आखिर क्यों दीपिका को पीटते नजर आए शोएब, जानें वजह

स्टार प्लस के शो ‘कहां हम कहां तुम’ की लीड एक्ट्रेस दीपिका कक्कड़ जहां अपनी एक्टिंग के लिए फेमस हैं तो वहीं अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर भी सुर्खियों में आ गई है. हाल ही में दीपिका ने पति इब्राहिम के साथ एक इंस्टा स्टोरी शेयर की है, जिसमें इब्राहिम दीपिका को मारते हुए नजर आ रहे हैं. आइए आपको बताते हैं क्या है दीपिका को मारने की वजह…

गुस्से में दिखे इब्राहिम

शेयर की हुई फोटो में दीपिका कक्कड़ के साथ मिरर में झांकते हुए पति शोएब काफी गुस्से में है. उन्होंने दीपिका को मारने के लिए एक पंच भी बना लिया है. तभी दीपिका कक्कड़ को उनके पति ने जोरदार घूंसा जड़ दिया.

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ये बड़ी वजह है इसके पीछे


दरअसल, ये मार दीपिका को नहीं बल्कि सोनाक्षी को पड़ रही है. टीवी शो कहां हम कहां तुम में दीपिका सोनाक्षी के किरदार में है और आने वाले एपिसोड में उन पर डेडली अटैक होने वाला है. जिसकी तैयारी शोएब इब्राहिम करवा रहे हैं.

शो में आएगा नया ट्विस्ट

आने वाले एपिसोड में महेश साइको लवर रोहित (करण वी ग्रोवर) की दुल्हन को उड़ाने वाला है. इसी प्लानिंग में वो खुद भी लहुलूहान हो चुका है. लेकिन अब ये देखना मजेदार होगा कि क्या सोनाक्षी दुल्हन बनकर मंडप तक पहुंच पाएगी.

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RO का पानी भी हो सकता है खतरनाक, इस वॉटर प्यूरीफायर का करें इस्तेमाल

आजकल हर घर में RO का इस्तेमाल किया जा रहा है. पहले तो सिर्फ बड़े शहरों में इसका यूज होता था लेकिन अब छोटे शहरों से होते हुए RO कस्बों तक पहुंच गया है. लेकिन क्या आपको पता है कि साफ पानी का दावा करने वाला ये RO आपकी सेहत के लिए कितना खतरनाक हो सकता है. नहीं तो चलिए हम आपको बताते हैं.

क्या है RO

सबसे पहले तो हम आपको ये बताते हैं कि RO है क्या. RO यानी ‘Reverse osmosis’, पानी को साफ करने की ऐसी प्रक्रिया, जिस पर लोग आंखें बन्द करके भरोसा करते हैं.

TDS खत्म कर देता है RO…

TDS का मतलब है TOTAL DISSOLVED SOLIDS यानी पानी में घुले हुए जैविक पदार्थ. यानी बैक्टीरिया, वायरस और मेटल जैसे लेड, कैडमियम, आयरन, मैग्नीशियम, आर्सेनिक. ये तत्व शरीर के लिए गम्भीर दिक्कते पैदा कर सकते हैं. RO इन्हीं तत्व को पानी से निकालने का काम करता है, लेकिन इसके साथ वो पानी के जरूरी मिनरल भी निकाल देता है जो हमारे शरीर के लिए फ़ायदेमंद होते हैं. इसीलिए NGT ने अपने फैसले में कहा है कि RO की वजह से पानी की बर्बादी तो होती ही है साथ ही ये सेहत के लिए भी नुकसानदेह है.

RO के पानी से हो सकती हैं ये बीमारियां…

RO का पानी भले ही पूरी तरह से साफ होता है, लेकिन यह शरीर के लिए जरूरी तत्वों को भी पूरी तरह से खत्म कर देता है और अगर आप ज्यादा समय तक इस पानी का सेवन करते रहेंगे, तो आपको थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द और दिल से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं.

क्या है NGT की चेतावनी…
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) RO तकनीक को पहले ही खतरनाक बता चुका है. कुछ वक्त पहले ही NGT ने आदेश दिया था कि RO पर पाबंदी लगाई जानी चाहिए. NGT ने 20 मई को पर्यावरण मंत्रालय को आदेश दिया कि जिन इलाकों में एक लीटर पानी में TDS की मात्रा 500 मिलिग्राम या उससे कम है. उन इलाकों में RO के इस्तेमाल पर रोक लगाया जाए. लेकिन पर्यावरण मंत्रालय ने 20 मई के इस आदेश पर कोई कार्रवाई नहीं की.

WHO ने भी माना खतरनाक…
सिर्फ NGT ही नहीं वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने भी RO के पानी को ख़तरनाक माना है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मुताबिक प्रति लीटर पानी में TDS की मात्रा अगर 500 मिलीग्राम या उससे कम है तो पानी को RO से साफ करने की जरूत नहीं होती. मतलब प्रति लीटर 500 मिलीग्राम TDS वाला पानी पिया जा सकता है और इससे नुकसान भी नहीं होता.

क्यों अलग है CUCKOO’S वाटर प्यूरीफायर…

CUCKOO’S वाटर प्यूरीफायर इस मामले में आम वाटर प्यूरीफायर से इसलिए अलग है क्योंकि ये पानी के जरूरी मिनरल्स को खत्म नहीं करता है, जिससे आपको मिलता है पानी का साफ पानी उसके जरूरी मिनरल्स के साथ.

