम चलाते हैं. पाकिस्तानी सेना भी तालिबानियों के खात्मे में जुटी है. इसी बीच प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो मारी जाती हैं. जरदारी प्रधानमंत्री बन जाते हैं. बीबीसी और जियो टीवी तालीबानियों की हर हरकत को लोगों तक पहुंचाने में जुटे हैं.पाकिस्तानी सेना और आई एस आई अपने काम में लगी हुई है. जियाउद्दीन भी तालिबानियों के खिलाफ इंटरव्यू देकर तालिबानियों के निशाने पर आ जाते हैं. उधर बीबीसी के लिए मलाला अपनी पहचान छिपाकर गुल मकाई के नाम से तालिबानियों के खिलाफ ब्लॉग लिखने लगती हैं और जल्द ही चर्चा में आ जाती हैं. पर पहचान छिप नहीं पाती. एक दिन तालिबानी अपने एक आतंकी को भेजकर स्कूल बस के अंदर ही मलाला पर गोली चलवा देते हैं. मलाला का इलाज पेशावर के सैनिक अस्पताल में होता है और फिर उन्हें नोबल पुरस्कार से नवाजा जाता है.

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लेखन व निर्देशनः

फिल्म की पटकथा अति बचकानी और निर्देशन भी अति बचकाना है. फिल्म में मलाला के व्यक्तित्व को लेकर फिल्म बहुत कुछ नहीं कहती. बल्कि मलाला को एक डरपोक, बुरे-बुरे सपने देखकर डरने वाली लड़की के रूप में ही ज्यादा पेश करती है. कहने का अर्थ यह कि मलाला की पूरी सही तस्वीर उभरती ही नही है. मलाला के व्यक्तित्व, उसके कृतित्व पर यह फिल्म रोशनी डालने में बुरी तरह से विफल रही है, पर कुरान को कुछ ज्यादा ही तवज्जो दी गयी है.

लेखन व निर्देशन की कमजोरियों के चलते मलाला बहादुर और मुखर किशोरी की बजाय, धार्मिक कट्टरवाद के खिलाफ लड़ाई में पोस्टर बनकर रह जाती है. लेखक व निर्देशक उन बारीकियों को भी रेखांकित करने में विफल रहे,जिसके चलते उस पर तालीबान ने जानलेवा हमला किया. फिल्म में सिर्फ गोली व खून-खराबा ही ज्यादा दिखाया गया है. निर्देशक का सारा ध्यान तालिबान के अत्याचार और उनके सफाए में जुटी पाकिस्तानी सेना व आईएसआई को महिमामंडित करने में ही ज्यादा नजर आता है. फिल्म देखते हुए कई झटके लगते हैं, जिससे पता चलता है कि फिल्म लंबे समय में रुक-रुक कर बनायी गयी है और एडिटर की गलतियों के चलते कई बार कोई सीन कैसे आ गया, यह समझ में नही आता. तालिबान के अड्डे पर कुछ लोग गोली चला रहे हैं, तो उनके पीछे कुछ लोग कराटे करते नजर आ जाते हैं.

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अभिनयः

जहां तक अभिनय का सवाल है तो मलाला के पिता जियाउद्दीन के किरदार में अतुल कुलकर्णी ने बड़ा सधा हुआ अभिनय किया है. पटकथा लेखक की कमजोरी के चलते मलाला के किरदार में रीम शेख की मेहनत जाया हो गयी. अन्य कलाकार प्रभावित नहीं करते. दिव्या दत्ता सहित कई कलाकारों की प्रतिभा को जाया किया गया है.

Valentine’s Special: ‘गृहशोभा के साथ करें प्यार का सेलिब्रेशन, शेयर कीजिए अपनी लव स्टोरी

14 फरवरी यानी Valentine’s Day मतलब प्यार का दिन. प्रेमी जोड़ों को इस दिन का बेसब्री से इंतजार रहता है. लेकिन अब सिर्फ गर्लफ्रेंड-ब्वॉयफ्रेंड ही नहीं बल्कि शादीशुदा जोड़े भी इस दिन को पूरी तैयारी से मनाते है और गर्लफ्रेंड-ब्वॉयफ्रेंड की तरह मैरिड कपल्स के बीच भी सिर्फ प्यार ही नहीं बल्कि थोड़ी बहुत नोक-झोंक और रूठना-मनाना होता है.

