त्यौहारों के सीजन में तरह-तरह के पकवान चखने को मन मचल ही जाता है. ऐसे में लोग सेहत को नजरअंदाज करते हैं. नतीजा यह होता है कि उत्सवी पकवान वजन के साथ-साथ पाचनतंत्र पर भी भारी पड़ते हैं. अगर उत्सवी पकवानों को चुनते या घर में बनाते समय थोड़ी सी सावधानी बरती जाए तो स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से बचा जा सकता है.
इस संबंध में फरीदाबाद स्थित एशियन इंस्टिट्यूट औफ मैडिकल साइंस के सीनियर कंसल्टैंट और एचओडी गैस्ट्रोऐंटरोलौजी के डा. राम चंद्र सोनी बता रहे हैं कि आप कैसे इस सीजन में खुद को स्वस्थ रख सकते हैं:
– ऐसे खाद्य पदार्थों को अपने भोजन में शामिल करें, जो हल्के और आसानी से पचने वाले होते हों.
– त्यौहारी स्नैक्स में सब्जियों और ड्राईफ्रूट्स इत्यादि को प्राथमिकता दें. ये पाचनशक्ति को दुरूस्त रखने के साथसाथ रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का भी काम करते हैं.
– हाइड्रेटेड रहने और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने के लिए खूब पानी पीएं. पानी पीने से पाचन में भी मदद मिलती है.
– वनस्पति तेलों को स्वस्थ विकल्पों के साथ स्वैप करें, जो आसानी से पचने योग्य हों. खाना पकाने के लिए जैतून का तेल, सूरजमुखी का तेल या फिर घी का प्रयोग कर सकती हैं.
– तैलीय खाद्य पदार्थों के सेवन से बचें. ये आप के पाचन को खराब कर सकते हैं, जिस से कई समस्याएं पैदा होती हैं.
– रिफाइंड, चीनी में कटौती करें, जो सूजन का कारण बन सकती है और खराब बैक्टीरिया के विकास को बढ़ावा देती है.
– उत्सवी सीजन में सुबह का नाश्ता फाइबरयुक्त खा-पदार्थों से बना हुआ ही लें.
जब आप अकेले सफर कर रहे होते हैं तो बैगपैक चोरी हो जाने की सम्भावना काफी बढ़ जाती है. आप ट्रेन में हों या बस में या किसी स्थानीय वाहन पर, आप कभी भी कहीं भी झपटमारों के शिकार बन सकते हैं. बेहतर होगा कि आप सफर के लिए ऐसे बैग का चुनाव करें जो कैरी करने में आसान होने के साथ ही चोरी होने से भी आसानी से बचाए जा सकें. आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही बैग्स के बारे में जो भीड़भाड़ में आसानी से छीने न जा सकें.
1. डोरी वाला बैगपैक
कोशिश करें ऐसा बैगपैक खरीदने की जिन में डोरियां लगी होती हैं. ये जिप से भी जुड़ी होती हैं. जब आप बैग बंद करें और सफर के लिए निकलें तो इन डोरियों को अपने कमर से बाँध लें. ताकि यदि कोई आप का बैग खोलने की कोशिश करेगा आप को पता चल जाएगा.
आप चाहें तो अपने बैग में एक ऐसा डिवाइस लगवा सकते हैं जिसे टच करते ही अलार्म बजना शुरू हो जाए. इस से कोई भी आप के बैग में हाथ लगाएगा तो आप सतर्क हो जाएंगे.
3. लौक करें बैगपैक
जब भी अकेले सफर पर निकलें तो बैग में लौक लगाना न भूलें. इस से बैग में रखे कीमती सामानों को कोई चुरा नहीं सकेगा. आप पूरे रास्ते निश्चिंत हो कर सफर कर सकेंगे और आप का सामान भी सुरक्षित रहेगा.
4. पैसे अलग-अलग जगह रखें
मान लीजिए आप कहीं घूमने निकले और अपना सारा सामान एक जगह रख कर उस जगह का आनंद लेने लगे. अचानक आप का ध्यान जाए कि सामान तो कहीं गायब हो गया. आप पूरी तरह से खाली हो गए. आप ने सारे रूपए अपने बैग में रखे थे. उस समय आप को पछतावा होगा कि सारा समान एक ही जगह क्यों रख दिया.