ये TV एक्टर बनेगा ‘वेदिका’ का एक्स हसबैंड, ‘कार्तिक-नायरा’ की लाइफ में आएगा नया ट्विस्ट

सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में जहां शो में लीप के चलते ‘नायरा-कार्तिक’ के शो छोड़ने की बात चल रही है तो वहीं शो का लेटेस्ट ट्रेक फैंस को काफी एंटरटेन कर रहा है. शो में इन दिनों ‘कार्तिक-नायरा’ जहां ‘कायरव’ को मनाने में लगे हुए है तो वहीं इसी बीच जल्द ही ‘वेदिका के साथ-साथ शो में नई एंट्री होने वाली है. आइए आपको बताते हैं कौन हो वो शख्स…

‘वेदिका’ एंट्री के साथ आएगा नया ट्विस्ट

टीवी सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ में ‘वेदिका’ के पहले पति के बारे में बताया गया था. शो में दिखाया गया था कि ‘वेदिका’ को उसके पहले पति से मैसेज और कौल आता है, जिसके चलते वह देश से बाहर चली जाती है. वहीं अब शो में दोबारा ‘वेदिका’ देखने को मिलने वाली है. इसी के साथ ‘वेदिका’ ‘कार्तिक और नायरा’ के क्लोजनेस को देखते हुए जलती हुई नजर आएगी.

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‘वेदिका के एक्स हस्बैंड की होगी एंट्री

‘ये रिश्ता…’ में अभी तक ‘वेदिका’ के पहले पति का चेहरा नहीं दिखाया गया है, लेकिन अब खबरें हैं कि जल्द ही ‘वेदिका’ के साथ शो में उसके एक्स हस्बैंड की भी एंट्री होते हुए दिखाई देगी. वहीं ‘एक्स हस्बैंड’ के रोल के लिए एक्टर फाइनल भी हो गया है. खबरों की मानें तो एक्टर नीरज मालवीय ‘वेदिका’ के पहले पति की भूमिका में दिखाई देंगे. बात करें तो नीरज मालवीय की तो एक्टर कई टीवी सीरियल में काम कर चुके हैं. इससे पहले उन्होंने एक हजारों में मेरी बहना, तेरे शहर में जैसे कई सीरियल में अहम भूमिका निभाते देखा गया है. साथ ही वह सुष्मिता सेन की भाभी चारू असोपा के एक्स बौयफ्रेंड भी रह चुके हैं.

 

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‘नायरा-कार्तिक’ से दूर नही होगी ‘वेदिका’

हाल ही में खबर थी कि ‘वेदिका’ के रोल नजर आ रहीं एक्ट्रेस पंखुरी अवस्थी जल्द शो से दूरी बना सकती हैं, लेकिन जब पंखुरी से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने इसे अफवाह बताया. इसके अलावा उन्होंने बताया कि मैं शो को छोड़कर कही नहीं जा रही हूं. पंखूरी के इस बयान के बाद ये तो तय है कि ‘वेदिका’ ‘नायरा-कार्तिक’ की लाइफ से दूर नही होगी.

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बता दें, इन दिनों शो में ‘कार्तिक’ का नया ट्रैक देखने को मिल रहा है, जिसमें वह जौली सिंह के रोल में आकर ‘कायरव’ के नए पापा की विश को पूरा करने की कोशिश करते हुए नजर आ रहा है.

पौल्यूशन से स्किन को दूर रखने के लिए ट्राय करें ये 5 फेशियल

आज कल दिल्ली और आसपास की हवा प्रदुषण के कारण काफी जहरीली हो रही है. क्या आप जानते हैं प्रदूषण न सिर्फ आप की सेहत के लिए नुकसानदेह है वरन आप के चेहरे की खूबसूरती चुराने का काम भी करता है. समय से पहले स्किन एजिंग, पिगमेंटेशन, स्किन पोर्स में ब्लॉकेज जैसी कई समस्याएं खड़ी हो रही हैं. दरअसल जहरीली धुंध में मौजूद बहुत सूक्ष्म रासायनिक कण हमारे रोमछिद्रों के मुकाबले 20 गुना छोटे होने के कारण बाहरी स्किन से होते हुए रोमछिद्रों में प्रवेश कर के स्किन की नमी खत्म कर देते हैं. इस से स्किन में लालिमा, सूजन, काले दागधब्बे आदि दिखने लगते है और स्किन निर्जीव, शुष्क, और बुझीबुझी सी दिखने लगती है . आइये जानते हैं एल्पस कौस्मेटिक क्लीनिक की फांउडर डायरेक्टर भारती तनेजा से कुछ फेशियल ट्रीटमेंट के बारे में जो प्रदूषण से रौनक खो चुकी आप की स्किन में पहले जैसी चमक ला सके.

1. एंटीऔक्सीडेंट फेशियल

एंटीऔक्सीडेंट एक तरह के केमिकल्स होते हैं जो स्किन पर जमी डस्ट और खराब हुई स्किन को साफ करने में मदद देते हैं . इस फेशियल में क्रीम और मास्क होते है जो विटामिन ए, विटामिन सी और विटामिन ई से समृद्ध होते हैं .यह फेशियल पोर्स को गहराई से साफ कर हर तरह की अशुद्धियों को दूर करता है .  स्किन साफ कर उसे पोषण डाटा है और स्किन को मुलायम और नरम बनाता है. यह फेशियल हमारे फेस से डेड सेल्स, पिम्पलस, वाइट हेड्स और ब्लैक हेड्स हटाने में मदद करता है.

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2.चारकोल फेशियल

चारकोल में एंटी पॉल्यूशन प्रॉपर्टीज होती हैं. इस फेशियल में एक्टिवेटेड प्योर चारकोल को स्किन पर एप्लाई किया जाता है. इस में एडवांस टेक्नोलॉजी वाला लेजर ट्रीटमेंट दिया जाता है जिस से थोड़ी ही देर में ही चेहरा साफ और तरोताजा नजर आने लगता है. अगर आप की स्किन बेजान और मुरझाई हुई नजर आ रही है तो कम से कम एक बार इस फेशियल को जरूर ट्राई करें. तेजी से बदलते मौसम और डस्ट को हटाने में यह बहुत उपयोगी है. इस से स्किन को पूरी तरह से डीप क्लीन किया जाता है. इसे फेस पर 20 मिनट तक लगाने के बाद स्किन के सारे पोलूटेड पार्टिकल्स बाहर आ जाते है. चारकोल में नेचुरल मिनरल्स होने से फेस की स्किन को बहुत टाइटनेस मिलती है.