तो इस वेलेंटाइन हमारे साथ शेयर कीजिए अपने प्यार की यही खट्टी-मीठी कहानी. जिसे हम लाएंगे दुनिया के सामने. कैसे हुई आपकी पहली मुलाकात, कैसे करीब आए दोनों, कैसे हुआ प्यार का इजहार और कैसे मुकम्मल हुआ आपका इश्क. ये मौका किसी खास रिश्ते के लिए नहीं बल्कि हर प्यार करने वाले के लिए हैं. चाहे वो अभी रिश्ते में हो या शादी के बंधन में बंध चुका हो.

कहानी के साथ अपनी और अपने पार्टनर की फोटो या सेल्फी भी जरूर भेजिए. सेलेक्ट की हुई कहानियों को हम अपनी वेबसाइट और फेसबुक पेज पर पब्लिश करेंगे.

नोट- कहानी कम से कम 300 शब्द की होनी चाहिए.

अपनी कहानी इस पते पर भेजें- grihshobhamagazine@delhipress.in 
आखिरी तारीख- 13 फरवरी, 2020

जवानी जानेमन: यहां पढ़ें सैफ और अलाया की फिल्म का पूरा रिव्यू

रेटिंगः दो स्टार

निर्देशकः नितिन कक्कड़

कलाकारः सैफ अली खान, अलाया एफ, तब्बू,कुबरा सैट और चंकी पांडे

अवधिः एक घंटा, 55 मिनट

कुछ वर्ष पहले हास्य फिल्म ‘‘फिल्मिस्तान’’ का निर्देशन कर शोहरत बटोर चुके फिल्मकार नितिन कक्कड़ इस बार लंदन में बसे भारतीय परिवारों की कहानी के माध्यम से पिता पुत्री की अनूठी कहानी लेकर आए हैं. इस फिल्म में फिल्मकार ने समाज में बदलते रिश्तों के पैमाने पर रोशनी डालने का प्रयास किया है. इस कहानी में अविवहित माता पिता की बेटी भी बिना शादी किए मां बनती है. अब इस कथा को भारत में पले बढ़े भारतीय दर्शक कितना पचा सकेंगे, यह कहना मुश्किल है, शायद इसी वजह से नितिन कक्कड़ ने लंदन में बसे भारतीय परिवारोंं की कहानी के रूप में पेश की है.

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कहानीः

यह कहानी है कमिटमेंट और जिम्मेदारियों से दूर भागने वाले ‘प्ले ब्वौय’ की तरह जिंदगी जीने वाले 40 वर्ष के जसविंदर सिंह उर्फ जैस (सैफ अली खान) की. जैस के लिए शादी, पत्नी, बाल-बच्चे आदि उसकी  आजादी में सबसे बड़ा रोड़ा हैं. इसी वजह से वह अपने माता-पिता और भाई-भाभी से अलग अकेले किराए के मकान में रहते हैं. और हर दिन उनका ज्यादातर वक्त नृत्य व शराब की पार्टियों, क्लब में शराब पीकर नई नई लड़कियों के साथ रात गुजारने में जाता है. जैस अपने भाई डिंपी (कुमुद मिश्रा) के साथ मिलकर रीयल इस्टेट की दलाली ‘ब्रोकर’ का काम करते हैं. वह अपनी जिंदगी में हर तरह से मस्त हैं.

तभी एक दिन एक क्लब में जैस की मुलाकात एम्सर्टडम से आयी 21 वर्षीय टिया (अलाया फर्नीचर वाला) से होती है. दूसरी लड़कियों की तरह टिया के संग भी फ्लर्ट करने के इरादे से जैस, टिया को लेकर अपने घर पहुंचते हैंं. मगर घर पहुंचते ही जैस की उस वक्त सिट्टी-पिट्टी गुम हो जाती है, जब टिया बताती है कि वह उनकी बेटी है और वह भी बिना शादी किए अपने प्रेमी रोहण के बच्चे की मां बनने वाली है. जिम्मेदारी से भागने के लिए जैस, टिया से पीछा छुड़ाने की कोशिश करते हैं. टिया जैस का घर छोड़कर सामने वाले मकान में किराए पर रहना शुरू करती है. फिर धीरे धीरे पता चलता है कि जैस 22 साल पहले एम्स्र्टडम में टिया की मां (तब्बू) से मिले थे और पिता बनने की जिम्मेदारी से बचने के लिए उन्हे छोड़कर लंदन भाग आए थे. बहरहाल, कहानी आगे बढ़ती है और रिश्तों का नया पैमाना सामने आता है.