सीरियल ‘ये रिश्ता क्या कहलाता है’ जहां टीआरपी की रेस में अपनी पकड़ बनाए हुए है तो वहीं शो के मेकर्स ‘कार्तिक’ के लिए ‘कायरव’ की नफरत को कम करने के लिए नए-नए ट्विस्ट लाने को तैयार है. शो में आने वाले एपिसोड में ‘कार्तिक’ ‘कायरव’ की नफरत दूर करने के लिए नए-नए रास्ते निकालते हुए नजर आएगा. आइए आपको बताते हैं शो में क्या नया करेगा ‘कार्तिक’…
गोवा नही जा पाएगा ‘कायरव’
इससे पहले हमने आपको बताया था कि ‘कायरव’ ‘कार्तिक’ से बढ़ती नफरत के चलते ‘नायरा’ और अपने मामू ‘नक्क्ष’ से गोवा जाने के लिए कहता है, जिसमें ‘कार्तिक’ भी ‘कायरव’ को भेजने के लिए तैयार हो जाता है, लेकिन ‘नायरा’ किसी तरह ‘कायरव’ को गोवा जाने से रोक देती है.
जहां एक तरफ ‘वेदिका’ घर से दूर है तो वहीं ‘नायरा’ ‘कायरव’ के लिए गोयंका हाउस जाने के लिए तैयार है. साथ ही वह ‘कायरव’ के लिए ‘कार्तिक’ और अपनी बीच सब सही दिखाने को भी तैयार है.
‘कार्तिक’ अपने बेटे ‘कायरव’ को यूं ही अपने आपसे दूर नहीं जाने देगा. ‘कार्तिक’ बेटे ‘कायरव’ को अपने करीब लाने के लिए आखिरी कोशिश करेगा और सरदार का गेटअप में नजर आएगा. ‘कार्तिक’ कोशिश करेगा कि वो भेष बदलकर अपने बेटे के करीब आए, जिसके चलते वह प्लान करेगा कि वह ‘कायरव’ को उसका दूसरा पिता बताएगा और कोशिश करेगा कि उसे यह एहसास हो जाए कि ‘कार्तिक’ उससे कितना प्यार करता है.
बता दें, अपकमिंग एपिसोड में आप देखेंगे कि ‘नायरा और कार्तिक’ पिकनिक और फुटबौल मैच प्लान करेंगे , जिसके लिए वह गोयंका और सिंघानिया फैमिली फुटबौल मैच में साथ नजर आएंगे, वहीं ‘कार्तिक’ ‘कायरव’ की टीम में होगा लेकिन ‘कायरव’ के गुस्से के चलते वह ‘वंश’ की टीम में चला जाएगा. अब देखना ये है कि ‘कार्तिक’ ‘कायरव’ के दिल में अपनी नफरत को मिटा पाता है या नही. साथ ही ‘कायरव’ की नफरत मिटाने के दौरान क्या ‘नायरा-कार्तिक’ एक बार फिर साथ आ पाएंगे.
‘कैंसर’ शब्द न तो आंखों को सुहाता है, न ही कानों को अच्छा लगता है. यह विचारों और दृश्यों को नकारात्मक बना देता है, वास्तव में ऐसा नहीं होना चाहिये और इसका सरलता से निदान होना चाहिये. वर्तमान में मामलों की संख्या और मृत्यु दर के आधार पर भारत में ब्रेस्ट कैंसर सबसे आम है. लेकिन अच्छी खबर यह है कि यह सभी प्रकार के कैंसरों में सबसे अधिक रोकथाम योग्य है.
एक पुरानी कहावत है, ‘‘रोकथाम उपचार से बेहतर होती है’’, लेकिन हमने इस पर ध्यान नहीं दिया और हम तभी जागते हैं, जब समस्या उन्नत अवस्था में पहुँच जाती है. ब्रेस्ट कैंसर के कारकों, लक्षणों, उपचार, प्रबंधन और भ्रांतियों समेत इस पर जागरूकता फैलाने की प्रासंगिकता वर्तमान परिदृश्य में सबसे महत्वपूर्ण है, खासकर ऐसे समय में जब अधिक युवा महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की पहचान हो रही है और इस समस्या का प्रभाव शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में एक समान है.
ब्रेस्ट कैंसर आनुवांशिक, हार्मोनल और लाइफस्टाइल घटकों के कारण स्नत में असामान्य कोशिकाओं की अनियंत्रित एवं अत्यधिक वृद्धि है. हमारे तथाकथित आधुनिक समाज में जो पानी हम पीते हैं, जो खाना हम खाते हैं और जिस हवा में सांस लेते हैं, वह हानिकारक रसायनों से प्रदूषित है और इस कारण से ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं. कभी-कभी हमारी आदतों और जीवनशैली का भी इसमें योगदान होता है, जैसे मोटापा, अल्कोहल, व्यायाम नहीं करना, अत्यधिक तनाव, आदि.