3. फ्रूट  फेशियल

फ्रूट फेशियल में किसी भी तरह के केमिकल्स नहीं होते जिस की वजह से यह स्किन के लिए सुरक्षित है. फ्रूट्स में मौजूद सभी पोषक तत्व जैसे कि मिनरल्स और विटमिन्स भरपूर मात्रा में चेहरे को मिलते हैं. स्ट्रॉबेरी फेशियल स्किन की टोन को लाइट करने में मदद करता है. इस में मौजूद विटमिन सी और ऐंटीऑक्सिडेंट्स स्किन से फ्री रेडिकल्स और अन्य गंदगी को निकालने में मदद करते हैं और फ्रेश लुक देते हैं. चेहरे की खूबसूरती के लिए एप्पल फेशियल भी कारगर माना जाता है. सेब में ऐसे तत्व होते हैं जो स्किन की टोन को लाइट करते हैं और चमक बढ़ा देते हैं. यह एजिंग इफेक्ट को भी कम करता है.

4. रेड वाइन फेशियल

रेड वाइन एक एंटीऔक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है जो विटामिन सी से 20 गुना अधिक प्रभावी होता है और विटामिन ई से पचास गुना अधिक प्रभावी होता है. रेड वाइन फेशियल से नमी और झुर्रियां घटती हैं. रेड वाइन रेस्वेराट्रोल जैसे एंटीऔक्सीडेंट से समृद्ध है जो नई स्किन सेल्स के निर्माण में मदद करता है. अगर स्किन ड्राई है तो इसे न कराएं क्यों कि इस से स्किन काली पड सकती है. रेड वाइन को स्किन पर सीधे नहीं लगाया जाता क्यों कि इस में एल्कोहॉल की मात्रा ज्यादा होती है. रेड वाइन फेशियल को हमेशा पानी या रोजवॉटर के साथ मिला कर ही लगाया जाता है .  तैलीय स्किन वालों के लिए रेड वाइन फेशियल अच्छा है. इस में मौजूद औषधीय घटक स्किन की सूजन को कम करने में भी मददगार साबित होता है. वाइन फेशियल्स से चेहरे पर चमक आ जाती है.

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5. अल्फा हाइड्रोक्सी  एसिड  फेशियल

जब हमारी अंदरुनी स्किन को ताजी हवा नहीं मिल पाती तब हमारा फेस फेडेड नजर आने लगता है. फेस की चमक को वापिस लाने और डेड स्किन सेल्स को हटाने के लिए अल्फा हाइड्रोक्सी एसिड फेशियल किया जाता है. अल्फा हाइड्रोक्सी एसिड नेचुरल और सिंथेटिक इंग्रेडिएंट्स का एक समूह होता है.अल्फा हाइड्रोक्सी एसिड फेशियल आपकी स्किन के लिए बेस्ट एक्सफोलिएटर का काम करता है. इस फेशियल को चेहरे पर लगाने से स्किन में कोलेजन तेजी से बनने लगता है जिस से चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़ती हैं. यह फलों से निकाला गया एसिड स्किन में गोरापन और निखार लाता है. इस फेशियल को करवाने के बाद स्किन रूखी नजर नहीं आती है.

जब सोलो ट्रिप पर निकलें अकेली महिलाएं

महिलायें और लड़कियां कई बार सोलो ट्रिप पर निकलती हैं. कभी किसी जरुरी काम से तो कभी यों ही घूमने के ख्याल से. कई बार वे रात को भी बाहर अकेले सफ़र करती हैं. ऐसे में उन के साथ छेड़छाड़ या बलात्कार जैसी घटनाएं हो सकती हैं. यही नहीं उन्हें झपटमारों या धोखेबाजो से भी दोचार होना पड़ता है. जरुरी है कि अकेली जा रही महिलाओं और लड़कियों को अपनी खुद की सुरक्षा खुद करनी आनी चाहिए. हर महिला या लड़की जुडोकराटे की एक्सपर्ट नहीं हो सकती. लेकिन थोड़ी सी सतर्कता बरत कर वे सुरक्षित सफर कर सकती हैं.

आइए जानते हैं कुछ ऐसे छोटेछोटे उपाय जिन्हें अपना कर आप अपनी सुरक्षा खुद कर सकती हैं…

1. अगर घर से बाहर अकेली पैदल जा रहीं हैं तो

हमेशा अपना मोबाइल फुल चार्ज रख कर उसे ऑन रखें. जहां घूमने गईं हैं वहां का महिला हेल्पलाइन नंबर और खुद के घर का नंबर स्पीड डायल पर रखे.

सुनसान रास्ते पर फोन पर ज्यादा देर तक बात न करें और हेडफ़ोन का इस्तेमाल भी न करें. ऐसा करने से आप आसपास की आवाज़ों को सुन नहीं पायेंगी जिस से आप को अपना बचाव करने में दिक़्क़तों का सामना करना पड़ेगा.

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अपने मोबाइल का जीपीएस सिस्टम ऑन रखें ताकि रास्ता भटकने की स्थिति न आए.

पर्स हमेशा उस तरफ़ रखें जिधर ट्रैफिक नहीं है. इस से कोई आसानी से पर्स झपट कर भाग नहीं पाएगा.

अगर आप को लगे कि कोई पीछा कर रहा है तो बिना डरे पास के किसी एटीएम, दुकान या होटल में घुस जाएं और अंदर जा कर घरवालों को सूचित करें. एटीएम या होटल जैसी जगहों पर कैमरे होते हैं. आवश्यक होने पर पुलिस को भी खबर करें.