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लेखन व निर्देशनः

विदेशी धरती पर अत्याधुनिक भारतीय परिवारों की कहानी में नयापन है, मगर पटकथा के स्तर पर काफी कमियां है. फिल्मकार यह बात भूल गए कि भारतीय दर्शक छिछोरे नायकों को पसंद नही करता. फिल्मकार की यह सोच भी अति बचकानी लगती है कि हर इंसान सिर्फ सेक्स के पीछे भागता रहता है. पूरी फिल्म बहुत ढीली ढाली है. फिल्मकार ने किरदारों को स्थापित करने में समय बर्बाद करने की बजाय सीधे पिता पुत्री के बिंदु पर आ जाते हैं. और जिस तरह जल्दबाजी दिखते हुए डीएनए टेस्ट के साथ ही यह साबित करा देते हैं कि जैस व टिया, पिता पुत्री हैं, परिणामतः दर्शकों के मन में कोई उत्सुकता जागृत नहीं होती और फिल्म के साथ वह जुड़ नही पाता. फिल्म का क्लायमेक्स होगा, उसका एहसास. फिल्म शुरू होने के दस मिनट बाद ही हो जाता है. फिल्म के कुछ दृश्य जरुर दर्शकों को हंसाते हैं, अन्यथा पूरी फिल्म निराश करती है. हुसेन दलाल के संवाद बहुत सतही हैं.

अभिनयः

फिल्म की सबसे बडी कमजोर कड़ी सैफ अली खान ही हैं. प्ले ब्वौय, जिम्मेदारी से भागने वाले व नित्य नई लड़की के साथ रात गुजारने वाले जैस के किरदार में सैफ अली खान कहीं से भी फिट नहीं बैठते हैं. फिल्म के निर्देशक व सैफ दोनो को यह समझना चाहिए था कि महज एक हाथ में बड़ा टैटू बनवा लेने, अतरंगी बर्ताव व कुछ अजीब से संवादों से एक किरदार प्ले ब्वौय नहीं नजर आता. टिया के किरदार में अलाया फर्नीचरवाला ने बेहतरीन अभिनय किया है.

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पूरी फिल्म में कहीं भी ऐसा एहसास नहीं होता कि यह उनकी पहली फिल्म हो. उनके चेहरे पर हर तरह के इमोशंस बहुत ही नेच्युरली आते हैं. बहुत सहज अभिनय कर उन्होने जता दिया कि उनके अंदर भविष्य में श्रेष्ठ अभिनेत्री बनने की संभावनाएं हैं. तब्बू और चंकी पांडे की प्रतिभा को जाया किया गया है. इनके किरदारों को समुचित विस्तार नहीं दिया गया. जैस की दोस्त और ब्यूटी पार्लर चलाने वाली रिया के किरदार में कुबरा सैट ने जबरदस्त परफार्म किया है. कुमुद मिश्रा व फरीदा जलाल अपनी उपस्थिति बेहतर ढंग से दर्ज कराती हैं.

मैंने अपनी बेटी और बिजनैस को साथ-साथ पाला है- निधि यादव

 निधि यादव संस्थापक, अक्स क्लोथिंग

फैशन डिजाइनर निधि यादव ने अपने परिवार और व्यवसाय में तालमेल बैठा कर अपनी अलग पहचान बनाई. निधि ने अपने ब्रैंड ‘अक्स’ के साथ फैशन की दुनिया में कदम रखा. ‘अक्स’ महिलाओं के लिए कुरतियां, प्लाजो, ऐथनिक सैट, अनारकली आदि की विशाल रैंज प्रस्तुत करता है. इस रेंज में लैगिंग और पारंपरिक जूते भी शामिल हैं. 2019 में निधि को ऐंटरप्रन्योर इंडिया द्वारा लघु व्यवसाय पुरस्कार ‘वूमन ऐंटरप्रन्योजर औफ द ईयर’ मिला. 2019 में ‘आउटलुक बिजनैस वूमन औफ वर्थ’ अवार्ड्स से भी सम्मानित किया गया. पेश हैं, निधि यादव से हुई गुफ्तगू के कुछ अहम अंश:

बतौर महिला इस मुकाम तक पहुंचने में किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ा?

एक महिला होने के नाते सब से बड़ी चुनौती होती है अपने घर को संभालना और साथसाथ अपना काम करना. ऊपर से अगर आप मां भी हों तो यह काम और मुश्किल हो जाता है, क्योंकि घर का काम तो कोई और भी कर सकता है पर आप का बच्चा बस आप के साथ रहना चाहता है. अत: मेहनत थोड़ी ज्यादा करती हूं.

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बच्चों के साथ अपने व्यवसाय को कैसे मैनेज करती हैं?