यह अनुशंसा की जाती है कि आप अपने शरीर के वजन को स्वस्थ सीमा में रखें, खूब सब्जियां और फल खायें (एक दिन में 5 कप से अधिक), और ऐसा आहार लें, जिसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड्स की प्रचुर मात्रा हो. प्रतिदिन की औसत कैलोरीज में आपका संतृप्त वसा सेवन 10 प्रतिशत से कम होना चाहिये और वसा का सेवन 30 ग्राम प्रतिदिन तक सीमित हो, ट्रांस फैट्स, प्रसंस्कृत मांस, भुने हुए भोजन से बचें. प्रमाण बताते हैं कि सप्ताह में 5 या अधिक दिन 45-60 मिनट व्यायाम करने से इसका जोखिम कम होता है.
ब्रेस्ट कैंसर का पता लगानाः
‘‘इसका जल्दी पता लगाएं, हमेशा के लिये मात दें’’
जल्दी पता चलने से प्रभावी उपचार की संभावना भी बढ़ती है और ब्रेस्ट खोने से बचा जा सकता है. शीघ्र पता लगाने के विभिन्न तरीके हैं, जैसे ब्रेस्ट की खुद जाँच करना, ब्रेस्ट की चिकित्सकीय जाँच, स्क्रीनिंग मैमोग्राम्स. यह देखकर अच्छा लगता है कि कुछ रोगियों ने साहस दिखाते हुए खुद को बाहर की दुनिया के सामने लाये और ब्रेस्ट कैंसर पर विजय प्राप्त करने की अपनी कहानियों को सांझा कर दूसरे लोगों को प्रेरणा दी.
डॉ. आर. के. सग्गू, एमबीबीएस, एमएस, ब्रेस्ट एवं ऑन्को सर्जन, अपोलो स्पेक्ट्रा-करोल बाग से बातचीत पर आधारित
आप जब अकेले सफर कर रहे होते हैं तो केवल अपने सामान की चिंता करनी पड़ती है. अपना सामान ही ढोना होता है. किसी और की ज़िम्मेदारी नहीं रहती. आप जो करना चाहें कर सकते हैं. दूसरों की इच्छा पर निर्भर नहीं रहना पड़ता. इसीलिए अकेले सफर में कईं बातों का ध्यान रखना जरूरी होता है, लेकिन इसके फायदे भी कईं होते हैं.
1. अपने हिसाब से चलना संभव
दूसरों के साथ कहीं जाने में मुश्किल तब होती है जब आप को बीच पर घूमना पसंद हो मगर म्यूजियम जाना पड़े या फिर रात में घूमना पसंद हो मगर किसी और की मरजी के कारण सुबहसुबह उठ कर निकलना पड़े। इस तरह की कितनी ही बातें हैं जिस से अकेले घूमने का प्रोग्राम बना कर आप बच सकते हैं.
2. खुद की खोज कर पाते हैं
भले ही आप दूसरों के साथ कितना भी घूम लें मगर आप का व्यक्तित्व निखर कर बाहर नहीं आ पाता. आप को दूसरों की अपेक्षाओं के हिसाब से चलना पड़ता है. अकेले घूमते हुए आप खुद को समझ पाते हैं और अपनी रुचियों और ख्वाहिशों को पंख दे पाते हैं.
साथ में कोई अपना न हो तो हम खुदबखुद आसपास के माहौल का हिस्सा बनने की कोशिश करते हैं. अनजान लोगों से अपनेआप बातचीत करने लगते हैं. माहौल को किसी और के नजरिए से समझने के बजाय खुद उस का सामने से अनुभव कर पाते हैं.
4. ज्यादा कौन्फिडेंस
सोलो ट्रैवलिंग में आप को मिलने वाले हर सुखदुख के लिए आप खुद जिम्मेदार होते हैं। कोई गलती हुई तो उस का ठीकरा किसी और पर नहीं फोड़ सकते। अकेले घूमते हुए हम ज्यादा जल्दी सीखते हैं। खराब हालात में भी मजबूती से डटे रहने का आत्मविश्वास अकेले घूमने से बहुत जल्दी आता है।
5. अपना चीयरलीडर ढूंढे
जब आप लोगों को अपने ट्रिप के बारे में बताते हैं तो जो सब से ज्यादा एक्ससाइटेड होते हैं उन के साथ अधिक से अधिक समय बिताएं. उन का साथ आप का आत्मविश्वास बढ़ाएगा.