अपने पर्स में मिर्च स्प्रे, पेपर स्प्रे या छोटी सी प्लास्टिक की डब्बी में अलग से मिर्च पाउडर रखे. जरुरत पड़ने पर आप हमलावर की आंखों में यह सब डाल कर अपना बचाव कर सकती हैं.  पेन, छाता, बालों में लगानेवाली पिन जैसी चीजों का इस्तेमाल भी सुरक्षा के लिए किया जा सकता है.

2. औटो या बस में अकेली सफ़र कर रहीं हों तो

जहां तक संभव हो कैब या टैक्सी की जगह बस या ट्रेन जैसे पब्लिक ट्रांसपोर्ट्स का इस्तेमाल करें. ऐसी बस में न चढ़ें जिस में केवल 2  या 3 ही लोग हों क्यों कि हो सकता है कि वे ड्राइवर या कंडक्टर के दोस्त हो और मौका मिलते ही आप के साथ बदतमीजी करने लगें.

अगर औटो में अकेली सफ़र कर रही हैं तो औटो ड्राइवर और औटो का नंबर किसी अपने को व्हाट्सएप कर दें. अगर फोन नहीं लग रहा हो तो भी फोन करने का नाटक करते हुए तेज आवाज में टैक्सी का नंबर बताएं. इस से ड्राइवर को डर रहेगा कि कुछ गलत करने की स्थिति में वह पकड़ा जा सकता हैं.

आप ने स्विमिंग, स्केटिंग, डांस आदि कोई क्लास किया हो या नहीं लेकिन जुडोकराटे का प्रशिक्षण ज़रुर लें ताकि कोई अनहोनी होने पर अपनी सुरक्षा खुद कर सके.

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निजता के अधिकार पर हमला

भाजपा सरकार ने नैशनल इंटैलीजैंस ग्रिड तैयार किया है जिस में एक आम नागरिक की हर गतिविधि को एक साथ ला कर देखा जा सकता है. बिग ब्रदर इज वाचिंग वाली बात आज तकनीक के सहारे पूरी हो रही है. आज के कंप्यूटर इतने सक्षम हैं कि करोड़ों फाइलों और लेनदेनों में से एक नागरिक का पूरा ब्यौरा निकालने में कुछ घंटे ही लगेंगे, दिन महीने नहीं. अब एक नागरिक के घर के सामने गुप्तचर बैठाना जरूरी नहीं है. हर नागरिक हर समय फिर भी नजर में रहेगा.

इसे कपोलकल्पित न सम झें, एक व्यक्ति आज मोबाइल पर कितना निर्भर है, यह बताना जरूरी नहीं है. मोबाइलों का वार्तालाप हर समय रिकौर्ड करा जा सकता है क्योंकि जो भी बात हो रही है वह पहले डिजिटली कन्वर्ट हो रही है, फिर सैल टावर से सैटेलाइटों से होती दूसरे के मोबाइल पर पहुंच रही है. इसे प्राप्त करना कठिन नहीं है. सरकार इसलिए डेटा कंपनियों को कह रही है कि डेटा स्टोरेज सैंटर भारत में बनाए ताकि वह जब चाहे उस पर कब्जा कर सके.

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नागरिक की बागडोर बैंकों से भी बंधी है. हर बैंक एक मेन सर्वर से जुड़ा है, नागरिक ने जितना जिस से लियादिया वह गुप्त नहीं है. अगर सैलरी, इंट्रस्ट, डिविडैंड मिल रहा है तो वह भी एक जगह जमा हो रहा है. सरकार नागरिक के कई घरों का ब्यौरा भी जमा कर रही है ताकि कोई कहीं रहे वहां से जोड़ा जा सके.

सरकार डौक्यूमैंट्स पर नंबर डलवा रही है. हर तरह का कानूनी कागज एक तरह से जुड़ा होगा. बाजार में नागरिक ने नकद में कुछ खरीदा तो भी उसे लगभग हर दुकानदार को मोबाइल नंबर देना होता है, यानी वह भी दर्ज.

सर्विलैंस कैमरों की रिकौर्डिंग अब बरसों रखी जा सकती है. 7 जुलाई, 2005 में जब लंदन की ट्यूब में आतंकी आत्मघाती हमला हुआ था तो लावारिस लाशें किसमिस की थी, यह स्टेशन पर लगे सैकड़ों कैमरों की सहायता से पता चल गया था. आदमी को कद के अनुसार बांट कर ढूंढ़ना आसान हो सकता है. अगर कोई यह कह कर जाए कि वह मुंबई जा रहा है पर पहुंच जाए जम्मू तो ये कंप्यूटर ढूंढ़ निकालेगा कि वह कहां किस कैमरे की पकड़ में आया. सारे कैमरे धीरेधीरे एकदूसरे से जुड़ रहे हैं.

यह भयावह तसवीर निजता के अधिकार पर हो रहे हमले के लिए चेतावनी देने के लिए काफी है. देश की सुरक्षा के नाम पर अब शासक अपनी मनमानी कर सकते हैं, किसी के भी गुप्त संबंध को ट्रेस कर के ब्लैकमेल कर सकते हैं. इन कंप्यूटरों को चलाने वालों के गैंग बन सकते हैं जो किसी तीसरे जने को डेटा दे कर पैसा वसूलने की धमकी दे सकते हैं. हैकर, निजी लोग, सरकारी कंप्यूटर में घुस कर नागरिक की जानकारी जमा कर के ब्लैकमेल कर सकते हैं.