2014 में जब मैं ने अपना व्यवसाय शुरू किया था तब मेरी बेटी 18 महीने की थी और उसे ज्यादातर समय अपने साथ ही रखना पड़ता था. मैं जब भी डीलर से या किसी मैन्युफैक्चरर से बात करने जाती तो बेटी हर जगह साथ होती थी. जैसेजैसे मेरा काम बढ़ने लगा तो लगातार डील्स के लिए जयपुर भी जाना पड़ता था. तब भी बेटी साथ होती थी. मैं ने और पति दोनों ने मिल कर अपनी बेटी और बिजनैस का ध्यान रखा.

क्या कोई ऐसा पल आया जब परिवार के लिए काम छोड़ने का फैसला लिया?

नहीं. मैं जिंदगी की बहुत शुक्रगुजार हूं कि ऐसा पल कभी नहीं आया. मेरे परिवार ने सदा मेरा साथ दिया. मु झे बहुत बुरा लगता है जब मैं सुनती हूं कि कोई महिला इसलिए आगे नहीं बढ़ पाई, क्योंकि उसे उस के परिवार की देखरेख करनी थी. परिवार का पालन औरत की जिम्मेदारी है, लेकिन इस का यह कतई मतलब नहीं कि

उस के लिए वह अपने सपनों का बलिदान कर दे. यह परिवार की जिम्मेदारी बनती है कि वह अपनी बेटीबहू के सपनों को पूरा करने में उस की मदद करे.

अपनी सफलता का श्रेय किसे देना चाहेंगी?

यकीनन अपने परिवार और पति को दूंगी. मैं इस जगह नहीं होती अगर सतपाल साथ नहीं देते. एक 7 महीने की बेटी जब गोद में हो, उस वक्त शायद ही कोई मां ऐसी होगी जो अपना नया बिजनैस शुरू करने के बारे में सोचे और शायद ही कोई ससुराल ऐसी होगी जो कहे कि तू आगे बढ़ हम तेरे साथ हैं. जब मैं अपनी बेटी को सुलानेखिलाने में व्यस्त होती थी तो सतपाल कंपनी का सारा काम संभालते थे. रात में जब बेटी सो जाती थी तब हम रात में जाग कर पूरा प्लान बनाते थे.

जिंदगी का वह पल जब आप की जिंदगी ने अपना रुख बदला?

एक पल नहीं, एक फेज कहूंगी. हम ने जब कंपनी शुरू की थी तो इतने बेहतर मार्केट रिस्पौंस की उम्मीद नहीं की थी. हम ने शुरुआत 2 कमरों के घर से की थी. एक में हम सोते थे और दूसरे में सामान रखते थे. काम बेहतर चल निकला. पहले क्व100 करोड़, फिर 2019 में क्व150 करोड़ और अब 2020 में हम क्व200 करोड़ रैवन्यू का टारगेट ले रहे हैं और आने वाले 4-5 सालों में इसे क्व1,000 करोड़ तक ले जाना चाहते हैं.

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आप की नजर में फैशन और ब्यूटी क्या है?

मेरे लिए अच्छा फैशन वह है जो कंफर्टेबल, हो जो आप को खूबसूरत दिखाए. इसी सिद्धांत पर हमारा ब्रैंड ‘अक्स’ बना है.

10 टिप्स: डिजिटल डिटौक्स से लाइफ बनाएं हेल्दी और फिट

सुबह शुरू होते ही फोन के साथ घर से निकलते हैं तो इयर फोन कान में लगा लेते हैं .ऑफिस पहुंचते ही कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठ जाते हैंसुबह शुरू होते ही फोन के साथ घर से निकलते हैं तो इयर फोन कान में लगा लेते हैं .ऑफिस पहुंचते ही कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठ जाते हैं .. ऑफिस से घर पहुंचने तक यही सब चलता रहता है .पहले जो सुविधाएं थी उसकी अब लत लग गई है. जरूरत ना भी हो फिर भी हम सोशल नेटवर्क पर लगातार बने रहते हैं .लोगों का कहना है कि इससे कभी अकेलेपन का एहसास नहीं होता. कभी बोर नहीं होते. लेकिन सोच कर देखें क्या यह एक लत नहीं बन गई है? आपको जिस लत ने अपनी गिरफ्त में लिया है वह एक बीमारी का रूप लेती जा रही है. शोध बताते हैं कि इस लत से आप डिजिटल डिटॉक्स के माध्यम से छुटकारा पा सकते हैं.

अपने फोन, स्मार्टफोन ,टेबलेट, लैपटॉप और कंप्यूटर से कुछ निश्चित समय के लिए दूर रहना डिजिटल डिटॉक्स कहलाता है. डिजिटल डिटॉक्स आपको स्क्रीन फ्री समय व्यतीत करने का मौका देता है. इससे ना केवल आप रिचार्ज महसूस करते हैं, बल्कि आप क्वालिटी समय  बिता पाते हैं. डिजिटल डिटॉक्स का समय आप अपने अनुसार बना सकते हैं .यह समय 12 घंटे से 24 घंटे तक का हो सकता है.