अकेले सफर पर जानें से पहले कईं बाते जरूरी होती है, जिनमें बजट बहुत जरूरी है. इसीलिए आज हम आपको अकेले सफर पर निकलने से पहले कैसे करें बजट प्लानिंग के बारे में बताएंगे…
1. बजट बनाएं
सब से पहले एक बजट बनाएं कि आप परिवहन, होटल और भोजन में कितना खर्च करेंगे. आप कितने रूपए ले कर चलेंगे और किस तरह की चीज़ें खरीदने में कितना लगाएंगे.
2. जाने की तैयारी
निकलने से पहले अपने वीसा रिक्वायरमेंट्स और करेंसी एक्सचेंज के बारे में क्लियर हो जाएं। अपने पासपोर्ट की एक्सपायरी डेट जांच लें. देख लें कि हर जरुरी चीज़ और डाक्यूमेंट्स रख लिए हैं या नहीं.
3. टिकट बुक करें
अपनी फ्लाइट/ ट्रेन की टिकट पहले से बुक कर लें. होटल तक जाने के लिए कैब भी पहले से बुक करें. आप को कहाँ ठहरना है इस के लिए भी पहले से रिसर्च कर सही होटल चुनें ताकि बाद में दिक्कत न हो. नए शहर में जिस के बारे में आप कुछ भी नहीं जानते, ठहरने की व्यवस्था करना काफी तनावपूर्ण होता है. मजबूरी में जब कोई और मनमाफिक जगह नहीं मिल रही होती है तो आप को जहां जगह मिलती है वहीं ज्यादा पैसे दे कर भी ठहरना पड़ता है. इस लिए बेहतर होगा कि फ्लाइट या ट्रेन में बैठने से पहले ही कम से कम पहली रात की ठहरने की बुकिंग अवश्य कर लें.
मैप के जरिए पहले से यह समझ कर निकलें कि आप अपना समय कैसे विभाजित करेंगे. कहांकहां घूमने जाएंगे और कितने समय में लौट कर वापस आएंगे. आप को इस बात का अंदाजा लगा लेना चाहिए कि सुरक्षा के मद्देनजर कौनकौन सी जगह जाना सही नहीं होगा.
5. महत्वपूर्ण नंबर फ़ोन में सेव कर लें
फोन में जरूरी एप्स डाउनलोड कर लें। होटल, टैक्सी ड्राइवर और घरवालों का नंबर अपने फ़ोन में सेव रखें. जब भी अकेले घूमने जाएं तो घरवालों से संपर्क बना कर रखें. जिस शहर में जा रहे हैं यदि वहां कोई परिचित है तो यह यह आप के लिए काफी फ़ायदेमंद हो सकता है.
6. एयरपोर्ट/ स्टेशन समय से पहले पहुंचे
जब आप कहीं के लिए निकलते हैं तो यह किसी को पता नहीं होता कि कहां ट्रैफिक जाम मिल जाए या कहां लंबी लाइन में खड़ा रहना पड़ जाए. इसलिए बेहतर होगा कि आप समय ले कर ही निकलें.
7. हल्का सामान रखें
व्हील्स वाले ब्रीफ़केस या पिट्ठू बैग्स में बहुत जरूरी सामान ही रखें. ज्यादा सामान ले कर अपना भार न बढ़ाएं. इस से आप को हर जगह कुली बुलाने का झंझट नहीं रहेगा.
8. पहले दिन शहर को जानें
अपने सफर के पहले दिन आप की प्राथमिकता शहर को जानने की होनी चाहिए। बस कनेक्शंस समझें. वहां के स्ट्रीट फूड्स और मार्केट्स के बारे में जानकारी लें.