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शायद इन सब से बचने के लिए लोगों को काले चश्मे पहनने होंगे, सारा काम नकद करना होगा, चेहरे पर नकली दाढ़ीमूंछ लगा कर चलने की आदत डालनी होगी. सरकार के शिकंजे से बचना आसान न होगा. यह कहना गलत है कि केवल अपराधियों को डर होना चाहिए, एक नागरिक का हक है कि वह बहुत से काम कानून की परिधि में रह कर बिना बताए करें. यह मौलिक अधिकार है. यह लोकतंत्र का नहीं जीवन का आधार है. हम सब खुली जेल में नहीं रहना चाहते न.

वाटर प्यूरीफिकेशन के नाम पर पानी की बर्बादी रोकता है Cuckoo

बड़े शहरों में अंडर ग्राउंड वाटर लेवल दिनों दिन गहरा होता जा रहा है. धरती पर पीने लायक पानी बहुत कम बचा है. ऐसे में किसी भी तरह से पानी वेस्ट करना सही नहीं है. ऐसे में वाटर प्यूरीफिकेशन के नाम पर पानी वेस्ट करना किसी अपराध से कम नहीं है.

ऐसे होती है पानी की बर्बादी…

दरअसल, वाटर प्यूरीफिकेशन के दौरान जितना पानी साफ होकर इकठ्ठा होता है उससे तीन गुना अधिक पानी बेकार यानी Waste हो जाता है. मतलब 10 लीटर पानी साफ करने के लिए करीब 30 लीटर पानी बेकार बहाना पड़ता है. ये बहाया जाने वाला पानी न तो पीने के लायक होता है और ना ही इस नहाने में काम लिया जा सकता है. क्योंकि इसमें अत्यधिक मात्रा में लवण घुले होते है जिसे TDS ( Total dissolved Salts ) कहते हैं.

साल 2020 तक खत्म हो जाएगा इन शहरों का पानी…

पिछले साल ही नीति आयोग (National Institution for Transforming India) ने एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसके मुताबिक साल 2020 तक दिल्ली और बैंगलुरू जैसी मेट्रो सिटीज का जमीन का पानी खत्म हो जाएगा,

इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ये बहस शुरू हो गई है कि क्या ये क्लाइमेट चेंज की वजह से हो रहा है या फिर इंसान की गलत आदतों की वजह से. दरअसल कुछ जगहों पर तो ये एक्स्ट्रीम वेदर की वजह से हो रहा है लेकिन बाकी जगह में इंसानो की वजह से. ऐसे में सवाल ये उठता है कि हम इस सिचुएशन को बेहतर करने के लए क्या कर सकते हैं.

सरकार तो पानी को बचाने के लिए नई-नई पौलिसीज और प्लान बना ही रही है, लेकिन एक जिम्मेदार नागरिक की तरह हमें भी इस समस्या से खुद को उबारने के लिए कदम उठाना चाहिए.

इस कंपनी ने निकाला नया तरीका…

एक पौपुलर होम होम एप्लायंसेज ब्रांड है, जिसके पास इसका जवाब है. जी हां, कोरियन कंपनी Cuckoo का एक वाटर प्यूरीफायर आया है. जो पानी की वेस्टेज को लगभग जीरो परसेंट तक कम कर सकता है. Cuckoo क्लेम करता है कि ये वाटर प्यूरीफायर WHO (World Health Organization) द्वारा तय किए मानदंडों के हिसाब से डिजाइन किया गया हैं.

Cuckoo ने ये कैसे किया…

कंपनी ये दावा करती है कि वो अपने डिजाइन में नए जेनरेशन का फिल्ट्रेशन सिस्मट यानी ‘नेनो फिल्ट्रेशन सिस्टम’ यूज कर रही है. इसका सबसे बड़ा फायदा ये है कि इससे हमें पीने का साफ पानी मिल सकता है वो भी पानी का नुकसान किए बिना.

जानें, फेस्टिवल कैसे मानते हैं बौलीवुड स्टार्स   

सोनाक्षी सिन्हा को बचपन की यादें सताती हैं

मशहूर अभिनेता व राजनेता शत्रुघ्न सिन्हा की बेटी तथा बौलीवुड में कई कलाकारों के साथ काम कर चुकीं अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा यह बात मानती हैं कि समय व उम्र के साथ दीवाली पर्व को मनाने में उन की अपनी भूमिका बदलती रही है. पर उन्हें इस बात का एहसास नहीं हुआ.

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सोनाक्षी कहती हैं, ‘‘बचपन में मेरे लिए दीवाली का मतलब अपनी मनपसंद चीजें खरीदना ज्यादा होता था. उस वक्त घर में बनने वाले पकवान, मिठाई आदि पर हमारा ध्यान ज्यादा रहता था. दीवाली के दिन घर पर हम सभी एकसाथ बैठ कर ट्रैडिशनल भोजन करते थे. मु झे याद है कि उन दिनों हमारे यहां बच्चों के लिए पटना से मिट्टी तथा शक्कर के बने हुए खास खिलौने आ जाया करते थे. उस तरह के खिलौने तब मुंबई में मिलते नहीं थे. बचपन की दीवाली के अपने अलग माने थे जोकि समय के साथ बदलते गए.’’

राजकुमार राव की दीवाली

राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता राजकुमार राव अब तक ‘लव सैक्स और धोखा’, ‘शाहिद’,  ‘अलीगढ़,’ ‘बरेली की बर्फी’ और ‘स्त्री’ सहित कई सफलतम फिल्मों में विविधतापूर्ण किरदार निभा चुके हैं.

राजकुमार राव तो दीवाली का त्योहार परंपरागत तरीके से ही मनाने में यकीन करते हैं. वे कहते हैं, ‘‘मैं हमेशा परंपरागत तरीके से दीवाली मनाता हूं. मेरे लिए यह त्योहार मिठाई खाने की स्वतंत्रता वाला है. कलाकार के तौर पर मिठाई खाने को ले कर हमें कई तरह की बंदिशों का पालन करना होता है. दीवाली के मौके पर हम एकदम स्वतंत्र होते हैं. दोस्तों के साथ आतिशबाजी करते हैं, कम प्रदूषण फैलाने वाले एकदो पटाखे फोड़ते हैं. दोस्तों के संग फन के लिए ताश का खेल भी खेलते हैं, पर इस खेल में पैसों का कोई लेनदेन नहीं होता.’’