करें खुद को डिजिटल डिटॉक्स

1. अपना मोटिवेशन चुने

डिजिटल डिटॉक्स होने के लिए सबसे पहले अपना माइंड मेकअप करना चाहिए. आपको कुछ समय यह सोचना चाहिए कि आपका डिजिटल डिटॉक्स क्यों करना चाहते हैं ?आपको यह ना करने पर क्या नुकसान हो रहे हैं! जब आप इन सभी बातों में क्लियर हो जाएंगे तब आप खुद-ब-खुद डिजिटल डिटॉक्स की ओर प्रेरित हो जाएंगे.

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2. ऐप डाउनलोड करें

अगर आप सचमुच खुद को डिजिटल डिटॉक्स करना चाहते हैं तो सबसे पहले “क्वालिटी टाइम चेकि” जैसे ऐप डाउनलोड कर ले! यह आपको  बताते रहेंगे कि आपने कितना समय डिजिटल दुनिया में बिताया. यह  एक तरह से आपको अलर्ट करते रहेंगे .

3. इंजॉय करने कुछ प्लान

डिजिटल डिटॉक्स के लिए सबसे अधिक जरूरी है कि जो समय आपको मिलने वाला है उसका उपयोग आप किस तरह करेंगे. उसके लिए आप कहीं घूमने , कुकिंग,किसी के घर जाने का कार्यक्रम बना सकते हैं. इस तरह आप डिजिटल डिटॉक्स के समय बोर नहीं होंगे.

4. टाइम लिमिट सेट करें

फोन को 24 घंटे हाथ में लिए रहने की आदत से छुटकारा पाने के लिए जरूरी है कि इस साइलेंट मोड में रहना चाहिए .जिससे आपको बार-बार आने वाले मैसेज या मेल पर ना जाये.

5. नोटिफिकेशन ऑप्शन को बंद करें

अपने मेल, व्हाट्सएप मैसेज आदि के अलर्ट या फेसबुक नोटिफिकेशन को टर्न ऑफ कर दें .इससे भी आपका ध्यान मोबाइल फोन पर नहीं जाएगा. हर दो-चार मिनट पर आने वाले नोटिफिकेशन हमें फोन चेक करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.

6. अपने फोन को दूसरे रूम में रखें

यह भी एक तरीका हो सकता है कि जब भी आप डिजिटल डिटॉक्स होना चाहते हैं तब तक आप अपना स्मार्टफोन दूसरे कमरे में रख दे .फोन सामने रखने से आदतन हमारा ध्यान चला जाता है.

डिजिटल डिटॉक्स से लाभ

7. मन मस्तिष्क में रहेगी शांति

डिजिटल डिटॉक्स करने से आप अपना कीमती समय व्यायाम योगा में दे सकते हैं. आपको बार-बार मेल या मैसेज चेक करने की कोई टेंशन नहीं रहेगी. इस सब का मिलाजुला असर होगा कि आपके मन को एक सुकून पहुंचेगा.

8. परिवार  के साथ  बॉन्डिंग

परिवार बच्चे और दोस्तों के साथ एक अच्छा समय बिता सकते हैं .आपको हमेशा लगता होगा कि इंटरनेट या व्हाट्सएप में उलझे रहने से आप अपने आसपास के लोगों को समय नहीं दे पाते हैं .जब आप डिजिटल डिटॉक्स करके दोस्तों और परिवार के साथ हंसी खुशी के पल बिताते हैं तो आप खुद ही अपने को ऊर्जावान समझेंगे.

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9. आप की कार्य क्षमता में वृद्धि होगी

कुछ समय के लिए इंटरनेट की दुनिया से दूर होने के बाद जब आप दोबारा लॉग इन करते हैं तब आपके अंदर एक उत्साह होने के कारण आपके काम करने की शक्ति में इजाफा हो जाता है. इसे आप खुद महसूस करके देखिए.

10. हेल्थ अच्छी रहेगी

डिजिटल डिटॉक्स की दुनिया में बहुत समय तक रहने से ना केवल हमारे स्वास्थ्य खराब होता है बल्कि हमारा बॉडी पोस्टर भी बिगड़ जाता है. एक ही स्थिति में फोन या कंप्यूटर पर काम करने से बैक पेन,नेक पेन और रिस्ट पेन तक होने लग जाता है. डिजिटल डिटॉक्स के कारण आपको इन सब से अच्छा और आराम फील होगा.

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