9. अकेलों के लिए ठहरने के सस्ते विकल्प
काउचसर्फिंग
कितना अच्छा हो अगर आप किसी अनजान जगह घूमने जा रहे हों और वहां किसी स्थानीय व्यक्ति के घर में ठहरने को मिल जाए. उस परिवार के साथ आप एक ही साथ बैठ कर खाना खाएं। बातें करें। वह अपनी गाड़ी में आप को अपना शहर दिखाए और यह सब एकदम फ्री हो. यह संभव है काउचसर्फिंग से।
काउचसर्फिंग एक सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट है जिस के सदस्य एकदूसरे के घर में बतौर मेहमान ठहर सकते हैं या किसी यात्री को अपने घर ठहरा सकते हैं। मान लीजिये आप को कहीं जाना हो तो आप उस शहर में उपलब्ध काउचसर्फिंग सदस्यों को खोज सकते हैं. उन से संपर्क स्थापित कर सकते है और अगर वे अनुमति दें तो उन के यहाँ रुक भी सकते हैं। इस प्रकार किसी स्थानीय व्यक्ति के साथ रुकने पर उस नई जगह में भी अपनापन लगेगा और सहूलियत भी होगी। साथ ही महंगे होटलों में रुकने के पैसे भी बच जायेंगे।बस जरुरत है इस वेबसाइट पर अपना एक अकाउंट बनाने की.
अकेले घूमने वालों के लिए दुनिया के कई देशों में ठहरने के सस्ते विकल्प मौजूद हैं जिन्हें हॉस्टल कहा जाता है। इन हॉस्टलों में होटलों की तरह सुखसुविधाएं तो नहीं होतीं लेकिन साफसुथरे कमरे, बिस्तर, वॉशरूम, खाना बनाने के लिए छोटा सा किचन जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल जाती हैं। यही नहीं अच्छे होस्टलों में फ्री वाईफाई की सुविधा भी होती है। सोने के लिए किसी डॉरमेटरी की तरह एक कमरे में कई बेड हो सकते हैं। इस से आप को दूसरी जगहों के दिलचस्प लोगों से मिलने का मौका मिलता है. नई बातें जानने को मिलती हैं. किराया भी अधिक नहीं होता.
निर्माता निर्देशक करण जौहर की फिल्म ‘स्टूडेंट औफ द इयर 2’ से एक्टिंग क्षेत्र में कदम रखने वाली एक्ट्रेस तारा सुतारिया एक व्यावसायी परिवार की है. बचपन से ही तारा को क्रिएटिव फील्ड से लगाव था. 7 साल की उम्र में वह एक प्रोफेशनल सिंगर बन चुकी थी. उसे टीवी पर बड़ा ब्रेक शो ‘बिग बड़ा बूम’ से मिला. जिससे उसका नाम सबके बीच परिचित हुआ. इसके बाद उसे फिल्म मिली. वह एक अच्छी बैले डांसर भी है. स्वभाव से हंसमुख और स्पष्टभाषी तारा की फिल्म ‘मरजावां’ रिलीज पर है, जिसमें उसने एक मूक लड़की की भूमिका निभाई है.पेश है उससे हुई बातचीत के कुछ अंश.
सवाल-इस फिल्म की खास क्या है,जिससे आप उत्साहित हुई?
मरजावां मेरे लिए एक ख़ास फिल्म है, इसमें मेरी भूमिका भी बहुत अलग है, जो एक मूक लड़की जोया की है. केवल इशारों से वह बात करती है. फिल्म ‘स्टूडेंट ऑफ़ द इयर 2’ से ये अधिक चुनौतीपूर्ण फिल्म है. इसमें इमोशन, लव और ड्रामा को बहुत ही अच्छी तरीके से दिखाया गया है. इसके अलावा इसमें जो साईन लैंग्वेज है, उसे करना भी बहुत कठिन था. स्क्रिप्ट सुनने के बाद मैंने बहरे और गूंगे कम्युनिटी से मिली. उनकी भाषा को सही तरह से सीखकर फिर एक्टिंग किया. स्टूडेंट औफ द इयर 2 के समय मैंने मरजावां को साईन किया था. तभी से मैं इस फिल्म के लिए काम कर रही थी. शूटिंग के बाद कोच आकर मुझे इशारों में बातें करने का तरीका सिखाती थी. बहुत कठिन था ,लेकिन कोच की मदद से मैंने सीखा.
सवाल-आपकी फिल्म ‘स्टूडेंट औफ द इयर 2’ अधिक नहीं चली, क्या इसका असर आपकी कैरियर पर पड़ा?
इसे जज करना मुश्किल है, क्योंकि मुझे सीरीज की पहली फिल्म अच्छी लगी थी और दूसरी में भी सभी ने मेहनत की थी. मेरे लिए यह बेस्ट डेब्यू फिल्म थी और इसका फायदा मिलेगा ही. मैं हताश नहीं हूं. मैं किसी फिल्म के पैसे से अधिक उसकी क्रिएटिव आस्पेक्ट को देखती हूं. किसी भी फिल्म को करते समय मैं उस फिल्म की कहानी, सेट ,बैनर और अपनी काम को अधिक परखती हूं. इसके बाद जो होता है वह किसी के हाथ में नहीं होता.