मृणाल दत्त रखते हैं प्रदूषण का खयाल

कई टीवी सीरियलों के अलावा वैब सीरीज ‘कोल्ड लस्सी चिकन मसाला’, ‘हेलो मिनी’ में अभिनय कर चुके मृणाल दत्त मूलतया दिल्ली से हैं. वे दीवाली को ले कर कहते हैं, ‘‘मेरे लिए दीवाली का मतलब सैलिब्रेशन है, उत्सव है. इस का जश्न मनाया जाना चाहिए. हम बचपन से दीवाली मनाते आए हैं. बचपन में हमें मिठाई और पटाखे के लिए ही दीवाली के आगमन का इंतजार रहता था. पर अब समय बदला है. हम भी सम झदार हो गए हैं, अब हमारी सोच बदली है.

‘‘मगर हमारी सोच यह कहती है कि दीवाली का जश्न मनाते हुए हम इतना खुशी में न  झूम जाएं कि बेतहाशा पटाखे फोड़ें और प्रदूषण को निमंत्रण दे कर संकट मोल ले लें. देखिए, दीवाली के समय सर्दी का मौसम शुरू हो जाता है और दिल्ली जैसे शहर में सर्दी के मौसम में प्रदूषण के कारण लोगों की जिंदगी पर बन आती है. ऐसे में हमें इस बात का खास खयाल रखना चाहिए कि हम जश्न मनाएं पर उस से हमें या दूसरों को तकलीफ न हो.’’

मौनी रौय की मिठाइयां

‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी,’  ‘नागिन’ जैसे कई सफलतम सीरियलों के साथ 9 वर्ष तक टैलीविजन पर अभिनय करती रही अभिनेत्री मौनी रौय ने फिल्म ‘गोल्ड’ से अक्षय कुमार के साथ बौलीवुड में कदम रखा था. फिर वे जौन अब्राहम के साथ फिल्म ‘रौ’ में नजर आईं. अब वे अपनी अगली फिल्म ‘मेड इन चाइना’ में नजर आएंगी. दीवाली को ले कर वे कहती हैं, ‘‘हमारे घर पर हर वर्ष दीवाली के अवसर पर कई तरह की ढेर सारी मिठाइयां बनती हैं. इस बार भी यही योजना है. इस बार दीवाली के अवसर पर मेरी फिल्म ‘मेड इन चाइना’ प्रदर्शित होने वाली है. यदि इस फिल्म ने बौक्स औफिस पर सफलता के  झंडे गाड़ दिए, तो मेरे लिए यह दोहरा जश्न मनाने का मौका हो जाएगा. मु झे तो पूरी उम्मीद है कि ऐसा ही होगा.’’

मिखिल मुसाले को ट्रिपल सैलिब्रेशन का मौका

गुजराती फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार हासिल कर चुके मिखिल मुसाले अब बतौर निर्देशक हिंदी फिल्म ‘मेड इन चाइना’ ले कर आए हैं. मूलतया महाराष्ट्रियन मगर पिछले 25 वर्षों से गुजरात में रह रहे मिखिल खुद को अब गुजराती ही सम झते हैं. मगर जब त्योहार का मामला होता है तो वह महाराष्ट्रियन पद्धति से ही त्योहार मनाते हैं.

दीवाली की चर्चा चलने पर मिखिल कहते हैं, ‘‘दीवाली के समय हमारी फिल्म रिलीज हो रही है और उसी सप्ताह में मेरा जन्मदिन भी है. यह ट्रिपल सैलिब्रेशन है. उत्साह है, नर्वस भी हूं.’’

वे आगे कहते हैं, ‘‘हम सब से ज्यादा दीवाली मनाते हैं. हम लोग रंगोली व मिठाई बनाने से ले कर आकाश कैंडिल तक बनाते हैं. मैं और मेरी बहन हम दोनों की क्राफ्ट में कुछ ज्यादा ही रुचि है. हम बचपन से रंगोली व आकाश कैंडिल बनाते आए हैं.’’

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गुलशन देवैय्या का पशु प्रेम

‘हंटर’, ‘हेट स्टोरीज’ सहित कई सफल फिल्मों व ‘स्मोक’ जैसी वैब सीरीज के अभिनेता गुलशन देवैया दीवाली नहीं मनाते हैं. वे कहते हैं, ‘‘पशु प्रेमी होने के चलते मैं दीवाली नहीं मनाता. मेरे घर में 3-3 बिल्लियां हैं. उन के लिए दीवाली का समय बहुत खौफ का समय होता है. पटाखों की आवाज से बेचारी बहुत डरती हैं. मु झे उन के लिए बहुत बुरा लगता है. बचपन में मैं बहुत पटाखे फोड़ा करता था. अब अंदर से भी पटाखे फोड़ने की इच्छा नहीं होती. दोस्तों के साथ पार्टी कर लेता हूं, मिठाइयां खा लेता हूं. मेरे कुछ दोस्त ताश खेलते हैं, पर मु झे उस का भी शौक नहीं है. मु झे ताश खेलना आता ही नहीं है.’’

सोनम कपूर को भाती है रोशनी और दीये

अदाकारा सोनम कपूर दीवाली को ले कर बेहद उत्साहित रहती हैं. वे कहती हैं, ‘‘मु झे रोशनी और दीयों से कुछ ज्यादा ही प्यार है, इसी कारण मु झे दीवाली का त्योहार ज्यादा पसंद है. वैसे भी दीवाली इस कदर खुशियों भरा त्योहार होता है कि हर कोई इसे मनाना चाहता है. स्वाभाविक तौर पर हम दीवाली के दिन दीये जलाते हैं. पूरे घर को रंगबिरंगे दीयों से रोशन करते हैं. लोगों को मिठाइयां बांटते हैं. इसी के साथ हम सभी एकसाथ मिल कर अच्छा समय गुजारते हैं.’’

पटाखों से रहती हैं दूर

नारी उत्थान की बात करने वाली अदाकारा तापसी पन्नू इस बार दीवाली के ही अवसर पर प्रदर्शित हो रही अपनी फिल्म ‘सांड़ की आंख’ को ले कर अतिउत्साहित हैं, जिस में उन्होंने 60 वर्ष की शार्प शूटर प्रकाशी तोमर का किरदार निभाया है.

दीवाली की चर्चा चलने पर तापसी कहती हैं, ‘‘बचपन में तो दीवाली के पहले से ही पटाखे फोड़ने लगती थी. फिर एक दिन मेरी सोच बदल गई क्योंकि सम झ में आया कि इस से प्रदूषण फैलता है. हुआ यह था कि हमारे घर के अंदर बहुत प्रदूषण हो गया था. मु झे अपने किचन से बैडरूम का दरवाजा साफसाफ नहीं दिख रहा था. उस दिन से मेरी सोच बदल गई और पटाखे जलाने बंद कर दिए. रंगोली बचपन से बनाती थी, अभी भी बनाती हूं. ताश के पत्ते या जुआ खेलने में कभी यकीन नहीं रहा. मु झे रंगोली बनाना बहुत पसंद है. अच्छी या बुरी जैसी भी हो, पर मु झे बनानी है. मैं अभी भी दीये पर पेंट करती हूं.’’

सही कौमेडी फिल्म चुनना मेरे लिए चुनौती होती है –अनिल कपूर

अपने अलग अभिनय और अंदाज की वजह से चर्चित अनिल कपूर की शक्सियत से कोई अंजान नहीं. उन्होंने हौलीवुड और बौलीवुड में अपनी एक अलग छवि बनायीं है. उन्होंने हर शैली में काम किया है और आज भी अपने अभिनय से दर्शकों को चकित कर रहे है. कौमेडी  हो या सीरियस हर अंदाज में वे फिट बैठते है. हंसमुख और विनम्र स्वभाव के अनिल कपूर अभिनय करना और खुश रहना हमेशा पसंद करते है और यही उनके फिटनेस का राज है. जीवन एक है और इसमें उतार-चढ़ाव का आना स्वाभाविक मानते है. उनकी फिल्म ‘पागलपंती’ में उन्होंने कौमिक भूमिका निभाई है. जिसे लेकर वे बहुत खुश है, पर यहां तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था. इसका राज आइये जाने उन्ही से.

सवाल-आपके उपर फिल्म की सफलता और असफलता का प्रभाव अभी कितना रहता है? फिल्म की सफलता में अच्छी कहानी का होना कितना जरुरी होता है?

कोई भी कलाकार शुरू में छोटा काम कर धीरे-धीरे बड़ा अभिनय कर स्टार बनता है, लेकिन यहां ये समझना जरुरी है कि कलाकार से अधिक उसकी भूमिका हिट होती है जिसे लोग पसंद करते है. ये बात हर कलाकार को समझ में आनी चाहिए. इसका उदहारण अमिताभ बच्चन है, जो अभी तक भी पोपुलर है. मेरा भी यही सोच रही है. मैंने 17 साल से अपने ईगो को छोड़कर काम करना शुरू किया है और जो भी कहानी या किरदार सही हो, उसमें मैं काम करता हूं, लेकिन सही कौमेडी  फिल्म को चुनना मेरे लिए एक चुनौती होती है, क्योंकि अगर मैंने सही कौमेडी  को नहीं चुना, तो वह मेरे लिए ट्रेजिडी बन सकती है. कौमेडी  को सही स्तर तक ले जाने के लिए बहुत कम फासला होता है और वह सबके बस की बात नहीं होती.

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सवाल- पहले की फिल्मों में कलाकार और निर्देशक के बीच में एक गहरा सम्बन्ध होता था, जिससे कई बार कलाकार संबंधों की वजह से भी फिल्में साईन कर लेते थे, पर अब ये प्रोफेशनल अधिक हो चुका है आप इन बातों पर अब कितना ध्यान देते है?

मैं बहुत अधिक बदल नहीं सकता. पुराना स्वभाव आ ही जाता है. एक रिश्ता एक इमोशन अपने आप ही निर्माता निर्देशक के साथ आ जाता है. मैं एक आत्मविश्वासी इंसान हूं और बहुत अधिक किसी विषय पर नहीं सोचता. इसलिए फिल्म न चलने पर भी घबराहट नहीं होती.

सवाल-आपकी फिटनेस का राज क्या है? अपने अंदर सकारात्मकता को कैसे बनाए रखते है?

मैं नियमित वर्कआउट करता हूं. किसी प्रकार का नशा मैं नहीं करता. मुझे दक्षिण भारतीय व्यजन में स्टीम्ड इडली बहुत पसंद है, क्योंकि ये बहुत सुरक्षित भोजन है. इसके अलावा मेरे लिए मेरे कैरियर और लाइफ का हर दिन नया होता है. सुबह उठकर मैं जिन्दा हूं और काम कर रहा हूं. ये मेरे लिए बहुत बड़ी बात होती है. जीवन में उतार-चढ़ाव और तनाव को मैं अधिक समय तक अपने पास रहने नहीं देता. आधे से एक घंटे में उसका कोई सोल्यूशन निकाल ही लेता हूं. हर इंसान के जीवन में ऐसी परिस्थितियों से निकलने का एक नुस्खा होता है, जो उस व्यक्ति को खुद ही खोजकर निकालना पड़ता है. इसके साथ-साथ पौजिटिव लोगों की सान्निध्य में रहने की कोशिश करता हूं. जिसमें परिवार, दोस्तों और काम का सही होना जरुरी है.