सवाल-नौन फिल्मी बैकग्राउंड से आने के बाद फिल्मों में काम मिलना कितना मुश्किल होता है? परिवार का कितना सहयोग रहा ?
मुश्किलें है, लेकिन मैं लकी रही ,क्योंकि करण जौहर ने मुझे पहला काम दिया और मेरी कैरियर एजेंट रेशमा बहुत अच्छी है. इसके अलावा परिवार का सहयोग मुझे बहुत मिला है. मैं एक शाय पर्सन हूं. मैं किसी फ़िल्मी पार्टी में नहीं जाती. मुश्किलें आती है, पर मैं उससे आगे निकलना जान गयी हूं.
परिवार ने शुरू से बहुत सहयोग दिया है. जब मैं 5 साल की थी और माता-पिता को डांस और सिंगिंग की शौक के बारें में बताई, तो उन्होंने उसे पूरा करने के लिए बहुत मेहनत की. स्कूल के बाद गाड़ी में ड्रेस बदलकर डांस क्लास में जाते थे. उसके बाद सिंगिंग क्लास कर घर लौटते थे. उन दिनों से उन्होंने मुझे सारी सुविधाएं दी है, ताकि हम दोनों बहने ग्रो करें. हर माता-पिता को अपने बच्चे को एक्स्ट्रा करिकुलर करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. इसके अलावा वे हमारे अच्छे दोस्त भी है.
सवाल-क्या बचपन से आप एक्ट्रेस बनना चाहती थी?
जब मैं 5 साल की थी तबसे मैंने गाना शुरू कर दिया तह, इसके बाद बैले डांस सीखी थी. मैंने कभी सोचा नहीं था कि मैं एक्टिंग करुंगी, लेकिन जब मैं 15 साल की हुई तो मैंने थिएटर करना शुरू कर दिया और मुझे बहुत अच्छा भी लगने लगा था. इसी बीच मैं करण जौहर से मिली और फिल्म मिली.
सवाल-अन्तरंग दृश्य करने में कितनी सहज होती है?
मैं रियल लाइफ में शाय हूं और इंटिमेट सीन्स करने में सहज भी नहीं हूं, पर कहानी के हिसाब से कैमरे के आगे करने में संकोच नहीं करती.
सवाल-आपका नाम को स्टार के साथ जुड़ता है, इसे कैसे लेती है?
इसमें कोई भी सच्चाई नहीं है. पहली फिल्म के समय टाइगर श्रौफ के साथ जुड़ा और अब सिद्दार्थ मल्होत्रा के साथ. इसे मैं अधिक महत्व नहीं देती, जब भी किसी को स्टार के साथ काम करते है, तो एक अच्छी ट्यूनिंग बनती है, जिससे वे अच्छे दोस्त बन जाते है. इसके अलावा फिल्मों की शूटिंग महीनों तक चलती है, इससे साथ-साथ खाना पीना घूमना सब होता है, जो बहुत ही साधारण है.
सवाल-आपका नाम आदर जैन के साथ जुड़ रहा है, इसमें कितनी सच्चाई है?
ये सही है कि उसका साथ मुझे अच्छा लगता है और हम दोनों साथ-साथ घूमने जाते है. उसकी पसंद और मेरी पसंद एक जैसी है. उसे बाहर जाकर नयी-नयी फ़ूड को ट्राय करना पसंद है. वह मेरे लिए बहुत स्पेशल है. इसके आगे कुछ भी बताना मेरे लिए संभव नहीं.
सवाल-यूथ को क्या मेसेज देना चाहती है?
एक्टिंग के क्षेत्र में आने के लिए बहुत धीरज की जरुरत होती है. यहां कुछ भी रातों रात नहीं होता. इसके अलावा अगर आपको कोई फिल्म मिल भी गयी हो, तो आगे मिलेगी ही इसकी कोई गारंटी नहीं होती. इसलिए मैंने सिंगिंग, डांसिंग दोनों सीखे है, ताकि कुछ न कुछ करती रहूं. अपने आपको स्थापित करने के लिए बहुत मेहनत लगती है.
सवाल-अगर आपको कोई सुपर पावर मिले तो क्या बदलना चाहेंगी?
हम प्रोग्रेस कर रहे है, जैसा सब कहते है, पर मुझे ऐसा नहीं लगता. मैं स्कूल लेवल से लड़के और लड़कियों में भेद-भाव को ख़त्म करना चाहूंगी. लड़के और लड़कियां दोनों को एक दूसरे के प्रति रिस्पेक्ट होने की जरुरत है.
बौलीवुड के सलमान खान का पौपुलर रियलिटी शो बिग बौस 13 छठवां हफ्ते में पहुंच चुका है जहां कंटेस्टेट किसी भी तरह फिनाले तक पहुंचने के लिए मशक्कत कर रहे हैं. उन्हीं कंटेस्टेट में से एक है सलमान की फेवरेट शहनाज गिल. इन दिनों बिग बौस के घर में शहनाज गिल का काफी जलवा है, जिसके लिए वह फैंस के बीच काफी पौपुलर हो गई हैं. वहीं प्रोफेशनल लाइफ की बात करें तो शहनाज पंजाबी फिल्मों और गानों में नजर आ चुकी हैं, जिसमें वह ट्रेंडी सूट में नजर आ चुकी हैं. आज हम शहनाज के सूट फैशन की बात करेंगे, जिसे आप वेडिंग या पार्टीज में ट्राय कर सकती हैं.
1. सिंपल सूट है परफेक्ट
कई बार हम ब्राइट कलर पहनने से बचते हैं लेकिन शहनाज का ये डार्क स्काई ब्लू लौंग सूट के साथ पिंक सलवार और दुपट्टे का कौम्बिनेशन फेस्टिवल या पार्टीज के लिए परफेक्ट रहेगा. आप इस आउटफिट के साथ पिंक कलर के इयरिंग्स ट्राय कर सकते हैं. ये आपके लुक के लिए परफेक्ट औप्शन रहेगा. वहीं अगर आप हेल्दी हैं तो लौंग सूट आपके लिए अच्छा रहेगा. फुटवियर की बात करें तो आप भी शहनाज की तरह जूतियां ट्राय कर सकती हैं.
आजकल मार्केट में ब्राइट कलर काफी पौपुलर है. अगर आप भी ट्रैंड के साथ चलना पसंद करती हैं तो सिंपल प्लेन पर्पल कलर के कुर्ते और शरारा के साथ peach कलर का हैवी गुपट्टा ट्राय करें ये आपके लुक के लिए परफेक्ट औप्शन रहेगा.
3. लाइट कलर और हैवी ज्वैलरी का कौम्बिनेशन है परफेक्ट
अगर आप ब्राइट कलर की बजाय लाइट कलर ट्राय करना चाहती हैं तो शहनाज का ये सूट ट्राय करना न भूलें. सिंपस लाइट औफ यैलो कलर के साथ गोल्डन कौम्बिनेशन वाला हैवी कुर्ता और प्लेन सलवार के साथ नौर्मल दुपट्टा परफेक्ट है, साथ ही आप इसे ज्वैलरी के साथ ट्राय कर सकते हैं ये आपके लुक को सिंपल के साथ एलिगेंट बनाने में मदद करेगा.
अगर आप वेडिंग या पार्टी के लिए कुछ नया ट्राय करना चाहती हैं और आप नई नवेली दुल्हन हैं ये तो ये कौम्बिनेशन आपके लिए अच्छा है. सिंपल पिंक सूट के साथ रेड कौम्बिनेशन वाला हैवी दुपट्टा परफेक्ट है.
चेहरा आपकी पर्सनैलिटी का आईना होता है तभी तो इस पर ध्यान देना जरूरी होता है. लेकिन प्रदूषण, धूलमिट्टी, गंदगी और पसीना चेहरे की स्किन पर चिपक कर चेहरे के नेचुरल ग्लो को छीन लेते हैं और स्किन को डल बना देते हैं. इसलिए आपकी मुरझायी स्किन को पहले से भी अधिक खूबसूरत बनाने के लिए स्पावेक ने भारत की पहली सी बेस्ड आयुर्वेदा रेंज निकाली है, क्योंकि ये आपकी स्किन की केयर करते हैं और इनकी जापानी टेक्नॉलजी से बने प्रौडेक्ट आपकी स्किन को फ्रैश और ग्लोइंग बनाते हैं, जिसे देख हर कोई आपका दीवाना हो जाता है.