असल में यहां तक पहुंचने में मैंने भी बहुत पापड़ बेले है. बहुत उतार-चढ़ाव से गुजरा हूं. मैंने बहुत मेहनत की है. मुझे अच्छा नहीं लगता, जब मेरी तुलना लोग मेरे बच्चों के साथ करते है. उन्हें इंडस्ट्री में आये कुछ ही साल हुए है. अनुभव से ही काम में परिपक्वता आती है. पहले मुझे भी फिल्म न चलने, मीडिया के कुछ लिख देने पर खराब लगता था. पहले मैं ऐसा पौजिटिव सोच नहीं पाता था. समय के साथ-साथ समझदारी बढ़ी है.

सवाल-आपकी प्रोड्यूस की गयी फिल्म ‘गांधी माय फादर’ नहीं चली, ऐसे में आपने अपने आपको कैसे सम्भाला?

मैंने उस फिल्म को बहुत ही मेहनत से बनायी थी, पर दर्शकों ने उसे पसंद नहीं किया, पर उसे दो अवार्ड मिले. टीम के सब लोग इसके न चलने से परेशान थे, पर मैं अधिक घबराया नहीं, क्योंकि उस समय मैं फिल्म ‘स्लम डौग मिल्लेनियर’ की शूटिंग कर रहा था. उसमें मैंने बहुत कम काम किया, पर फिल्म औस्कर में चली गयी. मुझे एक मोरल बूस्ट मिला. ‘गांधी माय फादर’ की असफलता में मुझे ‘स्लम डौग मिल्लेनियर’ की सफलता हासिल हुई और मैंने बहुत कम दाम में मेरी फिल्म को हाल तक जाने दिया, जिससे मेरा तनाव कम हो गया.जीवन में ऐसा होता है और आप इस दौर से गुजर कर बहुत सारी बातें सीखते है.

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सवाल-क्या कभी राजनीति में आने की शौक रखते है ?

नहीं मुझे कोई शौक अभी नहीं है. मैं अपने परिवार, दोस्तों और काम के साथ बहुत खुश हूं, लेकिन कल क्या होने वाला है ये आज बताना संभव नहीं.

डैमोक्रेसी और भारतीय युवा

हौंगकौंग और मास्को में डैमोक्रेसी के लिए हजारों नहीं, लाखों युवा सड़कों पर उतरने लगे हैं. मास्को पर तानाशाह जैसे नेता व्लादिमीर पुतिन का राज है जबकि हौंगकौंग पर कम्युनिस्ट चीन का. वहां डैमोक्रेमी की लड़ाई केवल सत्ता बदलने के लिए नहीं है बल्कि सत्ता को यह जताने के लिए भी है कि आम आदमी के अधिकारों को सरकारें गिरवी नहीं रख सकतीं.

अफसोस है कि भारत में ऐसा डैमोक्रेसी बचाव आंदोलन कहीं नहीं है, न सड़कों पर, न स्कूलोंकालेजों में और न ही सोशल मीडिया में. उलटे, यहां तो युवा हिंसा को बढ़ावा देते नजर आ रहे हैं. वे सरकार से असहमत लोगों से मारपीट कर उन्हें डराने में लगे हैं. यहां का युवा मुसलिम देशों के युवाओं जैसा दिखता है जिन्होंने पिछले 50 सालों में मिडिल ईस्ट को बरबाद करने में पूरी भूमिका निभाई है.

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डैमोक्रेसी आज के युवाओं के लिए जरूरी है क्योंकि उन्हें वह स्पेस चाहिए जो पुराने लोग उन्हें देने को तैयार नहीं. जैसेजैसे इंसानों की उम्र की लौंगेविटी बढ़ रही है, नेता ज्यादा दिनों तक सक्रिय रह रहे हैं. वे अपनी जमीजमाई हैसियत को बिखरने से बचाने के लिए, स्टेटस बनाए रखने का माहौल बना रहे हैं. वे कल को अपने से चिपकाए रखना चाह रहे हैं, वे अपने दौर का गुणगान कर रहे हैं. जो थोड़ीबहुत चमक दिख रही है उस की वजह केवल यह है कि देश के काफी युवाओं को विदेशी खुले माहौल में जीने का अवसर मिल रहा है जहां से वे कुछ नयापन भारत वापस ला रहे हैं. हमारी होमग्रोन पौध तो छोटी और संकरी होती जा रही है. देश पुरातन सोच में ढल रहा है. हौंगकौंग और मास्को की डैमोक्रेसी मूवमैंट भारत को छू भी नहीं रही है.

नतीजा यह है कि हमारे यहां के युवा तीर्थों में समय बिताते नजर आ रहे हैं. वे पढ़ने की जगह कोचिंग सैंटरों में बिना पढ़ाई किए परीक्षा कैसे पास करने के गुर सीखने में लगे हैं. वे टिकटौक पर वीडियो बना रहे हैं, डैमोक्रेसी की रक्षा नहीं कर रहे.

उन्हें यह नहीं मालूम कि बिना डैमोक्रेसी के उन के पास टिकटौक की आजादी भी नहीं रहेगी, ट्विटर का हक छीन लिया जाएगा, व्हाट्सऐप पर जंजीरे लग जाएंगी. हैरानी है कि देशभर में सोशल मीडिया पोस्टों पर गिरफ्तारियां हो रही हैं और देश का युवा चुप बैठना पसंद कर रहा है. वह सड़कों पर उतर कर अपना स्पेस नहीं मांग रहा, यह अफसोस की बात है. देश का भविष्य अच्छा नहीं है, ऐसा साफ दिख रहा है.

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