1. क्लींजिंग है जरूरी
प्रदूषण की मार चेहरे पर भी पड़ती है, जो चेहरे की चमक छीन लेती है इसलिए चेहरे पर निखार के लिए सिर्फ मेकअप लगाने से ही काम नहीं चलता है बल्कि चेहरे की स्किन को अंदर से साफ करना होता है ताकि फैस्टिवल में आपकी स्किन दिनभर फ्रैश नजर आए. इसी बात को ध्यान में रखते हुए स्पावेक आयुर्वेदा रिजूवनेट फेस क्लींजर लेकर आया है, जिसे चेहरे पर लगाते ही इससे निकलने वाले झाग एकदम शानदार क्रीमी फोम में बदल जाते हैं और स्किन की कंडीशनिंग करते हैं ताकि चेहरे पर मौजूद तेल, धूल और प्रदूषण साफ हो जाए और आपकी स्किन की खोई प्राकृतिक चमक व सुंदरता लौट आए.
चेहरे में नमी की कमी आपकी स्किन को मुरझाया हुआ सा बना देती है और वहीं सूर्य की तेज अल्ट्रावॉयलेट किरणें आपकी स्किन को जला देती हैं. लेकिन आप इन सब से बचना चाहती हैं तो स्पावेक की आयुर्वेद रिजूवनेट डे क्रीम लगाएं क्योंकि यह सूर्य के संपर्क में आई ड्राई व स्ट्रैस्ड स्किन को बेहतर बनाने का काम करती है और स्किन को एकसमान बनाती है ताकि आपकी स्किन से आपकी उम्र का पता न चल पाएं और आप ग्लो करने के साथ यंग भी नजर आए. इस डे क्रीम में स्क्कस्न३०क्क्न++ भी होता है. यह क्रीम स्किन में अंदर तक जाती है और स्किन में चमक पैदा करती है साथ ही स्किन में नमी बनाए रखने का काम करती है और उसे कोमल व टोंड बनाती है.
3. स्वस्थ आहार व अच्छी नींद
कहते हैं अगर आपका खानपान और सोने का समय ठीक हो तो इसका पता आपकी स्किन से चल जाता है और असर चेहरे पर झलकने लगता है. इसलिए अगर नेचुरल तरीके से शानदार स्किन चाहती हैं तो भरपूर नींद और हेल्दी खाएं ताकि स्किन निखरीनिखरी नजर आएं.
4. ये गुण हैं खास
आयुर्वेदा क्लींजर और डे क्रीम में बहुत सारे गुणों से भरपूर हैं और इनमें बहुत ही खास तरह के उत्पादों का उपयोग किया है.
– शैवला (लामिनारिया जैपोनिका एक्सट्रैक्ट) एक सी वीड का अर्क है जो स्किन की गहराई में जाकर प्राकृतिक रूप से हाइड्रेट करता है.
– जलमुस्तम (कप्पाफाइकस अल्वारेजि अर्क) एक अन्य सी वीड है जो अंदर से स्किन में नयापन लाता है और प्राकृतिक सुंदरता को निखारता है, जो कि स्किन को नई एवं ताजा रखने की अपनी क्षमता को बढ़ाता है.
– समुद्र लावणा (समुद्री नमक) स्किन को भीतर से पुनर्जीवित और मॉइस्चराइज करता है.
– समुद्र का किनारा इन अवयवों से भरपूर हैं और इन्हें कोसे की उच्च तकनीक सुविधाओं पर संसाधित किया जाता है ताकि उनकी अधिकतम क्षमता को बाहर लाया जा सके, जिससे स्पावेक आयुर्वेदा रेंज भारतीय परंपरा और जापानी विज्ञान का सही मिश्रण बन सके.
अगर फेस्टिवल में कुछ टेस्टी और हेल्दी अपनी फैमिली को खिलाना चाहते हैं तो स्टफ्ड भिंडी एकजम परफेक्ट है. आज हम आपको अपनी फैमिली के लिए स्टफ्ड भिंडी की खास रेसिपी बताएंगे, जिसे आप अपनी फैमिली के खिला सकते हैं.
भिंडी को धो व पोंछ कर ऊपर व नीचे का हिस्सा थोड़ा सा काट दें. प्रत्येक भिंडी में लंबाई में चीरा लगाएं व हलके हाथों से अंदर के सारे बीज निकाल दें. 1 चम्मच तेल गरम कर के प्याज, लहसुन व अदरक भूनें और फिर सभी सूखे मसाले मिला कर 1 मिनट और भूनें. भुने चने का आटा मिलाएं व नमक डालें. मसाले को ठंडा कर के प्रत्येक भिंडी में भर दें. नौनस्टिक तवे पर बचा तेल गरम कर के भिंडियों को गलने और लाल होने तक पकाएं.